मानसरोवर यात्रा पर माना चीन, नाथुला के रास्ते होगी यात्रा

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने बीजिंग में मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को सुधारने की बात कही। दोनों ने भारत-चीन के संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक-दूसरे की सराहना की। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की तारीफ करते हुये वांग ने कहा, इस साल हमारे नेताओं के मार्गदर्शन में चीन-भारत संबंधों ने अच्छा विकास किया है और विदेश मंत्री सुषमा ने उसमें बहुत अहम योगदान दिया है, जिसकी हम सराहना करते हैं। वहीं सुषमा स्वराज ने वांग को स्टेट काउंसलर और भारत के साथ सीमा मुद्दे पर चीन के विशेष प्रतिनिधि बनने की बधाई दी।

यात्रा पर सहमति

भारत और चीन ने सिक्किम में नाथूला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने पर सहमति जता दी है। करीब 10 महीने पहले डोकलाम में पैदा हुए गतिरोध के बाद यात्रा रोक दी गयी थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की यहां चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत के दौरान यह निर्णय लिया गया।

सुषमा ने कहा, ‘हम इस बात से खुश हैं कि इस साल नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू होगी। उन्होंने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि इस साल चीनी पक्ष के पूरे सहयोग से यात्रा भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए संतोष देने वाला अनुभव होगी।

विदेश मंत्रालय हर साल दो अलग-अलग रास्तों से जून से सितंबर तक यात्रा का आयोजन करता है। इन दो मार्गों में लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथूला दर्रा (सिक्किम) है। धार्मिक महत्व वाली इस तीर्थयात्रा का सांस्कृतिक महत्व भी है, जिसमें हर साल सैकड़ों लोग कैलाश मानसरोवर जाते हैं।
विदेश मंत्री ने वार्ता के बाद कहा कि साल 2018 में चीन, सतलज और ब्रह्मपुत्र नदी के डेटा भारत को उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा भारत और चीन के बीच आतंकवाद, क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल हेल्थकेयर जैसे अहम मुद्दों पर भी बातचीत हुई है।

चीन जाएंगे पीएम

सुषमा स्वराज ने बताया कि पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी और कई समझौतों को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27-28 अप्रैल को चीन दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पीएम मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात होगी।

क्षेत्रीय समन्वय समिति के जरिये अनुभवों को करें साझा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में अपराध बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है। सूचना तकनीक के विकास से विश्व में हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। बढ़ते अपराधों की रोकथाम के लिये विभिन्न राज्यों की पुलिस में आपसी समन्वय और तालमेल की जरूरत बढ़ती जा रही है। यह बात सीएम ने पुलिस विभाग द्वारा अयोजित चतुर्थ उत्तर क्षेत्रीय समन्वय समिति की बैठक के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने बैठक का शुभारंभ कर कहा कि समन्वय समिति की बैठक में जिन आठ राज्यों के प्रतिनिधि प्रतिभाग कर रहे हैं। उनमें से पांच राज्यों की सीमायें अन्तराष्ट्रीय सीमाओं से लगी हैं। यह बैठक हमारे लिए महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन के जरिये अलग-अलग राज्यों से आये पुलिस एवं सतर्कता एवं अभिसूचना विभाग के अधिकारी अपने-अपने अनुभवों को आपस में साझा करेंगे।

उन्होंने कहा कि पुलिस को विभिन्न समस्याओं का समाधान कुशलतापूर्वक करना होगा। समाजिक विविधता के दृष्टिगत पुलिस को व्यवस्थाओं और मर्यादाओं को कायम रखते हुए कार्य करना होगा। अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं पर भारत सरकार से सामंजस्य एवं अनुमति की जरूरत होती है। इसके लिए हमें समन्वय, बेहतर संवाद एवं सामंजस्य स्थापित करने पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि सतर्कता एवं अभिसूचना तंत्र को तकनीकि एवं प्रशिक्षण की दृष्टि से सशक्त होना जरूरी है।

