कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 30 जुलाई से प्रारंभ होने वाली कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रत्येक विभाग यह सुनिश्चित करे कि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे तथा सभी व्यवस्थाएं पूरी संवेदनशीलता, समन्वय और सेवा-भाव के साथ संचालित हों। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के स्वागत-सत्कार तथा विभिन्न स्थानों पर भंडारों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग से पर्याप्त संख्या में साफ-सुथरे पिंक टॉयलेट्स स्थापित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था राज्य के सभी प्रमुख स्थलों पर की जाए।

मेला नियंत्रण भवन सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कांवड़ मेले की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आस्था, प्रशासनिक क्षमता, सेवा-भाव और कार्यकुशलता का भी प्रतीक है। हमारा लक्ष्य ‘सुरक्षित कांवड़, सुव्यवस्थित कांवड़ और स्वच्छ कांवड़’ होना चाहिए। प्रत्येक श्रद्धालु देवभूमि उत्तराखण्ड से सुरक्षित, संतुष्ट और सुखद अनुभव के साथ लौटे, यही राज्य सरकार का ‘विकल्प रहित संकल्प’ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न प्रकार की वैश्विक चुनौतियों के बावजूद तमाम क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उत्तराखण्ड में भी प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार तीर्थाटन और पर्यटन गतिविधियों में लगातार वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष अब तक चारधाम यात्रा में 45 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि 55 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश की यात्रा कर चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार तीन गुना अधिक तीर्थयात्री उत्तराखण्ड पहुंचेंगे। इस वर्ष कांवड़ यात्रा में भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसलिए सभी व्यवस्थाएं उसी अनुरूप की जाएं, जिसमें धार्मिक परंपराओं एवं गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, व्यापारियों, धर्माचार्यों एवं संत समाज के सहयोग से कांवड़ मेले का सफल संचालन और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि धर्माचार्यों एवं संतों के संदेशों पर आधारित वीडियो संदेश तैयार कर कांवड़ यात्रियों तक पहुंचाए जाएं, ताकि यात्रा अनुशासित एवं मर्यादित ढंग से संपन्न हो सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाए। पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन एवं एआई आधारित निगरानी प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने अथवा भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों पर भी कड़ी निगरानी रखते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रैफिक प्लान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। कांवड़ यात्रियों एवं स्थानीय नागरिकों के लिए आवश्यकतानुसार पृथक यातायात व्यवस्था बनाई जाए, ताकि आमजन को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में वीआईपी मूवमेंट के कारण श्रद्धालुओं की यात्रा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रमुख पड़ावों एवं मेला क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहे। प्रमुख घाटों पर वाटर एंबुलेंस तैनात किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जल पुलिस तथा अग्निशमन सेवाओं को पूरी तरह अलर्ट रखा जाए। भारी वर्षा, जलभराव अथवा अन्य आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए पूर्व तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे कांवड़ मार्ग एवं मेला क्षेत्र में पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थलों, प्रकाश व्यवस्था तथा स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नियमित सफाई अभियान चलाया जाए तथा नो-प्लास्टिक अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रा समाप्त होने के बाद भी तत्काल सफाई कर क्षेत्र को पूर्व स्थिति में लाया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि होटलों, ढाबों एवं प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए। सभी प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस एवं पंजीकरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली घटना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें। चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम एवं हेल्पलाइन पूरी तरह सक्रिय रहें। जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रतिदिन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने हर की पैड़ी, कांगड़ा पुल एवं अन्य प्रमुख घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल पुलिस की पर्याप्त तैनाती, भीड़ नियंत्रण व्यवस्था एवं आपातकालीन निकासी योजना को पूरी तरह तैयार रखने को कहा। उन्होंने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निरंतर जारी रखने तथा अत्यधिक ऊंची कांवड़ एवं निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि वाले डीजे वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण रखने के निर्देश दिए। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल एवं हेल्प डेस्क को सक्रिय रखने पर भी विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान आगामी महाकुंभ-2027 की तैयारियों में व्यवधान नहीं आना चाहिए। दोनों व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाते हुए विकास कार्यों एवं तैयारियों को निर्धारित समय पर आगे बढ़ाया जाए, ताकि उत्तराखण्ड एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट व्यवस्थाओं का उदाहरण प्रस्तुत कर सके।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, दायित्वधारी विनय रोहिला, सुनील सैनी, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, ओम प्रकाश जगदग्नि, श्यामवीर सैनी, देश राज कर्णवाल, दिनेश कौशिक, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, विधायक आदेश चौहान, अध्यक्ष जिला पंचायत किरण चौधरी, मेयर हरिद्वार किरण जैसल, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, भाजपा के जिलाध्यक्ष हरिद्वार आशुतोष शर्मा, जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, व्यापार मंडल हरिद्वार के महामंत्री प्रदीप कालड़ा सहित अन्य जन-प्रतिनिधियों ने भी कांवड़ यात्रा को लेकर अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप एवं पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने कांवड़ मेले की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल, पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया एवं एसएसपी सर्वेश पंवार, टिहरी की जिलाधिकारी नीतिका खंडेलवाल ने भी अपने-अपने जिलों में कांवड़ मेला को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी दी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, एल. फैनई व आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, सचिव नितेश कुमार झा, पंकज पाण्डे, विनय शंकर पांडे, विनोद कुमार सुमन, धीराज सिंह गर्ब्याल, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक अभिसूचना अभिनव कुमार, आयुक्त गढ़वाल मंडल आनंद स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक कुंभ मेला योगेंद्र सिंह रावत, मेलाधिकारी कुंभ सोनिका, एसएसपी कुंभ आयुष अग्रवाल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

सीएम ने हरिद्वार गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत लगभग 235 करोड़ रुपये की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का किया भूमि पूजन एवं शिलान्यास

हरिद्वार को आधुनिक, सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत लगभग 235 करोड़ रुपये की चार प्रमुख आधारभूत अवसंरचना परियोजनाओं का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। उत्तराखण्ड निवेश एवं आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) द्वारा संचालित इन परियोजनाओं से आगामी महाकुंभ-2027 की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ वर्षभर आने वाले श्रद्धालुओं एवं कांवड़ यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही स्थानीय नागरिकों को भी बेहतर आधारभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा तथा पर्यटन, व्यापार, परिवहन, होटल व्यवसाय, हस्तशिल्प एवं अन्य सेवा क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अलकनंदा होटल हरिद्वार में आयोजित समारोह में 43.25 करोड़ रुपये की लागत से प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमि पूजन किया। इसके साथ ही 66.76 करोड़ रुपये की लागत से हर की पैड़ी एवं सुभाष घाट के पुनरुद्धार, 66.34 करोड़ रुपये की लागत से हर की पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधारभूत अवसंरचना विकास तथा 58.84 करोड़ रुपये की लागत से रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ गंगा की असीम कृपा और संत समाज के आशीर्वाद से प्रारंभ हुई ये परियोजनाएं हरिद्वार को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी के रूप में विकसित करने के व्यापक विजन का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल शिलान्यास करने में नहीं, बल्कि समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी ढंग से परियोजनाओं को पूर्ण कर जनता को समर्पित करने की कार्यसंस्कृति पर विश्वास करती है। सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने तथा गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जागरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में उत्तराखण्ड सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के साथ-साथ केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, शारदा कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर तथा विवेकानंद कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर भी कार्य कर रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करना भी है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र, भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान तथा सनातन सभ्यता का आध्यात्मिक द्वार है। आगामी महाकुंभ-2027 भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व होगा। राज्य सरकार इसे इतिहास का सबसे दिव्य, भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित महाकुंभ बनाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। आज जिन चार परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है, वे भी इसी व्यापक तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि महाकुंभ को दृष्टिगत रखते हुए हरिद्वार में नए घाटों एवं पुलों का निर्माण, प्रमुख संपर्क मार्गों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण तथा यातायात व्यवस्था के आधुनिकीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। बहादराबाद-सिडकुल से शिवालिक नगर तक सड़क चौड़ीकरण, ज्वालापुर एवं शिवालिक नगर के बीच रोह नदी पर नए पुल का निर्माण तथा पतंजलि योगपीठ से फेरूपुर तक संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य प्रगति पर हैं। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य महाकुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सुविधाजनक बनाना है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार को आस्था के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, आधुनिक आधारभूत सुविधाओं और रोजगार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी नगरों में विकसित किया जा रहा है। हरिद्वार मेडिकल कॉलेज निर्माण अंतिम चरण में है। लालढांग में मॉडल डिग्री कॉलेज तथा श्यामपुर में स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना से स्थानीय लोगों को बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेलीपोर्ट, पॉड टैक्सी परियोजना तथा हर की पैड़ी से माँ चंडी देवी और माँ मनसा देवी तक रोपवे परियोजना पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लालढांग क्षेत्र में पुल एवं झूला पुल निर्माण, शंकराचार्य फ्लाईओवर के नीचे गेम जोन तथा मोतीचूर फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग, पार्क एवं कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कांवड़ यात्रा के दौरान केवल अस्थायी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन राज्य सरकार ने इस सोच को बदलते हुए कांवड़ पटरी मार्ग के स्थायी एवं आधुनिक विकास का कार्य प्रारंभ किया है, ताकि प्रत्येक वर्ष आने वाले करोड़ों कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम एवं बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता और देवभूमि की मूल पहचान के संरक्षण के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि से 12 हजार एकड़ से अधिक अतिक्रमण हटाया गया है तथा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग से उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प अवश्य पूरा होगा। उन्होंने कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रशासनिक मार्ग का नाम परिवर्तन संबंधी सुझाव पर संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लेने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि धर्मनगरी हरिद्वार में विश्वस्तरीय आधारभूत अवसंरचना के विकास से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि पूरे राज्य की पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक लाभ होगा।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा एवं राम सिंह कैड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। यूआईआईडीबी के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी महाकुंभ से पूर्व सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

समारोह में दायित्वधारी विश्वास डाबर, ओम प्रकाश जमदग्नि, विनय रोहिल्ला, सुनील सैनी, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, श्यामवीर सैनी, देशराज कर्णवाल, दिनेश कौशिक, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर हरिद्वार किरण जैसल, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष हरिद्वार आशुतोष शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, सचिव विनय शंकर पांडेय, मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, आईजी कुंभ डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर, नगर आयुक्त नंदन कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हरिद्वार गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत चार प्रमुख परियोजनाओं का विवरण

1. हर की पैड़ी-सुभाष घाट पुनर्विकास परियोजना

इस परियोजना के अंतर्गत हर की पैड़ी कॉरिडोर के सुभाष घाट क्षेत्र का समग्र विकास किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। बढ़ती संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए धनुष घाट क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा, जिससे पवित्र स्नान एवं अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो सके।

परियोजना के अंतर्गत धनुष पुल, आस्था पथ एवं बोर्डवॉक पुल का निर्माण किया जाएगा। साथ ही भीड़ प्रबंधन एवं आपातकालीन निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। गंगा घाट के पैदल मार्ग का पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम एवं सुविधाजनक हो सके।

2. हर की पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधारभूत अवसंरचना विकास परियोजना

इस परियोजना का उद्देश्य हर की पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधुनिक एवं सुव्यवस्थित आधारभूत सुविधाओं का विकास करना है। आगामी महाकुंभ एवं कांवड़ यात्रा सहित वर्षभर आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पार्किंग, भीड़ प्रबंधन एवं सार्वजनिक सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों का विकास, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार तथा क्षेत्र की आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा, जिससे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान आवागमन एवं व्यवस्थाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित हो सके।

