कॉल ड्रॉप हुयी तो उपभोक्ता कंपनी पर लगा सकता है जुर्माना

भारत में हर व्यक्ति के पास दो मोबाइल फोन है। नेटवर्क की समस्या से जुझ रहे उपभोक्ता कॉल ड्रॉप होने और नेटवर्क परेशानी के चलते दो फोन रख रहा है। पिछले कुछ समय से कॉल ड्रॉप की ज्यादा शिकायतें दर्ज हो रही है। कंपनी ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में उपभोक्ताओं की कॉल ड्रॉप कर रही है। जिससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
लेकिन अब ट्राई ने अधिक कॉल ड्रॉप होने पर टेलीकॉम कंपनियों पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा है। कॉल ड्रॉप प्रतिशत को अब पूरे सर्किल के औसत के बजाय मोबाइल टावर के स्तर पर मापा जाएगा। ट्राई की ओर से मोबाइल कॉल की गुणवत्ता के बारे में निर्धारित नए नियमों में ये कड़ी शर्तें लादी गई हैं। ये नियम एक अक्टूबर से लागू होंगे।
टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के चेयरमैन आरएस शर्मा ने कहा, हमने 1-5 लाख रुपए तक के वित्तीय दंड का प्रावधान किया है। नेटवर्क के प्रदर्शन के आधार पर यह ग्रेडवार जुर्माने की व्यवस्था है।
ट्राई के प्रभारी सचिव एसके गुप्ता ने कहा, यदि कोई ऑपरेटर लगातार दूसरी तिमाही में कॉल ड्रॉप के बेंचमार्क को पूरा करने में विफल रहता है तो उस पर डेढ़ गुना और यदि तीसरी तिमाही में भी विफल रहता है तो तीन गुना जुर्माना लगेगा। लेकिन किसी भी स्थिति में जुर्माना 10 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होगा। अब तक के नियमों में किसी सर्किल में निर्धारित से ज्यादा कॉल ड्रॉप होने पर प्रति तिमाही एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

मीरवाइज ने फिर उगला घाटी में जहर, दस आंतकी पैदा होने का किया दावा!

हुर्रियत कांफ्रैंस (एम) चेयरमैन मीरवाइज उमर फारुख के बयान ने एकबार फिर से घाटी में हलचल पैदा कर दी है। मीरवाइज ने कहा कि दिल्ली में बैठी सरकार को लगता है कि हथियार के बल पर जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित की जा सकती है लेकिन मैं उनको कहना चाहूंगा किए अगर आप एक आतंकी को मारोगे तो दस आतंकी पैदा होंगे।
मीरवाइज उमर फारुख को पिछले 57 दिनों से अपने घर में नजरबंद किया गया था। नजरबंद से छूटते ही मीरवाइज उमर फारुख जामिया मस्जिद पहुंचे और भीड़ को संबोधित किया। मीरवाइज ने कहा कि पिछले 70 साल से कश्मीर की यही परंपरा रही है। कश्मीर में लोग पैदा होते हैं और उन्हें मालूम होता है कि यह विवादित क्षेत्र है। इसी सोच के साथ वे युवा होते हैं और एक दिन मारे जाते हैं। यह लड़ाई अनवरत जारी है।
मीरवाइज ने कहाकि कश्मीर के युवा और छात्र आए दिन स्कूल और कॉलेज में प्रदर्शन करते हैं जिसकी वजह से बार-बार घाटी बंद का ऐलान होता है। इससे साफ पता चलता है कि कश्मीर के लोग क्या चाहते हैं। मीडिया पर निशाना साधते हुए मीरवाइज ने कहा कि मीडिया में कश्मीर और कश्मीर के लोगों को लेकर गलत प्रचार किया जा रहा है। ऐसा करने से सरकार को कुछ हासिल होने वाला नहीं है।

शाह कर्नाटक में कमल खिलाने को खेलेंगे येदियुरप्पा कार्ड!

