नीतिश के इस्तीफे से बिहार की राजनीति में भूचाल

तेजस्वी यादव पर जेडीयू-आरजेडी में बढ़ती तकरार के बीच बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बुधवार शाम गवर्नर को इस्तीफा सौंप दिया। नीतीश पार्टी की विधायक दल की मीटिंग के बाद सीधे गवर्नर हाउस गए थे, जहां उन्होंने केसरी नाथ त्रिपाठी को अपना इस्तीफा सौंपा। वे बोले, आगे क्या होगा, ये आगे पर छोड़ दीजिए। आज का चैप्टर यहीं खत्म। नीतीश के इस्तीफे के बाद नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी। इससे पहले लालू यादव ने कहा था कि बिहार सरकार 5 साल पूरे करेगी, लेकिन नीतीश के इस्तीफे के बाद अब सवाल सामने आ रहा है कि महागठबंधन बचेगा या फिर टूटेगा? बता दें कि रेलवे टेंडर स्कैम और बेनामी प्रॉपर्टी मामले में केस दर्ज होने पर बीजेपी लगातार तेजस्वी के इस्तीफे की मांग कर रही है। जेडीयू भी कह चुकी है कि तेजस्वी को जनता के बीच जाकर सफाई देनी चाहिए।

इस्तीफे के बाद नतीश ने क्या कहा?
गवर्नर को इस्तीफा सौंपने के बाद नीतीश ने कहा, मैंने अभी महामहिम को इस्तीफा सौंपा है। महागठबंधन की सरकार 20 महीने से भी ज्यादा समय तक चलाई है। …और मुझसे जितना संभव हुआ, हमने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए बिहार की जनता के समक्ष चुनाव के दौरान जिन बातों की चर्चा की थी, उसी के मुताबिक हमने काम करने की कोशिश की थी। हमने शराबबंदी लागू कर सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी। बुनियादी ढांचे का विकास हो, सड़क हो, बिजली का मामला हो, सभी के लिए हमने निरंतर काम करने की कोशिश की और निश्चय यात्रा के दौरान हर जिले में जिन योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है, उन्हें स्पॉट पर देखा। जितना संभव था, हमने काम करने की कोशिश की।

महागठबंधन में काम करना संभव नहीं
20 महीने में एक तिहाई कार्यकाल पूरा किया। जिस तरह की चीजें सामने आईं, उसमें मेरे लिए महागठबंधन का नेतृत्व करना और काम करना संभव नहीं था। हमने किसी का इस्तीफा नहीं मांगा। हमारी लालू जी से भी बात होती रही। तेजस्वी जी से भी मिले। हमने यही कहा कि जो भी आरोप लगे, उसके बारे में एक्सप्लेन कीजिए। आमजन के बीच में जो एक अवधारणा बन रही है, उसको ठीक करने के लिए एक्सप्लेन करना जरूरी है। लेकिन वह भी नहीं हो रहा था।

मेरी अंतरआत्मा की आवाज
कुल मिलाकर माहौल ऐसा बनता जा रहा था कि हमारे लिए काम करना संभव नहीं था। हम कुछ भी काम करें, परिचर्चा में एक ही बात हो रही थी। हमने आज तक रुख अख्तियार किया, उससे अलग रुख नहीं अपना सकते थे। हमने गठबंधन धर्म का पालन किया। लेकिन ये मेरे अंतरआत्मा की आवाज थी। कई दिनों से यह बात मेरे मन में थी कि कोई रास्ता निकल आए। हमने राहुलजी से भी बात की। उनका भी यही रुख रहा है। उन्होंने ही (दोषियों को चुनाव लड़ने से छूट देने का) ऑर्डिनेंस फाड़ा था।

