सरकार ने सदन मे दिया जवाब कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं


देहरादून।
बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में गन्‍ना भुगतान, गैरसैंण आदि मुद्दे छाए रहे। विपक्ष ने गैरसैंण में सत्र चालने को लेकर सरकार को घेरा। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन-प्रश्नकाल के दौरान गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर सरकार ने कहा अगर चीनी मिले गन्ना किसानों का बकाया नहीं करेगी तो हमारे पास अन्य अधिकार है। अल्पसूचित प्रश्न में सबसे पहले विकासनगर विधायक प्रीतम सिंह ने 19 अप्रैल को गुम्मा हिमाचल में हुई बस दुर्घटना को सदन में उठाया। जिस के जवाब में सरकार ने नकार दिया। धनौलटी विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने सूबे में पेयजल की समस्या को सदन में रखा। नत्थी ग में तारांकित प्रश्नों को रखा गया। इसमें 9 प्रश्नों में गन्ना का मुद्दा हावी रहा। अतारांकित प्रश्न में कुल 11 सवाल लिए गए। इनमें भी गन्ना और पेयजल के सवालों की संख्या अधिक रही। धनौल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार के कृषि को उद्योग का दर्जा दिए जाने के सवाल पर सरकार से दिए उत्तर पर उलझे कृषि मंत्री। कृषि मंत्री ने जवाब दिया उद्योग और कृषि दोनों अलग अर्थव्यवस्था हैं। कृषि क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में सब्सिडी दी जाती है। इसलिए कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
नियम 58 के तहत नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन के पारित संकल्प के तहत गैरसैंण में सत्र आयोजित नहीं किया गया। आज तक भी ये जानकारी नहीं दी है कि गैरसैंण स्थाई राजधानी होगी या अस्थाई होगी। बयान आए कि वहां सुविधाएं नही हैं, जबकि वहां सभी सुविधाएं हैं। ये साफ करता हैं कि सरकार की मंशा नहीं वह सत्र करने की। सरकार ने गैरसैंण में विकास के लिए सरकार ने क्या प्रवधान किए इसका भी उल्लेख नहीं है। सरकार ये भी स्‍पष्‍ट करे की सरकार गैरसैंण में कभी सत्र होगा भी की नहीं। कुंजवाल ने कहा कि सदन में पारित संकल्प पर भी फैसला नहीं ले पा रही सरकार। गैरसैंण में टेंट में भी सत्र चला। निर्माणाधीन भवन में भी सत्र चला, लेकिन अब सरकार वहां जाना नहीं चाहती। सदन पारित प्रस्ताव की अवमानना हुई है। संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि गैरसैंण राज्य के लिए हमारी आस्था से जुड़ा है। वही यह भी सही है सदन नियमों के तहत चलता है। पूर्ववर्ती सरकार ने गैरसैंण में सत्र तो आयोजित किये, लेकिन वह विकास नहीं कर पाई। सत्र केवल सदन परिसर में ही हो सकता हैं। उन्‍होंने नियम 3 ब का हवाला दिया। कहा इसके लिए नियमों में बदलाव करना होगा।
चारधाम यात्रा के दौरान पूरे सिस्टम को गैरसैंण ले जाना तर्कसंगत नहीं है। गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि गैरसैंण में जो विधानसभा परिसर बना है, वो नियमों के तहत बनाया गया है। जब गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाए की रिपोर्ट सदन में रक्खी गई तो उसे फाड़ दिया गया था। वहीं प्रकाश पंत में कहा पूर्ववर्ती सरकार ने 5 साल तक इस मुद्दे पर कोई निर्णय नही लिया। कांग्रेस ने वाकआउट किया।

सात समझौतों पर करार, रूस पहुंचे मोदी

चार देशों की अपनी यात्रा के दूसरे पड़ाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय स्पेन में हैं। प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने बुधवार को स्पेन की कंपनियों को भारत के बुनियादी ढांचे, पर्यटन, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में निवेश का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में स्पेनिश कंपनियों के लिए अच्छे अवसर हैं। उन्होंने स्पेन के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मारियानो राजोय से मोनक्लोआ पैलेस में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। उसके बाद दोनों देशों के बीच सात समझौतों पर दस्तखत किए गए। राजोय से मुलाकात के दौरान मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि दोनों देश इस समय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। पीएम ने स्पेन के राजा फेल्पी से मैड्रिड के बाहरी हिस्से में बने महल में मुलाकात की।