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का शनिवार से कर्नाटक दौरा शुरु हो गया है। पहले दिन चुनावी बिगुल फूंकते हुए शाह ने नारा दिया- अबकी बार, बीजेपी सरकार। कई गुटों में बंटी राज्य बीजेपी इकाई में जोश भरने के इरादे से शाह तीन दिवसीय दौरे पर कर्नाटक पहुंचे है। उन्होंने कहा कि राज्य बीजेपी के प्रमुख बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में पार्टी विधानसभा चुनाव जीतेगी।
केम्पे गौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीक पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, दोस्तों, हमारी पार्टी एकजुट है और आगामी दिनों में येदियुरप्पा के नेतृत्व में चुनावी लड़ाई में उतरने के लिए तैयार है। देखते रहिए हम राज्य में बीजेपी की सरकार बनाएंगे। कर्नाटक में इस वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसके लिए पार्टी ने 150 से ज्यादा सीट जीतने का लक्ष्य रखा है। सत्तारूढ़ कांग्रेस सत्ता बरकरार रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है लेकिन बीजेपी ने कहा है कि उसकी ध्रुवीकरण की राजनीति का मुकाबला करने के लिए उसने रणनीति तैयार कर ली है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार ने कहा कि बीजेपी न तो लिंगायत धर्म के मुद्दे को उछालेगी न ही कांग्रेस के ध्रुवीकरण की राजनीति के खिलाफ कन्नड़ भाषा विवाद को राजनीतिक हथियार बनाएगी। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस राज्य की सबसे बड़े लिंगायत समुदाय के अलग धर्म का समर्थन करती है जिसे बीजेपी को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी का लिंगायत धर्म समुदाय में काफी जनाधार है। कुमार ने कहा कि बीजेपी लोगों और समुदायों के बीच घृणा फैलाने के लिए भाषा के मुद्दे का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहती। शाह का कर्नाटक दौरा पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरे देश के 110 दिन के उनके दौरे का हिस्सा है।

उत्तराखंड में घूम रहा एक लाख का ईनामी बदमाश, पुलिस के साथ मुठभेड़ में गिरफ्तार

नानकमत्ता का बिचई गांव शनिवार तड़के गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। पुलिस ने मुठभेड़ के बाद इस गांव से दिल्ली के एक इनामी बदमाश जरनैल सिंह जैली को दबोच लिया। उस पर कई मुकदमे दर्ज हैं और वह हत्या के एक मामले में फरार चल रहा था। उस पर एक लाख का इनाम घोषित था। मुठभेड़ में जैली गोली लगने से घायल हो गया। हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में इलाज के बाद देर सायं उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया। शनिवार तड़के करीब चार बजे जंगल के बीच बसे बिचई गांव को तीन गाडिय़ों से आए दिल्ली पुलिस के दस जवानों ने घेर लिया। उसे सूचना मिली थी कि यहां सेक्टर 36, झंगोला गांव, थाना अलीपुर का रहने वाला जरनैल सिंह उर्फ जैली अपनी बुआ कुलवंत कौर के घर में छिपा हुआ है।
इधर अपने को पुलिस से घिरा जानकर जैली कमरे से निकलकर खेत में भाग निकला। दिल्ली पुलिस के सिपाही भी उसके पीछे दौड़े और गोलियां चलाईं। तड़के हुई गोलियों की तड़तड़ाहट से लोगों में दहशत फैल गई। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते पुलिस ने जैली को कुछ दूरी पर गिरा लिया। गोली उसकी पीठ में लगी। पुलिस उसे घसीटते हुए खेत से बाहर लाई और बिना किसी से कुछ कहे गाड़ी में डालकर अपने साथ ले गई। बाद में पुलिस अभिरक्षा में उसे हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। एसएसपी सदानंद दाते ने बताया कि तीन अगस्त, 2015 को दिल्ली के थाना महिंद्रा पार्क में दर्ज हत्या के एक मुकदमे में जैली वांछित है। उस पर एक लाख रुपये का इनाम है। इसके साथ ही जैली पर थाना अलीपुर, दिल्ली में भी कई मुकदमे दर्ज हैं।

हाईकमान सुलझा पायेगा मदन कौशिक और सतपाल महाराज के समर्थकों में मारपीट का मामला!

