पनामा पेपर्सः 500 भारतीय हस्तियों के नामों पर कब होगी कार्रवाई

पनामा पेपर्स में 500 भारतीय हस्तियों के नामों का खुलासा हुआ जिन्होंने टैक्स चोरी और काला धन सफेद करने के लिए टैक्स हैवन माने जाने वाले देशों में धन का निवेश किया। इस सूची में देश के कई जानेमाने उद्योगपतियों, फिल्मी सितारों और खिलाड़ियों का भी नाम आया। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, पंचकूला, देहरादून, वडोदरा और मंदसौर के व्यापारियों के नाम भी दस्तावेजों में हैं।

कई विदेशी हस्तियों के भी नाम
पनामा की विधि फर्म मोजैक फोंसेका के लीक हुए टैक्स दस्तावेजों से दुनिया की कई प्रमुख हस्तियों के नाम हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के करीबियों, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (दोषी करार), मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद, पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनजीर भुट्टो, लीबिया के पूर्व शासक कर्नल गद्दाफी समेत कई हस्तियों के नाम हैं।
सउदी अरब के किंग सलमान बिन और अजरबैजान के राष्ट्रपति के बच्चों ने भी टैक्स बचाने के लिए ऑफशोर देशों में कंपनियां बनाई हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के परिवार का ऑफशोर खातों से संबंध है। इसी तरह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के पिता का भी इसी तरह के खातों से संबंध है।

खुलासा दर खुलासा
1.15 करोड़ टैक्स दस्तावेज लीक हुए हैं पनामा पेपर्स के
128 बड़े नेताओं ने अपनी संपत्ति छुपाने और कर बचाने के लिए टैक्स हैवेन देशों की मदद ली।
35 देशों में दफ्तर हैं मोसैक फॉन्सेका लॉ फर्म के जो लीक दस्तावेजों की जांच कर रहा है।
78 देशों की 109 मीडिया कंपनियों के पत्रकारों ने दस्तावेजों की जांच की है।
2.6 टेराबाइट डेटा सामने आया है पेपर लीक में जो लगभग 600 डीवीडी में आ सकता है।
1977 से लेकर 2015 तक लगभग 40 वर्षों का डाटा जांच में सामने आया है।

पनामा में विदेशी निवेश पर टैक्स नहीं

पनामा जैसे देश में विदेशी निवेश पर कोई टैक्स नहीं लगता। पनामा में दो तरह के कर वसूले जाते हैं। एक टेरेट्रियल टैक्स सिस्टम दूसरा है कॉर्पोरेशन टैक्स सिस्टम। रेसिंडेंट और नॉन रेसिडेंट कंपनियों से तभी टैक्स वसूला जाता है, जब आय देश में ही हुई हो।

40 लाख जनसंख्या है पनामा देश की राजधानी पनामा सिटी है।
3.50 लाख से ज्यादा गोपनीय कंपनियां हैं स्थापित की गई हैं पनामा में
25 फीसदी टैक्स लगता है कॉर्पोरेशन टैक्स सिस्टम में।
1.5 मिलियन डॉलर से ज्यादा टैक्सेबल रेवेन्यू उन पर अल्टरनेटिव टैक्स लग सकता है।
1.168 फीसदी टैक्स लगेगा उनके कुल टैक्सेबल आय पर ज्यादा से ज्यादा।
25 फीसदी टैक्स लग सकता है नेट टैक्सेबल आय पर।

ट्रेन की टिकट सस्ती होने के आसार

रेलवे में खाने को लेकर आए दिन कोई न कोई शिकायत मिलती रहती है। ऐसे में बहुत से यात्री चाहते थे कि टिकट के साथ खाना लेना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। अगर आप भी ऐसे लोगों में से हैं जो ट्रेन का खाना पसंद नहीं करते हैं, तो आपके लिए रेलवे एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया है।
खाने के नहीं देने होंगे पैसे बुधवार को रेलवे ने घोषणा करते हुए कहा है कि अब आपको ट्रेन टिकट खरीदते समय खाने के पैसे देना जरूरी नहीं होगा। यह नया नियम 26 जुलाई से प्रभावी हो चुका है। इसका फायदा सबसे अधिक उन लोगों को होगा, जिन्हें ट्रेन का खाना पसंद नहीं आता था और वह उसका पैसा नहीं देना चाहते थे। अब आप टिकट बुक करते समय चाहें तो खाने का पैसा दें या चाहें तो खाने को टिकट से हटा दें, आपकी मर्जी।
इन ट्रेनों में मिलेगी सुविधा रेलवे ने कैटरिंग को फिलहाल 31 प्रीमियम ट्रेनों में वैकल्पिक बनाया है। इन 31 प्रीमियम ट्रेनों में 7 राजधानी, 6 शताब्दी और दूरंतो शामिल हैं। फिलहाल रेलवे की तरफ से उन 31 प्रीमियम ट्रेनों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन ट्रेनों की टिकटें सस्ती हो जाएंगी, क्योंकि आपके लिए खाने के पैसे देना वैकल्पिक कर दिया जाएगा।
ये भी होगा बदलाव कैटरिंग सेवा को बेहतर बनाने के लिए आईआरसीटीसी यात्रियों से उनके फीडबैक लेगी। इसके अलावा, भारतीय रेलवे के तहत चल रहे 100 किचन को आईआरसीटीसी को दे दिया जाएगा और साथ ही 20 नए मॉडर्न किचन भी खोले जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि आईआरसीटी के ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दी जा सकें।

श्रमिकों को मिलेगा नया न्यूनतम वेतन का लाभ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नए वेतन विधेयक (नए वेज कोड बिल) को मंजूरी दे दी है, जिससे देशभर में चार करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। इसमें मजदूरों से जुड़े चार कानूनों को मिलाया गया है, इससे सभी क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित होगी।
बताया जा रहा है कि वेतन लेबर कोड बिल में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948, वेतन भुगतान कानून 1936, बोनस भुगतान अधिनियम 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 को एक साथ जोड़ा गया है। मसौदे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है।
इस विधेयक में केंद्र सरकार को सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित करने का अधिकार देने की बात कही गई है। साथ ही उसके फैसले को सभी राज्यों को मानना होगा। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम मजदूरी से अधिक राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्र के हिसाब से बढ़ा सकती हैं। इस बिल को 11 अगस्त को समाप्त हो रहे मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा।
नए न्यूनतम मजदूरी मानदंड सभी कर्मचारियों पर लागू होगा। फिलहाल केंद्र और राज्य का निर्धारित न्यूनतम वेतन उन कर्मचारियों पर लागू होता है, जिन्हें मासिक 18,000 रुपए तक वेतन मिलता है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार सभी उद्योगों के श्रमिकों के लिए एक न्यूनतम वेतन तय हो सकेगा। इसमें वो भी शामिल हो जाएंगे, जिन्हें 18,000 रुपए से अधिक वेतन मिलता है।
इससे पहले, श्रम मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने राज्यसभा को लिखित जवाब दिया कि श्रमिकों पर द्वितीय राष्ट्रीय आयोग ने सिफारिश की है कि मौजूदा मजदूर कानूनों को व्यापक रूप से कामकाज के आधार पर चार या पांच लेबर कोड्स में बांटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय मजदूरी पर चार लेबर कोड्स को ड्राफ्ट करने वाला है, जिसमें औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, कल्याण और सुरक्षा, और कामकाजी परिस्थितियां, शामिल हैं।

राष्ट्रपति के भाषण को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शपथ लेने के बाद पहले भाषण पर बवाल हो गया है। बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण का मुद्दा उठाया। आनंद शर्मा ने भाषण में दीनदयाल उपाध्याय की महात्मा गांधी से तुलना करने पर सवाल किया। उन्होंने भाषण में पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी का नाम लेने का भी मुद्दा उठाया।
इसके बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई मेंबर राष्ट्रपति के भाषण पर सवाल खड़ा कर सकता है। अरुण जेटली ने आनंद शर्मा के बयान को हटाने की मांग की है। वहीं जेटली ने कहा कि विपक्ष इस प्रकार के मुद्दे टीवी पर आने के लिए उठाता है। जिसपर विपक्ष ने काफी हंगामा किया।
गौरतलब है कि शपथ के बाद रामनाथ कोविंद ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, दीनदयाल उपाध्याय, राजेंद्र प्रसाद, राधाकृष्णन, एपीजे कलाम और प्रणब मुखर्जी का नाम लिया था। शपथ लेने के बाद रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि मुझे भारत के राष्ट्रपति का दायित्व सौंपने के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं। मैं पूरी विनम्रता के साथ इस पद को ग्रहण करता हूं। सेंट्रल हॉल में आकर पुरानी यादें ताजा हुई, सांसद के तौर पर यहां पर कई मुद्दों पर चर्चा की है। मैं मिट्टी के घर में पला बढ़ा हूं, मेरी ये यात्रा काफी लंबी रही है।
रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि देश के नागरिक ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। हमें उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। पूरा विश्व भारत की ओर आकर्षित है, अब हमारे देश की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूसरे देशों की मदद करना भी हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में देश अपनी आजादी के 75 साल पूरा कर रहा है, हमें इसकी तैयारी करनी चाहिए। हमें तेजी से विकसित होने वाली मजबूत अर्थव्यवस्था, शिक्षित समाज का निर्माण करना होगा। इसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीनदयाल उपाध्याय ने की थी।

मानहानि के मामले में कोर्ट ने लगाया सीएम पर जुर्माना

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा दायर मानहानि के दूसरे मामले में जवाब दाखिल नहीं करने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इससे पहले केजरीवाल को बड़ा झटका तब लगा जब इस केस में उनका बचाव कर रहे जाने-माने वकील राम जेठमलानी ने आप संयोजक पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए आगे पैरवी करने से साफ इनकार कर दिया।
यही नहीं आज सुनवाई से पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल को निर्देश दिया कि वह अपने और आम आदमी पार्टी के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ दर्ज मानहानि के मुकदमे में जिरह के दौरान केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से अपमानजनक सवाल नहीं करे।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि मुख्यमंत्री को गरिमापूर्ण तरीके से और कानून के अनुसार भाजपा के वरिष्ठ नेता जेटली से जिरह करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि गरिमा बनाए रखनी होगी, क्योंकि जिरह की आड़ में किसी व्यक्ति से अपमानजनक और अभद्र भाषा में बात नहीं होनी चाहिए। बहरहाल, न्यायालय ने केजरीवाल के खिलाफ कोई आदेश पारित नहीं किया।
अदालत ने केजरीवाल की उस दलील पर गौर किया कि उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी को जेटली के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के निर्देश नहीं दिए थे। अदालत जेटली की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मांग की गई है कि मानहानि के मुकदमे में व्यवस्थित और उचित तरीके से बयान दर्ज कराए जाए।
मानहानि के मुकदमे में केजरीवाल के अलावा राघव चड्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक वाजपेयी आरोपी बनाए गए है। उन्होंने भाजपा नेता जेटली पर आरोप लगाए थे कि वर्ष 2000 से 2013 के बीच डीडीसीए के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार किया। जेटली ने इन आरोपों से इनकार किया है।

कैग ने खोली भारतीय रेला सेवा की पोल!

नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने रेल मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए स्टेशनों व ट्रेनों में परोसा जाने वाला खाना यात्रियों के खाने योग्य नहीं बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे के खाने में कीलें निकली। पेंट्रीकार में चूहे एवं काकरोच पाए गए।
इससे अधिक गंभीर बात यह है कि रेलवे ही ठेकेदारों को घटिया, बासी, कम मात्रा और अधिक दरों पर खाना देने के लिए मजूबर करती है। यात्रियों को ब्रांडेड के बजाए दूसरी कंपनियों का बोलतबंद पानी दिया जाता है। इतना ही नहीं 22 ट्रेनों में पेय, काफी, चाय और शूप तैयार करने में सीधे नल से आ रहे अशुद्ध जल का उपयोग किया जा रहा है।
कैग ने शुक्रवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे की खानपान सेवाओं की कलई खोल दी है। कैग ने रेलवे अफसरों के साथ संयुक्त जांच में पाया कि खाना बनाने में साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। बेस किचन व पेंट्रीकार कॉकरोच-चूहे घूमते हैं। लखनऊ-आनंद विहार डबल डेकर (ट्रेन नंबर 12583) में एक यात्री के कटलेट में खाते समय कील निकली। इसी प्रकार एक अन्य ट्रेन कानपुर दिल्ली शताब्दी की शिकायत पुस्तक में भी खाने में कील निकलने की शिकायत दर्ज है। दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेनों (ट्रेन नंबर 12260 व 12269) में कॉकरोच व चूहे देखे गए। इसी प्रकार जांच के दौरान वेलकम ड्रिंक को नल के पानी से बनाते हुए देखा गया।
कैग ने कहा कि खाने की रसीद यात्रियों को नहीं दी जाती है। ट्रेनों की कोच में मैन्यू नहीं लगया जाता है जिससे खाने की दरें व मात्रा पता चल सके। यात्रियों को घटिया खाना कम मात्रा में परोसा जाता है, और तय मूल्य से अधिक पैसा लिया जाता है। यह स्थिति यात्री ट्रेनों व रेलवे स्टेशनों दोनो जगह की बनी हुई है।
रेलवे खानपान की गुणवत्ता की जांच और नियंत्रण प्रभावी ढ़ग से लागू करने में विफल साबित हुआ है। रेलवे बोर्ड से लेकर जोनल रेलवे तक शिकायत प्रणाली व्यवस्था लागू की गई, लेकिन इनकी संख्या में कमी नहीं आ रही है। कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि खानपान नीति में बार बार परिर्वतन कर आईआरसीटीसी से लेने और फिर देने के फैसले से खानपान व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। 2010 से इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
कैग व रेलवे के संयुक्त जांच में पाया गया कि जोनल रेलवे ने मास्टर प्लान बनाकर सभी स्टेशनों व ट्रेनों में खानपान आपूर्ति की ठीक प्रकार से निगरानी नहीं की। लंबी दूरी की ट्रेनों में पेंट्रीकार नहीं थी। ट्रेनों में खाना आपूर्ति के लिए रेलवे मात्र तीन फीसदी बेस किचन का प्रयोग करती है, शेष बेस किचन कैटरिंग ठेकेदारों द्वारा रेल परिसर से बाहर बनाया जाता है। यहां रेलवे का निगरानी तंत्र नहीं है। इसलिए खाना बनाने की गुणवत्ता, बेस किचन की साफ सफाई, कम मात्रा में खाना पैक करना आदि अनियमितताएं होती है।
रेलवे ने बेस किचन, कैटरिंग यूनिट, विशिष्ठ बेस किचन जैसे फूड प्लाजा, फूड कोर्ट, फास्ट फूड यूनिट, ट्रेन साइड वेडिंग लगाने की दिशा में ठोस काम नहीं किया। कैग ने सिफारिश की है कि आईआरसीटीसी को खानपान सेवा को देने के नियम को सरल बनाया जाना चाहिए। पेंट्रीकार में गैस बर्नर के स्थान पर इलेक्ट्रिकल चूल्हा लगाना चाहिए।

संघ के बड़े अधिकारियों के हुए बंपर तबादले!

पिछले कुछ दिनों से देशभर में राष्ट्रपति चुनाव की खबर हर मीडिया संस्थान में सुर्खियों में बना रहा, ऐसे में शायद ही किसी को इस बात की भनक लगी हो कि इस बीच आरएसएस में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है। जी हां जिस वक्त राष्ट्रपति के चुनाव हो रहे थे और उसके मतों की मतगणना हो रही थी आरएसएस देशभर में कई अधिकारियों के तबादले कर रहा था।
एक ही जगह आरएसएस की ओर से जो बड़ा तबादला किया गया है वह आरएसएस के बौद्धिक प्रचारक स्वांत रंजन हैं, जोकि पिछले 12 साल से पटना में तैनात थे, लेकिन अब उनका तबादला कर दिया गया है। उन्हें पटना से हटाकर जयपुर भेज दिया गया है। इसके साथ ही आरएसएस ने कई अन्य पदाधिकारियों का भी तबादला किया है।
बड़े स्तर पर किया गया बदलाव
सहकार भारती संगठन सचिव विजय देवांगन का अभ पूर्वोत्तर भारत का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा कई अन्य अधिकारियों को भी हटाया गया है जोकि भारत सहित विदेशों में स्थिति आरएसएस के हॉस्टल का जिम्मा देखते थे। सूत्रों की मानें तो रंजन उन शीर्ष लोगों में शामिल हैं जिन्हें जम्मू में गुरुवार को हुई आरएसएस की बैठक के आखिरी दिन हटाया गया है।
बड़े नेताओं का किया गया
तबादला सूत्रों की मानें तो नरेंद्र कुमार जोकि अखिल भारतीय सहप्रचारक प्रमुख हैं, उन्हें रंजन की जगह लेने के लिए तैनात किया गया है। अब वह पटना में स्वांत रंजन की जगह लेंगे। नरेंद्र कुमार अभी तक दिल्ली में अहम भूमिका निभा रहे थे। यह तमाम अहम फैसले तीन दिन तक चले जम्मू कश्मीर में संगठन की तीन दिवसीय बैठक में लिए गए हैं। यह आरएसएस की सालाना बैठक थी, जिसमें आला अधिकारियों का तबादला किया गया है।
200 प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
आरएसएस की इस वार्षिक बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे। यह बैठक 18 जुलाई को प्रारंभ हुई थी। इस बैठक में तकरीबन 200 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। आपको बता दें कि इसी वर्ष मार्च में जो रिपोर्ट सामने आई थी उसके अनुसार आरएसएस देशभर में 57,233 शाखाएं लगाती है।

कोविन्द का परिवार इन्हें भी ले जायेगा राष्ट्रपति भवन!

देश के नये राष्ट्रपति के चुनाव के लिए गुरुवार को हुई मतगणना में भाजपानीत एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने कांग्रेस और यूपीए की उम्मीदवार और अपनी प्रतिद्वंदी मीरा कुमार को भारी अंतर से हरा दिया है। अब रामनाथ कोविंद का महामहिम बनना तय हो गया है।
रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। जाहिर सी बात है कि इसके बाद कोविंद रायसिना हिल्स स्थित राष्ट्रपति भवन में रहेंगे। कोविंद के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा, बहु और बेटी हैं. लेकिन उनके परिवार में कुछ और सदस्य हैं, जो इनसान तो नहीं, लेकिन उनके लिए काफी अजीज हैं। ये खास सदस्य हैं वे आधा दर्जन देसी नस्ल के कुत्ते, जो कोविंद जी के घर के बाहर ही रहते हैं। इनके नाम हैं – किशमिश, कट्टी, लिली, कालू व अन्य।
एक अंगरेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में बिहार का गर्वनर बनने के बाद रामनाथ कोविंद का परिवार दिल्ली में नॉर्थ एवेन्यू 144 नंबर रह रहा है। बताते चलें कि कोविंद जी का परिवार इन देसी कुत्तों का काफी खयाल रखता है। परिवार के लोग हर दिन समय से इन कुत्तों को खाना देते हैं। मेन्यू कुछ इस तरह है- सुबह में लगभग 2 लीटर दूध, दोपहर में रोटी-चिकन और रात में रोटी-दूध।
खास बात यह है कि अगर इनमें से कोई भी कुत्ता अस्वस्थ हो जाये या वह घायल हो जाये तो कोविंद परिवार उनका इलाज भी कराता है। गौरतलब है कि कोविंद जी की बहू पेशे से टीचर हैं और वह इन कुत्तों का खास ख्याल रखती हैं। बताया जाता है कि एक बार कालू नाम के कुत्ते को चोट लग गयी, तो खुद कोविंद जी के बेटे इलाज के लिए उसे अस्पताल ले गये। यही नहीं, एक बार नगर निगम की गाड़ी लिली को पकड़ कर ले जा रही थी, तो परिवार ने उसको उतरवा कर रोक लिया।
कहते हैं कि कुत्ते अपनी रोटी की कीमत जरूर चुकाते हैं। उसी तरह कोविंद जी के ये कुत्ते भी अपना फर्ज बखूबी निभाते हैं। कोविंद जी के फ्लैट के आस-पास ये पूरी मुस्तैदी के साथ पहरा देते हैं और पूरी हिफाजत करते हैं। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति उनके फ्लैट के आस-पास नजर आये तो ये कुत्ते उस पर भौंक कर, गुर्रा कर उसे उल्टे पांव लौटने को मजबूर कर देते हैं।
अब चूंकि कोविंद जी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं, तो अब उनका परिवार राष्ट्रपति भवन में शिफ्ट हो जायेगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या परिवार के चहेते कुत्ते भी परिवार के साथ राष्ट्रपति भवन जायेंगे…?

मुनाफाखोरी रोकने को मोदी सरकार ने बाजार में उतारे जासूस

एक जुलाई से जीएसटी लागू करने के बाद अब मोदी सरकार ने आम आदमी के फायदे के लिए 200 जासूसों को बाजार में उतारा है। ये जासूस देश के छोटे-बड़े शहरों के साथ-साथ कस्बों में घूमेंगे और ऐसे बिजनेसमैन, होलसेलर और रीटेलर की पहचान करेंगे जो नए टैक्स ढ़ांचे का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
केन्द्र सरकार ने यह कदम बीते एक हफ्ते के दौरान देश के अलग-अलग कोने से मुनाफाखोरी की शिकायतें मिलने के बाद उठाया है। गौरतलब है कि देश के नए टैक्स ढ़ांचे के केन्द्र में मुनाफाखोरी रोकने के प्रावधान है और यदि मुनाफाखोरी पर लगाम नहीं लगाई जाएगी को जीएसटी का पूरा मकसद ही फेल हो सकता है।
केन्द्र सरकार को उम्मीद है कि जीएसटी लागू होने के बाद कंपनियां और दुकानदार पूरी इमानदारी से कारोबार करेंगी तो इस कर सुधार का सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को मिलेगा। वहीं इस सुधार में कारोबारियों ने बेइमानी के नए रास्ते इजात कर लिए तो देश में महंगाई बढ़ने की आसार पैदा हो जाएंगे।

जासूस कौन है और कहां घूमेंगे?
केन्द्र सरकार की तैयारी के मुताबिक ये 200 जासूस सीनियर आईएएस, आईआरएस और आईएफएस अधिकारियों में से चुने गए हैं। इन जासूसों को सरकार ने जिम्मेदारी दी है कि वह लगातार देश के अलग-अलग हिस्सों में घूमकर जरूरी उत्पादों की कीमत का पूरा जाएजा लेंगे। बाजार में प्राइस ट्रेंड पर लगातार अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को देंगे। किसी भी जगह दुकानों पर बिक रहे सामान की कीमत का जायजा लेने के लिए खरीदारी कर सकते हैं।
यह भी पढे़ ….खुलासे के बाद लालू के परिवार की मुसीबतें बढ़ी

आम आदमी को ट्राई दे रहा सौंगात, दो रुपये में इंटरनेट कनेक्शन

भारत के आम नागरिकों के लिए खुशखबरी! टेलीकॉम रेगुलेटर (ट्राई) भारत में पब्लिक वाई-फाई सुविधा देने की योजना पर काम कर रहा है। इन वाई-फाई हॉटस्पॉट्स को पब्लिक डेटा ऑफिस (पीडीओ) के नाम से जाना जाएगा। ये पीडीओ फोन बूथ की तरह ही होंगे। इस पॉयलट प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने के लिए ट्राई ने कंपनियों को आमंत्रित किया है।
इन वाई-फाई के प्लान्स शुरुआत में 2 रुपये से लेकर 20 रुपये तक होंगे। ट्राई का कहना है कि इससे भारत के लोगों को आसानी से सस्ता इंटरनेट उपलब्ध होगा और नेटवर्क से लोड भी कम हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट का मकसद वाई-फाई ऐक्सेस नेटवर्क इंटरफेस पर बेस्ड ओपन सिस्टम तैयार करना है, जिसके लिए आवेदनकर्ताओं से सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। ट्राई दो-तीन दिन के भीतर आर्किटेक्चर डॉक्युमेंट जारी करने जा रहा है। इस सिस्टम से छोटी-छोटी दुकानों पर भी कंपनियां ऐसे पीओडी बना पाएंगी। इसके लिए किसी भी तरह के लाइसेंस की जरूरत तो नहीं होगी लेकिन टेलीकॉम विभाग के पास रजिस्ट्रेशन और यूजर्स का केवाईसी लेना जरूरी होगा।
इस पॉयलेट प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने के लिए कंपनियां 25 जुलाई तक अपनी डीटेल्स भेज सकती हैं। इस प्रोजेक्ट के बाद भारत में वाई-फाई हॉटस्पॉट की संख्या 31000 हो जाएगी।
यह भी पढे़ …. मुंबई बम ब्लास्ट में शामिल आरोपी नजीबाबाद से गिरफ्तार