सात समझौते
-साइबर सुरक्षा में सहयोग
-नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मदद
-अंग प्रत्यारोपण में तकनीकी सहायता
-नागरिक विमानन का विकास
-भारतीय विदेश सेवा संस्थान और डिप्लोमैटिक एकेडमी ऑफ स्पेन के बीच सहयोग
-सजायाफ्ता लोगों का हस्तांतरण
-राजनयिक पासपोर्टधारकों को वीजा छूट 5.27 अरब डॉलर का कारोबार
-यूरोपीय संघ का सदस्य स्पेन भारत का सातवां बड़ा व्यापारिक साझेदार और 12वां सबसे बड़ा निवेशक है।
-वर्ष 2016 में दोनों देशों का कुल व्यापार 5.27 अरब डॉलर (340 अरब रुपये) का रहा था।
-भारत में 200 से ज्यादा स्पेनिश कंपनियां कार्यरत हैं। ये सड़क निर्माण, रेलवे, पवन ऊर्जा, रक्षा और स्मार्ट सिटी के विकास में कार्यरत हैं।
-भारत की 40 कंपनियां स्पेन के प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोटिव व ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत हैं। 1992 में नरसिम्हाराव गए थे स्पेन 25 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री स्पेन पहुंचा है। उनसे पहले 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव स्पेन यात्रा पर गए थे।

रूस पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी छह दिनी विदेश यात्रा के तीसरे चरण में बुधवार शाम को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच गए। वह वहां राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ 18 वीं भारत-रूस सालाना शिखर बैठक करेंगे। वह सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में भी भाग लेंगे। मोदी दो और तीन जून को फ्रांस में रहेंगे।

कांग्रेस के संगठनात्क चुनाव की तैयारियां तेज

ऋषिकेश।
रविवार को सहायक प्रदेश चुनाव अधिकारी सचिन नाईक ने रेलवे रोड स्थित कांग्रेस भवन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक ली। उन्होंने जानकारी दी कि कांग्रेस संगठन की चुनाव प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है। बताया कि सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर सदस्यता अभियान में जुट जायें और सभी अपनी सदस्यता बुक जिला, नगर, ब्लॉक अध्यक्षों के पास जमा करवाये। प्रदेश कार्यालय में भी सदस्यता बुकें जमा कराने की उन्होंने जानकारी दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष जयेन्द्र रमोला ने की। बताया कि कहा कि कांग्रेस सदस्यता अभियान में सभी प्रदेश पदाधिकारी, नगर, ब्लॉक अध्यक्ष व फ्रंटल के पदाधिकारी जिन के पास भी सदस्यता बुकें है वह समय से जमा कर आगे की प्रक्रिया में जुटें ।
मौके पर प्रदेश कार्यक्रम प्रभारी संजय किशोर, प्रदेश महासचिव राजपाल खरोला, महन्त विनय सारस्वत, शिवमोहन मिश्र, राम बिलास रावत, राजबीर खत्री, राजेश ब्यास, विनोद चौहान, मधु जोशी, मनीष शर्मा, मधु मिश्रा, वेद प्रकाश शर्मा, सूरत सिंह नेगी, अश्वनी बहुगुणा, मुमताज़ हाशिम, सतीश शर्मा, नन्द किशोर, राजेश शाह, सहदेव राठौर, मुकेश जाटव, बृजेश निगम, चन्द्रकान्ता जोशी, उमा देवी, प्राशु बनर्जी, राकेश मिया आदि मौजूद थे।