हरिद्वार का घटनाक्रम अब भाजपा हाईकमान के दरवाजे पर आ गया है। हाईकमान अब मामले में दोनों मंत्रियों के बीच सुलह करवायेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। दो कैबिनेट मंत्रियों के समर्थकों के सार्वजनिक रूप से आमने-सामने आ जाने से भाजपा की किरकिरी हो रही है। वहीं अनुशासित पार्टी की छवि को भी इस घटनाक्रम से नुकसान पहुंचा है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद मंत्रिमंडल में नंबर दो की हैसियत के मंत्री हैं। इसी साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव के जरिये महाराज ने राज्य की राजनीति में कदम रखा। उत्तराखंड में भाजपा की भारी भरकम जीत के बाद वह भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, हालांकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर पुराने पार्टी कार्यकर्ता त्रिवेंद्र सिंह रावत को तरजीह दी।
वहीं, हरिद्वार के विधायक मदन कौशिक भी भाजपा के कद्दावर नेताओं में शामिल हैं। विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज करते आ रहे कौशिक की छवि तेजतर्रार नेता की है। कौशिक के कद का अंदाजा इस बात ये लगाया जा सकता है कि उन्हें प्रदेश सरकार के प्रवक्ता की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।
गुरुवार को हुए टकराव के बाद जिस तरह पार्टी नेता और विधायक साफ तौर पर दो खेमों में बंटे नजर आए, उससे यह भी स्पष्ट हो गया कि चिंगारी काफी वक्त से सुलग रही थी और मौका सामने आते ही इसने असंतोष की आग कर रूप ले लिया। हालांकि, अब प्रदेश नेतृत्व इस असहज स्थिति से निबटने के लिए आगे आ गया है। इससे समझा जा रहा है कि जल्द इस प्रकरण का पटाक्षेप हो जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया हादसा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने हरिद्वार की घटना को महज एक हादसा बताया है। कहाकि यह दो मंत्रियों के बीच टकराव जैसी कोई बात नहीं है। दरअसल, हरिद्वार में जलभराव को लेकर स्थानीय जनता में आक्रोश था। प्रशासन अगर आश्रम प्रबंधन से इस सिलसिले में पूछ लेता, तो यह नौबत आती ही नहीं।
उन्होंने कहा कि यह मामला सतपाल महाराज के आश्रम के लोगों और नगर निगम कर्मचारियों के बीच का है। इसे बेवजह राजनैतिक रूप से तूल नहीं देना चाहिए। मैंने दोनों मंत्रियों से इस संबंध में बात की है। परिवार का मामला है, जल्द सुलझा लिया जाएगा।

जिंदगीभर सम्मान पाने वाले हामिद अंसारी का ये कैसा बयान!

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने गुरुवार को संसद में केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। अपने कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने देश की राजनीति को गरमा दिया। उन्होंने संसद में मुसलमानों में असुरक्षा और भय का माहौल का जिक्र करते हुए जाते-जाते सियासी दांव खेला है। जानकार इसे कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मान रहे है, तो वहीं सोशल मीडिया में हामिद अंसारी की कडं़ी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया में चल रहे ट्रोल में लोगों ने पद जाने के बाद मुसलमानों में भय और असुरक्षा को लेकर उठाये गये तर्क पर सवाल खड़े कर रहे है।
उपराष्ट्रपति अंसारी ने कहा, मैंने 2012 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के हवाले से कुछ कहा था। आज भी मैं उनके शब्दों को कोट कर रहा हूं। किसी लोकतंत्र की पहचान इससे होती है कि उसमें अल्पसंख्यकों की कितनी सुरक्षा मिली हुई है? लोकतंत्र में अगर विपक्षी समूहों को स्वतंत्र होकर और खुलकर सरकार की नीतियों की आचोलना करने की इजाजत न हो तो वह अत्याचार में बदल जाती है। उपराष्ट्रपति के इस बयान पर उच्च सदन में खूब तालियां भी बजीं। अंसारी ने कहा, साथ में अल्पसंख्यकों की जिम्मेदारी भी जरूरी है। उनके पास आलोचना का अधिकार है लेकिन उस अधिकार का मतलब यह नहीं है कि संसद को बाधित करें। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता चर्चा में है न कि चर्चा को बाधित करने में।
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपने विदाई भाषण में शायराना अंदाज में राज्यसभा के सदस्यों को धन्यवाद कहा और शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने अपने भाषण के अंत में कहा, आओ कि आज खत्म करें दास्ताने इश्क, अब खत्म आशिकी के फसाने सुनाएं हम। अंसारी ने उपराष्ट्रपति के तौर पर लगातार 2 कार्यकाल पूरे किए। वह 2007 में उपराष्ट्रपति बने थे। बाद में 2012 में भी वह दोबारा उपराष्ट्रपति चुने गए।

किसने कहा, कर लो अपनी मनमर्जी, 2019 में देखूंगा आपको!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में सांसदों की उपस्थिति के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सदन में सांसदों को उपस्थित रहना चाहिए। उन्होंने कहा, आप और मैं कुछ नहीं हैं, जो है वह भाजपा है, पार्टी है। बार—बार व्हिप क्यों देना पड़ता है। अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उच्च सदन के लिये निर्वाचित हुए हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि सदन में गैर हाजिर रहने वाले पार्टी सदस्यों पर उनकी नजर रहेगी। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले भी प्रधानमंत्री ने सदन में सांसदों की उपस्थिति का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए सांसदों को सदन में रहने के लिए कहा था। हाल ही में संसदीय पार्टी की बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सदस्यों के सदन से अनुपस्थित रहने पर नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। संसद के वर्तमाल सत्र में ही राज्यसभा में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष का संशोधन के साथ पारित हो गया। इसके चलते केंद्र सरकार को किरकिरी का सामना करना पड़ा। सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों के पूरी संख्या में उपस्थित नहीं होने के कारण विपक्ष का संशोधन पारित हो गया था।
कुछ समय पहले शाह ने संसदीय दल की बैठक में लगातार गैरहाजिरी होने पर नाराजगी और निराशा जाहिर की थी। उन्होंने पार्टी सांसदों को संसद के दोनों सदनों में मौजूद रहने को कहा। साथ ही ये भी हिदायत दी कि इस बात को हल्के में ना लिया जाए और दोबारा ऐसा ना हो। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का स्वागत किया और पिछले तीन वर्षों के दौरान पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनके कामकाज की प्रशंसा की ।
मोदी ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी का अध्यक्ष होना कोई आसान काम नहीं है और अमित शाह ने अपने कौशल एवं कठिन परिश्रम से पार्टी संगठन का सफलतापूर्वक विस्तार किया है।

चीनी मीडिया ने दी, कांउटडाउन शुरु होने की धमकी!

चीन ने एक बार फिर भारत को धमकी दी है। चीन ने कहा है कि क्या होगा अगर हम उत्तराखंड के कालापानी और कश्मीर में घुस जाएंगे। डोकलाम मुद्दे पर चीन की ओर से इस प्रकार के लगातार बयान आ रहे हैं, इससे पहले मंगलवार को भी कहा गया था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1962 वाली गलती दोहरा रहे हैं।
सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने वीडियो जारी कर चेतावनी दी थी कि अगर भारत अपने सैनिक नहीं हटाता तो युद्ध होगा। वीडियो में ये भी कहा गया था कि भारत खुद को विपरीत हालात से निपटने के लिए तैयार नहीं कर रहा बल्कि देश की जनता को सब कुछ ठीक होने का दिलासा दे रहा है।
डोकलाम पर चीन-भारत के बीच गतिरोध अपने चरम पर है। भारत जहां युद्ध को स्थायी समाधान न बताकर शांति से समस्या के हल की वकालत कर रहा है, वहीं चीन की धमकियों का ग्राफ दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। इस बीच चीन के एक प्रमुख अखबार में संपादकीय लिखा गया है, जिसमें भारत को वक्त रहते हालात सुधारने की नसीहत दी गई है।
चाइना डेली अखबार के संपादकीय में लिखा गया है कि चीन और भारत के बीच युद्ध का काउंटडाउन शुरू हो गया है। इसके आगे लिखा गया है कि भारत को अब जल्द इस दिशा में कोई कदम उठा लेना चाहिए, क्योंकि शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाएं खत्म होती जा रही हैं।

देश में बैंकिंग महंगी होने के पीछे नोटबंदी और जीएसटी का असर!

कई दशकों से बैकों के कर्ज और कर्ज माफी से उनकी सेहत खराब हो चुकी है। सरकारी बैंकों का इंफ्रा और पॉवर सेक्टर में निवेश डूबा है जिसके चलते उन्हें 6.1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस नुकसान से बैंकों की कारोबारी तेजी लाने के लिए नया कर्ज देने की क्षमता को भी नुकसान हुआ है। वहीं सबसे ज्यादा डूबा कर्ज स्टील, टेक्सटाइल, पॉवर और इंफ्रा क्षेत्र में रहा है। गौरतलब है कि इन क्षेत्रों को दिए गए कर्ज यदि सही कंपनियों को दिए गए होते तो आज बैंकों को सबसे बड़ा मुनाफा इन्ही कर्ज के ब्याज पर होती और ग्राहकों को अच्छी से अच्छी सुविधा सस्ती दरों पर दी जा सकती थी, लेकिन अब बीमार पड़े बैंकों के पास ग्राहकों से धनउगाही कर अपनी लागत घटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
नोटबंदी और जीएसटी ने देश में बैंकिंग को महंगा कर दिया। नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद बैंकों द्वारा मिलने वाली कई मुफ्त सेवाओं पर चार्ज लगा दिया गया था। फिर जुलाई से लागू जीएसटी ने इन चार्जेस पर टैक्स लगाकर आम आदमी के लिए बैंकिंग सेवा को महंगा कर दिया। देश में बैंकों ने बढ़े हुए बैंकिग चार्जेस को अच्छी सुविधा देने क लिए जरूरी बताया तो रिजर्व बैंक ने कहा कि इससे बैंक को चलाने का खर्च कम किया जा सकेगा।
लेकिन अब बैंक ग्राहकों को केन्द्र सरकार और आरबीआई की दलील रास नहीं आ रही है जिसके चलते अलग-अलग फोरम पर बैंकों द्वारा वसूले जा रहे चार्जेस को मनमाने ढंग के उगाही तक कहा जा रहा है। लगातार बढ़ती शिकायतों के चलते केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक भी अब मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है।

कैसे चार्ज वसूल रहा बैंक
– बैंक ब्रांच और एटीएम से सीमित मुफ्त निकासी के बाद खाताधारकों से ट्रांजैक्शन चार्ज वसूला जा रहा है
– इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर जैसे नेफ्ट, आरटीजीएस और यूपीआई सेवाओं का इस्तेमाल करने के चार्ज में इजाफा
– एक फ्री चेकबुक के बाद नई चेकबुक लेने पर बैंक द्वारा फीस ली जा रही है
– ग्राहकों द्वारा मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करने पर बैंक फीस ले रही है
– इन सभी चार्जेस पर बैंक द्वारा जीएसटी के नाम पर भी ग्राहकों से पैसा वसूला जा रहा है

ये है बैंकों की सफाई
अब बैंक में पैसा रखने पर ग्राहकों को मिलने वाले ब्याज दर में भी कटौती कर बैंकों ने अपनी कमाई बढ़ा ली है। इन सभी कदमों को जायज ठहराने के लिए बैंक की दलील है कि इस कदम से उनके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट में लगातार इजाफा हो रहा है। बैंकों को अपनी सेवाओं का विस्तार करने की लागत और मौजूदा ब्रांचेस को चलाने का खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा बैंकों की दलील है कि पहले के मुकाबले देश में बैंकिंग सुविधा में बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। इस सुधारी हुई बैंकिंग की लागत को ग्राहकों को भी वहन करने की जरूरत है। वहीं बैंकों की यह भी दलील है कि ट्रांजैक्शन चार्ज केवल भारत में नहीं लिया जा रहा है। दुनियाभर के बैंकों में ग्राहकों से ऐसे चार्ज वसूले जाते है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दी राहत, शराब की दुकानें होंगी बहाल

राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में हाईवे पर शराब के ठेके और बार खुल सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नौ पहाड़ी जिलों में हाईवे पर 500 और 220 मीटर दूरी की बाध्यता खत्म कर दी है। देहरादून और नैनीताल की सात तहसीलों को भी इस छूट का लाभ दिया गया है।
शुक्रवार को इसके आदेश मिलने के बाद आबकारी विभाग ने इस पर काम शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने सिक्कम में हाईवे पर दुकान खोलने के लिए दूरी में दी जा रही छूट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। जिसमें कहा गया था कि उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों की परिस्थितियां भी सिक्किम की तरह हैं। ऐसे में यहां भी उसी आधार पर हाईवे में शराब की दुकानें, ठेके और बार खोलने में दूरी की छूट दी जाए।
इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुक्रवार को सरकार के पक्ष में फैसला दिया। जिसमें कहा गया कि सिक्कम के लिए मार्च में दी गई छूट के आधार पर ही उत्तराखंड के नौ पहाड़ी जिलों में दुकानें या बार खोलने के लिए हाईवे से 500 मीटर और 220 मीटर दूरी की बाध्यता नहीं रहेगी। आबकारी आयुक्त युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की है।

इन जिलों में मिलेगी छूट
कोर्ट के इस फैसले से चमोली, चंपावत, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में अब ठेके खोलने के लिए हाईवे से 500 मीटर या 220 मीटर की दूरी नहीं रखनी पड़ेगी। इससे विभाग को राजस्व का भी फायदा होगा।