कॉबेर्ट पार्क में तैनात रहे अफसरों की संपत्ति की होगी जांच

कोर्ट ने कार्बेट के ढिकाला जोन में जिप्सियों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और अमानगढ़ व धुलवा रेंज को भी पार्क में शामिल करने के आदेश दिए हैं।

उच्च न्यायालय ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत मामले में सख्त रूख अपनाते हुए जांच सीबीआइ की वन्य जीव शाखा से कराने की संस्तुति दी है। कोर्ट ने कार्बेट के ढिकाला जोन में जिप्सियों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और अमानगढ़ व धुलवा रेंज को भी पार्क में शामिल करने के आदेश दिए हैं।

मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने सीटीआर के बफर जोन से गुर्जरों की बेदखली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बाघों की सुरक्षा के लिए अस्थाई रूप से पार्क में स्पेशल टाइगर फोर्स का गठन हो चुका है, जिसमें पूर्व सैनिकों की नियुक्ति की जा रही है।

कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फोर्स में 40 साल से कम आयु के पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाए। सुनवाई के दौरान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव ने बताया कि पार्क में मरे नौ बाघों में छह की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। इन छह बाघों के बिसरे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा चुके हैं, मगर इस मामले में विरोधाभासी बयानों से नाराज कोर्ट ने सभी बाघों की बिसरा रिपोर्ट बुधवार को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

पेशी के बहाने पिकनिक मनाने न आएं अधिकारी

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अफसरों पर तल्ख टिप्पणी की। कहा कि कोर्ट में पेशी के बहाने अधिकारी पिकनिक मनाने आते हैं। यह गंभीर है। खंडपीठ ने अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह से कहा है कि वह अदालत के आदेशों के अनुपालन में सहयोग करें। वहीं वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते व प्रो. बीएल साह द्वारा सीटीआर पर किए गए शोध पर आधारित रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए और इन शोधों को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए। सीटीआर से लगे सुंदरखाल गांव को हटाने के आदेश भी कोर्ट ने दिए हैं। इसके साथ ही रिसॉर्ट से छुड़ाए गए बीमार हाथियों की जांच व उनका उपचार कराने का आदेश देते हुए बीमारों हाथियों को अन्य से अलग रखने के निर्देश दिए।

ग्रामीणों की एकता ने दिखाया रंग, बुजुर्ग को ले गये अस्पताल

यमकेश्वर प्रखंड के कसाण गांव में स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां के स्थानीय ग्रामीण सड़क न होने के कारण किसी बीमार व्यक्ति को कुर्सी की पालकी बनाकर ले जाने को मजबूर है। पिछले एक दशक से यहां सड़क की समस्या बनी हुयी है। मगर, यहां सड़क का निर्माण न हो सका।

यमकेश्वर प्रखंड के डांडामंडल क्षेत्र में स्थित कसान गांव 11 वर्ष पूर्ण तब सुर्खियों में आया था जब यहां बादल फटने से कुछ घर जमींदोज हो गए थे। 14 अगस्त 2007 की रात यहां आई इस आपदा में 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस गांव की पीड़ा का कोई हल नहीं निकल पाया है।

आपदा पीड़ित होने के बावजूद प्रभावित लोगों का विस्थापन नहीं हो पाया। जितने भी लोग यहां रह रहे हैं वह विपरीत हालत में भी गांव की अवधारणा को पूरा करने के साथ पलायन जैसी समस्या को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गांव से मुख्य सड़क करीब 4 किलोमीटर दूर है। यहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है। किसी तरह से लोग आवागमन बनाए रखे हैं। विकट हालत तब हो जाते हैं जब गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए। स्थानीय ग्रामीण सोहन ने बताया कि सोमवार को स्थानीय नागरिक देवेंद्र सिंह राणा की तबीयत खराब हो गई। आसपास क्षेत्र में पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। बीमार को चिकित्सालय तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी।

गांव वालों ने हिम्मत दिखाई कुर्सी में डंडे बांधकर उसे पालकी बनाया गया। इस कुर्सी में बीमार को बिठाकर किसी तरीके से पहाड़ी इलाके के ऊंचे-नीचे 4 किलोमीटर लंबे सफर किया गया। मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद निजी वाहन के जरिए बीमार को ऋषिकेश चिकित्सालय लाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जो लोग गांव में बसे हैं वह सड़क की मांग कर रहे हैं। मगर जो लोग गांव छोड़कर दिल्ली और अन्य जगह बस गए हैं। उनमें से कुछ लोग सड़क का यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि सड़क हमारे खेतों से होकर नहीं जानी चाहिए।

खनन व्यापारी ने लाइसेंसी बंदूक से खुद को उतारा मौत के घाट

लाइसेंसी बंदूक से एक खनन व्यापारी ने खुद को गोली मार ली। घटना के बाद से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।

नैनीताल जिले के लांलकुआ के गोरापड़ाव निवासी चंचल सिंह राठौर (50 वर्ष) पुत्र कैप्टन योगा सिंह ने रविवार दोपहर घर बाहर खलियान में अपनी लाइसेंसी दोनली बंदूक से कनपटी में गोली मार दी। इसके बाद वह जमीन पर गिर पड़े। मकान की दीवार खून के छीटे से रंग गई। गोली की आवाज सुनकर जबतक परिजन बाहर आते चंचल दम तोड़ चुके थे। चंचल द्वारा खुद को गोली मारने का पूरा प्रकरण उसके घर मे लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। मौके पर पहुची मंडी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पा रहा है।

चंचल के पिता आर्मी रिटायर्ड है, जबकि उसका बेटा भी सेना में तैनात है। दूसरा बेटा हैदराबाद में पढ़ाई कर रहा है। चंचल के पास चार डंपर है। उसकी मौत से घर में कोहराम मचा है।

कुछ दिन पहले लगाये थे सीसीटीवी कैमरे

मृतक चंचल के छोटे भाई शेखर ने बताया कि बड़ा भाई पिछले कई दिनों से डरा-सहमा रहता था। वो अक्सर कहता था कि कोई उसे मार देगा, जिसके चलते पांच दिन पहले घर में कैमरे भी लगाए गए। आज सुबह मेन रोड पर मोबाइल रिचार्ज की दुकान चलाने वाले पंकज से भी उसने यही बात दोहराई। ठीक 12 बजे घर के आंगन में उसने खुद को गोली मार ली।

इंग्लैंड में जॉब करता है छोटा भाई

मृतक चंचल तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। दूसरे नंबर का भाई हीरा राठौर इंग्लैंड में जॉब करता है, जबकि सबसे छोटा शेखर भी खनन कारोबारी है। तीनों भाइयों के मकान आपस में सटे है। सुबह शेखर चंचल से मिलने भी गया था। उस समय वो सामान्य था।

सीएम ने देश का पहला जैव ईंधन विमान को किया फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देश के पहले जैव ईंधन से उड़ने वाले स्पाइस जेट विमान का फ्लैग ऑफ जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया। इसके बाद विमान ने दिल्ली के लिये अपनी उड़ान भरी।

यह बायोफ्यूल जैट्रोफा के तेल एवं हाइड्रोजन के मिश्रण से बनाया गया है। इसके लिए आईआईपी में प्लांट लगाया गया है। संस्थान में बायोजेट फ्यूल तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ से बायोफ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिये जैट्रोफा का बीज खरीदा गया है। इससे पूर्व जैव ईंधन से चलने वाले इस स्पाइस जेट का परीक्षण भी किया था। बताया गया कि अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में कमर्शियल विमान पहले से ही जैव ईंधन से उड़ान भर चुके हैं।

जैव ईंधन से उड़ान भरने वाले स्पाइस जेट के फ्लैग ऑफ के अवसर पर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या, आईआईपी के निदेशक अंजन कुमार रे, स्पाइस जेट से जीपी गुप्ता, कैप्टन सतीश चन्द्र पाण्डे व आईआईपी के वैज्ञानिक उपस्थित थे।

महिलाओं ने बांधा सीएम की कलाई में रक्षा सूत्र

राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में उपस्थित होकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामना देते हुये तोहफे भी दिये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि समय एवं देशकाल परिस्थिति के अनुसार महिलाओं द्वारा रक्षा सूत्र बांधे गये हैं। भाई-बहनों के इस रक्षा सूत्र के त्यौहार के अलावा प्राचीन समय में भी जब राजा युद्ध के लिए जाते थे तो उनकी रक्षा के लिए उनकी पत्नियों द्वारा रक्षा सूत्र बांधा जाता था। आज भी जब हमारे सैनिक देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर जाते हैं तब भी उनके कष्ट निवारण के लिए बेटियों द्वारा रक्षा सूत्र बांधा जाता है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रक्षाबन्धन भावनात्मक रूप से जुडा हुआ पर्व है। इस त्यौहार से आपसी संबंध भी मजबूत होते है। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि एवं स्वस्थ दीर्घायु की कामना ईश्वर से की है।

इसके उपरान्त मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने बालावाला स्थित एक स्थानीय वैडिंग में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में प्रतिभाग किया। यहां भी भारी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने मुख्यमंत्री की कलाई में रक्षा सूत्र बांधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे त्यौहारों में संस्कार होता है तथा वे हमारे रिश्तों को भी मजबूत बनाते हैं।

गढ़वाल और कुमांऊ के बीच एक और रेल सेवा शुरू

उत्तराखंड की जनता के लिये एक अच्छी खबर है। केंद्र सरकार व रेल मंत्री की पहल राज्य को एक और रेला सेवा मिल गयी है। शनिवार को काठगोदाम से देहरादून रूट पर एक और रेल सेवा का शुभारंभ किया गया। नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस नाम से रेल सेवा शुरू की गयी। मुख्यमंत्री ने इसके लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व रेल मंत्री पीयूष गोयल का राज्य की जनता की ओर से धन्यवाद जताया है।

मुख्यमंत्री ने नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस रेल सेवा पर खुशी जाहिर करते हुए कहा है कि ‘‘अटल जी ने बनाया-मोदी जी संवारेंगे’’ के वादे को पूरा करते हुए प्रधानमंत्री ने हमेशा उत्तराखण्ड को प्राथमिकता दी। प्रदेश में शुरू किए गए प्लास्टिक इंजीनियरिंग संस्थान ‘सीपैट’ में कोर्स कर हमारे युवाओं को 100 प्रतिशत प्लेसमेंट मिलेगा।

ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर व साईबर सिक्योरिटी सेंटर की स्थापना से हमारे युवा ड्रोन एप्लीकेशन व साईबर सिक्योरिटी के कोर्स कर रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश के लिए स्वीकृत की गई 1500 करोड़ की जैविक खेती की योजना, किसानों की आय को दोगुना करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

उड़ान योजना के तहत हेलीकाप्टर सेवाओं से कनेक्टीवीटी बढ़ेगी। जिससे निवेश के लिए उद्यमी आकर्षित होंगे। जन औषधि केंद्रों के माध्यम से जनसामान्य को सस्ती दवाईयां उपलब्ध हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन के लिए देहरादून का चयन किए जाने से पूरे विश्व का ध्यान देवभूमि उत्तराखण्ड की योग परम्परा की ओर गया।

ऋषिकेश के दोहरे हत्याकांड का आरोपी सेवादार को कोर्ट ने दी सजा ए मौत

पिछले वर्ष नेपाली मूल की दो बच्चियों को मौत के घाट उतारने वाले सरदार परवान सिंह को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। वहीं परवान सिंह पर साठ हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया है। जिसमें से तीस हजार रूपये पीड़ित परिवार को दिये जाएंगे।

