हिन्दू है जिम्मेदार तो जिन्ना ने पाकिस्तान की क्यों की थी मांग

पाकिस्तान अपने राष्ट्रवादी नजरिए के मुताबिक इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का काम कर रहा है। इसके लिए इतिहास की किताबों को हथियार बनाते हुए यह बताया जाता है कि जब 70 साल पहले भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान हुए खून-खराबे के लिए हिंदू जिम्मेदार हैं।
पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली सरकारी मान्यता प्राप्त ग्रेड पांच की इतिहास की किताबों में हिंदुओं को ‘हत्यारा’ बताया गया है, जिन्होंने मुसलमानों का नरसंहार किया, उनकी संपत्ति जब्त कर ली और उन्हें भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के 17 साल के नोमान अफजल ने अपनी इतिहास की किताब में लिखे एक उत्तर का जिक्र करते हुए कहा, वे हमें नीचा समझते थे, इसलिए हमने पाकिस्तान बनाया।
महात्मा गांधी के अध्याय, इस बात का साफ उदाहरण है कि सीमा के दोनों और बंटवारे को कितना अलग-अलग तरीके से पेश किया गया है। पाकिस्तान में आजादी के लिए गांधी के संघर्ष का कुछ खास जिक्र नहीं किया गया है, जबकि भारत में उन्हें ‘वन मैन आर्मी’ के तौर पर पेश किया जाता है।

देश के इतिहास में 3 सर्वोच्च पद पर संघ विचारधारा के लोग

एनडीए के उम्मीद्वार वेंकैया नायडू को भारत के 13वें उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया है। वो भारत के 15वें उपराष्ट्रपति कार्यकाल को संभालेंगे। इनसे पहले हामिद अंसारी लगातार दो बार उपराष्ट्रपति रहे थे। यह पहली बार है जब भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद पर संघ से जुड़े व्यक्ति आसीन हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संघ से काफी पुराना नाता है और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी छात्र जीवन में संघ से जुड़ गए थे। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी आरएसएस के प्रचारक रह चुके हैं। गौरतलब है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में कहा था, आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब भारत के सभी सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर एक ही विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति आसीन हैं।
उपराष्ट्रपति नायडू छात्र जीवन के समय 70 के दशक में आरएसएस से जुड़े थे। इस दौरान उनकी पहचान बतौर आंदोलनकारी छात्र के रूप में हो गयी थी। वेंकैया ने 1972 में जय आंध्र आंदोलन में भाग लिया था। इसके बाद 1973 से 74 तक आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष भी रहे थे। बता दें कि नायडू बतौर स्वंय सेवक दूसरे उपराष्ट्रपति हैं। उनसे पहले भैरोसिंह शेखावत 2002 से 2007 तक उपराष्ट्रपति के पद पर रहे थे।

अयोध्या रामजन्म भूमिः देश दुनिया की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकेगी

देश विदेश में अयोध्या का नाम सुनते साथ ही हिन्दूओं की आस्था के प्रतीक श्रीराम की तस्वीर उभर कर सामने आ जाती है। इस मामले में नया घटनाक्रम यह है कि अब अयोध्या रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 11 अगस्त से करने का फैसला किया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 3 जजों की स्पेशल बेंच तैयार की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने का सुझाव दिया था। ये एक ऐसा विवाद है, जिसकी आंच में भारतीय राजनीति आजादी के बाद से ही झुलसती रही है। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी, जिसका मुकदमा आज भी लंबित है।
आपकों बताते चले कि देश की आजादी से पूर्व इस स्थान को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है। एक ओर हिन्दू इसे श्री राम की जन्म स्थली बताकर राम मंदिर का निर्माण करना चाहते है वहीं मुस्लिम इसे बाबरी मस्जिद बताकर अपना पक्ष रख रहे है। दोनों के दावे अब तक कई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गये है। पूर्व में इलाहाबाद कोर्ट ने उक्त स्थान की खुदाई करवाकर जिस पक्ष के अवशेष मिलेंगे, उसका दावा पुख्ता माना जायेगा कहा था। जिस पर खुदाई के दौरान हिन्दूओं से संबधित अवशेष मिले जिस पर कोर्ट ने इस स्थान को हिन्दुओं का माना। मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे किये।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने का सुझाव भी दिया। लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने नही आ सका। अब फिर सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई 11 अगस्त से करने का फैसला किया है। अब देश दुनिया की नजरें फिर से हिन्दुस्तान की ओर होंगी। सुप्रीम कोर्ट के ट्रायल और फैसले से देश की राजनीति में इसका सीधा असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

