बिन पिता की बेटियां शिक्षारूपी पंख से अब पूरे कर सकेंगी अपने सपनो की उड़ान

कलेक्ट्रेट परिसर में प्रोजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’’ के 13वां संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी सविन बसंल ने बाालिकाओं को चैक वितरित किये। 34 बालिकाओं की शिक्षा 9 लाख धनराशि से पुनर्जीवित की गई। अब तक लगभग 62 लाख से अधिक धनराशि से 126 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई।
जिलाधिकारी सविन बसंल ने कहा कि सभी बालिकाएं नंदा-सुनंदा देवियों के समान है हमने नंदा-सुनंदा देवियों को नही देखा। बालिकारूपी इन देवियों की शिक्षा पुनर्जीवित कर उन्हें योग्य बनाना ही असली ‘‘नंदा-सुनंदा’’ की स्तुति करना है। उन्होंने बालिकाओं से कहा की अपनी शिक्षा की ललक जीवित रखें। जिलाधिकारी ने बालिकाओं की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि बालिकाएं अपने जीवन में महापुरूषों की बायोग्राफी पढे छात्र जीवन के लिए इससे अधिक आईडल और कुछ नही है। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि आप सफल होकर अन्य बालिकाओं के लिए रोल मॉडल बनें।
इस अवसर पर बालिकाओं के परिजनों ने मा0 मुख्यमंत्री एवं जिलाप्रशासन का उनकी खराब आर्थिक स्थिति में बच्चों की शिक्षा पुनर्जीवित रखने के लिए आभार व्यक्त किया। शदब की माता मन्नो ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि स्कूल वालों ने फीस न भरने के कारण होनहार बालिकाओं को 15-15 दिन स्कूल नही आने दिया, परीक्षा से भी वंचित रखने की चेतावनी दी ऐसे में बालिका के भविष्य की चिंता सता रही थी ऐसे में जिला प्रशासन की नंदा-सुनंदा योजना से बालिका की शिक्षा पुनर्जीवित हुई। जिया की माता ने कहा कि फीस न भर पाने के कारण बेटी की शिक्षा बीच में ही रोकनी पड़ी पारिवारिक आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी, जिला प्रशासन ने बेटी की शिक्षा जारी रखने में मदद की इसके लिए मा0 मुख्यमंत्री जी एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। वहीं खुशी कौर की माता ने कहा कि वह घरों में काम कर बच्चों को शिक्षित कराने में समस्या हो रही थी जिस कारण बच्चों की पढाई छूट रही थी उन्होंने जिला प्रशासन का सहायता हेतु आभार व्यक्त किया। कु0 सृष्टि जिनके पिता कैंसर पीड़ित हैं की बीसीए 5वें सेमस्टर की शिक्षा पारिवारिक खराब आर्थिक स्थिति के कारण बधित हो रही थी जिला प्रशासन ने प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा से शिक्षा को पुनर्जीवित कर दिया है। खराब आर्थिक स्थिति से जूझ रहे बिन पिता की बेटी अलाईना रावत बीएससी नर्सिंगं की शिक्षा पुनर्जीवित, आकृति बडोनी बी-कॉम की शिक्षा जिनके पिता की मृत्यु 2023 में हो गई थी। कु0 तनिका कक्षा 10वीं पिता की मृत्यु होने उपरान्त शिक्षा बाधित हो गई थी। कु0 लावण्या पिता की मृत्यु उपरान्त 9वीं की शिक्षा बाधित हो गई थी। पिता की मृत्यु के उपरान्त दिव्या की 6वीं की शिक्षा बाधित हो गई थी। पिता की मृत्यु उपरांत नंदनी की यूकेजी की शिक्षा बाधित हो गई थी। पिता की मृत्यु उपरान्त ईशिका कक्षा 3 की शिक्षा बाधित हो गई थी। इसी प्रकार कु0 शिवांगी जिनके माता निजी चिकित्सालय में सफाईकर्मी के पद पर कार्यरत है की आर्थिक स्थिति खराब है बीएजे एंड एमसी डिजिटल द्वितीय सैमस्टर की शिक्षा प्रभावित हो रही थी। यूकेजी की शिक्षा ग्रहण कर रही मानवी की पारिवारिक आर्थिक स्थिति खराब है। इन सभी 34 बालिकाओं की शिक्षा नंदा-सुनंदा योजना से पुनर्जीवित की गई।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित बालिकाओं के अभिभावक उपस्थित रहे।

दून में दिनदहाड़े एक ओर हत्या, कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा को दो अज्ञात हमलावरों ने मारी गोली

राजधानी देहरादून में शुक्रवार को दिनदहाड़े एक और हत्या हो गई। सिल्वर सिटी मॉल में झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा को दो अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। विक्रम पर झारखंड में 50 से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें कई हत्याएं, अपहरण और रंगदारी मांगने के मामले शामिल हैं। काशीपुर में विक्रम का स्टोन क्रशर है और वह प्रॉपर्टी के कारोबार में भी सक्रिय था। शुरुआती जांच में पुलिस रंजिश के कारण हत्या होना मान रही है।

