35वीं बार मन की बात में मोदी बोले शिक्षक दिवस पर 5साल के लिये संकल्प लेकर पूरा करे

नरेंद्र मोदी ने 35वीं बार मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से देश को संबोधित किया। पीएम हर महीने के आखिरी रविवार को 11 बजे इस कार्यक्रम के माध्यम से देश को संबोधित करते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने हरियाणा में हुई हिंसा पर चिंता जताई। अहिंसा परमो धर्म ये हम बचपन से सुनते आए हैं। पीएम ने कहा कि मैंने लाल किले से भी कहा था कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी। चाहे वो सांप्रदायिक आस्था हो, चाहे वो राजनैतिक विचार धाराओं के प्रति आस्था हो, चाहे वो व्यक्ति के प्रति आस्था हो, चाहे वो परम्पराओं के प्रति आस्था हो, आस्था के नाम पर, कानून हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि कानून हाथ में लेने वाले, हिंसा के राह पर दमन करने वाले किसी को भी, चाहे वो व्यक्ति हो या समूह हो, न ये देश कभी बर्दाश्त करेगा और न ही कोई सरकार बर्दाश्त करेगी। हर किसी को कानून के सामने झुकना होगा, कानून जवाबदेही तय करेगा और दोषियों को सजा दे कर रहेगा।
स्वच्छता का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि 2 लाख 30 हजार से भी ज्यादा गांव, खुले में शौच से अपने आपको मुक्त घोषित कर चुके हैं। शौचालयों की कवरेज 39 से करीब-करीब 67 पहंची है। मैं आह्वान करता हूं कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती से 15-20 दिन पहले से ही स्वच्छता ही सेवा मुहिम चलाएं। ऐसा स्वच्छता खड़ी कर दें कि 2 अक्टूबर सचमुच में गांधी के सपनों वाली 2 अक्टूबर हो जाए। प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे की अपर्णा का मैसेज उठाते हुए कहा कि क्या आपको नहीं लगता है कि जब हम, हमारे घर के आस-पास कोई सामान बेचने के लिए आता है, कोई फेरी लगाने वाला आता है। किसी छोटे दुकानदार से, सब्जी बेचने वालों से हमारा संबंध आ जाता है, कभी ऑटो-रिक्शा वाले से संबंध आता है। जब भी हमारा किसी मेहनतकश व्यक्ति के साथ संबंध आता है तो हम उससे भाव का तोल-मोल करने लग जाते हैं, मोल-भाव करने लग जाते हैं। नहीं इतना नहीं, दो रुपया कम करो, पांच रुपया कम करो और हम ही लोग किसी बड़े रेस्त्रां में खाना खाने जाते हैं तो बिल में क्या लिखा है देखते भी नहीं हैं, धड़ाम से पैसे दे देते हैं। इतना ही नहीं शोरूम में साड़ी खरीदने जाएं तो कोई मोल-भाव नहीं करते हैं, लेकिन किसी गरीब से अपना नाता आ जाए तो मोल-भाव किए बिना रहते नहीं हैं। गरीब के मन को क्या होता होगा, ये कभी आपने सोचा है? उसके लिए सवाल दो रुपये- पांच रुपये का नहीं है। उसके ह्रदय को चोट पहुंचती है कि आपने वो गरीब है इसलिए उसकी ईमानदारी पर शक किया हैं। दो रुपया- पांच रुपया से आपके जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन आपकी ये छोटी-सी आदत उसके मन को कितना गहरा धक्का लगाती होगी कभी ये सोचा है? खेल पर पीएम ने कहा कि खेल मंत्रालय ने खेल प्रतिभा की खोज के लिए स्पोर्ट्स टैलेंट सर्च पोर्टल तैयार किया है। इस पर कोई भी बच्चा जिसने खेल के क्षेत्र में कुछ उपलब्धि हासिल की है, वो पोर्टल पर अपना बायोडाटा या वीडियो अपलोड कर सकता है। सलेक्ट इमर्जिंग प्लेयर्स को खेल मंत्रालय ट्रेनिंग देगा और मंत्रालय कल इस पोर्टल को लॉन्च करने वाला है। खुशी की खबर है कि भारत में 6 से 28 अक्टूबर तक फीका अंडर-17 वर्ल्ड कप का आयोजन होने जा रहा है।
पीएम ने कहा कि 5 सितंबर को हम सब शिक्षक दिवस मनाते हैं। हमारे देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस है। वे राष्ट्रपति जरूर थे, लेकिन जीवन भर अपने आप को एक शिक्षक के रूप में ही वो प्रस्तुत करते थे। वो हमेशा शिक्षक के रूप में ही जीना पसंद करते थे। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि इस बार जब हम शिक्षक दिवस मनाए। तो हम सभी एक संकल्प लें। हर किसी को 5 साल के लिए, किसी संकल्प से बांधिए, उसे सिद्ध करने का रास्ता दिखाइये और 5 साल में वो पाकर कर रहे। जीवन में सफल होने का आनंद पाएं।

बाढ़ से नुकसान की भरपाई को मोदी का बिहार को 500करोड़ी पैकेज

हवाई सर्वे के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मोदी के साथ रहे। पीएम मोदी ने बिहार के लिए 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है। इससे पहले पीएम मोदी ने पूर्णिया में सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील मोदी और आला अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए उच्चस्तरीय बैठक भी की। बिहार में बाढ़ की वजह से अब तक 418 लोगों की मौत हो गई है। हाई लेवल मीटिंग के बाद पीएम मोदी ने बिहार को हर मुमकिन मदद का भरोसा दिया है। मोदी ने बाढ़ से हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए एक केंद्रीय दल भेजने का भी आश्वासन दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों की फसल बीमा का तुरंत आंकलन करने के लिए बीमा कम्पनियां अपने पर्यवेक्षक तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में भेजें। जिससे किसानों को शीघ्र ही राहत पहुंचाई जा सके।
बाढ़ से प्रभावित सड़कों की मरम्मत के लिए सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को उपयुक्त कार्रवाई करने का भी निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ से विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर को जो नुकसान हुआ है उसकी शीघ्र बहाली के लिए भी केन्द्र, राज्य सरकार की हर संभव मदद करेगा। प्रधानमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपए एवं गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपए की दर से सहायता भी दी जाएगी।

उत्तराखंड में चीनी जूते के डिब्बे में छपा मिला तिरंगा

चीन अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इस बार डोकलाम विवाद के बीच एक चीनी कंपनी ने भारतीय ध्वज का अपमान किया है। दरअसल कंपनी ने अपने जूतों की पैकिंग के लिए बनाए गए डिब्बों पर तिरंगा बनाया हुआ है।
चीनी कंपनी की इस करतूत का उदाहरण उत्तराखंड के अल्मोड़ा में देखने को मिला। मिली जानकारी के अनुसार, अल्मोड़ा के एक स्थानीय दुकानदार बिशन बोरा ने डिस्ट्रीब्यूटर से चीनी कंपनी के जूते मंगवाए थे। तय वक्त में जूते भी मिल गएं दुकानदार ने जब जूतों का डिब्बा देखा तो वह दंग रह गए।
जूते बनाने वाली कंपनी ने डिब्बों पर तिरंगा बनाया हुआ था। मामले के तूल पकड़ते ही पुलिस के पास इसकी शिकायत पहुंचीं पुलिस ने जांच शुरू की तो पाया कि यह जूते उधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर शहर स्थित एक डिस्ट्रीब्यूटर ने भेजे हैं। जिले के एसएसपी ने फौरन डिस्ट्रीब्यूटर को तलब किया।
डिस्ट्रीब्यूटर ने बताया कि यह जूतों की खेप उसने दिल्ली के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर से मंगवाई थी। फिलहाल उत्तराखंड पुलिस जल्द दिल्ली वाले डिस्ट्रीब्यूटर से पूछताछ करने की बात कह रही है। पुलिस ने शिकायतकर्ता दुकानदार बिशन बोरा की तहरीर मिलने के बाद केस दर्ज कर लिया है।