3. रोड़ी बेलवाला क्षेत्र पुनर्विकास परियोजना

रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के समग्र पुनर्विकास के माध्यम से श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ एवं आधुनिक वातावरण विकसित किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों के अनुरूप आधुनिक आधारभूत संरचना तैयार करना है।

इसके अंतर्गत जल निकासी व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, विभिन्न सिविल कार्य, निगरानी प्रणाली (सर्विलांस), पैदल सुविधाओं का विकास तथा अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

4. प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर विकास परियोजना

इस परियोजना के माध्यम से प्रशासनिक मार्ग का चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण एवं आधुनिक स्वरूप में विकास किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य हरिद्वार के प्रमुख मार्ग पर सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

मार्ग के उन्नयन से यातायात संचालन में सुधार होगा, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों की आवाजाही अधिक सुविधाजनक बनेगी तथा महाकुंभ, कांवड़ यात्रा एवं अन्य बड़े आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय एवं दून विवि का किया भ्रमण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर राज्य के युवाओं को विदेश में सीधे रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तराखंड सरकार की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार के प्रयासों से मंगलवार को जापान के आए प्रतिनिधि मंडल ने सर्वे चौक, देहरादून स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय एवं दून विश्वविद्यालय का भ्रमण किया। यह सभी प्रतिनिधिमंडल अनाडुकी ग्लोबल करियर कंपनी लिमिटेड, जापान से हैं। जिसमें हिदेतारो उसुई, माई इकुता एवं मिहोको मात्सुमोतो शामिल हैं।

जापानी प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा उत्तराखण्ड और जापान के मध्य कौशल विकास, जापानी भाषा प्रशिक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय रोजगार सहयोग को नई गति प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार द्वारा युवाओं को दिए जा रहे भाषा एवं कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अवलोकन किया तथा जाना कि उत्तराखण्ड सरकार किस प्रकार युवाओं को वैश्विक रोजगार के लिए तैयार कर रही है। साथ ही, उन्होंने उन क्षेत्रों की संभावनाओं का अध्ययन किया जिनमें उत्तराखण्ड के युवाओं को जापान में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में भ्रमण के दौरान किया छात्रों से भी किया संवाद

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में भ्रमण किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन और वैश्विक रोजगार योजना के अंतर्गत जापानी भाषा सीख रहे प्रशिक्षित अभ्यर्थियों से संवाद किया तथा उनके जापानी भाषा, तकनीकी दक्षता एवं रोजगार संबंधी तैयारियों की जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधियों ने छात्रों को जापानी भाषा के सही उच्चारण, व्यावहारिक संवाद और कॉरपोरेट एथिक्स की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने जापान की कार्य संस्कृति से छात्रों को अवगत कराया।प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस समय जापान में आईटी, हॉस्पिटैलिटी, इंजीनियरिंग, केयरगिविंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कुशल और जापानी भाषा जानने वाले युवाओं की आवश्यकता है।

इस अवसर पर मौजूद निदेशक सेवायोजन नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को वैश्विक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के माध्यम से युवाओं को विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति एवं रोजगार संबंधी आवश्यक कौशल भी प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जापान की प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधियों का उत्तराखंड आगमन राज्य के युवाओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जिससे उन्हें विदेशों में बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

दून विश्वविद्यालय में भाषा की बारीकियों के साथ वर्क कल्चर पर हुई चर्चा

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने दून विश्वविद्यालय का भ्रमण कर जापानी भाषा विभाग के प्राध्यापकों एवं प्लेसमेंट प्रभारियों के साथ बैठक की। बैठक में जापानी भाषा शिक्षा को और अधिक प्रभावी एवं रोजगारोन्मुख बनाने, शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों के लिए जापान में उच्च शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जापान में सफल करियर के लिए भाषा के ज्ञान के साथ जापान की कार्य संस्कृति, सामाजिक व्यवहार, रहन-सहन और सांस्कृतिक मूल्यों की समझ भी आवश्यक है। साथ ही, दोनों पक्षों के बीच भविष्य में भी शैक्षणिक एवं कौशल विकास संबंधी सहयोग को और सुदृढ़ करने पर भी सहमति बनी।

इस अवसर पर मौजूद मुख्यमंत्री के अपर सचिव मनमोहन मैनाली ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य युवाओं को देश के साथ विदेशों में भी रोजगार देने का कार्य निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि जापान सहित विभिन्न देशों के साथ स्थापित हो रहा यह सहयोग उत्तराखण्ड के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार और करियर के नए द्वार खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मनमोहन मैनाली ने कहा कि जापानी प्रतिनिधिमंडल द्वारा राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई है। उन्होंने कहा शिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आगे भी कार्य किया जाएगा, ताकि उत्तराखण्ड के युवा वैश्विक रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें और उन्हें विदेशों में बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हों।

इस अवसर पर उपनिदेशक चंद्रकांता, नोडल अधिकारी विनीता बड़ोनी, लर्नेट स्किल्स के स्टेट हेड रमेश पेटवाल, दून विश्वविद्यालय से जापानी भाषा की असिस्टैंट प्रोफेसर डॉ. दीपिका भाटिया, प्लेसमेंट सेल की प्रभारी डॉ. स्वाति बिष्ट एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

गोदियाल को आड़े हाथों लेते हुए बोले मंदिर समिति अध्यक्ष, बोले मंदिर को चंदे में मिले दान को अपने चहेतों पर लुटाने वाले दे रहे ज्ञान

श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने गोदियाल के अनर्गल आरोपों को कांग्रेस के शर्मनाक कृत्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। कहा, जिस तरह एक कार्यकर्ता और छात्रा की मौत के ग़मगीन माहौल में गोदियाल समेत तमाम कांग्रेसी अपने युवराज के स्वागत में बेशर्मी से नाचते नजर आए, वो उनकी खराब मानसिकता को दर्शाता है। वहीं पलटवार कर कहा, जिन्होंने समिति के करोड़ों रुपए के संसाधन अपनी सेवा में खर्च किए, जिन्होंने मंदिर को चंदे में मिले दान को अपने चहेतों पर लुटाया, उनका मंदिर पर ज्ञान और नैतिकता का पाठ देना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिलहाल मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर गड़बड़ी और चोरी आदि सभी प्रकरण पर जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया गया, उसे किसी कीमत पत्र बख्शा नहीं जाएगा।

पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा, श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। यह किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे देश की श्रद्धा का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की सरकार कार्य कर रही है। वर्तमान गड़बड़ी और चोरी के सामने आए दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण को मुख्यमंत्री ने पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया है। उनके निर्देश पर उच्च स्तरीय जांच चल रही है, इसलिए हमारा उद्देश्य किसी को बचाना या इसकी छवि को खराब करना नहीं, बल्कि हम चाहते है कि सत्य सबके सामने आना चाहिए। इन सारे मामलों में तीन तरह की जांच चल रही है।

उन्होंने कहा कि एसआईटी, विभागीय जांच, और उच्च स्तरीय जांच राज्य स्तर पर कमिश्नर की अध्यक्षता में जांच गतिमान है। आज पूर्व अध्यक्ष, श्री बद्री-केदार मंदिर समिति और वर्तमान में कांग्रेस के अध्यक्ष, गणेश गोदियाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि मंदिर के चंदा चोर आरोपों में जो दूसरा अभियुक्त गिरफ्तार हुआ है, उसने यह कहा है कि उसको ऊपर से निर्देश मिलते थे। मैं जानना चाहता हूँ कि गोदियाल जी को यह जानकारी कहाँ से मिली? क्या आरोपी से उनकी कोई बातचीत हुई है या पुलिस की जो जांच कर रही है, उसमें गोदियाल को कोई जानकारी प्राप्त हुई है? क्योंकि यह कहीं पर भी पब्लिक डोमेन में, मेरी जानकारी में यह बात नहीं है। और अगर यह बात झूठी है, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि वह कहीं ना कहीं इस जांच को प्रभावित करने के लिए, दोषियों को बचाने के लिए, इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।

वहीं जोर देते हुए कहा कि मंदिर में चंदा चोरी के जघन्य अपराध में जो भी कोई लिप्त होगा, उसको किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हमारे प्रदेश क मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश हैं और इस प्रकरण में उन्होंने स्पष्ट कहा भी है कि कोई भी दोषी होगा, उसको किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। और मैं स्वयं इस बात के लिए प्रतिबद्ध हूँ कि इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी अलग होकर सबके सामने आना चाहिए।
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कहा, गोदियाल से पूछना चाहता हूँ कि जब वह बद्रीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष थे, तो क्या उन्हें सारे काम के निर्देश राहुल गांधी या प्रियंका गांधी जी से मिलते थे? अगर ऐसी परंपरा थी, जिसके आधार पर वह दावा कर रहे हैं, तो मैं उनको बताना चाहता हूँ कि यह भारतीय जनता पार्टी की परंपरा नहीं है। उनके यहाँ यह परंपरा रही होगी, शायद उसी परंपरा के आधार पर वह इस तरह की बेतुकी बातें कर रहे हैं। भाजपा में कभी भी किसी गलत काम को करने की शिक्षा नहीं दी जाती है। हमारी पार्टी सनातन के मार्गदर्शन में चलने वाली पार्टी है, जहाँ किसी को दिखाने के लिए ईमानदारी का ढोंग नहीं करना पड़ता है। हमारी पार्टी स्वयं से अनुशासित होकर, अनुशासित रहने का मंत्र देकर जनसेवा की सीख देती है।

​उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से भी नहीं है, किसी दल से भी नहीं है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए है। बद्री-केदार की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास से कोई समझौता नहीं होगा। यदि कोई दोषी होगा, तो उसे कानून अपने अनुसार दंड मिलेग और यदि कोई निर्दाेष है, तो उस पर राजनीति करने के आरोप लगाने वालों को उनकी ही भाषा में करारा जवाब दिया जाएगा।

​कहा, जिस प्रकार उन्होंने आज कहा, जिस कर्मचारी के ऊपर यह आरोप लगे हैं वे मेरे करीबी थे, जबकि उसकी 2003 में नियुक्ति हुई थी। वह मुंबई में एक कंपनी थी, जिसमें वह कार्यरत था। वहाँ से वह आया था, उसको एक टेंपरेरी नौकरी वहाँ पर मिली थी, इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर। लगातार वह इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रहा था। उसके बाद सरकार से जो 34 पद स्वीकृत होकर आए उसमें एक पद इंटरनेट कोऑर्डिनेटर का स्वीकृत होकर आया था। उन्होंने उसको स्थाई किया, उनके हस्ताक्षरों से वह स्थाई हुआ। उन्होंने सारे नियम-कानूनों को साइड रखते हुए, एक्ट का उल्लंघन करते हुए, आखिर उस 34 लोगों में से उसी कर्मचारी को वैयक्तिक सहायक के पद पर सीधे बिठा दिया! जबकि इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद का कोई वहाँ पर समायोजन का कोई प्रावधान नहीं है। आप पद को समायोजित नहीं कर सकते हैं। आज की तारीख में भी वह इंटरनेट कोऑर्डिनेटर का पद यहाँ पर खाली है विभाग के अंदर। और उन्होंने सीधे उसको वैयक्तिक सहायक पर पदोन्नति देकर, जो 1984 से एक पद खाली था। आखिर उनका ऐसा क्या प्रेम था? सिर्फ एक व्यक्ति को ही लगातार उन्होंने दो प्रोन्नति दे दी! 2800 ग्रेड पे से सीधे 4600 के पद पर लेकर आ गए!

​वहीं बतौर अध्यक्ष समिति के संसाधनों के दुरुपयोग और वित्तीय डकैती के आरोप लगाते हुए कहा, वह बार-बार यह कहते हैं साहब कि वैयक्तिक सहायक को अपने साथ ले गए। जबकि मैंने14 महीने का मेरा कार्यकाल है, मैंने एक भी बद्री-केदार मंदिर समिति का स्टाफ अपने साथ में नहीं रखा हुआ है। और इस बार की जो यात्रा वह ऐतिहासिक यात्रा रही है। इतनी अधिक संख्या में देश भर से तीर्थयात्री वहाँ पर आए। और मंदिर समिति के पास आप जानते हैं कि सीमित स्टाफ है। हमने निर्णय लिया कि सारा स्टाफ फील्ड में काम करेगा। कोई मेरे पास एक स्टाफ नहीं रहता है। जो आज यह बात कह रहे हैं, 10-10 लोगों का स्टाफ उनके घरों में, उनके विद्यालय में, उनके राजनीतिक फील्ड में हमेशा रहा है। उन्होंने किस तरह से मंदिर समिति का दुरुपयोग किया, किस तरह से लूटपाट मचाई, उसके प्रमाण पुख्ता हैं। 2025 में, यह कमिश्नर, तत्कालीन कमिश्नर सुशील कुमार की जांच रिपोर्ट में वह सारी चीजें यहाँ पर आई हुई हैं। गोदियाल कहते हैं कि श्मैं ₹1 भी नहीं लेता हूँ जबकि वे विधानसभा में सदस्य थे? विधायक की तनख्वाह वहाँ से लेते थे और सारा लाभ संसाधन करोड़ों रुपए का आपने बद्री-केदार मंदिर समिति से लिया था। थे!

​आरोप लगाते हुए कहा, उन्होंने अपने उस 5 साल के कार्यकाल में अधीनस्थ मंदिरों में, धर्मशालाओं मेंकृ27 धर्मशालाएं हैं हमारी, 7 हमारे संस्कृत विद्यालय हैंकृउन पर कहीं पर भी उन्होंने ₹1 भी खर्च नहीं किया। और लाखों-करोड़ों रुपया बाहर खर्च किया। इससे भी ज्यादा देखिए कि मंदिर समिति के उन्होंने जो बजट था, उसमें साफ एक्ट में प्रावधान है, क्योंकि मंदिर की आय का स्रोत दान के पैसों से, जो दानदाता हैं, उन दानदाताओं से ही मंदिर का खर्चा चलता है। लेकिन उन्होंने सारे एक्ट को, सारे नियम-कानूनों को धता बताते हुए, उन्होंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के अंदर पैसा लगाया, उन्होंने जो अपना कॉलेज है वहाँ पर, उस कॉलेज के अंदर पैसा लगाया। उन्होंने विवेकाधीन कोष जैसे ही मंदिर समिति के धन का दुरुपयोग किया। वह चोरी की बात कर रहे हैं, चंदा चोरी? उन्होंने तो डकैती मचाई। उस चंदा डकैत ने जैसे विवेकाधीन कोष से पैसा बांटा जाता है, व्यक्तिगत लोगों को उन्होंने कई लोगों को अपनी विधानसभा के अंदर 25,000, 50,000, 1 लाख, 2 लाख, 5 लाख दिया। उन्होंने ऐसा पैसा लुटाया है और आज वह यह दुहाई देते हैं कि चंदा चोरी! चंदा चोरी!

​जबकि यह घटना हमारे संज्ञान में आई, तत्काल कठोर कार्रवाई करते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किए, जांच समिति बना दी। माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर तत्काल उन्होंने इसकी गंभीरता को देखते हुए इस पर। इसका संज्ञान लिया और उसके बाद उन्होंने इस पर उच्च स्तरीय कमेटी बना दी और जांच आज भी गतिमान है। लगातार उसमें जो है कि जो भी इसमें संलिप्त होंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो रही है, वह जेल जा रहे हैं। लेकिन वह किस तरह से इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं और किस तरह से लोगों को वह दिग्भ्रमित कर रहे हैं?

अभी हाल ही में परसों देखिए आप, उनकी तो संवेदनाएं मर चुकी हैं। उनके अंदर ना संवेदनाएं हैं, ना मर्यादाएं हैं। आज जिस बिटिया ने आत्महत्या की थी, उसकी फोटो लगी है उस मंच में, उसके पिताजी उस मंच पर खड़े हैं। और उसी दिन शाम को जो है कि एक कांग्रेस कार्यकर्ता की जो है कि वहाँ पर जो है कि मृत्यु हो जाती है, एक दुर्घटना घट जाती है। और देखिए वह किस प्रकार से डांस कर रहे हैं! किस प्रकार से वह नाच रहे हैं वहाँ पर! कुछ तो शर्म करे कांग्रेसी। जो वहां डांस कर रहे हैं उनकी संवेदनाएं खत्म हो गई थी और अब पोल खुल गई तो भ्रमित करने के लिए, इस मुद्दे को भटकाने के लिए, मर्यादा की बात करते हैं उनका कार्यकर्ता, वह किस तरह से उसने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है और किस तरह से उसने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ उन्होंने किस तरह का किस तरह की बातें कही हैं।आपको तो किसी पर भरोसा ही नहीं! देश के निर्वाचन आयोग पर भरोसा नहीं है, देश की सीबीआई पर भरोसा नहीं है, देश की किसी जांच एजेंसी पर आपको भरोसा नहीं है। फिलहाल जांच होने दीजिए, जांच आने दीजिए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