विक्रम शर्मा रोज की तरह सिल्वर सिटी स्थित एनी टाइम फिटनेस जिम में व्यायाम करने गया था। वहां से निकलते वक्त करीब 10 बजकर 10 मिनट पर सीढ़ियों पर दो हमलावरों ने उसके सिर में गोली मार दी। सूचना पर पहुंची पुलिस उसे उठाकर मैक्स अस्पताल ले गई। वहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि कुल तीन बदमाश बाइक पर आए थे। इनमें से दो पैदल मॉल के अंदर गए और गोली मारने के बाद वहां से पैदल ही निकल गए। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बदमाश वहां से कुछ सौ मीटर तक पैदल भागे इसके बाद काले रंग की बाइक पर सवार होकर फरार हो गए।

आईजी गढ़वाल ने हत्याकांड के जल्द खुलासे के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पुलिस ने जिलेभर में नाकेबंदी कर दी। सख्त जांच अभियान चलाया गया। पुलिस टीमें बदमाशों के आने और वारदात को अंजाम देकर भागने के रास्तों की जांच में जुट गईं। विक्रम शर्मा मूल रूप से सिंहभूमि जमशेदपुर झारखंड का रहने वाला था। वर्तमान में वह देहरादून में अमन विहार में रह रहा था।

उसका काशीपुर में स्टोन क्रशर का कारोबार है। उसके कई कुख्यात अपराधियों और गैंगस्टरों से संबंध होने की जानकारी मिली है। ऐसे में पुलिस इस हत्या को आपसी रंजिश, गैंगवार या आर्थिक लेनदेन से जुड़ा मानकर जांच कर रही है।

पुलिस जांच में सामने आया कि विक्रम शर्मा के पास एक लाइसेंसी पिस्टल भी थी। इसे घटनास्थल से बरामद किया गया है। घात लगाए हमलावरों ने इतनी तेजी के हमला किया कि वह हथियार निकाल तक नहीं सका। फायरिंग के वक्त मॉल के अधिकतर शोरूम बंद थे लेकिन अंदर कई सफाई कर्मचारी मौजूद थे।

सिंचाई विभाग की खुली नहर में बुजुर्ग हुए चोटिल, अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज

जनपद में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हो रही सड़क दुर्घटना संबंधी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन की क्यूआरटी ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। लापरवाही पर सिंचाई विभाग के संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

अपर तुनवाला प्रकरण के संबंध में घटना कैनाल रोड, अपर तुनवाला क्षेत्र की नहर की सफाई के दौरान पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध न किए जाने एवं असुरक्षित स्थिति में कार्य किए जाने के दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा सिंचाई विभाग के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार एक बुजुर्ग व्यक्ति मॉर्निंग वॉक के दौरान पूर्वनिर्मित सिंचाई नहर (कैनाल) के खुले भाग में गिर गए। यह नहर सिंचाई विभाग की पुरानी संरचना है, जो सड़क से लगभग डेढ़ फीट ऊंचाई पर पेवमेंट के रूप में स्थित है। नहर की नियमित सफाई के उद्देश्य से सिंचाई विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर स्लैब हटाए गए थे।

कोहरे की स्थिति के कारण बुजुर्ग व्यक्ति खुले स्लैब को देख नहीं पाए और नहर में गिर गए। प्रथम दृष्टया यह घटना सीवर निर्माण कार्य से संबंधित नहीं पाई गई है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने समस्त कार्यवाही संस्थाओं एवं ठेकेदारों को चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्यों के दौरान कटिंग की गई सड़कों अथवा कार्यस्थलों पर किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं/ठेकेदारों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किये जाएंगे। सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी स्तर पर अनदेखी स्वीकार्य नहीं की जाएगी।

जिला प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि किसी भी प्रकार के निर्माण/सफाई कार्य के दौरान पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक, रात्रिकालीन रिफ्लेक्टर एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

अवगत कराया गया है कि कैनाल रोड, अपर तुनवाला प्रकरण के संबंध में घटना कैनाल रोड, अपर तुनवाला क्षेत्र की है, जहां सीवर पाइपलाइन डाले जाने के उपरांत मार्ग के रेस्टोरेशन का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में उक्त स्थल पर रोड कटिंग से संबंधित कोई कार्य संचालित नहीं हो रहा है तथा सड़क का प्राथमिक रेस्टोरेशन कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

डीएम का शिक्षा मॉडल हर कक्षा में अब स्मार्ट तकनीक, सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्रांति की शुरुआत

