संस्कृति विभाग के निर्माणाधीन प्रेक्षागृह और संग्रहालय का निरीक्षण, शेष कार्य समय से पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गढ़ीकैंट स्थित संस्कृति विभाग के निर्माणाधीन प्रेक्षागृह और संग्रहालय का निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि काफी कुछ कार्य किया जा चुका है। शेष कार्य को भी समयबद्धता से पूरा कर लिया जाए। निर्माण में गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए।
बताया गया कि लगभग 95 प्रतिशत कार्य किया जा चुका है। ग्रीन बिल्डिंग की कन्सेप्ट पर बनने वाले प्रेक्षागृह और संग्रहालय की लागत 67 करोड़ रूपए है। प्रेक्षागृह का भवन 2518 वर्गमीटर में बन रहा है। एक हजार क्षमता का यह प्रेक्षागृह पूरी तरह से वातानुकूलित होगा। इसमें फायर फाईटिंग सिस्टम, अत्याधुनिक आडियो/वीडियो सिस्टम, सीसीटीवी सिस्टम होगा। संग्रहालय के भवन में प्रदर्शनी गैलरी, संग्रहालय, लाईब्रेरी, कान्फ्रेंस हॉल, मीटिंग हॉल बनाए जा रहे हैं। इसमें ग्राउंड वाटर रिचार्ज और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी है। इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, निदेशक बीना भट्ट भी उपस्थित थे।

यूजीसी की गाइडलाइन के तहत प्रदेश में उच्च शिक्षा में तेजी लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग से सम्बन्धित बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा निर्देशो के तहत विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में परीक्षायें संचालित किये जाने के सम्बन्ध में विचार विमर्श किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय स्तर पर अन्तिम वर्ष एवं अन्तिम सेमेस्टर के छात्र-छात्रों की परीक्षायें 24 अगस्त से 25 सितम्बर तक आयोजित की जायेंगी तथा 25 अक्टूबर तक परीक्षा फल घोषित कर दिया जायेगा जबकि 1 नवम्बर से नया सत्र शुरू कर दिया जायेगा। इसके अलावा पुराने छात्र छात्राओं की सेमेस्टर परीक्षायें यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार अगली कक्षाओं में प्रोमोट करते हुए 5 अगस्त तक परीक्षा फल घोषित कर 16 अगस्त से ऑनलाईन कक्षायें शुरू कर दी जायेंगी। 12वीं के परीक्षाफल घोषित होने के साथ ही समस्त राजकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों बीए, बीएससी, एम, एमएससी आदि कक्षाओं में प्रथम वर्ष हेतु प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी जायेगी तथा 1 नवम्बर से कक्षायें प्रारम्भ होंगी।
बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों द्वारा बताया गया कि राज्य के कई महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को कोविड 19 क्वारंटीन सेंटर बनाये गये हैं जिसके चलते परेशानी आ सकती है जिस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि कोविड-19 के दृष्टिगत जिन विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में क्वारंटीन सेंटर बनाये गये हैं सम्बन्धित संस्थान के मुखिया के ओर से जिलाधिकारी को पत्र भेजकर 25 जुलाई तक क्वारंटीन सेंटर खाली कराते हुए अन्यत्र शिफ्ट करा दिये जाये तथा वहां पर छात्रों के आने से पहले सेनेटाईजेशन की भी पर्याप्त व्यवस्था की जाए ताकि परीक्षा देने वाले छात्रों को कोई कठिनाई न हो।
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने बताया कि पूरे प्रदेश में लगभग 3 लाख छात्र-छात्राओं उच्च शिक्षा में अध्यनरत हैं जिनमें से लगभग 80 हजार छात्र-छात्रायें अन्तिम वर्ष/सेमेस्टर के शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 25 हजार छात्र-छात्रायें बाहरी राज्यों से अध्यनरत हैं जिनको परीक्षा से पूर्व 1 अगस्त तक सम्बन्धित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में अपनी उपस्थिति देनी होगी, लेकिन उनके लिए शर्त रखी गई है वह अपने प्रदेशों से कोविड-19 का टेस्ट कराते हुए प्रमाण पत्र भी साथ लेकर आयेंगे ताकि क्वारंटीन की अनिवार्यता से बचा जा सके।
बैठक में प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन ने बताया कि यूजीसी के द्वारा पूर्व में शिक्षको, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यालय आने सम्बन्धित जो छूट दी गई थी वह समाप्त कर दी गई है। अब सभी प्राचार्यों, शिक्षकों अधिकारियों व कर्मचारियों को अपने कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। आदेशों का पालन न करने पर सम्बन्धित के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।
बैठक के उपरान्त मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ओपीएस नेगी द्वारा मुख्यमंत्री को कोविड-19 के दृष्टिगत मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु विश्वविद्यालय की ओर से 5 लाख 80 हजार की धनराशि का चेक भेंट किया गया।
बैठक में राज्य मंत्री दिप्ती रावत, मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ओपी नेगी, दून विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एके कर्नाटक, श्रद्धेय सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति डा. पीपी ध्यानी, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. कुमकुम रौतेला, तकनीकी सलाहकार मुख्यमंत्री डॉ. नरेन्द्र सिंह, रूषा सलाहकार डॉ. एमएसएम रावत, डॉ. के.डी.पुरोहित, पन्तनगर विवि के डीन डॉ. एसके कश्यप, संयुक्त सचिव एमएम सेमवाल, कुलसचिव सुधीर बुडाकोटी, एमएस मन्दरवाल, विपिन चन्द जोशी, डॉ. एएस उनियाल आदि विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