हार के बाद कौन सा दांव खेल रहे हरीश रावत

देहरादून।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा चुनाव ने भले ही मायूस किया हो, लेकिन उनके हौसले अभी पस्त नहीं हुए हैं। दावतों का सिलसिला जारी रख वह खुद को सूबे की सियासत के केंद्र में बनाए रखने का कोई मौका चूकने को तैयार नहीं हैं। लेकिन, दो माह के भीतर उनकी दावतों का अंदाज कुछ अलहदा ही है।
विधानसभा चुनाव में हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर की जिन दो सीटों पर मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने जो दांव खेला था, उसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दून शहर से दूरी बनाकर पहाड़ की तलहटी को अपने आशियाने के लिए चुना। इसके बाद पहाड़ को केंद्र में रखकर उनकी दावतों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उससे पार्टी के बाहर और भीतर उनके प्रतिद्वंद्वी भी खासे सकते में हैं। हरदा सुर्खिया बटोरने में उनसे कहीं आगे हैं।
पहाड़ के उत्पादों को उनकी दावतों में मिल रही तरजीह को उनके पहाड़ को केंद्र में रखकर बुने जा रहे सियासी एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। इस एजेंडे के निशाने पर वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव भी हैं। विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जा चुका है, लिहाजा हरीश रावत यह जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में उनकी सियासी हैसियत उनकी सक्रियता से ही साबित होनी है। ऐसे में हरदा अभी से फूंक-फूंककर कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। पहाड़ की सियासत में रिवर्स पलायन को उनकी रणनीति का ही हिस्सा माना जा रहा है। इसके बूते ही पलायन से शहरों में उभर गए मतदाताओं के पहाड़ों पर भी उनकी नजरें टिकी हैं।

प्रणब मुखर्जी ने भारतीय राजनीति के दिग्गज नेताओं को याद किया

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के लिए रविवार शाम संसद में विदाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संसद के सेंट्रल हॉल में विदाई कार्यक्रम में शामिल होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन समेत दोनों सदन के सदस्य मौजूद रहे। इनमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया भी मौजूद रहीं। सोमवार को प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल का आखिरी दिन है। नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को शपथ लेंगे।

सुमित्रा महाजन ने पढ़ा विदाई भाषण
राष्ट्रपति के विदाई कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने विदाई भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के राजनीतिक करियर का बखान किया। साथ ही उनकी उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी। इसके बाद सुमित्रा महाजन ने राष्ट्रपति को विदाई भाषण की प्रति भेंट की।

प्रणब मुखर्जी का आखिरी भाषण
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा स्पीकर और उपराष्ट्रपति का धन्यवाद किया। साथ ही संसद के सभी सदस्यों का अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि मैं 34 साल की उम्र में पहली बार सांसद के रूप 22 जुलाई 1969 को राज्यसभा पहुंचा।
इस दौरान उन्होंने अपने संसदीय कार्यकाल का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, बीजेपी के वरिष्ठ सांसद लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी याद किया। राष्ट्रपति मुखर्जी ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को भी याद किया। वहीं प्रणब मुखर्जी ने ये भी कहा कि देश की एकता संविधान का आधार है।

मोदी ने दी डिनर पार्टी
इससे पहले शनिवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सम्मान में डिनर पार्टी रखी थी। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने प्रणब मुखर्जी को स्मृति चिन्ह भेंट किया। देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। इस समारोह में नव-निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ मोदी कैबिनेट के मंत्री और एनडीए के सहयोगी दलों के नेता शामिल हुए।