एक्जीक्यूटिव इंजीनियर की अनुमति के शटडाउन नही होगा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सचिवालय में ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग को गत वर्ष के राजस्व में न्यूनतम 200 करोड़ रूपये की वृद्धि करने का लक्ष्य दिया। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग को प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये। उन्होने कहा कि जे0ई0 और ए0ई0 ही नही बल्कि एक्जीक्यूटिव इंजीनियर भी फील्ड में दिखें। विद्युत चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाय और विशेष रूप से बड़े बिजली चोरों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाय। बिजली चोरी रोकने तथा राजस्व वृद्धि के लिये जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी जो वर्षो से एक ही जगह पर जमे हों उनका स्थानांतरण किया जाय। बिना एक्जीक्यूटिव इंजीनियर की अनुमति के शटडाउन न किया जाय। जब भी किसी आवश्यक कार्य के लिए बिजली शटडाउन लेना हो तो उसका जनता में व्यापक प्रचार किया जाए। अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही से बिजली आपूर्ति में बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। जूनियर इंजीनियर से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक की चरित्र पंजिका में उनकी परफॉर्मेंस बिजली सप्लाई की नियमितता के आधार पर भी देखी जाएगी। मुख्यमंत्री ने राज्य की सौर ऊर्जा नीति में 5 मेगावाट तक के प्रोजेक्ट केवल उत्तराखण्ड के निवासियों के लिए रखने के निर्देश दिये। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जायेगा। बताया गया कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से राज्य में 597 मिलियन यूनिट बिजली की खपत कम हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपजाऊ भूमि पर सोलर प्लाण्ट परियोजनाए न लगाई जायें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली सप्लाई में ए0टी0 एण्ड टी0 (एग्रीगेट टेक्निीकल एण्ड कमर्शियल लॉसेस) को कम किया जाए। वर्ष 2016-17 के 16.72 प्रतिशत हानियों को इस वर्ष अधिकतम 15 प्रतिशत तक सीमित किया जाय। उल्लेखनीय है कि एक प्रतिशत ए0टी0 एण्ड टी0 हानियां कम होने पर राज्य को लगभग 100 करोड रुपए तक की बचत होगी। जिन क्षेत्रों में बिजली चोरी की घटनाएं अधिक होती है, उन्हें चिन्हित कर वहां ओवरहेड लाइनों को ए0बी0 केबिलों से बदला जाए। इस वर्ष 2000 कि0मी0 ओवरहेड एल0टी0 लाइनों को ए0बी0 केबिलों से बदले जाने का लक्ष्य है। बताया गया कि राज्य के 15745 आबाद ग्रामों में 15681 विद्युतीकृत है। मुख्यमंत्री ने शेष 64 ग्रामों को इस वर्ष के अंत तक विद्युतीकृत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ सीमांत इलाकों में लगभग 8000 घरों हेतु सोलर ब्रीफकेस की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्युत उत्पादन की आधुनिक एम0आई0एस0टी0 (मिस्ट) तकनीकि का अध्ययन कर किसी एक स्थान पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश भी दिए। उत्तराखंड जल विद्युत निगम को इस वर्ष के लिए निर्धारित 4876 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन लक्ष्य को बढ़ाकर कम से कम 5000 मिलियन यूनिट करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो जल विद्युत परियोजनाएं न्यायालय वाद या किसी अन्य कारण से रुकी हुई हैं, उनके अतिरिक्त बाकी योजनाओं पर निगम पूरा ध्यान केंद्रित करें। बताया गया कि 120 मेगावॉट ब्यासी परियोजना वर्ष 2018 दिसम्बर तक तैयार हो जायेगी। उत्तरकाशी की पिलंगाड-1 (2.25 मेगावॉट) योजना इस वर्ष दिसम्बर तक पूरी हो जायेगी। चमोली में उरगम (3.0 मेगावॉट) तथा पौड़ी में दुनाव (1.5 मेगावॉट) योजना अगस्त के अंतिम सप्ताह से प्रारम्भ हो जायेगी। दुनाव परियोजना टेस्टिंग प्रक्रिया में है। राज्य के दस हजार से कम जनसंख्या वाले 36 शहरों में 192 करोड़ की लागत से बिजली सुधारीकरण किया जाना है। इस वर्ष अप्रैल से जून तक बिजली चोरी के लगभग 486 अभियोग पंजीकृत किये गये हैं। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अप्रैल-जून अवधि के बिजली आपूर्ति की नियमितता और अवधि में सुधार हुआ है। बैठक में सचिव ऊर्जा राधिका झा, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान सहित ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड की राजनीति में जीना का नाम अमरः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मौसम की खराबी के कारण शुक्रवार को सोमेश्वर, अल्मोडा में प्रस्तावित स्व.श्री सोबन सिंह जीना की जयंती के अवसर पर उनकी मूर्ति अनावरण कार्यक्रम एवं जनसभा में सम्मिलित नही हो पाए। परन्तु इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दूरभाष पर वहां आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित जन समुदाय को संबांधित करते हुए कहा कि स्व.जीना जी की राजनीति में एक आदर्श पुरूष के रूप में गणना होती है। स्व.जीना ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण एवं सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य निर्माण से पूर्व उत्तराखण्ड कैसा होना चाहिए, उसके चिंतन की दिशा में जो काम स्व.जीना जी ने किया वह इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व.जीना जी का राजनीतिक जीवन साफ-सुथरा रहा है। इसके साथ ही उनकी पहचान नई पीढ़ी के लिए एक आदर्श पुरूष के रूप में सदैव बनी रहेगी। मुख्यमंत्री स्व. सोबन सिंह जीना की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने सोमेश्वर विधानसभा के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने तालुका में 33/11 के.वी. उपसंस्थान निर्माण का कार्य, राजकीय जूनियर हाईस्कूल भटूली का पुर्ननिर्माण कार्य, जनपद अल्मोड़ा के विकासखण्ड तालुका में सोमेश्वर में स्थित पुलिस थाना भवन की सांई नदी से बाढ़ सुरक्षा का कार्य, दौलाघाट ग्राम समूह पेयजल योजना का कार्य एवं शीतलाखेत को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की स्वीकृति प्रदान की।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जनपद अल्मोडा के विकासखण्ड ताडीखेत में कोसी नदी पर वृहद श्रोत संवर्धन कार्य के अन्तर्गत काकडीघाट के पास प्रस्तावित झील निर्माण हेतु सर्वेक्षण, अनुसंधान एवं डी.पी.आर. तैयार करने के कार्यों का प्राक्कलन बनाने, सोमेश्वर के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करना, सोमेश्वर में पार्किंग का निर्माण, सोमेश्वर में आधुनिक शौचालय निर्माण का कार्य, जनपद अल्मोडा के विधान सभा सोमेश्वर के अन्तर्गत नैनी जाना गिनाई मोटर मार्ग का डामरीकरण एवं सुधारीकरण (लगभग 8 किमी) के कार्य की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने जनपद अल्मोडा के विधानसभा सोमेश्वर के अन्तर्गत कालिका दलमोटी मोटर मार्ग का डामरीकरण एवं सुधार (5.40किमी) का कार्य, जनपद अल्मोड़ा के विधान सभा सोमेश्वर के अन्तर्गत मजखाली-सुन्दरखाल-बिटुलिया मोटर मार्ग के अवशेष भाग के पार्ट-1 एवं पार्ट-2 का निर्माण (लगभग 1.750 किमी) का कार्य, सोमेश्वर में पेयजल पम्पिंग योजना की स्वीकृति एवं काकडीघाट में मेडिटेशन सेंटर बनाने की भी घोषणा की।