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी सविन बंसल की विशेष पहल एवं उनके व्यक्तिगत निर्देशन में जनपद देहरादून के राजकीय संचालित माध्यमिक विद्यालयों में प्रोजेक्ट उत्कर्ष अन्तर्गत डिजिटल एवं उन्नत शिक्षण सुविधाओं के विकास हेतु एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी कदम उठाया गया है। विद्यार्थियों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद के सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा-कक्षों को स्मार्ट शिक्षण प्रणाली से सुसज्जित किए जाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल करते हुए जनपद के 168 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षण व्यवस्था लागू कर दी है। कुल 3.67 करोड़ रुपये की लागत से 884 स्मार्ट टीवी स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रत्येक कक्षा को डिजिटल शिक्षण प्रणाली से जोड़ा जा रहा है।
जिले के सरकारी स्कूलों को डिजिटल रफ्तार मिलने जा रही है जिला प्रशासन की इस पहल को सरकारी विद्यालयों में शिक्षा में बड़ी पहल के तहत देखा जा रहा है। जिलाधिकारी के विशेष निर्देशन में संचालित इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक, इंटरएक्टिव एवं तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। स्मार्ट टीवी के माध्यम से अब कक्षाओं में ऑडियो-वीडियो कंटेंट, ई-लर्निंग मॉड्यूल एवं डिजिटल पाठ्यसामग्री का उपयोग किया जाएगा, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और रोचक बनेगी। यह पहल न केवल सरकारी स्कूलों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा वातावरण प्रदान कर डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
इस योजना के अंतर्गत जिले के 06 विकास खंडों में संचालित कुल 168 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा-कक्षों हेतु कुल 884 स्मार्ट टीवी क्रय किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक विद्यालय में डिजिटल शिक्षण सुविधा समान रूप से उपलब्ध हो तथा ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों के मध्य डिजिटल अंतर को न्यूनतम किया जा सके। स्मार्ट टीवी की स्थापना से विद्यालयों में शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी, रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनेगी। इसके माध्यम से दिक्षा पोर्टल, पीएमई विद्या, ई-सामग्री, शैक्षिक वीडियो, वर्चुअल कक्षाएं तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग संभव होगा। इससे विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ, सहभागिता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।
जिला प्रशासन द्वारा कक्षा-कक्षों के आकार एवं छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट टीवी दो आकारों में क्रय किए जा रहे जिनमें 43 इंच छोटे एवं मध्यम आकार के कक्षों हेतु तथा 55 इंच बड़े आकार के कक्षों हेतु स्मार्ट टीवी क्रय किये जा रहे हैं। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना हेतु कुल ₹3,67,00,000/- (रुपये तीन करोड़ सड़सठ लाख मात्र) की धनराशि स्वीकृत की गई है। उक्त धनराशि का प्रावधान जिला खनन निधि देहरादून से किया गया है। इससे पूर्व जिले के सभी सरकारी विद्यालयों को 5 करोड़ सीएसआर फंड से फर्नीचरयुक्त किया जा चुका है।
स्मार्ट टीवी का क्रय जैम पोर्टल के माध्यम से ई-टेंडर प्रक्रिया द्वारा पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक प्रणाली के अंतर्गत किया गया है। निविदा प्रक्रिया में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 12 फर्मों द्वारा प्रतिभाग किया गया। निविदाओं के परीक्षण एवं चयन हेतु मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक टेंडर समिति का गठन किया गया, जिसमें एनआईसी, कोषागार तथा अन्य संबंधित विभागों के तकनीकी एवं वित्तीय विशेषज्ञों को सम्मिलित किया गया। समिति द्वारा प्राप्त निविदाओं का नियमानुसार विस्तृत तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन किए जाने के उपरांत पात्र एवं न्यूनतम दर वाली फर्म का चयन कर कार्यादेश निर्गत कर दिया गया है। आपूर्ति एवं स्थापना संपूर्ण क्रय प्रक्रिया जैम पोर्टल के माध्यम से ई-टेंडर प्रणाली द्वारा पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक ढंग से संपन्न की कार्यादेश निर्गत कर दिया गया है। आपूर्ति एवं स्थापना कार्य शीघ्र प्रारंभ करते हुए निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पहल न केवल डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का सशक्त प्रयास है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप तकनीक-सक्षम शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इसे जनपद में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि प्रशासन विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। जनपद प्रशासन द्वारा स्मार्ट टीवी की आपूर्ति एवं स्थापना कार्य को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराते हुए सभी विद्यालयों में शीघ्र ही डिजिटल शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

असहाय, जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा की उड़ान को पंख लगाता जिला प्रशासन का प्रोजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’’

