आगरा की पूर्व मेयर बेबी राम मौर्य बनी उत्तराखंड की राज्यपाल

उत्तराखंड के सातवें राज्यपाल के रूप में उत्तर प्रदेश की बेबी राम मौर्य को नियुक्ति मिली है। बेबी राम मौर्य यूपी में भाजपा नेता होने के साथ ही वहां महिला आयोग से जुड़ी हुयी है। विदित हो कि बेबी राम मौर्य आगरा में वर्ष 1995 में मेयर रह चुकी है।

बेबी रानी मौर्य को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है। उत्तराखंड में केके पाल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बेबी राम मौर्य को राज्यपाल बनाया गया। वहीं लगभग साढ़े तीन दशक बाद जम्मू एवं कश्मीर को राजनीतिज्ञ राज्यपाल मिला है। बिहार के मौजूदा राज्यपाल सत्यपाल मलिक को जम्मू एवं कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। चार राज्यपालों के राज्य बदलने के साथ ही तीन नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं। नए नियुक्त राज्यपालों में उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन, सत्यदेव नारायण आर्य और बेबी रानी मौर्य शामिल हैं।

वर्ष 1984 में जगमोहन के राज्यपाल बनने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में कभी किसी राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नियुक्त नहीं किया गया। आतंकवाद से ग्रस्त और कानून-व्यवस्था की समस्या से जूझ रहे राज्य में सेवानिवृत नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों को ही राज्यपाल नियुक्त किया जाता रहा है। 31 अगस्त को 10 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे एनएन वोहरा पूर्व नौकरशाह हैं। साढ़े तीन दशक बाद राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नियुक्त कर केंद्र सरकार ने राज्य में राजनीतिक प्रक्रिया को तेज करने का संकेत दिया है।

लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल्द ही जम्मू एवं कश्मीर में पंचायतों और स्थानीय निकायों का चुनाव कराने की घोषणा की थी। इससे निचले स्तर पर आम जनता को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलेगा। केंद्र की ओर से नियुक्त वार्ताकार पूर्व आइबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा पहले से राज्य में सभी वर्गो से संपर्क कर बातचीत का सिलसिला शुरू कर चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि सत्यपाल मलिक आतंकवाद और अलगाववाद से त्रस्त आम लोगों की आवाज को तवज्जो देंगे।

सत्यपाल मलिक की जगह अब उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन बिहार के राज्यपाल होंगे। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नजदीकी माने जाते रहे हैं और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से पहले लखनऊ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। सत्यदेव नारायण आर्य को हरियाणा का नया राज्यपाल बनाया गया है। हरियाणा के मौजूदा राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को त्रिपुरा का राज्यपाल बनाया गया है और वहां के मौजूदा राज्यपाल तथागत राय को मेघालय भेज दिया गया है। जबकि मेघालय के मौजूदा राज्यपाल गंगा प्रसाद को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।

अटल जी के जाने से एक युग का अंत हो गयाः नमो

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरूवार को निधन हो गया। भारत रत्न अटल जी का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली रहा कि हर कोई चाहे वह कोई भी राजनैतिक संगठन हो या फिर कोई आम नागरिक। सभी को उनके जाने का गहरा सदमा लगा है। उन्होंने दिल्ली स्थित एम्स में अंतिम सांसे ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के देहावसान से उत्तराखंड भी शोक में डूब गया। शासन ने सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। श्रद्धांजलि स्वरूप शुक्रवार राज्य में सरकारी कार्यालय व शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर कहा कि उनका जाना पिता के खोने जैसा है। मां भारती के सच्चे सपूत थे अटल जी। उनका विराट व्यक्तित्व था। अटल जी के जाने से एक युग का अंत हो गया है।

वाजपेयी के निधन पर प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर ने कहा, मुझे ऐसा लगता है कि एक साधु पुरुष चला गया है। वह अच्छे लेखक और कवि थे। लोग उनका भाषण सुनने के लिए तरसते थे, वह एक सच्चे और अच्छे इंसान थे। उन्होंने कहा, वाजपेयी के निधन पर मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा।

वे पिछले दो महीने से ज्यादा समय से एम्स के बिस्तर पर थे और मौत से उनकी ‘ठनी’ हुई थी, हालांकि आज शाम पांच बजकर पांच मिनट पर उन्होंने अलग रास्ता चुना और ‘काल के कपाल पर लिखकर’ वे इस दुनिया से कूच कर गए। उनके खुद के शब्दों में ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं’।

तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी अस्वस्थता के चलते लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर थे। वे डिमेंशिया नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। 2009 से ही वे व्हीलचेयर पर थे, देशवासियों ने उन्हें अंतिम बार 2015 में 27 मार्च को देखा, जब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भारत माता के इस सच्चे सपूत को भारत रत्न से सम्मानित करने उनके आवास पर पहुंचे।

दो महीने पहले वाजपेयी की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। यूरिन में इन्फेक्शन के चलते 11 जून को उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी और देश की अलग-अलग पार्टियों के नेता और अनेक गणमान्य हस्तियां उनका हालचाल जानने पहुंचीं. उनके समर्थक लगातार उनकी सलामती की दुआ कर रहे थे, हालांकि कुदरत को शायद कुछ और मंजूर था।

अटल बिहारी वाजपेयी देश की सक्रिय राजनीति में पांच दशक से ज्यादा समय तक रहे। वे देश के पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1952 में लड़ा, हालांकि पहली जीत उन्हें 1957 में मिली। तब से 2009 तक वे लगातार संसदीय राजनीति में बने रहे। 1977 में वे पहली बार मंत्री बने, जबकि 1996 में वे 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री भी रहे।

हालांकि 1998 में उन्हें एक बार फिर पीएम बनने का मौका मिला। उनकी ये सरकार भी सिर्फ 13 महीने चली लेकिन इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के बहुमत वाली सरकार बनी और वाजपेयी ने पीएम के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। वर्ष 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में वे लखनऊ से लोकसभा सदस्य चुने गए।

भाजपा-कांग्रेस के बागी आए एक मंच पर

उत्तराखंड की सत्तारूढ़ भाजपा व विपक्षी पार्टी कांग्रेस से असंतुष्ट नेता रविवार को तीर्थनगरी में एक मंच पर नजर आये। दोनों दलों के इन बागी नेताओं की बैठक का उद्देश्य प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चे को खड़ा करना है। जल्द ही यह दोनों दलों के बागी नेता जनता के बीच एक नया विकल्प लिये पहुंचने वाले है। इस बैठक गुपचुप तरीके से आयोजित की गयी। जिससे प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया को दूर रखा गया था। मगर, मीडिया तो मीडिया है, बात निकाल ही लेती है।

ऋषिकेश में वीरभद्र मार्ग स्थित एक होटल में भाजपा व कांग्रेस की विचारधारा के असंतुष्ट नेता एक मंच पर नजर आए। इनमें ज्यादातर भाजपा के टिकट पर पूर्व में विधायक रह चुके और भाजपा से बगावत कर पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ चुके नेता शामिल थे। बैठक में कुछ अन्य पूर्व विधायकों के भी आने की सूचना थी। मगर, मार्ग खराब होने के चलते वह बैठक में नहीं शरीक हो सके।

खास बात यह रही कि इस बैठक को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया। और मीडिया को अदंर आने की इजाजत नहीं दी गयी। सूत्रों के मुताबिक पूर्व विधायक सुरेश चंद्र जैन की अध्यक्षता में चली बैठक में चर्चा के केंद्र में प्रदेश की राजनीति, आगामी निकाय चुनाव और नई राजनीतिक की उम्मीद रही। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों दलों के बागी नेताओं ने नया राजनीतिक दल बनाने पर भी चर्चा की। मगर, इस पर दोनों ओर से मिलीजुली प्रतिक्रिया ही रही।

फिलहाल यह बात सामने आयी कि एक मजबूत मंच का गठन कर प्रदेश की जनता की समस्याओं और उनके हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। जिसके लिए इस कुनबे को सामाजिक जन संघर्ष मंच के तौर पर प्रदेश भर में पहचान दी जाएगी। बैठक के दौरान सभी असंतुष्टों ने भाजपा व कांग्रेस पर प्रदेश की जनता के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया। फिलहाल वरिष्ठ नेता सुरेश चंद्र जैन को ही इस मंच का अघोषित संरक्षक बनाया गया है।

महेंद्र सिंह नेगी के संचालन में चली बैठक में पूर्व विधायक व काबीना मंत्री दिनेश धनै, पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत, भाजपा व कांग्रेस से बगावत कर चुनाव लड़ चुके पूर्व दायित्वधारी संदीप गुप्ता, सूरतराम नौटियाल, आरेंद्र शर्मा, प्रमोद नैनवाल, सुभाष चंचल, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गोविंद अग्रवाल, ज्योति सजवाण सहित भाजपा, कांग्रेस व संघ पृष्ठभूमि के कई नेता उपस्थित रहे।

एकमात्र शर्त-आरएसएस समर्थित न हो दावेदार

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी का चेहरा बनाकर पीएम प्रत्याशी बनाने का दांव चला हो, लेकिन अब वह अपने ही दांव से पलटती नजर आ रही है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों ने स्पष्ट किया कि उसे आरएसएस समर्थक को छोड़कर विपक्ष के किसी भी दल का नेता प्रधानमंत्री पद के लिए कुबूल होगा।

पार्टी के रुख में यह बदलाव राहुल की दावेदारी को पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा को छोड़ किसी विपक्षी दल से समर्थन नहीं मिलने के बाद आया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने तो कहा है कि राहुल ही विपक्ष के एकमात्र नेता नहीं हैं। उधर, बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही उनकी पार्टी गठबंधन करेगी। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि 2019 में पार्टी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों के साथ गठजोड़ करेगी।
इस सवाल पर कि क्या राहुल संभावित गठजोड़ से किसी महिला प्रत्याशी के पक्ष में पीछे हटेंगे। सूत्रों ने कहा कि वह संघ समर्थित दल को छोड़कर किसी भी दल के नेता को प्रधानमंत्री के रूप में देखने को तैयार हैं। विपक्षी कैंप में अटकलें हैं कि किसी महिला को पीएम प्रत्याशी बनाया जाए। इस पर सहमति बनी तो बसपा सुप्रीमो मायावती व तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के नाम पर विचार हो सकता है।

कांग्रेस सूत्रों ने यह भी बताया कि 2004 की तुलना में 2019 का भारत अलग है। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस को लगता है कि टीडीपी और शिवसेना जैसी पार्टियां खुश नहीं हैं, इसलिए भाजपा को अगले आम चुनाव में पर्याप्त सीटें नहीं मिलेंगीं। वहीं, उप्र और बिहार में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बना तो मोदी का जीतना भी मुश्किल हा जाएगा।

पूर्व विधायक शहजाद की बसपा में वापसी के कुछ दिन बाद ही हुआ निष्कासन, जानिए वजह क्या रही?

पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद को कुछ दिन पूर्व बसपा ने अपने पाले में ले लिया था। फिर आखिर ऐसा भी क्या हुआ जो उन्हें कुछ दिन के भीतर ही पार्टी से निष्कासित होना पड़ा। कारण मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत रहे। जी हां, दरअसल पूर्व विधायक ने अपने बेटे की शादी में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को जो बुलाया था। बस पार्टी को यही बात नागवर गुजरी और मोहम्मद शहजाद को पार्टी से निष्कासित कर दिया।

रविवार को शिवालिकनगर स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश महासचिव नत्थू सिंह, सतीश कुमार सिंह, सूरजमल व जिलाध्यक्ष राजेश कुमार ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक शहजाद ने पार्टी का भरोसा तोड़ा है।

बसपा पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्व विधायक ने पार्टी को गुमराह करने का काम किया है। वे भाजपा के संपर्क में बने रहे। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती से पूर्व की गलतियों की माफी मांगी थी, जिसके बाद उन्हें पार्टी में शामिल किया गया था। पूर्व विधायक को चार साल में तीसरी बार निष्कासित करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक की अभी भी भाजपा से नजदीकी है।

उन्होंने कहा कि शहजाद ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके सरकार के सहयोगियों को अपने यहां पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत बुलाया। यह पार्टी के साथ विश्वासघात है। वे पार्टी को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। इसे नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। इस दौरान पूर्व विधायक हरिदास भी मौजूद रहे।

अपने निष्कासन के सवाल पर पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद ने कहा कि उन्होंने कोई ऐसा कार्य नहीं किया जो बसपा के हितों के विपरीत हो। वे 25 जून को बसपा में फिर से शामिल हुए थे। इस बीच कौन सा चुनाव हुआ, जिसमें उन्होंने पार्टी के विपरीत काम किया है, यह बसपा बताए। उन्होंने कहा कि जल्द ही वे प्रेसवार्ता कर आरोपों का जवाब देंगे।

चार वर्षों में देश को कई कल्याणाकारी योजनाएं मिलीः त्रिवेन्द्र

केंद्र की मोदी सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने पर राज्य सरकार ने हर्ष जताया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नरेन्द्र मोदी सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने पर प्रबुद्ध सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इन चार वर्षों की सफलता की बदौलत आज पूरा विश्व भारत को सम्मान की नजर से देख रहा है। इन चार वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता को कई जन कल्याणकारी योजनाएं दी है।

केन्द्र सरकार के सफल चार वर्षों की उपलब्धियों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा इन चार वर्षों में भारत वर्ष ने आर्थिक, सामाजिक समृद्धि एवं विकास की नई ऊँचाइयों को छुआ है। स्वच्छ भारत मिषन के अंतर्गत देष के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 7.25 करोड से भी अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया। स्वच्छता कवरेज 38 प्रतिषत से बढ़कर 83 प्रतिषत हो गया है। इतिहास में पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब दिया गया। गत 4 वर्षों में सड़क परिवहन में उल्लेखनीय तेजी से कार्य हो रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों के ठेकों में 77 फीसदी तथा राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में 38 फीसदी की तेजी आई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिषन के तहत आयुष्मान योजना में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज 15 से 20 फीसदी सस्ता होगा, गरीब परिवारों को पांच लाख तक का बीमा कवरेज दिया जा रहा है। जन औषधि केंद्रों में जरूरी दवाएं 50 प्रतिषत से कम दाम पर उपलब्ध है।

उज्ज्वला योजना मई 2016 को प्रारंभ हुई थी, मात्र दो वर्षों के भीतर ही उज्ज्वला योजना के अंतर्गत चार करोड़ महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस कनेक्षन देकर धुॅआ मुक्त जीवन दिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 2022 तक सबको आवास दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। केन्द्र सरकार द्वारा 1200 अप्रासंगिक कानूनों को खत्म किया जा चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को व्यापक तरीके से बढ़ाया गया है, जिसके सुखद परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। 12 वर्ष से कम उम्र की बेटियों के साथ दुष्कर्म पर मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया गया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के संकल्प के दृष्टिगत चार वर्षों में केंद्र सरकार के किसी भी मंत्री पर भ्रष्टाचार संबंधी कोई आरोप नहीं है। जीएसटी से कर प्रणाली एवं कारोबार आसान हो रहा है। प्रधानमंत्री के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट मुंबई से अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का कार्य त्वरित गति से चल रहा है। सौभाग्य योजना के माध्यम से करोड़ घर में बिजली पहुंचाई गई है। आजादी के 70 वर्षों बाद दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत देष के समस्त गांवों में बिजली उपलब्ध कराई गई। उन्होने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने हेतु विषेष प्रयास किए गए हैं। किसानों को उसकी लागत का 1.5 गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। 12.5 करोड़ किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि चाहे वह रोड कनेक्टिविटी हो या हवाई एवं रेल सेवाएं, चाहे ग्रामीण विद्युतीकरण हो या सोलर परियोजना, चाहे वह आर्गेनिक फार्मिंग हो अथवा सहकारिता, नये पर्यटन स्थलों का विकास हो, देहरादून में साईंस सिटी को मंजूरी हो, ऋषिकेष में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का कन्वेन्शन सेण्टर हो, श्री केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण हो, नमामिगंगे परियोजना हो राज्य को केन्द्र सरकार ने विकास की यात्रा में सदैव अपने साथ रखा है।

हाईकोर्ट ने दिया निकाय चुनावों पर बड़ा फैसला

राज्य सरकार की ओर से निकायों के परिसीमन व सीमा विस्तार को लेकर जारी अधिसूचना को निरस्त करने संबंधी एकलपीठ के आदेश को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निरस्त कर दिया। इससे अब राज्य में नगर निकाय चुनावों को लेकर रास्ता साफ हो गया है।

विदित हो कि हल्द्वानी, पिथौरागढ़ के दौला, खटीमा, टनकपुर, डोइवाला, रुद्रपुर, काशीपुर, भवाली, भीमताल, कोटद्वार, ऋषिकेश समेत 17 निकायों के सीमा विस्तार की अधिसूचना को अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं में कहा गया था कि सीमा विस्तार से संबंधित जारी अधिसूचना राज्यपाल की ओर से जारी होनी चाहिए थी। लेकिन, इसे शहरी विकास सचिव द्वारा जारी किया गया था। जो संविधान का उल्लंघन है। पिछले दिनों एकलपीठ ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए सरकार की परिसीमन संबधी अधिसूचना को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व सीएससी परेश त्रिपाठी ने जिरह की। उन्होंने कहा कि राज्यपाल और राज्य सरकार को एक ही परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए, अलग-अलग नहीं। राज्य सरकार के स्तर पर परिसीमन को लेकर जो कवायद की गई, वह राज्यपाल के नाम पर की गई। एकलपीठ ने संविधान में निहित व्यवस्था की व्याख्या सही नहीं की, लिहाजा फैसले को निरस्त किया जाए। खंडपीठ ने सरकार की दलीलों से सहमत होते हुए एकलपीठ का फैसला निरस्त कर दिया और सरकार की कवायद को संवैधानिक करार दिया।

कास्टिंग काउच से संसद भी अछूती नहींः रेणुका चौधरी

पूर्व राज्यसभा सदस्य व कांग्रेसी नेता रेणुका चौधरी अपने बड़बोले बयान के लिये मशहूर है। ऐसा ही एक और बड़ा बयान उन्होंने दिया है। उन्होंने कास्टिंग काउच पर कहा कि सिर्फ फिल्म उद्योग ही नहीं, बल्कि सभी कार्यस्थलों की सच्चाई है। उन्होंने कास्टिंग काउच को संसद से जोड़ते हुये कहा कि संसद भी इससे अछूती नहीं है।

पत्रकार वार्ता के दौरान रेणुका चौधरी ने कहा यह कड़वी सच्चाई है। यह सिर्फ फिल्म उद्योग में ही नहीं है। यह कार्यस्थलों पर भी हर जगह होता है। यह मत सोचिए कि संसद इससे अछूती है या कोई अन्य कार्यस्थल इससे बचा हुआ है। अगर आज आप पश्चिमी दुनिया की ओर देखें तो स्थापित शीर्ष अभिनेत्रियों ने भी ‘मी टू’ (मैं भी) कहने में काफी समय लिया। अब समय आ गया है कि भारत भी आगे आकर कहे- मी टू।

यहां आपको बताना जरूरी हो जाता है कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुयी सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर रेणुका चौधरी ने अपने बयान में कहा था कि दुष्कर्म तो चलते ही रहते हैं। मालूम हो कि दक्षिण भारत की एक संघर्षरत अभिनेत्री रेड्डी के हाल ही में दिए गए बयान की वजह से कास्टिंग काउच पर काफी बहस हो रही है।

मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान ने मांगी माफी
बॉलीवुड की कोरियोग्राफर सरोज खान ने कास्टिंग काउच संस्कृति का बचाव करने संबंधी अपने बयान पर माफी मांगी है। उन्होंने कहा था इंडस्ट्री में लड़की को दुष्कर्म करके छोड़ नहीं देते, रोजी-रोटी भी देते हैं। इसलिए सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री के पीछे नहीं पड़ना चाहिए। ये सारी चीजें लड़की के ऊपर है कि वह क्या करना चाहती है। तुम ऐसे लोगों के हाथ में नहीं आना चाहते तो मत आओ। तुम्हारे पास कला है तो खुद को इंडस्ट्री में बेचने की क्या जरूरत है।