राज्यसभा चुनाव में दबेगा नोटा, कांग्रेस में मची खलबली

गुजरात राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। गुजरात की 3 सीटों पर 8 अगस्त को होने वाले चुनावों में नोटा प्रयोग पर स्टे लगाने की कांग्रेस की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। इसका मतलब यह है कि राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग नोटा के विकल्प के साथ ही होगी। इससे पहले, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी थी कि अगर नोटा पर स्टे नहीं दिया गया तो विधायकों के वोट दूसरे पक्ष के लोग खरीद लेंगे और उसके कैंडिडेंट्स चुनाव हार जाएंगे।
कांग्रेस ने कहा कि अगर नोटा का ऑप्शन बंद नहीं किया गया तो गुजरात चुनाव में यह भ्रष्टाचार का सबब बन सकता है क्योंकि मुकाबला बेहद कड़ा है। कांग्रेस की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि गुजरात में तीन राज्यसभा सीट पर चार कैंडिडेट्स खड़े हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह विधायकों को नोटा का विकल्प देने के मुद्दे पर 18 सितंबर को विस्तृत सुनवाई करेगा।
कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल से जुड़ा नोटिफिकेशन काफी पहले 2014 में जारी किया था, ऐसे में कांग्रेस को इसकी खामियां इस वक्त क्यों नजर आ रही हैं? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यह एक संवैधानिक मुद्दा है, जिसपर बहस की जरूरत है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह कांग्रेस की याचिका पर 2 हफ्ते में जवाब दे।
कोर्ट ने कांग्रेस के वकील से कहा कि जनवरी 2014 में चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के बाद से हुए कई राज्यसभा चुनाव हुए, उस वक्त आप कहाँ थे और अब जबकि ये आपके फेवर में नही है तब इसे क्यों चुनौती दे रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस बात पर सुनवाई के लिए तैयार है कि राज्यसभा चुनाव में नोटा का प्रावधान संवैधानिक है या नहीं, लेकिन सवाल ये है कि केवल इसी चुनाव के लिए ही क्यों ? चुनाव आयोग ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नोटा का प्रावधान किया गया है और उसके बाद कई चुनाव हुए जिसमे नोटा का इस्तेमाल भी हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद एनडीए सरकार ने इस मामले में रणनीतिक चुप्पी साध रखी है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि गुजरात चुनाव में नोटा के इस्तेमाल को लेकर ईसी की ओर से 24 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन से सरकार का कोई संबंध नहीं है। गुजरात की सीटों के लिए होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल होने जा रहा है। बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी और बलवंत सिंह राजपूत को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की तरफ से एकमात्र उम्मीदवार अहमद पटेल हैं। कांग्रेस ने नोटा के इस्तेमाल पर ऐतराज जताया है। कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग बिना संवैधानिक संशोधन के राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल नहीं कर सकता। कांग्रेस ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 84 का उल्लंघन है।
चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर हुए राजनीतिक विवाद पर करारा जवाब दिया। आयोग ने बुधवार को कहा कि राज्यसभा चुनाव में बैलट पेपर में नोटा के इस्तेमाल करने की पहली घटना नहीं है। आयोग ने आंकड़ों के साथ कहा कि 2014 से लेकर अब तक राज्यसभा के चुनाव 25 बार हुए जिनमें 95 सीटों पर वोटिंग हुई। इन सभी सीटों पर नोटा का इस्तेमाल हुआ था।