प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के 12 वें संस्करण में आज जिलाधिकारी सविन बसंल ने 26 बालिकाओं को स्कूल फीस राशि चैक वितरित किए। जिला प्रशासन ने 26 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई, जिनके स्कूल कालेज में बालिकाओं की फीस 6.93 लाख सीधे स्कूल खाते में हस्तांरित किये गए है। आज लाभान्वित हुई बालिकओं में 10 प्राईमरी स्तर, 8 माध्यमिक तथा 8 बालिकाओं की उच्च शिक्षा पुनर्जीवित की गई। जिला प्रशासन की इस महत्वाकांक्षी एवं जनसंवेदी प्रोजेक्ट नंदा सुनंदा योजना अंतर्गत अभी तक लगभग 1 करोड़ की धनराशि से 120 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई।
कु0 जिया जिनके पिता की मृत्यु उपरान्त उनकी बीफार्मा की शिक्षा बाधित हो गई थी की 39500 फीस, अनुष्का प्रजापति एमए प्रथम वर्ष पिता की मृत्यु उपरान्त शिक्षा बाधित हो गई थी, जिला प्रशासन ने 871450 फीस स्कूल प्रबन्धन के खाते में जमा कराई। कु समीक्षा कक्षा 05 हिमिका त्यागी कक्षा 2, आदिका कक्षा4, कनक कक्षा9, वैश्नवी नौटियाल कक्षा 11ं, फलकअली कक्षा 12, प्रभुगन कौर कक्षा 7, किरत कौर कक्षा 8, शदप कक्षा 10 के पिता की मृत्यु उपरान्त पारिवारिक खराब आर्थिकी के चलते शिक्षा बाधित हो गई थी। जिला प्रशासन की नंदा-सुनंदा योजना से बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित हो गई। वैष्णवी कक्षा 12 पिता की मृत्यु उपरान्त शिक्षा बाधित हो गई थी, इशिका सिंह बीकॉम, मदीहा बेग बीसीए प्रथम सेमेस्टर पिता की मृत्यु उपरान्त शिक्षा बाधित 67600 फीस जिला प्रशासन ने स्कूल प्रबन्धन के खाते में हस्तातंरित कर शिक्षा पुनर्जीवित की। दिया बडोनी कक्षा 9 पिता की मृत्यु उपरान्त बाधित शिक्षा प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा से पुनर्जीवित।
कु0 सृष्टि के पिता लम्ब समय से कैंसर पीड़ित हैं जिनका उपचार चल रहा है खराब आर्थिक स्थिति के चलते उनकी बीसीए 5वें सेमस्टर की शिक्षा बाधित हो गई थी जिला प्रशासन ने 64043 फीस स्कूल में जमा कराते हुए शिक्षा पुनर्जीवित की। कु0 पलक घेयल जिनके पिता कैंसर पीड़ित है तथा माता नर्सिंग होम में काम कर परिवार चलाती है की एमएससी की शिक्षा पारिवारिक आर्थिक तंगी के कारण बाधित हो रही थी, जिला प्रशासन का सहारा मिलते ही शिक्षा पुनर्जीवित हुई। मानसी साहू जिनकी पारिवारिक स्थिति बहुत खराब है आर्थिक तंगी के कारण जियोलॉजी पीएचडी चतुर्थ सेमेस्टर की शिक्षा बाधित हो रही थी की 50 हजार फीस जिला प्रशासन द्वारा स्कूल प्रबन्धन के खाते में दी गई।
कु0 अवनतिका राय, कक्षा 3, प्राची सिंह एसीए प्रथम सेमेस्टर, मायरा कक्षा 7, खुशी कौर कक्षा 4, शायना सिंघानिया कक्षा 10 के परिवार की खराब आर्थिकी की चलते शिक्षा बाधित हो गई थी जिला प्रशासन ने नंदा-सुनंदा से फीस स्कूल प्रबन्धन के खाते में जमा कराकर शिक्षा पुनर्जीवित कर दी है।
सभी बालिकाओं ने अपनी स्थिति जिलाधिकारी को बंया करते हुए मा0 मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार एवं जिला प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया और अधिक मेहनत कर सफल होकर असहायों की सेवा का संकल्प लिया।
जिलाधिकारी ने बालिकाओं का हौसला बढाते हुए कहा कि सरकार एवं जिला प्रशासन सदैव आपके साथ है आप मेहनत का जज्बा कायम रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही एक ऐसा टूल है जिससे सशक्तीकरण एंव सफलता के रास्ते निकलतें है। यदि आप मेहनत करते हैं तो आपसे छोटे भाई बहन आसपास के लोग आपसे प्रभावित होकर शिक्षा का रास्ता पकड़ते हैं। उन्होंने कहा सरकार से अनुरोध करेंगे कि इस प्रोजेक्ट को नीति में शामिल किया जाए ताकि प्रदेशभर नंदा-सुनंदा रूपी जरूरतमंद बालिकाएं जिनकी शिक्षा किसी न किसी कारण से छूट गई है को पुनर्जीवित किया जा सके।
इस अवसर पर निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि जिला प्रशासन देहरादून के कार्य वर्तमान में लिजेन्ड्री स्तर पर है। उन्होंने बालिकाओं का हौसला बढाते हुए कहा कि जिला प्रशासन देहरादून से जो सहायता मिल रही है उसका लाभ उठायें तथा सफल होने पर हेल्पिंग हेंड रखते हुए अन्य जरूरतमदों के जीवन के उत्थान के लिए कार्य करने का संकल्प लेते हुए मेहनत जारी रखें।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि जिला प्रशासन असहाय बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित करने के लिए निंरतर प्रयासरत है, जिन बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई उनका फालोअप लिया जाता है। उन्होंने बालिकाओं से शिक्षा पर फोकस रखने को कहा हौसला बढाया राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन सदैव आपके साथ है।
इस अवसर पर निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार सहित सीडीपीओ बाल विकास एवं बालिकाओं की माता एवं परिजन उपस्थित रहे।