कांग्रेस छोड़ने का ऐलान करने के बाद आरएसएस से अपना रिश्ता बता गये कांग्रेस नेता

गुजरात के बड़े नेता शंकर सिंह वाघेला को कांग्रेस ने एक दिन पहले ही पार्टी से निष्काषित कर दिया है। इस बात की जानकारी खुद शंकर सिंह वाघेला ने दी है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का भी ऐलान कर दिया। अपने 77वें जन्मदिन पर गांधीनगर में आयोजित बड़े कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया। हालांकि उन्होंने ये भी साफ कर दिया कि वो किसी भी पार्टी में नहीं जाएंगे।
जन्मदिन पर शंकर सिंह वाघेला का कांग्रेस छोड़ने का ऐलान वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला ने कांग्रेस छोड़ने का औपचारिक ऐलान करते हुए कहा कि मैं अपने आप कांग्रेस को अपने से मुक्त करता हूं। उन्होंने इसी के साथ ये भी साफ कर दिया कि मैं अभी किसी भी पार्टी में नहीं जा रहा हूं। मैं कोई पार्टी ज्वाइन नहीं करूंगा। उन्होंने बताया कि मैं कुछ दिन पहले सोनिया गांधी से मिला था। उस समय मैंने कहा था कि मैं बीजेपी ज्वाइन करके उनका विश्वास नहीं तोड़ूंगा।
इससे पहले शंकर सिंह वाघेला ने बताया कि गांधीनगर में मेरे कार्यक्रम की जानकारी जैसे ही कांग्रेस को हुई उन्हें लगा कि पता नहीं मैं क्या ऐलान करूंगा, इसी से परेशान होकर 24 घंटे पहले ही उन्होंने मुझे पार्टी से निष्काषित कर दिया। उन्होंने कांग्रेस के इस कदम का विरोध करते हुए इसे विनाश काले विपरीत बुद्धि करार दिया है।
77 साल के शंकर सिंह वाघेला ने गांधीनगर में अपने जन्मदिन पर खास कार्यक्रम के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नेता और समर्थक जुटे। गांधीनगर में आयोजित खास कार्यक्रम के दौरान शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि मैं अभी 77 नॉट आउट हूं और जनता हमारी संजीवनी है। बापू रिटायर नहीं होगा। ये मेरी जिंदगी का निर्णायक मौका है।
मेरा आरएसएस से पुराना नाता है
वाघेला शंकर सिंह वाघेला ने आरएसएस का जिक्र करते हुए कहा कि आरएसएस ने दूसरे की सेवा करना सिखाया। मेरा आरएसएस से पुराना नाता है। मेरे साथ आरएसएस के अच्छे लोग संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के हित से ज्यादा प्रजा का हित हमारे लिए जरूरी है। आप हमारे लिए नहीं हम आपके लिए हैं।
वहीं, कांग्रेस ने शंकर सिंह वाघेला के निकाले जाने का किया खंडन शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि मैंने लाल बत्ती 20 साल पहले ही हटा दी थी। हम पावर को छोड़ने वाले हैं। हम सांसद और विधायक बनाने वाले हैं। भले ही शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 24 घंटे पहले निकाल दिया है, लेकिन कांग्रेस उनकी बात का खंडन किया है।

लोकसभा उप चुनाव में मायावती के लड़ने से भाजपा में बैचेनी!

राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद मायावती का अगला कदम क्या होगा? आखिर किस तरीके से मायावती अपने पॉलिटिकल करियर में निखार लाएंगी? मिली जानकारी के मुताबिक मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा गुस्से में आकर नहीं दिया है बल्कि ये इस्तीफा एक प्लानिंग के तहत हुआ है। मायावती अपनी राजनीति सेट करने के लिए फूलपुर से लोकसभा का उप-चुनाव लड़ सकती हैं और इस लड़ाई में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी उनका साथ देंगे।
फूलपुर से यूपी में हो सकती है महागठबंधन की शुरुआत
राजनीति के गलियारों में एक सुगबुगाहट और जोर पकड़ रही है। दबी जुबान में बीएसपी के खेमे में चर्चा है कि बहन जी उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा से उप चुनाव में खड़ी हो सकती हैं। वह भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के समर्थन के साथ। यानी साल 2019 से लोकसभा चुनाव से पहले यूपी में महागठबंधन का एक प्रयोग फूलपुर लोकसभा के उप चुनाव के वक्त किया जा सकता है।
मायावती को मिल सकता है अखिलेश का साथ
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस तरह के गठबंधन पर सकारात्मक बयान दे ही चुके हैं। वहीं मायावती ने भी पिछले दिनों भाजपा को रोकने के लिए किसी के भी साथ हाथ मिलाने का बयान दिया था। भाजपा को शिकस्त देने की तैयारी में जुटा विपक्ष इसके लिए यूपी में महागठबंधन की तैयारी में जुटा है। बिहार में राजनीतिक संकट के बीच जहां लालू यादव का विपक्ष को एकजुट करने को लेकर 27 अगस्त की रैली अभी प्रस्तावित ही है। बसपा सूत्रों की माने तो यूपी की विधानसभा चुनाव के बाद खाली हुई लोकसभा सीट में महागठबंधन मायावती को प्रत्याशी बनाने पर विचार कर रहा है।
फुलपुर में होना है उपचुनाव
दरअसल उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा सीट से मौजूदा वक्त में भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य सांसद हैं। यूपी विधानसभा चुनाव के बाद मौर्य, यूपी सरकार में उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। लिहाजा उप राष्ट्रपति चुनाव के बाद उनका और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का अपनी गोरखपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा देना तय है। जिसके बाद फूलपुर और गोरखपुर में उप चुनाव होंगे।
मुश्किल में बीजेपी !
लोकसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा की अभीतक की रणनीति के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस उपचुनाव से दूर रहेंगे। ऐसे में जाहिर है कि सीएम योगी आदित्नाथ पर ही लोकसभा की दोनों सीटें जीतने का दबाव होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि मायावती के महागठबंधन की प्रत्याशी बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक कौशल की भी पूरी परीक्षा हो जाएगी।

