कोविन्दः क्रॉस वोटिंग से विपक्ष का खेमा चित्त

राष्ट्रपति चुनाव में बड़े पैमाने पर रामनाथ कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हुई है। गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दिल्ली में कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की खबर है। गुजरात की क्रॉस वोटिंग कांग्रेस के लिए बुरी खबर है क्योंकि अगले महीने ही राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने हैं। राज्य में इसी साल विधानसभा के भी चुनाव हैं। माना जा रहा है कि शंकर सिंह वाघेला के समर्थक विधायकों ने कोविंद के पक्ष में वोट डाला।
गुजरात में कोविंद को 132 वोट मिले और मीरा कुमार को 49, जबकि राज्य में बीजेपी के 121 विधायक हैं और कांग्रेस के 57। इस हिसाब से कम से कम 8 कांग्रेस विधायकों ने कोविंद के पक्ष में वोट दिया। जबकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों के भी कोविंद के पक्ष में वोट डालने की खबर है। दिल्ली में कोविंद को 6 जबकि मीरा कुमार को 55 वोट मिले। जबकि बीजेपी के चार ही विधायक हैं। इस हिसाब से आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने कोविंद को वोट दिया। जबकि 6 वोट वैध नहीं पाए गए. पश्चिम बंगाल में भी दिलचस्प तस्वीर उभर कर सामने आई। वहां कोविंद को 11 जबकि मीरा कुमार को 273 वोट मिले। बीजेपी और उसके सहयोगी दल के 6 वोट हैं। इस हिसाब से कोविंद को कुछ दूसरी पार्टियों के वोट भी मिले।
त्रिपुरा में भी रामनाथ कोविंद को वोट मिले हैं। वहां से कोविंद को सात जबकि मीरा कुमार को 53 वोट मिले। जबकि वहां बीजेपी का कोई विधायक नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों ने कोविंद को वोट दिया। महाराष्ट्र में भी कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की खबर है। वहां कोविंद को 208 जबकि मीरा कुमार को 77 वोट मिले। वहां बीजेपी-शिवसेना के 185 विधायक हैं जबकि कांग्रेस एनसीपी के 83। इस हिसाब से कांग्रेस एनसीपी के कुछ वोट दूसरे खेमे में गए दिखते हैं।
गोवा में बीजेपी की गठबंधन सरकार है। वहां कोविंद को 25 वोट मिले जबकि मीरा कुमार को 11 वोट मिले। वहां बीजेपी और सहयोगी पार्टियों के 22 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के 16। यानी मीरा कुमार को उम्मीद से पांच वोट कम मिले।
इसी तरह असम में भी सत्तारूढ़ बीजेपी को विपक्षी खेमें में सेंध लगाने में कामयाबी मिली है। वहां कोविंद को 91 वोट मिले जबकि मीरा कुमार को 35। लेकिन बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास 87 विधायक ही हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के पास 39 विधायक। यानी कोविंद को उम्मीद से चार वोट ज्यादा मिले हैं।
इस चुनाव में 21 सांसदों के वोट वैध नहीं पाए गए। जबकि कुछ विधायकों ने भी वोट डालने में गड़बड़ की। 56 विधायक अपने वोट ठीक से नहीं डाल पाए और उन्हें वैध नहीं माना गया। क्रॉस वोटिंग के कई सियासी मायने हैं। ये आने वाले वक्त में कई राज्यों में सियासी समीकरणों के बनने-बिगड़ने का इशारा कर रहे हैं। खासतौर से गुजरात में तस्वीर बेहद दिलचस्प हो सकती है क्योंकि शंकर सिंह वाघेला के बागी तेवर आने वाले दिनों में खुल कर सामने आ सकते हैं।

संसदीय नियमों के अनुसार मायावती का इस्तीफा नामंजूर होने के आसार!