जल जीवन मिशन के तहत हर घर को नल उपलब्ध कराने के मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में जल जीवन मिशन की सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन एक समयबद्ध कार्यक्रम है। सभी जिलाधिकारियों को इसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये हर संभव प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत हर घर को नल के माध्यम से गुणवत्ता युक्त स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी है इसके लिये जिलाधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाओं एवं प्रबंधन के लिये अधिकार प्रदान किये गये हैं। शासन स्तर पर इससे सम्बन्धित स्वीकृतियों आदि में विलम्ब न हो, इसके लिये उन्होंने जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (D.W.S.M) को एक करोड़ तक की योजनाओं की स्वीकृति के अधिकार दिये जाने, गढ़वाल एवं कुमाऊं के आयुक्तों को 2 करोड़ तथा 5 करोड़ के प्रस्तावों की मंजूरी के लिये स्टेट लेवल कमेटी तथा इससे ऊपर के प्रस्तावों को ही शासन को संदर्भित किये जाने के निर्देश दिये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन जीवन से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विषय है। अतः इसमें किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। इस योजना के तहत अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो, इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान विपरीत परिस्थितियों में भी सभी जिलाधिकारियों को सभी सम्बन्धित विभागों एवं संस्थाओं के सहयोग एवं समन्वय से इसे मिशन मोड में संचालित करना होगा। उन्होंने कहा कि वन, राजस्व, पेयजल आदि विभागों को इसमें सामूहिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा। यह हम सबका कार्य है। हर घर को नल के माध्यम से स्वच्छ जल उपलब्ध कराने हेतु कनेक्शन उपलब्ध कराने में कोई समस्या न हो इसके लिये आर्थिक रूप से असहाय लोगों को एक रूपये में कनेक्शन दिये जाने का निर्णय लिया गया है ताकि प्रदेश में कोई भी घर कनेक्शन से वंचित न रहे। उन्होंने जिलाधिकारियों को कार्य हित में अपने स्तर पर कार्यदायी संस्थाओं का चयन कर उसकी सूचना शासन को उपलब्ध कराने को कहा।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने भी जिलाधिकारियों से जल जीवन मिशन के तहत दिये गये लक्ष्यों को निर्धारित अवधि में पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी अपने विवेक से इसमें आनी वाली कठिनाइयों का निराकरण करें। उन्होंने योजनाबद्ध ढंग से कुशल नेतृत्व क्षमता के साथ इस योजना को धरातल पर उतारने की भी बात कही। जिलाधिकारियों को इसमें व्यक्तिगत रूप से ध्यान देना होगा तभी इतनी बड़ी योजना के क्रियान्वयन में हम सफल हो पायेंगे। उनहोंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी जिलाधिकारी इस वर्ष के लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ ही आगे की कार्ययोजना को भी अंतिम रूप देने के लिये प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने सीमान्त जनपदों में माइग्रेट होने वाले गांवों के सभी घरों को इसमें शामिल करने के भी निर्देश दिये।
इस अवसर पर सचिव पेयजल नीतेश झा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि वर्ष 2024 तक प्रदेश के सभी विकास खण्डों की 7755 ग्राम पंचायतों के 14871 गांवों में फंक्सनल हाऊस होल्ड टेप कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराये जाने हैं। इसके लिये वर्ष 2020-21 के लिये 358880 घरों को नल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। जनपद चमोली को वर्ष 2020-21 में सभी 43265 घरों को घरेलू जल संयोजन के साथ जोड़ा जाना है। इसके साथ ही देहरादून का डोईवाला, पौड़ी का थलीसैण, रुद्रप्रयाग का ऊखीमठ, उत्तरकाशी का भटवाड़ी, नैनीताल का हल्द्वानी तथा पिथौरागढ़ का धारचूला विकास खण्ड को शत प्रतिशत आच्छादन का लक्ष्य भी इस वर्ष के लिये रखा गया है।
उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिये भारत सरकार द्वारा 1565.06 करोड़ की कार्य योजना स्वीकृत की है। इसके लिये 140 एन.जी.ओ को भी सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने जिलाधिकारियों से 2021 तक सभी योजनाओं के टेण्डर जारी करने की भी अपेक्षा की। शासन द्वारा इस सम्बन्ध में शीघ्र ही गाइड लाइन भी जारी की जायेगी। इस अवसर पर जिलाधिकारियों ने अपने अपने सुझाव रखे गये तथा योजना को समय बद्धता के साथ पूर्ण करने का आश्वासन दिया।