कोविन्दः क्रॉस वोटिंग से विपक्ष का खेमा चित्त

राष्ट्रपति चुनाव में बड़े पैमाने पर रामनाथ कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हुई है। गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दिल्ली में कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की खबर है। गुजरात की क्रॉस वोटिंग कांग्रेस के लिए बुरी खबर है क्योंकि अगले महीने ही राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने हैं। राज्य में इसी साल विधानसभा के भी चुनाव हैं। माना जा रहा है कि शंकर सिंह वाघेला के समर्थक विधायकों ने कोविंद के पक्ष में वोट डाला।
गुजरात में कोविंद को 132 वोट मिले और मीरा कुमार को 49, जबकि राज्य में बीजेपी के 121 विधायक हैं और कांग्रेस के 57। इस हिसाब से कम से कम 8 कांग्रेस विधायकों ने कोविंद के पक्ष में वोट दिया। जबकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों के भी कोविंद के पक्ष में वोट डालने की खबर है। दिल्ली में कोविंद को 6 जबकि मीरा कुमार को 55 वोट मिले। जबकि बीजेपी के चार ही विधायक हैं। इस हिसाब से आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने कोविंद को वोट दिया। जबकि 6 वोट वैध नहीं पाए गए. पश्चिम बंगाल में भी दिलचस्प तस्वीर उभर कर सामने आई। वहां कोविंद को 11 जबकि मीरा कुमार को 273 वोट मिले। बीजेपी और उसके सहयोगी दल के 6 वोट हैं। इस हिसाब से कोविंद को कुछ दूसरी पार्टियों के वोट भी मिले।
त्रिपुरा में भी रामनाथ कोविंद को वोट मिले हैं। वहां से कोविंद को सात जबकि मीरा कुमार को 53 वोट मिले। जबकि वहां बीजेपी का कोई विधायक नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों ने कोविंद को वोट दिया। महाराष्ट्र में भी कोविंद के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की खबर है। वहां कोविंद को 208 जबकि मीरा कुमार को 77 वोट मिले। वहां बीजेपी-शिवसेना के 185 विधायक हैं जबकि कांग्रेस एनसीपी के 83। इस हिसाब से कांग्रेस एनसीपी के कुछ वोट दूसरे खेमे में गए दिखते हैं।
गोवा में बीजेपी की गठबंधन सरकार है। वहां कोविंद को 25 वोट मिले जबकि मीरा कुमार को 11 वोट मिले। वहां बीजेपी और सहयोगी पार्टियों के 22 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के 16। यानी मीरा कुमार को उम्मीद से पांच वोट कम मिले।
इसी तरह असम में भी सत्तारूढ़ बीजेपी को विपक्षी खेमें में सेंध लगाने में कामयाबी मिली है। वहां कोविंद को 91 वोट मिले जबकि मीरा कुमार को 35। लेकिन बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास 87 विधायक ही हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के पास 39 विधायक। यानी कोविंद को उम्मीद से चार वोट ज्यादा मिले हैं।
इस चुनाव में 21 सांसदों के वोट वैध नहीं पाए गए। जबकि कुछ विधायकों ने भी वोट डालने में गड़बड़ की। 56 विधायक अपने वोट ठीक से नहीं डाल पाए और उन्हें वैध नहीं माना गया। क्रॉस वोटिंग के कई सियासी मायने हैं। ये आने वाले वक्त में कई राज्यों में सियासी समीकरणों के बनने-बिगड़ने का इशारा कर रहे हैं। खासतौर से गुजरात में तस्वीर बेहद दिलचस्प हो सकती है क्योंकि शंकर सिंह वाघेला के बागी तेवर आने वाले दिनों में खुल कर सामने आ सकते हैं।