अदालत ने राहत कोष से भी इस परिवार को एक लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। मासूम बच्ची की मुट्ठी से मिले दोषी के दाढ़ी के बाल उसे सजा दिलाने में अहम सुबूत बने। पोक्सो की विशेष न्यायाधीश रमा पांडे की अदालत ने करीब सालभर के भीतर मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया। दोषी दरिंदा तब ऋषिकेश के श्यामपुर स्थित गुरूद्वारे में सेवादार था।

पिछले साल 15 जून, 2017 को ऋषिकेश के निकटवर्ती क्षेत्र श्यामपुर में यह घटना सामने आई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक परवान सिंह यहां एक गुरूद्वारे में सेवादार था। वह परिसर में ही रहता था। गुरूद्वारे के पिछले हिस्से में बने कमरे में एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ किराये पर रहती थी। वह आसपास के घरों में साफ-सफाई कर परिवार का गुजर बसर करती थी। 15 जून की सुबह महिला रोज की तरह अपने काम पर चली गई।

घर पर उसकी 13 और तीन साल की बेटियां अकेली थी। उसका आठ साल का बेटा रिश्तेदार के घर गया हुआ था। इसी दौरान सेवादार परवान सिंह उनके कमरे में गया और बड़ी बेटी के साथ दुष्कर्म की कोशिश करने लगा। लेकिन विरोध के चलते वह नाकाम रहा। इस पर उसने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने उसकी तीन साल की छोटी बहन के साथ पहले दुष्कर्म किया और फिर उसे भी गला घोंटकर मौत के घाट उतार दिया।

कुछ देर बाद पुलिस ने आरोपित सेवादार को गिरफ्तार कर लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीन वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बाद फॉरेंसिक जांच में आरोपित के सीमेन और दाढ़ी के बालों के नमूने की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई। दुष्कर्म के दौरान बचाव में छटपटाहट के वक्त आरोपित की दाढ़ी के कुछ बाल बच्ची की मुट्ठी में फंस गए थे। इन्हें ही फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था।

पोक्सो की विशेष न्यायाधीश रमा पांडे की अदालत में मामले की सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष की तरफ से 14 गवाह पेश किए गए। अदालत ने तीन रोज पहले सेवादार परवान सिंह को दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार दिया था।

गुरूवार को अदालत ने उसे हत्या में मौत और पोक्सो एक्ट में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों ही अपराधों पर उस पर तीस-तीस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। विशेष लोक अभियोजक भरत सिंह नेगी ने बताया कि अदालत ने इसे रेयर ऑफ द रेयरेस्ट माना।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्वैच्छिक सेवानिवृति पर एक अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृति का अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं है। सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति की मांग ठुकरा सकती है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा व एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने प्रदेश सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने डाक्टरों की स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी स्वीकार करते हुए सेवानिवृत घोषित कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संशोधित फंडामेंटल रूल-56 की व्याख्या करते हुए कहा कि नियमों के तहत सरकार को स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी ठुकराने का अधिकार है। सरकार ने मानव जीवन की आवश्यकताओं और जनहित के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है। डाक्टर मौलिक अधिकार के तहत सेवानिवृति के हक का दावा कर रहे हैं लेकिन ये अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता। सेवानिवृति के अधिकार की व्याख्या सरकार द्वारा लोगों को स्वास्थ्य और पोषण उपलब्ध कराने के संवैधानिक दायित्व को साथ रख कर की जाएगी। रोजगार की आजादी, जनहित के आधीन है। नौकरी ज्वाइन करने के बाद इस अधिकार का दावा सिर्फ नियमों के मुताबिक ही किया जा सकता है।

स्वैच्छिक सेवानिवृति पर नियमों के मुताबिक ग्रेच्युटी, पेंशन आदि मिलता है, ऐसे ही जब कर्मचारी की सेवा की आवश्यकता होगी तो नियुक्ति अथारिटी को स्वैच्छिक सेवानिवृति अर्जी अस्वीकार करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह सभी डाक्टरों की सेवानिवृति की अनुमति दे दी जाएगी तो अव्यवस्था उत्पन्न हो जाएगी और सरकारी अस्पताल में कोई भी डाक्टर नहीं बचेगा।

कोर्ट ने कहा कि रूल 56 के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृति के नोटिस को तीन महीने बीतने पर सेवानिवृति स्वतरू प्रभावी नही होगी। नियुक्ति अथारिटी या तो नोटिस स्वीकार करेगी या फिर उसे अस्वीकार कर सकती है। कर्मचारी को स्वैच्छिक सेवानिवृति का संपूर्ण अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि पहले ही डॉक्टरों की कमी है। व्यवस्था को सक्षम वरिष्ठों के बगैर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकारी अस्पताल में गरीब इलाज कराता है उन्हें खतरे में नहीं डाला सकता। भारत में सरकारी चिकित्सा सेवा गरीबों की जरूरतों को पूरा करती है अन्यथा इस धर्मार्थ कार्य का व्यवसायीकरण हो चुका है। इस स्थिति में लोगों को अच्छे डॉक्टरों की सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता।

डॉक्टरों की कमी और इस पेशे के व्यवसायीकरण का ध्यान रखते हुए सरकार ने राज्य चिकित्सा सेवा की क्षमता बनाए रखने के लिए जो फैसला किया है वह नियम सम्मत है। संविधान के तहत हर व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य है कि वह जीवित प्राणियों के प्रति दयालुता और मानवता रखे ताकि राष्ट्र लगातार ऊंचाइयों पर पहुंचे। सरकारी चिकित्सा सेवा से बड़े पैमाने पर कूच नहीं हो सकता जैसा इस मामले में दिखाई दे रहा है।

क्या था मामला
उत्तर प्रदेश में प्रांतीय मेडिकल सर्विस में वरिष्ठ पदों पर तैनात डा. अचल सिंह, डा. अजय कुमार तिवारी, डा. राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डा. राजीव चौधरी ने स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी दी। जब सरकार ने उस पर आदेश नहीं किया तो डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका कर स्वैच्छिक सेवानिवृति मांगी जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। सरकार ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का कहना था कि डॉक्टरों की कमी को देखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृति की अर्जी ठुकराई गई है।

आगरा की पूर्व मेयर बेबी राम मौर्य बनी उत्तराखंड की राज्यपाल

उत्तराखंड के सातवें राज्यपाल के रूप में उत्तर प्रदेश की बेबी राम मौर्य को नियुक्ति मिली है। बेबी राम मौर्य यूपी में भाजपा नेता होने के साथ ही वहां महिला आयोग से जुड़ी हुयी है। विदित हो कि बेबी राम मौर्य आगरा में वर्ष 1995 में मेयर रह चुकी है।

बेबी रानी मौर्य को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है। उत्तराखंड में केके पाल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बेबी राम मौर्य को राज्यपाल बनाया गया। वहीं लगभग साढ़े तीन दशक बाद जम्मू एवं कश्मीर को राजनीतिज्ञ राज्यपाल मिला है। बिहार के मौजूदा राज्यपाल सत्यपाल मलिक को जम्मू एवं कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। चार राज्यपालों के राज्य बदलने के साथ ही तीन नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं। नए नियुक्त राज्यपालों में उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन, सत्यदेव नारायण आर्य और बेबी रानी मौर्य शामिल हैं।

वर्ष 1984 में जगमोहन के राज्यपाल बनने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में कभी किसी राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नियुक्त नहीं किया गया। आतंकवाद से ग्रस्त और कानून-व्यवस्था की समस्या से जूझ रहे राज्य में सेवानिवृत नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों को ही राज्यपाल नियुक्त किया जाता रहा है। 31 अगस्त को 10 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे एनएन वोहरा पूर्व नौकरशाह हैं। साढ़े तीन दशक बाद राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नियुक्त कर केंद्र सरकार ने राज्य में राजनीतिक प्रक्रिया को तेज करने का संकेत दिया है।

लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल्द ही जम्मू एवं कश्मीर में पंचायतों और स्थानीय निकायों का चुनाव कराने की घोषणा की थी। इससे निचले स्तर पर आम जनता को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलेगा। केंद्र की ओर से नियुक्त वार्ताकार पूर्व आइबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा पहले से राज्य में सभी वर्गो से संपर्क कर बातचीत का सिलसिला शुरू कर चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि सत्यपाल मलिक आतंकवाद और अलगाववाद से त्रस्त आम लोगों की आवाज को तवज्जो देंगे।

सत्यपाल मलिक की जगह अब उत्तर प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन बिहार के राज्यपाल होंगे। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नजदीकी माने जाते रहे हैं और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से पहले लखनऊ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। सत्यदेव नारायण आर्य को हरियाणा का नया राज्यपाल बनाया गया है। हरियाणा के मौजूदा राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को त्रिपुरा का राज्यपाल बनाया गया है और वहां के मौजूदा राज्यपाल तथागत राय को मेघालय भेज दिया गया है। जबकि मेघालय के मौजूदा राज्यपाल गंगा प्रसाद को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि गंगा में हुयी प्रवाहित

हर की पौड़ी गंगा में अटल जिंदाबाद के साथ हजारों की संख्या में पूर्व पीएम व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि उनकी दत्तक पुत्री नमिता ने प्रवाहित की। इस दौरान स्व. अटल जी के परिजनों के अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के साथ ही उत्तराखंड सरकार के मंत्री, पार्टी के कई बड़े नेता, कार्यकर्ता और साधु-संत उपस्थित थे।

वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य, पुत्री नमिता, नातिन निहारिका, भांजा सांसद अनूप मिश्रा और अन्य परिजन भी पहुंचे। यहां से सभी लोग दो हेलीकॉप्टर में अस्थि कलश के साथ हरिद्वार के भल्ला इंटर कॉलेज के मैदान पर उतरे। वर्ष 1996 में इसी मैदान पर अटल जी की जनसभा में हजारों लोग पहुंचे थे।

करीब पौने बारह बजे अस्थि कलश को फूलों से सजे सेना के ट्रक पर रखा गया। कलश के साथ परिजनों के अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरिद्वार के सांसद रमेश पोखरियाल निशंक भी ट्रक में सवार हुए।

हरिद्वार के भल्ला इंटर कॉलेज से विसर्जन स्थल हरकी पैड़ी तक चार किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब डेढ़ घंटे का वक्त लगा। यात्रा मायापुरी, ललतारौ पुल, कोतवाली, अपर रोड होते हुए करीब एक बजे हरकी पैड़ी पहुंची। इस दौरान लोग अस्थि कलश की एक झलक पाने को बेताब दिखे। सड़क पर उमड़े सैलाब के अलावा लोग घरों की छतों पर एकत्र होकर लगातार पुष्प वर्षा कर अपने प्रिय नेता को श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे थे।

अस्थि विसर्जन के लिए श्री गंगा सभा की ओर से पहले ही सभी तैयारियां कर ली गईं थीं। ठीक एक बजे वाजपेयी परिवार के पुरोहित पंडित अखिलेश त्रिपाठी और श्री गंगा सभा के आचार्य हरिओम जैवाल ने मंत्रोच्चारण के साथ कर्मकांड आरंभ किए। करीब 15 मिनट तक चली पूजा के बाद विधि विधान के साथ अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर दी गईं।

अस्थि विसर्जन के मद्देनजर पुलिस ने हरकी पैड़ी क्षेत्र को जीरो जोन घोषित कर दिया था। प्रातरू कालीन गंगा आरती के बाद क्षेत्र में आम जन की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस के करीब एक हजार जवान तैनात किए गए थे।