जीएसटी पर भाजपा-कांग्रेस में बयानबाजी तेज

देहरादून।
केंद्र सरकार देशभर में जीएसटी लागू करने की तरफ कदम बढ़ा रही है। इस के साथ उत्तराखंड भी देश का पांचवा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने एसजीएसटी बिल को अपनी विधानसभा में पास करा लिया है। जिसके बाद उत्तराखंड देश के उन राज्यों में से एक बन गया है जिसने जीएसटी को लागू कराने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर ली है। साथ ही उत्तराखंड में जीएसटी पास होने से प्रदेश की सरकार इसे अपने लिए बड़ी उपलब्धि मान रही है। सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की माने ये प्रदेश के सुधार की दिशा में एक अहम कदम है और इससे केंद्र और राज्य के बीच समान राष्ट्रीय बाजार की स्थापना होगी।
सदन में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस ने भले ही एसजीएसटी को लेकर कोई विरोध नहीं किया। लेकिन विधानसभा के बाहर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीएसटी को यूपीए सरकार की उपलब्धि बता रहे है। उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने जहां एक तरफ जीएसटी का स्वागत किया तो वहीं केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर बीजेपी रोड़ा ना अटकाती तो देश मे जीएसटी पांच साल पहले ही लागू हो जाता। उनका कहना है कि मनमोहन सिंह की सरकार ही जीएसटी बिल को संसद मे पहली बार लेकर आई थी।

योगेन्द्र यादव के केजरीवाल को लिखे पत्र से आप की हवाईयां उड़ी

नई दिल्ली।
नगर निगम चुनाव से एक दिन पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के पुराने साथी और स्वराज अभियान के सदस्य योगेंद्र यादव ने केजरीवाल को चिट्ठी लिखी है। योगेंद्र यादव ने अपनी चिट्टी में केजरीवाल को दिल्ली की गंदगी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। यादव ने पत्र में लिखा कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता का विश्वास तोड़ा है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के वादों का जिक्र करते हुए लिखा है कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से लालच, डर और धमकी देकर वोट हासिल करने की कोशिश की है।

प्रिय अरविन्द,
दो साल पहले दिल्ली ने जो ऐतिहासिक जनादेश दिया था, वो किसी एक नेता या पार्टी का करिश्मा नहीं था। उसके पीछे हज़ारों वोलन्टीयर का त्याग और उनकी तपस्या थी। लेकिन इस करिश्मे का सबसे बड़ा कारण था दिल्ली की जनता का आत्मबल। जनलोकपाल आंदोलन ने दिल्ली के लाखों नागरिकों को यह भरोसा दिलाया कि वो बेचारे नहीं हैं। वो नेताओं, पार्टियों और सरकारों से ज्यादा ताकतवर हैं। आज मैं उस आत्मबल को डगमगाते हुए देख रहा हूँ। इसलिए पिछले दो साल में पहली बार आपसे संवाद कर रहा हूँ और आपको रामलीला मैदान में किए रिकॉल के वादे की याद दिला रहा हूँ।
पिछले महीने में मुझे दिल्ली नगर निगम (MCD) के चुनाव के दौरान दिल्ली के कोने-कोने में जाने का मौका मिला। दिल्ली में चारों तरफ कूड़े के ढेर हैं, गन्दा पानी रुका हुआ है, बदबूदार और खतरनाक हवा है। हर कोई जानता है कि इसकी पहली जिम्मेवारी पिछले दस साल से MCD पर राज कर रही बीजेपी की है। लेकिन फिर भी बीजेपी बेशर्मी से इस चुनाव में खड़ी है, वोट मांग रही है। ऐसे बहुत वोटर हैं जिन्होंने 2015 में ऐतिहासिक बदलाव के लिए वोट दिया था, लेकिन जो इस बार थक-हार के बीजेपी के पास वापिस जा रहे हैं। मैं पिछले महीने भर से सोच रहा हूँ कि इस निक्कमी और भ्रष्ट सरकार को चलाने वाली बीजेपी को MCD चुनाव में खड़े होने का मौका देने के लिए कौन जिम्मेवार है।
बहुत सोचने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पंहुचा हूँ कि दिल्ली की इस दुर्घटना के लिए व्यक्तिगत रूप से आप जिम्मेवार हैं। आपने दिल्ली की जनता का विशवास तोड़ा है। विश्वास सिर्फ एक नेता या पार्टी से नहीं टूटा है। जनता का खुद अपने आप से विश्वास टूटा है — आप से धोखा खाने के बाद उन्हें लगता है कि उन्हें अच्छे-बुरे की पहचान नहीं है। इसलिए टूटे मन से बहुत लोग उन्ही पुरानी पार्टियों के पास जा रहे हैं जिन्हे उन्होंने दो साल पहले ख़ारिज कर दिया था। लोकतंत्र में जनता की आशा जगाकर उसे तोड़ना बहुत बड़ा पाप है। जनता के आत्मबल को कमजोर करना सबसे बड़ा अपराध हैं। मैं यह कहने को मजबूर हूँ कि अपने अहंकार, आत्म-मोह और कुर्सी के लालच में आपने यह अपराध किया है। ये सिर्फ मैं नहीं कहता, दिल्ली के हर मोहल्ले और गली में हर कोई ये कहता है। इस चुनाव प्रचार के दौरान आपने वोटर को जिस तरह लालच, डर और धमकी दी है उसमे मुझे “विनाशकाले विपरीत बुद्धि” के लक्षण दिखाई देते हैं।
जाहिर है आप मुझसे सहमत नहीं होंगे। आपने बार-बार कहा है कि दिल्ली की जनता आपके साथ है। दिल्ली में कल होने वाले MCD के चुनाव को आपने अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के रेफेरेंडम में बदल दिया है। आपकी पार्टी सिर्फ आपके नाम पर वोट मांग रही है। होर्डिंग में पार्टी का नाम तक नहीं है। आपकी पार्टी ने एक इंटरनल सर्वे भी जारी किया है कि आपकी पार्टी MCD चुनाव में 218 सीटें लेकर जीत रही है।
मेरा एक प्रस्ताव है। अगर आपको इस चुनाव में तीनों MCD में कुल मिलाकर बहुमत (यानि सिर्फ 137 सीटें) आ जाता है तो मैं यह मान लूँगा कि मेरी समझ गलत है और दिल्ली की जनता आपको धोखेबाज नहीं मानती। ऐसे में अगर केंद्र सरकार आपकी सरकार के खिलाफ कोई षड़यंत्र करती है तो हमारी पार्टी और मैं खुद आपका समर्थन करेंगे। लेकिन अगर दिल्ली में 70 में से 67 सीट जीतने के दो साल में ही आप इस रेफेरेंडम में हार जाते हैं तो नैतिकता की मांग है कि आप EVM जैसा कोई बहाना ना बनाएँ, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दें और आपकी सरकार दिल्ली में ‘रिकॉल’ के सिद्धांत के अनुसार दुबारा जनता से विश्वास मत हासिल करे।
आशा है आपको रामलीला मैदान में कही अपनी ही बातें याद होंगी और आप इस चुनौती को स्वीकार करेंगे।
आपका पुराना साथी,
योगेंद्र यादव

गुमराह कर रही भाजपा: किशोर उपाध्याय

ऋषिकेश।
शुक्रवार को पीसीसी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के मंत्री वंदे मातरम पर गलत बयानबाजी कर रहे हैं। सीएम भी मंत्री की बातों पर मुहर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर लोगों से जबरन वंदे मातरम कहलाना है तो भाजपा को विधानसभा में इसके लिए कानून पास करवाना चाहिए। मंत्री के प्रदेश में रहने के लिए वंदेमातरम कहना जरूरी है, के बयान का विरोध करने के लिए मैंने कहा है कि किशोर उपाध्याय वंदेमातरम नहीं बोलेगा। मुझे राज्य से बाहर करें भाजपा सरकार।
किशोर ने कहा कि भाजपा मुद्दों से हटकर सिर्फ राजनैतिक लाभ पाने के लिए बयानबाजी करती है। राम मंदिर, गौ, गंगा, धारा 370 व अब वंदेमातरम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव में 57 सीटें भाजपा को राज्य के हितों की रक्षा करने के लिए मिली हैं। उन्होंने शराब बंदी को अपना समर्थन दिया। बोले कि भाजपा जिन मुद्दों पर कांग्रेस को कोसने रही थी, सत्ता में आने के बाद उन्हीं को बचाने और आगे बढ़ाने में लगी है।
किशोर ने विशेष राज्य का दर्जा हटाने पर भी तंज सके। कहा कि ट्रिपल इंजन की सरकार है। अब तो औद्योगिक पैकेज भी बहाल होना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश द्वारा हरीश रावत पर हरिद्वार में दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इंदिरा हृदयेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं। अगर कोई बयान आया है तो संज्ञान लिया जाएगा। गौरतलब है कि इंदिरा ने गुरुवार को हरिद्वार में कांग्रेस की हार के लिए हरीश रावत को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि हरीश रावत के चेहरे को जनता ने स्वीकार नहीं किया।