राज्यसभा में बोलने की इजाजत न मिलने पर भड़कीं बसपा सुप्रीमो ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मायावती ने राज्यसभा सभापति के दफ्तर पहुंचकर बाकायदा तीन पेज का इस्तीफा सौंपा. हालांकि, वहां मौजूद कांग्रेस और बीएसपी सांसदों ने उन्हें मनाने की कोशिश की, बावजूद इसके मायावती अपने स्टैंड पर कायम नजर आईं और सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मगर, बड़ा सवाल है कि क्या मायावती का इस्तीफा मंजूर होगा?
ये सवाल इसलिए भी जरुरी है क्योंकि संसद की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए जो नियम हैं, मायावती ने उनका पालन नहीं किया है। नियम है कि संसद के दोनों सदनों का कोई भी सदस्य जब अपनी सदस्यता से इस्तीफा देता है तो महज एक लाइन में लिखकर संबंद्ध चेयरमैन या स्पीकर को सौंपना होता है। जबकि इसके उलट मायावती ने जो इस्तीफा राज्यसभा सभापति के ऑफिस जाकर सौंपा वो तीन पन्नों का है।
नियम के मुताबिक इस्तीफे के साथ न ही कोई कारण बताया जाता है और न ही उस पर कोई सफाई दी जाती है। कोई भी संसद सदस्य इस्तीफा देते वक्त इस्तीफा देने का कारण त्यागपत्र में नहीं लिख सकता है।

पहले भी इस्तीफा हुआ है नामंजूर
रोड रेज की घटना में दोषी पाए जाने के बाद 2006 में तत्कालीन लोकसभा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दिया था। मगर सिद्धू का इस्तीफा तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने नामंजूर कर दिया था। जिसके बाद सिद्धू ने दोबारा बिना कोई कारण बताए अपना त्यागपत्र स्पीकर को दिया, जिसे मंजूर कर लिया गया था।
यही नही, नवंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने सतलुज यमुना लिंक नहर पर निर्माण कार्य जारी रखने का फैसला दिया था। इस फैसले से नाराज होकर तत्कालीन कांग्रेस सांसद कैप्टन अमरिंदर सिंह लोकसभा स्पीकर को अपना इस्तीफा भेज दिया था। कैप्टन अमरिंदर ने अपने त्यागपत्र में इस्तीफा देने के कारण की व्याख्या भी की थी, जिसे उपयुक्त न मानते हुए मंजूर नहीं किया गया था।

कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जीएसटी को कश्मीर की इकोनॉमिक आटोनॉमी में दखल बताया

जीएसटी बिल को लेकर मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। इंडीपेन्डेंट एमएलए इंजीनियर राशिद ने बिल लागू करने का विरोध किया। वे बीजेपी विधायकों से भिड़ गए। अपोजिशन ने राशिद का समर्थन किया। इस पर स्पीकर ने मार्शल्स से शोर शराबा कर रहे राशिद को सदन से बाहर ले जाने को कहा। लेकिन राशिद और अपोजिशन के मेंबर्स मार्शल्स से भी भिड़ गए। इस खींचातानी में सदन के स्टाफ का एक ऑफिशियल बेहोश हो गया।
राज्य में जीएसटी लागू करने के लिए सरकार ने असेंबली में प्रस्ताव पेश किया। सुबह इस पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान इंजीनियर राशिद ने कश्मीर मसले पर प्रस्ताव पेश की मांग करते हुए कई बार चर्चा को बाधित किया। राशिद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवादित क्षेत्र है, इस पर एक प्रस्ताव लंबित है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा-राशिद को छूकर दिखाओ
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने राशिद का बचाव किया। उन्होंने बीजेपी मेंबर्स को चुनौती दी कि वे राशिद को छूकर दिखाएं। हालात बेकाबू होते देख स्पीकर कविन्द्र गुप्ता ने मार्शल्स से राशिद को सदन से बाहर निकालने को कहा। लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अल्ताफ वानी, अब्दुल मजीद भट और मोहम्मद अकबर लोन ने मार्शल्स को राशिद को बाहर निकालने से रोकने की कोशिश की।
कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का विरोध
– कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने यह कहते हुए जीएसटी बिल का विरोध किया है कि यह राज्य की इकोनॉमिक आटोनॉमी में दखल देगा। विधानसभा के बाहर दोनों पार्टियों के नेताओं ने काले झंडे भी दिखाए।
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स्वागत है मेरे दोस्त, हमें भारतीय पीएम का 70 सालों से इंतजार था

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय दौरे पर इजराइल पहुंच गए हैं। इसराइल प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने मोदी का गर्मजोशी से तेल अवीव एयरपोर्ट पर स्वागत किया। बीते 70 साल में इसराइल का दौरा करने वाले नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। तेल अवीव में एयरपोर्ट पर पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू ने प्रोटोकॉल तोड़कर मोदी का वेलकम किया। एयरपोर्ट पर इजरायल के 11 मंत्री भी मौजूद थे। नेतन्याहू ने एक-एक कर सभी का परिचय मोदी से कराया। एयरपोर्ट से निकलकर मोदी दांजिगर डान फ्लावर फार्म देखने गए। वहां उन्होंने फूलों की खेती के नए तरीकों की जानकारी ली। इजरायल सरकार ने मोदी के सम्मान में गुलदाउदी के फूल को मोदी नाम दिया। इसके बाद मोदी यरूशलम के याद वाशेम मेमोरियल सेंटर (नेशनल होलोकॉस्ट मेमोरियल) गए। वहां उन्होंने नेतन्याहू और अन्य इजरायली लीडर्स के साथ मेमोरियल सेरेमनी में हिस्सा लिया।
– बेन गुरियन एयरपोर्ट पर मोदी के प्लेन से उतरते ही नेतन्याहू ने बहुत गर्मजोशी से उनका हाथ थाम लिया। दोनों नेता 18 मिनट में 3 बार गले मिले। फिर उनको इजरायली सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और दोनों देशों की राष्ट्रगान की धुन बजाई।
– एयरपोर्ट पर बने एक पंडाल में नेतन्याहू ने अपनी स्पीच की शुरुआत हाथ जोड़कर हिंदी में बोलते हुए की। उन्होंने कहा, आपका स्वागत है मेरे दोस्त। इस दौरान नेतन्याहू ने मोदी के लिए कई बार मेरे दोस्त वर्ड का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, हमें 70 साल से भारतीय पीएम का इंतजार था। पीएम मोदी ऐतिहासिक दौरे पर इजरायल आए हैं।
– हम भारत से प्यार करते हैं, आपके कल्चर, हिस्ट्री, डेमोक्रेसी और डेवलपमेंट के लिए कमिटमेंट की तारीफ करते हैं। बता दें कि मोदी 70 साल में इजरायल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। वे 3 दिन के दौरे पर इजरायल गए हैं।

नेतन्याहू के घर भी जाएंगे
– मंगलवार रात मोदी नेतन्याहू के यरूशलम स्थित घर भी जाएंगे। वहां साझा बयान जारी किया जाएगा। फिर मोदी-नेतन्याहू डिनर करेंगे।
मोदी का 5 मई का शेड्यूल
– मोदी बुधवार को इजरायल के प्रेसिडेंट रेउवेन रिवलिन से मुलाकात करेंगे। पीएम नेतन्याहू के साथ मीटिंग होगी। लंच के बाद दोनों देशों के बीच करार होंगे। ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी।
– मोदी अपोजिशन के नेता एमके इसाक हरजॉग से मुलाकात करेंगे। इसके बाद तेल अवीव में इंडियन कम्युनिटी के इवेंट में शिरकत करेंगे। इजरायल म्यूजियम देखने जाएंगे।

ये है 6 मई का शेड्यूल
– दौरे के तीसरे और आखिरी दिन गुरुवार को मोदी, नेतन्याहू के साथ हाइफा कब्रिस्तान जाएंगे, जहां पहले विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों को दफनाया गया था।
– इसके बाद दोनों नेता गैल मोबाइल-इंट्रीग्रेटेड वाटर प्यूरीफिकेशन देखने जाएंगे। इसे हाई क्वालिटी पीने का पानी तैयार करने के लिए बनाया गया है। इसका इस्तेमाल आपदा के वक्त पीने का पानी मुहैया कराने में भी किया जाता है।

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प्रचंड बहुमत का दुरुपयोग कर रही सरकारः इंदिरा हृदयेश


