कैंसर की रोकथाम में सहायक होगा कैन एप्प

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कैंसर की रोकथाम हेतु कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन द्वारा निर्मित कैनएप्प को लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि यह एप कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए कारगर साबित हो सकता है। इसे राज्य की स्थानीय बोलियों में भी बनाया जाय।

कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. सुमिता प्रभाकर ने कहा कि इस एप में स्तन कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए चार बाधाओं को दूर करने में कारगर होगा। जागरूकता की कमी, पर्याप्त जानकारी की कमी, कैंसर की रोकथाम के लिए उपकरणों की कमी और रिकॉर्ड न होने के कारण स्तन कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। कैनएप स्तन कैंसर का जल्द पता लगाने के लिए कारगर होगा। यह एप स्तन कैंसर के लक्षणों, जोखिम कारकों, शुरूआती जांच के तरीकों के बारे में नवीनतम जानकारी प्रदान करता है। इसमें डॉक्टर की विजिट का रिमाइंडर, आगामी परीक्षण के रिमांडर की सुविधा उपलब्ध है। परीक्षण के दौरान पाये जाने वाले किसी भी असामान्य लक्षण का रिकॉर्ड एप में बनाया जा सकता है, जो पूरी तरह ग्राफिकल है। यह एप गढ़वाली, हिन्दी, अंग्रेजी और अवधी भाषा में बनाया गया है।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल, कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन के सचिव प्रवीण डंग, मधुकांत कौशिक, परम दत्ता, ललित आनंद एवं समीर दत्ता उपस्थित थे।

एम्स में भर्ती 1600 से अधिक कोविड रोगी हुए स्वस्थ्य

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला से कोरोना हार गया है। जी हां, यहां कोरोना संक्रमित होने के बाद से बुजुर्ग महिला को भर्ती किया गया था। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ होकर घर लौट गई है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि निर्धन व्यक्ति को समुचित और बेहतर मेडिकल सुविधा देने के लिए एम्स प्रतिबद्ध है। जिस वक्त कोविड चरम पर था और अन्य अस्पताल कोविड रोगियों का इलाज करने में असमर्थता जाहिर कर रहे थे, उस दौरान कोविड मरीजों का इलाज करने में एम्स ने प्राथमिकता रखी। कहा कि कोविड मरीजों के इलाज के लिए एम्स में पर्याप्त मात्रा में बैड, आईसीयू और वेंटिलेटर्स का प्रबंध किया गया है। हेल्थ केयर वर्करों की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए हेल्थ केयर वर्कर्स की टीम ने जोखिम उठाते हुए दिन-रात अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि एम्स में कोविड काल शुरू होने के बाद से अब तक 1600 से अधिक कोविड मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। इन मरीजों में 90 साल की वृद्ध महिला से लेकर 1 दिन का नवजात शिशु तक का मरीज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 90 साल की वृद्धा मूलरूप से टिहरी गढ़वाल जिले के कीर्तिनगर विकासखंड के अंतर्गत मूलधार गांव की निवासी है। कोविड पाॅजिटिव इस वृद्धा को बीती 8 सितम्बर को एम्स में भर्ती किया गया था। इसे पहले से अस्थमा की बीमारी की शिकायत थी और कोरोना संक्रमित होने के बाद इसे सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ हो रही थी। 17 दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद पूर्ण स्वस्थ होने पर इसे 25 सितम्बर को डिस्चार्ज कर दिया गया था।

कहा कि कोविड मरीजों का ग्राफ कुछ कम हुआ है, लेकिन इसका खतरा अभी टला नहीं है। इस बीमारी के प्रति जरा सी लापरवाही फिर से भारी पड़ सकती है। उधर, 90 वर्षीय वृद्धा मौली देवी के पौत्र चैदहबीघा, ऋषिकेश निवासी दीपक कंडारी ने बताया कि उनकी दादी आजकल गढ़वाल में है और पूर्णतौर से स्वस्थ है। अपनी दादी के बेहतर उपचार के लिए उन्होंने एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों का आभार जताया।

कोरोना कालः एम्स के विशेषज्ञों ने स्कूल खुलने पर बच्चों के लिए जारी किए सुझाव

दो नवंबर से उत्तराखंड के कक्षा दस से 12वीं के विद्यालय खुल रहे है। ऐसे में बच्चों के समक्ष कई तरह की दिक्कतें हो सकती है। इसके लिए एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रवि कांत ने सुझाव दिया है। बताया है कि कोविड-19 ने अभिभावकों में बच्चों के प्रति व्यापक चिंता पैदा की है। लिहाजा इस बीमारी के दुष्प्रभावों को लेकर माता-पिता द्वारा आशंकित होना और बच्चों की सुरक्षा के बारे में चिंता करना स्वाभाविक है। बच्चों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए उन्हें साबुन से बार-बार हाथ धोने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। बच्चों में विटामिन-डी की कमी नहीं हो, इसलिए धूप में थोड़ी देर परस्पर 1 से 2 मीटर की दूरी बनाते हुए और मास्क पहनकर खेलने दें। साथ ही स्क्रीन टाइम कम करने के लिए उन्हें किताबें पढ़ने, व्यायाम करने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए उनमें रुचि पैदा करनी चाहिए।

कम्यूनिटी एंड मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. मीनाक्षी खापरे ने इस बारे में बताया कि बच्चों की शारीरिक ऊर्जा को चैनलाईज करने की आवश्यकता है। इसके लिए बच्चों को विभिन्न खेलों, ड्राईंग, पेंटिंग, अभिनय, बागवानी, खाना बनाने और घर की साफ-सफाई में शामिल किया जा सकता है।

सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग की डा. रुचिका गुप्ता और डा. श्रेया अग्रवाल ने बताया कि बच्चों को स्वस्थ आहार उपलब्ध कराना, नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करना, बच्चों में कौशल विकास की रुचि विकसित करना और उन्हें रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखना चाहिए। उनमें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास पैदा करने के लिए हमें उन्हें टीम भावना से कार्य करना सिखाना होगा।

एसडीएम ने कैंप के जरिए लोगों को दी कोरोना से बचाव की जानकारी

इंदिरानगर ऋषिकेश के स्व. गैरोला स्मृति पार्क में पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट के नेतृत्व में कोविड-19 जागरूकता संबंधी कैंप का आयोजन किया गया। इसमें उप जिलाधिकारी वरूण चैधरी ने लोगों को कोरोना से न घबराने का आह्वान किया। कहा कि इससे बचने का उपाय फेस कवर, सैनिटाइजर, किसी भी वस्तु को खाने से पूर्व धोने, बाहर का खाना से बचने, मास्क पहनने आदि का उपयोग करने को कहा। मौके पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य ज्योति सजवाण और वरिष्ठ नागरिक केएस थापा, डीपी रतूड़ी ने भी लोगों को कोरोना से बचाव की जानकारी दी। मौके पर करीब 56 लोगों के कोरोना टेस्ट राजकीय चिकित्सालय की टीम की ओर से किए गए। कैंप में कोरोना टेस्ट कराने हिंदू जागरण मंच के अध्यक्ष संजय प्रेम सिंह बिष्ट, दीपक रावत, आलोक कुमार, शुभम तोमर, अरविंद पवार, पंकज सिंघल, सुमित त्यागी, अजय गोयल, तरुण त्यागी, हर्षित धीमान, आयुष वालिया, शुभम वालिया, अमन वालिया, अंशुल धीमान, इंद्रसेन गर्ग, हारून, निखिल गुप्ता आदि पहुंचे।

संक्रमण से बचने के लिए दो गज की दूरी और मास्क का रखें ध्यानः प्रो. रविकांत

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर भारत सरकार द्वारा घोषित कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ व अन्य कर्मचारियों ने कोरोना काल में आवश्यक दिशा निर्देशों का पालन करने व दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने की सामूहिक शपथ ली। इस अवसर पर एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि नियमित मास्क पहनने, एक-दूसरे से दो गज की दूरी बनाए रखने से ही हम सामुदायिक स्तर पर एक दूसरे व्यक्ति में फैलने वाले संक्रमण से सुरक्षित रह सकते हैं। इस दौरान एम्स अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज में शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें डीन (एकेडमिक) प्रो. मनोज गुप्ता व डीन (हॉस्पिटल अफेयर्स) प्रो. यूबी मिश्रा तथा प्रो. सुरेश कुमार शर्मा ने सभी को शपथ दिलाई।

इस दौरान कार्मिकों ने कोविडकाल में कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का संकल्प लिया। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में एक ही स्थान पर अधिक भीड़भाड़ नहीं हो, इसका ध्यान रखते हुए विभिन्न विभागों में विभागाध्यक्षों ने अधिनस्थों को शपथ दिलाई। साथ ही कई लोगों ने संबंधित वेबसाइट पर ऑनलाइन संकल्पपत्र भरकर कोविड के खिलाफ जनांदोलन में हिस्सा लिया।

गौरतलब है कि बीते सप्ताह आगामी त्योहारों व ठंड के मौसम में कोरोना महामारी से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए जनांदोलन में लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उन्होंने देशवासियों से कोविडकाल में बचाव के लिए जरुरी सावधानियां बरतने का आह्वान किया व इस मुहिम को एक जनांदोलन का रूप देने की आवश्यकता बताई।

सचिवालय में सीएम के समक्ष विधायकों व अधिकारियों ने ली कोरोना की रोकथाम संबंधी प्रतिज्ञा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव हेतु जन जागरूकता अभियान के तहत विधायकगणों एवं अधिकारियों को प्रतिज्ञा-शपथ दिलाई। उन्होंने कोविड-19 से बचाव हेतु कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सावधानियां बरतने, कोविड से जुड़े आचार व्यवहार का अनुसरण करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करने की शपथ दिलाई। मास्क, फेस कवर पहनने एवं दूसरों से 02 गज की दूरी बनाकर रखने, नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने, कोविड के लक्षण महसूस होने पर तत्काल चिकित्सा सलाह लेने एवं मिलकर कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई जीतने की भी शपथ दिलाई।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जनप्रतिनिधयों, अधिकारियों एवं कार्मिकों को कोराना से बचाव के लिए जन जागरूकता पर विशेष ध्यान देना होगा। त्योहारों एवं शीतकाल का समय शुरू होने वाला है। इसके दृष्टिगत मास्क की अनिवार्यता, सोशल डिस्टेंसिंग एवं स्वच्छता से सबंधित नियमों के पालन के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता जरूरी है। सर्दी के समय में कोविड से बचाव के लिए और सतर्कता की जरूरत है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जब तक राज्य में कोविड पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होता, तब तक जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कोविड के कोई लक्षण दिखाई दे,तो शीघ्र इसकी सूचना टोल फ्री नम्बर या स्वास्थ्य विभाग को दी जाय।

उन्होंने कहा कि सुरक्षात्मक उपायों से इस बीमारी से लड़ा जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं स्वास्थ्य विभाग की गाईडलाईन का पूरा पालन जरूरी है। अधिकारी बैठकों को अधिकतम वर्चुअल माध्यम से करें। सतर्कता से राज्य में कोविड संक्रमण की दर में कमी आयी है, लेकिन इस समय किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाय।

मौके पर वर्चुअल माध्यम से विधायकगण, सचिवालय में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आरके सुधांशु, अमित नेगी, नितेश झा, शैलेष बगोली, डॉ. पंकज पाण्डेय, डॉ. रणजीत सिन्हा, महानिदेशक सूचना डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।

स्वस्थ समाज के लिए गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल की जरूरत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत प्रदेश में गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को साफ-सफाई आदि से सम्बन्धित सामग्री किटों की वितरण योजना सौभाग्यवती का शीघ्र ही शुभारम्भ करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को उचित देखभाल के साथ ही उन्हें उचित पुष्टाहार दिये जाने की व्यवस्था की गई है। अब उन्हें पौष्टिक आहार के साथ ही सफाई के प्रति प्रेरित करने की आवश्यकता है। इसी के दृष्टिगत गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को दैनिक उपयोग की सामग्री आदि अलग-अलग किटों में तैयार कर प्रदान किये जाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे उनके स्वास्थ्य एवं रहन सहन में निश्चित रूप से बदलाव आयेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिये गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल समय की जरूरत है।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं को सौभाग्यवती योजना के तहत दिये जाने वाली किट में 250 बादाम गिरी-सुखी खुमानी-अखरोट, 500 ग्राम छुआरा, 02 कॉटन गाउन-साड़ी-सूट, 01 शॉल गर्म फुल साईज, 01 स्कॉर्फ कॉटन-गर्म स्टेन्डर्ड साइज, 02 जोड़े जुराब स्टैण्डर्ड साइज, 01 तौलिया बड़े साइज का, 02 पैकेट सैनिटरी नैपकिन (08 प्रति पैकेट), 02 जोड़े बेड शीट (तकिये के कवर सहित), 01 नेल कटर, 01 नारियल-तिल-सरसों-चुलू का तेल, 200 एम.एल हैण्डवाश लिक्विड, 02 कपड़े धोने का साबुन 02 नहाने का साबुन शामिल रहेगा।