प्रमुख सचिव गृह आनन्द वर्द्धन ने कहा कि उत्तर क्षेत्रीय समन्वय समिति के इस सम्मेलन में पुलिस एवं सुरक्षा से संबधित उच्च अधिकारियों को अपने विचारों और अनुभवों को आदान-प्रदान करने का मौका मिलेगा। वर्तमान परिस्थितियों में विभिन्न मुद्दों और उनके समाधान पर चर्चा होगी और आपसी सामंजस्य भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इंटरनेट, कम्यूनिकेशन एवं सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभावों से साइबर क्राइम बढ़ा है। इन अपराधों को किस तरह नियंत्रित किया जा सकता है, इन विषयों पर अधिकारी अपने अनुभवों को साझा करेंगे।

पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि वैश्वीकरण एवं संचार क्रांति के वर्तमान दौर में राज्यों को अनैक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें अन्तर्राज्यीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रकार की बाहरी एवं आन्तरिक सुरक्षा की समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की चुनौतियों के मुकाबले के लिए राज्यों के संसाधन सीमित हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए राज्यों की पुलिस व्यवस्था को उसी के अनुकूल सक्षम बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए दिन-प्रतिदिन की सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा अपराध की चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत एवं अभिसूचना तंत्र की मजबूती पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अर्न्तराज्यीय सम्मेलन से समस्याओं के समाधान तथा सुधार की दिशा में दूरगामी परिणाम प्राप्त होते हैं।

अब बच्ची से रेप करने पर रेपिस्ट को मिलेगी फांसी

भारत सरकार मासूम बेटियों के साथ दुष्कर्म के मामले में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने और दोषियों को कठोर दंड दिलाने के लिये अध्यादेश लाने जा रही है। इस अध्यादेश के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2018’ को मंजूरी दे दी गई। जिसके तहत फांसी का प्रावधान किया गया हैं। यह अध्यादेश राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और गजट में अधिसूचना जारी होने के बाद कानून के तौर पर लागू हो जाएगा।

यह अध्यादेश लागू होने पर दुष्कर्म के मामलों में न्यूनतम सात साल के सश्रम कारावास को बढ़ाकर 10 वर्ष किया गया है। अधिकतम इसे आजीवन भी किया जा सकेगा। वहीं 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को न्यूनतम 20 साल की सजा का प्रावधान है। 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म करने वालों को मृत्युदंड मिलेगा। अध्यादेश के तहत दो माह में पूरी करनी होगी दुष्कर्म कांड की जांच। दो माह के अंदर ट्रायल पूरा करना होगा। 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म के आरोपी को नहीं मिल सकेंगी अग्रिम जमानत।

स्थानीय लोगों की आपदा प्रबंधन में अहम भूमिकाः सीएम

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता करते हुये मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बोले कि सभी जिलाधिकारियों को वर्षाकाल से पूर्व आपदा से निपटने के लिये पांच-पांच करोड़ रूपये दे दिये जाये। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका रहती है। स्थानीय लोगों को आपदा से निपटने को प्रशिक्षण दिया जाये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन महिला मंगल दलों एवं युवा मंगल दलों को आपदा से राहत व बचाव की ट्रेनिंग दी गई हैं, उन्हें समय-समय पर पुनः प्रशिक्षित किया जाए। स्थानीय स्तर पर आपदा राहत एवं बचाव के लिए आवश्यक उपकरणों की पूर्ण व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। अर्ली वार्निग सिस्टम को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा बरतने के निर्देश दिये। उन्होंने भूकम्प की दृष्टि से अति संवेदनशील संस्थानों को चिन्हित करने एवं उससे बचाव के लिए प्रभावी उपाय तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में संचार सुविधा को बढ़ाने के लिए बैलून तकनीक विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से रात्रि के समय आपदा राहत एवं बचाव के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने बैठक के दौरान उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की वेबसाइट व लोगो का विमोचन किया तथा आईआरएस से संबंधित मोबाईल एप्लीकेशन को लॉच किया। इसके अलावा उन्होंने सैन्डई रूपरेखा, आईआरएस के कॉफी टेबल बुक, युवक एवं महिला मंगल दल प्रशिक्षण, एनडीएम के सहयोग से संचालित आपदा सुरक्षा मित्र योजना एवं आईआरएस चेकलिस्ट पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लोगो के डिजाइन के लिए कंपीटिशन जीतने वाले नरेन्द्र तोमर को 25 हजार रूपये की धनराशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया। आपदा में सर्च एवं रेसक्यू में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले युवाओं को सम्मानित भी किया गया।

