महामंडलेश्वर अभिरामदास महाराज का आशीर्वाद लेने उनके आश्रम पहुंचे पूर्व मंत्री

ऋषिकेश विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने ऋषिकेश के मायाकुंड स्थित रामानंद आश्रम के पीठाधीश्वर एंव महामंडलेश्वर अभिरामदास जी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर डॉ. अग्रवाल ने शंकराचार्य जी से प्रदेश एवं क्षेत्र की समृद्धि, शांति और जनकल्याण के विषय में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि संत समाज का मार्गदर्शन समाज को सही दिशा प्रदान करता है तथा उनके आशीर्वाद से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आश्रम की व्यवस्थाओं की सराहना भी की।

महामंडलेश्वर अभिरामदास ने भी डॉ. अग्रवाल को आशीर्वाद देते हुए डॉ अग्रवाल व प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

पुलिसकर्मियों को आपदा प्रबंधन में निपुण बनना आवश्यक: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस लाइन देहरादून में प्रशिक्षण ले रहे पुलिस कांस्टेबलों को संबोधित किया। उन्होंने युवा कांस्टेबलों का उत्साहवर्धन करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने, आपदा प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने तथा ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पहाड़ी राज्य होने के कारण प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए पुलिसकर्मियों को आपदा प्रबंधन में निपुण बनना आवश्यक है। उन्होंने कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए जनता के साथ समन्वय बनाए रखने तथा अपराध नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कांस्टेबलों को आधुनिक प्रशिक्षण ग्रहण कर जनसेवा के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री धामी ने किया दून बुक फेस्टिवल 2026 का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित “दून बुक फेस्टिवल 2026” का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रकाशकों द्वारा लगाये गये स्टॉल का अवलोकन और गढ़वाली एवं कुमांऊनी पुस्तकों का विमोचन भी किया। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने देशभर से आए साहित्यकारों, कलाकारों एवं साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह महोत्सव साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम है, जो समाज में ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान को नई दिशा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस 9 दिवसीय महोत्सव में विभिन्न सत्रों, संवाद कार्यक्रमों, पुस्तक परिचर्चाओं तथा “लेखक से मिलिए” जैसे आयोजनों के माध्यम से साहित्यिक विमर्श को समृद्ध किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों के लिए स्थापित “चिल्ड्रेन पवेलियन” को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी में पठन-पाठन की रुचि विकसित होगी।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि की इस पावन भूमि ने अनेक महान साहित्यकारों को जन्म दिया है और यह प्रदेश सदैव ज्ञान, संस्कृति एवं सृजन का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान”, “साहित्य भूषण” तथा अन्य पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है, साथ ही विभिन्न भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन हेतु अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में साहित्य ग्रामों की स्थापना की जा रही है, जिससे साहित्यकारों को सृजन के लिए अनुकूल वातावरण मिल सकेगा तथा उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान का स्थायी स्रोत हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी समाज को दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे विभिन्न अवसरों पर उपहार स्वरूप पुस्तकों एवं पौधों को प्रोत्साहित करें, जिससे समाज में ज्ञान और पर्यावरण दोनों के प्रति जागरूकता बढ़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को पुनः प्रतिष्ठित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार भी उत्तराखंड की साहित्यिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों को शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन प्रदेश की साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, आचार्य बालकृष्ण, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिन्द मराठी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक, देवभूमि उत्तराखण्ड युनवर्सिटी के उपाध्यक्ष अमन बंसल मौजूद थे।

