प्रीतम ने दिल्ली में थामा भाजपा का हाथ, भाजपाईयों में बैचेनी

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने बड़ा दांव चला है। धनोल्टी के निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार को पार्टी अपने पाले में लाने में कामयाब रही है। बुधवार को विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने नई दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने उन्हें सदस्यता ग्रहण कराई। बता दें कि प्रीतम उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) से भी मंत्री रह चुके हैं। उन पर कांग्रेस की भी नजर थी।
इस मौके पर प्रीतम सिंह पंवार ने कहा कि मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि देश की सबसे बड़ी पार्टी में शामिल हुआ हूं। मैं धार्मिक प्रदेश से हूं, जहां चारधाम हैं, देवी देवताओं का वास है। पीएम मोदी का नाता भी देवभूमि से रहा है। जिस तरह से उनकी धार्मिक आस्था देवभूमि से जुड़ी हैं उससे निश्चित तौर पर प्रदेश का विकास होगा।

जानिए प्रीतम सिंह पंवार के बारे में खास बातें
नाम- प्रीतम सिंह पंवार
पिता का नाम- स्व. मनोहर लाल पंवार
माता का नाम- कमला देवी
जन्मतिथि- 1 जनवरी 1966
स्थाई पता- ग्राम थान, जौनपुर, टिहरी गढ़वाल।
प्रारंभिक शिक्षा- प्राथमिक से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा बड़ेथी, उत्तरकाशी।
स्नातक- डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून।

प्रीतम पंवार का राजनीतिक सफर
– 1984 में उत्तराखंड क्रांति दल में शामिल हुए।
– 1988 में पहली बार चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी से क्षेत्र पंचायत सदस्य चुने गए।
– 1994 में उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की।
– 1996 में जिला सहकारी बैंक उत्तरकाशी के निदेशक।
– 1996 में दोबारा चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी से क्षेत्र पंचायत सदस्य चुने गए।
– वर्ष 2000 से 2002 तक उत्तरकाशी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे।
– 2002 में पहली बार यूकेडी से यमुनोत्री विधानसभा सीट से विधायक बने।
– 2012 में दूसरी बार भी यूकेडी से ही यमुनोत्री सीट से विधायक बने। तत्कालीन कांग्रेस सरकार में पहली बार कैबिनेट मंत्री का दायित्व संभाला। पंवार को शहरी विकास, मत्स्य पालन, पशुपालन, कारगार जैसे बड़े विभागों का मंत्री बनाया गया।
– 2017 में टिहरी जिले की धनोल्टी विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर तीसरी बार विधायक बने।

वीकेंड पर घूमने आए दो लोग गंगा की तेज धारा में बहे

नोएडा की एक एंड्राइड कंपनी का नौ सदस्यीय दल वीकेंड पर ऋषिकेश घूमने आया था। वह रामझूला के समीप दर्शन महाविद्यालय घाट पहुंचे। इस बीच एक व्यक्ति गंगा में हाथ धोने गया और अचानक पैर फिसलने से बहने लगे। तभी एक साथी उसे बचाने के लिए आगे बढ़े तो वह भी गंगा के तेज बहाव की चपेट में आ गये। किनारे पर खड़े साथियों को दोनों कुछ दूर तक बहते दिखे। इसके बाद दोनों ही गंगा की लहरों में ओझल हो गए। हादसे से पूरे ग्रुप के लोग सकते में है।

थानाध्यक्ष मुनिकीरेती कमल मोहन भंडारी ने बताया कि नोएडा की एक मोबाइल कंपनी से नौ लोगों का ग्रुप वीकेंड पर यहां घूमने आया था। वह रामझूला पुल के पास दर्शन महाविद्यालय का घाट पहुंचे। उनमें से दो लोग सुबह करीब नौ बजे गंगा में डूब गए। आपदा प्रबंधन दल को मौके पर बुलाकर रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया है। एसडीआरएफ की टीम भी गंगा में उनकी तलाश में जुटी रही। बताया कि डूबने वालों में एक कंपनी के सेंटर हेड राहुल सिंह पुत्र स्व. प्रेमपाल सिंह निवासी 190 तहरी वाली गली कलाम, पुलिस लाइन मार्ग, बुलंदशहर, यूपी और दूसरे मैनेजर भानू मूर्ति पुत्र एबीएम नारायण, निवासी प्लैट 8 थर्ड फ्लोर, मयूर विहार फेस वन ईस्ट पूर्व दिल्ली के रूप में हुई है।

ऋषिकेशः 71 वर्षीय बुजुर्ग की गंगा में डूबने की आशंका

चौदह बीघा का एक 71 वर्षीय बुजुर्ग के कपड़े पुलिस को आस्था पथ 72 से मिले हैं, बुजुर्ग के बेटे से कपड़ों की पहचान अपने पिता के होने की कराई है।

जानकारी के अनुसार, चौदह बीघा कुडियाल भवन थाना मुनिकीरेती निवासी 71 वर्षीय बुजुर्ग संदिग्ध परिस्थितियों में घर से गायब हो गए। त्रिवेणी घाट पुलिस को एक व्यक्ति के कपड़े 72 सीढ़ी गंगा के समीप आस्था पथ पर मिले। वहीं कुछ ही देर में अरविंद मोहन कुड़ियाल द्वारा चौकी त्रिवेणी घाट को सूचना दी कि उनके पिता चंद्रमोहन कुड़ियाल लापता है। पुलिस ने बरामद कपड़े दिखाए तो युवक ने उक्त कपड़े अपने पिता के होने की बात कही। पुलिस बुजुर्ग के गंगा में डूबने की आशंका जता रही है। हालांकि पुलिस ने जल पुलिस के साथ गंगा में काफी खोजबीन की। मगर, कुछ सफलता हाथ न लग सकी।

आजादी का अमृत महोत्सव पर नुक्कड़ नाटक, गंगा चौपाल व गंगा स्वच्छता विषय पर कार्यक्रम आयोजित

नगर पालिका परिषद मुनिकीरेती-ढालवाला की ओर से नमामि गंगे के तहत आजादी का अमृत महोत्सव मनाए जा रहा है। इसी क्रम में नगर पालिका द्वारा शत्रुघ्न मंदिर आस्था पथ पर नमामि नमामि गंगे के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक, गंगा चौपाल एवं गंगा स्वच्छता विषय पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जिसमें नगर क्षेत्र के मदर मिरेकल स्कूल के छात्र छात्राओं ने अपनी प्रस्तुति दी इसके साथ ही खुशी चौरिटेबल ट्रस्ट द्वारा भी अपनी प्रस्तुति दी गई।

इस दौरान पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मनोज द्विवेदी, अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग कमल सिंह, सभासद वीरेंद्र सिंह चौहान, नगर पालिका नरेंद्र नगर अध्यक्ष राजू राणा, उत्तर प्रदेश गाजियाबाद से राजेंद्र चौधरी, सुनयना बिजल्वाण, अधिशाषी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट, सफाई निरीक्षण भूपेंद्र पंवार, दीपक कुमार, सतेंद्र, मनोज आदि शामिल रहे।

कैबिनेट मंत्री ने किया आपदाग्रस्त क्षेत्र का मुआयना, अधिकारियों को दिए निर्देश


कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने धमांदस्यु पट्टी के आपदाग्रस्त क्षेत्रों बवानी, कठ्या, बडल और धौड्याकला का मुआयना किया। उन्होंने जिलाधिकारी टिहरी को यहां सुरक्षा हेतु कार्य करने के लिए निर्देशित किया।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि उक्त जगह में बीते 28 अगस्त को आई आपदा से अधिक नुकसान हुआ है। पूरी तरह से मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो चुके काश्तकारों के अधिकांश खेत बह चुके हैं। बताया कि नदी ने यहां अपना रास्ता बदल दिया है इससे यहां लगातार खतरा बना हुआ है। हेतु जिलाधिकारी को सुरक्षात्मक कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है। मौके पर ब्लाक प्रमुख राजेंद्र भंडारी, नगर पालिका अध्यक्ष रोशन रतूड़ी, मनीष डिमरी, प्रधान वंदना, उमेश भंडारी, हुकुम भंडारी, राम भरत, राकेश पांडे, रमेश पुंडीर, प्रशासन एवं अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

टिहरी निवासी जबर सिंह के पार्थिव शरीर को भारत में लाने का अनुरोध

टिहरी जिले के कंदीसौड़ स्थित थौलधार ब्लाक निवासी जबर सिंह के पार्थिव शरीर को नाइजीरिया से भारत वापस लाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विदेश मंत्री एस जय शंकर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि भारत सरकार इस मसले पर गंभीरता से प्रयास करे।

ज्ञातव्य है कि टिहरी जनपद के कंदीसौड़ गांव के निवासी जबर सिंह नाइजीरिया स्थित ताज रेस्टोरेंट में काम में कार्यरत थे, बीते 24 अगस्त को देर रात को अचानक उनका स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका आकस्मिक निधन हो गया था। जबर सिंह के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिजनों द्वारा उनका पार्थिव शरीर अपने गाँव लाये जाने हेतु नाइजीरिया सरकार से सम्पर्क किया गया, लेकिन उनके द्वारा स्व. जबर सिंह के पार्थिव शरीर को भारत वापस भेजे जाने में असमर्थता व्यक्त कर दी गई। स्व. जबर सिंह के परिवारजनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्वयं के संसाधनों से वे मृतक का शरीर भारत वापस लाने में असमर्थ है।

इस बात का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने भारत सरकार के विदेश मंत्री से विशेष अनुरोध करते हुए इस मामले की गम्भीरता को ध्यान में रखते हुए शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर स्व. जबर सिंह के पार्थिव शरीर भारत वापस लाये जाने हेतु केन्द्र सरकार से आग्रह किया है. विदेश मंत्रालय से इस सम्बन्ध में राज्य सरकार को सकारात्मक आश्वासन मिला है।

टिहरी विस्थापित प्रत्येक परिवार को मिलेगा 74.4 लाख का मुआवजा

प्रदेश के पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज के अथक प्रयासों से आखिरकार 20 वर्ष बाद टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों को न्याय मिलना संभव हो पाया है।

टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास संबंधी समस्याओं के निराकरण हेतु 22 जनवरी 2021 को प्रदेश के पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने टिहरी के जनप्रतिनियों और राज्य सरकार के अधिकारियों को साथ लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह के साथ एक बैठक की थी। बैठक में सतपाल महाराज के साथ टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, विधायक धन सिंह नेगी, घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह, प्रताप नगर विधायक विजय सिंह पवार सहित अनेक विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह के साथ हुई उस ऐतिहासिक बैठक में तय किया गया था कि टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास संबंधी समस्याओं का समाधान न्यायालय की परिधि से बाहर किया जाएगा।

पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज की देखरेख में टिहरी बांध विस्थापित 415 परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लगातार चल रहे प्रयासों के तहत जनवरी से मैराथन बैठकों का दौर जारी रहा। जनवरी से अब तक टीएचडीसी अधिकारियों, सचिव सिंचाई उत्तराखंड और जिलाधिकारी टिहरी के बीच हुई अनेक बैठकों का परिणाम यह रहा कि टीएचडीसी ने उत्तराखंड सरकार को एक अंडरटेकिंग दी है। जिसमें कहा गया है कि वह संपार्श्विक क्षति नीति 2013 के तहत गठित तकनीकी समिति की संरचना के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा संशोधित आदेश जारी होने के बाद माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड में दायर अपनी रिट याचिका को वापस ले लेंगा।

साथ ही टिहरी बांध परियोजना प्रभावित 415 परिवारों के पुनर्वास को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से जो मुआवजा राशि तय की गई है वह प्रभावित क्षेत्र के तत्समय बाजारी दरों, सोलेशशियम, एक्सग्रेशिया, ब्याज और विकास लागत को जोड़कर प्रति परिवार 74.4 लाख रूपये आंकी गई है। टीएचडीसी और उत्तराखंड सरकार दोनों की सहमति से तय हुआ है कि बांध प्रभावित 415 परिवारों के पुनर्वास हेतु 74.4 लाख का मुआवजा प्रति परिवार के अनुसार दिया जाएगा।

इस समझौते के तहत रौलाकोट गांव के पुनर्वास के बारे में भी तय हुआ है कि ग्राम रौलाकोट के विस्थापन हेतु पुनर्वास निदेशालय के पास लगभग 70 एकड़ भूमि रोशनाबाद, रायवाला, घमंडपुर, आदि गांव में उपलब्ध है जो कि पहले टिहरी बांध प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके अलावा लगभग 20 एकड़ भूमि विभिन्न स्थानों पर टीएचडीसी के स्वामित्व में है। क्योंकि उक्त भूमि को विकसित करने की आवश्यकता है इसलिए टीएचडीसी 10.5 करोड़ की राशि इसके लिए वहन करेगा।

कुल मिलाकर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के अथक प्रयासों से 20 वर्षों के लम्बे इन्तजार के बाद अब कहीं जाकर टिहरी बांध परियोजना प्रभावित 415 परिवारों की पुनर्वास संबंधित समस्याओं को लेकर एक बड़ी सफलता मिलती दिखाई दे रही है।

लापता महिला का सामान और सुसाइड नोट त्रिवेणीघाट से बरामद

टिहरी जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां गुरूवार को त्रिवेणी घाट गंगा तट से लापता महिला का सामान और सुसाइड नोट बरामद हुआ है। बताया जा रहा है कि महिला थाना घनसाली क्षेत्र से बीते बुधवार को घर से लापता हो गई थी।
लेकिन महिला का अभी कुछ पता नहीं चल सका है। सुसाइड नोट में महिला ने सुसरालियों पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए है और मौत की वजह बताई है। वहीं मामले में पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। साथ ही महिला की तलाश के लिए गंगा में सर्च आपरेशन शुरू कर दिया गया है।
बता दें कि थाना घनसाली टिहरी गढ़वाल, ग्राम तुंग पोस्ट बाजियाल गांव निवासी मंजू पंवार (24 वर्ष) पत्नी दीपक बुधवार की सुबह करीब छह बजे घर से लापता हो गई थी। महिला के पति ने महिला की काफी तालाश की जब मंजू का कहीं कुछ पता नहीं चल सका उसके पति ने थाना घनसाली में सूचना दी। पुलिस ने मामलें में मंजू का गुमशदी की रिपोर्ट दर्ज कर तलाश शूरू कर दी थी।
मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया था। जिसकी मदद से पुलिस जांच में महिला के मोबाइल लोकेशन गुरुवार की सुबह करीब 6रू30 बजे त्रिवेणी घाट चौकी क्षेत्र में गंगा तट स्थित नाव घाट पर मिली। पुलिस ने मंजू के परिजनों को इसकी सूचना दी। जिसके बाद विवाहिता के स्वजन नाव घाट पहुंचे तो उन्हें वहां मंजू का ट्राली बैग मिला और उसके अंदर एक डायरी और सुसाइड नोट मिला। जिसकी सूचना त्रिवेणी घाट पुलिस चौकी को दी गई।
पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मंजू ने डायरी में सुसाइड नोट सहित काफी बातें लिखी हैं। जिसमें लिखा है कि शादी के बाद बच्चा ना होने पर उसकी सास और पति उसे ताना देते थे। मैं सब को छोड़ कर जा रही हूं। वहीं पुलिस ने इस मामले में अनहोनी की आशंका जताई है। जिसके चलते पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की है। इसके साथ ही एसडीआरएफ की टीम भी गंगा में सर्च आपरेशन चला रही है। मौके पर मंजू की मां, चाचा सहित कई लोग मौजूद है। जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।

बड़ी योजनाओं में पेंडिंग मुद्दों को निस्तारित करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने सचिवालय में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) के तहत ऋषिकेश-कर्णप्रयाग न्यू रेलवे लाइन, देवबंद रुड़की न्यू रेल लाइन विष्णुगाड-तपोवन जल विद्युत परियोजना, विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना एवं टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट के प्रगति की समीक्षा की। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के संबंध में मुख्य सचिव ने रेलवे अधिकारियों एवं जिला प्रशासन को आपसी तालमेल के साथ सभी पेंडिंग मुद्दों को निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे को पेंडिंग कंपनसेशन डिस्बर्समेंट को मामलों को शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव द्वारा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट हेतु टीएचडीसी को माइनिंग प्लान शीघ्र उपलब्ध कराए जाने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी के साथ संयुक्त निरीक्षण किए जाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में स्थानीय प्रतिरोध के हल के लिए ज्वाइंट विजिट कर निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के संबंध में मुख्य सचिव ने एनटीपीसी को निर्देश दिए कि आपदा से परियोजना कार्यों में हुई क्षति का आंकलन शीघ्र कराया जाए।
इस अवसर पर सचिव अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार सहित सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी एवं सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

15 विषयों में प्री पीएचडी के लिए 70 सीटें निर्धारित

श्रीदेव सुमन विवि इसी सत्र से पहली बार प्री पीएचडी शुरू करने जा रहा है। कोरोना संक्रमण की स्थिति सामान्य होते ही अक्तूबर-नवंबर तक प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी। 15 विषयों में प्री पीएचडी के लिए 70 सीटें निर्धारित की गई हैं। प्री पीएचडी के छह माह का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विवि प्रशासन ने सभी 15 विषयों के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की कमेटियों का गठन कर लिया है। पहले बैच में सिर्फ विवि से संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों में ही प्री पीएचडी होगी।
प्री पीएचडी में दाखिले के लिए विवि प्रशासन ने पहले जुलाई में प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की तैयारी की थी, लेकिन कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए विवि ने सेंट्रल हिमालयन एनवायरमेंट एसोसिएशन से 2019 में एमओयू भी कर लिया है, लेकिन विवि से संबद्ध महाविद्यालयों से सीटों और विषयों की संख्या की रिपोर्ट मिलने में हुए विलंब के चलते विवि सीटों की संख्या का सही निर्धारण नहीं कर पाया था। 
विवि के प्रभारी कुलसचिव डा. एमएस रावत ने बताया कि प्री पीएचडी के लिए 15 विषयों में 70 सीटें निर्धारित कर ली गई हैं। प्री पीएचडी में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेस टेस्ट के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए सभी विषयों में कमेटियों का गठन कर लिया गया है। जल्द ही कमेटियों की बैठक आयोजित कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिसर्च डिग्री कमेटी की रिपोर्ट मिलते ही प्री पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तिथि घोषित की जाएगी। स्थानीय विषयों पर ही विवि का शोध कराने पर विशेष फोकस रहेगा। तभी विवि के शोध कार्यों का लाभ स्थानीय समुदाय को मिल सकता है।

इन विषयों में होगी प्री पीएचडी
हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, सैन्य विज्ञान, कामॅर्स, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, भू-गर्भविज्ञान, गणित।