मानवअधिकार आयोग में याचिका दर्ज

ऋषिकेश।
राजस्व ग्राम की मांग को लेकर धरने पर बैठे विस्थापितों को बांध प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिनेश डोभाल ने समर्थन दिया। उन्होंने बताया कि मांग को लेकर मानवाधिकार आयोग में याचिका दर्ज की गई है। उधर, मांग को लेकर धरना 44वें दिन भी जारी रहा।113
मंगलवार को धरना स्थल पर पहुंचे राज्यआंदोलनकारी व टिहरी बांध संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिनेश डोभाल ने बताया कि राजस्व ग्राम की मांग को लेकर उनके द्वारा मानवाधिकार में याचिका दर्ज की गई। जिसमें सुनवाई के दौरान बताया गया कि राजस्व ग्राम में टिहरी बांध विस्थापित क्षेत्र पशुलोक के शामिल न होने से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिस पर आयोग ने टीएचडीसी, राजस्व विभाग व सिंचाई विभाग से मानवाधिकार आयोग ने तत्काल स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि वह विस्थापितों की समस्या के निदान के लिए आंदोलनरत रहेंगे। मंगलवार को धरने पर बैठने वालों में लक्ष्मी प्रसाद भट्ट,दुर्गा प्रसाद भट्ट, विक्रम सिंह गुलियाल, राम किशन कोठियाल, गोविंद शामिल रहे।

फिर आंदोलन को तैयार जीएमवीएन कर्मी


समझौते पर कार्रवाई को 8 सितम्बर तक का दिया अल्टीमेटम
रविवार को मुनिकीरेती स्थित जीएमवीएन के गेस्ट हाउस में कर्मचारी संघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि पूर्व समझौते के आधार पर यदि प्रबंधन 8 सितम्बर तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नही करता है तो 9 सितम्बर से कर्मचारी आंदोलन करेंगे। कर्मचारियों ने निगम की स्थिति सुधारने के लिए आबकारी व खनन कार्य जीएमवीएन को देने की मांग उठाई।
एनजीटी के आदेश के तहत जीएमवीएन के गेस्ट हाउस सील करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कर्मचारी संघ ने कहा कि प्रबंधन को कानूनी रुप से गेस्ट हाउस खुलवाने के प्रयास करने चाहिये। बैठक में कर्मचारी संघ अध्यक्ष जयप्रकाश कोठारी, जयवीर सिंह रावत, रणवीर रावत, राजेन्द्र, अमित कुमार, राजेन्द्र फरस्वाण, उमा देवी, चन्दा देवी, उत्तम रणावत, दिलीप रावत, ब्रह्मपाल, श्यामा देवी, ओमप्रकाश, मोहन सिंह, महावीर सिंह रावत, धनपाल सिंह आदि मौजूद थे।

हंस कल्चरल ने बांटे जरूरतमंदों को 12 लाख रूपए


102हंस कल्चरल सेंटर ने जरूरतमंदों को मुनिकीरेती स्थित सेंटर में शिक्षा के लिए 12 लाख रूपए की धनराशि बांटी। मुख्य अथिति एआरटीओ डा. अनिता चमोला ने हंस कल्चरल सेंटर के कार्यो की सराहना की।
शनिवार को क्षेत्र के करीब 62 बच्चों को शिक्षा क्षेत्र में फीस के लिए 12 लाख रूपए के चौक बांटे गए। जिसमें हंस कल्चरल सेंटर ने 26 हजार आकृति सेमवाल, 30 हजार प्रणव जोशी, 22 हजार सिद्धार्थ पोखरियाल, 22 हजार साक्षी पाल, 21 हजार स्वेता कपूर, 28 हजार तुषार कुमार, 30 हजार सिमरन राना, 26 हजार वंशिका वर्मा, 22 हजार मोहित कुमार, 22 हजार ऋतिक प्रसाद, 23 हजार सचिन रावत, 33 हजार आशुतोष भारद्धाज, 20 हजार अर्पित नेगी आदि 62 बच्चों को कुल 12 लाख रूपए के चौक वितरित किए गए। इस अवसर पर मुख्य अथिति एआरटीओ डा. अनिता चमोला ने कहा कि मंगला माता व भोले महाराज के द्वारा किया जा रहा यह सामाजिक कार्य सराहनीय है। देश के कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें पढाई तो करनी होती है। लेकिन धन के अभाव में वह पढाई नहीं कर पाते हैं। ऐसे जरूरतमंदों की मदद कर हंस कल्चरल सेंटर समाज सेवा में निरंतर प्रयासरत्त है। उन्होंने बच्चों को पढाई में मेहनत करने को कहा। इस अवसर पर सेंटर प्रभारी प्रदीप राणा, नवीन चढ्ढा, सुशीला बिष्ट, मनीष कुमार, विरेंद्र राणा आदि उपस्थित रहे।

फिल्मी अंदाज में पहंुचा युवक, कहा मैंने जहर खाया है

देहरादून का व्यापारी जहर खाकर पहुंचा चौकी
अस्पताल पहुंचाने से पहले ही तोड़ा दम

देहरादून का व्यापारी जहर खाकर रामझूला चौकी में पहुंच गया। वह मैंने जहर खाया है… चिल्ला रहा था। पुलिसकर्मियों ने बाइक से तुरंत व्यापारी को राजकीय अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। व्यापारी ने यह कदम क्यों उठाया, पुलिस की इसकी जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे एक व्यक्ति बदहवाश हालत में रामझूला चौकी के गेट पर पहुंचा और कहने लगा कि उसने जहर खाया है। गेट पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने व्यक्ति को संभाला। बिना देर किए दो पुलिसकर्मियों ने बाइक में बैठाकर व्यक्ति को राजकीय अस्पताल ऋषिकेश पहुंचाया। लेकिन इमरजेंसी में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के अनुसार मृतक रजनीश (35) पुत्र चांद सचदेवा निवासी 219, मालियाना ज्वालापुर हरिद्वार का रहने वाला था। वह देहरादून के प्रेमनगर में पर्स की दुकान चलाता था। सूचना पर पहुंचे मृतक के बड़े भाई नवनीत ने बताया कि रजनीश हफ्ते में एक-दो बार घर आया करता था। घर में भी किसी तरह का कोई कलेश नहीं था।
लक्ष्मणझूला थाना प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि दो पुलिसकर्मियों ने व्यापारी को अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में उसने बाइक पर उल्टियां भी की। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। देहरादून से व्यापारी ऋषिकेश कब और कैसे पहुंचा, उसने ऐसा क्यों किया? इन सभी पहलुओं पर जांच चल रही है। पूछताछ में पता चला है कि रजनीश कुछ समय से नशे की लत में पड़ गया था। थाने के आसपास लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। जरूरत पड़ी तो सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएंगे। शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

व्यापारी के पास सल्फास और नुआन मिला
डॉक्टरों के अनुसार उपचार के दौरान मृतक के पास सल्फास, नुआन और धान में डालने वाले कीटनाशक इंजेक्शन मिले हैं। मृतक के मुंह से झाग और खून निकल रहा था, जो कि सल्फास के अधिक सेवन करने से होता है। मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हो सकेगा।

एनसीसी कैडिट्स के यात्रा भत्ता दोगुना और मैस एलाउंस केन्द्र के समान

एनसीसी मुख्यालय को मिला अपना भवन
देहरादून।
राष्ट्रीय कैडिट कोर (एनसीसी) नौजवानों में शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन भी लाती है। युवाओं को एक गुणी नौजवान के रूप में तैयार कर एनसीसी आगे लाती है। अनुशासित जीवन में एनसीसी सहायक है। गुरूवार को ननूरखेड़ा में एनसीसी ग्रुप मुख्यालय के नव निर्मित भवन का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन, पुलिस, वन व अन्य विभागों में एनसीसी का कैसे प्रयोग किया जा सकता है, इस पर विचार किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने माउन्ट एवरेस्ट फतह करने वाली एनसीसी की छात्राएं पूजा व नूतन को एक-एक लाख रूपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एनसीसी हैडक्वाटर ट्रेनिंग ग्राउण्ड को व्यवस्थित करने एवं नवनिर्मित डोरमेट्री को सुसज्जित करने हेतु राज्य सरकार मदद करेगी। उन्होंने एनसीसी कैडिट्स के यात्रा भत्ते को दोगुना करने एवं मैस एलाउंस केन्द्र के समान करने की बात कही। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि अगले वर्ष से एनसीसी कैडिट्स को राज्य सरकार द्वारा साल में एक बार यूनिफार्म उपलब्ध करायी जायेगी। साथ ही सीनियर व जूनियर डिविजन के अधिकारियों के भत्तों को अन्य राज्यो के भत्तों की व्यवस्था देखने के बाद इनमें सुधार किया जायेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रावत ने एनसीसी कैडिट्स के साथ अपने एनसीसी के अनुभवों को भी साझा किया।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी, विधायक मनोज तिवारी, ललित फर्स्वाण, मेजर जनरल मणी, ब्रिगेडियर आर.एस.दहिया, निदेशक शिक्षा डीएसकुंवर सहित एनसीसी के कैडेट व अन्य उपस्थित थे।

उत्तराखंड में चीन की घुसपैठ! चमोली की सीमा में घुसे चीनी सैनिक

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सीएम हरीश रावत ने केन्द्र सरकार से की वार्ता
देहरादून।
उत्तराखंड में चमोली से सटी चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों ने चमोली सीमा पर घुसपैठ की है, लेकिन अच्छी बात यह है कि वहां मौजूद महत्वपूर्ण नहर तक चीनी सेना नहीं पहुंच पाई है।
बीजापुर गेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान सीएम हरीश रावत ने चमोली से सटी चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर कहा कि मुझे यकीन है केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संज्ञान लेगी। चमोली सीमा पर हो रहे चीनी घुसपैठ का पता तब चला जब सीमा क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंची प्रशासन की टीम को चीनी सैनिकों ने जांच करने से रोकते हुए वापस खदेड़ दिया। हर बार की तरह इस बार भी जोशीमठ के उप जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन की 19 सदस्यीय टीम 19 जुलाई को चीन सीमा के निरीक्षण को गई थी। टीम सुमना क्षेत्र तक वाहन से पहुंची। यहां होतीगाड़ नदी का जलस्तर बढ़ने से टीम को वाहन यहीं छोड़ने पड़े। इसके बाद दूसरे छोर पर खड़े वाहनों से टीम सेना चौकी रिमखिम पहुंची। करीब आठ किमी दूर सीमा क्षेत्र में पहुंचने पर यहां पहले से चीन सैनिकों को मौजूद देख टीम के होश उड़ गए।
भारतीय दल को देखते ही चीनी सैनिकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और टीम सदस्यों को तुरंत लौट जाने का इशारा किया। चीनी सैनिकों के तेवर देख टीम ने निरीक्षण छोड़ तुरंत वापस लौटने में ही भलाई समझी। टीम के सदस्यों ने इसकी जानकारी सीमा क्षेत्र में मुस्तैद आईटीबीपी के अधिकारियों को भी दी। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार बाड़ाहोती क्षेत्र में पहुंचते ही टीम को दूर से ही चीनी सैनिक दिखाई दे गए थे। टीम आगे पहुंची तो चीनी सैनिकों ने उन्हें वापस चले जाने का इशारा किया। गौरतलब है कि चीन सीमा क्षेत्र में प्रशासन का निरीक्षण नियमित प्रक्रिया है। इसकी गोपनीय रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाती है। चमोली जनपद से सटी भारत-चीन सीमा में बाड़ाहोती क्षेत्र नो मेंस लैंड एरिया है।
हर वर्ष चमोली जिला प्रशासन की टीम सीमा क्षेत्र में चीनी गतिविधियों को देखने और भारत की मौजूदगी दर्ज करने के लिए यहां सामान्य निरीक्षण के लिए जाती है। पूर्व में टीम वर्ष में दो बार जाती थी, लेकिन वर्ष 2015 से टीम वर्ष में तीन बार सीमा क्षेत्र के निरीक्षण को जाती है। चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर सीएम हरीश रावत ने कहा कि मुझे यकीन है केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संज्ञान लेगी। उन्होंने कहा है कि घुसपैठ की जानकारी भारतीय एजेंसियों को है। आईटीबीपी इस पूरे क्षेत्र की निगरानी कर कर रही है। आईटीबीपी और सेना को इसकी जानकारी है। सीएम ने कहा है कि इस क्षेत्र में लगातार चीन की सक्रियता बनी हुई है, लेकिन अच्छी बात यह है कि वहां एक नाला है, वह चीनी सैनिकों ने अभी नहीं छुआ है।

हरेला पर्व उत्तराखंड की संस्कृति व पर्यावरण का प्रतीक

देहरादून।
हरेला पर्व संस्कृति एवं पर्यावरण का प्रतीक है। हरेला से घी संग्रांद तक वृक्षारोपण का अभियान चलाया जा रहा है। इस वर्ष जन सहभागिता से हरेला वृहद स्तर पर मनाया जा रहा है। बुधवार को महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज, रायपुर में वन विभाग द्वारा आयोजित हरेला पर्व के अन्तर्गत वृक्षारोपण एवं पौध वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ने शिरकत की।
इस अवसर पर हरेला के तहत मुख्यमंत्री रावत ने रूद्राक्ष का पौधा लगाया। उन्होंने स्कूली बच्चों को पौधे भी वितरित किए। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि पिछली बार हरेला पर्व राज्य सरकार की ओर से मनाया गया था। किन्तु इस बार जन संगठनों द्वारा हरेला को वृहद स्तर पर मनाया जा रहा है। इस बार राज्य सरकार की भूमिका इसमें एक सहयोगी की है। हरेला संस्कृति एवं पर्यावरण का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री रावत ने वन विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि वन विभाग द्वारा मांग के अनुरूप पौधे उपलब्ध कराए गए है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण हमारी आदत का हिस्सा होना चाहिए। हम सभी को वृक्षारोपण के प्रति दूसरो को भी जागरूक करना चाहिए। एक वृक्ष भी जीवन में परिवर्तन ला सकता है। अधिक से अधिक पौधे लगाए एवं पर्यावरण संरक्षण में सहायक बनें। मुख्यमंत्री रावत ने जिला प्रशासन, एम.डी.डी.ए. एवं वन विभाग को निर्देश दिए कि देहरादून के सभी शिवालयों में रूद्राक्ष का पौधा जरूर लगाएं। उन्होंने वन विकास निगम को निर्देश दिए कि जहां भी वन विकास निगम के डिपो है, वे डिपो के चारों ओर काष्ठ उद्योग में सहायक वृक्ष लगाए। इसके साथ ही रामगंगा घाटी में गैरसैंण से भिकियासैंण तक तून के पेड़ लगाए।
इस अवसर पर पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, सचिव, खेल शैलेश बगोली, प्रमुख वन संरक्षक राजेन्द्र कुमार महाजन, डी.बी.एस. खाती सहित स्कूली बच्चे व अन्य उपस्थित थे।

घनशाली-केदार राजमार्ग के बाजार में आया मलबा

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टिहरी।
बुधवार टिहरी घनशाली मुख्य बाजार बेरियर के पास भूस्खलन होने से राजमार्ग बंद हो गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मुख्य बाजार में मलबा आने से स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गयी। हालांकि जान माल के नुकसान की कोई खबर नही है।
घनशाली-केदारनाथ मोटर मार्ग पर बेरियर के पास अत्यधिक मात्रा में पहाडी से मलबा आने के कारण राजमार्ग बंद हो गया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार मालवाहक वाहन मलबे के नीचे दबे हो सकते है। जिला प्रशासन मौके पर पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों में भेज रहा है।

पालिका की लापरवाही से मंदिर में गिरा विद्युत पोल

ऋषिकेश।
नगर पालिका ऋषिकेश की लापरवाही से रेलवे रोड़ स्थित वाल्मिीकि प्रार्थना मंदिर में विद्युत पोल दोपहर दो बजे गिर गया। गनीमत रही कि मंदिर परिसर व सड़क पर खेल रहे मौहल्ले के बच्चे विद्युत पोल की चपनेट मे नही आये।
पालिका ऋषिकेश की ओर से प्रार्थना मंदिर के गेट पर सौदर्यकरण के नाम पर एक विद्युत पोल लगाया गया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में पोल स्तह से जर्जर व खोखला हो रखा था। जिसकी शिकायत स्थानीय लोगों ने पालिका प्रशासन को कई बार मौखिक व लिखित रुप में दी। लेकिन पालिका ने इस ओर समय रहते कोई कार्रवाई नही की। अब पालिका की लापरवाही से स्थानीय लोगों में आक्रोश पनप रहा है। स्थानीय निवासी एडवोकट राकेश पारछज्ञ ने बताया कि विद्युत पोल हटाने को लेकर पालिका के अधिकारियों को पूर्व में कई बार शिकायत दर्ज करावाई। मंदिर परिसर में भीड़ जुटने को लेकर दुर्घटना न हो इसकी जानकारी भी दी। लेकिन पालिका ने इस ओर कोई कार्रवाई करनी उचित नही समझी।

विस्थापितो की समस्या को दरकिनार कर रही सरकार

ऋषिकेश।
आज देश के विकास का प्रतीक बना टिहरी बांध में 16 वर्ष पहले गोदी, सिरांई, माली देवल, उपूं, छाम, गिरांणी, लम्पोखरी, डोबरा, डोबरा प्लास, असेना, बड़कोट, क्यारी, पिनार्स नाम की 12 ग्रामसभा हुआ करती थी जो कि आज बढ़कर 15 ग्राम सभाएं हो चुकी है, लेकिन विकास के प्रतीक टिहरी बांध में अपनी भूमि देने के बाद पुर्नवास विभाग नई टिहरी द्वारा ऋषिकेश के पशुलोक, आमबाग और श्यामपुर क्षेत्र की वन भूमि पर बसाए गए 3000 परिवारों को आज 16 साल बाद भी अपने भूमिधरी अधिकार नही मिल पाया है।
अपने घर, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को त्याग कर ऋषिकेश में बसे ग्रामीणों को भूमिधरी अधिकार न मिल पाने के कारण, इनके स्थाई निवास सहित अन्य कोई प्रमाण पत्र नही बन पाते है। इन्हे जमीन की जमानत पर बैक लोन भी नही मिल सकता है। कारण यह कि तब पुर्नवास विभाग ने इस विस्थापितों को वन विभाग की भूमि पर बसाया गया था जिसके कारण आज तक ग्रामीणों को भूमिधरी का अधिकार नही मिल पाया है।
ऋषिकेश के पशुलोक, आमबाग और श्यामपुर क्षेत्र में टिहरी विस्तापितों के 3000 से अधिक परिवार रहते है जो आज तक ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत और निगर निकाय के चुनावों से वंचित रहे है इन लोगों को केवल लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वोट देने का अधिकार है, चुनाव से पूर्व दो मुख्यमंत्री तक यहां आए और राजस्व ग्राम बनाने का वादा किया, लेकिन चुनावी जुमला होने के कारण वादे भूला दिये गये। ऐसे में अब ग्रामीणों ने आन्दोलन शुरू कर दिया है, सामुदायिक भवन में ग्रामीणों का धरना जारी है यही नही नेताओं के वादों से तंग हो चुके ग्रामीणों ने अब आने वाले विधानसभा चुनाव के बहिस्कार की चेतावनी तक दे डाली है, वही ऋषिकेश तहसील प्रशासन का कहना है कि राजस्व ग्राम का प्रस्ताव तहसील द्वारा बहुत पहले ही शासन को भेजा जा चुका है जिस पर शासन कुण्डली मार कर बैठा है।