देहरादून।
कांग्रेस को सरकार की ओर से बीती मध्य रात्रि एकाएक सदन में ढैंचा बीज पर त्रिपाठी आयोग की जांच रिपोर्ट और लोकायुक्त व तबादला विधेयकों पर प्रवर समितियों की रिपोर्ट रखना सख्त नागवार गुजरा है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कार्यमंत्रणा समिति में उक्त विषयों को लाए बगैर सदन में पेश किए जाने पर नाराजगी जताते हुए अगले पांच साल तक कार्यमंत्रणा समिति के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
साथ में यह भी कहा कि विपक्ष के इस फैसले से भविष्य में किसी भी तरह के संवैधानिक संकट के लिए सरकार जिम्मेदार होगी। वहीं विपक्ष के तेवरों को भांप विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत नेता प्रतिपक्ष डॉ. हृदयेश के आवास पर पहुंचे। मुलाकात के दौरान काबीना मंत्री पंत ने नेता प्रतिपक्ष के सामने वस्तुस्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीति सबको साथ लेकर चलने की है। उधर, सरकार को घेरने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं दे रही कांग्रेस में अंदरखाने खींचतान भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष और उप नेता कांग्रेस विधानमंडल दल करन माहरा ने अलग-अलग पत्रकार वार्ता कर सरकार पर हमला बोला।
सदन में गुरुवार मध्य रात्रि तक चली सदन की कार्यवाही के आखिर में त्रिपाठी आयोग की जांच रिपोर्ट के साथ ही प्रवर समितियों के प्रतिवेदन रखने का एकमात्र विपक्षी दल कांग्रेस ने विरोध किया था। पार्टी ने कार्यमंत्रणा समिति में चर्चा के बगैर ही अनुपूरक कार्यसूची लाने और सदन में उक्त तीनों रिपोर्ट रखने को सदन और विपक्ष का अपमान करार दिया है।
अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि देशभर में विभिन्न विधानसभाओं में कार्यमंत्रणा समिति में विचार के बगैर ही अनुपूरक कार्यसूची को लाने का उदाहरण नहीं मिलता। प्रचंड बहुमत से जीतकर आई सरकार अहंकार में काम कर रही है। विपक्ष के विरोध को यह कहते हुए नजरअंदाज किया गया कि सदन सर्वोच्च है। ऐसा है तो सरकार भविष्य में कार्यमंत्रणा समिति के बजाए सदन में ही कार्यसूची पर मुहर लगाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगले पांच सालों तक कार्यमंत्रणा समिति की बैठकों में भाग नहीं लेगी। कांग्रेस की ओर से उनके साथ ही वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल और विधायक व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह कार्यमंत्रणा समिति में शिरकत नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने धोखा देकर संविधान विरुद्ध कार्य किया है।

सरकार ने सदन मे दिया जवाब कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं


देहरादून।
बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में गन्‍ना भुगतान, गैरसैंण आदि मुद्दे छाए रहे। विपक्ष ने गैरसैंण में सत्र चालने को लेकर सरकार को घेरा। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन-प्रश्नकाल के दौरान गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर सरकार ने कहा अगर चीनी मिले गन्ना किसानों का बकाया नहीं करेगी तो हमारे पास अन्य अधिकार है। अल्पसूचित प्रश्न में सबसे पहले विकासनगर विधायक प्रीतम सिंह ने 19 अप्रैल को गुम्मा हिमाचल में हुई बस दुर्घटना को सदन में उठाया। जिस के जवाब में सरकार ने नकार दिया। धनौलटी विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने सूबे में पेयजल की समस्या को सदन में रखा। नत्थी ग में तारांकित प्रश्नों को रखा गया। इसमें 9 प्रश्नों में गन्ना का मुद्दा हावी रहा। अतारांकित प्रश्न में कुल 11 सवाल लिए गए। इनमें भी गन्ना और पेयजल के सवालों की संख्या अधिक रही। धनौल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार के कृषि को उद्योग का दर्जा दिए जाने के सवाल पर सरकार से दिए उत्तर पर उलझे कृषि मंत्री। कृषि मंत्री ने जवाब दिया उद्योग और कृषि दोनों अलग अर्थव्यवस्था हैं। कृषि क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में सब्सिडी दी जाती है। इसलिए कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
नियम 58 के तहत नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन के पारित संकल्प के तहत गैरसैंण में सत्र आयोजित नहीं किया गया। आज तक भी ये जानकारी नहीं दी है कि गैरसैंण स्थाई राजधानी होगी या अस्थाई होगी। बयान आए कि वहां सुविधाएं नही हैं, जबकि वहां सभी सुविधाएं हैं। ये साफ करता हैं कि सरकार की मंशा नहीं वह सत्र करने की। सरकार ने गैरसैंण में विकास के लिए सरकार ने क्या प्रवधान किए इसका भी उल्लेख नहीं है। सरकार ये भी स्‍पष्‍ट करे की सरकार गैरसैंण में कभी सत्र होगा भी की नहीं। कुंजवाल ने कहा कि सदन में पारित संकल्प पर भी फैसला नहीं ले पा रही सरकार। गैरसैंण में टेंट में भी सत्र चला। निर्माणाधीन भवन में भी सत्र चला, लेकिन अब सरकार वहां जाना नहीं चाहती। सदन पारित प्रस्ताव की अवमानना हुई है। संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि गैरसैंण राज्य के लिए हमारी आस्था से जुड़ा है। वही यह भी सही है सदन नियमों के तहत चलता है। पूर्ववर्ती सरकार ने गैरसैंण में सत्र तो आयोजित किये, लेकिन वह विकास नहीं कर पाई। सत्र केवल सदन परिसर में ही हो सकता हैं। उन्‍होंने नियम 3 ब का हवाला दिया। कहा इसके लिए नियमों में बदलाव करना होगा।
चारधाम यात्रा के दौरान पूरे सिस्टम को गैरसैंण ले जाना तर्कसंगत नहीं है। गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि गैरसैंण में जो विधानसभा परिसर बना है, वो नियमों के तहत बनाया गया है। जब गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाए की रिपोर्ट सदन में रक्खी गई तो उसे फाड़ दिया गया था। वहीं प्रकाश पंत में कहा पूर्ववर्ती सरकार ने 5 साल तक इस मुद्दे पर कोई निर्णय नही लिया। कांग्रेस ने वाकआउट किया।

