कामयाबी, करोड़ो रुपये के खर्च को बचाते हुए निगम ने किया करार

धार्मिक और पर्यटन के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान रखने वाले ऋषिकेश को एक बड़ी कामयाबी मिली है। नगर निगम क्षेत्र के अन्र्तगत निगम ने प्लास्टिक के कूड़े का निस्तारण करने की जो योजना बनाई है। अगर वह साकार होती है तो स्वच्छता के क्षेत्र में यह कियी क्रांति से कम नही होगा। नगर निगम प्रशासन ने इसका खाका तैयार कर लिया है।
महापौर अनिता ममगाई ने बताया कि शहर में प्लास्टिक कूड़े के निस्तारण के लिए निगम और जीआईजेड कंपनी के बीच करार हुआ है। महापौर ने बताया प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने के लिए सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि विदेशी तकनीक पर आधारित इस करोड़ों रुपए की योजना में प्लास्टिक कूड़े के निस्तारण के लिए निगम को एक रुपये का खर्चा भी नहीं करना पड़ेगा। करार करने वाली कंपनी ही लागत वहन करेगी।

महापौर ने बताया कि यह कंपनी जीआईजैड कम्पनी प्लास्टिक से उत्पन्न कूड़े को कम करने के संबंध में सहयोग करेगी। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का नाम है ’’अविरल’’ है जो गंगा नदी में या उसके आसपास प्लास्टिक वेस्ट को कम करता है। महापौर की माने तो यह एक मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी एमआरएफ ऋषिकेश में बनाएगी। जिससे प्लास्टिक कूड़ा शहर से कम होगा। इसके लिए निगम द्वारा गठित टीमों के माध्यम से शहरवासियों को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान और इसके इस्तेमाल को कम करने के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों के द्वारा बताया जाएगा।
सहायक नगर आयुक्त व नोडल अधिकारी विनोद लाल ने बताया कि यह प्रोजेक्ट 2 वर्ष चलेगा। जिसमें गोविंद नगर स्थित टंचिग ग्राउंड पर मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी प्लांट 1500 स्क्वायर मीटर में बनेगा। जिसमें 5 मेट्रिक टन का प्लास्टिक वेस्ट का हर दिन निस्तारण किया जायेगा।

बिना पंजीकरण के राज्य में नही मिलेगा प्रवेश

गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से अनलॉक-4 की गाइडलाइन जारी होने के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी प्रदेश में आने वाले लोगों की प्रति दिन 2000 लोगों की सीमा का प्रतिबंध हटा दिया है। इसके साथ ही स्मार्ट सिटी की वेबसाइट http://dsclservices-org-in/apply-php पर पंजीकरण कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गई गाइडलाइन में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि राज्यों को केंद्र की अनुमति के बिना कंटेनमेंट जोन से बाहर किसी तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं होगा। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों को देखते हुए प्रति 2000 लोगों को ही आने की अनुमति थी। इसके साथ ही जिलाधिकारियों को अतिरिक्त 50 पास जारी करने को कहा गया था। 
केंद्र की एसओपी के जारी होने के तुरंत बाद ही आपदा प्रबंधन एंव पुनर्वास विभाग के प्रभारी सचिव एसए मुरुगेशन ने दो अलग-अलग आदेश जारी किए। पहले आदेश में यह स्पष्ट कर दिया गया कि प्रदेश में आने वाले यात्रियों की संख्या को लेकर कोई रोकटोक नहीं होगी। दूसरे आदेश में यह जोर देकर कहा गया कि राज्य में बाहर से आने वाले लोगों को स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। खास बात यह भी है कि बॉर्डर चेक पोस्ट पर पंजीकरण दस्तावेज दिखाने की शर्त को नहीं हटाया गया है। इसी के साथ यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की अधिकृत लैब से ही कराना होगा। 
इस आदेश को जारी करते हुए प्रदेश सरकार ने चार अगस्त को जारी गाइडलाइन को अतिक्रमित नहीं किया है। चार अगस्त की गाइडलाइन के दो प्रावधानों को ही छेड़ा है। ऐसे में कोविड लोड वाले शहरों से आने वालों को आरटीपीसीआर टेस्ट कराना होगा। इसी तरह से क्वारंटीन होने के पहले के नियम ही प्रभावी माने जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही राज्यों से कहा था कि स्थानीय स्तर पर आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध समाप्त करें। संक्रमण को बढ़ता देखते हुए प्रदेश सरकार दो हजार का प्रतिबंध हटाने के पक्ष में नहीं थी। 22 अगस्त के केंद्र सरकार के पत्र ने इस स्थिति का बदल दिया। अनलॉक-4 गाइडलाइन में एमएचए ने स्पष्ट कहा कि कोई स्थानीय प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।
आपदा प्रबंधन के प्रभारी सचिव एसए मुरुगेशन ने बताया कि गृह मंत्रालय की गाइडलाइन भी प्रदेश में पूरी तरह से लागू होगी। उसी के अनुरूप यह फैसला भी किया गया है। पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है और इसके पीछे कारण यह है कि प्रदेश में बाहर से आने वाला व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो आसानी से संपर्कों की तलाश की जा सके। दो हजार की सीमा खत्म कर दी गई है। एमएचए की गाइड लाइन के अनुरूप ही यह नियम लागू होंगे।
 

जीएसटी काउंसिल ने मामना राज्यों को भारी राजस्व का नुकसान

जीएसटी काउंसिल की करीब 5 घंटों तक चली विशेष बैठक में राज्यों के राजस्व की भरपाई के मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई। काउंलिस की बैठक में इस एक खास मुद्दे पर कई विकल्पों को ध्यान में रखकर चर्चा हुई। सभी राज्यों के वित्त मंत्री इस बात पर सहमत थे कि साल 2020-21 कोविड की वजह से काफी मुश्किल भरा रहा है और इस वजह से जीएसटी राजस्व में और ज्यादा गिरावट देखी गई। काउंसिल का आकलन है कि इस साल के लिए राज्यों को राजस्व का कुल घाटा 2 लाख 35 हजार करोड़ का हो सकता है।
काउंसिल में इस मुद्दे पर साफ चर्चा हुई कि ये घाटा केवल जीएसटी की वजह से नहीं हुआ है बल्कि कोविड की वजह से भी राज्यों को काफी नुकसान हुआ है। जीएएसटी का असर समझें तो इस साल के लिए ये घाटा 97,000 करोड़ रूपए का हो सकता है। चर्चा के बाद राज्यों के सामने दो विकल्प दिए गए हैं। वे चाहें तो जीएसटी राजस्व घाटे के 97000 करोड़ के लिए आरबीआई से कम ब्याज दर पर कर्ज ले सकते हैं। इस विकल्प में उन्हें कम उधार लेना पड़ेगा और साल 2022 के बाद कंपन्सेशन सेस के जरिए जो संग्रह किया जाएगा उससे घाटे की भरपाई की जाएगी।
दूसरे विकल्प में राज्य कुल 2,35,000 करोड़ की राशि के घाटे की भरपाई के लिए आरबीआई से उधार ले सकते हैं जिसमें कोविड की वजह से नुकसान भी शामिल है। चर्चा के बाद एक बात साफ हो गई कि जीएसटी के नुकसान के लिए उधार केन्द्र सरकार को नहीं लेना होगा। अब ये विकल्प राज्यों के ऊपर छोड़ दिया गया है। दोनों विकल्पों पर चर्चा के लिए राज्यों को 7 दिनों का वक्त दिया गया है और परिषद सात दिनों के बाद फिर से इन विकल्पों पर अंतिम फैसला लेगी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने आखिर क्यों कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नारे ढ़ोंग

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार पर तीखा व्यंग्य कसा है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नारों को कोर्ट ने ढोंग करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार स्थानीय उद्यमियों को बढ़ावा देने के मामले में ‘पाखंडी’ साबित हुई है। हाईकोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी विभिन्न क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस उपलब्ध कराने के लिए निकले टेंडरों में कंपनियों की योग्यता के पैमाने में बदलाव को लेकर की है।
हाईकोर्ट की पीठ सेंटर फॉर एविएशन पॉलिसी, सेफ्टी एंड रिसर्च की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने केंद्र और एएआई को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है और साथ ही निर्देश दिया कि टेंडरों के आवंटन की वैधता याचिका के निस्तारण पर आने वाले फैसले पर निर्भर होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर राजनीतिक नेतृत्व पर सख्त रुख दिखाया और कहा, यह बेहद दुख कि बात है कि एकतरफ सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर’ बनने की बात कर रही है तथा दूसरी तरफ ऐसे टेंडर निकालती है, जो छोटी कंपनियों को क्षेत्रीय हवाईअड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस के लिए हिस्सेदारी करने से रोकते हैं।
जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा, असल में यह दिखता है कि यदि आप वास्तव इन लोगों (छोटी कंपनियों) को हटाना चाहते हैं तो ऐसा ही कहिए। अपने भाषणों में आप बड़ी बड़ी बातें करते हैं। आपका राजनीतिक नेतृत्व मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत की बात करता है, वे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कहते हैं, लेकिन आपकी कार्रवाई आपके शब्दों से मेल नहीं खाती। आप पूरी तरह पाखंडी हैं।
पीठ ने एडिशन सॉलिसिटर जनरल संजय जैन से अपने राजनीतिक नेतृत्व से यह बोलने के लिए कहा कि यदि आप इस तरह से चलना चाहते हैं तो मेक इन इंडिया पर भाषण क्यों देते हैं। संजय जैन केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की तरफ से उपस्थित हुए थे। पीठ ने उनसे सवाल किया, क्या वे (राजनीतिक नेतृत्व) को इसके बारे में पता भी है। पीठ ने कहा, हम कहते हैं कि इस देश या उस देश से आयात बंद करो और दूसरी तरफ हम हमारे अपने उद्यमियों को भी विफल कर रहे हैं।
टेंडर में भाग लेने के लिए 35 करोड़ रुपये से ज्यादा की उपलब्धता और शेड्यूल्ड एयरलाइंस के साथ काम करने की योग्यता का पैमाना बनाया गया है। इसका हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा, आप बड़ी जेब और शायद विदेशी टाइप वाले बड़े खिलाड़ी (कंपनियां) को ही अंदर आने देना चाहते हैं।
क्षेत्रीय हवाईअड्डों पर जहां आने वाली फ्लाइटों की संख्या कुछ ही होती हैं, वहां काम कर रहे छोटे खिलाड़ियों के चार्टर्ड एयरलाइंस को संभालने के अनुभव की आपने अनदेखी कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा, यदि छोटे खिलाड़ियों को विकसित नहीं होने दिया जाएगा, तब कुछ ही स्थापित बड़े खिलाड़ी बचेंगे, जो अपने मार्केट प्रभुत्व के कारण सरकार पर अपनी शर्तें थोपना चाहते कर देंगे।

40 लाख रुपए तक के सालाना सकल कारोबार को जीएसटी से छूट

वित्त मंत्रालय ने कहा कि 40 लाख रुपए तक के सालाना सकल कारोबार को जीएसटी से छूट है। शुरू में यह सीमा 20 लाख रुपए थी। वित्त मंत्रालय के ट्वीट में कहा गया है कि इसके अतिरिक्त डेढ़ करोड़ रुपए तक के सकल सालाना कारोबार पर संयोजन योजना का विकल्प चुना जा सकता है। इस योजना के तहत केवल एक प्रतिशत कर देना पड़ता है।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि वस्तु और सेवा कर-जीएसटी लागू होने के बाद ज्यादातर वस्तुओं पर कर की दर कम हो गई। अब 28 प्रतिशत जीएसटी केवल विलासिता की वस्तुओं पर ही लगता है। 28 प्रतिशत की कर श्रेणी की कुल दो सौ तीस वस्तुओं में से करीब दो सौ वस्तुओं को कम दर वाली श्रेणी में लाया गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निर्माण क्षेत्र विशेष रूप से आवास क्षेत्र को अत्यधिक राहत देकर पांच प्रतिशत कर की श्रेणी में रखा गया है। किफायती आवास पर कर की दर घटाकर एक प्रतिशत की गई है। जीएसटी लागू होने के बाद से करदाताओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। शुरू में जीएसटी रिटर्न भरने वालों की संख्या 65 लाख थी जो अब एक करोड़ 24 लाख से अधिक हो गई है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी में सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह स्वचालित हैं और अब तक पचास करोड़ रिटर्न ऑनलाइन भरी गई हैं। जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक एक अरब 31 करोड़ ई-वे बिल सृजित किए गए हैं जिनमें से करीब चालीस प्रतिशत वस्तुओं के अंतर-राज्य परिवहन के लिए हैं। ई-वे बिल की संख्या स्थिर रूप से बढ़ रही है। इस वर्ष 29 फरवरी को एक दिन में सबसे अधिक 25 लाख से ज्यादा बिल बनाए गए।

ब्याज दरों में और कटौती के मिले संकेत, गर्वनर बोले हमारे तरकश में कई तीर

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिये है। वहीं, कोरोना महामारी से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए किए गए उपायों को जारी रखने का अप्रत्यक्ष रुप से दावा भी किया गया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक कार्यक्रम में कहा कि, चाहे दर में कटौती हो या फिर अन्य नीतिगत कदम, हमारे तरकश के तीर अभी खत्म नहीं हुए हैं।
बता दें कि आरबीआई ने छह अगस्त को जारी नीतिगत समीक्षा में रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। केंद्रीय बैंक इससे पहले पिछली दो बैठकों में नीतिगत दर में 1.15 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। फिलहाल रेपो दर चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा (एमसीएफ) दर 4.25 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि महामारी की रोकथाम के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूती के रास्ते पर लाने के लिए सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा। केंद्रीय बैंक द्वारा पिछले दिनों घोषित राहत उपायों के बारे में दास ने कहा, किसी भी तरह से यह नहीं मानना चाहिए कि आरबीआई उपायों को जल्द हटा लेगा। 
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रकोप और अन्य पहलुओं पर एक बार स्पष्टता होने के बाद आरबीआई मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि पर अपने पूर्वानुमान देना शुरू कर देगा। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, बैंकिंग क्षेत्र लगातार मजबूत और स्थिर बना हुआ है और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण सही दिशा में एक कदम है। दास ने कहा, बैंकों का आकार जरूरी है, लेकिन दक्षता इससे भी महत्वपूर्ण है। बैंक तनाव का सामना करेंगे, यह जाहिर सी बात है, लेकिन अधिक महत्वपूर्ण यह है कि बैंक चुनौतियों के समक्ष किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और उसका सामना करते हैं।
वहीं, लॉकडाउन के दौरान आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कई कदम उठाए। इन्हीं में से एक है लोन मोरेटोरियम यानी लोन स्थगन की सुविधा। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि लोन मोरेटोरियम की सुविधा एक अस्थायी समाधान था। ऋण समाधान ढांचे से कोविड-19 संबंधी बाधाओं का सामना कर रहे कर्जदारों को टिकाऊ राहत मिलने की उम्मीद है।
कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न स्थिति से आरबीआई की प्रतिक्रिया अभूतपूर्व रही है। आरबीआई द्वारा किए गए उपायों का उद्देश्य कोविड-19 की कठिन स्थिति से निपटना है और यह स्पष्ट रूप से स्थायी नहीं है। उन्होंने कहा कि महामारी के रोकथाम के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूती के रास्ते पर लाने के लिए सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा। वित्तीय क्षेत्र को सामान्य स्थिति में लौटना चाहिए। दास ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह से यह नहीं मानना चाहिए कि आरबीआई उपायों को जल्द हटा लेगा। कुल मिलाकर, बैंकिंग क्षेत्र लगातार मजबूत और स्थिर बना हुआ है।

बाल आयोग ने लिया संज्ञान, व्हाट्सअप माध्यम को नही माना ऑनलाइन क्लास

बाल आयोग की ओर से अभिभावक, स्कूल प्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों के वेबीनार में प्राइवेट स्कूलों की ट्यूशन फीस को लेकर मनमानी के साथ ही ऑनलाइन एजुकेशन के नाम पर व्हाट्सअप से पढ़ाने का मामला सामने आया है। आयोग की ओर से इस पर मुख्य शिक्षा अधिकारी को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
वेबीनार में अभिभावकों ने बताया कि कई स्कूल ऑनलाइन एजुकेशन के नाम पर बच्चों को व्हाट्सअप के माध्यम से पढ़ा रहे हैं। वहीं, स्कूल की ओर से 4 दिन के भीतर परीक्षा आयोजित की जा रही है। इस पर बाल आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को जांच कर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। 
वेबीनार में ये शिकायतें भी आईं
– हरिद्वार के एक अभिाभवक ने बताया कि उनके स्कूल की ओर से उन्हें आधी तनख्वाह दी जा रही है।
– हरिद्वार के एक अभिभावक ने कहा कि उनका बच्चा ऑनलाइन क्लास नहीं पढ़ पा रहा है और ना ही स्कूल द्वारा उसे पढ़ाया जा रहा है, इसलिए वह स्कूल से टीसी लेना चाहते हैं, लेकिन स्कूल टीसी नहीं दे रहा है।
– एक अन्य अभिभावक ने बताया कि स्कूल द्वारा रीएडमिशन के नाम पर 25 से 30 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। इस पर बाल आयोग की अध्यक्ष ने संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
– बैठक में एक विद्यालय के शिक्षकों द्वारा बताया गया कि उनके स्कूल प्रबंधन की ओर से उनके वेतन में भारी कटौती कर दी गई है, इसके अलावा पिछले 7 महीने से उन्हें वेतन भी नहीं दिया गया। इस पर बाल आयोग की अध्यक्ष ने जांच कराकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
– कई अभिभावकों ने कहा कि प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस से अधिक फीस वसूल रहे हैं। 
– अधिवक्ता पुनीत कंसल ने बताया कि अभिभावकों की समस्या के आधार पर उनके द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखा गया था, जिस पर स्कूल की फीस का निर्धारण 500 से 700 किया गया। आयोग की अध्यक्ष ने अधिवक्ता से पत्र उपलब्ध कराने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि वह पत्र उपलब्ध कराया जाए, उसका संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के कर्मचारियों को स्कूलों को ट्यूशन फीस देनी चाहिए। जबकि जो अभिभावक किसी कारण से फीस देने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें स्कूलों के प्रिंसिपल को इस संबंध में प्रार्थना पत्र देना चाहिए। मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार आनंद भारद्वाज ने कहा कि आरटीई के तहत अब तक स्कूलों को 9 करोड़ का भुगतान किया गया है। वहीं, अधिक फीस मामले में स्कूलों पर एक लाख रुपये का जुर्माना किया जा रहा है। बैठक में शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

आप की रणनीति तैयार, संपर्क अभियान शुरु

नमस्कार मै अरविंद केजरीवाल बोल रहा हूं, कैसे है आप… । ये आडियो संदेश अरविंद केजरीवाल का है जो उत्तराखण्ड के लगभग 70 लाख लोगों तक पहुंच रहा है।
यह जानकारी देते हुए आम आदमी पार्टी उत्तराखंड के प्रदेश प्रवक्ता रविंद्र आनंद ने बताया कि आज के दौर में जहां एक आम आदमी को वोट देने के बाद भी तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और उनके वोट से जीते नेता, मंत्री, विधायक ऐसे गायब जो जाते हैं जैसे उनको उनसे कोई सरोकार ना हो। अगर वो लोग उन दिक्कतों को लेकर अपने स्थानीय विधायकों से मिलना भी चाहते तो उनसे मिल नहीं पाते। ऐसे में अरविंद केजरीवाल जी एक ऑडियो संदेश के जरिए उत्तराखंड के हर जनमानस से जुड़ रहे हैं। उनका एक मिनट का ऑडियो मैसेज फोन के जरिए जन-जन तक पहुंच रहा है। जिसमें वो सबसे पहले कोराना को लेकर हाल चाल पूछ रहे हैं और उसके बाद बताते हैं कैसे उत्तराखंड की तरह दिल्ली में भी कुछ सालों पहले, जनता परेशान थी, हालात बहुत खराब थे, लेकिन जब से आम आदमी पार्टी दिल्ली में आई, दिल्ली में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें सब बेहतर हो गए। बिजली, पानी भी फ्री मिलने से लोग खुश हैं और अब 24 घंटे वहां बिजली रहती। वो अपने इस संदेश के जरिए कहते उत्तराखंड में भी आपको बिजली, पानी फ्री मिल सकती, अच्छी सड़कें बन सकती। स्वास्थ्य और शिक्षा यहां भी दिल्ली से बेहतर हो सकती है। वो उत्तराखंड को बेहतर उत्तराखंड बनाने का आव्हान भी करते। इस मैसेज के जरिए अरविंद केजरीवाल उत्तराखंड के घर-घर तक पहुंचेंगे और जिस तरह दिल्ली मॉडल ने पूरे देश में वाहवाही बटोरी है वैसे ही स्वास्थ्य, शिक्षा में उत्तराखंड को भी बेहतर उत्तराखंड बनाएंगे।

ई-मीटिंग प्रणाली का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में ई-मीटिंग सॉफ्टवेयर का शुभारम्भ किया। ई-मीटिंग सॉफ्टवेयर एक स्मार्ट मीटिंग मैनेजमेंट सिस्टम है। जिसके माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय एवं सचिवालय में होने वाली बैठकों को आईटी के माध्यम से और बेहतर तरीके से क्रियान्वित किया जा सकेगा। बैठक में प्रतिभाग करने वाले अधिकारी, बैठक का एजेंडा और प्रस्तावित चर्चा के बिंदु बैठक से दो दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए भेंजेंगे, अनुमोदन के बाद ही बैठक होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के डिजिटल इंडिया की सोच की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ई-मीटिंग प्रणाली से ऊर्जावान युवा सोच को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में ई-मंत्रीमण्डल, ई-ऑफिस के बाद ई-मीटिंग की शुरूआत हुई है। ई-मीटिंग प्रणाली से अधिकारियों के कार्य करने की गति में और तेजी आयेगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि योजनाओं का लाभ समाज में अंतिम पंक्ति पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए लीक से हटकर आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत है। ई-मीटिंग प्रणाली से शासन एवं अन्य विभागों के कार्यों में भी तेजी आयेगी। मॉनिटरिंग व ट्रेकिंग के माध्यम से कार्यों को एफिशिएंट व प्रोडक्टिव बनाकर समयबद्धता के साथ निस्तारण के स्थान पर निपुणता पर केन्द्रित किया जाना चाहिए। जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सचिवालय को सरकारी सिस्टम का हृदय माना जाता है। सचिवालय में फाइलों की ट्रेकिंग से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों को जल्द मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम वर्चुअल इंडिया की तरफ बढ़ रहे हैं। आज वर्चुअल ने एक्चुअल को साधने का दृढ़ निश्चय कर लिया है। राज्य सरकार का मुख्य विजन राज्य को आईटी हब बनाने का है।
मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि यह ई-गवर्नेंस की दिशा में अच्छा प्रयास है। ई-मीटिंग प्रणाली से पूर्व में ली गई बैठकों के निर्णय भी सहजता से उपलब्ध होंगे और पेपरलेस कार्य भी होंगे। मंत्रीगणों एवं मुख्य सचिव की बैठकों के लिए भी ई-मीटिंग प्रणाली अपनाई जाय। इसके लिए निजी सचिवों को प्रशिक्षण भी दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाय कि दिसम्बर तक सभी सन्दर्भ ई-ऑफिस पर आ जायें।
ई-मीटिंग का सॉफ्टवेयर एनआईसी द्वारा आईटी विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय के सहयोग से बनाया गया है। अब मुख्यमंत्री कार्यालय की बैठक मीटिंग मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर के माध्यम से होंगी। ई-मीटिंग सॉफ्टवेयर का एक पोर्टल बनाया गया जिसकी वेबसाइट मउममजपदह.ना.हवअ.पद है। ई-मीटिंग तकनीक के माध्यम से बैठक का एजेंडा एवं कार्यवृत्त ऑनलाईन स्टोर किये जायेंगे। बैठक के आयोजन के लिए अधिकृत अधिकारी बैठक की तैयारियों एवं बैठक के समय दिखाये जाने वाले डाटा का मीटिंग से पूर्व वैरिफाई करेंगे। मीटिंग में प्रतिभाग करने वाले अधिकारियों की उपस्थिति ऑन लाईन दर्ज की जायेगी। मीटिंग के दौरान दिये गये लक्ष्यों की समय सीमा पूर्ण होने पर ऑटोमैटिक अलर्ट ईमेल और एसएमएस द्वारा अधिकारियों को मिलेंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आईटी आर. के. सुधांशु, सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा एवं विभिन्न विभागों के सचिव, अपर सचिव, एनआईसी के उप महानिदेशक के.नारायणन एवं तकनीकी निदेशक नरेन्द्र सिंह नेगी उपस्थित थे।

केन्द्र की हर योजना के केन्द्र बिन्दु में है किसानः नरेन्द्र तोमर

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भारत सरकार द्वारा कृषि विकास के सम्बन्ध में हाल ही में किए गए प्रयासों के सम्बन्ध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए लगातार एक के बाद एक कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकारों ने भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कृषि अवसंरचनाओं के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करना है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को गांवों और खेतों तक पहुंचाना हमारा उद्देश्य है। कृषि अवसंरचनाओं के विकास में एक लाख करोड़ का यह पैकेज एक बड़ा कदम साबित होगा।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम को गति देने के लिए राज्यों को एक सेमिनार का आयोजन करना चाहिए जिसमें कृषि अवसंरचनाओं के विकास और संभावनाओं पर चर्चा की जाए। एक सर्वेक्षण करा कर कृषि क्षेत्र में गैप्स ढूंढ कर उनके लिए योजनाएं बनायी जानी चाहिए। किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए ताकि किसान अपने उत्पाद को लंबे समय तक एवं उचित मूल्य मिलने तक सुरक्षित रख सकें। उन्होंने कहा कि हमने 10 हजार फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) बनाने का लक्ष्य रखा है।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस फंड के माध्यम से पोस्ट हार्वेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एवं बिचैलियों को समाप्त करने में भी मदद मिलेगी साथ ही कोल्ड चेन, कोल्ड स्टोरेज इंटीग्रेटेड पैक हाउसेस, सप्लाई चेन सर्विसेज, कम्युनिटी फार्म मशीनरी, रेफ्रिजरेटेड ट्रांसपोर्टेशन और कम्युनिटी ड्राइंग यार्ड जैसी अवसंरचनाओं को विकसित करने में इस फंड का प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हम अपने किसानों को आत्मनिर्भर कृषि के माध्यम से उद्यमी बनाना चाहते हैं। 31 मार्च 2021 तक इसके लिए सभी राज्य अपने योजनाओं को उपलब्ध करा दिया जाए।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों की आय को बढ़ाने के लिए शुरू की गयी आत्मनिर्भर कृषि योजना के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने में यह योजना मील के पत्थर की भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा केंद्र द्वारा प्रत्येक जनपद में दो-दो एफपीओ बनाए जाने हेतु दिए गए लक्ष्य को हम समय पूरा कर लेंगे। अन्य मैदानी राज्यों की तुलना में हमारे पर्वतीय राज्यों की परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का अधिकांश भूभाग पर्वतीय है। जहां पर अलग-अलग प्रकार की क्लाइमेट कंडीशन है। उन्होंने पर्वतीय राज्यों के लिए अलग से नीति बनाई जाने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड मैं बेमौसमी फल-सब्जियों की अपार संभावना है। इनके उत्पादन में फोकस करके किसानों की आय को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में जड़ी बूटियों की अत्यधिक संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को रू. 3 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, इसके साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को भी रू. 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की कृषि में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शिवराज सिंह चैहान एवं मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहर लाल खट्टर सहित विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने भी अपने सुझाव दिए।