संसदीय नियमों के अनुसार मायावती का इस्तीफा नामंजूर होने के आसार!

राज्यसभा में बोलने की इजाजत न मिलने पर भड़कीं बसपा सुप्रीमो ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मायावती ने राज्यसभा सभापति के दफ्तर पहुंचकर बाकायदा तीन पेज का इस्तीफा सौंपा. हालांकि, वहां मौजूद कांग्रेस और बीएसपी सांसदों ने उन्हें मनाने की कोशिश की, बावजूद इसके मायावती अपने स्टैंड पर कायम नजर आईं और सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मगर, बड़ा सवाल है कि क्या मायावती का इस्तीफा मंजूर होगा?
ये सवाल इसलिए भी जरुरी है क्योंकि संसद की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए जो नियम हैं, मायावती ने उनका पालन नहीं किया है। नियम है कि संसद के दोनों सदनों का कोई भी सदस्य जब अपनी सदस्यता से इस्तीफा देता है तो महज एक लाइन में लिखकर संबंद्ध चेयरमैन या स्पीकर को सौंपना होता है। जबकि इसके उलट मायावती ने जो इस्तीफा राज्यसभा सभापति के ऑफिस जाकर सौंपा वो तीन पन्नों का है।
नियम के मुताबिक इस्तीफे के साथ न ही कोई कारण बताया जाता है और न ही उस पर कोई सफाई दी जाती है। कोई भी संसद सदस्य इस्तीफा देते वक्त इस्तीफा देने का कारण त्यागपत्र में नहीं लिख सकता है।

पहले भी इस्तीफा हुआ है नामंजूर
रोड रेज की घटना में दोषी पाए जाने के बाद 2006 में तत्कालीन लोकसभा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दिया था। मगर सिद्धू का इस्तीफा तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने नामंजूर कर दिया था। जिसके बाद सिद्धू ने दोबारा बिना कोई कारण बताए अपना त्यागपत्र स्पीकर को दिया, जिसे मंजूर कर लिया गया था।
यही नही, नवंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने सतलुज यमुना लिंक नहर पर निर्माण कार्य जारी रखने का फैसला दिया था। इस फैसले से नाराज होकर तत्कालीन कांग्रेस सांसद कैप्टन अमरिंदर सिंह लोकसभा स्पीकर को अपना इस्तीफा भेज दिया था। कैप्टन अमरिंदर ने अपने त्यागपत्र में इस्तीफा देने के कारण की व्याख्या भी की थी, जिसे उपयुक्त न मानते हुए मंजूर नहीं किया गया था।

कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जीएसटी को कश्मीर की इकोनॉमिक आटोनॉमी में दखल बताया