शिशुओं के लिये को दी जाने वाली किट में 02 जोड़े शिशु के कपड़े (सूती या गर्म-मौसम के अनुसार) टोपी और जुराब सहित, 01 पैकेट (10 पीस) कॉटन डाइपर, 01 बेबी तौलिया कॉटन सॉफ्ट, 03 बेबी साबुन, 01 तेल, 01 पाउडर, 02 बेबी ब्लैंककेट गर्म अथवा कॉटन (मौसम अनुसार), 01 रबर शीट, 01 समस्त सामग्री पैक करने हेतु सूती बैग शामिल रहेगा।
प्रदेश में शुरू की जाने वाली सौभाग्यवती योजना में आयकर देने वाले तथा सरकारी सेवकों के आश्रित शामिल नहीं रहेंगे। किट में स्थानीय पहनावों एवं मौसम के अनुकूल वस्त्र तैयार कर दिये जाने की भी व्यवस्था रहेगी।

दीक्षांत समारोह को सीएम ने किया संबोधित, युवा पीढ़ी के सोचने का तरीका बेहतर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पटेलनगर स्थित हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की। विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2019-20 के कुल 922 अभ्यर्थियों को उपाधियां प्रदान की गई।

मौके पर संजय गांधी पी.जी.आई.एम.एस लखनऊ के न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष (पद्मश्री) प्रो. सुनील प्रधान, एम्स जोधपुर के निदेशक प्रो. संजीव मिश्रा, भूतपूर्व कुलपति हेमवती नन्दन बहुगुणा, उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय प्रो. सौदान सिंह एवं एम्स नई दिल्ली के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी.के. शर्मा को ‘‘डी एस सी’’ की मानद उपाधि दी गई। चिकित्सा क्षेत्र में श्रेष्ठ शोध पत्र के लिए डॉ. प्रियंका चैरसिया, डॉ. स्मृति, डॉ. प्रेरणा सिंह एवं डॉ. दीपिका लोहानी को प्रो. (डॉ.) एन.सी.पंत पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हेम चन्द्र द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘‘हेल्थ केयर डिलीवरी सिस्टम इन इंडिया’’ का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा जीवन पर्यन्त सीखने की प्रक्रिया है। इन विद्यार्थियों को अब एक नये जीवन की शुरूआत करनी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने 06 वर्षों में राज्य में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कई गुणात्मक कार्य किये हैं, यह टीम वर्क का एक अच्छा उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2020 पूरे विश्व के लिए चुनौतीपूर्ण वर्ष रहा है। कोरोना महामारी ने मानव जीवन को काफी प्रभावित किया। कोविड से लड़ने के लिए हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है। इस महामारी से लड़ने के लिए हमारे चिकित्सकों की सबसे अहम भूमिका रही है। लोगों की जीवन रक्षा के लिए देश में सैकड़ो चिकित्सकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। चिकित्सकों के प्रयासों के परिणामस्वरूप इस कोरोना काल में सभी लोग आशावादी जीवन जी रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड से बचाव के लिए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया है। इसके लिए अपने अनुभवों को साझा करने के लिए एवं इससे बचाव हेतु लोगों से सुझाव भी मांगे गये हैं। समाज के प्रबुद्ध लोगों, चिकित्सकों, कोरोना वॉरियर्स, कारोना विनर्स एवं अन्य लोग अपने अनुभवों को विभिन्न माध्यमों से साझा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी एडवांस सोचती है और उनका कार्य करने का तरीका भी नया होता है। उन्हें अपने विचारों को विभिन्न माध्यमों से जरूर व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में चिकित्सकों ने देवदूत की भूमिका निभाई है।

कहा कि राज्य में सरकार बनने के बाद हमने स्वास्थ्य सुविधाओं को पहली प्राथमिकता में रखा। 2017 तक राज्य में केवल एक हजार डॉक्टर थे। अभी प्रदेश में 2500 डॉक्टर हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों को भेजा गया है। 03 मेडिकल कॉलेज राज्य में चल रहे हैं, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज भी जल्द चालू हो जायेगा। भारत सरकार द्वारा राज्य के लिए 03 मेडिकल कॉलेज और स्वीकृत किये गये हैं। सबको बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हमें और चिकित्सकों की आवश्यकता है। प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए राज्य में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना शुरू की गई। इससे प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को सुरक्षा कवच दिया है।

इस अवसर पर कुलपति हेमवती नन्दन बहुगुणा उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय प्रो. हेम चन्द्र, सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज पाण्डेय, निदेशक चिकित्सा शिक्षा युगल किशोर पंत आदि उपस्थित थे।

आर्थिक रूप से कमजोर मजदूर के आपरेशन में पैरा खिलाड़ी नीरजा ने की मदद

नीरजा देवभूमि चेरिटेबल ट्रस्ट ने सड़क दुर्घटना में चोटिल व्यक्ति के आॅपरेशन में मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। अमित ग्राम निवासी संतोष कुमार पुत्र बांके बिहारी लाल मूल निवासी चंपारण, पटना बिहार का करीब एक माह पूर्व सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। राजकीय अस्पताल में उनका कच्चा प्लास्टर कराया गया, इसी बीच वह कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। कोरोना से उबरने के बाद घुटने का ऑपरेशन के लिए उनके पास रुपए नहीं थे। इसकी जानकारी नीरजा देवभूमि चेरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक नीरजा गोयल को लगी। उन्होंने संतोष कुमार से संपर्क साधा और डॉक्टरों से बातचीत करने के बाद ऑपरेशन की तिथि तय की। नीरजा गोयल ने बताया कि गुरुवार को उनके घुटने का सफल ऑपरेशन कर प्लेट डाली गई है। जिसका खर्च 8500 रूपए आया है। नीरजा ने गुरुवार को चेक डॉक्टर को सौपा। बताया कि संतोष कुमार माह फरवरी से यहाँ रह रहा था। पेशे से वह मजदूरी का काम करता है। लॉक डाउन में काम न हो पाने के कारण आर्थिक समस्या से जूझ रहे थे।

आनलाइन कार्यक्रम में सीएम बोले, देहरादून मेडिकल हब के रूप में उभर रहा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चैबे की उपस्थिति में ऑनलाइन आयोजित कार्यक्रम में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट देहरादून और ग्लोबल हेल्थ एलायंस यूनाइटेड किंगडम के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। ग्लोबल हेल्थ एलायंस, विभिन्न कोर्सेज के माध्यम से मेडिकल स्टाफ विशेष तौर पर पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग स्टाफ को क्वालिटी प्रशिक्षण देगा। इसी प्रकार मोटर बाईक पैरामेडिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों संस्थाओं के मध्य इस समझौते से स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को काफी लाभ होगा। मोटर बाईक पैरामेडिक से पर्वतीय क्षेत्रों में मौके पर जाकर मरीजों को त्वरित चिकित्सा दी जा सकेगी। विश्व स्तरीय संस्था ग्लोबल हेल्थ एलायंस के द्वारा डिजाइन किये गये पाठ्यक्रमों से यहां के मेडिकल और पैरामेडिकल छात्रों का कौशल विकास होगा। रोजगार की दृष्टि से भी युवाओं को लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून मेडिकल हब के रूप में उभर रहा है। हृदय रोग और डायबिटीज के इलाज की सुविधा पर विशेष ध्यान देना होगा।
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ विजय धस्माना ने स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कार्यो की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधा बढाना पहली प्राथमिकता है। इस एमओयू से पैरामेडिकल स्टाफ की गुणवत्ता बढेगी।

इस अवसर पर नई दिल्ली में ब्रिटिश हाईकमिश्नर जेन थाम्पसन, ग्लोबल हेल्थ एलायंस के डॉ राजे नारायण, भारत में यूएनडीपी के मुख्य सलाहकार डा राकेश कुमार, उत्तराखण्ड शासन में सचिव अमित नेगी, एसआरएचयू के कुलसचिव डॉ विनीत महरोत्रा, डीन डॉ मुश्ताक अहमद उपस्थित थे।