एम्स ऋषिकेश में ब्रेन हैमरेज का एन्यूरिज्म क्वाइलिंग द्वारा हुआ सफल इलाज

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में चिकित्सकों ने एक पेशेंट की ब्रेन हैमरेज के सफल इलाज को अंजाम दिया है। पेशेंट को बीते दिनों हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश पहुंचाया गया था। गौरतलब है कि पौड़ी गढ़वाल निवासी एक चिकित्सक जो कि बीती दो अक्टूबर को अस्पताल में अचानक चक्कर खाकर गिर गए थे, जिन्हें राज्य सरकार की ओर से एयरलिफ्ट कर उसी शाम को एम्स हेलिपैड पर उतारा गया था। सीटी स्कैन में उनको ब्रेन हैमरेज पाया गया था। और एंजियोग्राफी में नस फटने के कारण एन्युरिज्म पाया गया। चिकित्सकों के अनुसार उनके दिमाग की एक नस फट गई थी। जिसे इंडोवैस्कुलर क्वाईलिंग या एन्यूरिज्म क्वाइलिंग द्वारा ठीक किया गया।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने इस सफलता के लिए चिकित्सकों के प्रयास को सराहनीय बताया। उन्होंने बताया कि संस्थान में मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि राज्य में एयर एंबुलेंस सेवा व एम्स परिसर में हेलीपैड की सुविधा उपलब्ध होने से मरीज को तत्काल एम्स पहुंचाया जा सका, जिससे तत्काल उनका उपचार शुरू हो सका।

पारंपरिक तरीके में क्षतिग्रस्त नस को दिमाग की सर्जरी द्वारा क्लिप किया जाता है। इस नवीनतम इंडोवस्क्युलर तकनीक में सिर को बिना खोले ईलाज सम्भव है। इंटरवेंशनल न्यूरो रेडियोलाजिस्ट डॉ. संदीप बुडाठोकी ने बताया कि इस प्रक्रिया को जांघ के पास 2.5 एमएम का सुराग करके वहां से नसों के जरिए कैथेटर को ब्रेन हेमरेज वाली जगह पर पहुंचाया गया व वहां पर दिमाग के हैमरेज वाले हिस्से को क्वायल किया गया। उन्होंने बताया कि मरीज अब पूरी तरह से खतरे से बाहर है। उन्होंने बताया कि मरीज के जीवन को बचाने में दो चीजों की भूमिका अहम रहीं। जिनमें हेमरेज के तत्काल बाद उन्हें एयरलिफ्ट करके एम्स ऋषिकेश पहुंचाने व इंडोवैस्कुलर क्वाइलिंग विधि से उपचार करना रहा। उन्होंने बताया कि इस विधि से उपचार करने से मरीज जल्दी रिकवरी कर सकेगा।

कोविड पर जागरूकता के लिए प्रमुख हस्तियों की बनाए वीडियो व आडियो क्लिप

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जो लोग कोरोना संक्रमित हुए थे, इन कोविड विनर के अनुभवों पर आधारित छोटी-छोटी स्टोरी बनाई जाय। कोविड पर जागरूकता के लिए प्रदेश की प्रमुख हस्तियों के वीडियो एवं ऑडियो क्लिप बनाई जाय। कोविड से बचाव के लिए प्रत्येक जनपद में अलग-अलग थीम पर जागरूकता अभियान चलाया जाए। प्रदेश में पर्यटन की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं, आर्थिक गतिविधियां भी चलती रहे और लोगों में संक्रमण का खतरा भी न हो। इसके लिए मास्क के उपयोग, सामाजिक दूरी एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाईडलाईन के अनुसार जागरूकता के लिए होटलों, सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर, बैनर, स्टिकर एवं ऑडियो-वीडियो मैसेज के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाय।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कोविड से बचाव के लिए जागरूकता अभियान में सूचना एवं लोक संम्पर्क विभाग द्वारा सभी विभागों से समन्वय बनाकर प्रचार-प्रसार किया जाए। खेल, पंचायतीराज, स्वास्थ्य, संस्कृति, पुलिस एवं जन सम्पर्क वाले अन्य विभागों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। खेल विभाग द्वारा कोरोना विनर्स के नेतृत्व में जागरूकता के लिए वाॅक कार्यक्रम, कोरोना से जागरूकता हेतु सांस्कृतिक दलों के माध्यम से लघु नाट्य, गीत एवं आनलाईन माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाये। कोरोना से जागरूकता में अच्छा कार्य करने वाले जनपदों, विकासखंण्डो एवं ग्राम पंचायतों को भी पुरस्कृत किया जाय।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कोराना से बचाव हेतु सामान्य दिशा-निर्देश, पर्यटकों के लिए सूचना, होम आईसोलेशन पर लघु फिल्में बनाकर उन्हें प्रसारित किया जाय। परिवहन निगम की बसों में पोस्टर एवं जागरूकता हेतु रिकार्डेड मैसेज की व्यवस्था की जाय। सभी विभाग अपने सोशल मीडिया एकाउंट फेसबुक पेज को नियमित शेयर करें और सूचना विभाग द्वारा बनाये गये क्रियेटिव को भी अपने एकाउंट पर भी पोस्ट करें। विभिन्न सरकारी भवनों पर वाल राइटिंग, भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर कोरोना से बचाव हेतु जागरूकता के लिए एनाउंसमेंट की व्यवस्था की जाय।