गिलानी के बेटे की मांग, आने जाने का खर्च दे एनआईए

टेरर फंडिंग के सिलसिले में दिल्ली बुलाये गये हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम ने भारत सरकार से अजीब मांग की है। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का छोटा बेटा नसीम गिलानी की मांग है कि जम्मू-कश्मीर सरकार उसे श्रीनगर से दिल्ली और दिल्ली से वापस श्रीनगर जाने का खर्च दे। अंग्रेजी वेबसाइट एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एनआईए चीफ शरद कुमार तब आश्चर्यचकित रह गये जब उनके डेस्क पर अलगाववादी नेता नसीम गिलानी की ओर से एक पत्र आया। जम्मू कश्मीर के शेर ए कश्मीर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर नसीम गिलानी ने इस पत्र के जरिये कहा है कि एनआईए को सीधे उसे समन भेजने के बजाए यूनिवर्सिटी को भेजना चाहिए, ताकि वो दिल्ली आने जाने का खर्चा विश्वविद्यालय से ले सके। नसीम गिलानी ने कहा कि एनआईए को समन मेरे विश्वविद्यालय को भेजना चाहिए ताकि मैं महंगाई और ट्रेवलिंग एलाउंस ले सकूं। फिलहाल एनआईए ने नसीम की इस अपील को मान लिया है कि लेकिन उन्हें लगता है कि नसीम की इस मांग का मकसद कुछ और है।
बता दें कि टेरर फंडिग के इस केस में एनआईए ने लगभग आधा दर्जन अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया है। इसमें सैयद अली शाह गिलानी का दामाद अल्ताफ अहमद शाह भी शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नसीम गिलानी चाहता है कि यूनिवर्सिटी के जरिये समन मिलने पर वो ऐसी स्थिति पैदा कर दे ताकि एनआईए उसे पूछताछ के लिए अल्ताफ अहमद शाह के आमने-सामने ना ला सके। इस मामले में नसीम गिलानी का बड़ा भाई नईम गिलानी भी एनआईए के रडार पर है, लेकिन समन भेजे जाने के बावजूद बीमारी का बहाना बनाकर वो एनआईए के सामने पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुआ है।
बता दें कि हुर्रियत नेताओं पर आरोप है कि इन लोगों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठनों हिज्बुल मुजाहिद्दीन और लश्कर ए तैयबा के साथ मिलकर कश्मीर घाटी में हिंसा और हंगामा करने के लिए पाकिस्तान से फंड लिया। एनआईए ने इसी मामले में हुर्रियत के नेताओं को गिरफ्तार किया है। एनआईए को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान ऐसा सबूत मिलेगा जिससे सैयद अली शाह गिलानी पर भी मुकदमा चलाया जा सके। खबर है कि प्रवर्तन निदेशालय से पूछताछ के दौरान इस मामले में गिरफ्तार शबीर शाह ने गिलानी की ओर इशारा किया है और कहा है कि पाकिस्तान से आने वाले फंड का बड़ा हिस्सा गिलानी के पास जाता था। जांच एजेंसियां अब इस मामले में सबूत इकट्ठा कर रही हैं।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिल रहा युवाओं को रोजगार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को न्यू कैंट रोड स्थित जनता दर्शन हॉल में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अन्तर्गत राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज युवा पीढ़ी स्वरोजगार की ओर तेजी से अग्रसर हो रही है। युवा पीढ़ी समझ चुकी है कि रोजगार का सबसे अच्छा साधन स्वरोजगार है। उन्होंने कहा कि विभिन्न लघु, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्यमों के विकास से जहां अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा साथ ही इससे स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि आधुनिक तकनीकि युग में मशीनीकरण तेजी से हो रहा है, इसके साथ ही घरेलू उत्पादों की ओर लोगों को रूझान भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में घरेलू उत्पादों के विकास हेतु अपार सम्भावनाए हैं। राज्य में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग के लिए स्किल डेवलपमेंट की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को विभिन्न उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया, जिससे अन्य लोग भी इन उद्यमों में कार्य कर सके और उन्हें भी रोजगार के अवसर प्रदान हो सके। किसी भी उद्यम, राज्य या देश के विकास के लिए सभी का समन्वय एवं सहयोग जरूरी है। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों द्वारा लगाये गये विभिन्न स्टालों का भी अवलोकन किया। पी.एम.ई.जी.पी कार्यक्रम के तहत सराहनीय कार्य करने पर उद्योग विभाग एवं बैकों के अधिकारियों को पुरस्कृत भी किया।
प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में 9487 इकाईयां स्थापित की गई है तथा 138.41 करोड़ रूपये की मार्जिन मनी वितरित की गई तथा 63,791 लोगों को रोजगार मिला है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिए 1 जुलाई 2016 से ऑनलाइन डीबीटी सिस्टम को अनिवार्य रुप से लागू किया गया, जिसके अंतर्गत जो भी आवेदन पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत प्राप्त होंगे, उनका निस्तारण मार्जिन मनी समायोजन तक ऑनलाइन किया जाएगा। कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत पिछले वर्ष उत्तराखण्ड को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।