चीन सीमा को जाने वाला गंगोरी बेली ब्रिज तैयार

भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला गंगोत्री हाइवें पर बना गंगोरी बेली ब्रिज तनकर तैयार हो गया है। सीमा सड़क संगठन के चीफ इंजीनियर वीएसएम एएस राठौर ने पुल का उद्घाटन किया।

उन्होंने बताया कि 1.3 करोड़ रुपये की लागत से 190 फीट लंबे इस बेली ब्रिज को बीआरओ के जवानों ने सात दिन में तैयार किया है। पुल की भार क्षमता 18 टन से बढ़कर 40 टन होगी। तय समय से पहले पुल का निर्माण होने पर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बीआरओ की टीम को बधाई दी।

विदित हो कि एक अप्रैल को भारत-चीन सीमा पर स्थित गंगोत्री धाम व भटवाड़ी ब्लाक के 42 गांवों को जोड़ने वाला असी गंगा नदी पर बना गंगोरी बेली ब्रिज टूट गया था। ब्रिज बीआरओ ने आठ जनवरी 2018 में बनाया था, लेकिन उसकी भार क्षमता सिर्फ 18 टन थी। बीती एक अप्रैल को एक रेत से भरे डंफर के भार से ही पुल टूट गया था।

इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बीआरओ ने असी गंगा नदी में ह्यूम पाइप डालकर मार्ग तैयार किया। ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु रहे। बरसात से पहले नया पुल तैयार करने के दबाव के बीच बीआरओ ने इस टूटे पुल को हटाने और नया पुल बनाने की योजना तैयार की। इसके लिए पठानकोट, चंडीगढ़, भारत-चीन सीमा के रिमझिम बॉर्डर, जोशीमठ और ऋषिकेश से सामान एकत्र किया गया। 12 अप्रैल तक सामान एकत्र होने के बाद 13 अप्रैल से बीआरओ के जवानों ने ब्रिज को जोड़ने का कार्य शुरू किया। ब्रिज के निर्माण में बीआरओ ने आर्मी से भी तकनीकी सहयोग लिया।

सीएम त्रिवेन्द्र को मिलेगा राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार

सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा द मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट अवॉर्ड के अंतर्गत उत्तराखंड को स्पेशल मेंशन सार्टिफिकेट फॉर फिल्म फ्रेंडली इनवायरमेंट पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उत्तराखण्ड राज्य को यह पुरस्कार राज्य में फिल्म शूटिंगों के लिए निर्माता/निर्देषकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के प्रयासों के लिए दिया गया है।

चूंकि उत्तराखण्ड अभी नया राज्य है और वहां पर चुनौतियां भी काफी है, इसके बावजूद उत्तराखण्ड राज्य सरकार द्वारा किये गये सकारात्मक प्रयासों की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर की गई है। प्रतिवर्ष दिये जाने वाले इस पुरस्कार के लिए सभी राज्यों से आवेदन आमंत्रित किये जाते है। जिसके बाद पुरस्कार चयन हेतु गठित समिति द्वारा पुरस्कार के लिए राज्यों का चयन किया जाता है। इस वर्ष इस चयन समिति के अध्यक्ष प्रसिद्ध फिल्म निर्माता/निर्देषक रमेश सिप्पी थे। पुरस्कारों की घोषणा सिप्पी द्वारा की गई। यह पुरस्कार आगामी 03 मई, 2018 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा नई दिल्ली में प्रदान किये जायेंगे।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा कि प्रदेष के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में परिषद के कार्यों में तेजी लायी गयी है। ज्ञातव्य है कि उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं है। डॉ.पाण्डेय ने बताया कि परिषद के माध्यम से फिल्म निर्माताओं को अधिक से अधिक सुविधा मिले, इसके लिए पूरे प्रयास किये गये है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में प्रदेष में निर्मित होने वाली फिल्मों की शूटिंग में शुल्क को समाप्त किया गया है। इससे भी प्रदेष में फिल्म निर्माता एवं निर्देषकों को शूटिंग के प्रति रूझान बढ़ा है। डॉ.पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के इस पुरस्कार के लिए उत्तराखण्ड राज्य का चयन हम सभी के लिए गौरव की बात है। परिषद का गठन वर्ष 2015 में ही हुआ है और अपने इस अल्प कार्यकाल में देष के अन्य राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखण्ड राज्य का इस पुरस्कार के लिए चयन हुआ है।

उल्लेखनीय है कि सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष द मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट अवॉर्ड का आयोजन किया जाता है, जिसमें इस वर्ष 16 राज्यों ने प्रतिभाग किया था।

सस्ता उपचार देगा ऋषिकेश एम्सः चौबे

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा राष्ट्रीय आरोग्य निधि में एम्स ऋषिकेश को शामिल किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक और परिसर का मुआयना करने के बाद पत्रकारों से बातचीत की।

वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह एम्स बनाने की योजना बनाई थी। जिसमें सबसे अच्छी प्रगति ऋषिकेश एम्स की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस एम्स को राष्ट्रीय आरोग्य निधि में शामिल करने जा रहा है। इस नीति से गरीबों को सस्ता उपचार मिलेगा। उन्होंने कहा कि एम्स विस्तारीकरण के लिए 200 एकड़ और रैनबसेरे के लिए 100 एकड़ भूमि की मांग राज्य सरकार से की है। इस कार्य को गति दी जाएगी। यहां आइडीपीएल की खाली भूमि पर भी विचार होगा। सरकार यहां सीआरसी खर्चे रैनबसेरे का निर्माण कराएगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सरकार 1300 करोड़ का हेल्थ पैकेज देगी। बीते वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड को स्टेट प्लान के तहत 368 लाख रुपया दिया गया है। यहां 323 स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड कर इसी वर्ष वेलनेस सेंटर में तब्दील किया जा रहा है। जिसमें एनएचएम से 90 प्रतिशत बजट दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना ने वर्ष 2022 तक कुल आबादी के 40 प्रतिशत लोगों को लाभान्वित किया जाएगा। जिसमें स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शामिल है। पांच वर्ष में इस योजना से डेढ़ लाख हेल्थ सेंटर को 1300 करोड़ की लागत से मॉडल बनाए जाने का प्रावधान है। कहा कि टीबी के मरीजों को नमो केयर के रूप में प्रतिमाह 500 रुपया दिया जा रहा है।

राज्य सरकार के लेटलतीफी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 23 अप्रैल तक निकायों के परिसीमन की जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग को देने के आदेश दिए है। अगली सुनवाई 24 अप्रैल की नियत की है।

इस मामले में सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में हुई। निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने बताया कि कोर्ट ने परिसीमन, आरक्षण निर्धारण, मतदाता सूची आदि की मौजूदा स्थिति के अनुसार चुनाव कराने व बेवजह चुनाव न टालने को कहा है।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार चुनाव को पूरी तरह तैयार है। 12 मई को चुनाव कार्यक्रम आयोग को सौंप दिया जाएगा। इससे पहले परिसीमन, आरक्षण निर्धारण व अन्य कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

यहां बता दें कि राज्य में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी ना करने पर चुनाव आयोग द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। जिसमें कहा है कि तीन मई से पहले राज्य में निकाय कराना संवैधानिक बाध्यता है, इसलिये राज्य सरकार को निर्देश दिये जाएं कि चुनाव की अधिसूचना जारी की जाए।

राज्य में चुनाव की अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्य सरकार को है। राज्य सरकार ने चुनाव आयोग की इस याचिका का जवाब दाखिल किया था। हाईकोर्ट ने सरकार से 23 अप्रैल तक चुनाव को लेकर अंतिम रिपोर्ट भी दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

इस ऐप के जरिए केदारनाथ की जानकारी मिल सकेगी

अब देश के विभिन्न प्रांतो से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ही भाषा में केदारनाथ मंदिर व उसके आसपास की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। इसके लिए जिला प्रशासन स्तर पर एक मोबाइल एप तैयार किया जा रहा है। इसको श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने तक पूरा कर लिया जाएगा।

भविष्य में केदारपुरी के स्वरूप की जानकारी देने के लिए एक प्रतिकृति तैयार कर केदारनाथ में रखने की भी है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि चारधाम यात्रा की तैयारियां तकरीबन पूरी हैं। इस बार सरकार की मंशा देशभर से आने वाले तीर्थयात्रियों को उनकी भाषा में ही केदारनाथ के संबंध में जानकारी देने की है। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो निकट भविष्य में इसमें अन्य धाम व तीर्थ स्थलों को भी जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा केदारनाथ में लेजर शो के जरिये केदारनाथ की कहानी प्रदर्शित की जाएगी। इतना ही नहीं, आपदा के बाद अब तक केदारनाथ पुनर्निर्माण के कार्यो के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ आने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।

मुख्य सचिव ने उत्तरकाशी के गंगोरी में हाल ही में टूटे पुल के संबंध मे कहा कि बीआरओ के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस जगह ऐसी व्यवस्था की जाएगी। जिससे वाहनों के आवागमन में अव्यवस्था न हो। इसके अलावा पुलिस की व्यवस्था भी रहेगी, ताकि ओवरलोडेड ट्रक न जा सकें।

जंगलों के संरक्षण व संवर्धन में कार्यशाला की महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 10वीं जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) राष्ट्रीय कार्यशाला का विधिवत शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने अखरोट की बागवानी एवं अवनत वनों के सुधारीकरण पर पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया।

10वीं जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन पर 13 राज्यों के प्रतिनिधियों तथा भारत सरकार के अधिकारियों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जंगलो के संरक्षण व संर्वद्धन में कार्यशाला व प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यशाला मंे साझा किए गए अनुभव व ज्ञान से विभागीय प्रगति के लिए काम किए जाते है। कार्यशाला के माध्यम से जंगलों की गतिविधियों के संचालन व संरक्षण में सहायता मिलती है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में लगभग 11000 वन पंचायतें है। जायका द्वारा भी वन पंचायतों को वित्तीय सहायता दी जाती है। राज्य में भूमि क्षरण की समस्या अधिक है क्योंकि राज्य का हिमालयी क्षेत्र दलदली है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन ऐसोसिएशन (जायका) द्वारा दी जा रही तकनीकी सहयोग से भूक्षरण रोकने में सहायता मिलेगी। जायका की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन द्वारा वन सरंक्षण, भू-क्षरण रोकने तथा मिटटी की गुणवत्ता में सुधार व मिट्टी में खनिजो की कमी को पूरा किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में वनाग्नि की समस्या को रोकने के लिए जागरूकता व सामाजिक सहभागिता को बढ़ाना होगा। स्कूली छात्र-छात्राओं में वनों के प्रति अपनत्व व दायित्व बोध पैदा करना होगा। सिविक सेन्स की तरह ही बच्चों में स्कूली जीवन से ही जंगलों के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करनी होगी। वन अधिकारियों को स्कूलों में जाकर बच्चों से वनों के महत्व व सरंक्षण पर चर्चा करनी चाहिए।