एकजुट होकर रमोला को जिताने का किया आह्वान

दिल्ली से ऋषिकेश विधानसभा सीट का टिकट लेकर मंगलवार शाम लौटे कांग्रेस प्रत्याशी जयेंद्र रमोला का विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। इस दौरान रमोला ने पार्टी हित में सभी से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
मंगलवार शाम कांग्रेस प्रत्याशी जयेंद्र रमोला का हरिपुरकला, रायवाला, नेपालीफार्म, श्यामपुर, लक्कड़घाट, गुमानीवाला शहीद स्मारक, आईडीपीएल सिटी गेट, काले की ढाल आदि स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से स्वागत किया। इसके बाद रमोला सीधे ऋषिकेश में रेलवे रोड स्थित कांग्रेस भवन पहुंचे। यहां भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी के साथ उनका स्वागत किया। कांग्रेस प्रत्याशी रमोला ने झंडा चौक स्थित प्राचीन भरत मंदिर में जाकर माथा टेका।
मौके पर कांग्रेस प्रदेश महासचिव और गढ़वाल मंडल प्रभारी सोशल मीडिया दीपक जाटव, महानगर अध्यक्ष महंत विनय सारस्वत, कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर राय, जगजीत सिंह, अखिलेश मित्तल, मदन मोहन कोठारी, तेजपाल पंवार, अलका क्षेत्री, अंशुल त्यागी, राधा रमोला, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र पाल पाठी, अजय धीमान, सौरभ वर्मा, विवेक तिवाडी, शिवा सिंह, रामप्रकाश भटालिए, योगेश शर्मा, विमला रावत आदि शामिल रहे।

कांग्रेस 4 से 5 विधानसभाओं के बदल सकती है प्रत्याशी

उत्तराखंड कांग्रेस से आज की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है कि सोमवार को कांग्रेस ने जिन 11 विधानसभाओं में अपने प्रत्याशी घोषित किये थे उनमें 4 से 5 सीटों में बदलाव किये जाने के संकेत मिल रहे है। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर आ रही है कि लगभग 4 से 5 सीटों पर कांग्रेस अपने प्रत्याशी को बदल सकती है। सूत्र बताते हैं कि इनमें लालकुआं, कालाढूंगी, ऋषिकेश और डोईवाला विधानसभा में प्रत्याशियों के नामों में बड़ा बदलाव हो सकता है। वहीं, हरीश रावत की भी सीट भी बदले जाने की चर्चा है। इसके पीछे रणजीत रावत का चुनाव लड़ने का अडिग इरादा बताया जा रहा है। हालांकि कांग्रेस से जुड़े सूत्र बतातें है कि अगर हरीश रावत की सीट बदली गई तो चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा, जिसका सही संदेश नही जायेगा।

उत्तराखंड में 1 फरवरी से राजनीतिक दल कर सकेंगे चुनावी रैली

कोविड संक्रमण के बीच चुनाव आयोग ने एक बार फिर राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों को कुछ राहत दी है। आयोग ने यह तय कर दिया है कि एक फरवरी से 12 फरवरी तक राजनीतिक दल या नेता अपनी जनसभाएं कर सकेंगे। दूसरी ओर, आयोग ने राजनीतिक दलों को खुले मैदान में अधिकतम 500 लोगों की मौजूदगी में वीडियो वाहन से प्रचार की अनुमति दे दी है।
लगातार बढ़ रहे कोविड संक्रमण के बीच चुनाव आयोग ने उत्तराखंड में सभी दलों, नेताओं की फिजिकल रैलियों, रोड शो पर रोक 31 जनवरी तक बढ़ा दी है। आयोग ने दलों व प्रत्याशियों को एक फरवरी से 12 फरवरी के बीच जनसभाएं करने की इजाजत दी है। ये जनसभाएं खुले स्थान पर करनी होंगी, जिनमें अधिकतम 500 या उस ग्राउंड की क्षमता के 50 प्रतिशत लोग ही शामिल हो सकेंगे।
वहीं आयोग ने डोर-टू-डोर प्रचार में भी राहत दी है। आयोग ने अब पांच के बजाए दस लोगों के साथ डोर-टू-डोर प्रचार की अनुमति दे दी है। चुनाव आयोग की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, कोई भी राजनैतिक दल या प्रत्याशी किसी भी खुले स्थान पर वीडियो वाहन की सहायता से प्रचार कर सकता है। यहां भी अधिकतम 500 या उस मैदान की क्षमता के 50 प्रतिशत लोग ही शामिल हो सकेंगे।

कांग्रेस ने 11 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की

सूत्रों के हवाले से उत्तराखंड से आज की बड़ी खबर। आज हुई सीईसी की बैठक में इन नामों पर लगी मोहर, सूची हुई जारी

डोईवाला- मोहित उनियाल शर्मा
कैंट- सूर्यकांत धस्माना
ऋषिकेश- जयेंद्र रमोला
ज्वालापुर- बरखा रानी
झबरेड़ा- वीरेंद्र जाती
खानपुर- सुभाष चौधरी
लक्सर- अंतरिक्ष सैनी
रामनगर- हरीश रावत
लालकुआं- संध्या डालाकोटी
कालाढूंगी- डॉ0 महेंद्र पाल
लैंसडौन- अनुकृति गुसाईं

11 सीटों पर पेंच फंसा, निर्णायक फैसला नही ले पा रही भाजपा

भारतीय जनता पार्टी शेष रह गई 11 सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझा पाई है। दो दिन से पार्टी से रणनीतिकार इन सीटों पर प्रत्याशियों के मंथन में जुटे हुए हैं लेकिन अभी तक सुयोग्य प्रत्याशी की तलाश पूरी नहीं हो पाई है। इधर पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत के भाई रिटायर कर्नल विजय रावत को भारतीय जनता पार्टी 2022 के चुनावों में डोईवाला या फिर कोटद्वार सीट से उतार सकती है। पार्टी में रावत को लेकर दो तीन दिनों से लगातार मंथन चल रहा है और जल्द अब इस संदर्भ में फैसला हो सकता है।
दरअसल रिटायर कर्नल विजय रावत ने कुछ दिन पूर्व ही दिल्ली में भाजपा का दामन थामा था और उसके बाद वह उत्तराखंड भी पहुंच गए हैं। पार्टी के सूत्रों ने बताया कि पार्टी के कई शीर्ष नेता कर्नल रावत को एक सैन्य चेहरे के रूप में विधानसभा चुनावों में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। उनके चुनाव लड़ने पर करीब करीब निर्णय हो चुका है लेकिन सीट को लेकर अभी पेच फंसा हुआ है।

कांग्रेस की सूची का इंतजार बड़ी वजह
पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि शेष बची 11 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान एक दो दिन में हो सकता है। उन्होंने बताया कि 11 में से कुछ टिकट कांग्रेस की सूची जारी होने के बाद तय होंगे जबकि कई पर एक से अधिक दावेदार होने की वजह से पेंच फंसा हुआ है। जबकि एक दो सीट डॉ हरक सिंह रावत के कांग्रेस में जाने की वजह से लटकी हुई है। ऐसे में इस सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान होने से पहले कांग्रेस पर भी पार्टी की नजर है।

यह दिल्ली नहीं है, उत्तराखंड है, यहां आप का कोई अस्तित्व नही-हरीश रावत

उत्‍तराखंड में आम आदमी पार्टी (आप) को लेकर पूर्व मुख्‍यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यहां तीसरी पार्टी के लिए कोई मौका नहीं है। पहले जो पार्टियां थीं, वह भी धीरे-धीरे गायब हो गई हैं। उत्‍तराखंड क्राति दल (उक्रांद) जिसका संघर्ष का इतिहास रहा है। लोगों ने उसे इतिहास की थैले में डाल दिया है। इसलिए यहां नई पार्टी के बारे में कोई सवाल नहीं है। उन्‍होंने कहा यह दिल्ली नहीं है। हरीश रावत ने कहा कि यह दिल्ली नहीं है, जहां लोग आएंगे, कुछ कहेंगे और हर जगह इसकी चर्चा होगी। उत्‍तराखंड की भौगोलिक स्थिति और सभी प्रकार की स्थितियों को समझना होगा। फिर नीति बनाने के लिए समय की जरूरत होती है। आप को वह समय देना होगा।
हरक सिंह रावत की कांग्रेस में वापसी पर हरीश रावत ने कहा कि यह अच्छा है कि वह पार्टी का हिस्सा हैं। पार्टी के भीतर निर्णय विभिन्न विचारों के आधार पर लिए जाते हैं। पार्टी हमेशा आगे देखकर निर्णय लेती है। पार्टी का निर्णय सर्वाेच्च होता है।

कर्नल विजय रावत ने केन्द्र सरकार के कार्यो को बताया बेहतर

दिवंगत सीडीएस जनरल विपिन रावत के भाई और हाल में ही भाजपा में शामिल सेवानिर्वित कर्नल विजय रावत ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पीएम मोदी की लीडरशिप और भाजपा की राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर वह पार्टी में आए हैं। उन्होने बताया कि वह लंबे समय से स्वास्थ्य कारणों से समाज में कार्य करने में अक्षम रहे लेकिन अब रजीनीति के माध्यम से प्रदेशवासियों और देश की सेवा के लिए वह तत्पर हैं।
इस अवसर पर कर्नल रावत ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्धारा भारतीय सेना के सम्मान के लिए उल्लेखनीय कार्य किए है। चाहे दशकों से लंबित वन रैंक वन पेशंन का लाभ पूर्व सैनिकों को दिलाने की बात हो, चाहे भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के लिए नए-नए साजो सामान मुहैया कराने की बात हो जिसमें आधुनिक तकनीक के साथ-साथ राफेल जैसे अत्याधुनिक विमान सेना को सुर्पुद कराया। मोदी ने देश की सीमाओं पर तैनात जवानो की जरूरत को समझा और उन्हे आधुनिकतम साझो-सामान से लैस किया। उन्होने कहा कि एक समय ऐसा था, सेना के अधिकारियों को सीमा पर तत्काल दुश्मन का जबाब देने के लिए भी दिल्ली की और देखना पड़ता था, लेकिन अब उन्हे मुंह तोड़ जबाब देने का पूरा अधिकार मिला हुआ है। मोदी ने सेना में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देते हुए स्थायी कमीशन के साथ महिलाओ की भर्ती बढाई गई।
उन्होने कहा कि हमारा प्रदेश दो-दो सीमावर्ती देशो से लगा हुआ है। ऐसे में अपनी सीमाओं की मजबूती के लिए भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत सड़कों का जाल विछाया जा रहा है। देश में शहीदों को सही सम्मान देने का काम भी कारगिल युद्ध के समय से ही अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने शुरू किया। इस मौके पर उन्होने प्रदेश के पूर्व सैनिको व सैनिक परिवारों व उत्तराखण्ड की जनता से विनम्र आग्रह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सैनिको व देश की रक्षा के लिए जो कार्य किये हैं वह हमारे देश का मान सम्मान बढाने वाले है। इसलिए समय की मांग है कि प्रदेश को विकास, सुरक्षा और समृद्धि देने के लिए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अधिक से अधिक मतदान से जिताना आवश्यक है।
इस अवसर पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सुरेश जोशी, बद्री केदार मंदिर समिति अध्यक्ष अजयेन्द्र अजय, राजीव तलवार, अजीत नेगी, हरीश चमोली समेत अनेक भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहे।

चुनाव आयोग ने प्रचार के लिए आज कुछ और ढील दी

देश में पांच चुनावी राज्यों में अभी रैलियों और सभाओं पर बैन नहीं हटाया जाएगा। चुनाव आयोग ने कोरोना के हालात की समीक्षा के बाद शनिवार को यह फैसला लिया है। आयोग ने रैलियों-सभाओं पर बैन 31 जनवरी तक बढ़ाया है।
8 जनवरी को पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने 15 जनवरी तक रैलियों और जनसभाओं पर रोक लगाई थी। कहा था कि रिव्यू के बाद फैसला लेंगे। 15 जनवरी को रिव्यू के बाद बैन 22 जनवरी तक बढ़ा दिया गया था।

आयोग ने बैन के साथ कुछ ढील भी दी
1. आयोग ने डोर-टू-डोर कैंपेन के लिए लोगों की संख्या 10 कर दी है, पहले यह 5 थी।
2. फेज वन के लिए राजनीति दलों या प्रत्याशियों की बैठक तय की गई खुली जगह पर 500 लोगों की लिमिट के साथ या गाइडलाइंस के मुताबिक ग्राउंड की क्षमता का 50ः की जा सकती है। यह 28 जनवरी से 8 फरवरी तक हो सकेंगी। फेज टू के लिए यह छूट एक फरवरी से 12 फरवरी तक रहेगी।
3. इनडोर मीटिंग के लिए लोगों की लिमिट 300 या गाइडलाइंस के मुताबिक हॉल की क्षमता का 50ः तय की गई है।
4. वीडियो वैन का प्रचार के लिए इस्तेमाल खुली जगहों पर किया जा सकता है। खुले स्थान पर वैन को देखने वाले 500 से ज्यादा या गाइडलाइंस के मुताबिक जगह की क्षमता का 50ः से ज्यादा नहीं हो सकते। इस दौरान ट्रैफिक और लोगों को कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

हरदा ने माफी के बाद ही दी कांग्रेस में हरक सिंह को एंट्री

हरक सिंह रावत की कांग्रेस में एंट्री हो चुकी है लेकिन यह एंट्री ऐसे ही नहीं हुई है। हरक सिंह रावत ने बकायदा माफीनामा लिखकर दिया है। हरक सिंह ने जनता से क्षमा याचना भी की और यह भी कहा कि हरीश रावत सरकार के आसपास भी बीजेपी की सरकार नहीं रही। आप भी पढ़े क्या कहा हरक सिंह रावत ने।
भाजपा नेताओं ने 2014 लोकसभा चुनावों में जनता से बहुत बड़े-2 वायदे कर “अच्छे दिनों” के सपने दिखाए। जनता से भाजपा ने वायदे किए थे कि महंगाई कम होगी, युवाओं को रोजगार मिलेगा, विदेशों से काला धन लाकर हर व्यक्ति को 15-15 लाख देंगे आदि। हमें व उत्तराखण्ड की महान जनता को भरोसा दिलाया कि डबल इंजन की सरकार बनने पर ये तमाम किए गए वायदों के साथ “पहाड़ों की जवानी व पहाड़ों का पानी” बर्बाद न होने देने का वायदा भी इन वायदों की इस सूची में जोड़ दिया। इन वायदों से मुझे उम्मीद जगी कि उत्तराखण्ड में पलायन की समस्या, बेरोजगारी व शिक्षा स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी दूर करने में केंद्र सरकार से विशेष सहायता मिलेगी।
भाजपा नेताओं ने 2016 में भी मुझे भरोसा दिलाया कि उत्तराखण्ड में भाजपा सरकार बनने पर तमाम समस्याओं को सुलझाने में केंद्र सरकार से विशेष सहायता मिलेगी। यही वायदे दोबारा 2017 के विधानसभा चुनावों में भी दोहराए गए। 2017 चुनावों में भाजपा सरकार बनने पर मैं इन वायदों को पूरा करने के लिए भाजपा के शीर्ष नेताओं से बार-२ आग्रह करता रहा जिसे हर बार यह कहकर टालते रहे कि विचार-विमर्श चल रहा है। सरकार का कार्यकाल समाप्त होने पर भी ये तमाम वायदे पूरे नहीं हुए और ये वायदे सिर्फ “जुमले” साबित हुए। भाजपा के मुख्यमंत्री बदलने से उम्मीद जगती थी जो कुछ समय में धूमिल हो जाती गई। सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के समय भी मैंने बार-२ भाजपा नेताओं को आगाह किया कि चुनावी वायदों को पूरा करो लेकिन जब कोई सकरात्मक कार्यवाही नहीं हुई तो अंततः मैंने भाजपा को छोड़ने का फैसला ले लिया।
आज मैं जब पूर्व की घटनाओं का अवलोकन कर रहा हूँ और भाजपा व पूर्व कांग्रेस सरकार का तुलनात्मक अध्ययन कर रहा हूँ तो इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि उत्तराखण्ड की समस्याओं को सुझाव उत्तराखण्ड के चहुंमुखी विकास में कांग्रेस की सरकारों का बेहतरीन योगदान रहा है। पूर्व की इन घटनाओं के अवलोकन से ऐसा महसूस होता है कि कांग्रेस छोड़ने का फ़ैसला मेरे राजनैतिक जीवन की सबसे बड़ी भूल थी जिसके लिए मैं कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ताओं व नेताओं तथा उत्तराखण्ड की महान जनता से क्षमायाचना करता हूँ।
उत्तराखण्ड के विकास में हरीश रावत के नेतृत्व वाली सरकार के आगे भाजपा सरकार दूर-२ तक भी कहीं मुकाबला नहीं कर पाई। जनता से झूठे वायदे कर ठगने वाली व लोकतंत्र को अपमानित करने वाली भाजपा ने आगामी चुनावों में वोट मांगने का नैतिक अधिकार भी खो दिया है। आज मुझे अहसास हुआ कि उत्तराखण्ड का तभी भला होगा जब उत्तराखण्ड में पूर्ण बहुमत की स्थिर सरकार बनेगी। इसीलिए मैं कांग्रेस सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत से प्रयास करूँगा ताकि जो सपने उत्तराखण्ड बनाने वाले आंदोलनकारियों ने देखे थे वो पूरा हो सकें। 2016 में भाजपा ने कांग्रेस सरकार को अस्थिर कर अपनी सरकार बनाने के लिए कांग्रेस विधायकों दुरुपयोग किया और लोकतंत्रात्मक तरीकों को तार-2 कर दिया था।

हरीश रावत की हा के बाद आखिरकार हरक सिंह की हो ही गई वापसी

भाजपा से बर्खास्त हरक सिंह रावत ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। शुक्रवार को उन्होंने कांग्रेस के वार रूम में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी भी मौजूद रहे। हरक के साथ ही उनकी पुत्र वधू ने भी कांग्रेस की सदस्यता ली है। कांग्रेस में शामिल होने के बाद हरक सिंह ने कहा कि 20 साल तक कांग्रेस के लिए संघर्ष किया है। एक बार फिर कांग्रेस को मजबूत करने में हम लोग जुटेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में शामिल होने के लिए कोई शर्त नहीं रखी है। बिना शर्त शामिल हुआ। टिकट की बातों से भी इनकार किया। कहा कि यहां एक ही शर्त है, भाजपा को हराना।
कहा कि 2016 में जब मैंने बगावत की उसके बाद भी लगातार सोनिया गांधी की मैंने तारीफ की है। लगातार टीवी चौनलों पर भी कहा था कि सोनिया गांधी का कई एहसान है। उन्होंने लगातार मुझ पर भरोसा किया है। कहा कि कोई माफीनामा नहीं दिया गया है। राजनीति में माफीनामा की कोई जगह नहीं होती है। मैं यहां एक गिलहरी की तरह भूमिका अदा करूंगा। हरक ने इस दौरान भाजपा पर कई आरोप लगाए। कहा कि टिकट की बातें झूठ थीं।
हरक सिंह रावत को शामिल कराने से पहले ही कांग्रेस ने अपना शुरुआती ब्ल्यू प्रिंट तैयार कर लिया था। विधानसभा चुनाव में हरक भाजपा के खिलाफ प्रचार का अहम किरदार होंगे। सूत्रों के अनुसार हरक को केवल एक टिकट दिया जाएगा, जिस पर उनकी बहू अनुकृति गुसाईं लैंसडौन सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। हरक को कांग्रेस के लिए प्रचार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दिल्ली में मौजूद सूत्रों ने कांग्रेस के इस फार्मूले की पुष्टि की है। उनका कहना है कि अभी प्रारंभिक स्तर पर इस फार्मूले पर कुछ सहमति बनी है। आगे इस विषय पर पूर्व सीएम हरीश रावत और शीर्ष नेता मंथन कर रहे हैं। हाईकमान जो भी तय करेगा, वहीं अंतिम होगा।