सीएम क्यों आए भाजपा नेता के निशाने पर

जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने ढैंचा बीज घोटाले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने उत्तराखंड के अधिकारियों के द्वारा मुख्यमंत्री को क्लीनचिट देने पर सवाल उठाये है। नेगी ने सवाल किया कि जब हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है तो इस प्रकार कैसे क्लीनचिट दी जा सकती है। बताया कि त्रिपाठी जांच आयोग के अनुसार, ढैंचा बीज घोटाले में तत्कालीन मंत्री त्रिवेंद्र रावत के खिलाफ तीन बिंदुओं पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
आपको बता दें कि त्रिपाठी जांच आयोग की सिफारिशों के आधार पर भाजपा सरकार ने एक और कमेटी बनाई। कमेटी ने शासन के बड़े अधिकारियों को क्लीनचिट देते हुए छोटे कर्मचारियों पर कर्मचारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की है। रघुनाथ सिंह नेगी के अनुसार, त्रिपाठी जांच आयोग ने तीन बिंदुओं पर तत्कालीन मंत्री त्रिवेंद्र रावत के खिलाफ कार्यवाही की सिफारिश की। जिसमें पहला बिंदु, इस बीज घोटाले में शामिल कृषि अधिकारियों का निलंबन और फिर उस आदेश को मनमाने तरीके से पलट देना। दूसरा बिंदु, कृषि सचिव की भूमिका की जांच विजिलेंस से कराए जाने को लेकर स्वीकृति न देना। तीसरा बिंदु, बीज मांग को लेकर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अनुमोदन करना।
इन तीनों बिंदुओं को आयोग ने कार्य नियमावली 1975 का उल्लंघन माना है और आयोग ने तत्कालीन मंत्री रावत के खिलाफ सिफारिश की। रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि ढैंचा बीज मिलीभगत कर टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से 3839 रुपये कुंतल की दर से खरीदा गया, जबकि वही बीज कृषि उत्पादन मंडी समिति, हरिद्वार और खुले बाजार में उस वक्त 1538रुपये कुंतल की दर पर उपलब्ध था।
आरोप है कि ढैंचा बीज निधि सीड्स कारपोरेशन, नैनीताल से खरीदा गया, जबकि सरकारी एजेंसियों के पास पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध था। बीज खरीद की रवानगी निधि सीड्स द्वारा ट्रकों से दर्शायी गई, जबकि अधिकांश ट्रकों की एंट्री व्यापार कर चौकियों में दर्ज ही नही है। अब इस आरोप के बाद राज्य की सियासत में राजनीति तेज हो जायेगी। भाजपा सरकार में सीधे मुख्यमंत्री पर हमला होने से अब संगठन स्तर पर भी सुगबुआहट तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि नेगी पूर्व की भाजपा निशंक सरकार में जीएमवीएन के उपाध्यक्ष रह चुके है। भाजपा कोटे से राज्य मंत्री रह चुके नेगी के सीएम पर हमला बोलने से भाजपा के अंदर पक रही खिचड़ी बाहर आने की चर्चा की जा रही है।

कैसे कमाते है लालू पैसा, जल्द करुंगा खुलासा

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मंगलवार को कहा कि वह जल्द ही बालू माफियाओं का आरजेडी से संबंधों को सबूतों के साथ उजागर करेंगे। उन्होंने साथ ही कहा कि उनकी सरकार आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव के परिवार की संपत्तियों की भी जांच करा रहे हैं। मोदी ने कहा, ‘बालू माफिया राजनीतिक दलों को फंडिंग करते हैं। बालू माफिया आरेजडी की फंडिंग का मुख्य स्रोत हैं। मैं लालू प्रसाद के परिवारवालों की बालू माफियाओं से संबंधों के बारे में जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा खुलासा करूंगा।’
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि सुशील मोदी ने मिट्टी खरीद घोटाले के बारे पूछे गए सवाल पर कहा कि यह बहुत छोटा मामला है। उन्होंने कहा, ‘हम देखेंगे कि इस बारे में क्या कार्रवाई की गई है। इस केस में कितनी प्रगति हुई है और इस मसले पर और क्या कार्रवाई करने की जरूरत है। यह (मिट्टी खरीद घोटाला) बहुत छोटा मसला है।’