हरिद्वार केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र: राजनाथ

हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र स्थित भारत माता मंदिर परिसर में ब्रह्मलीन परम पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय भव्य समारोह का शुक्रवार को विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर समाधि मंदिर एवं प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया।

समारोह के समापन अवसर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक तथा जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज सहित अनेक संत-महात्मा एवं गणमान्य अतिथियों ने गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन में देशभर से संत-महात्मा, धर्मगुरु, सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिक नेतृत्व उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र चेतना, सनातन संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा तथा मानव सेवा जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गंगा तट पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस पावन अवसर पर उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने मां गंगा को नमन करते हुए ऋषि-मुनियों की स्मृतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, किंतु उनकी साधना, विचार और जीवन दर्शन आज भी समाज को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा उनके जीवन मूल्यों और विचारधारा को पुनः जागृत करने का प्रतीक है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि हरिद्वार केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। यहीं से भारतीय संस्कृति की अखंड धारा प्रवाहित होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी सांस्कृतिक जड़ों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। यदि संस्कृति कमजोर होती है तो राष्ट्र भी कमजोर हो जाता है। उन्होंने सनातन संस्कृति, अद्वैत वेदांत, भक्ति परंपरा और गुरु-शिष्य संवाद को भारत की आत्मा बताया।

उन्होंने कहा कि आधुनिकता और संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। तकनीकी ज्ञान के साथ संस्कार जुड़ जाएं तो राष्ट्र को कोई भी कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए देश की अखंडता, संप्रभुता और गौरव की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लेने का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि उत्तराखंड में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज ने आध्यात्मिक साधना को समाज सेवा से जोड़कर एक विशिष्ट जीवन दर्शन प्रस्तुत किया। भारत माता मंदिर की स्थापना के माध्यम से उन्होंने राष्ट्र प्रेम और सांस्कृतिक गौरव को मूर्त रूप दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति और विरासत को वैश्विक पहचान मिल रही है तथा उत्तराखंड विकास और विरासत के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी सनातन परंपरा के सशक्त ध्वजवाहक थे। करुणा, मैत्री और राष्ट्रभक्ति उनके जीवन के मूल मूल्य थे। उन्होंने भारत माता मंदिर को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह मंदिर जाति, क्षेत्र और भाषा की सीमाओं से ऊपर उठकर संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधता है।

हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारत माता मंदिर की स्थापना एक दूरदर्शी राष्ट्र मंदिर की अवधारणा के साथ की गई थी, जिसे आज और अधिक सशक्त रूप दिया जा रहा है। उन्होंने चारधाम मार्गों पर चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाले चिकित्सकों की सराहना करते हुए इसे सच्ची राष्ट्र सेवा बताया।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी राष्ट्र, धर्म और मानव चेतना के अमर पथप्रदर्शक थे। उनका संपूर्ण जीवन सनातन संस्कृति, राष्ट्र धर्म और मानव कल्याण को समर्पित रहा।

भारत सरकार के ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि संत समाज से उन्हें सदैव प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। उन्होंने इस आयोजन में सम्मिलित होने को सौभाग्य बताया।

कार्यक्रम में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरु शरणानंद महाराज, उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश बृजेश पाठक, हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में साधु-संत, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सीएम धामी के निर्देशों में प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने किया रुद्रप्रयाग जनपद दौरा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में आम जनमानस तक केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रदेशभर में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रभारी सचिव रुद्रप्रयाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने जनपद का दौरा कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन के कुशल नेतृत्व में जनपद की 27 न्याय पंचायतों में चरणबद्ध रूप से बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 05 फरवरी 2026 को न्याय पंचायत सतेराखाल के अंतर्गत ग्राम कमेड़ा में “प्रशासन गांव की ओर” बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता प्रभारी सचिव रुद्रप्रयाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने की।

*स्टॉलों का निरीक्षण, लाभ मौके पर देने के निर्देश*
प्रभारी सचिव ने शिविर स्थल पर पहुंचकर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि शिविरों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि पात्र लोगों को तत्काल लाभ पहुंचाना है।

*एक ही स्थान पर मिली योजनाओं की सुविधा*
शिविर में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य, उद्योग, समाज कल्याण, पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य विभाग (आयुष्मान आरोग्य शिविर), राजस्व विभाग, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास, पूर्ति विभाग सहित अनेक विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए। ग्रामीणों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई और पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

शिविर में वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, राशन कार्ड, आधार से संबंधित सेवाएं, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, समान नागरिक संहिता पंजीकरण, राशन कार्ड ई-केवाईसी, एलपीजी केवाईसी, स्वरोजगार एवं आजीविका योजनाओं सहित अनेक सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को एक ही स्थान पर प्रदान किया गया, जिससे उन्हें विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।

*जनसुनवाई में सामने आईं 35 समस्याएं*
शिविर के दौरान आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों द्वारा कुल 35 समस्याएं रखी गईं। इनमें से 20 समस्याओं का समाधान मौके पर ही कर दिया गया, जबकि शेष समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए गए।

*पेयजल, सड़क और बिजली की समस्याएं प्रमुख*
ग्रामीणों ने तल्ला नागपुर पेयजल पंपिंग योजना से पर्याप्त जलापूर्ति न होने, कमेड़ा के आंतरिक क्षेत्रों में पेड़ों से घरों को नुकसान की आशंका के कारण पेड़ कटान, खराल तोक से क्यार्क तक पैदल मार्ग निर्माण, सड़क मरम्मत, सोलर लाइट स्थापना, राशन कार्ड, विद्युत आपूर्ति, आवास, सड़क डामरीकरण, पेयजल व्यवस्था, मुआवजा और गौशाला से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से उठाईं। ग्राम प्रधान ऊषा देवी ने खराल, चांदियूं एवं गढ़धार क्षेत्र को नगर पालिका में सम्मिलित न करने का अनुरोध किया। वहीं ग्रामीण उमाशंकर सेमवाल ने लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिग्रहित भूमि का मुआवजा न मिलने की शिकायत दर्ज कराई।

*मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे प्रभारी सचिव*
इस अवसर पर प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार इन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है और वे मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में यहां उपस्थित हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन समस्याओं के समाधान के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है, उनका निस्तारण तय समय में सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

*ग्रामीणों से भी फॉलोअप की अपील*
प्रभारी सचिव ने ग्रामीणों से भी आग्रह किया कि वे अपनी समस्याओं के समाधान का नियमित फॉलोअप लेते रहें और किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर प्रशासन को अवगत कराएं। शिविर में जिला पंचायत सदस्य गंभीर सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान कमेड़ा ऊषा देवी, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, उपजिलाधिकारी रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी, पुलिस उपाधीक्षक प्रबोध घिल्डियाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत, एसडीओ फॉरेस्ट देवेंद्र पुंडीर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामप्रकाश, मुख्य शिक्षा अधिकारी प्रमेन्द्र बिष्ट, खंड विकास अधिकारी अगस्त्यमुनि सुरेश शाह, जिला पर्यटन विकास अधिकारी राहुल चौबे, अधिशासी अभियंता लोनिवि इंद्रजीत बोस, अधिशासी अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग मीनल गुलाटी, जिला समाज कल्याण अधिकारी टी.आर. मलेठा, तहसीलदार प्रणव पांडे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से सरकार आम जनता के बीच सीधे पहुंच रही है। इन बहुउद्देशीय शिविरों का उद्देश्य यह है कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जनसमस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर और समयबद्ध ढंग से किया जाए। आज शिविर में अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया गया है और शेष समस्याओं के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट समयसीमा दी गई है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि तय समय में समाधान हो। सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है और यही इस अभियान का मूल उद्देश्य है।

सनातन संस्कृति और राष्ट्र चेतना के प्रतीक थे स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार स्थित सप्तऋषि आश्रम मैदान (भारत माता मंदिर के समीप, सप्त सरोवर मार्ग) में आयोजित ‘संत सम्मेलन’ में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सनातन चेतना के जीवंत प्रतीक आप सभी संत-महात्मा, धर्मगुरु एवं श्रद्धालुजन, माँ गंगा के पावन तट पर स्थित सप्तऋषि क्षेत्र में एकत्र होकर राष्ट्र और संस्कृति के लिए अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन महापुरुषों ने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रधर्म, सेवा, त्याग और करुणा के लिए समर्पित किया, वे केवल संन्यासी नहीं बल्कि राष्ट्र चेतना से जुड़े दिव्य संत थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यमित्रानंद गिरी महाराज ने आध्यात्मिक ज्ञान को सामाजिक सेवा से जोड़ते हुए ऐसा जीवन दर्शन प्रस्तुत किया, जिससे अनगिनत लोगों को सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली। उन्होंने भारत माता मंदिर की स्थापना कर सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का कार्य किया, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केन्द्र बना हुआ है। वर्ष 1998 के कुंभ मेले में उन्हें आचार्य महामंडलेश्वर बनाया गया, जिसके बाद अब तक 10 लाख से अधिक नागा साधुओं को दीक्षा प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यमित्रानंद गिरी महाराज की मूर्ति स्थापना नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनेगी। संत परंपरा किसी एक पंथ या संप्रदाय तक सीमित न होकर वसुधैव कुटुंबकम के भाव से सम्पूर्ण विश्व को जोड़ने का कार्य करती है। सनातन धर्म मानव निर्मित नहीं, बल्कि शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है, जो समय के साथ चलता है और कभी पराजित नहीं होता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून, सख्त दंगारोधी कानून, तथा लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी जिहादी मानसिकताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून की स्थापना की गई है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 28 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक उत्थान का नया युग प्रारंभ हुआ है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण तथा बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान जैसे कार्य भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित भारत माता मंदिर देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 2027 के कुंभ मेले की तैयारियाँ की जा रही हैं और महाराज का जीवन निरंतर सद्कर्म और साधना से प्रेरित रहा।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत में बीते वर्षों में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है और आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल, थल और वायु मार्गों का तीव्र विकास हुआ है तथा युवा शक्ति देश को विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर कर रही है। संत समाज भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करने और देश को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है।

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि संतों का सान्निध्य जीवन के दुखों का समाधान है। भारत की पहचान सनातन संस्कृति से है। शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ देश की आध्यात्मिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक है, उसकी अभिव्यक्ति विभिन्न आस्थाओं के माध्यम से होती है।

कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज, योग गुरु बाबा रामदेव, सहित बड़ी संख्या में साधु-संत, जनप्रतिनिधि एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने वन-क्लिक प्रणाली से 9.47 लाख से अधिक लाभार्थियों को किया पेंशन भुगतान

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिए हैं कि सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत पात्रता परीक्षण, सत्यापन एवं भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक निर्बाध रूप से पहुँचता रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में समाज कल्याण विभाग की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत माह जनवरी 2026 की पेंशन किस्त का वन-क्लिक के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में भुगतान किया। यह पहल राज्य सरकार की तकनीक आधारित, पारदर्शी और संवेदनशील शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करती है तथा सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर, वृद्ध, दिव्यांग, विधवा, किसान, निराश्रित एवं जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रणाली के माध्यम से प्राप्त हो, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) एवं वन-क्लिक भुगतान प्रणाली से न केवल भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है, बल्कि लाभार्थियों को बिना किसी कार्यालयी प्रक्रिया के सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि प्राप्त हो रही है। इससे शासन और आम नागरिक के बीच विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत जनवरी 2026 माह में राज्य के 9,47,345 पात्र लाभार्थियों को पेंशन का लाभ प्रदान किया गया। राज्य सरकार द्वारा विभिन्न पेंशन एवं सहायता योजनाओं के माध्यम से कुल ₹ 1 अरब 41 करोड़ 66 लाख 51 हजार की धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की गई, जिसमें नियमित पेंशन के साथ-साथ एरियर भुगतान भी सम्मिलित है।

इस अवधि में वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत सर्वाधिक लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई, वहीं विधवा, दिव्यांग, किसान, परित्यक्ता, भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली एवं बौना पेंशन योजनाओं के माध्यम से भी हजारों पात्र नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा का संबल मिला। यह व्यापक कवरेज राज्य सरकार की समावेशी और संवेदनशील नीति को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पेंशन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम यह है कि 01 दिसम्बर 2025 से 03 फरवरी 2026 की अवधि में 15,784 नए लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया। साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मृतक लाभार्थियों का समयबद्ध सत्यापन करते हुए 1,523 अपात्र नामों को पोर्टल से हटाया गया, जिससे योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र व्यक्तियों तक ही सीमित रह सके।

राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई डिजिटल पेंशन पोर्टल प्रणाली, स्वतः आयु-पात्रता पहचान और नियमित मॉनिटरिंग के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। अप्रैल 2024 से जनवरी 2026 की अवधि में 60 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही 428 पात्र नागरिकों को स्वतः वृद्धावस्था पेंशन की स्वीकृति दी गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पात्रता निर्धारण और स्वीकृति प्रक्रिया अब अधिक सरल, त्वरित और मानवीय हो गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि,
“राज्य सरकार का संकल्प है कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुंचे। पेंशन योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन का आधार हैं। हमारी सरकार गरीबों, वृद्धों, महिलाओं, दिव्यांगों और किसानों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।”

इस अवसर पर अपर सचिव संदीप तिवारी सहित समाज कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे |

वर्तमान की आवश्यकताओं से आगे बढ़कर भविष्य के भारत की मजबूत व टिकाऊ आधारशिला है बजट: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो दिवसीय नैनीताल भ्रमण के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में केन्द्रीय बजट 2026-27 को विकसित भारत-2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए देश की आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक नींव को मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय में की गई उल्लेखनीय वृद्धि से दीर्घकालिक विकास की मजबूत आधारशिला रखी गई है। उन्होंने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ देश की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता को भी सुदृढ़ करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की सरकार के लिए विकास केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव का माध्यम है। यह बजट मध्यम वर्ग, करदाताओं और श्रमिकों के लिए राहत और सम्मान का प्रतीक है। नवाचार, विनिर्माण और रोजगार को केंद्र में रखकर तैयार किया गया यह बजट देश की उत्पादकता क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्थायी रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा, जो दीर्घकालीन आर्थिक मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय यह दर्शाता है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की शक्ति मानती है। सात नए आर्थिक कॉरिडोर, आधुनिक परिवहन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स ढांचे का विस्तार निवेश, उद्योग और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती देगा। वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग, दिल्ली-वाराणसी एवं वाराणसी-सिलीगुड़ी उच्च-गति रेल कॉरिडोर न केवल कनेक्टिविटी परियोजनाएं हैं, बल्कि ये व्यापार, पर्यटन, रोजगार और राष्ट्रीय एकता के नए द्वार खोलने वाले कदम हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट से उत्तराखंड के समावेशी विकास को सीधा लाभ मिलेगा। पर्वतीय, सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के साथ-साथ गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के लिए केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा ₹17,414.57 करोड़ निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश को इस वर्ष ₹1,841.16 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ‘स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट’ के विस्तार का जो अनुरोध किया गया था, उसे इस बजट में न केवल स्वीकार किया गया है, बल्कि इसके प्रावधान भी बढ़ाए गए हैं। यह राशि संशोधित अनुमान ₹1,44,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,85,000 करोड़ कर दी गई है, जो ₹41,000 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना की सफलता को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को क्रेडिट-लिंक्ड आजीविका से उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। रेलवे क्षेत्र में उत्तराखंड को ₹4,769 करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन मिला है, जो 2009-2014 की तुलना में 26 गुना अधिक है। राज्य में ₹39,491 करोड़ की रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। 11 रेलवे स्टेशन अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकसित किए जा रहे हैं, 100 प्रतिशत रेल विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है, 54 कवच सिस्टम और 106 फ्लाईओवर/अंडरपास के साथ-साथ 3 वंदे भारत और एक अमृत भारत एक्सप्रेस से राज्य की कनेक्टिविटी सुदृढ़ हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को बजट में विशेष प्रोत्साहन मिला है, जिससे राज्य में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। ग्रीन एनर्जी और सतत विकास के लिए हरित ऊर्जा और ग्रीन इकोनॉमी पर विशेष बल दिया गया है, जिससे उत्तराखंड को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। आयुष, फार्मा, खादी, हथकरघा तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बजट अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक जनपद में महिला छात्रावासों की व्यवस्था से महिला सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘विश्वास आधारित शासन’ से निवेश, रोजगार और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 किसानों को सशक्त करता है, युवाओं को अवसर देता है, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है, पर्वतीय राज्यों को नई पहचान देता है और देश को आत्मनिर्भरता से विकसित राष्ट्र की ओर मजबूती से आगे ले जाता है। बजट के तीन प्रमुख स्तंभ—संतुलित एवं समावेशी विकास, वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण और सबका साथ-सबका विकास—सीमांत क्षेत्रों, गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों के समग्र उत्थान का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास से उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप राज्य के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है तथा राज्य सरकार द्वारा केंद्र को दिए गए प्रस्तावों को बजट में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित किया गया है, जो सहकारी संघवाद का सशक्त उदाहरण है।

अंत में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 उत्तराखंड को रोजगार, निवेश, निर्यात, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला सिद्ध होगा और राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास में मील का पत्थर बनेगा।

सीएम ने जमरानी परियोजना को निर्धारित समय सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद भ्रमण के दौरान गोला नदी पर सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से निर्माणाधीन जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने परियोजना स्थल पर उपस्थित अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों से निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने परियोजना की समयबद्धता, गुणवत्ता एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि समस्त निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर, उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण किए जाएं। उन्होंने परियोजना के अंतर्गत चल रहे अन्य निर्माण कार्यों की भी विस्तार से जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से पर्यावरणीय एवं तकनीकी बाधाओं का समाधान किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्रवासियों की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए जमरानी बांध परियोजना को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाले स्थानीय निवासियों एवं जनप्रतिनिधियों का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।

मुख्यमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार योजनाओं को कागजों तक सीमित न रखते हुए धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार शब्दों में नहीं, कार्यों में विश्वास करती है। जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की अड़चन या धनराशि की कमी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। राज्य में कोई भी जनकल्याणकारी योजना अधूरी नहीं रहेगी, सभी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जमरानी बांध परियोजना राज्य की समृद्धि का प्रतीक है। यह परियोजना उत्तराखण्ड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध होगी। बांध के निर्माण से जहां एक ओर सिंचाई एवं पेयजल की सुविधा सुदृढ़ होगी, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मांग के अनुरूप परियोजना से विद्युत उत्पादन की संभावनाओं पर केन्द्र सरकार से वार्ता की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से कुमाऊं के तराई क्षेत्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के किसानों एवं क्षेत्रवासियों को भी प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर जमरानी बांध परियोजना के महाप्रबंधक महेश खरे ने जानकारी दी कि परियोजना के अंतर्गत निर्मित की जा रही दो टनलों का कार्य लगभग 88 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। नदी के जल प्रवाह के डायवर्जन हेतु कॉफर डैम का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक टनल निर्माण एवं कृत्रिम डैम का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा, जिसके पश्चात आगामी मानसून के दौरान नदी का जल टनलों के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा। इसके उपरांत स्थायी बांध के निर्माण कार्य को तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अवगत कराया कि परियोजना का संपूर्ण निर्माण कार्य जून 2029 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस अवसर पर विधायक कालाढुंगी बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दर्मवाल, दर्जा राज्यमंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, दिनेश आर्य, नवीन वर्मा, दीपक मेहरा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र बिष्ट, ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट, के.डी. रूबाली, मण्डलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, क्षेत्रीय नागरिक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम के दिशा-निर्देशों में दून पीआरटी और मसूरी–नैनीताल रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी पर मंथन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना तथा मसूरी एवं नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन को लेकर मंगलवार को सचिवालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव, आवास, उत्तराखण्ड शासन डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। बैठक में उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूएमआरसी) सहित संबंधित विभागों एवं परामर्शदात्री संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत में प्रबंध निदेशक, उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी एवं नैनीताल शहर में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान परियोजनाओं के तकनीकी, सामाजिक, पर्यावरणीय एवं वित्तीय पहलुओं की जानकारी दी गई।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना को ईबीआरटीएस के फीडर सिस्टम के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के अंतर्गत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें क्लेमेंटाउन से बल्लूपुर चौक, पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तथा गांधी पार्क से आईटी पार्क तक के मार्ग शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना शहर में यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगी। बैठक में निगम द्वारा तैयार की गई डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर विस्तार से चर्चा की गई। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परियोजना की उपयोगिता को और अधिक स्पष्ट करने पर बल देते हुए निर्देश दिए कि डीपीआर में परियोजना की आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (ईआईए), सामाजिक प्रभाव तथा वित्तीय व्यवहार्यता को ठोस रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने आगामी समीक्षा बैठक में संशोधित डीपीआर के साथ पुनः प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश दिए।

आवास सचिव ने देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी कॉरिडोर के संरेखण का स्थलीय निरीक्षण किए जाने की भी इच्छा जताई, ताकि जमीनी स्तर पर परियोजना की व्यवहारिकता का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। इसके अतिरिक्त बैठक में मसूरी एवं नैनीताल शहरों में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक द्वारा अवगत कराया गया कि रोपवे परियोजनाएं पर्वतीय शहरों में यातायात जाम, पार्किंग समस्या एवं प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस पर आवास सचिव ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में रोपवे परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली समस्त भूमि का विस्तृत विवरण, स्वामित्व की स्थिति सहित तैयार करने तथा संबंधित विभागों से पत्राचार कर शीघ्र अग्रतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी पहलुओं का समयबद्ध समाधान परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है। बैठक में संयुक्त सचिव आवास धीरेंद्र कुमार सिंह, निदेशक (वित्त) संजीव मेहता, महाप्रबंधक (सिविल) संजय पाठक सहित उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अभियंता, मै. मैकेन्जी एवं मै. सिस्ट्रा के सलाहकार अधिकारी उपस्थित रहे।

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार शहरी परिवहन व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित कर रही है। देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी और नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इन परियोजनाओं से यातायात दबाव कम होगा, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं को पारदर्शी, व्यावहारिक और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

हर्रावाला में नवनिर्मित कैंसर चिकित्सालय भवन का निरीक्षण कर सीएस ने ली जानकारी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने देहरादून के हर्रावाला में नवनिर्मित शकुंतला रानी सरदारी लाल ओबेरॉय राजकीय मैटरनिटी एवं कैंसर चिकित्सालय का निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने नवनिर्मित भवन के विषय में विस्तार से जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि इस अस्पताल को राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशलिटी कैंसर अस्पताल के रूप में स्थापित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही इसे बेहतर तरीके से संचालित किए जाने के हर संभव प्रयास किए जाएँगे। उन्होंने भवन में सभी प्रकार के परीक्षण और मेडिकल सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराये जाने की भी बात भी कही।

मुख्य सचिव ने इस अस्पताल के आसपास डॉक्टर्स और स्टाफ के आवासीय भवनों के लिए भूमि तलाशने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने महानिदेशक स्वास्थ्य से मशीनों और उपकरणों की शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभाग की योजना साझा किए जाने की भी बात कही।

इस अवसर पर महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार बना उत्तराखंड में सुशासन का मजबूत मॉडल, लाखों शिकायतों का त्वरित समाधान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं सशक्त प्रशासनिक इच्छाशक्ति का परिणाम है कि उत्तराखंड में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम आज गुड गवर्नेंस का सशक्त और भरोसेमंद मॉडल बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुँच रही है और समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान सुनिश्चित कर रही है।

दिनांक 03 फरवरी 2026 तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 555 कैंपों का आयोजन किया गया, जिनमें से 548 कैंप पूर्व में तथा 7 कैंप आज आयोजित हुए। इन कैंपों के माध्यम से कुल 4,36,391 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की, जिनमें 4,33,681 व्यक्ति पूर्व में तथा 2,810 व्यक्ति आज शामिल हुए।

*लाखों शिकायतों का समाधान, सुशासन की मिसाल*

इन जनसुनवाई कैंपों में नागरिकों द्वारा कुल 43,032 शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 42,604 पूर्व में तथा 428 आज प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की स्पष्ट नीति और प्रशासन की तत्परता के चलते इनमें से 29,042 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है, जिसमें 28,721 पूर्व में तथा 321 शिकायतें आज ही निस्तारित की गईं।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य सरकार केवल सुनवाई तक सीमित नहीं, बल्कि समाधान की जिम्मेदारी भी पूरी गंभीरता से निभा रही है।

*प्रमाण पत्र, योजनाएं और त्वरित सेवाएं – सरकार आपके द्वार*

कैंपों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाएं भी तत्काल उपलब्ध कराई गईं। अब तक 61,460 से अधिक प्रमाण पत्र/सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें 61,064 पूर्व में तथा 408 सेवाएं आज दी गईं। इसके अतिरिक्त विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से कुल 2,39,766 नागरिकों को लाभान्वित किया गया, जिनमें 2,37,050 पूर्व में तथा 1,816 लोग आज लाभान्वित हुए।

*महिलाओं को विशेष लाभ, पहाड़ की महिलाओं तक पहुँची सरकार*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गुड गवर्नेंस की सोच का सबसे सशक्त प्रभाव महिला सशक्तिकरण के रूप में सामने आया है। दूरस्थ, दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए ये कैंप आशा की नई किरण बने हैं। महिलाओं को प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने में इन कैंपों ने अहम भूमिका निभाई।

पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाएं, जिन्हें पहले जिला या तहसील मुख्यालय तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, अब अपने ही गांव में सेवाएं प्राप्त कर रही हैं। महिला लाभार्थियों की शिकायतों का संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ निस्तारण किया जा रहा है, जिससे उनमें प्रशासन के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

*हर जनपद में प्रभावी क्रियान्वयन*

अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी—राज्य के सभी जनपदों में इस कार्यक्रम का संतुलित और प्रभावी क्रियान्वयन हुआ है।
हर क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासन ने समाधान उपलब्ध कराए हैं, जो मुख्यमंत्री की “समस्या-केंद्रित शासन प्रणाली” को दर्शाता है।

*गुड गवर्नेंस का मजबूत मॉडल*

‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम यह सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में: सरकार जवाबदेह है,
प्रशासन जनता के साथ खड़ा है, नीतियां कागजों से निकलकर जमीन पर उतर रही हैं |

यह कार्यक्रम न केवल समस्याओं के समाधान का माध्यम है, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता, पारदर्शिता और संवेदनशील शासन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण भी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह पहल उत्तराखंड को गुड गवर्नेंस के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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“ *उत्तराखंड में हमारी सरकार का संकल्प है कि शासन केवल सचिवालय तक सीमित न रहे, बल्कि अंतिम व्यक्ति के द्वार तक पहुँचे। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम इसी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है।*

*इन कैंपों के माध्यम से लाखों नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान हुआ है और विशेष रूप से दूरस्थ व पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को सीधी प्रशासनिक सहायता मिली है।*

*महिलाओं को प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, स्वास्थ्य एवं कल्याणकारी सेवाएं उनके गांव में ही उपलब्ध कराना हमारी गुड गवर्नेंस की प्राथमिकता है।*

*हमारी सरकार संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के माध्यम से उत्तराखंड को सुशासन का आदर्श राज्य बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”*

*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*

रोड कटिंग में मनमानी पड़ी भारी, अनुमति निरस्त, मुकदमा दर्ज मशीनरी जब्त

रोड कटिंग कार्य में अनुमति की शर्तों के उल्लंघन पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) की रोड कटिंग अनुमति निरस्त करते हुए कार्य को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। पिटकुल की अनुमति पर बैन लगा दिया है। तथा एक्शियन एवं ठेकेदार पर मुकदमा तर्ज किया गया।
एलआईसी बिल्डिंग के पास विद्युत केबल अंडरग्राउंड कार्य में आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। जिसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधितों के विरुद्ध एक्शन लेने के निर्देश दिए है। जिसके परिपेक्ष में अनुमति निरस्त करते हुए। एक्शियन ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी के नेतृत्व में क्यूआरटी टीम के निरीक्षण में पाया गया कि निर्धारित समय व शर्तों के विपरीत रोड कटिंग की जा रही थी, जिससे यातायात बाधित हुआ और आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ी। जिला प्रशासन ने पिटकुल को निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित स्थलों पर तत्काल भरान कर सड़क को पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए। निर्देशों की अवहेलना की स्थिति में संबंधित अधिशासी अभियंता, ठेकेदार व अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
अधीक्षण अभियंता (परियोजना क्रियान्वयन), पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) द्वारा 135 के.वी. आराघर सब-स्टेशन से निर्माणाधीन 132 के.वी. माजरा-लालतप्पड़ एलआईएलओ लाइन को भूमिगत केबिल के माध्यम से बिछाने (कुल लंबाई 1996 मीटर, 5 रोड क्रॉसिंग सहित) हेतु रोड कटिंग की अनुमति का अनुरोध पर परियोजना समन्वय समिति, जनपद देहरादून ने 19.12.2025 को आयोजित बैठक में लिए गए निर्णय के क्रम में अधीक्षण अभियंता, नवम वृत्त, लोक निर्माण विभाग, यमुना कॉलोनी, देहरादून / सदस्य सचिव, परियोजना समन्वय समिति द्वारा पत्र 01.01.2026 के माध्यम से निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन 16.01.2026 से 15.02.2026 तक, रात्रि 10 बजे से प्रातः 5 बजे तक रोड कटिंग की सशर्त अनुमति प्रदान की गई थी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी के नेतृत्व में जिला प्रशासन की क्यूआरटी टीम द्वारा आईएसबीटी क्रॉसिंग एवं सहारनपुर रोड माजरा क्षेत्र में रोड कटिंग स्थलों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्यूआरटी टीम द्वारा पाया कि संबंधित एजेंसी द्वारा अनुमति आदेश में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए रोड कटिंग कार्य किया जा रहा है, जिससे आम जनमानस को भारी असुविधा, यातायात बाधा एवं सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन द्वारा अग्रिम आदेशों तक संबंधित स्थलों पर रोड कटिंग कार्य पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है तथा अनुमति निरस्त कर दी गई है। साथ ही अधीक्षण अभियंता (परियोजना क्रियान्वयन), पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड को निर्देशित किया गया है कि समस्त प्रभावित स्थलों पर सड़क का भरान कर यथास्थिति में रिस्टोरेशन कार्य सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शहर की सड़कों, यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।