इस दौरान पत्रकार वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी एवं मीडिया संपर्क संयोजक हरीश चमोली भी मौजूद थे।

सीएस ने उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा एवं विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा एवं विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दृष्टिकोण से प्रदेश में सरकारी एवं ग़ैर सरकारी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी ली एवं दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप मॉडिफाई किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को अपना 5 वर्ष का प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी सरकारी विश्वविद्यालय को NAAC एवं NIRF एक्रेडिटेशन प्राप्त किए जाने पर फोकस किए जाने की बात कही। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को सभी गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन एवं दीर्घकालिक प्लान तैयार किए जाने की बात भी कही। उन्होंने अपनी सभी 11 यूनिवर्सिटी को मूल्यांकन एवं रैंकिंग के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने सभी सरकारी एवं एडेड कॉलेज को अगले 8-10 दिन में स्टेट लेवल रैंकिंग पैरामीटर्स तैयार किए जाने का टास्क दिया।

मुख्य सचिव ने छात्र छात्राओं की ट्रेसिंग मैकेनिज्म भी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोर्सेस के साथ ही इंटर्नशिप पार्टिसिपेशन को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए विश्वविद्यालयों को इंडस्ट्री, एनजीओ और सोसाइटीज को भी जोड़े जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय को विदेशी भाषाओं सिखाने पर भी फोकस किए जाने बात कही। कहा कि स्वास्थ्य विभाग को भी इसमें प्रोएक्टिव होकर काम करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, अपर सचिव मनुज गोयल, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो दीवान एस रावत, प्रो नवीन चंद्र लोहानी, प्रो एन के जोशी एवं प्रो सतपाल सिंह बिष्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही प्राईवेट पार्टनर्स से जोड़े जाने की आवश्यकताः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों के अंतर्गत बनाए गए ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति एवं संचालित गतिदिवधियों की जानकारी ली। उन्होंने ग्रोथ सेंटर्स को स्थानीय स्तर पर आर्थिकी गतिविधियों के लिए महत्त्वपूर्ण बताया। कहा कि ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही प्राईवेट पार्टनर्स से जोड़े जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित हो रहे ग्रोथ सेंटर्स को लगातार रिव्यू किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अच्छा कर रहे ग्रोथ सेंटर्स को तकनीकी एवं अन्य प्रकार का सपोर्ट उपलब्ध कराए जाने के साथ ही नॉन-फंक्शनल ग्रोथ सेंटर्स को भी फंक्शनल किए जाने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने अपने सभी उत्पादों को ट्रेसेबिलिटी, जीआई टैगिंग और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से जोड़े जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने शीप एंड वूल डेवेलपमेंट बोर्ड के अंतर्गत पशुपालकों की समस्याओं को समझने एवं उनके निस्तारण के लिए लगातार पशुपालकों के साथ संवाद एवं वर्कशॉप आयोजित किए जाने की बात कही। कहा कि यह बोर्ड की जिम्मेदारी है। यदि किसी अन्य राज्य में इस दिशा में अच्छा कार्य हो रहा है तो वहां अपनी टीम को भेजकर उनके मैकेनिज्म को समझने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही कोल्ड स्टोरेज चेन से जोड़े जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्टैण्ड अलोन माईक्रो स्टोरेज चेन विकसित की जा सकती है। इससे ग्रोथ सेंटर्स के उत्पादों को लम्बे समय तक संरक्षित रख कर आवश्यकता के अनुरूप मार्केट में उतारा जा सकेगा, ताकि उत्पाद की उचित कीमत मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज के साथ सभी ग्रोथ सेंटर्स से सम्बन्धित विभागों कॉर्डिनेशन मीटिंग करवा ली जाए। कहा कि पोटेंशियल वाले नॉन-फंक्शनल ग्रोथ सेंटर्स की हैंड होल्डिंग करायी जाए। उन्होंने नाबार्ड को भी गैप्स आइडेंटिफाई करते हुए ग्रोथ सेंटर्स को फंडिंग उपलब्ध कराए जाने की बात कही। साथ ही फॉरेस्ट के ग्रोथ सेंटर्स के लिए बिजनेस प्लान तैयार कर उपलब्ध कराए जाने पर जोर दिया।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव कहकशां नसीम, आनन्द श्रीवास्तव एवं झरना कामठान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हमारा लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करनाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने को राजपुर रोड, देहरादून स्थित एक निजी होटल में शाइन अवी लर्निंग समावेशी शिक्षा मिशन-2030 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष बच्चों के लिए विजुअल लर्निंग करिकुलम पर आधारित विभिन्न पुस्तकों एवं शिक्षण सामग्री का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा शाइन अवी लर्निंग की पहल, शिक्षा को और अधिक सरल, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा केंद्र एवं राज्य सरकार ने हमेशा शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की है। जिसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाने के साथ समझने, सोचने, नवाचार और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने योग्य बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, पीएम श्री विद्यालय, अटल उत्कृष्ट विद्यालय, डिजिटल शिक्षण सामग्री और विज्ञान एवं नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को हर बच्चे तक पहुँचाने के लिए सरकार विद्यालयों में रैम्प, रेलिंग, सुगम शौचालय, अनुकूलित फर्नीचर, स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाओं को सुदृढ़ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लगभग 5,800 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे विभिन्न स्तरों पर विद्यालयों में पंजीकृत हैं। सरकार द्वारा संचालित 11 विशेष विद्यालयों के माध्यम से 1,300 से अधिक बच्चों को विशेष शिक्षण एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा प्रारम्भिक एवं माध्यमिक स्तर पर 300 से अधिक विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है और शेष रिक्त पदों पर भी भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें राज्य का प्रत्येक बच्चा, अपनी पूर्ण क्षमता के साथ आगे बढ़ सके और नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सके। हमें अपने बच्चों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षाविद अनीता शर्मा और शाइन अवी लर्निंग की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अनीता ने विदेश से रिवर्स पलायन कर उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार किया है। उन्होंने कहा यह कदम अन्य प्रवासियों के लिए भी एक उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते सालों में कई प्रवासियों ने अपने गांव घर लौटकर काम करने की इच्छा जताई है और कई लोग ऐसा कर भी रहे हैं। उन्होंने हम सब ने अपनी विरासत को संरक्षित करना है और अपनी सभ्यता को आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड राज्य, पूरे भारत के लोगों को आत्मसात करता है। हमारे राज्य के लोग व्यक्ति की सोच और उसके कामों को देखते है। तमाम चुनौतियों के बाद भी राज्य, निरंतर विकास के पथ पर आगे चला है। उत्तराखंड की जनता ने हमेशा सरकार को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा हमारा राज्य पूरे देश के लिए कई मामलों में उदाहरण बन कर रहा है। राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता लागू हुआ। सतत विकास लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड में प्रथम स्थान हासिल किया। साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून, जैसे कड़े फैसले भी राज्य सरकार ने लिए हैं।

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष धीरेंद्र पंवार, अनीता शर्मा, रमेश भट्ट, सुधीर नौटियाल, पीसी नैनवाल, मनोज पंत, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री से सीएम धामी का पूर्वाेत्तर राज्यों की तर्ज पर जल विद्युत परियोजनाओं को विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय विद्युत मंत्री से ऊर्जा परियोजनाओं एवं पिटकुल की एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना पर की चर्चा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर उत्तराखण्ड की ऊर्जा आवश्यकताओं, जल विद्युत परियोजनाओं, पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तथा पिटकुल की एडीबी (ADB) सहायतित पारेषण परियोजना सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भारत सरकार द्वारा समय-समय पर केंद्रीय पूल से अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध कराने में दिए जा रहे सहयोग के लिए केंद्रीय विद्युत मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों, वर्षा में कमी तथा जलाशयों में कम जलागम के कारण आगामी महीनों में जल विद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वहीं चारधाम यात्रा एवं आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान विद्युत मांग में और अधिक वृद्धि होने की संभावना है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने जुलाई 2026 की शेष अवधि के लिए 150 मेगावाट तथा अगस्त 2026 के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत केंद्रीय पूल से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर जल विद्युत परियोजनाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया।

मुख्यमंत्री ने राज्य में लगभग 10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज क्षमता के विकास के लिए आगामी पांच वर्षों में 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता अथवा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) उपलब्ध कराने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और ग्रिड स्थिरता को देखते हुए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्वीकृत क्षमता 500 मेगावाट आवर से बढ़ाकर 665 मेगावाट आवर किए जाने तथा उसके अनुरूप वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया।

मुख्यमंत्री ने बैठक में पिटकुल की 3,638.26 करोड़ रुपये (US $425.78 मिलियन) लागत वाली एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना के विषय पर भी चर्चा की। उन्होंने अनुरोध किया कि इस परियोजना के लिए मूल 80:20 एडीबी ऋण एवं राज्यांश (ADB Loan : Counterpart Funding) की वित्तीय व्यवस्था को यथावत रखा जाए। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत 2,910.61 करोड़ रुपये (US $340.62 मिलियन) का एडीबी ऋण प्रस्तावित है, जिसे उत्तराखण्ड जैसे विशेष श्रेणी के हिमालयी राज्य के लिए निर्धारित वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप स्वीकृत किया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा परियोजना को तकनीकी रूप से उपयुक्त माना गया है तथा विद्युत मंत्रालय ने भी एडीबी सहायता पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। हालांकि एडीबी हिस्सेदारी को 60 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय पैटर्न में परिवर्तन किया जाता है तो उत्तराखण्ड को विशेष श्रेणी राज्य के रूप में मिलने वाले वित्तीय लाभ प्रभावित होंगे। इसलिए मूल 80:20 वित्तीय व्यवस्था को बरकरार रखते हुए परियोजना को स्वीकृति प्रदान की जाए।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत एवं ऊर्जा आत्मनिर्भरता के संकल्प को साकार करने में उत्तराखण्ड की जल विद्युत क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का सकारात्मक सहयोग राज्य के ऊर्जा क्षेत्र, आधारभूत संरचना तथा सतत विकास को नई गति प्रदान करेगा।

केंद्रीय विद्युत मंत्री ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

उत्तराखंड में रेल की रफ्तार के साथ विकास की उड़ान, फ्रीज जोन समीक्षा से पहाड़ों में खुल सकती हैं नई संभावनाएं

उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था को बदलने वाली योजना नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों के आर्थिक और सामाजिक भविष्य को भी नई दिशा देने वाली परियोजना मानी जा रही है। अब जब इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का अधिकांश कार्य अंतिम चरणों में पहुंच चुका है, तो राज्य सरकार उन प्रतिबंधों की समीक्षा की ओर बढ़ रही है, जो निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा कारणों से लगाए गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने रेलवे फ्रिज जोन में लागू 400 मीटर प्रतिबंध की समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दिशा में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक और संबंधित निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है तथा वहां विकास गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से अनुमति दी जा सकती है। यह पहल केवल प्रशासनिक निर्णय भर नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की उम्मीदों से भी जुड़ी है, जो पिछले कई वर्षों से पर्यटन, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

विकास की राह में बना था सुरक्षा कवच
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने 9 जनवरी 2024 को रेलवे कॉरिडोर से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था। योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर जैसे क्षेत्रों में रेलवे परियोजना की परिसीमा से 400 मीटर तक के दायरे में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अनियंत्रित निर्माण कार्य रेलवे परियोजना की सुरक्षा, सुरंगों और अन्य तकनीकी ढांचों पर प्रतिकूल प्रभाव न डालें। इन प्रतिबंधों ने परियोजना को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ स्थानीय स्तर पर इसके प्रभाव भी सामने आने लगे। कई स्थानों पर होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक परियोजनाएं ठहराव का शिकार हो गईं।

पर्यटन और निवेश को मिल सकती है नई संजीवनी
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर आधारित है। विशेष रूप से गढ़वाल मंडल के वे क्षेत्र, जहां से रेल परियोजना गुजर रही है, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में फ्रीज जोन प्रतिबंधों की समीक्षा को स्थानीय विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार के पास विभिन्न जिलों से लगातार सुझाव पहुंच रहे थे कि रेलवे ट्रैक का अधिकांश कार्य पूरा होने के बाद वर्तमान व्यवस्था अब विकास गतिविधियों में बाधा बन रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवास विभाग ने जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन शुरू किया है। यदि तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रतिबंधों में आंशिक शिथिलता दी जाती है, तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास का रास्ता खुल सकता है। इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल संपर्क शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसे में पर्यटन आधारित बुनियादी ढांचे का विकास समय की आवश्यकता भी है। फ्रीज जोन समीक्षा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

जनहित और सुरक्षा के बीच संतुलन की कोशिश
राज्य सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी प्रकार की राहत रेलवे सुरक्षा से समझौता करके नहीं दी जाएगी। यही कारण है कि समीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देश पर जिलों से ऐसे क्षेत्रों की पहचान कराई जा रही है, जहां रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जहां विकास गतिविधियों को नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ ही रेलवे से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं, भूगर्भीय परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया जाएगा। सरकार की मंशा केवल प्रतिबंध हटाने की नहीं, बल्कि ऐसी संतुलित व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे रेलवे परियोजना के दीर्घकालिक हित सुरक्षित रहें और स्थानीय नागरिकों को भी विकास का लाभ मिल सके।

पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया आधार
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड की विकास यात्रा का गेम चेंजर माना जाता है। रेल संपर्क से जहां चारधाम यात्रा और पर्यटन को नई गति मिलेगी, वहीं इसके आसपास विकसित होने वाली आर्थिक गतिविधियां भी प्रदेश की तस्वीर बदल सकती हैं। फ्रीज जोन समीक्षा की यह पहल उसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें धामी सरकार विकास, निवेश और रोजगार को नई गति देने के साथ-साथ स्थानीय जरूरतों को भी प्राथमिकता दे रही है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो लंबे समय से ठहरी विकास योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी और रेलवे कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश का अनुकूल माहौल तैयार होगा।

बयान
*डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आवास *
“मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है। जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, वहां की स्थिति का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे।”

जलभराव, डेंगू नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को सभी विभागों को प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य करने के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0आशीष चौहान ने मानसून अवधि में संभावित आपदाओं, डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम, जलभराव की समस्या तथा स्वच्छता व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल बैठक कर व्यापक समीक्षा की।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि मानसून अवधि में सभी विभाग अलर्ट मोड पर कार्य करें तथा प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्रों की निगरानी करते हुए समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग समन्वय के साथ पूर्व तैयारी सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जनपद के नदी किनारे स्थित लो-लाइन क्षेत्रों में जीपीएस युक्त जेसीबी मशीनें पूर्व से ही तैनात रखने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी आपदा संचालन केंद्रों (डीओसी) पर आवश्यक चिकित्सा संसाधनों के साथ एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पर्वतीय, दुर्गम एवं वन क्षेत्रों में संभावित आपदा की त्वरित सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी सूचना तंत्र विकसित किया जाए, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन, स्वच्छता, जलभराव निस्तारण, डेंगू एवं मलेरिया नियंत्रण तथा जनजागरूकता अभियान को पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ संचालित किया जाए, ताकि जनपदवासियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की प्रभावी रूप से रक्षा की जा सके।

जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं सभी नगर निकायों को निर्देशित किया कि डेंगू, मलेरिया, जलभराव तथा संभावित आपदा की रोकथाम के लिए विस्तृत कार्ययोजना के साथ कार्य करें तथा और अधिक फागिंग मशीन क्रय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव, नालियों की सफाई तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर सर्वे अभियान में तेजी लाई जाए। प्रत्येक घर में संभावित डेंगू लार्वा की जांच, बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान तथा आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया जाए। संदिग्ध मामलों की तत्काल जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए।

शिक्षण संस्थानों में डेंगू से बचाव को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी, नगर निगम एवं नगर निकायों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों का निरीक्षण कर यह प्रमाणित किया जाए कि विद्यालय परिसर डेंगू की दृष्टि से सुरक्षित हैं। विद्यालयों में कहीं भी जलभराव, गंदगी अथवा मच्छरों के पनपने की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जनपद के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में यह सुनिश्चित कराया जाए कि छात्र-छात्राएं पूर्ण बाजू (फुल स्लीव) की वर्दी अथवा वस्त्र पहनकर विद्यालय आएं, जिससे मच्छरों के काटने से बचाव हो सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस संबंध में निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध एपिडेमिक एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी विद्यालयों एवं कार्यालय परिसरों में नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग एवं डेंगू निरोधक उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

जनपद में कूड़ा उठान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नए बने गार्बेज प्वाइंटों का चिन्हीकरण कर तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में नगर निगम एवं नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान चलाया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में कूड़े के ढेर अथवा नए गार्बेज प्वाइंट पाए जाते हैं तो संबंधित उप जिलाधिकारी एवं नगर निकाय के अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में कलेक्ट्रेट सभागार अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के के मिश्रा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार, सिंचाई विभाग लोक निर्माण के विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे तथा समस्त उप जिलाधिकारी नगर निगम, नगर निकाय एवं समस्त संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।