सात समझौतों पर करार, रूस पहुंचे मोदी

चार देशों की अपनी यात्रा के दूसरे पड़ाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय स्पेन में हैं। प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने बुधवार को स्पेन की कंपनियों को भारत के बुनियादी ढांचे, पर्यटन, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में निवेश का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में स्पेनिश कंपनियों के लिए अच्छे अवसर हैं। उन्होंने स्पेन के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मारियानो राजोय से मोनक्लोआ पैलेस में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। उसके बाद दोनों देशों के बीच सात समझौतों पर दस्तखत किए गए। राजोय से मुलाकात के दौरान मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि दोनों देश इस समय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। पीएम ने स्पेन के राजा फेल्पी से मैड्रिड के बाहरी हिस्से में बने महल में मुलाकात की।

सात समझौते
-साइबर सुरक्षा में सहयोग
-नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मदद
-अंग प्रत्यारोपण में तकनीकी सहायता
-नागरिक विमानन का विकास
-भारतीय विदेश सेवा संस्थान और डिप्लोमैटिक एकेडमी ऑफ स्पेन के बीच सहयोग
-सजायाफ्ता लोगों का हस्तांतरण
-राजनयिक पासपोर्टधारकों को वीजा छूट 5.27 अरब डॉलर का कारोबार
-यूरोपीय संघ का सदस्य स्पेन भारत का सातवां बड़ा व्यापारिक साझेदार और 12वां सबसे बड़ा निवेशक है।
-वर्ष 2016 में दोनों देशों का कुल व्यापार 5.27 अरब डॉलर (340 अरब रुपये) का रहा था।
-भारत में 200 से ज्यादा स्पेनिश कंपनियां कार्यरत हैं। ये सड़क निर्माण, रेलवे, पवन ऊर्जा, रक्षा और स्मार्ट सिटी के विकास में कार्यरत हैं।
-भारत की 40 कंपनियां स्पेन के प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोटिव व ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत हैं। 1992 में नरसिम्हाराव गए थे स्पेन 25 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री स्पेन पहुंचा है। उनसे पहले 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव स्पेन यात्रा पर गए थे।

रूस पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी छह दिनी विदेश यात्रा के तीसरे चरण में बुधवार शाम को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच गए। वह वहां राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ 18 वीं भारत-रूस सालाना शिखर बैठक करेंगे। वह सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में भी भाग लेंगे। मोदी दो और तीन जून को फ्रांस में रहेंगे।

कांग्रेस के संगठनात्क चुनाव की तैयारियां तेज

ऋषिकेश।
रविवार को सहायक प्रदेश चुनाव अधिकारी सचिन नाईक ने रेलवे रोड स्थित कांग्रेस भवन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक ली। उन्होंने जानकारी दी कि कांग्रेस संगठन की चुनाव प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है। बताया कि सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर सदस्यता अभियान में जुट जायें और सभी अपनी सदस्यता बुक जिला, नगर, ब्लॉक अध्यक्षों के पास जमा करवाये। प्रदेश कार्यालय में भी सदस्यता बुकें जमा कराने की उन्होंने जानकारी दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष जयेन्द्र रमोला ने की। बताया कि कहा कि कांग्रेस सदस्यता अभियान में सभी प्रदेश पदाधिकारी, नगर, ब्लॉक अध्यक्ष व फ्रंटल के पदाधिकारी जिन के पास भी सदस्यता बुकें है वह समय से जमा कर आगे की प्रक्रिया में जुटें ।
मौके पर प्रदेश कार्यक्रम प्रभारी संजय किशोर, प्रदेश महासचिव राजपाल खरोला, महन्त विनय सारस्वत, शिवमोहन मिश्र, राम बिलास रावत, राजबीर खत्री, राजेश ब्यास, विनोद चौहान, मधु जोशी, मनीष शर्मा, मधु मिश्रा, वेद प्रकाश शर्मा, सूरत सिंह नेगी, अश्वनी बहुगुणा, मुमताज़ हाशिम, सतीश शर्मा, नन्द किशोर, राजेश शाह, सहदेव राठौर, मुकेश जाटव, बृजेश निगम, चन्द्रकान्ता जोशी, उमा देवी, प्राशु बनर्जी, राकेश मिया आदि मौजूद थे।

जीएसटी पर भाजपा-कांग्रेस में बयानबाजी तेज

देहरादून।
केंद्र सरकार देशभर में जीएसटी लागू करने की तरफ कदम बढ़ा रही है। इस के साथ उत्तराखंड भी देश का पांचवा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने एसजीएसटी बिल को अपनी विधानसभा में पास करा लिया है। जिसके बाद उत्तराखंड देश के उन राज्यों में से एक बन गया है जिसने जीएसटी को लागू कराने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर ली है। साथ ही उत्तराखंड में जीएसटी पास होने से प्रदेश की सरकार इसे अपने लिए बड़ी उपलब्धि मान रही है। सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की माने ये प्रदेश के सुधार की दिशा में एक अहम कदम है और इससे केंद्र और राज्य के बीच समान राष्ट्रीय बाजार की स्थापना होगी।
सदन में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस ने भले ही एसजीएसटी को लेकर कोई विरोध नहीं किया। लेकिन विधानसभा के बाहर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीएसटी को यूपीए सरकार की उपलब्धि बता रहे है। उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने जहां एक तरफ जीएसटी का स्वागत किया तो वहीं केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर बीजेपी रोड़ा ना अटकाती तो देश मे जीएसटी पांच साल पहले ही लागू हो जाता। उनका कहना है कि मनमोहन सिंह की सरकार ही जीएसटी बिल को संसद मे पहली बार लेकर आई थी।

योगेन्द्र यादव के केजरीवाल को लिखे पत्र से आप की हवाईयां उड़ी

नई दिल्ली।
नगर निगम चुनाव से एक दिन पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के पुराने साथी और स्वराज अभियान के सदस्य योगेंद्र यादव ने केजरीवाल को चिट्ठी लिखी है। योगेंद्र यादव ने अपनी चिट्टी में केजरीवाल को दिल्ली की गंदगी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। यादव ने पत्र में लिखा कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता का विश्वास तोड़ा है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के वादों का जिक्र करते हुए लिखा है कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से लालच, डर और धमकी देकर वोट हासिल करने की कोशिश की है।

प्रिय अरविन्द,
दो साल पहले दिल्ली ने जो ऐतिहासिक जनादेश दिया था, वो किसी एक नेता या पार्टी का करिश्मा नहीं था। उसके पीछे हज़ारों वोलन्टीयर का त्याग और उनकी तपस्या थी। लेकिन इस करिश्मे का सबसे बड़ा कारण था दिल्ली की जनता का आत्मबल। जनलोकपाल आंदोलन ने दिल्ली के लाखों नागरिकों को यह भरोसा दिलाया कि वो बेचारे नहीं हैं। वो नेताओं, पार्टियों और सरकारों से ज्यादा ताकतवर हैं। आज मैं उस आत्मबल को डगमगाते हुए देख रहा हूँ। इसलिए पिछले दो साल में पहली बार आपसे संवाद कर रहा हूँ और आपको रामलीला मैदान में किए रिकॉल के वादे की याद दिला रहा हूँ।
पिछले महीने में मुझे दिल्ली नगर निगम (MCD) के चुनाव के दौरान दिल्ली के कोने-कोने में जाने का मौका मिला। दिल्ली में चारों तरफ कूड़े के ढेर हैं, गन्दा पानी रुका हुआ है, बदबूदार और खतरनाक हवा है। हर कोई जानता है कि इसकी पहली जिम्मेवारी पिछले दस साल से MCD पर राज कर रही बीजेपी की है। लेकिन फिर भी बीजेपी बेशर्मी से इस चुनाव में खड़ी है, वोट मांग रही है। ऐसे बहुत वोटर हैं जिन्होंने 2015 में ऐतिहासिक बदलाव के लिए वोट दिया था, लेकिन जो इस बार थक-हार के बीजेपी के पास वापिस जा रहे हैं। मैं पिछले महीने भर से सोच रहा हूँ कि इस निक्कमी और भ्रष्ट सरकार को चलाने वाली बीजेपी को MCD चुनाव में खड़े होने का मौका देने के लिए कौन जिम्मेवार है।
बहुत सोचने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पंहुचा हूँ कि दिल्ली की इस दुर्घटना के लिए व्यक्तिगत रूप से आप जिम्मेवार हैं। आपने दिल्ली की जनता का विशवास तोड़ा है। विश्वास सिर्फ एक नेता या पार्टी से नहीं टूटा है। जनता का खुद अपने आप से विश्वास टूटा है — आप से धोखा खाने के बाद उन्हें लगता है कि उन्हें अच्छे-बुरे की पहचान नहीं है। इसलिए टूटे मन से बहुत लोग उन्ही पुरानी पार्टियों के पास जा रहे हैं जिन्हे उन्होंने दो साल पहले ख़ारिज कर दिया था। लोकतंत्र में जनता की आशा जगाकर उसे तोड़ना बहुत बड़ा पाप है। जनता के आत्मबल को कमजोर करना सबसे बड़ा अपराध हैं। मैं यह कहने को मजबूर हूँ कि अपने अहंकार, आत्म-मोह और कुर्सी के लालच में आपने यह अपराध किया है। ये सिर्फ मैं नहीं कहता, दिल्ली के हर मोहल्ले और गली में हर कोई ये कहता है। इस चुनाव प्रचार के दौरान आपने वोटर को जिस तरह लालच, डर और धमकी दी है उसमे मुझे “विनाशकाले विपरीत बुद्धि” के लक्षण दिखाई देते हैं।
जाहिर है आप मुझसे सहमत नहीं होंगे। आपने बार-बार कहा है कि दिल्ली की जनता आपके साथ है। दिल्ली में कल होने वाले MCD के चुनाव को आपने अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के रेफेरेंडम में बदल दिया है। आपकी पार्टी सिर्फ आपके नाम पर वोट मांग रही है। होर्डिंग में पार्टी का नाम तक नहीं है। आपकी पार्टी ने एक इंटरनल सर्वे भी जारी किया है कि आपकी पार्टी MCD चुनाव में 218 सीटें लेकर जीत रही है।
मेरा एक प्रस्ताव है। अगर आपको इस चुनाव में तीनों MCD में कुल मिलाकर बहुमत (यानि सिर्फ 137 सीटें) आ जाता है तो मैं यह मान लूँगा कि मेरी समझ गलत है और दिल्ली की जनता आपको धोखेबाज नहीं मानती। ऐसे में अगर केंद्र सरकार आपकी सरकार के खिलाफ कोई षड़यंत्र करती है तो हमारी पार्टी और मैं खुद आपका समर्थन करेंगे। लेकिन अगर दिल्ली में 70 में से 67 सीट जीतने के दो साल में ही आप इस रेफेरेंडम में हार जाते हैं तो नैतिकता की मांग है कि आप EVM जैसा कोई बहाना ना बनाएँ, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दें और आपकी सरकार दिल्ली में ‘रिकॉल’ के सिद्धांत के अनुसार दुबारा जनता से विश्वास मत हासिल करे।
आशा है आपको रामलीला मैदान में कही अपनी ही बातें याद होंगी और आप इस चुनौती को स्वीकार करेंगे।
आपका पुराना साथी,
योगेंद्र यादव