सेवा से नदारद चल रहे 81 चिकित्सकों को हटाने के सीएम ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अहम कदम उठाते हुए 81 डाॅक्टर्स की सेवा समाप्ति के निर्देश दिए है। यह 81 डाॅक्टर्स राज्य में लंबे समय से अपनी सेवा से नदारद थे। इनके सेवा समाप्ति से जुड़े प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के निर्देश पर इन गायब डॉक्टरों की सेवा समाप्त करने का प्रस्ताव सहमति को लोक सेवा आयोग भेजा गया है।

प्रसव पीड़ा होने पर रोडवेज बस में बुजुर्ग महिला ने कराई डिलीवरी, रोडवेज कर्मियों ने किया नामकरण

उत्तर प्रदेश की महोबा डिपो की रोडवेज बस में एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया। तो रोडवेज कर्मियों ने उसका नाम महोबा डिपो ही रख दिया।

दरअसल, एक खानाबदोश महिला को जब असहनीय प्रसव पीड़ा हुई तो परिवार के लोगों ने एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन घुमाया। एंबुलेंस उपलब्ध न होने पर परिवार के सदस्यों ने जिला अस्पताल जाने के लिए रोडवेज की बस को चुना। महिला को रोडवेज की बस दर्द उठना शुरू हो गया। इसी दौरान बस में मौजूद एक बुजुर्ग महिला का दिल पसीजा और बस में पर्दा डालकर उसने गर्भवती महिला का प्रसव करा दिया। बस में नवजात की किलकारियां गूंजी और सभी लोग खुश नजर आ रहे थे। रोडवेज कर्मियों ने भी अपने अधिकारियों को घटना की जानकारी दी और बस को सीधे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां जज्बा और बच्चा को भर्ती कराया गया। चिकित्सक ने दोनों को खतरे से बाहर बताया है। वहीं, परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई और नवजात शिशु का नाम महोबा डिपो रख दिया।

मनीष सिसोदिया को दी गई प्लाज्मा थेरेपी, दिल्ली मैक्स अस्पताल में हैं भर्ती

दिल्ली के सरकारी अस्पताल लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को अब मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऐसा उनकी तबियत में सुधार न होने के कारण किया गया। था। मनीष सिसोदिया को अब डेंगू भी हो गया है। अब उन्हें चिकित्सकों ने प्लाज्मा थेरेपी दी है।

मनीष सिसोदिया को बुधवार को शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटने और बुखार की शिकायत होने पर एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। फिर गुरुवार की जांच में पता चला कि सिसोदिया को डेंगू भी हो गया है। सिसोदिया के ऑफिस की तरफ से जारी बयान में बताया गया है कि उनका प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहा है। सिसोदिया को मैक्स अस्पताल में भर्ती किया गया था। अब उन्हें प्लाज्मा थेरेपी के जरिए गिरते स्वास्थ्य को सुधारने की कोशिश की जा रही है।

बता दें कि सिसोदिया कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले केजरीवाल सरकार के दूसरे कैबिनेट मंत्री है। उनसे पहले स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन जून में कोविड-19 से संक्रमित हुए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

सीएम ओएसडी गोपाल रावत का निधन, कोरोना का चल रहा था इलाज

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विशेष कार्याधिकारी गोपाल रावत के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि गोपाल रावत का निधन, मेरे लिए बड़ी व्यक्तिगत क्षति है। वे एक कुशल और योग्य अधिकारी थे। परमपिता परमेश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों को धैर्य प्रदान करें। गोपाल रावत के परिजनों के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
बता दें कि तबियत खराब होने पर ओएसडी गोपाल रावत एम्स ऋषिकेश में इलाज कराने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अपने ओएसडी के निधन पर दुख जताया है।

मेयर अनिता की अगुवाई में चला महा सैनिटाइजेशन अभियान

ऋषिकेश नगर निगम की प्रथम मेयर अनिता ममगाईं की अगुवाई में महासैनिटाइजेशन अभियान चलाया गया। नगर के बाजारों, नगरीय क्षेत्रों में चले इस अभियान की हर किसी ने प्रशंसा की। इस मौके पर मेयर अनिता ममगाईं ने नगर की जनता से इस महामारी से सतर्क रहने की अपील की।

मेयर अनिता ने अभियान में उतरी टीम को हरी झंडी दिखाई। नगर निगम ने कोरोना पॉजिटिव रोगियों के क्षेत्रों को संक्रमण से मुक्त करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। फायर ब्रिगेड वाहन सहित ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रे मशीनों, जेटिंग मशीन और हैण्ड स्प्रे मशीनों की मदद से दिनभर नगर में सेनेटाइजेशन अभियान चला। शहर के तमाम बाजारों एवं महत्व क्षेत्रों में सैनिटाइजेशन कराया गया।

मेयर अनिता ममगाई ने बताया कि कि तीर्थ नगरी ऋषिकेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए निगम प्रशासन की ओर से सैनिटाइजेशन अभियान मैं पूरी ताकत झोंक दी गई है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में कोरोना के पॉजिटिव रोगी सामने आ रहे हैं, उन क्षेत्रों में नियमित रूप से सोडियम हाइपोक्लोराइड का छिड़काव किया जा रहा है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि वैश्विक महामारी कोरोनावायरस की चपेट में आकर कई लोगों को अकाल मौत का ग्रास बनना पड़ा है। पिछले एक पखवाड़े में ही कई अपनों को हमने खोया है। इस समय सर्तकता बेहद आवश्यक है। कोरोना के बड़ते कहर को देखते हुए सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखें एवं बिना मास्क लगाये घरों से बाहर बिल्कुल न निकले। अभियान के दौरान पार्षद अजीत गोल्डी,घाट रोड़ व्यापार सभा के अध्यक्ष पवन शर्मा, क्षेत्र रोड अध्यक्ष राजेश भट्ट, सफाई निरीक्षक, धीरेंद्र सेमवाल, अभिषेक मल्होत्रा, सचिन रावत, प्रशांत कुकरेती, नरेश खैरवाल,महेंद्र, सुरेंद्र आदि शामिल थे।

कोरोना टेस्ट के नाम पर चल रहा खेल, जांच रिपोर्ट में हर किसी को बता रहे पाॅजीटिव

उत्तराखंड में कोरोना जांच के नाम पर निजी लैब चांदी काट रहे है। राजधानी में एक निजी लैब के सैंपल को सस्पेंड करते हुए शासन ने जांच बैठा दी है। निजी लैब संचालक 50 फीसदी जांच में पाॅजीटिव रिपोर्ट थमा रहे है।

देहरादून के जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनुज डिमरी ने पैथकाइंड लैब की सैंपलिंग पर रोक लगा दी। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के ये बात गले नहीं उतर र ही थी कि महज आठ कर्मचारी एक दिन में 250 व्यक्तियों के सैंपल कैसे ले सकते हैं। एक ही व्यक्ति का सैंपल लेने के लिए संबंधित व्यक्ति की आइडी बनाने, सैंपल किट तैयार करने, सैंपल लेने में ही अच्छा खासा वक्त लग जाता है। साथ ही लैब की तरफ से रियल टाइम एंट्री भी नहीं की जा रही थी।

