मुख्यमंत्री धामी का शेफ समुदाय से आवाहन, उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आम्रपाली विश्वविद्यालय परिसर से आयोजित श्रीअन्न आधारित “शेफ संवाद” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े युवा शेफ, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ, शिक्षाविद् एवं छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों, श्रीअन्न आधारित खानपान और इससे जुड़े रोजगार व पर्यटन अवसरों पर सार्थक संवाद स्थापित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से युवा शेफों ने उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन के प्रचार–प्रसार, गुणवत्ता मानकों, सरकारी प्रयासों और इस क्षेत्र में करियर की संभावनाओं को लेकर अनेक प्रश्न किए। शेफ शक्ति प्रसाद के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा सभी होटलों के मेन्यू में उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री आवास तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में मेहमानों को उत्तराखंड का पारंपरिक भोजन प्राथमिकता से परोसा जाता है, जिससे स्थानीय व्यंजनों को सम्मान और पहचान मिल सके।

शेफ संजीव जुयाल द्वारा उत्तराखंड के सभी शेफों को एक साझा मंच पर लाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिशा में पर्यटन विभाग को एक समग्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि राज्य के शेफ समुदाय को एक अंब्रेला प्लेटफॉर्म के तहत जोड़ा जा सके और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकें।

वहीं, शेफ सुनील उपाध्याय द्वारा पारंपरिक उत्तराखंडी भोजन की शुद्धता, प्रमाणिकता और मानक तय करने को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से कार्य कर रही है। पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता बनाए रखने, उनकी पहचान संरक्षित करने और मानकीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि उत्तराखंड के स्वाद की मौलिकता बनी रहे।

उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विभाग और कौशल विकास विभाग मिलकर इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि युवा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वरोजगार एवं उद्यमिता की ओर अग्रसर हों।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह संवाद केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी शेफ साथियों, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए आम्रपाली विश्वविद्यालय और उसकी पूरी टीम को इस विचारशील और सार्थक “शेफ संवाद” कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड संस्कारों, संस्कृति और विविध व्यंजनों की भूमि है। यहां के व्यंजन पहाड़ों की जीवनशैली, परंपराओं और आत्मा की कहानी कहते हैं। आज का पर्यटक केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और खानपान का अनुभव भी करना चाहता है। ऐसे में शेफों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे स्थानीय स्वाद के माध्यम से राज्य की पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाते हैं।

मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी कहा कि आज का शेफ केवल रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संस्कृति का संवाहक, पर्यटन का ब्रांड एम्बेसडर और रोजगार सृजन का माध्यम बन चुका है। उत्तराखंड के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में स्थानीय व्यंजनों, आतिथ्य परंपरा और शेफ समुदाय का योगदान अतुलनीय है।

श्रीअन्न पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल भोजन या फसल नहीं, बल्कि उत्तराखंड के समग्र विकास का सशक्त माध्यम बन रहा है। श्रीअन्न के माध्यम से गांव, किसान और समाज का अंतिम व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है। मंडुवा, झंगोरा, कोदा और रामदाना जैसी फसलें कम पानी में उगने वाली, पोषक तत्वों से भरपूर और किसानों की आय बढ़ाने वाली हैं, जो उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज श्रीअन्न के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है। भारत वैश्विक स्तर पर मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक है और कुल वैश्विक उत्पादन में लगभग 38.4 प्रतिशत योगदान देता है। बदलती वैश्विक खाद्य प्राथमिकताओं के बीच फूड प्रोसेसिंग, हेल्थ फूड, होटल, कैफे, होम-स्टे और फूड स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं।

राज्य सरकार की सोच को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में लगभग 44 प्रतिशत युवा देश के विभिन्न हिस्सों से उत्तराखंड वापस लौटे हैं, जो राज्य में बढ़ते अवसरों का प्रमाण है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने शेफ समुदाय से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि सभी मिलकर उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को “लोकल से ग्लोबल” बनाने की दिशा में कार्य करें। उनकी रचनात्मकता और प्रस्तुति उत्तराखंड के स्वाद को दुनिया की थाली तक पहुंचा सकती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “शेफ संवाद” से निकले विचार उत्तराखंड को पर्यटन, रोजगार और संस्कृति के क्षेत्र में एक नए विजन के साथ आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे और उत्तराखंड को सशक्त, आत्मनिर्भर व गौरवशाली राज्य बनाने का संकल्प अवश्य पूरा होगा।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत, आम्रपाली विश्वविद्यालय से संजय मिश्रा सहित देश भर से आए अनेक प्रतिष्ठित शेफ उपस्थित रहे।