07 विभागों के वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हो या आवासीय भवन, गंदा पानी गंगा में बहाया तो नहीं बख्शे जाएंगे: डीएम

ऋषिकेश स्थित चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी एवं ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने संबंधी प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित विभागों को नाले के समुचित उपचार हेतु विस्तृत रिपोर्ट एवं कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग तथा महाप्रबंधक, निर्माण वृत्त (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम ने नाले का संपूर्ण नक्शा एवं प्रस्तावित एक्शन प्लान से अवगत कराया।

जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन का यह सुनिश्चित प्रयास रहेगा कि किसी भी स्थिति में दूषित जल गंगा नदी में प्रवाहित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा में मिलने वाले सभी नालों का जल स्वच्छ एवं उपचारित होना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने कहा कि 07 विभागों के वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हो या आवासीय भवन, गंदा पानी गंगा में बहाया तो नहीं कोई भी नही बख्सा जाएगा। इस दौरान डीएम ने नाले में वेस्ट वाटर प्रवाह करते 25 घरों के पाइप-ड्रेन्स को आज ही सीज करने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने इस समस्या को अत्यंत गंभीर मानते हुए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता वृद्धि हेतु शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए तथा बिना उपचारित गंदे पानी की रोकथाम के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखने हेतु एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रेषित की जाएगी, जिससे प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा को स्वच्छ रखा जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि नगर क्षेत्र में सीवरेज नेटवर्क अधिकांश क्षेत्रों को आच्छादित करता है, किंतु जहां सीवरेज कार्य प्रगति पर है अथवा प्रतिष्ठानों एवं आवासीय भवनों के कनेक्शन अभी सीवर लाइन से नहीं जुड़े हैं, वहां दूषित जल के उपचार हेतु प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरसेप्शन एवं ड्रेनेज प्लान के अंतर्गत एसटीपी विस्तार की योजना तैयार की जा रही है तथा जिन प्रतिष्ठानों अथवा आवासीय भवनों द्वारा बिना उपचारित जल सीधे प्रवाहित किया जा रहा है, उनके विरुद्ध सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान जिलाधिकारी ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र के वार्ड-3 में गली मुहल्ले में पैदल चलकर आवासीय भवनों एवं प्रतिष्ठानों के सीवरेज और गलियों में बह रहे नालियों निरीक्षण करते हुए नालियों को सीवरेज से कनेक्ट कराने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने नगर निगम के मुख्य नगर आयुक्त, उपजिलाधिकारी, सीवरेज अनुरक्षण इकाई, पेयजल निगम, जल संस्थान एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत इसे आम जनता के साथ भी साझा किया जाएगा।

सीवरेज अनुरक्षण इकाई के अधिकारियों ने अवगत कराया कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आई एंड डी एवं एसटीपी, ढालवाला-मुनिकीरेती योजना के तहत निर्मित किया गया है। सीमित भूमि उपलब्धता के कारण यह एसटीपी बहुमंजिला स्वरूप में निर्मित किया गया है, जो देश का अपनी तरह का प्रथम एसटीपी है। यह एसटीपी अक्टूबर 2020 से अनुरक्षणाधीन है।

यह 7.50 एमएलडी एसटीपी तीन नालों के शोधन हेतु निर्मित है, जिनमें श्मशान घाट नाला एवं चन्द्रेश्वर नगर नाला प्रमुख हैं, जबकि ढालवाला नाले में सीवेज के साथ-साथ प्राकृतिक स्रोतों का जल भी अधिक मात्रा में आता है। वर्षा ऋतु के दौरान ढालवाला नाले में प्रवाह एसटीपी की क्षमता से अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में श्मशान घाट एवं चंद्रेश्वर नगर नाले का संपूर्ण सीवेज एसटीपी में उपच ारित किया जाता है, जबकि ढालवाला नाले के प्रवाह को क्षमता की सीमा तक ही एसटीपी में लिया जाता है।

मानसून काल एवं उसके पश्चात लगभग चार माह तक ढालवाला नाले में भूमिगत जल की मात्रा अधिक रहने के कारण जल की गुणवत्ता परीक्षण में प्रदूषण की मात्रा अत्यंत न्यून पाई जाती है। ढालवाला नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे एवं परिवारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक रूप से 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 38 परिवारों का सीवर सीधे नाले में तथा 84 परिवारों का ग्रे-वाटर नाले में प्रवाहित हो रहा है। सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी है तथा सभी आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है। सीधे प्रवाहित हो रहे जल के नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।

इस दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिेकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त राम कुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग सहित अनुरक्षण इकाई, जल निगम, जल संस्थान, सिंचाई के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

डीएम का सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश में औचक निरीक्षण, विलेखों का निबंधन करते लिपिक पकड़ा गया

जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं एवं गंभीर अनियमितताओं पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। जिलाधिकारी ने पूछा कि आपके सम्पति मूल्य आंकलन 47-ए का कोई ज्ञान नही तो स्टाम्प शुल्क कैसे किया तय, किसने तुम्हे निबंधक के बदले अधिकार दिए इस पर अपराधिक कार्यवाही की जाएगी।
डीएम का औचक निरीक्षण, सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई जिस पर कड़ा एक्शन तय है। सब रजिस्ट्रार के बगैर ही अवैधानिक रूप से लिपिक द्वारा विलेखों का निबंधन किया जाना पाया गया। औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय दरों पर भूखंड के छोटे टुकड़े कर कई रजिस्ट्रीय बरामद हुई जिससे करोड़ो की स्टाम्प चोरी भी संभावना है जिस पर विस्तृत आख्या शीघ्र मांगी गई। कई महीनों से लम्बित मूल अभिलेख आवेदकों को वापिस नहीं किया गया, मूल विलेख पत्र अलमारी में धूल खा रहे थे। वापिस करने की अधिकतम तीन दिन है सीमा, परंतु सैकड़ों मूल विलेख अमलमारी में धूल खाते मिले। लम्बित मूल अभिलेख, कूटरचित विलेख पर डीएम ने कम्प्यूटर जब्त करवया तहसील प्रशासन के सुपुर्द किया। मूल अभिलेख लौटाने रजिस्ट्री की नकल देने को हजारो आमजन परेशान हो रहे थे। रजिस्ट्री नकल अनुमन्य 24 घंटे के सापेक्ष महीनों/वर्षों से लम्बित मिली। निरीक्षण दौरान कार्यालय में मिला घोस्ट कार्मिक, जिसका न कोई नियुक्ति पत्र न उपस्थिति पंजिका में नाम था इस जिपर जिलाधिकारी ने कार्मिकों का रिकार्ड तलब कर दिया है। वहीं उपस्थित फरियादियों ने अपनी आपबीती प्रशासन को सुनाई जिस पर उप जिलाधिकारी ऋषिकेश को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी नेे निरीक्षण में पाया कि कार्यालय में 6 माह से अधिक अवधि के विलेख पत्र लंबित थे। औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित खसरा नंबर एवं सूची की जानकारी पूछे जाने पर उपस्थित कार्मिक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। विलेखों की प्रतिलिपि समय पर संबंधित क्रेताओं को उपलब्ध न कराए जाने तथा इस संबंध में मुख्यालय को सूचना प्रेषित किए जाने का कोई रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
उप निबंधक कार्यालय में घोस्ट कार्मिक पाए जाने पर जिलाधिकारी ने समस्त कार्मिकों का विवरण तत्काल तलब किया। कार्यालय में पुराना डेटाबेस संचालित पाया गया, जिस पर संबंधित कार्मिक कोई ठोस व तार्किक कारण नहीं बता सके। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सब रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में रजिस्ट्री की जा रही थी। बताया गया कि सब रजिस्ट्रार देहरादून मीटिंग में हैं, जबकि रजिस्ट्री केवल निबंधन लिपिक की उपस्थिति में की जा रही थी, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। जिलाधिकारी द्वारा पुराने विलेख पत्र जप्त किए गए तथा कार्मिक उपस्थिति रजिस्टर भी तलब किया गया।
कार्यालय में रजिस्ट्री की नकल उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलंब किया जा रहा था। इसके अतिरिक्त, रजिस्ट्री शुल्क लेने के लिए पृथक व्यवस्था नहीं पाई गई तथा समस्त भुगतान एक ही काउंटर पर लिए जा रहे थे, जो प्रक्रियात्मक त्रुटि को दर्शाता है। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कार्यालय के प्रातः 9ः30 बजे खुलने के बावजूद पहली रजिस्ट्री प्रातः 11ः15 बजे की गई। इस विलंब के संबंध में पूछे जाने पर भी उपस्थित कार्मिक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
जिलाधिकारी ने सभी अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने, रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने तथा दोषी कार्मिकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों की अनदेखी कदापि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहर, तहसीलदार चमन सिंह आदि उपस्थित रहे।

परेड ग्राउंड में राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस एवं विभिन्न अधिकारियों को किया सम्मानित

गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और भव्य परेड की सलामी ली। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों को पदक अलंकरण कर सम्मानित किया गया साथ विभिन्न अधिकारियों को भी उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया।

   परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान सूचना विभाग द्वारा ‘‘उत्तराखण्ड रजत जयंती और शीतकालीन धार्मिक यात्रा व पर्यटन’’ पर आधारित झांकी के अलावा महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, पर्यटन विभाग, उद्यान विभाग, विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेड़ा), वन विभाग, उद्योग विभाग एवं संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं तथा नीतियों पर आधारित मनमोहक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में सूचना विभाग की झांकी को प्रथम, संस्कृत शिक्षा विभाग को द्वितीय तथा विद्यालयी शिक्षा विभाग की झांकी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ, जिन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

   समारोह में सेना 14वीं डोगरा रेजीमेंट आर्मी, सी0आर0पी0एफ0, आई०टी०बी०पी०, हिमाचल पुलिस, 40वीं वाहिनी पीएसी, 40वीं वाहिनी महिला दल, उत्तराखण्ड होमगार्ड्स, प्रान्तीय रक्षक दल, एन०सी०सी बॉयज, एन०सी०सी गर्ल्स, अश्व दल, पुलिस संचार, अग्निशमन, सी०पी०यू० ने भव्य परेड में प्रतिभाग किया। परेड करने वाली टुकड़ियों में प्रथम स्थान पर सीआरपीएफ, द्वितीय स्थान पर आईटीबीपी और तृतीय स्थान पर 14वीं डोगरा रेजीमेंट आर्मी रहीं, जिन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

   परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में राज्य के लोक कलाकारों ने सांस्कृृतिक लोक नृत्य का मनमोहक प्रदर्शन किया, जिसमें राज्य की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिली। विभिन्न सांस्कृतिक दलों द्वारा छोलिया नृत्य, गढ़वाली नृत्य, पाइप बैंड आदि का महमोहक प्रदर्शन किया गया, जिसका उपस्थित लोगों ने खूब आनंद लिया।

   कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकतंत्र सेनानियों, शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिजनों और राज्य आंदोलनकारियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया।

   परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सांसद नरेश बंसल, सांसद महेन्द्र भट्ट, विधायक खजान दास, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, एसएसपी अजय सिंह सहित पुलिस तथा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, जनप्रतिनिधि गण एवं जनसामान्य लोग भी उपस्थित रहे।

*राज्यपाल ने लोक भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया*

   राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोक भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।

   मीडिया से वार्ता करते हुए राज्यपाल ने भारतीय संविधान के शिल्पकार बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए लोकतंत्र की सुदृढ़ नींव रखने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने देश की स्वतंत्रता हेतु बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों, वीर शहीदों तथा सीमाओं एवं तटों पर तैनात सशस्त्र बलों के जवानों को नमन किया।

   राज्यपाल ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें अपने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विश्व गुरु भारत’ के संकल्प को साकार करने में सभी नागरिकों की सहभागिता पर बल दिया।

   राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक उपयोग राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने उत्तराखण्ड की नारी शक्ति और युवाओं द्वारा नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

   राज्यपाल ने ‘राष्ट्र सर्वाेपरि’ की भावना के साथ एकता और अखंडता बनाए रखने का आह्वान करते हुए सभी प्रदेशवासियों को देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देने की अपील की।

*गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिन अधिकारियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया विवरण निम्नवत हैः-*

1-डॉ. नीरज सिंघल, निदेशक पशुपालन विभाग उत्तरखण्ड।
2- मस्तू दास, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखण्ड।
3- अरुण कुमार सिंह, अनुभाग अधिकारी सचिवालय उत्तराखण्ड।
4- राकेश सिंह असवाल, समीक्षा अधिकारी सचिवालय उत्तराखण्ड।

*गणतंत्र दिवस-2026 के अवसर पर घोषित राज्यपाल उत्कृष्ट सेवा पदक से राज्य पुलिस बल के अधिकारियों/कर्मचारियों को पदक अलंकरण किया गया-*

1- यशपाल सिंह, निरीक्षक नागरिक पुलिस एसटीएफ देहरादून।
2- नरोत्तम बिष्ट, उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एसटीएफ देहरादून।
3- देवेन्द्र कुमार, आरक्षी 21 नागरिक पुलिस एसटीएफ देहरादून।
4- भूपेन्द्र सिंह मर्ताेलिया, मुख्य आरक्षी एसटीएफ कुमाऊँ।
5- सुनील कुमार, अपर उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस पौड़ी गढ़वाल।
6- सुनील रावत, मुख्य आरक्षी 114 नागरिक पुलिस, जनपद देहरादून।

गंगा तट पर संस्कृति और संगीत का अनुपम संगम, बसंतोत्सव बना आध्यात्मिक चेतना का उत्सव: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज भरत मंदिर, ऋषिकेश में आयोजित वसंतोत्सव 2026 – मैथिली ठाकुर नाइट में सम्मिलित हुए। गंगा के पावन तट पर आयोजित इस भव्य एवं भक्तिमय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संतों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों तथा देश-प्रदेश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पतित-पावनी मां गंगा के श्रीचरणों में नमन करते हुए कहा कि मधुबनी की शान, भजनों एवं लोकगीतों की स्वर साधिका तथा देश की सबसे युवा विधायक मैथिली ठाकुर जैसी प्रतिभा का योगनगरी ऋषिकेश की पावन धरा पर आगमन सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने पूज्य संतगणों एवं देश-प्रदेश से पधारे श्रद्धालुओ का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने इस विशिष्ट कार्यक्रम के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गंगा के पवित्र तट पर आयोजित यह बसंतोत्सव भजन संध्या संस्कृति और संगीत के अनुपम संगम के माध्यम से लोक संस्कृति और सनातन परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने ऋषिकेश बसंतोत्सव समिति को इस भव्य और भक्तिमय आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश आधुनिक योग और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ सनातन संस्कृति की प्राचीन पुण्य भूमि भी है। सतयुग में इस धरा पर महर्षि रैभ्य को भगवान विष्णु के दर्शन हुए, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण वध के पश्चात यहीं तपस्या की तथा भरत जी ने भगवान नारायण की स्थापना कर पूजन किया। कालांतर में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा भी इस भूमि पर विशेष पूजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली ठाकुर ने अपनी साधना, प्रतिभा और संकल्प से यह सिद्ध किया है कि समर्पण, परिश्रम, भक्ति और सेवा भाव से समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली ठाकुर की जीवन यात्रा यह दर्शाती है कि कला और संस्कृति केवल मंच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा भी बनती है। जब आज अनेक युवा पश्चिमी संगीत की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तब मधुबनी से निकली इस युवा प्रतिभा ने अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए मैथिली और भोजपुरी लोक संगीत को जन-जन तक पहुंचाया है। उन्होंने वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें ‘कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर’ के नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने का उल्लेख भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में गीत और संगीत के माध्यम से की गई उपासना को ईश्वर से सीधे संवाद का मार्ग बताया गया है। सच्चे मन से की गई स्वर साधना कलाकार को समाज का पथ-प्रदर्शक बना देती है। उन्होंने कहा कि मैथिली ठाकुर जैसी विभूतियां यह स्मरण कराती हैं कि भारत की आत्मा आज भी गांवों की चौपालों, मंदिरों की घंटियों, लोकगीतों की धुनों और मां गंगा की लहरों में जीवित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज सनातन संस्कृति की धर्मध्वजा विश्व में गर्व के साथ फहरा रही है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ-केदारनाथ धामों का पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे कार्यों से भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है। इसी प्रेरणा से उत्तराखंड सरकार भी केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर, यमुना तीर्थ पुनरुद्धार जैसी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दून विश्वविद्यालय में “सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज” की स्थापना कर संस्कृति और दर्शन के अध्ययन को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की स्थापना की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संतुलन और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। यह प्रतिबद्धता कठोर निर्णयों और साहसिक कदमों के रूप में दिखाई देती है। सख्त धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी कानून, नकल विरोधी कानून, भू-कानून, यूसीसी लागू करने सहित भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसमर्थन और सहयोग से सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को अवश्य पूर्ण करेगी।

रेन बसेरा में रहने वाले लोगों का हाल जान डीएम ने नगर निगम को सफाई व्यवस्था के निर्देश दिए

राजधानी देहरादून में लगातार हो रही बारिश एवं बढ़ती ठंड को दृष्टिगत रखते हुए शीतलहरी में रात्रि में जिलाधिकारी सविन बसंल शहर के चौक चौराहों पर पंहुच अलाव व्यवस्था देखी तथा इस दौरान उन्होंने रेनबसेरों में रहने वालों का हाल जाना तथा नगर निगम एवं तहसील प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने देहरादून में देर सांय चौक चौराहों पर अलाव व्यवस्था का औचक निरीक्षण करते हुए रैन बसेरों में रह रहे असहाय एवं जरूरतमंद लोगों का हाल चाल जाना।

जिलाधिकारी ने रैन बसेरा का निरीक्षण कर वहां ठहरे लोगों से बातचीत की तथा उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने नगर निगम एवं तहसील प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ठंड के मौसम में कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति असुविधा का शिकार न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। सभी चौक चौराहो पर अलावा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए इसकी दैनिक सूचना उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा असहाय, निराश्रित एवं बेघर लोगों की सहायता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ठंड एवं बारिश के दौरान रैन बसेरों में रह रहे लोगों को पर्याप्त कंबल, भोजन एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि रैन बसेरों की नियमित निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं तत्काल की जाएं, जिससे किसी भी व्यक्ति को ठंड से प्रभावित न होना पड़े। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरी, डीडीएमओ ऋषभ कुमार मौजूद रहे।