काशीपुर की शायरा बानो के मजबूत इरादे से जगी आस

तीन तलाक के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाली शायरा बानो उत्तराखंड की बेटी है। शायरा उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली है। उनका निकाह साल 2002 में इलाहाबाद के रिजवान अहमद से हुई थी। ससुराल वालों की दहेज प्रताड़ना, फिर पति के तलाक देने के बाद शायरा बानो कोर्ट पहुंचीं। आरोप है कि पति शायरा बानो को लगातार नशीली दवाएं देकर याददाश्त कमजोर कर दिया और साल 2015 में मायके भेजकर तलाक दे दिया था। मार्च, 2016 में उतराखंड की शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी।
शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वह तीन बार तलाक बोलकर तलाक देने की बात को नहीं मानती हैं। शायरा की याचिका में मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 की धारा 2 की वैध्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। यही वह धारा है जिसके जरिये मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह, तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) और निकाह-हलाला जैसी प्रथाओं को वैध्यता मिलती है। इनके साथ ही शायरा ने मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 को भी इस तर्क के साथ चुनौती दी है कि यह कानून मुस्लिम महिलाओं को बहुविवाह जैसी कुरीतियों से संरक्षित करने में सार्थक नहीं है।
देश की सर्वोच्च अदालत में पांच धर्मों के जस्टिस मिलकर शायरा बानो के मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस मामले पर फैसला सुनाने वाले जजों में चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चिएन), जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन (पारसी), जस्टिस यूयू ललित (हिंदू) और जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम) शामिल रहें।

ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, लगी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक बार में तीन तलाक पर अगले छह महीने तक के लिए रोक लगा दी है। संसद जब तक इस पर कानून नहीं लाती तब तक ट्रिपल तलाक पर रोक रहेगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को संसद में इसे लेकर कानून बनाने के लिए कहा है। इससे पूर्व 11 से 18 मई तक रोजाना सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है। वह कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है? सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कैसे कोई पापी प्रथा आस्था का विषय हो सकती है.
दरअसल, शायरा बानो ने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की थी। इस पर शायरा का तर्क था कि तीन तलाक न तो इस्लाम का हिस्सा है और न ही आस्था। उन्होंने कहा कि उनकी आस्था ये है कि तीन तलाक मेरे और ईश्वर के बीच में पाप है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी कहता है कि ये बुरा है, पाप है और अवांछनीय है।
इस खंड पीठ में सभी धर्मों के जस्टिस शामिल हैं जिनमें चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चिएन), जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन (पारसी), जस्टिस यूयू ललित (हिंदू) और जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम) शामिल हैं।

विवादित बयान मामले में केजरीवाल ने कोर्ट में मांगी माफी

अपने विवादित बयानों के लिये जाने जाते दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा से बीजेपी सांसद अवतार सिंह भड़ाना से पटियाला हाउस कोर्ट में लिखित में माफी मांगी है। पटियाला हाउस कोर्ट में भड़ाना ने केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। साथ ही एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की थी। सांसद भड़ाना का आरोप है कि केजरीवाल ने उनके संबंध में 31 जनवरी 2014 को एक आपत्तिजनक बयान दिया था। जिसमें उन्होंने कहा कि भड़ाना देश के सबसे भ्रष्ट व्यक्तियों में से एक हैं। इस आपत्तिजनक बयान से भड़ाना को मानसिक क्षति पहुंची है। भड़ाना ने कहा कि वे समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। इस टिप्पणी से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। उन्होंने केजरीवाल को लीगल नोटिस भेज कर अपने बयान को वापस लेने व माफी मांगने की मांग की थी। मगर, केजरीवाल की ओर से ऐसा नहीं किया गया।
सोमवार को कोर्ट में केजरीवाल ने भड़ाना से लिखित मे माफी मांगी है कि अपने सहयोगी के बहकावे में आकर उन्होंने भड़ाना पर आरोप लगा दिए थे। बाद में पता चला कि वो आरोप सही नहीं है, इसलिए वो माफी मांग रहे है। उन्होंने अपने लिखित हलफनामें में कहा है कि उनका भड़ना पर इस तरह के आरोपों को लगा कर उनकी इमेंज को खराब करने का कोई मकसद नही था।

खामियों के चलते अपडेट होंगी एनसीईआरटी की पुस्तकें

एनसीईआरटी की पुस्तको में 1,300 से ज्यादा तथ्यों की गलतियां सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर ने बताया कि एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित स्कूली टेक्स्टबुक की चल रही समीक्षा के दौरान इन किताबों में 1,300 से ज्यादा तथ्यों की गलतियां पाई गई हैं। एनसीईआरटी ने एक के बाद एक पुस्तकों में गलतियों को देखते हुए पुस्तकों को रिव्यू करने का फैसला लिया है, क्योंकि उनका कहना है, सभी पुस्तकें काफी समय पहले लिखी गई थी और अब इन्हें अपडेट करने की जरूरत है।
बतादें इससे पहले एनसीईआरटी की 54वीं काउंसिल बैठक में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने किताबों को लेकर एक समीक्षा रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में सिसोदिया ने किताबों के चौप्टर, प्रेजेंटेशन और भाषा पर आपत्ति जताई है। काउंसिल बैठक में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर और कई राज्यों के शिक्षा अधिकारी भी मौजूद थे। उस दौरान ज्यादातर राज्यों के अधिकारियों ने किताबों में बदलाव का सुझाव दिया था। उस समय मीडिया से बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा था कि देश के सारे बच्चे एनसीईआरटी की किताब पढ़ते हैं। इन किताबों में बहुत गलतियां हैं, जिसे लेकर बैठक में चर्चा हुई कि किताब में किसी चौप्टर को रखने का मकसद, उसकी भाषा या प्रिजेंटेशन कैसा हो। उनका कहना है कि किताब लिखते वक्त सिर्फ बच्चों के बारे में सोचना चाहिए।

चीनी बॉर्डर पर सरकार का निर्देश, जल्द सड़क बनाने के दिए आदेश

चीन और भारत में डोकलाम विवाद के बीच सरकार ने बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव पावर बढ़ा दी हैं। सरकार ने इसलिए ये कदम उठाया ताकि 3,409 किलोमीटर लंबे इंडिया-चीन बॉर्डर के पास सड़कें बनाने का काम तेजी से किया जा सके। दरअसल, नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इंडिया-चीन बॉर्डर से लगे 61 प्रोजेक्ट लंबे समय से अटके हुए हैं। इंडिया-चाइना बॉर्डर रोड के तहत बनने वाले ये प्रोजेक्ट स्ट्रैटेजिकली इम्पॉर्टेंट हैं व ऐसे इलाकों को सड़कों से जोड़ने का काम कर रहा है, जहां पहुंचना मुश्किल है। असलियत में, सिक्किम सेक्टर में भूटान ट्राइजंक्शन के पास चीन एक सड़क बनाना चाहता है। भारत और भूटान इसका विरोध कर रहे हैं। करीब 2 महीने से इस इलाके में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। डिफेंस मिनिस्ट्री नेे कहा, बीआरओ में बदलाव लाने का मकसद काम को सही रफ्तार से पूरा करना है, ताकि आर्मी जरूरत के मुताबिक नतीजे हासिल किए जा सकें। बता दें कि इससे पहले बीआरओ के डायरेक्टर जनरल के पास स्वदेशी मशीनरी और इक्विपमेंट के लिए 7.5 करोड़ और विदेश मशीनरी के लिए 3 करोड़ रुपए के अप्रूवल अथॉरिटी थी।
डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा, बीआरओ को बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ बातचीत की भी आजादी दे दी गई है, ताकि काम को जल्द पूरा करने में मदद मिल सके। चीफ इंजीनियर और टास्क फोर्स कमांडर लेवल तक फाइनेंशियल पावर दे दी गई हैं ताकि चीफ इंजीनियर और बीआरओ डायरेक्टर जनरल और डिफेंस मिनिस्ट्री के बीच बातचीत के नजरिए से भी काम में किसी तरह की रुकावट ना आए।

ब्लू व्हेल का दिखा असर, नहीं ले जा सकेंगे स्कूलों में स्मार्ट फोन

आज के दौर में क्या बच्चे और क्या बड़े। सभी ऑनलाइन गेम से अछूते नहीं है और फिर ऐसे में आया ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल। बच्चों और किशोरों को खुदकुशी के लिए उकसाने वाले ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल के खतरे के मद्देनजर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के उपयोग के लिए नये दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें बोर्ड की तरफ सेे स्कूलों को यह साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों स्मार्टफोन, टैबलेट, आई पैड, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बिना इजाजत स्कूल में नहीं ला सकेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा इस्तेमाल कर रहे कंप्यूटर्स को ऐसे जगह रखा जाए जहां से उस पर नजर रखा जा सके। इसके साथ ही स्कूल को यह भी निर्देश दिया गया है कि छात्रों को इंटरनेट के इस्तेमाल करने पर सुरक्षा और प्रभाव के बारे में बताया जाए। इंटरनेट के इस्तेमाल करने पर डिजिटल निगरानी की व्यवस्था हो। बच्चों को केवल पहले से चयन किए हुए वेबसाइट तक पहुंचने की अनुमति देना होगा। उन्होंने कहा कि ब्लू व्हेल ही नहीं, बल्कि सभी जानलेवा वेबसाइट्स पर भी रोक लगनी चाहिए। सीबीएसई के परिपत्र में कहा गया है कि यह सूचित किया जाता है कि दृश्य या श्रव्य सामग्री को संग्रहित, रिकॉर्ड या प्ले कर सकने में समक्ष स्मार्ट मोबाइल फोन, टैबलेट, आई पैड, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरणों को स्कूल या स्कूल बसों में बिना अनुमति के नहीं लाया जाए। स्कूल में प्राचार्य और स्कूल बसों में परिवहन प्रभारी इस बात का ध्यान रखें कि मोबाइल फोन नहीं लाया जा सके।

तो क्या एक साल पहले ही हो जाएंगे लोकसभा चुनाव

यूं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक लंबे समय से राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनाव के साथ कराने की वकालत करते रहे हैं। ऐसी अटकलें हैं कि अपनी दलील को अमली जामा पहनाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव करीब एक साल पहले ही कराने पर विचार कर रही है। इसके पीछे का गणित कुछ यह है कि बीजेपी की कोशिश है, साढ़े तीन सालों के दौरान किए गए कामों को लेकर जनता के बीच जाएं और उनसे वोट मांगे। बजाय इसके कि वह 20 महीना और इंतजार करें और रोजगारी और किसानों की समस्या हल करने में अपनी असफलता को और उजागर होने दें। केंद्र सरकार को यह भी पता है कि विपक्ष मौजूदा समय में बेहद कमजोर है, लेकिन उसे यह भी साफ दिख रहा है कि विपक्षी दल कांग्रेस अभी भी देश के कुछ हिस्सों में प्रभावी है। दूसरा यह कि हाल ही में मध्य प्रदेश में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की स्थिति में जिस तरह सुधार हुआ है। साथ ही पश्चिम बंगाल के निकाय चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने जिस तरह भारी जीत दर्ज की है।वह निश्चित तौर पर बीजेपी के लिए चिंता का सबब होगा। कहीं न कहीं बीजेपी यह भी जानती है कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में उसे सत्ता-विरोधी माहौल का सामना करना होगा। ऐसे में अगर पूर्व के चुनावों के मुकाबले पार्टी की सीटों में कमी आती है। तो इसका सीधा असर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा।
बीजेपी को यह भी याद रखना होगा कि जनता अक्सर सत्तारूढ़ दल के प्रदर्शन से असंतुष्ट होकर उनके खिलाफ मतदान करती रही है। भले विपक्ष कमजोर हो। मगर, इसी साल गोवा और मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव में ऐसा देखने को मिला। जहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. यह अलग बात है कि विधायकों को अपने पाले में शामिल करने में सफल रही बीजेपी ने गोवा और मणिपुर में सरकार बनाई, लेकिन इस सच्चाई को नहीं झूठलाया जा सकता कि बीजेपी के प्रति असंतुष्टि की भावना है।