जीएसटी बिल को लेकर मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। इंडीपेन्डेंट एमएलए इंजीनियर राशिद ने बिल लागू करने का विरोध किया। वे बीजेपी विधायकों से भिड़ गए। अपोजिशन ने राशिद का समर्थन किया। इस पर स्पीकर ने मार्शल्स से शोर शराबा कर रहे राशिद को सदन से बाहर ले जाने को कहा। लेकिन राशिद और अपोजिशन के मेंबर्स मार्शल्स से भी भिड़ गए। इस खींचातानी में सदन के स्टाफ का एक ऑफिशियल बेहोश हो गया।
राज्य में जीएसटी लागू करने के लिए सरकार ने असेंबली में प्रस्ताव पेश किया। सुबह इस पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान इंजीनियर राशिद ने कश्मीर मसले पर प्रस्ताव पेश की मांग करते हुए कई बार चर्चा को बाधित किया। राशिद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवादित क्षेत्र है, इस पर एक प्रस्ताव लंबित है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा-राशिद को छूकर दिखाओ
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने राशिद का बचाव किया। उन्होंने बीजेपी मेंबर्स को चुनौती दी कि वे राशिद को छूकर दिखाएं। हालात बेकाबू होते देख स्पीकर कविन्द्र गुप्ता ने मार्शल्स से राशिद को सदन से बाहर निकालने को कहा। लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अल्ताफ वानी, अब्दुल मजीद भट और मोहम्मद अकबर लोन ने मार्शल्स को राशिद को बाहर निकालने से रोकने की कोशिश की।
कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का विरोध
– कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने यह कहते हुए जीएसटी बिल का विरोध किया है कि यह राज्य की इकोनॉमिक आटोनॉमी में दखल देगा। विधानसभा के बाहर दोनों पार्टियों के नेताओं ने काले झंडे भी दिखाए।
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स्वागत है मेरे दोस्त, हमें भारतीय पीएम का 70 सालों से इंतजार था

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय दौरे पर इजराइल पहुंच गए हैं। इसराइल प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने मोदी का गर्मजोशी से तेल अवीव एयरपोर्ट पर स्वागत किया। बीते 70 साल में इसराइल का दौरा करने वाले नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। तेल अवीव में एयरपोर्ट पर पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू ने प्रोटोकॉल तोड़कर मोदी का वेलकम किया। एयरपोर्ट पर इजरायल के 11 मंत्री भी मौजूद थे। नेतन्याहू ने एक-एक कर सभी का परिचय मोदी से कराया। एयरपोर्ट से निकलकर मोदी दांजिगर डान फ्लावर फार्म देखने गए। वहां उन्होंने फूलों की खेती के नए तरीकों की जानकारी ली। इजरायल सरकार ने मोदी के सम्मान में गुलदाउदी के फूल को मोदी नाम दिया। इसके बाद मोदी यरूशलम के याद वाशेम मेमोरियल सेंटर (नेशनल होलोकॉस्ट मेमोरियल) गए। वहां उन्होंने नेतन्याहू और अन्य इजरायली लीडर्स के साथ मेमोरियल सेरेमनी में हिस्सा लिया।
– बेन गुरियन एयरपोर्ट पर मोदी के प्लेन से उतरते ही नेतन्याहू ने बहुत गर्मजोशी से उनका हाथ थाम लिया। दोनों नेता 18 मिनट में 3 बार गले मिले। फिर उनको इजरायली सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और दोनों देशों की राष्ट्रगान की धुन बजाई।
– एयरपोर्ट पर बने एक पंडाल में नेतन्याहू ने अपनी स्पीच की शुरुआत हाथ जोड़कर हिंदी में बोलते हुए की। उन्होंने कहा, आपका स्वागत है मेरे दोस्त। इस दौरान नेतन्याहू ने मोदी के लिए कई बार मेरे दोस्त वर्ड का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, हमें 70 साल से भारतीय पीएम का इंतजार था। पीएम मोदी ऐतिहासिक दौरे पर इजरायल आए हैं।
– हम भारत से प्यार करते हैं, आपके कल्चर, हिस्ट्री, डेमोक्रेसी और डेवलपमेंट के लिए कमिटमेंट की तारीफ करते हैं। बता दें कि मोदी 70 साल में इजरायल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। वे 3 दिन के दौरे पर इजरायल गए हैं।