सपा-बसपा के एक होने से मुझे दिल्ली पहुंचने से कोई रोक नहीं सकताः मुलायम

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायक सिंह यादव ने सपा-बसपा गठबंधन को अच्छी कोशिश बताया। उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट उपचुनाव में सपा-बसपा गठबंधन को मिली सफलता के बाद दोनों पार्टियों फूले नहीं समा रही है।

मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी के किशनी में सपा-बसपा के गठबंधन की ताकत का एहसास कराते हुए ये उम्मीद जताई कि अब लोकसभा चुनाव में इन्हें कोई रोक नहीं सकेगा।
अपने संबोधन में मुलायम सिंह ने कहा कि जो पहल की गई है, उसे जारी रखा जाना चाहिए। दोनों के एक होने से लोकसभा चुनाव में उन्हें दिल्ली पहुंचने से कोई नहीं रोक सकेगा।

बसपा का धन्यवाद किया

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के पास जो नीतियां हैं, वे देश की किसी पार्टी के पास नहीं हैं। उन्होंने लोकसभा उपचुनाव में सपा का सहयोग करने के लिए बसपा को धन्यवाद भी दिया। साथ ही केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि देश में महंगाई और भ्रष्टाचार साथ-साथ चल रहे हैं। महिलाएं समझदार हैं और वे समझ रही हैं कि किसे वोट देना है।
बता दें कि उपचुनाव में अखिलेश यादव और मायावती ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसमें बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी थी। इसके बाद राज्यसभा चुनाव में हालांकि, बसपा के उम्मीदवार को जिता पाने में अखिलेश यादव कामयाब नहीं हो सके थे, जिसके बाद गठबंधन टूटने की अटकलें लगने लगी थीं। लेकिन मायावती ने खुद मीडिया के सामने आकर इस बात की पुष्टि की थी कि गठबंधन आगे भी जारी रहेगा।

गैंगरेप पीड़िता बोली बीजेपी विधायक के हाथ में है पूरा प्रशासन

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश करने वाली रेप पीड़िता के पिता की मौत हो गई है। पीड़िता ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर उसके पिता से मारपीट का आरोप लगाया है, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। एक चैनल को दिए इंटरव्यू में रेप पीड़िता ने बीजेपी विधायक पर गंभीर इल्जाम लगाए। पीड़िता ने एक प्राइवेट चैनल को बताया, ये घटना चार जून 2017 की की रात आठ बजे की है। उस रात एक महिला हमें विधायक कुलदीप सेंगर के पास ले गई थी। जो बीजेपी के नेता हैं। जहां उन्होंने मेरे साथ रेप किया।

पीड़िता ने बताया कि जब उन्होंने बीजेपी विधायक से रेप का विरोध किया तो बीजेपी विधायक ने परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी। जब वो थाने में गई तो पुलिस द्वारा एफआईआर नहीं लिखी गई। इसके बाद तहरीर बदल दी गई।

पीड़िता ने बताया, मैं जून 2017 में सीएम योगी से मिली थी। उन्होंने कहा था कि बेटा इंसाफ मिलेगा, लेकिन एक साल हो चला है और अब तक कुछ नहीं हुआ। मैंने हर जगह तहरीर भेजी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

पीड़िता ने बताया कि उनके पापा छोटे बच्चे को देखने के लिए घर आए थे। जिसके बाद विधायक के लोगों ने मेरे पिता को बहुत मारा। पीड़िता ने बताया, पुलिस पहुंच गई तब भी उन्होंने मेरे पापा को मारा। हमारा दरवाजा खोलकर पापा को घसीटकर ले गए और खूब पिटाई की। पीटने के बाद उन्हें अपने घर के बाहर फेंक दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक से मामले की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। सरकार और कानून इस घटना के दोषियों के साथ कोई रियायत नहीं करेगा। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने के लिये तफ्तीश को लखनऊ स्थानान्तरित कर दिया गया है।

चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

उन्नाव की पुलिस अधीक्षक पुष्पांजलि ने बताया कि मामले के चार नामजद अभियुक्तों सोनू, बउवा, विनीत और शैलू को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, माखी के थाना प्रभारी अशोक कुमार समेत छह पुलिसकर्मियों को लापरवाही बरतने के आरोप में निलम्बित कर दिया गया है। जिलाधिकारी रवि कुमार एनजी ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था।