धाकड धामी की टीम युवा जोश और अनुभव से है लबरेज

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव-2022 के लिए भाजपा ने अपने 59 रणबांकुरो का ऐलान कर दिया है। विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के महारथियों का ऐलान होती इस बात पर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि आखिर प्रत्याशी चयन में किस नेता की चली है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के प्रत्याशियों के चयन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी की युवा छाप दिख रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी युवा नेतृत्व के प्रतीक के रूप में खुद खटीमा से चुनाव मैंदान में हैं। वहीं सीएम पुष्कर सिंह धामी के करीबी रहे सुरेश गढ़िया, दुर्गेश्वर लाल समेत 15 युवाओं को भाजपा ने मैदान में उतारा है।
भाजपा शुरू से धामी को युवा नेतृत्व के रूप में पेश करती आ रही है। धामी को धाकड़ बल्लेबाज की उपमा दे चुके भाजपा हाईकमान ने उम्मीदवार तय करने में धामी को युवा चेहरे चुनने की पूरी छूट दी। सूत्रों के अनुसार पार्टी द्वारा कराए गए सर्वें में कई टिकट काटने की सिफारिश की गई थी। भाजपा ने बुजुर्गाे के टिकट काटने में भले ही देर नहीं लगाई, लेकिन युवाओं पर कैंची चलाने में हिचकी है।
कपकोट में गढिया पहली बार चुनाव मैदान में उतर रहे है। जबकि भाजपा ने युवा दुर्गेश लाल पर विश्वास जताते हुए उसे पार्टी से टिकट दिया है। 2017 में वे निर्दलीय चुनाव लड़े थे। इसके बाद कुछ समय पहले ही कांग्रेस ने अपनी पार्टी में ज्वाइन कराया था। कांग्रेस से टिकट न मिलता देख वे गुरुवार को ही भाजपा में शामिल हुए और टिकट ले गए। द्वाराहाट से उम्मीदवार बनाए गए अनिल शाही ने भी चौंकाया है। शाही को भी भाजपा ने युवा चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया है। भाजपा के युवा उम्मीदवारों में अगला नाम देवप्रयाग से विनोद कंडारी और सितारगंज सौरभ बहुगुणा का नाम है। वर्ष 2017 की जंग में कामयाब रहे कंडारी और बहुगुणा पर भाजपा ने दोबारा विश्वास जताया है। इस कड़ी आगे वर्तमान विधायक भेल रानीपुर से आदेश चौहान, रुड़की से प्रदीप बत्रा, श्रीनगर से धन सिंह रावत, लैंसडौन से दिलीप रावत, भीमताल राम सिंह कैड़ा भी धामी की यूथ टीम का हिस्सा है।

सुबह आये और 2 घंटे में भाजपा ने कर दिया टिकट कंफर्म

उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जहां भाजपा हाईकमान के द्वारा प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया गया। वहीं 59 प्रत्याशियों की पहली सूची में 10 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे गए है। उत्तराखंड भाजपा की महिला प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी की पुत्री रितु खंडूरी का टिकट काटा जाना चर्चाओं का विषय बना हुआ है। वहीं विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान का भी टिकट काटा गया।

1- थराली से मुन्नी देवी का टिकट काटकर भोपाल राम टम्टा को दिया गया है।
2- कर्णप्रयाग से सुरेंद्र सिंह नेगी का टिकट काटकर अनिल नौटियाल को दिया गया है।
3- खानपुर से कुंवर प्रणव चौंपियन का टिकट काटकर रानी देवयानी को दिया गया है।
4- यमकेश्वर से ऋतु खंडूड़ी का टिकट काटकर रेणु बिष्ट को दिया गया है।
5- पौड़ी से मुकेश कोली का टिकट काटकर राजकुमार पोरी को दिया गया है।
6- गंगोलीहाट से मीना गंगोला का टिकट काटकर फ़क़ीर राम टम्टा को दिया गया है।
7- कपकोट से बलवंत भोंर्याल का टिकट काटकर सुरेश गड़िया को दिया गया है।
8- द्वाराहाट से महेश नेगी का टिकट काटकर अनिल साही को दिया गया है।
9- अल्मोड़ा से रघुनाथ सिंह चौहान का टिकट काटकर कैलाश शर्मा को दिया गया है।
10- काशीपुर से हरभजन सिंह चीमा का टिकट काटकर त्रिलोक सिंह चीमा को दिया गया है।