नेतन्याहू के घर भी जाएंगे
– मंगलवार रात मोदी नेतन्याहू के यरूशलम स्थित घर भी जाएंगे। वहां साझा बयान जारी किया जाएगा। फिर मोदी-नेतन्याहू डिनर करेंगे।
मोदी का 5 मई का शेड्यूल
– मोदी बुधवार को इजरायल के प्रेसिडेंट रेउवेन रिवलिन से मुलाकात करेंगे। पीएम नेतन्याहू के साथ मीटिंग होगी। लंच के बाद दोनों देशों के बीच करार होंगे। ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी।
– मोदी अपोजिशन के नेता एमके इसाक हरजॉग से मुलाकात करेंगे। इसके बाद तेल अवीव में इंडियन कम्युनिटी के इवेंट में शिरकत करेंगे। इजरायल म्यूजियम देखने जाएंगे।

ये है 6 मई का शेड्यूल
– दौरे के तीसरे और आखिरी दिन गुरुवार को मोदी, नेतन्याहू के साथ हाइफा कब्रिस्तान जाएंगे, जहां पहले विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों को दफनाया गया था।
– इसके बाद दोनों नेता गैल मोबाइल-इंट्रीग्रेटेड वाटर प्यूरीफिकेशन देखने जाएंगे। इसे हाई क्वालिटी पीने का पानी तैयार करने के लिए बनाया गया है। इसका इस्तेमाल आपदा के वक्त पीने का पानी मुहैया कराने में भी किया जाता है।

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प्रचंड बहुमत का दुरुपयोग कर रही सरकारः इंदिरा हृदयेश


देहरादून।
कांग्रेस को सरकार की ओर से बीती मध्य रात्रि एकाएक सदन में ढैंचा बीज पर त्रिपाठी आयोग की जांच रिपोर्ट और लोकायुक्त व तबादला विधेयकों पर प्रवर समितियों की रिपोर्ट रखना सख्त नागवार गुजरा है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कार्यमंत्रणा समिति में उक्त विषयों को लाए बगैर सदन में पेश किए जाने पर नाराजगी जताते हुए अगले पांच साल तक कार्यमंत्रणा समिति के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
साथ में यह भी कहा कि विपक्ष के इस फैसले से भविष्य में किसी भी तरह के संवैधानिक संकट के लिए सरकार जिम्मेदार होगी। वहीं विपक्ष के तेवरों को भांप विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत नेता प्रतिपक्ष डॉ. हृदयेश के आवास पर पहुंचे। मुलाकात के दौरान काबीना मंत्री पंत ने नेता प्रतिपक्ष के सामने वस्तुस्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीति सबको साथ लेकर चलने की है। उधर, सरकार को घेरने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं दे रही कांग्रेस में अंदरखाने खींचतान भी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष और उप नेता कांग्रेस विधानमंडल दल करन माहरा ने अलग-अलग पत्रकार वार्ता कर सरकार पर हमला बोला।
सदन में गुरुवार मध्य रात्रि तक चली सदन की कार्यवाही के आखिर में त्रिपाठी आयोग की जांच रिपोर्ट के साथ ही प्रवर समितियों के प्रतिवेदन रखने का एकमात्र विपक्षी दल कांग्रेस ने विरोध किया था। पार्टी ने कार्यमंत्रणा समिति में चर्चा के बगैर ही अनुपूरक कार्यसूची लाने और सदन में उक्त तीनों रिपोर्ट रखने को सदन और विपक्ष का अपमान करार दिया है।
अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि देशभर में विभिन्न विधानसभाओं में कार्यमंत्रणा समिति में विचार के बगैर ही अनुपूरक कार्यसूची को लाने का उदाहरण नहीं मिलता। प्रचंड बहुमत से जीतकर आई सरकार अहंकार में काम कर रही है। विपक्ष के विरोध को यह कहते हुए नजरअंदाज किया गया कि सदन सर्वोच्च है। ऐसा है तो सरकार भविष्य में कार्यमंत्रणा समिति के बजाए सदन में ही कार्यसूची पर मुहर लगाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगले पांच सालों तक कार्यमंत्रणा समिति की बैठकों में भाग नहीं लेगी। कांग्रेस की ओर से उनके साथ ही वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल और विधायक व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह कार्यमंत्रणा समिति में शिरकत नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने धोखा देकर संविधान विरुद्ध कार्य किया है।