ऋषिकेश के द्वितीय महंत अशोक प्रपन्नाचार्य का निधन, शोक की लहर

(एनएन सर्विस)
आज प्रात: 7:30 बजे श्री भरत मन्दिर के महन्त अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज ने अतिंम सांस ली। उनके देहावसान की खबर से पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गयी। शहर के साथ ही देहरादून और अन्य स्थानों से लोगो ने उनके आवास पहुचकर परिवार को सान्त्वना दी। शहर के कई व्यापारियों ने अपने अपने प्रतिष्ठानों को बंद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
आपको बता दे कि श्री महन्त का जन्म 10 फ़रवरी 1942 को तत्कालीन महंत परशुराम जी के घर उनके बेटे ज्योति प्रसाद शर्मा के यहा हुआ। अशोक प्रपन्नाचार्य परिवार में बड़े पुत्र थे उनसे बड़ी एक बहन व छोटी बहन व छोटे भाई श्री हर्षवर्धन शर्मा हैं। उनके दादा श्री भरत मन्दिर के गद्दी नसीन मंहन्त परशुराम जी महाराज जोकि नगर पालिका परिषद ऋषिकेश के प्रथम अध्यक्ष भी रहे। उनके पश्चात अशोक प्रपन्नाचार्य श्री भरत मन्दिर ऋषिकेश की गद्दी वर्ष 1956 में शुषोभित हुए। इसके साथ ही श्री भरत मन्दिर द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज, श्री भरत मन्दिर संस्कृत महाविद्यालय, ज्योति विशेष विद्यालय के साथ ही उत्तराखंड एवं अन्य स्थानों की धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के संचालन व संवर्द्धन में सराहनीय भूमिका रही।
अशोक प्रपन्नाचार्य श्री भरत मंदिर एजुकेशन सोसाइटी व शिक्षण संस्थाओं के संचालक मंडल के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे।
पंडित ललित मोहन शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शान्तिप्रपन्न शर्मा राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश व कई अन्य संस्थाओं को वृहत्तर भूखंड प्रदान कर क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के प्रवेश द्वार खोले व नगरीय क्षेत्र के साथ गढ़वाल के नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं के संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध में भारतीय सेनाओं को शिविर कैम्प संचालित करने के लिये महन्त अशोक प्रपन्नाचार्य ने श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज के विशाल प्रांगढ को प्रदान करने के साथ ही रायवाला में सेना को छावनी बनाने का सुझाव प्रदान किया था।
स्वाधीनता संग्राम में भी श्री भरत मंदिर परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी के चाचा शान्ति प्रपन्न शर्मा कई वर्षों तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक व उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन, उद्योग व ऊर्जा मंत्री पद पर रहे। ऋषिकेश में आईडीपीएल की स्थापना का सुझाव तत्कालीन केन्द्र सरकार को उनके द्वारा ही प्रदान किया गया था।
स्वर्गीय मंहन्त अशोक प्रपन्न शर्मा के छोटे भाई हर्षवर्धन शर्मा क्षेत्र के सार्वजनिक, सामाजिक सेवा जीवन के साथ शिक्षण संस्थाओं के संचालन में प्रबंधकीय व्यवस्था देखते हैं।
उत्तरकाशी भूकंप,केदारनाथ आपदा व कोरोना महामारी में लॉक डाउन के दौरान स्व० मंहन्त जी व उनके परिवार द्वारा राहत कार्यों में बड़े स्तर सहायता प्रदान की।
स्वर्गीय मंहन्त अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं आपके दो पुत्र वत्सल शर्मा व वरुण शर्मा हैं। वे भी सामाजिक, शिक्षण संस्थाओं व धार्मिक संस्थाओं के संचालन व संवर्धन में सक्रिय हैं। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे, उनका अंतिम संस्कार ऋषिकेश चंद्रेश्वर घाट मुक्ति धाम पर अपराह्न 3 बजे सम्पन्न होगा।

दो अधीक्षण अभियंताओं पर नेपाल सीमा में सड़क निर्माण पर लापरवाही का आरोप, निलंबित

(एनएन सर्विस)
शासन ने अंतरराष्ट्रीय और सामरिक महत्व के टनकपुर-जौलजीवी मोटर मार्ग के निर्माण में लापरवाही पर दो अधीक्षण अभियंताओं को निलंबित किया है। अधीक्षण अभियंता मयन पाल सिंह वर्मा व प्रभारी अधीक्षण अभियंता मनोहर सिंह पर आरोप है कि दोनों ने मार्ग की निविदा प्रक्रिया संपन्न न कर प्रक्रिया को टालने का प्रयास किया।
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों के आवागमन और भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए टनकपुर-जौलजीवी मार्ग का निर्माण प्रस्तावित है। इस मार्ग के 30 किमी से 55 किमी का निर्माण ठेकेदार दिलीप सिंह अधिकारी को आवंटित गया। ठेकेदार पर अनुबंध के दौरान फर्जी प्रमाणपत्र लगाने के शिकायत की जांच के बाद यह कार्य अगस्त 2017 में निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद इसके लिए दोबारा टेंडर आमंत्रित किए गए। इस पर ठेकेदार कोर्ट और फिर ट्रिब्यूनल में गया। आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने मामले में यथास्थिति रखने के निर्देश दिए, जिसे विभाग ने कमर्शियल कोर्ट में चुनौती दी।
जुलाई 2019 में ट्रिब्यूनल के यथास्थिति रखने के आदेश को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद पिथौरागढ़ में तैनात तत्कालीन अधीक्षण अभियंता मयन पाल ने अपने स्तर से 12 दिसंबर 2019 को निविदाएं आमंत्रित की। अपरिहार्य कारणों का उल्लेख करते हुए 24 दिसंबर 2019 को निविदाएं फिर से स्थगित कर दी गई। मुख्य अभियंता लोनिवि पिथौरागढ़ के निर्देशानुसार चार जनवरी 2020 को अधीक्षण अभियंता पिथौरागढ़ तृतीय वृत्त को फिर से निविदाएं आमंत्रित करने को पत्र भेजा गया। बावजूद इसके उन्होंने 12 जनवरी 2020 तक अपने कार्यकाल के दौरान इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। 13 जनवरी को यहां मनोहर सिंह को प्रभारी अधीक्षण अभियंता के रूप में भेजा गया। एक माह बाद, यानी 12 फरवरी 2020 को उन्होंने 12 दिसंबर 2019 को आमंत्रित निविदा में शुद्धिपत्र लगाया। इसमें निविदा आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 19 मार्च रखी गई।

यह भी पढ़े …
विकास दुबे के मूवमेंट पर उत्तराखंड की पुलिस भी रख रही नजर

इस बीच 18 मार्च को उन्होंने अपरिहार्य कारणों का उल्लेख करते हुए एक शुद्धि पत्र जारी किया और निविदा आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 26 मार्च 2020 रखी। इसी दौरान बीच 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन हो गया। इसका उल्लेख करते हुए प्रभारी अधीक्षण अभियंता ने केवल दो निविदादाताओं की हार्ड कॉपी प्राप्त होने का उल्लेख करते हुए 19 मई 2020 को फिर से निविदाएं निरस्त कर दीं। 28 मई को तीसरी बार निविदाएं आमंत्रित की गई।
इस बीच एक जून को आर्बिटेशन अवार्ड में ठेकेदार दिलीप सिंह अधिकारी के पक्ष में निर्णय पारित हो गया। इस प्रकरण को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया। सचिव लोनिवि आरके सुधांशु ने दोनों अभियंताओं को शासकीय नियमों की अनदेखी करते हुए संबंधित ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया। मयन पाल निलंबन अवधि में प्रभारी मुख्य अभियंता कार्यालय देहरादून तो मनोहर सिंह लोक निर्माण विभाग पौड़ी कार्यालय में संबद्ध रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने दिया, सीमांत क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को सुधारने पर जोर

(एनएन सर्विस)
उत्तराखंड सरकार ने चीन और नेपाल सीमा की सामरिक महत्व की सड़कों को लेकर समीक्षा की। सीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सड़कों के निर्माण को तय समय में पूरा करने और मानसून में सड़कों पर यातायात को बनाए रखने के लिए हरसंभव कोशिश करना तय किया गया। 
सामरिक महत्व को देखते हुए सीमा सड़क की समीक्षा बैठक को गोपनीय रखा गया। शासन के आला अफसरों से लेकर सूचना विभाग ने तक जानकारी देने से इनकार किया। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में सीमा सड़क संगठन के अधिकारी भी शामिल थे। तय किया गया कि केंद्र के संबंधित मामलों पर केंद्रीय स्तर पर बातचीत की जाएगी। यह भी कहा गया कि मानसून में भूस्खलन से सीमा की सामरिक महत्व की सड़कें अगर बंद होती हैं तो इन सड़कों को जल्द से जल्द खोला जाए।
यह भी बताया गया कि इस तरह के मामलों में चीन सीमा से लगी चमोली जिले की नीति घाटी में मलारी मार्ग के लिए 35 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण होना है। इसमें राजस्व विभाग से कहा गया है कि मुआवजे की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसी तरह नेपाल सीमा से लगी सड़कों के प्रस्ताव पर भी सीएम ने तेजी से काम करने को कहा है। बैठक में सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत सीमांत क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए अधिक प्रस्ताव बनाने पर जोर दिया गया।
बाद में सचिवालय में मीडिया कर्मियों से बातचीत में सीएम ने कहा कि सामरिक महत्व की सड़कों को मानसून में बंद न होने देने के लिए अधिकारियों को कहा गया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार के साथ ही राजस्व, लोक निर्माण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, बीआरओ के अधिकारी शामिल थे। 

झांसे में आ गए पंडित जी, गंवाए 15699 रूपये

(एनएन सर्विस)
ऑनलाइन शॉपिंग साइट अमेजन से पंडित महेन्द्र कुमार को भूख की दवा मंगाना भारी पड़ गया। पंडित जी को कस्टमर केयर के नाम से आए फोन में तीन बार ओटीपी मांगा गया। जिसमें करीब 15699 रूपये खाते से उड़ा लिए गए। अब पंडित जी कोतवाली के चक्कर काट रहे है।
दरअसल आवास विकास निवासी महेन्द्र कुमार पुत्र राजेन्द्र प्रसाद पुरोहित कर्मकांड का कार्य करते हैं। बीती दो जुुलाई को उन्होंने एक ऑनलाइन शॉपिंग साइट से भूख बढ़ाने की दवाई मंगवाने के लिए आवेदन किया। तभी उन्हें एक फोन आया, फोन करने वाले ने स्वयं को कस्टमर केयर दिल्ली ब्रांच से बताया और साइट पर अकाउंट बनाने के लिए दस रूपये डालने को कहा। इसके लिए उन्होंने पंडित जी के मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा। इसे पंडित जी ने बता दिया।
इसके बाद उनके खाते से 9999 रूपये कट गए। पंडित जी ने फोन करने वाले को कहा कि आपने मेरे खाते से रूपये क्यों निकाले। तो इस पर फोन करने वाले व्यक्ति ने सॉरी कहकर रूपये वापस करने की बात कही और एक बार फिर ओटीपी भेजा। अबकी बार पुनः पांच हजार रूपये निकाल लिए गए। इसी तरह तीसरी बार 700 रूपये निकाल लिए गए। इसके बाद फोन कट गया। पंडित जी मामले को लेकर एक शिकायत लिखी और कोतवाली पुलिस को सौंपी। वहीं, साइबर सेल मामले की जांच में जुट गया है।

मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता के लिए डीएसओ को दी जिम्मेदारी

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित जिला पूर्ति अधिकारी की जिम्मेवारी तय की जाएगी। योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की गड़बड़ी या कोताही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सचिव खाद्य, अपने स्तर पर इसकी नियमित रूप से समीक्षा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवम्बर माह तक विस्तारित किया गया है। इससे देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। सरकार का संकल्प है कि कोई गरीब भूखा न सोए। पिछले लगभग 4 माह में हर व्यक्ति को राशन उपलब्ध कराया गया है। राज्य में लौटे प्रवासियों के लिए भी राशन की व्यवस्था की गई।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य के 61.94 लाख व्यक्तियों को अप्रैल, मई व जून माह का खाद्यान्न दिया गया है। इसमें प्रति माह प्रति व्यक्ति 5 किलो चावल और प्रति परिवार 1 किलो दाल निशुल्क वितरित की गई है।
अब योजना का विस्तार करने से जुलाई से नवम्बर तक 5 माह और यह लाभ पात्र व्यक्तियों को मिलता रहेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत नियमित खाद्यान्न भी वितरित किया जाता रहेगा।
बताया गया कि आत्मनिर्भर भारत योजना में लगभग 12 हजार प्रवासियों को मई व जून माह में प्रति माह 5 किलो चावल प्रति व्यक्ति और 1 किलो दाल प्रति परिवार निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। वन नेशन वन राशन कार्ड 1 जुलाई से लागू की जा चुकी है। इसके तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के राशनकार्ड धारकों को अन्य राज्यों में और अन्य राज्यों के राशनकार्ड धारकों को राज्य में लाभ मिलेगा।

मोदी रिट्रीट योगा होटल की महिला यात्री की ट्रेवल हिस्ट्री छुपाई, निकली पाॅजीटिव

(एनएन सर्विस)
ऋषिकेश कोतवाली पुलिस ने प्रशासन को गुमराह करने पर होटल मोदी रिट्रीट योगा के मैनेजर और महिला यात्री पर आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के नियमों का उल्लंघन पाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है।
कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि होटल मोदी रिट्रीट योगा में एक महिला दिल्ली रेड जोन से आई। लेकिन महिला यात्री सहित होटल के मैनेजर ने रेड जोन से आने की सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को नहीं दी। पुलिस को जब इस मामले का पता चला तो होटल मैंनेजर सतीश से दिल्ली से ऋषिकेश आने का ई-पास मांगा गया तो वह उचित जवाब नहीं दे सका। मैंनेजर की ओर से न ही महिला यात्री शीतल को क्वारंटीन किया गया। बता दें कि उक्त महिला की कोविड रिपोर्ट दो जुलाई को पॉजीटिव आई है।
इस बावत जिला मजिस्ट्रेट के आदेशों की अवहेलना करने पर होटल के मैनेजर और महिला यात्री के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। कोतवाल ने आरोपियों की पहचान मैनेजर सतीश पुत्र धर्मपाल निवासी अमर एंटा पंचरुखी तहसील पालमपुर कांगड़ा हिमाचल प्रदेश और महिला यात्री शीतल के रूप में कराई है।

आर्थिक घेराबंदी देख चीन घबराया, जल्द ही प्ले स्टोर से हटेंगी सभी एप

(एनएन सर्विस)
भारतीय क्षेत्र लद्दाख में घुसपैठ कर रहे चीन को सीमा में सबक सिखाने के साथ ही भारत ने अब उसे आर्थिक मोर्चे पर घेरते हुए 59 चीनी ऐप पर बैन लगा दिया है और गूगल को अपने प्ले स्टोर से उस सभी ऐप को हटाने का आदेश भी दे दिया है। भारत की इस कार्रवाई से चीन घबरा गया है और इसपर दुख जताते हुए स्थिति पर नजर रखने की बात कर रहा है। अभीतक गलवान में रौब दिखा रहे चीन भारत के इस ऐक्शन के बाद अब अंतरराष्ट्रीय कानून की दुहाई तक देने लग गया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने भारत के चीनी ऐप्स पर बैन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, चीन को काफी चिंता है और वह स्थिति की समीक्षा कर रहा है। बता दें कि दोनों देशों के बीच लद्दाख में एक महीने से ज्यादा वक्त से तनाव चल रहा है। गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे जबकि चीन के 40 जवान मारे गए थे।
उन्होंने कहा, हम कहना चाहते हैं कि चीनी सरकार हमेशा से अपने कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय नियमों को पालन करने को कहती रही है। भारत सरकार को चीनी समेत सभी अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के कानूनी अधिकारों की रक्षा करने की जिम्मेदारी है।
बता दें कि केन्द्र सरकार ने सोमवार को 50 से ज्यादा चाइनीज ऐप्स को बैन करने का बड़ा फैसला लिया था। बैन किए गए ऐप्स की लिस्ट में ढेरों पॉप्युलर ऐप्स शामिल हैं और TikTok, UC Browser और Shareit जैसे नाम हैं। ऐप्स को बैन किए जाने की वजह इनका चाइनीज होना ही नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा और एकता को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम मानते हुए ऐसा किया गया है। केन्द्र सरकार के आदेश के बाद करीब 59 ऐप्स को जल्द ही गूगल प्ले स्टोर और ऐपल ऐप स्टोर से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।