इसमें भी अचरज वाली बात ये है कि जो सैंपल दिल्ली भेजे जा रहे हैं, उनकी रिपोर्ट उसी दिन ली जा रही है। वहीं लैब से जांच कराने वालों के दर्ज नंबर व पते भी गलत निकल रहे हैं। ऐसे में कोरोना की स्थिति में मरीजों पर निगरानी रखने में भी दिक्कत है। इस पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने लैब प्रबंधकों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। जवाब ने देने पर लैब पर विधिक कार्रवाई भी हो सकती है।

मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में कहा कि देहरादून में नागरिकों से शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ निजी लैब में टेस्ट कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है, जबकि सरकारी अस्पताल में उसी व्यक्ति की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। ये भी शिकायतें आ रही हैं कि देहरादून की कुछ निजी लैब से लगभग 50 प्रतिशत लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिए कि निजी लैब में पॉजिटिव पाए गए व्यक्तियों का सरकारी लैब में भी टेस्ट कराया जाए। यदि किसी लैब की रिपोर्ट गलत पाई गई तो फिर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

प्लास्टिक कचरे के लिए एम्स ऋषिकेश का तीन संस्थाओं के साथ हुआ करार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे के लिए तीन संस्थाओं में करार हुआ है। एम्स, सीएसआईआर आईआईपी देहरादून और सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्यूनिटी फाउंडेशन (एसडीसी) के मध्य हुए करार के तहत संस्थान में प्लास्टिक बैंक स्थापित किया गया है। जिसमें जमा होने वाले प्लास्टिक की रिसाक्लिंग सीएसआईआर-इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पैट्रोलियम (आईआईपी) देहरादून में की जाएगी। बताया गया कि इस कचरे से पैट्रोल व डीजल तैयार किया जाएगा।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश ने तीर्थनगरी में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में नया कदम बढ़ाया है। संस्थान परिसर में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए सतत पौधरोपण मुहिम व हरित पट्टी विकसित करने के साथ साथ एम्स ने संस्थान से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे के ठोस निस्तारण के लिए देहरादून की दो संस्थाओं से प्लास्टिक बैंक की स्थापना को लेकर करार किया है।

एम्स में आयोजित बैठक में संस्थान के निदेशक प्रो. रवि कांत, सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डा. अंजन रे व सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्यूनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने करार पर हस्ताक्षर किए। करार के मुताबिक तीनों संस्थाओं द्वारा मिलकर एम्स ऋषिकेश में प्लास्टिक बैंक की स्थापना की गई है, जिसमें संस्थान से निकलने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे को जमा किया जाएगा। एकत्रित प्लास्टिक कचरे की आईआईपी में साइंटिफिक टेक्निक से रिसाइक्लिंग कर इससे डीजल व पैट्रोल तैयार किया जाएगा।

इस अवसर पर निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने इसे हर्ष का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इससे एम्स प्रतिष्ठान एक और जन व पर्यावरण हित के कार्य से जुड़ रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान प्लास्टिक बैंक की योजना में अपना पूर्ण सहयोग व भागीदारी निभाएगा।

आईआईपी के निदेशक डा. अंजन रे कहा कि उनका संस्थान प्लास्टिक रिसाक्लिंग की अपनी तकनीक को निरंतर विकसित करने में जुटा है, जल्द ही आईआईपी कोविड-19 संक्रमण से बचाव में इस्तेमाल किए जा रहे मास्क, ग्लब्स व पीपीई किट की रिसाक्लिंग की व्यवस्था भी करेगा। जिससे उक्त सामग्रियों का भी सही तरीके से निस्तारण किया जा सके।
एसडीसी के संस्थापक अनूप नौटियाल ने हर्ष जताया कि उत्तराखंड के दो प्रतिष्ठित केंद्रीय प्रतिष्ठान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस नेक कार्य में साथ आ रहे हैं, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल अन्य संस्थाओं को भी प्रेरित करेगी व निकट भविष्य में अन्य संस्थान भी इस मुहिम का हिस्सा बनेंगे।

अमेरिकी सोसाइटी ने ऋषिकेश एम्स को दिया अनुदान, रक्त कैंसर पर होंगे रिसर्च

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को अमेरिकन सोसायटी ऑफ हेमेटोलॉजी से ब्लड कैंसर पर अनुसंधान के लिए अनुदान मिला है, जिस पर संस्थान के हेमेटोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक रिसर्च का कार्य जल्द शुरू करेंगे। एम्स ऋषिकेश भारत देश की ऐसी पहली संस्था है जिसे यह अनुदान ग्रांट मिली है, रक्त कैंसर पर अनुसंधान को बढ़ावा देने वाली अमेरिकन सोसायटी की ओर से अब तक देश के किसी भी मेडिकल संस्थान को यह ग्रांट नहीं दी है।
गौरतलब है कि भारत में दुनिया के मुकाबले रक्त कैंसर के रोगियों की मृत्यु दर अधिक है। जिसका सबसे मुख्य वजह कैंसर के शरीर में दोबारा लौटना भी है, साथ ही जानकार इसकी एक वजह देश में रक्त कैंसर के प्रति लोगों में जनजागरुकता का अभाव को भी मानते हैं। ऐसे कई कारण हैं जिनके बारे में वैज्ञानिक मानते हैं कि किसी व्यक्ति के पहली बार कैंसर ग्रसित होने पर उसे खत्म करने के लिए जो दवा अथवा कीमोथेरेपी दी जाती है, वह उसी व्यक्ति में कैंसर के दोबारा लौटने की स्थिति में अपेक्षाकृत प्रतिरोधक नहीं होती, जिससे व्यक्ति की मृत्यु की संभावनाएं बढ़ जाती है।
उनका मानना है कि कैंसर के दूसरी बार व्यक्ति में आने पर कैंसर सेल में कई तरह के बदलाव आते हैं, मसलन जीन म्यूटेशन, चेंज इन द माइक्रो इन्वायरमेंट आदि। लिहाजा ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को पूर्व में दी गई दवा अथवा उपचार काम नहीं कर पाता है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि संस्थान को इस अंतर्राष्ट्रीय अमेरिकन सोसायटी ऑफ हेमेटोलॉजी द्वारा दिए गए अनुदान से रक्त कैंसर रिसर्च में नए विषयों पर अनुसंधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस विषय में रिसर्च के दौरान एम्स के अनुसंधान कर्ताओं का फोकस कीमो रिस्टेन्सेंस कोशिकाओं द्वारा प्राप्त अंतर आणविक परिवर्तनों को समझने पर रहेगा। इस अनुसंधान के लिए जिनोमिक्स, प्रोटियोमिक्स और क्रिस्पर जैसी तकनीकियों का प्रयोग किया जाएगा।

बताया कि यह अध्ययन कीमोथैरेपी प्रतिरोधी रोगियों के लिए कुछ नए चिकित्सीय पद्धतियों के आविष्कार में मदद करेगा। बताया गया कि एम्स संस्थान में इस परियोजना का नेतृत्व मेडिकल ओंकोलॉजी एंड हेमेटोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नीरज जैन करेंगे। जो कि डीबीटी रामलिंगस्वामी फैलोशिप प्राप्त हैं।

विभाग प्रमुख डा. नाथ ने बताया कि यह अनुदान भारत में पहली बार एम्स संस्थान के रक्त कैंसर अनुसंधान विशेषज्ञ डा. नीरज जैन को प्राप्त हुआ है। जिसके लिए उन्होंने सोसायटी से रक्त कैंसर पर अनुसंधान के लिए आवेदन किया था।
बताया गया है कि इस रिसर्च परियोजना को ढाई वर्ष में पूर्ण किया जाएगा। जिसके लिए अमेरिकन सोसायटी की ओर से डेढ़ लाख डॉलर (1.10 करोड़) की स्वीकृति प्रदान की गई है। संस्थान की डीन रिसर्च प्रो. वर्तिका सक्सैना ने जानकारी दी कि संस्थान उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा अनुसंधान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जिसके लिए एम्स में विभिन्न विस्तृत अनुसंधान प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है।