सेब की अति सघन बागवानी योजना का उद्देश्य सेब उत्पादन को बढ़ावा और किसानों की आय में वृद्धि करना: धामी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सेब की अति सघन बागवानी योजना सम्बन्ध में शासन में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हुई। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट का उत्पादन बढ़ाए जाने के सम्बन्ध में अधिकारियों से चर्चा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता एवं अन्य राज्यों की उत्पादन क्षमता के सापेक्ष उत्तराखण्ड की उत्पादन क्षमता पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि “सेब की अति सघन बागवानी योजना” के अंतर्गत सेब की नवीनतम प्रजातियों के बागान स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए मुख्य सचिव ने जनपदों में किसानों को क्लस्टर बेस्ड एप्रोच अपनाए जाने हेतु प्रेरित किया जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य में सेब उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। प्रदेश में अभी सेब उत्पादन क्षेत्र बढ़ाए जाने की अत्यधिक सम्भावना है, जो प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट उत्पादन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा।

मुख्य सचिव ने सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रदेश की उत्पादन क्षमता विशेषकर सेब की उत्पादन क्षमता का आंकलन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपदों को सेब उत्पादन में क्षमता के अनुरूप 2030, 2040 एवं 2050 में कितना उत्पादन होगा, इसके लिए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करते हुए योजना को धरातल पर उतारा जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि झाला (हर्षिल, उत्तरकाशी) स्थिति कोल्ड स्टोरेज की तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कोल्ड स्टोरेज तैयार किए जाएं। इससे किसान अपना सेब और अन्य उत्पाद ऑफ सीजन में मार्केट में उतार कर अधिक लाभ ले सकेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के अधिकतम क्षेत्रों में अभी भी पुरानी कम उत्पादन क्षमता वाली किस्म की फसलों का उत्पादन हो रहा है। उन्हें हाई डेंसिटी ऐपल प्लांट्स से रिप्लेस करने की आवश्यकता है। इसके लिए बड़े स्तर पर किसानों से संवाद करते हुए इस दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने इसकी भावी मांग के अनुरूप नर्सरियों को अपग्रेड किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि बड़े पैमाने पर हाई डेंसिटी प्लांट्स तैयार किए जाने के लिए नर्सरियां विकसित की जाएं। फुल टाईम टैक्निकल सपोर्ट के लिए पीएमयू गठित किया जाना चाहिए, ताकि वृहद स्तर पर इस योजना को संचालित किया जा सके। इससे धरातल पर योजनाओं को सफल बनाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर, डॉ. वी. षणमुगम एवं डॉ. एस.एन. पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने पैरा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश

आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से देश की प्रतिष्ठित पैरा एथलीट एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. दीपा मलिक ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने डॉ. दीपा मलिक को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की और पैरा स्पोर्ट्स के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों को देश और समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

भेंट के दौरान डॉ. दीपा मलिक ने उत्तराखंड में पैरा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और समर्पित मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक पैरा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का अनुरोध मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में प्रतिभाशाली पैरा खिलाड़ियों की अपार संभावनाएं हैं और यदि उन्हें संरचित प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. दीपा मलिक के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए इसे महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों और पैरा खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश अपर सचिव श्री आशीष चौहान को दिए, ताकि प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर आगे की ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर पैरालम्पिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावर लिफ्टिंग के चैयरपर्सन जेपी सिंह, पैरा राव लिफ्टिंग के उपाध्यक्ष शुभम चौधरी, कोर यूनिवर्सिटी के चैयरमैन जेसी जैन, पैरालंपिक पावर लिफ्टर परमजीत कुमार, अशोक, कस्तूरी उपस्थित रहे।

आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सहनशीलता विषय पर कार्यशाला को सीएम ने किया वर्चुअल संबोधित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सहनशीलता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा-पूर्व तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों तथा सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा। साथ ही, तकनीकी नवाचार, अनुसंधान सहयोग एवं साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में ठोस रणनीतियां तैयार की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड सहित संपूर्ण हिमालयी क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति के कारण आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमस्खलन एवं वनाग्नि का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका दुष्प्रभाव वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समयबद्ध तैयारी एवं सामूहिक प्रयासों से कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए 4P (Predict, Prevent, Prepare, Protect) मंत्र दिया है, उसी के आधार पर 10-सूत्रीय एजेंडा पर इसके लिए कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आपदा-पूर्व तैयारी, एआई आधारित चेतावनी प्रणालियां, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग, रैपिड रिस्पॉन्स टीमें, फॉरेस्ट फायर अर्ली वार्निंग सिस्टम एवं वनाग्नि प्रबंधन कार्ययोजना पर निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने आईआईटी रुड़की के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्य सरकार आईआईटी के सहयोग से इस प्रणाली के विस्तार, भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग एवं बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संतुलन के लिए राज्य में पौधारोपण, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक कार्य किए जा रहे हैं। जल संरक्षण तथा संवर्धन की दिशा में स्प्रिंग रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARA) द्वारा कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से सुरक्षित घरों एवं इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर ध्यान देने तथा अधिकारियों से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर जोनल कॉर्डिनेटर, प्रज्ञा प्रवाह, भगवती प्रसाद राधव , निदेशक, आईआईटी रुड़की प्रो. के. के. पन्त , उपनिदेशक, आईआईटी रुड़की, प्रो. यू .पी.सिंह , प्रो.संदीप सिंह एवं विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिक उपस्थित थे।

समान कार्य समान वेतन पर कैबिनेट के ऐतिहासिक निर्णय के लिए उपनल कर्मियों ने सीएम का किया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज सचिवालय में उपनल कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। इस अवसर पर उपनल कर्मचारियों ने समान कार्य–समान वेतन के संबंध में आज राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री एवं प्रदेश सरकार के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।

उपनल कर्मचारियों ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही उनकी मांगों को पूरा करने के साथ-साथ उनके सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों उपनल कर्मचारियों में उत्साह एवं विश्वास का वातावरण बना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार उपनल कर्मियों के हितों की रक्षा, उनके सम्मान और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उपनल कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके योगदान को सरकार पूरी गंभीरता से मान्यता देती है। प्रदेश सरकार कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े सभी मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।

इस अवसर पर उपनल कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे सरकार की नीतियों एवं निर्णयों के अनुरूप पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।

मुख्य सचिव ने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जनपद देहरादून के सेलाकुई में स्थित सगन्ध पौधा केन्द्र का भ्रमण किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हाई वैल्यू फसलों के उत्पादन और प्रसंस्करण से प्रदेश के किसानों की आर्थिकी में बेहतर सुधार हो सकता है। उन्होंने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा प्रदेश के किसानों को डूर स्टेप सहायता उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए सगन्ध पौधा केन्द्र को और मजबूत किए जाने पर जोर दिया, ताकि सगन्ध पौधा केन्द्र प्रदेशभर में अपनी गतिविधियों को बढ़ा सके।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में उनकी जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप एरोमैटिक फसलों का चयन कर प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को इसमें जोड़े जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसानों को सगन्ध फसलों के उत्पादन में अपेक्षित सहयोग उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उन्होंने 6 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में तैयार किए जा रहे सैटेलाईट सेंटर्स को भी शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने परफ्यूमरी एंड ऐरोमैटिक सेक्टर में उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास के अंतर्गत डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेशन कार्यक्रम संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने अपने पूर्व में दिए निर्देशों को दोहराते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को जनपदों में भ्रमण कर समीक्षा कर फीडबैक लेने के लिए लगातार दौरे करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य विभागों द्वारा संचालित फल एवं सब्जियों से जुड़े आजीविका की योजनाओं को भी इसमें शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसान इस सगन्ध पौध उत्पादन और प्रसंस्करण कार्य से जुड़ें इसके लिए सभी जनपदों में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक कार्ययोजना जनवरी माह तक पूर्ण किए जाने की बात दोहराते हुए कहा कि निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण हो सकें इसके लिए जनपदों के लिए भी लक्ष्य निर्धारित किए जाएं।

इस अवसर पर निदेशक सगन्ध पौधा केन्द्र डॉ. निर्पेंद्र चौहान ने बताया कि सगन्ध पौधा केन्द्र को खुशबूदार फसलों के वाणिज्यीकरण के लिए एक सफल मॉडल के रूप में विकसित किया है, जो एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि यह एक बिज़नेस इनक्यूबेटर के तौर पर काम करता है, जो किसानों, उद्यमियों और एसेंशियल ऑयल इंडस्ट्री को सपोर्ट देता है, जिसमें खेती, प्रोसेसिंग और डिस्टिलेशन, मार्केटिंग, क्वालिटी एनालिसिस और स्टैंडर्डाइजेशन ट्रेनिंग और खुशबू वाले सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए दूसरी प्रमोशनल स्कीम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 5 नाली तक के किसानों को मुफ्त रोपण सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है, जबकि 9 एरोमैटिक फसलों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

निदेशक डॉ. चौहान ने बताया कि डिस्टिलेशन यूनिट और ड्रायर के लिए पर्वतीय जनपदों में 75 प्रतिशत तक सब्सिडी और मैदानी जनपदों में 50 प्रतिशत तक सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख) उपलब्ध करायी जा रही है। किसानों की सहायता के लिए 27 एसेंशियल ऑयल और एरोमैटिक उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल भी उपस्थित थे।

स्वस्थ सीमा अभियान के अंतर्गत आईटीबीपी एवं राज्य सरकार के मध्य एमओयू संपन्न

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड शासन एवं भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के मध्य स्वस्थ सीमा अभियान के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा भी उपस्थित रहे।

इस एमओयू का उद्देश्य पिथौरागढ़, चमोली एवं उत्तरकाशी जनपदों के अंतर्गत स्थित 108 सीमावर्ती गांवों में निवासरत नागरिक आबादी को एकीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। यह अभियान चरण–1 के रूप में प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से दुर्गम एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुनिश्चित किया जाएगा।

एमओयू के तहत भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), मुख्यालय उत्तरी सीमांत, देहरादून को प्रथम पक्ष तथा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखंड सरकार को द्वितीय पक्ष के रूप में नामित किया गया है | समझौते के अनुसार, आईटीबीपी द्वारा योग्य चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ तथा उपलब्ध एमआई रूम एवं टेली-मेडिसिन सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सीमावर्ती गांवों का नियमित भ्रमण कर स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। साथ ही लाभार्थियों के मेडिकल हेल्थ कार्ड/रिकॉर्ड का रख-रखाव एवं उपकरणों, दवाइयों तथा उपभोग्य सामग्रियों का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।

वहीं उत्तराखंड सरकार द्वारा संबंधित गांवों के जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रारंभिक स्तर पर आवश्यक चिकित्सा उपकरण प्रदान किए जाएंगे। उपभोग के आधार पर प्रत्येक छह माह में दवाइयों एवं अन्य सामग्रियों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। आपातकालीन परिस्थितियों में निकासी, दूरसंचार सहायता तथा उपकरणों के स्वामित्व एवं आवश्यक प्रतिस्थापन की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार द्वारा निभाई जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि स्वस्थ सीमा अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में निवासरत नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। यह न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि सीमावर्ती गांवों में विश्वास, सुरक्षा और स्थायित्व को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि सरकार सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यह एमओयू उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर आईटीबीपी अधिकारियों ने जानकारी दी कि आई टी बी पी एवं उत्तराखंड सरकार के मध्य में पूर्व में स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति हेतु किए गए एमओयू की वर्तमान स्थिति के अनुसार नवंबर 2024 से 25 प्रतिशत आपूर्ति ट्रायल आधार पर तथा मार्च 2025 से 100 प्रतिशत आपूर्ति प्रारंभ की गई है। इस व्यवस्था के अंतर्गत जीवित भेड़/बकरी, जीवित मुर्गा, हिमालयन ट्राउट मछली, ताजा दूध, पनीर एवं टीपीएम जैसे उत्पादों की खरीद विभिन्न सहकारी संस्थाओं के माध्यम से की जा रही है। अब तक लगभग 3,79,650.23 किलोग्राम एवं 3,25,318.72 लीटर उत्पादों की खरीद की जा चुकी है, जिसकी कुल अनुमानित लागत ₹11.94 करोड़ से अधिक है। इस पहल से राज्य के पशुपालकों, मत्स्य पालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है, साथ ही स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायता मिल रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने, स्थानीय नागरिकों को आजीविका से जोड़ने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में स्थायित्व सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में वाइब्रेट/बॉर्डर ग्रामों से वर्ष 2026 के लिए स्थानीय उत्पादों की प्रस्तावित खरीद का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। इसके अंतर्गत जीवित भेड़/बकरी की 4,00,000 किलोग्राम मात्रा की खरीद 13 करोड़ रुपये में, जीवित मुर्गे की 2,50,000 किलोग्राम खरीद 4 करोड़ रुपये में तथा हिमालयन ट्राउट मछली की 82,000 किलोग्राम खरीद 3.90 करोड़ रुपये में प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त 21,302 किलोग्राम पनीर की खरीद 0.79 करोड़ रुपये, 4,73,532 लीटर ताजे दूध की खरीद 3.3 करोड़ रुपये तथा 1,40,018 लीटर टीपीएस की खरीद 1.5 करोड़ रुपये में की जाएगी। MoU के उपरांत 9,85,391 किलोग्राम सब्जियों की खरीद 2.77 करोड़ रुपये तथा 6,20,228 किलोग्राम फलों की खरीद 3.50 करोड़ रुपये अनुमानित है। इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग 7,53,302 किलोग्राम, 6,13,550 लीटर तथा MoU के उपरांत 16,05,619 किलोग्राम उत्पादों की खरीद की जाएगी, जिसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 32.76 करोड़ रुपये है।

इस अवसर पर जानकारी दी गई कि आगामी एमओयू एवं प्रस्तावित समझौतों के अंतर्गत, स्थानीय पशुपालकों से नॉन-वेज उत्पादों की सीधी खरीद प्रक्रिया को सुदृढ़ करने हेतु समझौता किया जाना प्रस्तावित है, जिससे मध्यस्थों की भूमिका समाप्त हो सके और उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो। इसके साथ ही उत्तराखंड टूरिज्म डिपार्टमेंट के साथ किए गए हेलीपैड समझौते के अंतर्गत अब तक कुल 221 हेली लैंडिंग सफलतापूर्वक कराई जा चुकी हैं, जिससे सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में संपर्क और आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया है।

भविष्य में किए जाने वाले अन्य समझौतों के तहत, भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा उत्तराखंड राज्य में प्रथम चरण में 108 सीमावर्ती गांवों की पहचान की गई है। इन गांवों में पब्लिक हेल्थ सेंटर (पीएचसी) एवं पशु चिकित्सा केंद्रों की दूरी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त स्थानीय किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु स्थानीय फल एवं सब्जियों की खरीद के लिए एमओयू किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही राज्य की सहकारी चीनी मिलों से उत्तम गुणवत्ता की चीनी की खरीद हेतु भी समझौता प्रस्तावित है। दुर्गम क्षेत्रों में त्वरित एवं प्रभावी आवागमन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आईटीबीपी द्वारा UCADA हेलीकॉप्टर सेवाओं के उपयोग हेतु एमओयू किया जाना भी प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह पहल वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को प्रभावी रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को व्यवहारिक धरातल पर साकार कर रही है। Point to Point Model के माध्यम से किसानों से सीधी खरीद सुनिश्चित की गई है, जिससे 550 से अधिक सीमावर्ती निवासी लाभान्वित हुए हैं और ठेकेदार एवं दलाल प्रणाली को पूर्णतः समाप्त करते हुए किसी भी प्रकार के middle man की भूमिका नहीं रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ है तथा पूरे वर्ष ऑर्गेनिक, ताज़ी एवं निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जिसमें बरसात एवं सर्दियों जैसे कठिन मौसम भी शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले नॉन-वेज, फल, सब्ज़ी एवं दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता से न केवल उपभोक्ताओं को लाभ मिला है, बल्कि उत्पादकों की आय में भी वृद्धि हुई है।इसके साथ ही यह पहल रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध हो रही है, क्योंकि स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी अवसर प्राप्त हो रहे हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह व्यवस्था अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है। समग्र रूप से यह पहल 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में से 10 लक्ष्यों की सफल प्राप्ति में योगदान देती है, जो इसे सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से एक प्रभावशाली और सतत मॉडल बनाती है।

इस अवसर पर सचिव डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम, आईजी आईटीबीपी संजय गुंज्याल व आईटीबीपी के अधिकारी उपस्थित रहे।

छोटे राज्यों की श्रेणी में पहला स्थान, मुख्यमंत्री धामी ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तैयारी सूचकांक (Export Preparedness Index – EPI) 2024 में उत्तराखंड ने छोटे राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कर देशभर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। यह उपलब्धि राज्य की निर्यातोन्मुख नीतियों, बेहतर कारोबारी माहौल और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे का परिणाम मानी जा रही है।

*सीएम धामी ने दी प्रदेशवासियों को बधाई*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में छोटे राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड का शीर्ष स्थान प्राप्त करना राज्य के लिए गर्व का विषय है। यह हमारी सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात को बढ़ावा देने की सतत कोशिशों का परिणाम है। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड के प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ें और राज्य की अर्थव्यवस्था और सशक्त हो।

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा अर्जित होती है, बल्कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी बढ़ती है और व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलती है।
उत्तराखंड का यह शीर्ष स्थान राज्य को निवेश और औद्योगिक विकास के नए अवसरों की ओर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।

उत्तरायणी कौथिग बना ‘वोकल फॉर लोकल’ और एक भारत, श्रेष्ठ भारत की सशक्त मिसाल: पुष्कर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज लखनऊ, उत्तर प्रदेश में पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग में सम्मिलित हुए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्वतीय महापरिषद, लखनऊ द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग के शुभारम्भ अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उत्तरायणी, मकर संक्रांति एवं घुघुतिया पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे माताओं-बहनों, वरिष्ठजनों एवं युवाओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि उत्तरायणी केवल लोकपर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और जड़ों से जुड़ाव का सशक्त प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में आयोजित यह कौथिग उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का अद्भुत मंच है। लोकगीत, लोकनृत्य, लोकभूषा, हस्तशिल्प एवं कुटीर उद्योगों की झलक न केवल हमारी परंपराओं को जीवित रखती है, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ संकल्प को धरातल पर उतारने का सशक्त उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने पर्वतीय महापरिषद के 25 वर्षों के सांस्कृतिक, सामाजिक और सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने उत्तर प्रदेश में रह रहे हजारों उत्तराखंडवासियों को एक सूत्र में बांधकर उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का उल्लेखनीय कार्य किया है। रजत जयंती वर्ष में प्रवेश करना संस्था की तपस्या और समर्पण का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने लखनऊ से अपने भावनात्मक संबंधों को साझा करते हुए कहा कि यह शहर उनकी कर्मभूमि रहा है, जहाँ से उन्होंने जनसेवा का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में लखनऊ आना उनके लिए अपनी कर्मभूमि को नमन करने के समान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति, आस्था और सभ्यता को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित कर रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और अयोध्या में श्रीराम मंदिर जैसे ऐतिहासिक कार्य इसी दृष्टि का परिणाम हैं। ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ अभियान ने देश की विविध संस्कृति को एक सूत्र में पिरोया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी विज़न के अनुरूप उत्तराखंड सरकार देवभूमि के विकास और विरासत को साथ लेकर चल रही है। केदारनाथ-बद्रीनाथ मास्टर प्लान, केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना कॉरिडोर, गोलू जी, विवेकानंद एवं शारदा कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति को नई भव्यता मिल रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रखा गया है। नई नीतियों के परिणामस्वरूप राज्य वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर हब और फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। ‘वेड इन उत्तराखंड’ और शीतकालीन पर्यटन अभियानों से पर्यटन एवं आर्थिकी को नया बल मिला है।

ग्राम्य विकास की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि होम-स्टे योजना, लखपति दीदी, सौर स्वरोजगार योजना, एक जनपद–दो उत्पाद और हाउस ऑफ हिमालयाज जैसे प्रयासों से गांवों की खुशहाली सुनिश्चित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय की तुलना में आज उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था 26 गुना बढ़ चुकी है। प्रतिव्यक्ति आय 17 गुना बढ़कर ₹2,74,064 तक पहुंच गई है। राज्य का बजट ₹4,000 करोड़ से बढ़कर ₹1 लाख करोड़ के पार हो गया है। बिजली उत्पादन 4 गुना बढ़ा है, सड़कों की लंबाई दोगुनी हुई है और 10 सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। मातृ मृत्यु दर में 12% की कमी आई है।

उन्होंने बताया कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत अब तक 1 लाख 68 हजार महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 44% रिवर्स पलायन हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में उत्तराखंड अग्रणी राज्यों में है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार देवभूमि की अस्मिता, सुरक्षा और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सख्त धर्मांतरण विरोधी एवं दंगा विरोधी कानून लागू किए गए हैं। अब तक 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई है। ऑपरेशन कालनेमी के तहत सनातन धर्म को बदनाम करने वालों पर कार्रवाई हुई है। 250 से अधिक अवैध मदरसे सील किए गए हैं और 500 से अधिक अवैध ढांचे ध्वस्त किए गए हैं। 1 जुलाई 2026 के बाद केवल सरकारी सिलेबस वाले मदरसे ही संचालित होंगे।

उन्होंने कहा कि सख्त भू-कानून लागू कर देवभूमि को माफियागिरी से सुरक्षित किया जा रहा है। समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है। नकल विरोधी कानून से अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा गया है और पिछले साढ़े चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां मिली हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यही नया उत्तराखंड है—जहाँ विकास, विश्वास और अवसर साथ-साथ हैं। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के “विकल्प रहित संकल्प” को दोहराते हुए सभी से सहयोग और आशीर्वाद की अपील की।

कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारी व बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी वह स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

सीएस वर्धन ने सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों की विस्तार से जानकारी ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने देहरादून जनपद में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत स्किल हब सहसपुर का दौरा किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों की विस्तार से जानकारी ली एवं प्रशिक्षण पा रहे छात्र-छात्राओं से बातचीत की।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में प्रदेश के सभी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के छात्र छात्राओं को भ्रमण कराया जाए। मुख्य सचिव ने क्षमता से कम छात्रों के प्रशिक्षण पर नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को एक माह में पूर्ण क्षमता का उपयोग किया जाए।

मुख्य सचिव ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में संचालित कोर्स को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की बात भी कही। उन्होंने विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ ही सम्बन्धित देश का लिविंग और वर्किंग कल्चर की जानकारी भी प्रशिक्षुओं को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण पा रहे छात्र – छात्राओं से बातचीत कर उनके अनुभवों और भावी योजनाओं पर चर्चा की एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

निदेशक कौशल विकास एवं सेवायोजन संजय कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून जनपद में कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग द्वारा स्किल हब सहसपुर की स्थापना की गयी है। रिकल हब सहसपुर में राज्य के युवाओं को देश में आईटी०आई० उत्तीर्ण प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार से जोड़ने के उददेश्य से उच्च स्तर का तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करने एवं विदेश रोजगार से जोडने के लिये आवश्यक विदेशी भाषा का प्रशिक्षण प्रदान करते हुये विभिन्न आरएएप के माध्यम से विदेश में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा गो है। स्किल हब सहसपुर के अंतर्गत सेन्टर ऑफ ऐक्सीलेस एवं विदेश रोजगार प्रकोष्ठ है। वर्तमान में विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा मुख्यत नर्सिंग, केयर गिवर एव आतिथ्य के क्षेत्र में जापान एवं जर्मनी में राज्य के युवाओं को सेवायोजित किये जाने का कार्य किया जा रहा है। उक्त युवाओं को डोमेन प्रशिक्षण राज्य के नर्सिंग कॉलेज एव होटल मैनेजमेंट इन्स्टीयूट द्वारा दिया जा रहा है तथा प्रकोष्ठ द्वारा स्किल हब सहसपुर में आवासीय विदेशी भाषा का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, निदेशक कौशल विकास एवं सेवायोजन संजय कुमार, संयुक्त निदेशक अनिल सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।