कांग्रेस के लिए काला दिन था रावत का हारना

हरिद्वार।
हरिद्वार पहुंची नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का कांग्रेसी कार्यकर्ताओ ने स्वागत किया। मिडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस की हार के लिए पूर्व सीएम हरीश रावत को जिम्मेदार ठहराया तो वही प्रदेश में सरकार के बाद खनन और शराब के विरोध में जुटी भाजपा के दोहरे चरित्र पर जमकर हमला बोला।
कांग्रेस की हार पर बोलते हुए इशारों ही इशारो में पूर्व सीएम हरीश रावत पर निशाना साधा। कहा की मुख्यमंत्री का दो सीटों पर हार जाना कांग्रेस के लिए सबसे काला दिन था राजनीति के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा की प्रदेश की जनता ने चेहरे को स्वीकार नही किया इस लिए कांग्रेस की यह स्थिति हुई।
वही, नेता प्रतिपक्ष ने शराब बंदी और खनन को लेकर राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए। कहा की जो काम हमारे समय हो रहे थे तो भाजपा उनको जमकर कोस रही थी लेकिन आज सत्ता पर काबिज होने के बाद जिन मुद्दों पर भाजपा ने चुनाव लड़ा आज उनको किनारा कर शराब और खनन में तालमेल बैठाने में लग गयी है। प्रदेश में शराब बंदी हो इसके हम पक्षधर है हम इसमें सरकार के साथ खड़े है।

सरकार में लालबत्ती को लेकर प्रयास शुरू

देहरादून।
बीजेपी की सरकार उत्तराखण्ड में बने 20 दिन हो चुके है। अब सरकार बनने के बाद बीजेपी के नेताओ ने सरकार में लाल बत्ती के लिए अपने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए है । कोई मुख्ययमंत्री तो कोई संगठन स्तर पर अपने अपने जुगाड़ लगाने में जुटा है ऐसे में किसकी लाटरी खुलती है और किसको लाल बत्ती मिलती है ये तो मुख्ययमंत्री के हाथ में है हलाकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी को खुश करने के लिए सिर्फ दायित्व नहीं दिए जाएंगे बल्कि दायित्व योग्यता के आधार पर ही दिए जाएंगे।
लाल बत्ती को लेकर बीजेपी के कई नेता शासन से लेकर बीजेपी के मुख्यालय तक चक्कर काटने में लगें है लेकिन जिस तरह से संगठन ने साफ़ कर दिया है कि लाल बत्ती या दायित्व सिर्फ योग्यता के आधार पर ही दिए जाएंगे उसके बाद ऐसे कुछ लोगो के सपनो पर पानी फिरना तय है जो लाल बत्ती हासिल करने के लिए शाम दाम की नीति अपनाने में जुटे है।

सीएम के फैसले को लेकर मुखर हुई कांग्रेस

देहरादून।
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेन्दर सिंह रावत के बीजेपी कार्यकर्ताओ पर दर्ज राजनितिक मुकदमो के वापस लेने के एलान के बाद सूबे में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेताओ ने मुख्यमंत्री के इस फैसले को वैसे ताओ सही करार दिया है लेकिन उनका ये कहना है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने सिर्फ बीजेपी कार्यकर्ताओ के मुकदमें वापस लेने की बात कही है जो लोकतंत्र में सही नहीं मुख्यमंत्री त्रिवेन्दर सिंह रावत सिर्फ अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री नहीं है वो पुरे प्रदेश के मुख्यम्नत्री है लिहाज़ा उन्हें सबके बारे में सोचना चाहिए था।
वही सीएम के बीजेपी कार्यकर्ताओ के ऊपर चल रहे राजनितिक मुकदमें वापस लेने के फैसले का बीजेपी नेताओ ने स्वागत किया है लेकिन कांग्रेस के इसको लेकर आ रहे बयानों पर बीजेपी नेता टिपण्णी भी करते नजर आ रहे है। उनका कहना है कांग्रेस सरकार ने बीजेपी के तमाम कार्यकर्ताओ पर इस तरह के मुकदमे दर्ज किये गए थे। मुख्यमंत्री ने ऐसे मुकदमे वापस लेने के लिए कहा है इसलिए इस मामले में बयानबाजी करना सही नहीं है ।

चुनावी हार के बाद कांग्रेस की बंद कमरें में समीक्षा

ऋषिकेश।
बुधवार को स्वर्गाश्रम स्थित होटल निर्वाणा में पीसीसी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की अध्यक्षता में कांग्रेस की जिला और शहर इकाइयों के अध्यक्षों के साथ विधानसभा चुनाव को लेकर समीक्षा बैठक हुई। जिसमें मुख्य एजेंडे के तहत जिलाध्यक्षों से बारी-बारी उनके क्षेत्रों में हार-जीत के कारणों और उसमें उनकी भूमिका पूछी गई। जिलाध्यक्षों ने उपाध्याय को पार्टी संगठन की स्थितियों, भीतरघात जैसे हालातों से अवगत कराया। इस दौरान किशोर ने कई जिलाध्यक्षों की परफारमेंस पर सवाल भी उठाए और उन्हें अपने काम करने के तौर-तरीकों को बदलने की हिदायत भी दी।
दोपहर 12 बजे से बंद कमरे में करीब तीन घंटे चली बैठक के दौरान जिलाध्यक्षों के अलावा प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट, अनुशासन समिति के अध्यक्ष डा. केएस राणा भी मौजूद थे। समापन पर उपाध्याय ने बताया की बैठक में चुनावी समीक्षा के साथ ही जिलों में कार्यकर्ता बैठकों की तारीखें तय की गई हैं। कांग्रेस पार्टी संगठन की मजबूती के लिए ब्लॉक और शहर स्तर पर सालभर में एक बैठक करेगी, ताकि पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद कायम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय मसलों को आगे बढ़ाया जा सके।

पांच अध्यक्ष रहे नदारद
स्वर्गाश्रम में कांग्रेस की 29 शहर और जिला इकाइयों के अध्यक्षों में से पांच बैठक में शामिल नहीं हुए। कांग्रेस की प्रदेश में कुल 23 जिला और 6 शहर इकाइयां गठित हैं। जिनमें से 23 अध्यक्षों ने ही बैठक में शिरकत की। बैठक में चंपावत, बाजपुर, उत्तरकाशी, पुरोला और रानीखेत के अध्यक्ष नहीं पहुंचे।

सरकार के काम को बताया अच्छा
कांग्रेस की चुनावी समीक्षा बैठक में जिलाध्यक्षों ने निर्वतमान सरकार के कार्यकाल पर चर्चा की और उसे अच्छा बताया। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने बताया कि हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में जनहित से जुड़े विषयों, जन सरोकारों, उत्तराखंडियत के सवालों को प्राथमिकता मिली। जिलाध्यक्षों ने भी सरकार के कामकाज को सराहा है।

गोपनीय ही रही बंद कमरे की अधिकांश बातें
कांग्रेस के शहर और जिला इकाई अध्यक्षों की बैठक में बेहद गोपनीयता बरती गई। यहां तक कि बैठक में जिलाध्यक्षों के अलावा किसी को भी एंट्री की इजाजत नहीं थी। साथ ही बैठक की बातों को बाहर शेयर करने पर प्रतिभागियों को सख्त हिदायत दी गई थी। जिससे अधिकांश बातें बंद कमरे तक ही सीमित रही।

सरकार के आगाज पर रहे चुप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने नई भाजपा सरकार के आगाज पर कोई टिप्पणी नहीं की। बैठक से इतर बातचीत में उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस अगले छह महीने तक नई सरकार के कामकाज को देखेगी, उसमें कोई व्यवधान नहीं डाला जाएगा। लिहाजा उसकी शुरुआत पर कोई बात नहीं हो सकती है।