अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश का 5वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने वितरित की डिग्री

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज एम्स ऋषिकेश के पांचवें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। सभा को संबोधित करते हुए, नड्डा ने कहा कि ‘दीक्षांत समारोह एक विशेष अवसर है जो छात्रों की उपलब्धियों को मान्यता देता है।’ उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक गरीब व्यक्ति को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।

नड्डा ने देश भर के एम्स संस्थानों की चिकित्सा शिक्षा और सेवाओं में उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘इस सदी की शुरुआत तक, भारत में केवल एक एम्स था, वहीं आज, देश में 22 एम्स संचालित हो रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश ने अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के कारण स्वास्थ्य संस्थानों के बीच एक अद्वितीय पहचान बनाई है।उन्होंने नागरिकों के लिए विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, ‘सरकार ऐसी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने पर केंद्रित है जो न केवल उपचारात्मक हो बल्कि निवारक, उपशामक और पुनर्वासिक भी हो।’

स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए, नड्डा ने कहा, ‘‘आज, देश भर में 1.75 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं जो स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित विभिन्न सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों में 101 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, और अब देश भर में कुल 780 मेडिकल कॉलेज हैं। एमबीबीएस सीटों में 130 प्रतिशत और पीजी सीटों में 138 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘इसी तरह, पैरामेडिक्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए, 157 नर्सिंग कॉलेज भी स्थापित किए जा रहे हैं, जो मेडिकल कॉलेजों के साथ सह-स्थित होंगे।’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स ऋषिकेश की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने हेलीकॉप्टर और ड्रोन सेवाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए 309 गंभीर मरीजों को बचाया। वहीं टेलीमेडिसिन (ई-संजीवनी) जैसी डिजिटल सेवाओं का उपयोग करके राज्य के दूरदराज और अल्पसेवित क्षेत्रों में सेवा प्रदान करने में देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक बना। नड्डा ने अपने संबोधन को समाप्त करते हुए छात्रों को करुणा, ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने काम को बिना किसी स्वार्थ के करने के लिए प्रोत्साहित किया। केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सरकार प्रत्येक एमबीबीएस छात्र पर 30-35 लाख रुपये खर्च करती है, उन्होंने नए डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे अपने पेशेवर करियर की शुरुआत में अधिक जिम्मेदारियां उठाएं। इस आयोजन के दौरान नड्डा ने संस्थान की चिकित्सा सेवाओं को बढ़ाने के लिए कई स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें आयुष विभाग में एकीकृत चिकित्सा, न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में पीईटी स्कैन मशीन, रेडियोलॉजी विभाग में पीएसीएस सुविधा और बाल चिकित्सा देखभाल में उन्नत बाल चिकित्सा केंद्र शामिल हैं।

समारोह के दौरान, नड्डा ने एमबीबीएस, डीएम, एमएससी नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग और बीएससी संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान कार्यक्रमों के 10 मेडिकल छात्रों को स्वर्ण पदक और डिग्री प्रदान की। दीक्षांत समारोह में कुल 434 छात्रों को डिग्री दी गई, जिनमें 98 एमबीबीएस छात्र, 95 बीएससी (ऑनर्स) नर्सिंग छात्र, 54 बीएससी संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान छात्र, 109 एमडी/एमएस/एमडीएस छात्र, 17 एमएससी नर्सिंग छात्र, 1 एमएससी मेडिकल संबद्ध छात्र, 12 मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ छात्र, 40 डीएम/एमसीएच छात्र और 8 पीएचडी छात्र शामिल थे।

’’पिछले 10 साल में देश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से हुआ है विस्तार- मुख्यमंत्री’’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का स्वागत करते हुए कहा कि देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में अनेक कार्य हुए हैं। पिछले 10 साल में देश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। देशभर में एम्स की स्थापना करना हो, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 को लागू करना हो, आयुष्मान भारत योजना हो या फिर मेडिकल कॉलेजों में सीटों में बढ़ोतरी करना हो, अनेक योजनाओं एवं नीतियों केे माध्यम से भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक नई उंचाई प्रदान की गई है। उत्तराखंड में स्वास्थ सेवाओं के विकास के लिए निरंतर सहयोग देने पर उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त किया।

’’हेली एंबुलेंस ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उड़ान देने का किया कार्य।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि एम्स ऋषिकेश में ट्रॉमा सेंटर में पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम और सेंटर फॉर एडवांस्ड पीडियाट्रिक्स का लोकार्पण होने से स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज एम्स ऋषिकेश में अत्याधुनिक मेडिकल जांच और उपचार की व्यवस्था के साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टर की टीम द्वारा विभिन्न प्रकार के रोगों का इलाज किया जा रहा है। इस संस्थान में अब रोबोटिक सर्जरी, घुटनों के प्रत्यारोपण की सुविधा, उन्नत न्यूरोसर्जरी और रेडिएशन थेरेपी जैसी सेवाएँ भी संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पर हेली एंबुलेंस की शुरुआत कर उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र को एक नई उड़ान देने का कार्य किया। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उधम सिंह नगर जनपद में एम्स ऋषिकेश के सेटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य भी तेज गति के साथ चल रहा है।

’’उत्तराखण्ड की 05 हजार से अधिक ग्राम सभाएं टी.बी मुक्त हो चुकी हैं।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। प्रत्येक जनपद में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्य रखा गया। टेलीमेडिसिन नेटवर्क और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से जनता को सस्ती दवाइयां और आवश्यक इलाज उपलब्ध कराने के प्रयास किये गये हैं। सरकारी अस्पतालों में 207 पैथोलॉजिकल जांच की सुविधा भी निःशुल्क दी जा रही है। अभी तक 29 लाख लोगों की निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच की जा चुकी हैं। राज्य में 14 लाख से अधिक लोगों का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत हो चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की 05 हजार से अधिक ग्राम सभाएं टी.बी मुक्त हो चुकी हैं। चारधाम यात्रा के दृष्टिगत नये अस्पतालों का संचालन भी किया जायेगा।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, लोकसभा सांसद अजय भट्ट, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण, सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, स्वास्थ मंत्री डॉ धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल, बृज भूषण गैरोला, अध्यक्ष एम्स ऋषिकेश प्रो. सिमरन नंदी, निदेशक प्रो. मीनू सिंह, प्रो. जया चतुर्वेदी, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के देवभूमि उत्तराखंड आगमन पर जॉलीग्रांट एयरपोर्ट में स्वागत किया।

टीबी उन्मूलन में उत्तराखंड को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दिया राष्ट्रीय पुरस्कार

राज्य सरकार के सतत प्रयासों से उत्तराखंड ने टीबी उन्मूलन में बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारत सरकार ने “टीबी मुक्त पंचायत पहल“ में समुदाय-आधारित प्रयासों के माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को पुरस्कृत किया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री, जगत प्रकाश नड्डा द्वारा प्रदान किया गया। जिसे एनएचएम की मिशन निदेशक, स्वाति एस. भदौरिया ग्रहण किया। इस उपलब्धि पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने खुशी जाहिर करते हुये अधिकारियों की जमकर सराहना की, साथ ही उन्होंने जनसहयोग के लिये प्रदेश की आम जनता का आभार जताया।

नई दिल्ली में भारत सरकार द्वारा आयोजित उच्च स्तरीय कार्यक्रम में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने उत्तराखंड में टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुये कहा कि उत्तराखंड ने टीबी उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन भविष्य में टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी।

मिशन निदेशक एनएचएम, स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम का सफल संचालन किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है।

मिशन निदेशक ने इस सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन, आशा कार्यकर्ताओं, पंचायती राज संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समुदाय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि “टीबी मुक्त पंचायत पहल“ के अंतर्गत जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता, त्वरित पहचान, बेहतर उपचार और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। राज्य में टी.बी. उन्मूलन हेतु प्रभावी ट्रैकिंग सिस्टम और मल्टी-सेक्टोरल एप्रोच को अपनाया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड में टीबी उन्मूलन को एक जन आंदोलन के रूप में अपनाया गया है, जहां ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया गया है ताकि वे अपने स्तर पर टीबी के मामलों की निगरानी और नियंत्रण कर सकें। “निक्षय मित्र योजना“ के माध्यम से निजी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया, जिससे मरीजों को पोषण और सामाजिक समर्थन मिला।
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यह पुरस्कार टीबी उन्मूलन की दिशा में किए गए अथक प्रयासों का प्रतिफल है। टीबी मुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। जब हम मिलकर इस चुनौती का सामना करेंगे, तभी स्वस्थ उत्तराखंड का सपना साकार हो सकेगा।
– ’डॉ. धन सिंह रावत,
स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड सरकार

चारधाम यात्रा को 154 एम्बुलेंस तैनात, हेलीकॉप्टर और बोट एम्बुलेंस सेवाएं उपलब्ध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार चारधाम यात्रा 2025 के दौरान तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में विभाग ने यात्रा को और अधिक सुगम, सुरक्षित और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस बार यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य के मद्देनजर व्यापक तैयारियां की हैं। इस बार चारधाम और यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है।

केदारनाथ और बद्रीनाथ में नए अस्पतालों की शुरुआत
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि इस बार केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दो नए अस्पताल खोले जा रहे हैं। केदारनाथ में 17 बेड और बद्रीनाथ में 45 बेड के अस्पताल स्थापित किए जाएंगे, जो तीर्थयात्रियों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे। इसके अलावा, यात्रा मार्ग पर 25 विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके।

नई स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
इस साल यात्रा मार्ग में 20 मेडिकल रिलीफ पोस्ट (एमआरपी) और 31 स्वास्थ्य जांच केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो तीर्थयात्रियों की उच्च ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं की जांच करेंगे। देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी और टिहरी जैसे ट्रांजिट जिलों में 37 स्थायी स्वास्थ्य केंद्रों को सुदृढ़ किया गया है और नई स्क्रीनिंग इकाइयों की स्थापना की योजना बनाई गई है।

154 एम्बुलेंस तैनात, हेलीकॉप्टर और बोट एम्बुलेंस सेवाएं उपलब्ध
स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा मार्ग पर 154 एम्बुलेंस तैनात करने का निर्णय लिया है, जिनमें 17 एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस शामिल हैं। इसके अलावा, एम्स ऋषिकेश द्वारा संचालित हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस और टिहरी झील में बोट एम्बुलेंस भी उपलब्ध रहेंगी, ताकि आपातकालीन स्थिति में श्रद्धालुओं को त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके।

सुरक्षा को लेकर नई रणनीतियाँ
पिछले साल 34,000 से अधिक मेडिकल आपातकालीन मामले सामने आए थे, जिसमें 1,011 मरीजों को एम्बुलेंस द्वारा और 90 मरीजों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया था। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि इस साल स्वास्थ्य मित्रों (फर्स्ट मेडिकल रिस्पॉन्डर) की संख्या बढ़ाई जा रही है, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके।

ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल के माध्यम से स्वास्थ्य निगरानी
स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीकी रूप से उन्नत किया जा रहा है। इस वर्ष ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल को अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें एक ैव्ै बटन जोड़ा जाएगा, ताकि तीर्थयात्री आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, प्वाइंट ऑफ केयर टेस्टिंग डिवाइस के माध्यम से तीर्थयात्रियों की 28 महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मापदंडों की तुरंत जांच की जाएगी।

धामी सरकार की प्रतिबद्धता
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष लाखों श्रद्धालुओं ने चारधाम यात्रा की थी। उच्च ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण महज कुछ श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबधी दिक्कते हुईं। इस बार स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार किया गया है। इसके लिए केंद्र सरकार से धनराशि स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहन के रूप में मंजूर की गई है और गुप्तकाशी में 50 बेड के अस्पताल के लिए बजट स्वीकृत किया गया है।

आगे की योजना और यात्रियों की सुरक्षा
इस बार तीर्थयात्रियों के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य घोषणा को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि यात्रा से पहले ही हाई-रिस्क तीर्थयात्रियों की पहचान की जा सके। इसके अलावा, आपातकालीन कॉल सेंटर को और मजबूत किया जाएगा और यात्रा मार्ग पर होटल, धर्मशाला, खच्चर चालकों और अन्य स्थानीय सेवाओं से जुड़े लोगों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नेतृत्व में राज्य सरकार का यह प्रयास है कि चारधाम यात्रा 2025 को श्रद्धालुओं के लिए न केवल आध्यात्मिक बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी सुरक्षित और सुकूनदायक बनाया जाए।

फिट उत्तराखंड अभियान से स्वास्थ्य, स्वच्छता और फिटनेस को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में फिट उत्तराखंड अभियान व्यापक स्तर पर चलाया जाए। उन्होंने अपर मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन को निर्देशित किया कि सभी विभागों के साथ समन्वय कर इस अभियान के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा अभियान

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिट उत्तराखंड अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को स्वास्थ्य, स्वच्छता और फिटनेस के प्रति जागरूक करना है, जिससे वे स्वस्थ जीवनशैली अपना सकें। इस अभियान में शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को भी शामिल किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें।

योग, व्यायाम और खेल गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि फिट उत्तराखंड अभियान के तहत योग, व्यायाम और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही, स्कूल और कॉलेजों में खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए ताकि युवा पीढ़ी शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय और स्वस्थ रह सके।

प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान को आगे बढ़ाएगा अभियान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोटापा कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए और खाने में तेल का उपयोग कम करने की आदत डालनी चाहिए। फिट उत्तराखंड अभियान के माध्यम से इस संदेश को प्रदेशभर में प्रसारित किया जाएगा।

जन-जन तक पहुंचेगा फिट उत्तराखंड का संदेश

सरकार का लक्ष्य है कि फिट उत्तराखंड अभियान का संदेश प्रदेश के हर नागरिक तक पहुंचे। इस अभियान के तहत विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे आमजन अपनी दिनचर्या में फिटनेस को शामिल करने के लिए प्रेरित हों।

राज्य के 13 जिलों के 19 डायलिसिस सेन्टर्स में 153 डायलिसिस मशीनें उपलब्ध

बीपीएल निर्धन मरीजों और गोल्डन कार्ड धारकों के लिए प्रदेशभर के 13 जिलों में स्थापित 19 सुचारू डायलिसिस सेन्टर्स के माध्यम निःशुल्क संचालित की जा रही हेमोडायलिसिस सेवाओं की जानकारी जरूरतमंदों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की जिम्मेदारी चिकित्सा विभाग पर तय करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस मामले में राज्य के सभी जिलों में सौ फीसदी कवरेज को समयबद्धता से पूरा करने की कड़ी हिदायत दी है।

रतूड़ी ने अधिकारियों को राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आंवटित सरकारी संसाधनों में तेजी लाने तथा उनका कुशलतापूर्वक उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने कहा कि राज्य के 13 जिलों में स्थापित 19 सुचारू डायलिसिस सेन्टर्स में 153 डायलिसिस मशीनों की सहायता गरीबी रेखा से नीचे के मरीजों तथा गोल्डन कार्ड धारकों को निःशुल्क डायलिसिस सेवाएं प्रदान की जा रही हैं तथा गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) के मरीजों को निम्नतम शुल्क पर यह सेवाएं दी जा रही हैं। इसमें पीपीपी में सीएसआर के तहत 82 डायलिसिस मशीनें तथा हंस फाउंडेशन के द्वारा सीएसआर के तहत 49 मशीने संचालित की जा रही हैं। पीपीपी मोड के तहत आने वाले अस्पतालों में आयुष्मान के साथ सूचीबद्ध हैं तथा उसके माध्यम से उनका भुगतान किया जाता है। जिन बीपीएल तथा एचआईवी मरीजों का आयुष्मान कार्ड नहीं है, उनका भुगतान डीजीएमएच तथा एफडब्ल्यू के द्वारा किया जाता है। वर्ष 2024-25 में दिसम्बर तक लाभार्थियों को 117490 डायलिसिस सेशन दिए जा चुके हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य में प्रधान मंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम के तहत सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे आने वाले मरीजों तथा गोल्डन कार्ड धारकों के लिए निःशुल्क संचालित की जा रही डायलिसिस सेवाओं की समीक्षा की।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सम्बन्धित विभाग को पीएमएनडीपी पोर्टल का व्यापक उपयोग करने के निर्देश दिए, यह पोर्टल पीएमएनडीपी के तहत निःशुल्क डायलिसिस सेवाओं का लाभ उठाने वाले सभी मरीजों का विवरण प्राप्त करने के लिए एपीआई-आधारित आईटी प्लेटफॉर्म है। सीएस ने डुप्लीकेसी रोकने तथा पारदर्शिता, दक्षता और अंतर संचालन सुनिश्चित करने के लिए 14 अंकों के विशिष्ट ।ठभ्। आईडी का उपयोग करके रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने एपीआई सांझा करने तथा समग्र कवरेज के लिए अलग-अलग पोर्टल का उपयोग करने पर इसे पीएमएनडीपी पोर्टल के साथ एकीकृत करने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत डायलिसिस सेवाओं को उनके प्रदाताओं के बीच बेहतर कार्य प्रणाली के साथ स्थापित करना तथा किडनी से संबंधित रोगों से ग्रस्त रोगियों को उच्च गुणवत्ता और कम लागत में डायलिसिस सेवाएं प्रदान करना है। हेमोडायलिसिस की प्रक्रिया एक बार सम्पन्न होने में अत्यधिक लागत आती है। इस प्रकार किडनी के रोगियों का वार्षिक खर्च बहुत ज्यादा हो जाता है। राज्य के पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों की हेमोडायलिसिस केंद्रों से दूरी भी इस समस्या का प्रमुख कारण है। इस कार्यक्रम से गरीब परिवारों के रोगियों को कम लागत में डायलिसिस की सुविधा अपने जनपदों में ही प्राप्त हो सकेगी।

बैठक में सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहित स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी मौजूद रहे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ली 100 दिवसीय टी.बी उन्मूलन अभियान के सम्बन्ध में बैठक

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अन्तर्गत 100 दिवसीय टी.बी उन्मूलन अभियान के सम्बन्ध में बैठक की। उक्त बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून से वर्चुअल रूप में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए वृहद 100 दिवसीय टी.बी उन्मूलन अभियान हेतु उनके मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने बैठक में अवगत करवाया कि राज्य के 13 में से 8 जनपद 100 दिवसीय टी.बी उन्मूलन अभियान हेतु चिन्हित हैं। जिनमें राज्य सरकार लगातार Detection, Treatment तथा Prevention पर कार्य कर रही है। राज्य के सभी जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, अधिकारी एवं आमजन भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर भागीदारी निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में सभी के सहयोग से अब तक 23800 टीबी मरीजों को निक्षय मित्रो द्वारा गोद लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने हैन्डहेल्ड मोबाइल एक्स-रे मशीनों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली है। राज्य के पास कुल 33 हैन्डहेल्ड मोबाइल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं। राज्य के पास 131 नॉट मशीने भी हैं, तथा सभी ब्लॉक में कम से कम 01 मशीन उपलब्ध है। राज्य में स्क्रीनिंग और टेस्टिंग बढ़ाने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। इस अभियान के दौरान 8 जनपदों में कुल 25 निःक्षय वाहन तैनात किए गए हैं। निःक्षय वाहन का उपयोग समुदाय को जागरूक करने और शिविर स्थल पर एक्स-रे के लिए किया जा रहा है। इस अभियान के तहत टी.बी. के प्रति संवेदनशील आबादी की जांच के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कार्यस्थल, जेल, वृद्धाश्रम और अन्य चिकित्सा इकाईयों जैसे सामूहिक स्थानों पर शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा से टीबी उपचार संबंधित औषधियों को उपलब्ध करने का आग्रह किया, जिस पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया।

गौरतलब है कि 100 दिवसीय टी.बी. उन्मूलन अभियान के अन्तर्गत भारत के 347 उच्च फोकस जिलों को चयनित किया गया है। इस अभियान के लिए उत्तराखण्ड राज्य के आठ जनपदों (बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, नैनीताल, पौड़ी पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग) को चयनित किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य टी०बी० के प्रति संवेदनशील आबादी (मधुमेह रोगी, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब पीने वाले, पिछले टीबी के मामले, संपर्क, एचआईवी से पीड़ित लोग आदि) की स्क्रीनिंग किया जाना, तत्पश्चात टी०बी० से ग्रसित रोगियों को समयार्न्तगत उपचार उपलब्ध कराना है।

इन शिविरों में संवेदनशील आबादी (Vulnerable Population) की स्क्रीनिंग की जा रही है। जिसके अन्तर्गत पोर्टेबल हँडहेल्ड एक्स-रे मशीन द्वारा शिविर स्थल पर ही उन लोगों का एक्स-रे किया जा रहा है। यदि शिविर स्थल पर एक्स-रे सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो चिन्हित व्यक्तियों का एक्स-रे नजदीकी चिकित्सा इकाई पर किया जा रहा है। एक्स-रे के पश्चात, यदि व्यक्ति को टी०बी० होने का संदेह है, तो उसे न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (नॉट) के लिए संदर्भित किया जा रहा है।

राज्य के पांच मैदानी जनपदों में टीबी जांच को चलेगी मोबाइल टेस्टिंग वैन

राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत प्रदेश में टीबी रोगियों को खोजने प्रयास और तेज कर दिये हैं। इसके लिये शीघ्र ही पांच मैदानी जनपदों में मोबाईल टेस्टिंग वैन चलाई जाएगी, जो डोर टू डोर जाकर मरीजों के बलगम की जांच करेगी। रिपोर्ट में पाजीटिव आने वाले टीबी मरीजों को ट्रीटमेंट से जोड़ा जाएगा।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ रावत ने बताया कि राज्य में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी रोगियों की जांच व उपचार युद्ध स्तर चल रहा है। यही वजह है कि टीबी उन्मूलन की दिशा में उत्तराखंड देश के शीर्ष राज्यों में सुमार है। डॉ रावत ने बताया कि राज्य में टीबी मरीजों की जांच व उपचार अधिक से अधिक हो इसके लिये शीघ्र ही पीपीपी मोड़ में मोबाइल ट्यूबरक्लोसिस टेस्टिंग वैन चलाई जायेगी। इस योजना के तहत राज्य के पांच मैदानी राज्यों को कवर किया जायेगा जिसमें हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, चम्पावत, नैनीताल व देहरादून जनपद शामिल हैं। मोबाइल टेस्टिंग वैन्स इन जनपदों के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मरीजों की टीबी जांच करेगी। रिपोर्ट में पाजीटिव आने वाले मरीजों को ट्रीटमेंट से जोड़ा जाएगा। जिससे इस बीमारी पर कंट्रोल किया जा सके। डॉ रावत ने बताया कि मोबाइल वैन में टीबी जांच के लिए सीबी नेट मशीन के साथ बलगम जांच की सुविधा भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इन जनपदों में अधिक से अधिक मरीजों तक पहुंच के लिये बकायदा रूट प्लान तैयार किया जाएगा साथ ही सम्बन्धित जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा इस योजना की समय-समय पर मॉनिटरिंग की जाएगी।

टीबी उन्मूलन में देश मे अव्वल उत्तराखंड
स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड टीबी उन्नमूलन के क्षेत्र में देश के शीर्ष राज्यों में से एक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत राज्य में 10,705 निरूक्षय मित्र बनाया गये हैं, जिनके द्वारा 23,819 टीबी मरीजों की सहायता की। जिनमें से 14,948 टीबी मरीज निरूक्षय मित्र की सहायता ले चुके हैं जबकि 8,871 टीबी मरीजों को निरूक्षय मित्रों द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है।

टीबी मुक्त पंचायत में अग्रणी उत्तराखंड
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उत्तराखंड तेजी से टीबी उन्मूलन की ओर अग्रसर है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के नेतृत्व में अबतक प्रदेश के 1424 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत लगभग 3200 गॉंवों को भारत सरकार द्वारा टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। जो कि टीबी मुक्त उत्तराखंड की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति है।

डाक्टरों की टीम ने गैरसैंण ब्लॉक के सारकोट जाकर शहीद की माताजी का किया स्वास्थ्य परीक्षण, किया उपचार

मंगलवार को गैरसैंण ब्लॉक के सारकोट के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि शहीद बसुदेव सिंह की माताजी माहेश्वरी देवी का स्वास्थ्य खराब है। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लेते हुए डॉक्टरों की एक टीम सारकोट भेजी। जहां डॉ राजेश गैडी व डॉ ज्योति ने शहीद की माताजी का स्वास्थ्य परीक्षण किया और आवश्यक दवाइयां दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को इस संबंध में नियमित फॉलोअप करने को कहा।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने कहा है कि जरूरत हुई तो जिला चिकित्सालय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम सारकोट भेजी जाएगी।

पर्वतीय व दुर्गम क्षेत्रों में निर्धारित सेवा पूरी करने वाले चिकित्सकों को मिलेगा लाभ, लंबे समय की जा रही थी एसडीएसीपी की मांग

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने दन्त चिकित्साधिकारियों को एस०डी०ए०सी०पी० की बड़ी सौगात दी है। इसका लाभ प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के उन चिकित्साधिकारियों को मिलेगा जिन्होंने पर्वतीय व दुर्गम क्षेत्रों में अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर ली है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी कार्मिकों के हितों को लेकर लगातार गंभीर रहते हैं। जिसका परिणाम है कि चिकित्सकों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो गई है। उन्होंने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए एस०डी०ए०सी०पी० से लाभान्वित होने वाले दंत चिकित्सकों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा लंबे समय से दंत चिकित्सकों की एस०डी०ए०सी०पी० देने की मांग थी। स्वास्थ्य सचिव ने कहा स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की गयी संस्तुति के आधार पर शासन स्तर पर प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्साधिकारियों को एस०डी०ए०सी०पी० का लाभ दिये जाने के आदेश जारी कर दिये गये हैं।

71 दन्त चिकित्साधिकारियों को मिलेगा लाभ

स्वास्थ्य सचिव ने कहा 04 वर्ष की संतोषजनक सेवा व 02 वर्ष की पर्वतीय/दुर्गम सेवा पूर्ण करने वाले प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के 63 दंत चिकित्सकों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही 09 वर्ष की संतोषजनक सेवा व 05 वर्ष की पर्वतीय/दुर्गम सेवा पूर्ण करने वाले प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के 05 चिकित्सकों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही वहीं 20 वर्ष की संतोषजनक सेवा व 09 वर्ष की पर्वतीय/दुर्गम सेवा पूर्ण करने वाले प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के 03 चिकित्सकों को इसका लाभ मिलेगा।

चिकित्सकों की हर न्यायोचित मांग का होगा समाधान-डॉ आर राजेश कुमार

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा चिकित्सकों की मांगों को लेकर सरकार हमेशा गंभीर रही है। उन्होंने कहा हर न्यायोचित मांग का समाधान करने के लिए शासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा चिकित्सकों की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर और सभी पहलुओं पर गंभीरता पूर्वक विचार कर पूरा किया जा रहा है। उन्होंने सभी चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा कि वह पूरे मनोयोग व निष्ठा के साथ कार्य करते रहें, उनकी मांगों के समाधान और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है।

सितारगंज सीएचसी व मोरी पीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित अन्य पदों को मिली स्वीकृति

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में ऊधमसिंह नगर जनपद के सितारगंज में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उप जिला चिकित्सालय और उत्तरकाशी जिले के मोरी में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकृत कर दिया गया है। अब दोनों अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के साथ डॉक्टरों की तैनाती होने से क्षेत्रवासियों को बेहतर इलाज के लिए महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। क्षेत्रीय जनता ने इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत का धन्यवाद प्रकट किया है।

प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार के अनुसार सितारगंज के 30 शैय्यायुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 90 शैय्यायुक्त उप जिला चिकित्सालय में उच्चीकृत किया गया है। अस्पताल के संचालन के लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत कुल 65 पदों की स्वीकृति दी गई है। इनमें 40 पद (20 नियमित एवं 20 आउटसोर्स) नए सृजित किए गए हैं। नवसृजित पदों में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के अलावा एक आर्थाेपेडिक सर्जन, एक नेत्र शल्यक, एक रेडियोलॉजिस्ट, एक पैथोलॉजिस्ट, चार वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी, 10 नर्सिंग अधिकारी, एक लैब टेक्नीशियन शामिल है। यह सभी पद नियमित अस्थायी होंगे। इसके अलावा 20 पद आउटसोर्स से होंगे।

इसी प्रकार मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में मोरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया है। अस्पताल के संचालन के लिए 37 पदों (25 अस्थायी व 12 आउटसोर्स) की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृत पदों में चिकित्सा अधीक्षक, पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट, जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, दंत शल्यक, नर्सिंग अधिकारी, लैब टेक्नीशियन आदि मुख्य रूप से शामिल हैं।

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जन-स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए चिकित्सा संस्थानों के उच्चीकरण के साथ ही उन्हें अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। पर्वतीय जिलों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ ही वहां डॉक्टरों की तैनाती, जीवन रक्षक उपकरणों और दवाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया है। डॉक्टरों को अस्पतालों में अपनी ड्यूटी पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

– पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखंड