मुख्यमंत्री ने मुख्य सेवक सदन में लेखकों एवं साहित्यकारों से किया संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन देहरादून में प्रदेशभर से आए वरिष्ठ लेखकों एवं साहित्यकारों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी-अपनी स्वरचित पुस्तकें भेंट कीं। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक लेखक से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उनके साहित्यिक योगदान और वर्तमान लेखन पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसे सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सामाजिक चेतना के संवर्धन में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सशक्त साहित्यिक वातावरण तैयार करने तथा साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड महर्षि वेदव्यास सहित अनेक ऋषि-मुनियों की तपोभूमि एवं कर्मभूमि रही है। इस पावन भूमि ने ऐसे साहित्यकार दिए हैं, जिन्होंने भारतीय साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में अध्ययन और लेखन की संस्कृति विकसित करने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से प्रदेश के पुराने, बिखरे एवं अप्रकाशित साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से दो साहित्य ग्राम स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। साहित्यकारों के सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए वर्ष 2022 में श्उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मानश् तथा वर्ष 2025 में श्दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मानश् प्रारम्भ किए गए हैं।

रुद्रप्रयाग के श्1000 पुस्तक दान अभियानश् को मुख्यमंत्री का सहयोग

हरेला पर्व के अवसर पर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन द्वारा संचालित श्1000 पुस्तक दान अभियानश् को मुख्यमंत्री ने अपना सहयोग प्रदान किया। उन्होंने श्लेखकों से संवादश् कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लेखकों की 50 पुस्तकें स्वयं खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को उपलब्ध कराने की घोषणा की।

गौरतलब है कि रुद्रप्रयाग में ष्एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्यष् थीम पर सार्वजनिक पुस्तकालय के लिए पुस्तक संग्रह अभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तकें समाज में ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच का आधार होती हैं। उनका यह योगदान पुस्तक दान की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं में अध्ययन की आदत को भी प्रोत्साहित करेगा।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, साहित्यकार प्रो .सुधा रानी पांडे, आलोक लाल, बुद्धिनाथ मिश्रा, प्रेम कुमार साहिल, शिव मोहन सिंह, राम मोहन सिंह, नेहा नेगी, कुलभूषण केन, अनमोल जैन, रूपा सोनी, अमर खरबंदा, शीशपाल गुसाईं, रमाकांत, दिवेश जोशी, प्रभा पंत, रूबी गुप्ता, रणधीर कुमार अरोड़ा सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य उपस्थित रहे।

परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद स्मारक पर कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए उनके अद्वितीय त्याग, शौर्य और राष्ट्रसेवा को नमन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगी ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर अत्यंत विषम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता, अटूट मनोबल और सर्वाेच्च बलिदान का परिचय देते हुए दुश्मन को परास्त किया तथा विश्व के समक्ष भारत की सैन्य शक्ति और दृढ़ संकल्प का परिचय कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर सैनिकों ने सर्वाेच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। प्रदेश की गौरवशाली सैन्य परंपरा, वीरता पदक विजेताओं की समृद्ध विरासत तथा यहां के युवाओं का राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की सुरक्षा नीति अधिक सशक्त, निर्णायक और आत्मविश्वास से परिपूर्ण हुई है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आधारभूत संरचना का तीव्र विकास तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए गए प्रयास नए भारत की शक्ति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तथा सैनिक कल्याण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक निर्णयों से देश के सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों का सम्मान बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा शहीद परिवारों के कल्याण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। इसके साथ ही सभी वीरता पुरस्कार विजेताओं को दी जाने वाली एकमुश्त एवं वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन, आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करना, शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह हेतु सहायता, वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा तथा सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को संपत्ति क्रय पर स्टाम्प शुल्क में छूट जैसी अनेक जनकल्याणकारी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के जिला अदालतों में भूमि धोखाधड़ी के जो मामले पेंडिंग हैं, उनके शीघ्र निस्तारण के प्रयास किये जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के श्पांचवें धामश् के रूप में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से निर्मित यह सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान का प्रेरणा-स्थल बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी ठोस कदम उठा रही है। सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए देश का पहला श्अग्निवीर रोजगार सेलश् गठित किया जा रहा है। साथ ही उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग तथा अन्य राज्य सेवाओं में उन्हें प्राथमिकता देने, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार, होमस्टे योजना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि कारगिल के अमर शहीदों के त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर विकसित भारत तथा विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वाेच्च बलिदान का प्रतीक है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने विषम परिस्थितियों में अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा की। उन्होंने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान प्रत्येक भारतीय को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं शहीद परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने वीरता पुरस्कार विजेताओं की सम्मान राशि में वृद्धि की है तथा अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सचिव सैनिक कल्याण युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (से.नि), जिला अधिकारी डॉ .आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल, पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक एवं शहीदों के परिजन उपस्थित थे।

