सीएम धामी की बड़ी कार्रवाई, हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी और तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है।

प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (क्वच्ज्) को संस्तुति भेजी जा रही है।

इसके अलावा, उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।

गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वाेपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में बड़ा एक्शन, 10 लोगों पर दर्ज होगा अभियोग
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के संकल्प के तहत हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की गई है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र एवं धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों तथा भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज किए जाने का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अनुमोदन किया गया है। जांच में दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

अभियोग दर्ज किए जाने वाले व्यक्तियों में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों में सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शासन की प्राथमिकता पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।

श्री आनंद धर्मशाला सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना का सजीव प्रतीकः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में श्री आनंद धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा निर्मित धर्मशाला के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की तथा इस अवसर पर आनंद धर्मशाला ट्रस्ट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षत्रिय एकलौता समाज ने सदैव अपने परिश्रम, साहस और संस्कारों के बल पर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि खेती, व्यापार, शिक्षा, समाज सेवा तथा देश की सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इस समाज के लोगों ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तथा अन्य सुरक्षा बलों में सेवाएं देकर समाज के वीर सपूत राष्ट्र की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ बना रहे हैं। उन्होंने श्री आनंद धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा धार्मिक जागरण, सांस्कृतिक संरक्षण और मानव कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि श्री आनंद धर्मशाला सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना का सजीव प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का प्रवेश द्वार है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु माँ गंगा की गोद में आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला का निर्माण पुण्य और सराहनीय कार्य है तथा यह आगामी कुंभ और चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले हरिद्वार कुंभ को भव्य, दिव्य और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि घाटों के पुनरुद्धार, सड़क व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात और मूलभूत सुविधाओं के विकास हेतु तेजी से कार्य किए जा रहे हैं, ताकि हर श्रद्धालु को सुव्यवस्थित और सुरक्षित अनुभव प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ धाम पुनर्विकास, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी केदारखंड एवं मानसखंड क्षेत्रों के प्राचीन मंदिरों के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य निरंतर प्रगति पर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सनातन मूल्यों और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति के सम्मान और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि निर्धारित स्थलों पर ही धार्मिक आयोजन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार पतित पावनी माँ गंगा करोड़ों श्रद्धालुओं को आस्था, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती हैं, उसी प्रकार श्री आनंद धर्मशाला भी आने वाले समय में श्रद्धालुओं, जरूरतमंदों और समाज के लिए सेवा, सहयोग और सुविधा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।
इस अवसर पर हरी चेतना नन्द महाराज महामंडलेश्वर, कैलाश विजयवर्गीय मंत्री नागरिक प्रशासन मध्य प्रदेश, विनय रोहिला उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन, विशाल पटेल पूर्व विधायक देपालपुर इन्दौर, संतोष पटेल, उपाध्यक्ष आनंद ट्रस्ट धर्मशाला, आशाराम सिसोदिया अध्यक्ष महाकालीका ट्रस्ट इन्दौर, सीताराम पटेल अध्यक्ष देवास छात्रावास, जिलाध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर, पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोभाल, उप जिलाधिकारी हरिद्वार जितेन्द्र कुमार, योगेश मेहरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए ट्रस्टी एवं श्रद्धालू मौजूद रहे।

खड़खड़ी श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के हुआ दिवंगत खूंडरी का अंतिम संस्कार

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (से.नि) को हरिद्वार स्थित खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर भी मौजूद रहे।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (से.नि) की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा और हर वर्ग के लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।अंतिम संस्कार के दौरान सेना एवं पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। उनके पुत्र मनीष खंडूरी ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन राज्य और देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने सेना, केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री के रूप में पारदर्शिता और अनुशासन के साथ उत्कृष्ट कार्य किए। उन्होंने कहा कि वह हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उनकी कमी एक अभिभावक के रूप में हमेशा महसूस होगी।

केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन सादगी, अनुशासन और ईमानदारी का उदाहरण रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और सेना अधिकारी के रूप में हर दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाया। उनके कार्यों को उत्तराखंड ही नहीं, पूरा देश हमेशा याद रखेगा। सुशासन और लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण विचारों को आगे बढ़ाने में उनका योगदान प्रेरणादायक रहा।

इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र/पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, महामंत्री संगठन अजेय कुमार, सांसद अनिल बलूनी, अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सतपाल महाराज, डॉ .धन सिंह रावत, गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, खजान दास, विधायकगण, संतगण मौजूद थे।

उत्तराखण्ड बनेगा भारतीय ज्ञान विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्रः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हरिद्वार में श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि ऋषियों, ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन की भी भूमि रही है। ऋषिकुल, हरिद्वार में इस महत्वपूर्ण संस्थान को नई पहचान देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान का कार्य जल्द शुरू किया जाए। कुंभ शुरू होने से पहले यह कार्य पूर्ण किया जाए। पर्यटन विभाग इसमें नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु को निर्देश दिये कि इस संस्थान के कार्यों की नियमित प्रगति के लिए संबंधित विभागीय सचिवों के साथ पाक्षिक बैठकें की जाएं। इसमें विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। राज्य के सभी जनपदों की लोक कला पर आधारित गतिविधियां भी इसमें शामिल की जाएं।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान तथा जीवन मूल्यों पर आधारित शोध और अध्ययन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर जैसे महान विद्वानों के योगदान को शोध और शिक्षा से जोड़ा जाए। बैठक में संस्थान में खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारत में धातु विज्ञान, जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान अत्यंत विकसित था, जिसे आधुनिक अनुसंधान से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में वेदों और उपनिषदों में वर्णित नैतिक शिक्षा, अनुशासन, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाना आवश्यक है। यह संस्थान शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण का भी केंद्र बने। उन्होंने कहा कि संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं, संगोष्ठी केंद्र, ई-लर्निंग सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाए।

बैठक के दौरान संस्थान में भारतीय विद्या शाखाओं के गहन अध्ययन को प्रोत्साहित करने के साथ ही पर्यटन, आयुर्वेद ज्योतिष और योग शिक्षा के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जानकारी दी गई कि ज्ञान, योग, ध्यान और भारतीय अध्यात्म की समृद्ध परंपराओं को संस्थान में वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित किया जायेगा। जिसमें शैक्षणिक क्षेत्र के श्रुति केन्द्र में वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ज्ञान की परंपरा, दर्शन केन्द्र में भारतीय दर्शन और चेतना के गहन विचार, आयु केन्द्र में आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के माध्यम से जीवन का संतुलन, विज्ञान केन्द्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक विज्ञान की विरासत और कला केन्द्र में भारतीय कला, संस्कृति एवं सौन्दर्य परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में विकसित किया जायेगा।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव धीराज गर्ब्याल, दीपक कुमार, डॉ. आर. राजेश कुमार, रंजना राजगुरू, उपाध्यक्ष हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण सोनिका, अपर सचिव बंशीधर तिवारी एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित मौजूद थे।

स्वामी परमानन्द गिरि महाराज की 71वीं संन्यास जयंती पर सीएम ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आयोजित श्री अखण्ड परमधाम गंगा घाट के लोकार्पण समारोह एवं स्वामी परमानन्द गिरि महाराज की 71वीं संन्यास जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर देशभर से पधारे संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन केवल एक घाट के लोकार्पण का अवसर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना के निरंतर प्रवाह का प्रतीक है। उन्होंने स्वामी परमानन्द गिरि महाराज के जीवन को तप, त्याग और साधना का अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके विचारों एवं शिक्षाओं ने समाज को सेवा, करुणा और मानव कल्याण के मार्ग पर अग्रसर किया है।

मुख्यमंत्री ने परमपूज्या साध्वी ऋतम्भरा के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र एवं सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि संतों का सानिध्य समाज को सही दिशा प्रदान करता है और आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एवं महाकाल लोक जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर क्षेत्रों के विकास, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर तथा यमुनातीर्थ स्थल के पुनरुद्धार जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना भी की गई है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता लागू करने, धर्मांतरण विरोधी कानून, तथा अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध की गई कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत एवं जनसंख्या संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए संकल्पबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए आध्यात्मिक मूल्यों का सुदृढ़ होना आवश्यक है। उन्होंने सभी से संतों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चारधाम यात्रा का शुभारभ किया जा रहा है आज मां यमुना एवं मां गंगा के कपाट देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोले जा रहे है,उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि चार धाम पर आने वाले यात्रियों की यात्रा सुगम, सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित संचालित हो, इसके लिए सरकार पूरी तरह से तैयार है तथा आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सभी सुविधाएं एवं व्यवस्थाएं चाक चौबंद की गई है तथा आने वाले सभी तीर्थयात्रियों का चारों धामों के दर्शन सुगमता से कराना सरकार की प्राथमिकता है।

इस अवसर पर पूज्य स्वामी बालकानंद महाराज, पूज्य बीकानेर स्वामी विशोकानन्द भारती जी महाराज, योग ऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा (दीदी मां), पूज्य स्वामी महाराज अविचल दास, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पूरी महाराज,निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज, आचार्य स्वामी ज्योतिर्यानंद गिरी महाराज, पूज्य स्वामी मुनि महाराज, महंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ,चिदानंद मुनि महाराज, पूज्य आचार्य बालकृष्ण महाराज, स्वामी अनंत देव महाराज, पूज्य बाबा निर्मल दास महाराज, जितेंद्रानंद सरस्वती महाराज, अध्यक्ष राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग पूज्य साध्वी निरंजन ज्योति, महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी हरिचेतनानंद महाराज, महामंडलेश्वर पूज्य आत्मानंद मुनि महाराज, महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयानंद महाराज, राष्ट्रीय मंत्री हिंदू परिषद अशोक तिवारी, पंचायतीराज एवं आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य नगर आयुक्त नंदन कुमार, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह सहित देशभर से आए संत महात्मा एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को बताया भारत की पहचान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज हरिद्वार में ऋषिकुल मैदान में आयोजित “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” के सद्भावना सम्मेलन, बैसाखी महोत्सव 2026 में प्रतिभाग करते हुए कहा कि भारत की सनातन संस्कृति सदैव से ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत पर आधारित रही है, जो पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश देती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में सम्मेलन में उपस्थित देशभर से आए संतों, अतिथियों, माताओं, बहनों, युवाओं एवं सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए वैशाखी पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना से परिपूर्ण इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

उन्होंने कहा कि सतपाल महाराज के मार्गदर्शन में “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” द्वारा समाज में समरसता, सेवा और नैतिक जागरण के लिए किए जा रहे कार्य अत्यंत प्रेरणादायी हैं। वर्तमान समय में जब विश्व विभिन्न संघर्षों और तनावों से गुजर रहा है, ऐसे में प्रेम, सद्भाव और मानवता का संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सदैव वैश्विक स्तर पर मानवता की सेवा को प्राथमिकता दी है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश द्वारा ‘एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य’ की भावना को आगे बढ़ाने का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना काल में अनेक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराना, योग और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाना तथा विभिन्न आपदाओं के समय सहायता प्रदान करना भारत की मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द किसी भी राष्ट्र की प्रगति के मूल आधार होते हैं। इसी दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने को सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर एवं शारदा कॉरिडोर के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही, दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सद्भावना सम्मेलन समाज में एकता, सद्भाव और सेवा की भावना को और अधिक सशक्त करेगा तथा इसके सकारात्मक परिणाम दूरगामी होंगे। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए सतपाल महाराज एवं “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” को शुभकामनाएं भी दीं।

कुम्भ मेला 2027 की तैयारियों का मुख्य सचिव ने किया स्थलीय निरीक्षण

कुम्भ मेला–2027 की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को हरिद्वार में विभिन्न निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए तथा विभागीय समन्वय को सुदृढ़ बनाते हुए कार्यों में तेजी लाई जाए।

कुंभ क्षेत्र के कार्यों के विस्तृत निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने अपर गंगा नहर के बाएं तट पर स्थित शहीद भगत सिंह घाट (कामधेनु घाट) से सिंहद्वार तक निर्माणाधीन घाट एवं बैरागी कैम्प घाट का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि घाटों का निर्माण श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए आधुनिक मानकों के अनुरूप किया जाए, ताकि कुम्भ के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
उन्होंने बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए घाटों पर रैम्प एवं अन्य सुगम्यता संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने, साथ ही चेंजिंग रूम एवं प्रसाधन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि इस बार कुम्भ मेला–2027 के लिए ‘ग्रीन घाट’ विकसित किए जाएं, जिसके तहत घाटों पर हरित पट्टियां विकसित कर उन्हें फूलों एवं पौधों से सजाया-संवारा जाए।

इसके पश्चात उन्होंने ज्वालापुर–ईदगाह–पीएसी–शिवालिक नगर मोटर मार्ग के किलोमीटर-3 पर पथरी रौ नदी पर निर्माणाधीन 60 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड आरसीसी सेतु के कार्य की प्रगति का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए तथा कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए।

मुख्य सचिव ने बहादराबाद–सिडकुल मार्ग (भाईचारा ढाबा से बीएचईएल सेक्टर-6 होते हुए शिवालिक नगर चौक एवं बीएचईएल मध्य मार्ग तक) के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह मार्ग कुम्भ के दौरान यातायात के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए।

उन्होंने धनौरी–सिडकुल लिंक मार्ग पर पथरी रौ नदी में पुरानी गंग नहर सायफन के डाउनस्ट्रीम में बन रहे 90 मीटर स्पान के पुल के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस पुल से संबंधित नदी तल के कार्य वर्षाकाल से पूर्व पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि वर्षा ऋतु में जलस्तर बढ़ने से कार्य प्रभावित न हो।

मुख्य सचिव ने हरिद्वार बाईपास रिंग रोड परियोजना के निर्माण कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाईपास निर्माण कार्य अविलंब पूर्ण किया जाए तथा सप्ताहवार लक्ष्य निर्धारित कर टाइमलाइन के अनुसार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कुम्भ मेला प्रारंभ होने से पूर्व पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है।
इसके साथ ही दिल्ली राजमार्ग पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी हरिद्वार को इसकी प्रगति का दैनिक ब्यौरा उपलब्ध कराया जाए।

मुख्य सचिव ने बैरागी कैम्प में 1500 किलोलिटर क्षमता के ओवरहेड टैंक, एवं कार्यों की प्रगति का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जलापूर्ति संबंधी कार्य समय से पूर्ण कर कुम्भ के दौरान निर्बाध एवं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि कुम्भ मेला–2027 एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे। ऐसे में सभी विभागों को पूर्ण जिम्मेदारी एवं समर्पण के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने निर्माण कार्यों के साथ-साथ यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी समान प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी समस्या का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रह जाए।

मुख्य सचिव ने मेला नियंत्रण भवन में संचालित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण कर सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने इस व्यवस्था में नवीनतम आईटी अनुप्रयोगों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव शहरी विकास नितेश झा, आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, नगर आयुक्त नंदन कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, हरिद्वार विकास प्राधिकरण के सचिव मनीष कुमार, उप मेलाधिकारी आकाश जोशी एवं मनजीत सिंह सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

हरिद्वार में तेजी से बन रहा पीएम यूनिटी मॉल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में हरिद्वार में प्रस्तावित पीएम यूनिटी मॉल परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज देहरादून स्थित राज्य सचिवालय में सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में पीएम यूनिटी मॉल के निर्माण कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है, जिसके चलते अब तक करीब 46 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। यह मॉल न सिर्फ व्यापार, बल्कि पर्यटन और स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) के अनुसार 160.57 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस यूनिटी मॉल का निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए तेजी से किया जा रहा है। फरवरी 2023 में घोषित इस परियोजना को सरकार की प्राथमिकता में रखा गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर सचिव आवास विनोद गिरी, सचिव हरिद्वार-विकास प्राधिकरण मनीष सिंह सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

*‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ को मिलेगा मंच*
पीएम यूनिटी मॉल को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) की अवधारणा पर विकसित किया जा रहा है। इसके तहत देशभर के राज्यों और उत्तराखंड के जिलों के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पाद एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और छोटे उत्पादकों को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है।

*56 दुकानें और मल्टीप्लेक्स की सुविधा*
प्रस्तावित मॉल में 56 दुकानों की व्यवस्था की जा रही है, जहां विभिन्न राज्यों के उत्पाद प्रदर्शित और बेचे जाएंगे। इसके साथ ही तीन मल्टीप्लेक्स भी बनाए जाएंगे, जिससे यह मॉल व्यापार के साथ-साथ मनोरंजन और पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।

*पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा*
अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से हरिद्वार में पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी यह मॉल अहम भूमिका निभाएगा।

*दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य*
परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। समय पर निर्माण पूरा होने पर यह यूनिटी मॉल देश की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

*आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार का बयान*
आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देश हैं कि पीएम यूनिटी मॉल परियोजना को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने बताया कि यह मॉल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसी पहल को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना की नियमित समीक्षा की जा रही है और निर्माण कार्य में तेजी लाई गई है, ताकि दिसंबर 2026 तक इसे पूरा कर प्रदेश को एक बड़ा व्यापारिक और पर्यटन केंद्र दिया जा सके।

धामी सरकार का मास्टर स्ट्रोक : देहरादून–हरिद्वार–ऋषिकेश कॉरिडोर को मिलेगा स्मार्ट और जाम मुक्त परिवहन नेटवर्क

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड में आधुनिक और सुदृढ़ आधारभूत ढांचे के निर्माण की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में राज्य के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक, पर्यटन और प्रशासनिक कॉरिडोर, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए कॉम्प्रीहेन्सिव मोबिलिटी प्लान (CMP)-2024 पर उच्चस्तरीय मंथन किया गया। आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में यह महत्वपूर्ण बैठक राज्य सचिवालय में आयोजित हुई, जिसमें इस पूरे कॉरिडोर की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक की शुरुआत मैसर्स यूएमटीसी द्वारा CMP-2024 के अद्यतन प्रस्तावों के प्रस्तुतीकरण से हुई, जिसमें देहरादून (देहरादून शहर, विकासनगर, ऋषिकेश) और हरिद्वार (हरिद्वार शहर, रुड़की, भगवानपुर) क्षेत्र की मौजूदा यातायात चुनौतियों और उनके समाधान को विस्तार से रखा गया। इसके बाद विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजना के तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। सचिव आवास ने निर्देश दिए कि CMP के सभी प्रस्तावों को संबंधित मास्टर प्लान में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि आने वाले समय में शहरी परिवहन अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में तैयार होने वाली सभी योजनाओं में एकीकृत परिवहन प्रणाली की अवधारणा को केंद्र में रखा जाए।

*बढ़ते यातायात दबाव का समाधान, लोगों को मिलेगा राहतभरा सफर*
देहरादून–हरिद्वार–ऋषिकेश कॉरिडोर वर्तमान में राज्य का सबसे व्यस्त क्षेत्र बन चुका है। SIDCUL जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार, तेजी से हो रहे शहरीकरण और पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि के चलते यहां यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पीक आवर्स में जाम, अव्यवस्थित पार्किंग, सीमित सड़क क्षमता और सार्वजनिक परिवहन की कमी जैसी समस्याएं आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। CMP-2024 इन चुनौतियों का दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे आमजन को राहत मिलने की उम्मीद है। इस योजना के तहत परिवहन को लोग-केंद्रित, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और पैदल व साइकिल चालकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की दिशा में कई ठोस कदम प्रस्तावित किए गए हैं। इससे न केवल यातायात व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी।

*ई-बीआरटीएस, रोपवे और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से बदलेगा कॉरिडोर का स्वरूप*
CMP-2024 के अंतर्गत कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं, जो इस पूरे कॉरिडोर की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती हैं। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच लगभग 73 किलोमीटर लंबी ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) प्रणाली विकसित करने की योजना है, जिससे तीनों शहरों के बीच आवागमन तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। इसके अलावा हरिद्वार में पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है, जो विशेष रूप से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा। धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए रोपवे परियोजनाओं का विकास भी इस योजना का अहम हिस्सा है, जिससे यातायात का दबाव कम होगा और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITS), आधुनिक सिग्नलिंग, पार्किंग प्रबंधन और बाईपास सड़कों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के माध्यम से शहरों का समेकित विकास सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे परिवहन और शहरी जीवनशैली के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

*कांवड़ और कुंभ जैसे आयोजनों में मिलेगी बड़ी राहत*
विशेषज्ञों का मानना है कि CMP-2024 के लागू होने से कांवड़ मेला और कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। हर साल लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से इस कॉरिडोर पर भारी दबाव पड़ता है, लेकिन नई योजना के लागू होने के बाद यातायात अधिक सुगम, व्यवस्थित और सुरक्षित हो सकेगा। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और प्रशासन के लिए भी व्यवस्थाएं संभालना आसान होगा। कुल मिलाकर यह योजना धामी सरकार की विकासोन्मुखी और दूरदर्शी सोच का प्रतिबिंब है, जो उत्तराखंड को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बैठक में उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा, निदेशक (वित्त) संजीव मेहता, महाप्रबंधक (सिविल) संजय जी. पाठक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने CMP-2024 को राज्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

*सरकार की दूरदर्शी सोच, विकास को मिलेगी नई रफ्तार*
आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड के प्रमुख शहरी क्षेत्रों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। CMP-2024 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें एकीकृत और आधुनिक परिवहन प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया गया है। हमारा उद्देश्य है कि देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच आवागमन को अधिक सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनाया जाए। ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम), रोपवे, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट जैसी योजनाएं न केवल यातायात समस्याओं का समाधान करेंगी, बल्कि राज्य के पर्यटन और आर्थिक विकास को भी नई गति देंगी। आने वाले समय में यह कॉरिडोर देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित होगा।

सीएम ने कुंभ मेले के भव्य आयोजन को सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध पूरी करने के अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार का भ्रमण कर कुंभ मेला 2027 की तैयारियों की प्रगति की समीक्षा की। डामकोठी में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले वर्ष आयोजित होने वाले कुंभ मेले के दिव्य एवं भव्य आयोजन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से पूरी की जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ जैसे विराट आयोजन में किसी भी स्तर पर कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। सभी संबंधित विभाग पूरी क्षमता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए समयबद्ध तरीके से तैयारियों को पूरा करें। उन्होंने कहा कि मेला आयोजन से जुड़े सभी हितधारकों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों तथा साधु-संतों के सहयोग से कुंभ मेले का भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कुंभ से संबंधित कार्यों के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी तथा प्रस्तावित कार्यों के लिए आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र जारी की जाएंगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान ही दूरभाष पर मुख्य सचिव से वार्ता कर शासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सड़क, पुल, पेयजल, स्वास्थ्य, यातायात और पार्किंग व्यवस्था से जुड़े स्थायी प्रकृति के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा, वर्षाकाल तथा कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमुख कार्यों के क्रियान्वयन की रणनीति बनाई जाए और विभाग निरंतर बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें।

मुख्यमंत्री ने कुंभ मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित योजनाओं की समीक्षा करते हुए आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं से सुसज्जित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की स्थापना को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसके लिए आवश्यक स्वीकृति शीघ्र जारी की जाएगी।

उन्होंने मेला नियंत्रण भवन के पास प्रस्तावित सीसीआर-2 भवन परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि कुंभ मेले के सुचारु प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण इस परियोजना को भी शीघ्र वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए खड़खड़ी पुल तथा श्रीयंत्र पुल से संबंधित योजनाओं को भी प्राथमिकता देते हुए उनके लिए आवश्यक स्वीकृतियां जल्द जारी करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश और मुनीकीरेती सहित कुंभ क्षेत्र के सभी सेक्टरों में बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता तथा सीवरेज प्रबंधन के कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने डामकोठी अतिथिगृह, हरिद्वार के विस्तार के निर्देश देते हुए कहा कि मौजूदा भवन से सटे क्षेत्र में एक आधुनिक एवं आकर्षक अतिथिगृह निर्माण की योजना तैयार कर प्रस्तुत की जाए।

बैठक में मेलाधिकारी सोनिका ने कुंभ मेला 2027 की तैयारियों से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सड़कों, पुलों, घाटों के निर्माण के साथ-साथ जलापूर्ति, चिकित्सा, सुरक्षा तथा मेला प्रबंधन से संबंधित स्थायी प्रकृति की 33 योजनाएं वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। सभी परियोजनाओं पर निर्धारित समयसीमा के अनुसार कार्य प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले के अंतर्गत मनसा देवी मंदिर तथा चंडी देवी मंदिर के मार्गों के सुधार की योजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त मेले के लिए प्रस्तावित अन्य कार्यों और अस्थायी व्यवस्थाओं की भी जानकारी बैठक में दी गई।

बैठक में हरिद्वार की जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर नगर निगम किरण जैसल, रुड़की मेयर अनीता अग्रवाल, विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, विधायक रुड़की प्रदीप बत्रा, पूर्व मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, सुनील सैनी, ओम प्रकाश जमदग्नि, जयपाल सिंह चौहान, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, सचिव एचआरडीए मनीष कुमार, उप मेलाधिकारी आकाश जोशी, मंजीत सिंह गिल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।