वहीं इन विधानभाओं में भाजपा ने आज टिकट जारी कर दिया है।
1 पुरोला – दुर्गेश लाल
2 यमुनोत्री – केदार सिंह रावत
3 गंगोत्री – सुरेश चौहान
4 बद्रीनाथ – महेंद्र भट्ट
5 थराली – गोपाल राम टम्टा
6 कर्णप्रयाग – अनिल नोटियाल
7 केदारनाथ – अभी नही
8 रुद्रप्रयाग – भरत चौधरी
9 घनसाली – शक्ति लाल शाह
10 देवप्रयाग – विनोद कंडारी
11 नरेन्द्र नगर – सुबोध उनियाल
12 प्रतापनगर – विजय सिंह पँवार
13 टिहरी – अभी नही
14 धनौल्टी – प्रीतम पंवार
15 चकराता – राम शरण नौटियाल
16 विकासनगर – मुन्ना सिंह
17 सहसपुर – अभी नहीं
18 धर्मपुर – विनोद चमोली
19 रायपुर – उमेश शर्मा काऊ
20 राजपुर – खजान दास
21 कैंट – सविता कपूर
22 मसूरी – गणेश जोशी
23 डोईवाला – अभी नही
24 ऋषिकेश – प्रेमचन्द अग्रवाल
25 हरिद्वार – मदन कौशिक
26- भेल रानीपुर – आदेश चौहान
27- ज्वालापुर – सुरेश राठौर
28 भगवानपुर – मास्टर सत्यपाल
29 झबरेड़ा – अभी नही
30 पिरान कलियर – अभी नही
31 रुड़की – प्रदीप बत्रा
32 खानपुर – रानी देवयानी
33 मंगलौर – दिनेश पवार
34 लक्सर – संजय गुप्ता
35- हरिद्वार ग्रामीण – यतीश्वरानंद
36 यमकेश्वर – रेनू बिष्ट
37 पौड़ी – राजकुमार पोरी
38 श्रीनगर – डॉ धन सिंह रावत
39 चौबट्टाखाल – सतपाल महाराज
40 लैंसडाउन – दिलीप रावत
41 कोटद्वार – अभी नही
42 धारचूला – धन सिंह धामी
43 डीडीहाट – बिशन सिंह चुफाल
44 पिथौरागढ़ – चंद्रा पंत
45 गंगोलीहाट – फकीर राम टम्टा
46 कपकोट – सुरेश गरिया
47- बागेश्वर – चंदन राम दास
48 द्वाराहाट – अनिल शाही
49 सल्ट – महेश जीना
50 रानीखेत – अभी नही
51 सोमेश्वर – रेखा आर्य
52 अल्मोड़ा – कैलाश शर्मा
53 जागेश्वर – अभी नही
54 लोहाघाट – पूरण सिंह फर्त्याल
55 चम्पावत – कैलास गहतोड़ी
56 लालकुआं – अभी नही
57 भीमताल – राम सिंह कैड़ा
58- नैनीताल – सरिता आर्या
59- हल्द्वानी – अभी नही
60 कालाढूँगी – बंशीधर भगत
61 रामनगर – दिवान सिंह बिष्ट
62 जसपुर – शैलेन्द्र मोहन सिंघल
63- काशीपुर – त्रिलोक चीमा
64- बाजपुर – राजेश कुमार
65 गदरपुर – अरविंद पांडेय
66 रुद्रपुर – अभी नही
67 किच्छा – राजेश शुक्ला
68- सितारगंज – सौरभ बहुगुणा
69 नानकमत्ता – डॉ प्रेम सिंह राणा
70 खटीमा – पुष्कर सिंह धामी

जनरल बिपिन रावत के भाई कर्नल विजय रावत ने भाजपा की सदस्यता ली

दिवंगत जनरल बिपिन रावत के भाई कर्नल विजय रावत (सेवानिवृत्त) भाजपा में शामिल हो गए हैं। इससे पहले उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से दिल्ली में मुलाकात की।
बुधवार को विजय रावत भाजपा में शामिल हो गए। इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री धामी से भी मुलाकात की थी। इस दौरान विजय रावत ने कहा भी कि हमारे परिवार की विचारधारा बीजेपी से मिलती है। मैं बीजेपी के लिए काम करना चाहता हूं। अगर बीजेपी कहेगी तो मैं चुनाव भी लड़ूंगा।
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बिपिन रावत व उनके परिवार द्वारा की गई राष्ट्रसेवा को हमारा नमन है। मैं सदैव उनके सपनों के अनुरूप उत्तराखंड बनाने हेतु कार्य करता रहूंगा। गौरतलब है कि देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत समेत अन्य 12 अन्य लोगों का आठ दिसंबर 2021 को कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया था।

त्रिवेन्द्र की हाईकमान को चिट्ठी, कहा-चुनाव नही लड़ना चाहता

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि वह इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच यह संकेत दिए हैं। जिसके बाद यह संभावना जताई जा रही है कि वह डोईवाला विधानसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे।

डोईवाला से भाजपा का प्रत्याशी अब कौन होगा
बुधवार को उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच कहा कि इस बार उन्हें चुनाव लड़ाना है। पार्टी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे रही है। पार्टी सूत्र संकेत दे रहे हैं कि उन्हें भाजपा का प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर जताई चुनाव न लड़ने की इच्छा भी जताई है। अब इसके बाद डोईवाला से भाजपा का प्रत्याशी कौन होगा, इसे लेकर संस्पेंस बन गया है।

कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश पहुंचे उत्तराखंड, हुआ गर्मजोशी से स्वागत

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवम उत्तराखंड कांग्रेस के पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश का कांग्रेस भवन में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस अवसर पर पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश ने कहा कि जहां एक तरफ चुनाव आयोग ने बड़ी रैली पर रोक लगाई हुई है। वहीं बूथ प्रबंधन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों महंगाई बेरोजगारी स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं पर सरकार की नाकामी को घर घर पहुंचाए। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवम पर्यवेक्षक मोहन प्रकाश का स्वागत करते हुएप्रदेश सचिव महेश जोशी ने कहा कि मोहन प्रकाश के अनुभव एवम कुशल चुनाव प्रबंधन से कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
इस मौके पर प्रदेश संगठन महामंत्री मथुरादत्त जोशी, प्रवक्ता गरिमा दसोनी, लाल चंद शर्मा, महेश जोशी, प्रवीन त्यागी, सूरत सिंह नेगी, प्रतिमा सिंह, शांति रावत आचार्य नरेश आनंद नौटियाल, दर्शन लाल ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर राहुल पंवार रोबिन, नीरज नेगी, मनीष वर्मा, पुनीत सिंह, संदीप राणा, मनोज पटवाल, राजीव शर्मा, मनीष ममगाई, आदि उपस्थित थे।

बैकफुट में हरक सिंह, बोले हरीश रावत से सौ बार मांगूगा माफी

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा से निष्कासित किए गए पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। हरक सिंह रावत के साथ उनकी बहू अनुकृति भी कांग्रेस जॉइन करेंगी। रावत अपनी बहू के साथ आज दिल्ली में पार्टी के बड़े नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस का हाथ थामेंगे। वहीं हरक सिंह रावत ने मंगलवार को मीडिया से कहा कि मैंने आज सुबह कांग्रेस पार्टी के नेताओं से बात की है। वह मुझे जल्द ही अपना निर्णय बताएंगे और मैं उसी के आधार पर अपने फैसले लूंगा। उन्होंने कहा कि वह हरीश रावत मेरे बड़े भाई हैं। मैं उनसे सौ बार माफी मांग सकता है। मैं उत्तराखंड का विकास चाहता हूं।

मैं कहीं भी किसी के पीछे जाने वाला नहीं हूं- केदार सिंह
यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत भाजपा छोड़ने के कयासों पर विराम लगाया है। हरक सिंह रावत प्रकरण के बाद से केदार सिंह रावत के पार्टी छोड़ने के सोशल मीडिया में कयास लगाए जा रहे थे। केदार सिंह रावत ने सोशल मीडिया में वीडियो जारी कर कहा कि मैं कहीं भी किसी के पीछे जाने वाला नहीं हूं। हरक सिंह प्रकरण की आंच युमनोत्री विधान सभा क्षेत्र तक पहुंची है। हरक सिंह के भाजपा से निष्कासन के बाद यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत के भी पार्टी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। जिस पर केदार सिंह रावत ने सोशल मीडिया में वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है। वीडियो में केदार सिंह रावत कह रहे हैं कि मुझे भाजपा के नेतृत्व पर पूरा विश्वास है। जब भी प्रदेश में उम्मीदवारों की सूची जारी होगी तो उसमें मेरा भी नाम होगा। सोशल मीडिया पर अनर्गल चर्चाएं चल रही हैं। मैं कहीं भी किसी के पीछे जाने वाला नहीं हूं। और न जाने का कोई कारण है।

हरक एपीसोड के पूरा होने के बाद होगी टिकटों की घोषणा
विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में अब टिकटों की घोषणा हरक एपीसोड के पूरा होने के बाद ही होगी। वहीं पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी ने फंसी हुई सीटों पर एक बार फिर मंथन बैठक कर पैनल तैयार कर लिए हैं, जिन्हें मंगलवार को केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) को सौंपा जाएगा।

धामी की इनस्विंग व हरीश की गुगली से बैकफ़ुट पर विस्फोटक बल्लेबाज

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के भाजपा से 6 साल के लिए बर्खास्त होने के बाद देहरादून से लेकर दिल्ली तक यही चर्चा है कि हरक सिंह रावत कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। लेकिन हरक सिंह रावत की कांग्रेस में शामिल होने की राह इतनी आसान नजर नहीं आती। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सीधे तौर पर कांग्रेस आलाकमान को कह दिया है कि हरक सिंह रावत को पार्टी में शामिल कराना कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ना जैसा होगा। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सीधे तौर पर कांग्रेस आलाकमान को कह दिया है कि हरक सिंह रावत को पार्टी में शामिल कराना कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ना जैसा होगा।
हरीश रावत ने कहा है कि हरक सिंह रावत लोकतंत्र के हत्यारे हैं। जो एक चलती हुई सरकार को गिरा कर 2016 में भाजपा में शामिल हुए थे। आज जब भाजपा में उनकी प्रेशर पॉलिटिक्स नहीं चल रही है तो वह कांग्रेस में आना चाहते हैं। हरीश रावत ने सीधे शब्दों में कांग्रेस आलाकमान से कहा है कि अगर हरक सिंह रावत को कांग्रेस में लिया जाता है तो पार्टी को इसका प्रदेश और देश के कई राज्यों में नुकसान होगा। ऐसे में हरीश रावत के नाराज रहने के चलते हरक सिंह रावत की कांग्रेस में एंट्री इतनी आसान नहीं है।

हरक सिंह भाजपा और मंत्रिमंडल से बर्खास्त

भाजपा ने बड़ा कदम उठाते हुए काबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर दिया। साथ ही छह साल के लिए पार्टी से भी निष्कासित कर दिया। सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आज यह कार्रवाई की गई। हरक पिछले काफी दिनों से विधानसभा चुनाव में मनमाफिक टिकट के लिए दबाव की राजनीति कर रहे थे। उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं को देखते हुए आज भाजपा ने यह कदम उठा लिया। अपनी बहु अनुकृति रावत के लिए लैंसडौन सीट से टिकट की मांग खारिज होने से नाराज हरक आज दोपहर दिल्ली रवाना हो गए थे। माना जा रहा था कि हरक कांग्रेस में शामिल हो सकते है।
सूत्रों के अनुसार पार्टी के नेताओं ने हरक से बातचीत का प्रयास भी किया, लेकिन उनके बढ़ते कदमों को थमते न देख भाजपा ने कड़ा फैसला लेने का निर्णय कर लिया। देर रात संपर्क करने पर सीएम कार्यालय ने हरक की मंत्रीमंडल से बर्खास्तगी की पुष्टि की।

भाजपा के अनुशासन की बार बार मखौल उड़ा रहे थे हरक
कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत पिछले पाँच सालों से बार बार भारतीय जनता पार्टी के अनुशासन की मखौल उड़ा रहे थे। यही कारण रहा कि अब कांग्रेस में जाने की चर्चाओं के बीच भाजपा को उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा। दरअसल डॉ हरक सिंह रावत पिछले पांच सालों में कई बार पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके थे।
डॉ हरक सिंह रावत को लेकर भाजपा के ग्रास रुट कार्यकर्ताओं में पहले से ही नाराजगी थी। उनके साथ ही कॉंग्रेस से आये नेताओ को पार्टी में ज्यादा ही तवज्जो दिए जाने से पार्टी में अंदरखाने खासी नाराजगी थी। आम कार्यकार्ता बाहर से आए नेताओं को कभी भी तवज्जो नहीं चाहते थे।
इसके बावजूद डॉ हरक सिंह रावत और उनके सहयोगी पार्टी को पांच सालों तक चलाते रहे। भाजपा नेतृत्व ने हर सम्भव कोशिश की की हरक सिंह रावत को पार्टी से जोड़ा रखा जाए लेकिन अब पानी सर से ऊपर होने और उनके कांग्रेस में शामिल होने के निर्णय के बाद पार्टी को उनके खिलाफ कदम उठाना पड़ा।

कैबिनेट छोड़ इस्तीफा देकर निकल गए थे
डॉ हरक सिंह रावत कुछ दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित हो रही कैबिनेट की बैठक छोड़ निकल गए थे। उनकी नाराजगी का कारण उस समय कोटद्वार मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव न आना था लेकिन जानकारों का कहना है कि हरक उस वक्त भी लैंसडाउन सीट से अपनी बहू के लिए टिकट की मांग कर रहे थे। हरक की नाराजगी की वजह से भाजपा में हडकंप मच गया था और 24 घंटे तक हरक को मानाने के प्रयास किए जाते रहे। मुख्यमंत्री और हरक के बीच वार्ता के बाद उस मामले का अंत हो पाया था।

बहू के लिए टिकट मांग दिखा रहे थे बागी तेवर
अपने साथ लैंसडोन से बहू अनुकृति गुसाईं के लिए टिकट की मांग को लेकर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत लगातार बागी तेवर अपनाए हुए थे। भाजपा कोर कमेटी की बैठक में पहुंचने की बजाय दिल्ली के चक्कर काट रहे थे। पार्टी पर लगातार दबाव बनाए हुए थे। हरक सिंह रावत हमेशा दबाव की राजनीति के लिए जाने जाते रहे हैं।
वे भाजपा पर लगातार हर बार किसी न किसी चीज के लिए दबाव बनाए हुए थे। पहले उन्होंने कोटद्वार मेडिकल कालेज के नाम पर कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देने की धमकी देकी र भाजपा को असहज किया। हालांकि उस दौरान हरक को मना लिया गया। मेडिकल कालेज को मंजूरी देने के साथ 25 करोड़ की स्वीकृति भी दी गई।
इसके बाद भी हरक पार्टी पर दबाव बनाए हुए थे। इस बार दबाव अपने लिए केदारनाथ सीट और बहू अनुकृति गुसाईं के लिए लैंसडोन सीट का बनाया जा रहा था। भाजपा में बात न बनती देख, वो कांग्रेस में बहू के लिए विकल्प तलाशने लगे। उनकी यही तलाश उन पर भारी पड़ी।

भाजपा का कड़ा संदेश
भाजपा के इस फैसले के अनुशासन के लिहाज से कड़ा संदेश माना जा रहा है। पिछले काफी समय से हरक बगावती तेवर अपनाए हुए थे। पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में इस्तीफे की धमकी दे चुके रावत लगातार कांग्रेस नेताओं के संपर्क में भी थे। हरक के आगे हर बार घुटने टेकने से खुद भाजपा के भीतर पसंद नहीं किया जा रहा था। हरक को बर्खास्त कर भाजपा ने साफ कर दिया है कि अब वो किसी दबाव में आने वाली नहीं है।

20 सीटों पर उम्मीदवार बदलने के मूड में भाजपा

उत्तराखंड विधानसभा के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करने में भाजपा नेतृत्व को तगड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। हालांकि सूत्र बता रहे हैं कि चुनाव समिति की बैठक में 50 विधानसभा क्षेत्रों से आए नामों पर तकरीबन सहमति हो चुकी है। लेकिन 20 विधानसभा सीटों पर माथापच्ची के बाद असमंजस की स्थिति है। अब इसे केंद्रीय नेतृत्व और संसदीय बोर्ड पर छोड़ा गया है।
प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में विधानसभा वार आए नामों पर विचार हुआ। मंत्रियों, वरिष्ठ विधायकों की सीटों पर एक-एक नाम, ऐसी सीटें जिसमें पार्टी के पास सकारात्मक फीड बैक है पर एक से दो नाम का पैनल बनाया गया है। जिन सीटों पर पार्टी की स्थिति कमजोर है या कांग्रेस के कब्जे वाली हैं, वहां तीन-तीन नामों के पैनल भेजे गए हैं। इन्हीं सीटों पर पार्टी सहमति के बिंदू नहीं पहुंच पाई है।

गढ़वाल मंडल विधानसभा सीट –
थराली- पूर्व विधायक स्व. मगन लाल शाह की पत्नी विधायक हैं और टिकट मांग रही हैं लेकिन पार्टी वहां ज्यादा मजबूत प्रत्याशी तलाश रही है।
पौड़ी-विधायक मुकेश कोली के खिलाफ पार्टी के खेमा लामबंद है। पार्टी सर्वे के नतीजे भी कोली के लिए सहज नहीं बताए जा रहे।
कोटद्वार-हरक सिंह रावत के कांग्रेस में लौटने के बाद स्थिति बदल गई है।
पुरोला-इस सीट पर कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं और भाजपा के पूर्व प्रत्याशी माल चंद कांग्रेस में चले गए हैं।
घनसाली-संगठन के सर्वे में विधायक शक्तिलाल शाह की स्थिति बहुत मजबूत नहीं बताई जा रही।
टिहरी-चर्चा है कि पार्टी इस सीट पर कांग्रेस से एक बड़े चेहरे को मैदान में उतार सकती है।
झबरेड़ा-पार्टी की सर्वे रिपोर्ट और कार्यकर्ताओं का फीड बैक विधायक देश राज कर्णवाल के अनुकूल नहीं माना जा रहा।
पिरान कलियर-यह सीट कांग्रेस के कब्जे वाली है और पार्टी अभी तय नहीं कर पा रही है कि किस चेहरे पर दांव लगाया जाए।
राजपुर रोड-इस सीट पर खजानदास विधायक हैं और इस बार पार्टी के भीतर सीट पर नए विकल्प की चर्चा हो रही है।
गंगोत्री-इस सीट पर पार्टी प्रत्याशी चयन को लेकर असमंजस में है। पूर्व विधायक की पत्नी टिकट मांग रही हैं।
भगवानपुर-इस सीट पर पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री सुबोध राकेश को प्रत्याशी बनाया था। लेकिन वह पार्टी छोड़कर बसपा में चले गए। पार्टी यहां मजबूत प्रत्याशी की खोज में है।

’कुमाऊं मडंल में ये सीटें फंसी’
नैनीताल-इस सीट पर संजीव आर्य विधायक थे, लेकिन पार्टी छोड़ने के बाद अब भाजपा को इस सीट पर टक्कर के प्रत्याशी की तलाश है। पार्टी कांग्रेस नेत्री सरिता आर्य को साधने की कोशिश कर रही है।
जागेश्वर-कांग्रेस के कब्जे वाली सीट पर पार्टी को मजबूत प्रत्याशी चाहिए।
अल्मोड़ा-इस सीट पर रघुनाथ सिंह चौहान विधायक हैं। क्षेत्र में पार्टी उनका विकल्प तलाश रही है।
रानीखेत-यहां कांग्रेस के करन माहरा विधायक हैं। भाजपा इस सीट पर मजबूत चेहरे की तलाश में है।
गंगोलीहाट-भाजपा की मीना गंगोला विधायक हैं। यहां भी पार्टी ज्यादा मजबूत विकल्प खोज रही है।
काशीपुर-काशीपुर में भाजपा विधायक हरभजन सिंह चीमा अपने बेटे को प्रत्याशी बनाना चाहते हैं। लेकिन पार्टी के अन्य दावेदार भी टिकट मांग रहे हैं।
बाजपुर-विधायक यशपाल आर्य के भाजपा छोड़ देने के बाद परिस्थितियां बदली हैं और पार्टी मजबूत विकल्प खोज रही है।
रामनगर-रामनगर सीट पर भी पार्टी को मजबूत विकल्प की तलाश है।
हल्द्वानी-इस सीट पर भी भाजपा में टिकट को लेकर मारामारी है।

डोईवाला सीट पर त्रिवेंद्र का नाम टॉप पर
सूत्रों के मुताबिक, डोईवाला विधानसभा सीट पर नामों का जो पैनल बनाया गया है उसमें पहले स्थान पर पूर्व मुख्यमंत्री व सिटिंग विधायक त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम बताया जा रहा है। लेकिन उनके नाम पर अंतिम फैसला पार्टी की बैठक और संसदीय बोर्ड में ही होगा।

भाजपा जल्‍द करेगी प्रत्‍याशियों की लिस्‍ट जारी

उत्तराखंड भाजपा मुख्यालय में पार्टी के प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक हुई। बैठक में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रत्याशी चयन को दावेदारों के पैनल पर चर्चा की गई। मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने शनिवार को कोर ग्रुप की बैठक के बाद कहा कि वह खटीमा से चुनाव लड़ेंगे। उन्‍होंने कहा कि विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी जल्‍द ही प्रत्‍याशियों की सूची भी जारी करेगी। बैठक खत्म होने के बाद केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी ने बताया कि बैठक में चुनाव की रणनीति पर चर्चा की गई और बदली परिस्थितियों में चुनाव प्रचार किस तरह होगा, इसकी रणनीति तय की गई। इसके अलावा चुनाव से सम्बंधित अन्य विषयों पर भी विमर्श किया गया। उधर, सूत्रों ने बताया कि बैठक में विधानसभा सीटों के लिए तैयार पैनल पर भी विमर्श हुआ और सूची को शार्टलिस्ट किया गया।

रविवार को पार्टी नेतृत्व को सौंपी जाएगी दावेदारों के पैनल की सूची
बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि दावेदारों के पैनल की सूची रविवार को दिल्ली में पार्टी नेतृत्व को सौंपी जाएगी। वहां रविवार को पार्टी के केंद्रीय नेताओं के साथ बैठक भी है। उन्होंने यह भी कहा कि हम अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन के मद्देनजर सभी 70 सीटों के लिए पैनल को अंतिम रूप दे दिया गया। प्रदेश भाजपा मुख्यालय में समिति की बैठक करीब डेढ़ घंटे चली। अब यह पैनल दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड को सौंपा जाएगा, जो टिकट का निर्धारण करेगा।
बैठक में केंद्रीय मंत्री और प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत व विजय बहुगुणा, भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा, प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र भंडारी व सुरेश भट्ट, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज व धन सिंह रावत, राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल आदि मौजूद हैं।