मन की बात को सुनकर बोले सीएम, पीएम के नेतृत्व में जन जन का सपना हो रहा साकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व सैनिकों, शहीद सैनिकों के परिजनों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के 136वें संस्करण को सुना।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम, देश के नागरिकों के जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला कार्यक्रम बन चुका है। यह कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों को प्रेरित करने के साथ ही देश के विकास और जनभागीदारी से जुड़े विषयों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में डीआरडीओ की उपलब्धियों, रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता, रक्षा उत्पादों के निर्यात, जल संरक्षण, हस्तशिल्पों के संवर्धन तथा वोकल फॉर लोकल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देशवासियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संदेश आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूत करने वाला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आज भारत हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीमांत क्षेत्रों का विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जन जन का सपना साकार हो रहा है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सचिव युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सभरवाल (से.नि.) एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखंड के 75 वीर सपूतों ने कारगिल युद्ध में दिया सर्वाेच्च बलिदान, देवभूमि को वीरभूमि बनाने में सैनिकों का महत्वपूर्ण योगदानः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय कारगिल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में आयोजित सैनिक सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, शहीदों के परिजनों तथा सैन्य विभूतियों का सम्मान किया। कार्यक्रम में देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजय कारगिल दिवस भारतीय सेना के अद्वितीय पराक्रम, अटूट संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति और अदम्य साहस का वह गौरवशाली अध्याय है, जो भारत के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जमा देने वाली ठंड, दुर्गम पहाड़ियों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और अद्भुत शौर्य का परिचय देते हुए देश की विजय सुनिश्चित की। कारगिल विजय हमारे वीर सैनिकों के सर्वाेच्च बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण की अमर गाथा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी वीरता और बलिदान की चर्चा होती है, देवभूमि उत्तराखंड का नाम गर्व के साथ लिया जाता है। प्रदेश के लगभग हर दूसरे घर का कोई न कोई सदस्य भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। इसी कारण उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया। इन अमर सपूतों का बलिदान प्रदेश और देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों का सम्मान और राष्ट्र की सुरक्षा राजनीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारतीय सेना का आत्मविश्वास, सामर्थ्य और आधुनिक क्षमता पूरी दुनिया देख रही है। भारत अब आतंकवादी हमलों के बाद केवल निंदा तक सीमित रहने वाला देश नहीं है, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से दुश्मन को निर्णायक जवाब देने वाला राष्ट्र है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों, पुलों और अन्य रणनीतिक आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। वन रैंक-वन पेंशन की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान और न्याय दिया गया है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण, रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि तथा सैनिकों के कल्याण से जुड़े अनेक निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा और सैनिकों का सम्मान केंद्र सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि बलिदानी सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की समय-सीमा को भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। शहीद परिवारों के लिए नौकरी-पूर्व प्रशिक्षण और पुत्री विवाह सहायता जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये किया गया है। देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के पांचवें धाम के रूप में निर्माणाधीन सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। यह सैन्य धाम देश के अमर बलिदानियों की वीरता और उत्तराखंड की सैन्य परंपरा की जीवंत गाथा बनेगा। इसके साथ ही खटीमा और टनकपुर के बीच भव्य सैन्य स्मारकन स्थापित करने का संकल्प भी लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सेवामुक्त अग्निवीरों की रोजगार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए देश के पहले अग्निवीर रोजगार सेल की स्थापना का निर्णय लिया गया है। पुलिस, वन विभाग तथा अन्य सरकारी सेवाओं में होने वाली भर्तियों में सेवामुक्त अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। स्वरोजगार के इच्छुक अग्निवीरों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों और सेवामुक्त अग्निवीरों को पर्वतीय क्षेत्रों में होमस्टे स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। सीमावर्ती गांवों में स्थानीय निवासियों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु विशेष सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस से संबंधित लंबे समय से चली आ रही मांग पर राज्य सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही जिला अदालतों में सैन्य परिवारों से संबंधित भूमि धोखाधड़ी के लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए भी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और बलिदानियों के आश्रितों के हितों की रक्षा के लिए अपने श्विकल्प रहित संकल्पश् के साथ निरंतर कार्य करती रहेगी।