चारधाम यात्रा मार्ग होगा और सुरक्षित, NH-134 पर व्यापक कार्यों को मंजूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में भूस्खलन प्रभावित स्थलों के उपचार एवं मरम्मत कार्यों के लिए ₹461 करोड़ की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी एवं केंद्र सरकार का हार्दिक आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय बताया है, जिससे प्रदेश की सड़क अवसंरचना को नई मजबूती मिलेगी और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इस स्वीकृति के अंतर्गत उत्तरकाशी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-134 पर भूस्खलन से प्रभावित 17 स्थलों के उपचार के लिए ₹233 करोड़ तथा पिथौरागढ़ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-09 के तवाघाट-घटियाबागड़ खंड पर 3 संवेदनशील स्थलों के लिए ₹228 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। यह पहल न केवल आपदा जोखिम को कम करने में सहायक होगी, बल्कि प्रदेश के दुर्गम एवं सीमांत क्षेत्रों में आवागमन को भी सुगम बनाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-134, जो चारधाम यात्रा का एक प्रमुख मार्ग है, उत्तराखंड में धरासू एवं कुठनोरी से यमुनोत्री धाम को जोड़ता है। यह मार्ग भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रहा है, जिसके कारण कई बार यातायात बाधित होता है और यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने से इस मार्ग की स्थिरता बढ़ेगी, जिससे चारधाम यात्रा अधिक सुरक्षित एवं सुगम हो सकेगी। साथ ही धार्मिक पर्यटकों, पर्यावरण प्रेमियों एवं स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-09 पर तवाघाट-घटियाबागड़ खंड में भूस्खलन संभावित स्थलों के उपचार से सीमांत क्षेत्रों तक निर्बाध संपर्क स्थापित होगा। इससे न केवल स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। यह स्वीकृति प्रदेश के समग्र विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने और आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*……

*“उत्तराखंड में भूस्खलन प्रभावित स्थलों के उपचार एवं मरम्मत के लिए ₹461 करोड़ की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। यह निर्णय राज्य में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने, चारधाम यात्रा को सुगम बनाने तथा सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा। हमारी सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास एवं नागरिकों की सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है।”

सीएम ने केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास मंत्री से भेंट कर राज्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर की चर्चा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर राज्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से हरिद्वार शहर में गंगा कॉरिडोर क्षेत्र से संबंधित लगभग ₹325 करोड़ की परियोजना के लिए धनराशि स्वीकृति का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने आगामी कुंभ-2027 के दृष्टिगत इस परियोजना के अंतर्गत विद्युत लाइनों के भूमिगतकरण एवं प्रणाली के स्वचालन हेतु भी प्रथम चरण में ₹325 करोड़ की धनराशि शीघ्र स्वीकृत करने का अनुरोध किया, साथ ही द्वितीय चरण के अंतर्गत शेष लगभग ₹425 करोड़ की धनराशि भी अनुमोदित करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार एवं ऋषिकेश में आगामी कुंभ-2027 की तैयारियों के संदर्भ में हरिद्वार में घाटों के सौंदर्यीकरण, आवासीय सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण एवं शहरी अवसंरचना के विकास हेतु केंद्र सरकार से आवश्यक सहयोग प्रदान किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन कार्यों से राज्य में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय यातायात को सुदृढ़ करने के हेतु रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना को मेरठ से हरिद्वार एवं ऋषिकेश तक विस्तारित करने के साथ ही देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश मेट्रो कॉरिडोर के विकास का भी अनुरोध किया, ताकि इन शहरों के मध्य आवागमन को सुगम बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से क्षेत्र में सड़क यातायात पर निर्भरता कम होगी, यातायात जाम की समस्या में कमी आएगी तथा पर्यावरणीय दृष्टि से भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल उत्तराखण्ड के प्रमुख तीर्थस्थलों को आधुनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ते हुए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन एवं समग्र विकास को नई गति प्रदान करेगी।

केन्द्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

सीएम धामी ने जुगमन्दर हॉल के नवीनीकरण कार्य का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नगर निगम देहरादून में निगम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के अंतर्गत 02 करोड़ 32 लाख 50 हजार रुपये की लागत से जुगमन्दर हॉल के जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण कार्य का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने केदारपुरम स्थित ए.बी.सी. सेंटर में कैनालों के निर्माण एवं नगर निगम क्षेत्रांतर्गत 06 स्थानों पर पार्कों के विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का शिलान्यास भी किया।

मुख्यमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार “विकास भी और विरासत भी” को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रही है। आज हमारा देहरादून अपनी समृद्ध पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को संजोते हुए आगे बढ़ रहा है। तेज विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति और पहचान को सहेजने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के शहरी क्षेत्रों को सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से देश के शहरों, कस्बों और नगरों में स्वच्छता की एक नई संस्कृति विकसित हुई है।

अमृत योजना के माध्यम से शहरों में जल आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था और हरित क्षेत्रों के विकास की दिशा में भी अनेक कार्य किए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के माध्यम से देशभर के शहरों को आधुनिक, सुविधायुक्त और भविष्य के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों गरीब परिवारों का स्वयं का घर होने का सपना साकार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा अन्य क्षेत्रों में भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किए जा रहे हैं। देहरादून को स्वच्छ, सुंदर और विकसित शहर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है।

स्मार्ट सिटी मिशन, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, ओडीएफ अभियान और लीगेसी वेस्ट प्रबंधन जैसी योजनाओं के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून को आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने के लिए 1400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं पर व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन का निर्माण किया गया है। कूड़ा वाहनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना भी की गई है। हरित और स्वस्थ देहरादून के निर्माण के लिए शहर में 35 पार्कों का निर्माण कराया गया है। केदारपुरम में योगा थीम पर आधारित शहर का सबसे बड़ा पार्क विकसित किया गया है। वीर बलिदानियों की स्मृति में विशेष स्मृति पार्कों के माध्यम से 50 हजार वर्ग मीटर से अधिक हरित क्षेत्र विकसित किया गया है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जलभराव वाले चिन्हित स्थानों पर रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 11 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं।
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देहरादून ने देशभर में 19वां स्थान प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का शुभारंभ करेंगे। इससे आवागमन और तेज होगा। इन संभावित चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पार्किंग, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देहरादून को देश के शीर्ष स्वच्छ शहरों की श्रेणी में शामिल करने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए रिस्पना और बिंदाल नदियों के ऊपर एलिवेटेड रोड निर्माण की योजना भी तैयार की जा रही है।

पिछले एक वर्ष में नगर निगम देहरादून द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम ने राजस्व संग्रहण को लगभग 52 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 73 करोड़ रुपये तक पहुंचाया है, जिससे राजस्व में 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां लगभग 190 से 200 वाहन डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में लगे थे, आज उनकी संख्या बढ़कर लगभग 300 हो गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण न हो, यह राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है। सरकारी और निगम की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करना नगर निगम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने नगर निगम के सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से इस पर सक्रिय कार्रवाई की अपेक्षा की। उन्होंने जनता से देहरादून को स्वच्छ, सुंदर और आधुनिक शहर बनाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, रामसिंह कैड़ा, खजान दास, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, सहदेव सिंह पुंडीर, नगर आयुक्त देहरादून नमामि बंसल एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

राज्य में प्रथमबार समाज के महत्वपूर्ण अंग दिव्यांगजनों के लिए ऋषिकेश में बन रहा आधुनिक इंडोर बैडमिंटन हॉल

जनपद देहरादून में दिव्यांगजनों के लिए खेल सुविधाओं के विस्तार एवं उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय पहल की गई है। राज्य में प्रथमबार दिव्यांगजनों की मांग एवं उनकी विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऋषिकेश क्षेत्र में उनके उपयोगार्थ एक आधुनिक इंडोर बैडमिंटन हॉल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने दिव्यांगजनों इंडोर बैडमिंटन हॉल निर्माण हेतु भूमि चयनित करते हुए 02 किश्तों में 62.67 लाख की राशि प्रदान की गई है जिसमें नगर निगम ऋषिकेश को प्रथम किस्त 25.41 लाख धनराशि पूर्व में जारी कर दी गई है शेष धनराशि 37.26 का अनुमोदित की कर दी गई है।
जिला प्रशासन की इस पहल से जहां मेधावी दिव्यांगजन खिलाडियों हेतु इंडोर बैडमिंटन हॉल की सुविधा मिलेगी वहीं प्रतिभावान दिव्यांग खिलाड़ियों को अपना हुनर दिखाने का अवसर मिलेगा जिससे छुपी हुई प्रतिभा सामने आ सकेंगी तथा राज्य, राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश एवं राज्य का नाम रोशन कर सकेंगे। जिलाधिकारी के इस प्रसाय से ऐसे सितारे जो बहुत कुछ कर सकते हैं किन्तु सुविधओं के आभाव में कुछ नही कर पा रहें हैं उनको अब इस आधुनिक बैडमिंटन हॉल में अपना हुनर दिखाते हुए  राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेरने का मौका मिलेगा।
जिलाधिकारी ने दिव्यांगजनों हेतु इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए Urgent Need Basis पर जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) मद के अंतर्गत पूर्व में रू0 25.41 लाख की धनराशि स्वीकृत एवं निर्गत की जा चुकी है। उक्त धनराशि नगर निगम, ऋषिकेश को चेक के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, जिस पर निर्माण कार्य प्रारम्भ हो चुका है। इसी क्रम में नगर निगम, ऋषिकेश द्वारा प्रस्तुत संशोधित आंगणन के अनुसार अब इस परियोजना की कुल लागत रू0 62.67 लाख आंकी गई है। जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त, नगर निगम ऋषिकेश द्वारा प्रस्तुत शेष रू0 37.26 लाख की अतिरिक्त धनराशि की मांग पर डीएम ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।  

जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रशासन की प्राथमिकता में है। यह इंडोर बैडमिंटन हॉल न केवल उनके शारीरिक विकास एवं स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में सशक्त रूप से जोड़ने का कार्य भी करेगा। जिला प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि परियोजना समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हो, जिससे दिव्यांगजनों को शीघ्र ही इस सुविधा का लाभ मिल सके।

मुख्य सचिव ने की कुंभ मेला 2027 की तैयारियों की समीक्षा

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों का जायजा लेने हरिद्वार पहुंचे मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को मेला नियंत्रण भवन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर मेले से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की तथा प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर सुझाव एवं सहयोग पर विचार-विमर्श किया।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कुंभ मेला का दिव्य एवं भव्य आयोजन सुनिश्चित करने के लिए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण की जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। हरिद्वार में सीवर लाइन निर्माण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने खोदी गई सड़कों को तत्काल ठीक करने के निर्देश दिए। अपर रोड का कार्य एक सप्ताह में पूर्ण करने तथा शेष कार्य 30 जून तक समाप्त करने के निर्देश दिए गए। सीवर कार्यों की दैनिक निगरानी के लिए अपर जिलाधिकारी, अपर मेलाधिकारी एवं परियोजना प्रबंधक की समिति को प्रतिदिन की प्रगति की निगरानी करने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारी हरिद्वार अपर रोड को सही करने के संबंध में निरीक्षण कर 10 अप्रैल तक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

मुख्य सचिव ने गंगा नदी की स्वच्छता एवं अविरलता बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में गंदा पानी या सीवर गंगा में न जाने पाए। उन्होंने सभी नालों को सीवर लाइन से जोड़ने तथा आज ही निरीक्षण कर वीडियोग्राफी सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए ।

मुख्य सचिव ने कुकिंग गैस की समस्या के समाधान के लिए पीएनजी कनेक्शन वितरण हेतु शिविर आयोजित करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी आश्रमों, धर्मशालाओं, होटलों एवं अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से एक सप्ताह के भीतर आवेदन प्राप्त किए जाँय। विद्युत व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने भूमिगत लाइनों में खराबी आने पर त्वरित सुधार, खंभों को हटाने तथा वितरण बॉक्स को उपयुक्त स्थानों पर स्थापित करने के निर्देश दिए।

घाटों की सुरक्षा एवं रख-रखाव के लिए प्रभावी प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए उन्होंने नियमित पुलिस पेट्रोलिंग, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था एवं सीसीटीवी कैमरों की स्थापना पर बल दिया। साथ ही मनसा देवी मंदिर एवं चंडी देवी मंदिर मार्गों के सुधार कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समयसीमा से पूर्व पूर्ण करने के लिए संबंधित विभागों को युद्धस्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज का निर्माण शीघ्र पूर्ण करने तथा इसकी अवस्थापना सुविधाओं को उपयोग में लाने के निर्देश दिए। साथ ही 15 दिनों के भीतर तीन मेगावाट विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं नई लाइन के निर्माण के निर्देश भी दिए गए। बैठक में कुंभ मेले के दौरान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस तथा बोट एंबुलेंस की तैनाती पर भी विचार-विमर्श किया गया।

मुख्य सचिव ने कुंभ मेला-2027 के लिए प्रस्तावित ट्रैफिक एवं पार्किंग योजना पर सभी हितधारकों से सुझाव लेने तथा मंडलायुक्त स्तर पर अंतिम रूप देकर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं में श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुगमता का विशेष ध्यान रखा जाए।

बैठक में मेलाधिकारी सोनिका ने बताया कि अब तक 36 स्थायी एवं 19 अस्थायी कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा 32 सेक्टरों का विस्तृत सेक्टर प्लान तैयार किया गया है। सभी कार्यों को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूर्ण करने हेतु विशेष निगरानी व्यवस्था की गई है।

बैठक में सचिव शहरी विकास नितेश झा, आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, नगर आयुक्त नंदन कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, मेला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज वर्मा, उप मेलाधिकारी श्री आकाश जोशी एवं श्री मनजीत सिंह, सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इससे पूर्व मुख्य सचिव ने श्री गंगा सभा, व्यापार मंडल, आश्रम-होटल-धर्मशाला संचालकों, टैक्सी एवं ऑटो यूनियन तथा सफाई कर्मियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर कुंभ मेला व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की तथा उनके सुझाव एवं समस्याएं जानीं। उन्होंने सभी से कुंभ मेला-2027 के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन में सहयोग करने का आह्वान किया।

ऋषिकेश महायोजना 2031 में समाधान का रोडमैप तैयार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के तहत ऋषिकेश महायोजना–2031 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में तीन जनपदों—टिहरी, पौड़ी और देहरादून—से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया। सरकार का उद्देश्य इस महायोजना के माध्यम से ऋषिकेश को एक सुनियोजित, व्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना है, जहां पर्यटन और शहरी विकास में संतुलन बना रहे।

*तपोवन बना चर्चा का केंद्र, अवैध निर्माण बड़ी चुनौती*
बैठक के दौरान सबसे अधिक फोकस तपोवन क्षेत्र पर रहा, जो टिहरी विकास प्राधिकरण के अधीन आता है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2011 की पूर्व महायोजना के बाद इस क्षेत्र में अनियोजित और अवैध निर्माण तेजी से बढ़े हैं। होटल, गेस्ट हाउस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार ने न केवल क्षेत्र की भौगोलिक संरचना को प्रभावित किया है, बल्कि यातायात, पार्किंग और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ाया है। इसके चलते स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक द्वारा प्रस्तुत किए गए प्लान में इन समस्याओं के समाधान के लिए कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। जिन क्षेत्रों में पहले से होटल और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हो चुकी हैं, उन्हें ‘पर्यटन उपयोग क्षेत्र’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इससे न केवल मौजूदा ढांचे को वैधता और संरचना मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, भविष्य में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने के लिए सख्त नियामक प्रावधान भी जोड़े गए हैं।

*जनसुनवाई के बाद संशोधन, अब अंतिम चरण में योजना*
अधिकारियों ने जानकारी दी कि महायोजना को पहले संबंधित प्राधिकरण बोर्डों से अनुमोदन मिल चुका है और इसके बाद इसे जनसुनवाई एवं प्रदर्शनी की प्रक्रिया से भी गुजारा गया। जनसुझावों के आधार पर इसमें संशोधन किए गए और फिर इसे शासन स्तर पर भेजा गया। शासन द्वारा पुनर्विचार के बाद इसे एक बार फिर संबंधित बोर्डों को भेजा गया, जहां से इसे अनुमन्य कर दिया गया है। अब योजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

*तीन जिलों का समन्वय, 15 दिन में सुझाव होंगे एकत्र*
ऋषिकेश महायोजना–2031 तीन जनपदों में फैली हुई है—टिहरी, पौड़ी और देहरादून। इनमें से दो जिलों ने योजना को स्वीकृति दे दी है, जबकि पौड़ी जनपद ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इन्हीं सुझावों पर विचार करने के लिए सचिव स्तर पर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी जिलों से प्राप्त सुझावों को 15 दिनों के भीतर समेकित कर शासन को प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि महायोजना को जल्द अंतिम रूप दिया जा सके।

*पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल*
इस महायोजना के लागू होने से ऋषिकेश में पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सुनियोजित विकास के माध्यम से जहां एक ओर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार का मानना है कि यह योजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक के अंत में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि सभी संबंधित विभागों के समन्वय से ऋषिकेश महायोजना–2031 को शीघ्र लागू किया जाएगा। इसके लागू होने से न केवल शहर की आधारभूत संरचना मजबूत होगी, बल्कि ऋषिकेश को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा।

सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि ऋषिकेश महायोजना–2031 राज्य के लिए एक दूरदर्शी योजना है, जो आने वाले वर्षों में विकास की दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आपत्तियों और सुझावों का शीघ्र निस्तारण करते हुए महायोजना को अंतिम रूप दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि तपोवन जैसे क्षेत्रों में जो अव्यवस्थित विकास हुआ है, उसे सुधारने के लिए इस बार ठोस प्रावधान किए गए हैं, जिससे भविष्य में संतुलित और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।

उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर सम्मान मिलने पर सीएम धामी ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड पुलिस को “राष्ट्रपति पुलिस कलर” (President’s Police Colour) से अलंकृत किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे राज्य के इतिहास का “स्वर्णिम और गौरवपूर्ण अध्याय” बताया है। सीएम कहा कि उत्तराखंड के लिए यह क्षण केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि गौरव, परंपरा और अदम्य सेवा भावना का जीवंत प्रमाण बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में भेंट कर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस को देश के उन चुनिंदा पुलिस बलों की श्रेणी में स्थापित करता है, जिन्हें उनकी विशिष्ट और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए यह सर्वोच्च राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक सहित सभी अधिकारियों और जवानों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए भारत के माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन ने उत्तराखंड पुलिस को इस उच्च सम्मान तक पहुँचाया है। यह उपलब्धि न केवल पुलिस बल की प्रतिष्ठा को बढ़ाती है, बल्कि पूरे उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने का कार्य करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किया कि यह सम्मान केवल एक अलंकरण नहीं, बल्कि वर्षों की वीरता, अनुशासन, उत्कृष्ट सेवा, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की मान्यता है। यह पुरस्कार एक कठोर और बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद दिया जाता है, जिसमें पुलिस बल के हर आयाम—कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, जनसुरक्षा और तकनीकी नवाचार—का गहन परीक्षण किया जाता है।

यह सम्मान पुलिस बल के ध्वज और वर्दी पर अंकित होकर उसके गौरव, अस्मिता और परंपरा का स्थायी प्रतीक बन जाता है, साथ ही हर पुलिसकर्मी के लिए प्रेरणा और जिम्मेदारी का स्रोत भी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद पुलिस बल ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखते हुए अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आधुनिक तकनीक और स्मार्ट पुलिसिंग के माध्यम से जनता का विश्वास जीतना इस उपलब्धि का प्रमुख आधार रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस की भूमिका आपदा प्रबंधन में विशेष रूप से सराहनीय रही है। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में पुलिस बल ने अद्भुत साहस, त्वरित कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हजारों लोगों के जीवन की रक्षा की।

इसके साथ ही महाकुंभ, चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा जैसे विशाल आयोजनों में सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन का उत्कृष्ट संचालन पुलिस की दक्षता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण, पर्यटन सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में उत्तराखंड पुलिस ने तकनीकी सशक्तिकरण और जनसहभागिता के माध्यम से एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्थापना के “रजत जयंती वर्ष” में यह सम्मान मिलना इस उपलब्धि को और भी अधिक विशेष और ऐतिहासिक बनाता है। यह उत्तराखंड की 25 वर्षों की विकास यात्रा, सेवा और समर्पण का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड पुलिस “मित्रता, सेवा, सुरक्षा” के अपने ध्येय वाक्य के साथ आगे भी राष्ट्र और राज्य की सेवा में निरंतर अग्रसर रहेगी। राज्य सरकार पुलिस बल के आधुनिकीकरण और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वैश्विक मानकों की स्मार्ट पुलिसिंग स्थापित की जा सके।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने इस उपलब्धि को उत्तराखंड पुलिस के इतिहास का “स्वर्णिम अध्याय” बताते हुए कहा कि यह सम्मान प्रत्येक अधिकारी और जवान के समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ-साथ पुलिस परिवारों के त्याग और सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भविष्य में उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगी।

उत्तराखंड पुलिस अब इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के साथ राष्ट्र एवं राज्य की सेवा और सुरक्षा में और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी।