एनआईए ने पाकिस्तान से व्यापार बंद करने की सिफारिश की

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने सिफारिश की है कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर पाकिस्तान के साथ व्यापार बंद किया जाना चाहिए। एनआईए ने गृह मंत्रालय को भेजे अपनी सिफारिश में कहा है कि जम्मू कश्मीर के पुंछ और उरी से होने वाले व्यापार को तुरंत बंद किया जाना चाहिए क्योंकि सीमा पार व्यापार के बहाने पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए धन भेजते हैं। बता दें कि भारत पाकिस्तान के बीच अच्छे रिश्ते बहाल करने के लिए साल 2008 में उरी-पुंछ समेत कुछ जगहों से पाकिस्तान के साथ व्यावसायिक रिश्तों की शरूआत की गई थी। इस कदम का मकसद था कि जम्मू-कश्मीर के व्यापारी कम दूरी पर पाकिस्तान से बिजनेस कर सकें। लेकिन बाद में पता चला कि आतंकी और आतंकी समूह इस बिजनेस गतिविधि का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग के लिए कर रहे हैं।
हाल ही में हुर्रियत के कुछ नेताओं को भी केन्द्रीय जांच एजेंसी ने टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसमें दूसरे अलगाववादी संगठन के नेता भी शामिल थे। इन नेताओं ने एक स्टिंग ऑपरेशन में स्वीकार किया था कि उन्हें हवाला के माध्यम से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से फंडिंग मिल रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक, जम्मू एवं कश्मीर में सीमा पर व्यापार की आड़ में आतंकवाद और कश्मीर में हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके पीछे पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन और एजेंसियां काम कर रही हैं। एनआईए का मानना है कि पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय में घाटी में हवाला के जरिए काफी धन पहुंचाया है।
भारत पाकिस्तान के बीच होने वाले व्यापार में 21 वस्तुओं की सूची तैयार की गई थी, जिनका व्यापार होना था। इनमें चमड़े का सामान, सूखे मेवे, सर्जिकल उपकरण, कपास, प्लास्टिक, सूखी सब्जियां, कृत्रिम फाइबर, टायर, अशुद्ध गहने, जस्ता, तेल के बीज और बुने हुए कपड़े जैसी चीजें शामिल थी। एक आंकड़े के मुताबिक रोजाना दोनों देशों के बीच 40 से 50 ट्रक सामान लेकर गुजरते हैं।

ट्रेन की टिकट सस्ती होने के आसार

रेलवे में खाने को लेकर आए दिन कोई न कोई शिकायत मिलती रहती है। ऐसे में बहुत से यात्री चाहते थे कि टिकट के साथ खाना लेना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। अगर आप भी ऐसे लोगों में से हैं जो ट्रेन का खाना पसंद नहीं करते हैं, तो आपके लिए रेलवे एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया है।
खाने के नहीं देने होंगे पैसे बुधवार को रेलवे ने घोषणा करते हुए कहा है कि अब आपको ट्रेन टिकट खरीदते समय खाने के पैसे देना जरूरी नहीं होगा। यह नया नियम 26 जुलाई से प्रभावी हो चुका है। इसका फायदा सबसे अधिक उन लोगों को होगा, जिन्हें ट्रेन का खाना पसंद नहीं आता था और वह उसका पैसा नहीं देना चाहते थे। अब आप टिकट बुक करते समय चाहें तो खाने का पैसा दें या चाहें तो खाने को टिकट से हटा दें, आपकी मर्जी।
इन ट्रेनों में मिलेगी सुविधा रेलवे ने कैटरिंग को फिलहाल 31 प्रीमियम ट्रेनों में वैकल्पिक बनाया है। इन 31 प्रीमियम ट्रेनों में 7 राजधानी, 6 शताब्दी और दूरंतो शामिल हैं। फिलहाल रेलवे की तरफ से उन 31 प्रीमियम ट्रेनों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन ट्रेनों की टिकटें सस्ती हो जाएंगी, क्योंकि आपके लिए खाने के पैसे देना वैकल्पिक कर दिया जाएगा।
ये भी होगा बदलाव कैटरिंग सेवा को बेहतर बनाने के लिए आईआरसीटीसी यात्रियों से उनके फीडबैक लेगी। इसके अलावा, भारतीय रेलवे के तहत चल रहे 100 किचन को आईआरसीटीसी को दे दिया जाएगा और साथ ही 20 नए मॉडर्न किचन भी खोले जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि आईआरसीटी के ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दी जा सकें।

ट्रेन के खाने में निकली छिपकली, यात्री की तबीयत हुई खराब

ट्रेनों में यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन की क्वॉलिटी की तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब एक यात्री को परोसी गई वेज बिरयानी में छिपकली पाई गई। इसके बाद यात्री की तबीयत भी खराब हुई, जिसकी वजह से उसे दवा लेनी पड़ी। इसके बाद बैकफुट पर आए रेलवे बोर्ड ने ट्रेन में भोजन सप्लाई करने वाले ठेकेदार का ठेका रद्द करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही अब रेलवे ने चुनींदा राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनों में यात्रियों को विकल्प देने का फैसला लिया है कि अगर यात्री चाहें तो रेलवे का भोजन लेने से इनकार कर दें। ऐसी स्थिति में टिकट जारी करते वक्त पैसेंजर से भोजन का पैसा नहीं लिया जाएगा।
ट्रेन में खाने में छिपकली मिलने का यह मामला सीएजी की रिपोर्ट के एक सप्ताह के भीतर सामने आया है। पिछले ही सप्ताह सीएजी की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया था कि रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में परोसे जाने वाले खाने की क्वॉलिटी कितनी खराब है। हालांकि, इसके बाद रेलवे ने दावा किया कि वह सुधार के लिए कदम उठा रहा है लेकिन मंगलवार को बिरयानी में छिपकली निकलने का मामला सामने आ गया।
इंडियन रेलवे के सूत्रों के मुताबिक बिरयानी में छिपकली मिलने का मामला पूर्वा एक्सप्रेस में सामने आया। ट्रेन नंबर 12303 के फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे वकील संतोष कुमार सिंह ने अपने लिए वेज बिरयानी का ऑर्डर किया। उन्हें बिरयानी में छिपकली दिखी। इसके बाद उन्होंने कैटरिंग स्टाफ को इसकी जानकारी दी और बिरयानी की फोटो भी ट्वीट करते हुए रेलमंत्री सुरेश प्रभु को टैग कर दी। बाद में इस यात्री की तबीयत खराब होने पर उसे दवा भी दी गई।
इस मामले के सामने आने के बाद रेलवे ने इस ट्रेन में खाना परोसने वाले कांट्रैक्टर आर.के. असोसिएटस का ठेका रद्द करने का फैसला किया है। महत्वपूर्ण है कि इसी ठेकेदार के खिलाफ पिछले साल भी खराब खाने की शिकायतें आई थीं। उस वक्त रेलवे ने इस पर क्रमश 10 लाख और साढ़े सात लाख रुपये का जुर्माना ठोंका था। अब रेलवे अपने बचाव में दावा कर रही है कि उसने भोजन की क्वॉलिटी को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है। इसी वजह से उसने इस साल जनवरी से अब तक ट्रेनों में खाना परोसने वाले 12 ठेकेदारों के ठेके रद्द किए हैं।

हार के बाद कौन सा दांव खेल रहे हरीश रावत

देहरादून।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा चुनाव ने भले ही मायूस किया हो, लेकिन उनके हौसले अभी पस्त नहीं हुए हैं। दावतों का सिलसिला जारी रख वह खुद को सूबे की सियासत के केंद्र में बनाए रखने का कोई मौका चूकने को तैयार नहीं हैं। लेकिन, दो माह के भीतर उनकी दावतों का अंदाज कुछ अलहदा ही है।
विधानसभा चुनाव में हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर की जिन दो सीटों पर मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने जो दांव खेला था, उसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दून शहर से दूरी बनाकर पहाड़ की तलहटी को अपने आशियाने के लिए चुना। इसके बाद पहाड़ को केंद्र में रखकर उनकी दावतों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उससे पार्टी के बाहर और भीतर उनके प्रतिद्वंद्वी भी खासे सकते में हैं। हरदा सुर्खिया बटोरने में उनसे कहीं आगे हैं।
पहाड़ के उत्पादों को उनकी दावतों में मिल रही तरजीह को उनके पहाड़ को केंद्र में रखकर बुने जा रहे सियासी एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। इस एजेंडे के निशाने पर वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव भी हैं। विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जा चुका है, लिहाजा हरीश रावत यह जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में उनकी सियासी हैसियत उनकी सक्रियता से ही साबित होनी है। ऐसे में हरदा अभी से फूंक-फूंककर कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। पहाड़ की सियासत में रिवर्स पलायन को उनकी रणनीति का ही हिस्सा माना जा रहा है। इसके बूते ही पलायन से शहरों में उभर गए मतदाताओं के पहाड़ों पर भी उनकी नजरें टिकी हैं।

अजीब नाम से क्या पर्यटक डर जाते है?

नाम में क्या रखा है ? शैक्सपीयर ने भले कहा हो कि गुलाब का नाम कुछ और रख देने से उसकी खुशबू थोड़े ही बदल जायेगी ? लेकिन नैनीताल के विधायक संजीव आर्य शैक्सपीयर के इस कथन से सहमत नहीं हैं। वे नैनीताल की कुछ झीलों के नाम तो बदलना चाहते हैं जिनके नाम अजीब हैं। जैसे यहां एक झील का नाम है-‘सुसाइड प्वाइंट’, तो दूसरी ‘फांसी गधेरा’ कहलाती है तो तीसरी सादिया (नष्ट हो रही ) ताल। आर्य इस बारे में सरकार को पत्र लिख रहे है कि इन नामों के सुनने से पर्यटकों को धक्का लगता है। गौरतलब हो कि पिछले साल भी कुमाऊ में ही चोरगलिया का नाम बदले जाने का अभियान चला था।
विधायक संजीव आर्य का कहना है कि कुछ पर्यटक स्थलों के नाम सुनकर पर्यटकों को अजीब लगता है। विधायक ने जनता से इन और ऐसे नामों की जगह वैकल्पिक नामों के सुझाव मांगें हैं। उनका कहना है कि इनमें बहुत से नाम तो अधिकृत भी नही हैं। जैसे कि सुसाईड प्वाइंट नाम तो कुछ गाइडों और घोड़े वालों ने पर्यटकों के बीच केवल उत्सुकता पैदा करने को रख दिया और इसके समर्थन में मन गढ़ंत कहानियां तक सुनानी शुरू कर दी। जिसके पीछे कोई तर्क नहीं है। जबकि इस स्थल का नाम यहां की साहसिक संभावनाओं के दोहन को होना चाहिये। उन्होने बताया कि कुछ साल पहले जब सादिया ताल का सौन्दर्यीकरण किया गया तो इसका नाम सरिता ताल रखा गया था लेकिन प्रचलन में अभी सादिया ताल ही है। विधायक संजीव आर्य ने नगर पालिका से भी इनके नामकरण से संबंधित रिकार्ड खंगालने को कहा है ताकि इसके बाद मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री से इस बारे मे बातचीत की जा सके।
अलबत्ता, इतिहास में रूचि रखने वाले जानकारों का कहना है कि सुसाइड प्वाइंट नाम तो कभी अस्तित्व में ही नही रहा लेकिन बाकी दो का नाम इतिहास में है और उनका नाम न ही बदला जाये, तो अच्छा होगा। उदाहरण को फांसी गधेरा प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों के रोहिलाओं को फांसी दिये जाने की याद दिलाता है जिन्होने 1857 में हल्द्वानी पर हमला किया था। इसका नाम बदलने का अर्थ होगा, इतिहास को भुलाना। इसी प्रकार सादिया ताल मूलतः वेटलेंड और क्षेत्र के जल प्रबंधन का हिस्सा है। यहीं पर कुमाऊ कमिश्नर सर हेनरी रैमजे ने पहली बार 1856 में आलू की खेती शुरू कराई थी।

वीकेंड पर भीड़ बढ़ने से कारोबारियों की चांदी

ऋषिकेश।
साहसिक पर्यटन का लुत्फ उठाने के लिए पर्यटकों की भीड़ तेजी से बढ़ रही है। रविवार को गंगाघाटी के होटल व कैंप पर्यटकों से पैक रहे जिससे चारधाम यात्रा पर जाने वालों को विश्राम के लिए भटकना पड़ा। बीते शनिवार उन्हें होटल धर्मशालाओं में स्थान न मिलने पर खुले में रात गुजारनी पड़ी। रविवार को चार हजार से अधिक पर्यटकों ने राफ्टिंग का लुत्फ उठाया। करीब चार सौ अधिक राफ्टें गंगा में उतारनी पड़ीं।
स्वर्गाश्रम-नीलकंठ व ऋषिकेश-कौड़ियाला के बीच जंगल कैंपों पर पर्यटकों ने बंजी जम्पिंग, बैलून, ट्रैकिंग, पेंटवॉल और पंचकर्म का आनंद उठाया। गर्मी से निजात पाने के लिए प्राकृतिक झरनों पर भी भीड़ रही। भीड़ बढ़ने पर गंगाघाटी के छोटे-बड़े व्यापारी का कारोबार भी बढ़ा है।
बीच कैंप मालिक भगवती प्रसाद बताते हैं कि स्कूलों में छुट्टियां पड़ने के बाद एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से सबसे अधिक पर्यटक साहसिक पर्यटन का मजा लेने ऋषिकेश आते हैं। इसलिए जून तक पर्यटकों की भीड़ रहेगी। कार्यवाहक पर्यटन अधिकारी दीपक कुमार बताते हैं कि रविवार को बड़ी संख्या में पर्यटन घाटी पहुंचे। दिल्ली और हरियाणा से अधिक पर्यटक आए।

गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प

ऋषिकेश।
मंगलवार को गंगा सप्तमी पर गंगा विचार मंच, भाजपा कार्यकर्ता और स्कूली छात्रों ने त्रिवेणी घाट परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया। मंच की प्रदेश सह संयोजक नगीना रानी के नेतृत्व में डोईवाला और ऋषिकेश के सैकड़ों कार्यकर्ता व रेडिएंट पब्लिक स्कूल के छात्रों ने गंगा घाटों की सफाई की। नगीना रानी ने बताया कि गंगा विचार मंच द्वारा आज पूरे देश में गंगा अवतरण के दिन को संकल्प दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश मंत्री व परवादून के प्रभारी सुनील उनियाल गामा ने बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया। रेडिएंट पब्लिक स्कूल के छात्रों व कार्यकर्ताओं ने आस्था पथ पर भी सफाई अभियान चलाया।
सफाई अभियान में नेशनल मिशन स्वच्छ गंगा नई दिल्ली के राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. संदीप मेहरा, वरिष्ठ नेता रामेश्वर लोधी, महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आशा कोठारी, पूर्व दायित्वधारी संदीप गुप्ता, नगर पालिका डोईवाला के अध्यक्ष कोमल कन्नौजिया, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी सजवान, कुसुम अग्रवाल, नगर पालिका ऋषिकेश के सफाई निरीक्षक सचिन रावत व अरविन्द डिमरी, ग्राम प्रधान परमिन्दर सिंह, कपिल गुप्ता, विनित लोधी, रेडिएंट पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य हंसी अधिकारी, मंजू शर्मा, अनीता सिंह, सुरेन्द्र कौल, चरणजीत सिंह, सुष्मिता थापा, रूपचंद, संजीव लोधी, प्रवीण आदि मौजूद रहे।

हिमालयी राज्य में उद्यमिता कौशल से बढ़ेगा पर्यटन

ऋषिकेश।
शनिवार को कार्यशाला के दूसरे दिन दो सत्रों का आयोजन किया गया। पहला सत्र पर्यटन एवं आतिथ्य सत्कार उद्योग के संयोजन और दूसरा सत्र हिमालयी पर्यटन में सामुदायिक सहभागिता पर आधारित था। हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट मसूरी के निदेशक डॉ. एसपी चमोली, ईक्रो ट्रैवेल्स दिल्ली के निदेशक रवि गुसाईं, ग्रीन एजुकेशन गुजरात के निदेशक विरेन्द्र रावत, केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के कुलपति प्रो. जेएल कौल ने कार्यशाला को संबोधित किया। बताया कि हिमालयी राज्यों में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उद्यमिता कौशल को विकसित किया जाता है तो पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में सफलताएं निश्चित मिलेंगी।
विशेषज्ञों ने पर्यटन के क्षेत्र में उद्यमिता बढ़ाने के टिप्स भी दिए। जेट फ्लीट के बिजनेस हेड महिपाल रावत, इंडो गंगा होलीडेज के किरन टोडरिया, पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो. बीबी गोयल व डॉ. संजय महर ने भी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए अपने विचार रखे। दूसरे सत्र में सेवानिवृत आईएएस कमल तावरी, डॉ. सेवांग नामगेल, प्रो. सुषमा चुग, जीवन लाल वर्मा ने हिमाचल, लद्दाख, भूटान की तर्ज पर पलायन रोकने और रोजगार सृजन के लिए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने की वकालत की। विभिन्न एनजीओ और पर्यटन व्यवसायियों ने कार्यशाला में भाग लिया।

हिमालयन एमटीबी साईकिलीग प्रतियोगिता में 16 देश कर रहे प्रतिभाग

नैनीताल।
नैनीताल में आज पर्यटन विभाग के तत्वाधान में हिमालयन एमटीबी साईकिलीग प्रतियोगीता का शुभारम्भ करा गया। नैनीताल में एमटीबी साईकिलीग प्रतियोगीता का तीसरी बार आयोजन करा जा रहा है। इस बार प्रतियोगीता में 16 देश के प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे है। आज ट्रायल रेस कराई गई जिसमें से 50 प्रत्याशी को रेस के लिए चुना जाएगा। नैनीताल से करीब 884 किमी की यात्रा के लिए कल रवाना होगे। जेा 8वे दिन मंसुरी पहुचेगे और देहरादुन में प्रदेश के मुख्य मंत्री विजय प्रतिभागीयो को पुरूस्कार देगे।
प्रदेश में माउनटेन बाईकिग को बढाने के उद्देश्य से पर्यटन विभाग द्धारा प्रदेश में इस तरह के आयोजन करे जा रहे है ताकि लोगो में साईकिलीग के प्रति रूझान बडे और उत्तराखंड को अन्तराष्ट्रीय मानचित्र में साईकिलीग के क्षेत्र में पहचान मीले। नैनीताल में आयोजित होने वाली इस बाईकिग प्रतियोगीता में देश भर के साथ साथ 16 अन्य देश जैसे यु एस ए, कनाडा, मंगोलिया, श्रीलंका समेंत नेपाल आदि विदेशी प्रतिभागी भी प्रतिभाग कर रहे है। प्रतियोगीता को लेकर विदेशी ही नही बल्की देशी प्रतिभागी भी उत्शाहीत दिखाई दिए देशी साईकिलीस्ट का कहना है कि इस तरह के आयोजन होने से उन्हे अन्तराष्ट्रीय स्तर के साईकिलीस्टो के साथ प्रतिभाग करने का मौका मिल रहा है
पर्यटन विभाग के द्धारा स्थानीय लोगो में साईकिलीग के रूझान को बढाने और पर्यटन को बढावा देने के उद्देश्य से इस प्रतियोगीता का आयोजन करा है जिस्से आने वाले समय मे स्थानीय लोगो के रोजगार के अवसर भी प्राप्त होगे साथ ही प्रतियोगीता के साथ साथ बात अगर उत्तराखंड की करे तो उत्तराखंड की भौगोलीक परिस्थीती माउनटेन बाईकिग के लिए उपयुक्त होगी और इस तरह के आयोजन उत्तराखंड में माउनटेन बाईकिग के प्रति लोगो का रूझान बढे। जिस्से देश ही नही बल्की राज्य का भी नाम अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पहुचे। बात के माउनटेन बाईकिग रेस की दूरी की तो इस बार 884 किमी का लम्बा रूठ होगा जो की एशिया का सबसे लम्बा रूठ होगा। साथ ही इस प्रतियोगीता को यूएस आई मे रजिस्टेशन भी मिल सकता है।

20 मई से 19 जून तक द्रोणागिरी ट्रैक के हमराही बनेंगे पर्यटक

ऋषिकेश।
मंगलवार को नगर पालिका के स्वर्ण जयंती सभागार में गढ़वाल मंडल के अपर आयुक्त हरक सिंह रावत ने पर्यटन व गढ़वाल मंडल विकास निगम के अधिकारियों की संयुक्तरुप से बैठक ली। बताया कि पूर्व में मुख्यमंत्री ने तुंगधार में द्रोणागिरी ट्रैक को विकसित करने की घोषणा की थी। इसी के मद्देनजर 20 मई से 19 जून तक पर्यटन व जीएमवीएन के संयुक्त तत्वाधान में द्रोणागिरी ट्रैक पर ट्रेकिंग संचालित की जा रही है। जिसके लिए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन प्रारंभ कर दिये गये है। न्यूनतम खर्चें पर ट्रैकिंग को लेकर शासन तैयारी कर रहा है। जिसका बुधवार को निर्धारण कर लिया जायेगा।
बताया कि शासन ने द्रोणागिरी ट्रैक ऑफ ईयर के नाम से घोषित किया है। इससे पहले वर्ष 2015 में हिटो केदार व 2016 में केदारनाथ-तुगंनाथ टै्रक को ऑफ ईयर घोषित किया था। अपर आयुक्त ने जानकारी दी कि एक दल में 20 से 25 सदस्यों को शामिल किया जायेगा। जिसका अंतिम निर्धारण बुकिंग आने पर ही होगा। देशी व विदेशी साहसिक पर्यटकों को लुभाने के लिए व राज्य के ट्रैकिंग स्थलों को विकसित करने के लिए प्रयास किये जा रहे है। जिससे गांव के लोगों को रोजगार मिले। तिब्बत बोर्डर के सभी गांवों को ट्रेकिंग से जोड़ने पर भी कार्य किया जा रहा है।
ट्रैकिंग स्थलों के प्रचार प्रसार का जिम्मा पर्यटन व जीएमवीएन को दिया गया है। बताया कि ऋषिकेश से जोशीमठ, जोशीमठ से जुमा गांव, जुम्मा गांव से रुइंग, रुइंग से द्रोणागिरी ट्रैकिंग के पड़ाव रहेंगे। जुम्मा गांव से बागनीग्लेशियर लगभग 11 किमी है। द्रोणागिरी पर्वत, नंदी कुंड ट्रैक का हिस्सा रहेंगे। द्रोणागिरी टै्रक पर ट्रैकिंग दल 50 किमी की दुरी तय करेंगे। बैठक में जीएमवीएन के महाप्रबंधक पर्यटन बीएल राणा, सहायक महाप्रबंधक यात्रा तुलसी सिंह बिष्ट, सहायक प्रबंधक पर्यटन आवास गृह सुशील पंवार, अपर आयुक्त के पीएस वीरेन्द्र गुसांई आदि मौजूद थे।