कार्यक्रम में आयोजित कवि सम्मेलन के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य और कविता राष्ट्रप्रेम की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकरश् की ओजस्वी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, वीर सैनिक, पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, शहीदों के परिजन, सैन्य अधिकारी, सम्मानित कविगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रदेशवासी उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड में राज्य कर विभाग की उल्लेखनीय सफलता, संग्रहण में 24 फीसदी की वृद्धि

देहरादून। प्रदेश में राज्य कर विभाग ने जीएसटी संग्रहण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में नेट एसजीएसटी संग्रहण में 24 फीसदी की वृद्धि हुई है। जबकि नॉन-जीएसटी संग्रहण में 12 प्रतिशत और कुल संग्रहण में 22 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

राज्य कर विभाग की प्रमुख सचिव आर के सुधांशु की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में जीएसटी संग्रहण, कर अनुपालन, विभागीय कार्यों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। बताया गया कि अप्रैल से जून 2026 की अवधि में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में नॉन-जीएसटी संग्रहण ₹658 करोड़ से बढ़कर ₹740 करोड़ हो गया है, जो 12 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में नेट एसजीएसटी संग्रहण ₹2,457 करोड़ से बढ़कर ₹3,056 करोड़ हो गया है, जो 24 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी प्रकार कुल संग्रहण ₹3,115 करोड़ से बढ़कर ₹3,796 करोड़ हो गया है, जिसमें 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बैठक में केंद्रीय खुफिया इकाई के कार्यों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ब्प्न् के माध्यम से ₹12.92 करोड़ की वसूली की गई थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जून 2026 तक ₹16.48 करोड़ की वसूली दर्ज की गई है। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 27.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

प्रमुख सचिव ने जीएसटी संग्रहण में हुई प्रगति को बनाए रखते हुए आगामी अवधि में इसे और बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कर अनुपालन को बढ़ावा देने और विभागीय कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपलब्ध आंकड़ों और तकनीक का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया।

प्रमुख सचिव ने विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि करदाताओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और जीएसटी अनुपालन को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

बैठक में विशेष जांच शाखा, मोबाइल स्क्वाड और ऑडिट कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने सभी संबंधित इकाइयों को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से प्राप्त करने और आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में होटल और रेस्टोरेंट सेवाओं, वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में जीएसटी अनुपालन की स्थिति और विभाग की आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई। प्रमुख सचिव ने विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए जीएसटी संग्रहण और अनुपालन को और बेहतर बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर वित्त सचिव दिलीप जावलकर, आयुक्त राज्यकर प्रतीक जैन, अपर सचिव/अपर आयुक्त महमोहन मैनाली, अपर सचिव/अपर आयुक्त अनिल सिंह सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

प्रोजेक्ट या प्रोजेक्ट के किसी भाग में लागत में अप्रत्याशित बढ़त के मामलों को गंभीरता से लेंः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान समिति द्वारा विभिन्न विभागों के प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई।

मुख्य सचिव ने पंपिंग पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव को सतत् और किफायती बनाए रखने के लिए सॉलर पावर से संचालित किए जाने की संभावना तलाशते हुए प्रस्ताव में शामिल किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी पंपिंग पेयजल परियोजनाओं के निर्माण में सोलराइजेशन की संभावनाओं को अनिवार्य रूप से तलाश जाए। उन्होंने नियोजन विभाग को इस सम्बन्ध में शासनादेश जारी किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने विभागों द्वारा अभी भी कंसल्टेंट्स को दी जाने वाली फीस, प्रोजेक्ट कॉस्ट के प्रतिशत के रूप में दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कंसल्टेंट्स को फीस लमसम में दिए जाने हेतु पूर्व में दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इस सम्बन्ध में किया गया शासनादेश पुनः विभागों को प्रेषित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रोजेक्ट या प्रोजेक्ट के किसी भाग में लागत में अप्रत्याशित बढ़त के मामलों को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिस एजेंसी द्वारा ग़लत आंकलन किए जाने के कारण लागत में बढ़ोतरी हुयी है, उस एजेंसी पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने नियोजन विभाग को, लोक निर्माण विभाग के मार्गदर्शन में कॉस्ट वेरिएशन के लिए गाइडलाइन तैयार किए जाने के निर्देश दिए। इससे परियोजनाओं की लागत में अनावश्यक बढ़ोत्तरी को रोक जा सकेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में आयुष की दृष्टि से काफी संभावना है, इस दिशा में अच्छे प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाएं, प्रोजेक्ट की लोकेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने गरुड़ (बागेश्वर) में आईटीआई के प्रस्ताव पर आसपास हॉस्टल की व्यवस्था भी सुनिश्चित किए जाने की बात कही। कहा कि इससे आईटीआई में एडमिशन लेने वाले छात्रों को काफ़ी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी एवं सी. रविशंकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शौर्य स्थल, चीड़बाग, गढ़ीकैंट, देहरादून में आयोजित ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्र की रक्षा के लिए उनके सर्वाेच्च बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम, शौर्य और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। वर्ष 1999 में भारतीय वीर जवानों ने विषम परिस्थितियों में अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा की और विश्व के समक्ष भारतीय सेना के अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि देश सदैव अपने वीर सैनिकों और शहीदों के बलिदान का ऋणी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को वीरों की भूमि के रूप में जाना जाता है। प्रदेश के अनेक वीर सैनिकों ने कारगिल युद्ध सहित विभिन्न सैन्य अभियानों में अपने अद्वितीय साहस और सर्वाेच्च बलिदान से देश का गौरव बढ़ाया है। राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा उनके सम्मान और हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें तथा देश की एकता, अखण्डता और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, युवा, मातृशक्ति और अनेक गणमान्य मौजूद थे।

संत रविदास का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का अनुपम संदेशः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज त्यागी रोड, देहरादून स्थित स्थानीय होटल में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘समरसता संकल्प अभियान’ की प्रदेश कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने संत रविदास महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके विचारों और आदर्शों को समाज के लिए सदैव प्रासंगिक बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास का जीवन भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसने समाज को समानता, मानवता, सामाजिक न्याय और समरसता का मार्ग दिखाया। उन्होंने अपने विचारों और जीवन आचरण के माध्यम से समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरण का कार्य किया। संत रविदास जी का स्पष्ट संदेश था कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और विचारों से होती है।

उन्होंने कहा कि संत रविदास ने आडंबरों से मुक्त, सहज भक्ति और शुद्ध अंतःकरण को जीवन का आधार माना। ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का उनका संदेश आज भी मानव जीवन को भीतर से शुद्ध और समाज को बाहर से समरस बनाने की प्रेरणा देता है। संत रविदास जी ने ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान मिले, कोई भेदभाव न हो और कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। उनका ‘बेगमपुरा’ का विचार एक ऐसे दुखरहित, समतामूलक और खुशहाल समाज की कल्पना है, जो आज भी समाज को दिशा प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश संत रविदास जी के समरसता और अंत्योदय के विचारों को व्यवहार में उतारते हुए आगे बढ़ रहा है। सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ समाज के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में अंत्योदय को अपनी प्राथमिकता मानकर कार्य कर रही है। सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, युवाओं के लिए पारदर्शी रोजगार व्यवस्था तथा वंचित और जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समानता और समान अधिकार की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है। इससे प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून की व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि समाज में किसी भी प्रकार के भेदभाव के स्थान पर समानता, न्याय और सामाजिक सद्भाव की भावना मजबूत हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास के विचारों को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि ‘समरसता संकल्प अभियान’ को जन-जन का अभियान बनाने के लिए गांव-गांव, मोहल्ले-मोहल्ले और घर-घर तक पहुंचें। चौपालों, संवाद कार्यक्रमों और जनजागरण गतिविधियों के माध्यम से संत रविदास जी के समानता, प्रेम, भाईचारे और सामाजिक बंधुत्व के संदेश को व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए।

उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली मानसिकता और भेदभाव की प्रवृत्तियों का मुकाबला सामाजिक एकता और राष्ट्र प्रथम की भावना से किया जाना चाहिए। जब समाज जाति-पाति और भेदभाव की सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ेगा, तभी संत रविदास जी के समरस और खुशहाल समाज का सपना साकार होगा।

मुख्यमंत्री ने सभी से संत रविदास के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने, समाज में समरसता और सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत करने तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूर्ण किया जा सकता है।

इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

टिहरी मेडिकल कॉलेज का निर्माण ऐसे स्थान पर होगा, जहां से अधिक जनसंख्या को इसका लाभ मिलेः सुबोध

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सचिवालय में उच्च अधिकारियों के साथ प्रस्तावित टिहरी मेडिकल कॉलेज के निर्माण से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि चयन, निर्माण की रूपरेखा पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री उनियाल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण ऐसे स्थान पर होगा, जिससे अधिकाधिक जनसंख्या को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना से क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा तथा लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी तथा स्वास्थ्य ढांचे का सुदृढ़ीकरण होगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना टिहरी जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण से दूर-दराज के क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एवं मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य से संबंधित भूमि चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है तथा यह दोहराया कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगी और प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी।

बैठक में सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पांडे ने जिलाधिकारी टिहरी को निर्देशित किया कि चयनित भूमि से संबंधित प्रस्ताव शीघ्र शासन को उपलब्ध कराया जाए, ताकि परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

इस अवसर पर अपर सचिव रोहित मीणा भी मौजूद रहे।

सीएम की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड और राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक सम्पन्न

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य वन्यजीव बोर्ड और राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक लेते हुए, प्रदेश में मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने के साथ ही वन्य जीव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 23वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, वन्यजीव गलियारों के संरक्षण तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सभी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी आधुनिक तकनीक के साथ जनसहभागिता को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए वन्य जीव आधारित पयर्टन को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मानव वन्य जीव संघर्ष के दौरान दूसरे को बचाने के लिए साहसिक प्रदर्शन करने वाले आम लोगों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीवों के हमले में मृत एवं घायल व्यक्ति और उसके परिवार को मानकों के अनुसार तय समय पर मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं में वन्यजीव संरक्षण संबंधी शर्तों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में राज्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में की गई प्रगति की समीक्षा की गई। बताया गया कि वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान तथा विभिन्न प्रस्तावों पर नियमानुसार स्वीकृतियां प्रदान की जा रही हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (फत्ज्) गठित करते हुए, कैमरा ट्रैप, ड्रोन, सर्प बचाव किट, सोलर लाइट जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत, निगरानी व्यवस्था तथा वन कर्मियों को आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

बैठक में संरक्षित क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों पर विचार करते हुए राजाजी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में गैस पाइपलाइन और अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में सड़क, आईटीबीपी अवसंरचना तथा ऑप्टिकल फाइबर केबल जैसी जनहित की परियोजनाओं को आवश्यक शर्तों के अधीन राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति को अग्रसारित करने की अनुमति प्रदान की गई। इसके बाद आयोजित राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने

कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता एवं वन्यजीव संपदा की दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है। राज्य में बाघ संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सहभागिता, आधुनिक तकनीक का उपयोग तथा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन्यजीव संरक्षण और विकास कार्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वन्यजीव कॉरिडोरों का संरक्षण, कैमरा ट्रैप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी तथा वैज्ञानिक प्रबंधन को और मजबूत किया जाए। उन्होंने वन्यजीवों के प्राकृतिक जल स्रोतों एवं चारागाहों के विकास, वनाग्नि प्रबंधन तथा संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को विस्तार देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ के दौरान मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने के लिए क्यूआरटी टीम की तैनाती की जाए।

बैठक में कॉर्बेट एवं राजाजी टाइगर रिजर्व के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन, पर्यावरण अनुकूल सफारी वाहनों को बढ़ावा देने, संरक्षित क्षेत्रों में कार्यरत फील्ड स्टाफ के लिए विशेष प्रोत्साहन तथा वन्यजीव अपराधों की प्रभावी जांच के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई।

बैठक में वन मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक दीवान सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद गीताराम गौड़, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक हॉफ कपिल लाल, एडीजी ए.पी. अंशुमन, सचिव सी रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक नीना ग्रेवाल एवं वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।