एम्स ने ओपीडी मरीजों को दिए दो माह तक के लिए इंसुलिन इंजेक्शन

14 नवंबर को होने वाले विश्व मधुमेह दिवस के उपलक्ष्य में एम्स ऋषिकेश के एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म विभाग में कार्यक्रम हुए। टाइप-1 मधुमेह के रोगियों के लिए एक रोगी सहायता के तहत ओपीडी मरीजों को 2 माह तक के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन निःशुल्क वितरित किए गए।

बताया गया कि इंडोक्रिनोलॉजी विभाग में शैक्षणिक गतिविधियों को जनवरी 2021 सत्र में एंडोक्रिनोलॉजी विषय में डीएम पाठ्यक्रम को शुरू किया जाएगा। जिसमें विश्व मधुमेह दिवस मनाने के बाबत जानकारी दी गई कि इसी दिन डाॅक्टर फे्रडरिक बैटिंग ने इंसुलिन की खोज भी की थी। तभी से 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन, मधुमेह से ग्रसित बच्चों के लिए विशेष महत्व रखता है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के विषय पर इस तरह के जनजागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन समय की मांग है। बताया कि संस्थान के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में विभिन्न वयस्क और बाल चिकित्सा एंडोक्राइन (हार्मोन संबंधी) विकारों के रोगियों के समुचित उपचार की मुकम्मल सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इस अवसर पर संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने कहा कि टाइप-1 या जुवेनाइल डायबिटीज बच्चों और युवाओं को खासतौर से प्रभावित करता है और इस बीमारी को इंसुलिन के साथ आजीवन इलाज की आवश्यकता होती है। इंटनेशनल डायबिटिक फैडरेशन आईडीएफ के अनुमान के मुताबिक भारत में प्रत्येक वर्ष इस बीमारी से 16,000 नए मामले प्रकाश में आ रहे हैं।

कार्यक्रम के तहत स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए एक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें खासतौर से मेडिसिन और पीडियाट्रिक्स विभाग के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के विजेताओं को विभाग की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए। क्विज प्रतियोगिता में मेडिसिन विभाग के डा. अश्विन और डा. मोहन ने प्रथम, डा. पारस गुप्ता और डा. मयंक कपूर ने द्वितीय तथा बाल रोग विभाग के डा. गोकुल पिल्लई और डा. राजकुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

इस अवसर पर आयोजित ऑनलाइन संकाय वार्ता में एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की डा. कृति जोशी व डा. कल्याणी श्रीधरन तथा मेडिसिन विभाग के डा. रविकांत ने इन-हॉस्पिटल डायबिटीज मैनेजमेंट विषय पर प्रतिभाग किया।

एम्स प्रशासन ने अस्थमा रोगियों को किया अलर्ट, दिए आवश्यक सुझाव

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश ने शीतकाल के मद्देनजर अस्थमा रोगियों को विशेष सावधानी बरतने का सुझाव दिया है। संस्थान के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि ठंड और कोहरे की यह समस्या सबसे अधिक अस्थमा रोगियों के लिए नुकसानदेय है। ऐसे में अस्थमा रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि नियमततौर पर मास्क लगाने से कोरोना से तो बचाव होगा ही, साथ ही मास्क का उपयोग अस्थमा रोगियों के लिए ठंडी हवा से रोकथाम में भी बेहतर विकल्प साबित होगा। बताया कि ठंड और कोहरे के कारण वायुमंडल में जल की बूंदें संघनित होकर हवा के साथ मिल जाती हैं। यह हवा जब सांस के माध्यम से शरीर के भीतर प्रवेश करती है, तो सांस की नलियों में ठंडी हवा जाने से उनमें सूजन आने लगती है। ऐसे में अस्थमा के रोगी गंभीर स्थिति में आ जाते हैं। उन्होंने मास्क के इस्तेमाल को इस समस्या से बचने का सबसे बेहतर उपाय बताया।

पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. गिरीश सिंधवानी ने बताया कि अस्थमा किसी भी व्यक्ति को और किसी भी उम्र में हो सकता है। लेकिन समय पर इसके लक्षणों की पहचान होने से इस पर नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह रोग संक्रमण से नहीं फैलता है यह एलर्जी से होने वाली बीमारी है। जुकाम और बार-बार आने वाली छींकों से उत्पन्न यह एलर्जी जब नाक व गले से होते हुए छाती में फेफड़ों तक पहुंचती है तो अस्थमा का रूप ले लेती है। डा. सिंधवानी के अनुसार अस्थमा रोगियों को रात के समय अधिक दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि इस मर्ज का समय पर उपचार नहीं कराने से मरीज की सांस फूलने लगती है और दम घुटने के कारण उसे अस्थमा अटैक पड़ जाता है।
डा. सिंधवानी ने सुझाव दिया कि अस्थमा के रोगी नियमिततौर से दवा लेना नहीं भूलें। उन्होंने आगाह किया कि बीच-बीच में दवा छोड़ने से यह बीमारी घातकरूप ले लेती है। बताया कि लोगों में भ्रांति है कि इनहेलर का उपयोग केवल संकट के समय ही किया जाता है। जबकि यह तर्क पूरी तरह से गलत है। विशेषज्ञ चिकित्सक ने बताया कि इनहेलर का उपयोग अस्थमा के रोगी को नियमिततौर से करना चाहिए। इस बीमारी में इनहेलर सबसे उत्तम उपाय है। इससे बचना, नुकसानदेह होता है। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश एम्स में इस बीमारी की सभी तरह के परीक्षण व उपचार की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं।

यह हैं अस्थमा के प्रमुख लक्षण-
खांसी, जुकाम, छींकें आना, सांस फूलना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना आदि।

यह है अस्थमा रोग को बढ़ाने वाले कारक-
ठंड, कोहरा, धुंध, धुवां, धूल, प्रदूषण, संक्रमण, पेंट की गंध, परागकण। इसके अलावा बंद घरों के भीतर रहने वाले पालतू कुत्ते और बिल्लियों के बालों से भी अस्थमा मरीजों की परेशानियां बढ़ जाती हैं।

इस तरह अस्थमा से बचाव का उपाय-
फ्रिज का पानी, ठंडी और बासी चीजों का सेवन कदापि नहीं करें। सर्दी से बचाव के सभी जरुरी उपाय जैसे गर्म कपड़े पहनना, धूप आने से पहले बाहर नहीं निकलना, कमरों के भीतर बैठने के बजाय धूप में बैठना आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। धूप में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होता है और यह जनरल बूस्टर का कार्य करते हुए शरीर की इम्यूनिटी क्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा ग्रसित मरीज दवा का सेवन नियमित तौर पर करें।

एसडीएम ऋषिकेश ने जांची तीर्थनगरी की दुकानों की मिठाईयां

दीपावली पर एक्सपायरी मिठाई बेची तो मुकदमा झेलने के लिए तैयार रहना होगा। उप जिलाधिकारी ऋषिकेश वरूण चैधरी ने आज मिठाईयों की दुकान में छापा मारा। इस दौरान उन्होंने सरकार की गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए। एसडीएम के नेतृत्व में तहसील व पुलिस प्रशासन में तीर्थ नगरी की सभी मिष्ठान की दुकानों तथा उनकी वर्कशॉप पर छापेमारी की जिसमें उन्होंने दुकानों पर बनने वाली मिठाइयों की एक्सपायरी डेट भी चेक की तथा मास्क तथा दस्ताने लगाकर कार्य के जाने के निर्देश भी दुकानदारों को दिए उप जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि यदि कोरोना संक्रमण के चलते सरकार द्वारा निर्धारित किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया तो उन दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। उप जिलाधिकारी द्वारा मिठाइयों की दुकानों पर किए गए औचक निरीक्षण के चलते सभी दुकानदारों में हड़कंप मच गया।

एम्स में भ्रष्टाचार उन्मूलन पर आयोजित हुई निबंध व पोस्टर प्रतियोगिता

एम्स भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कृत संकल्पित है। इसके लिए संस्थान स्तर पर निगरानी कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी इस तरह के मामलों पर नजर रखती है और यदि कोई व्यक्ति इसतरह के किसी मामले में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। संस्थान में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहीं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में विजिलेंस वीक का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार उन्मूलन में अपनी महति भूमिका निभाने की शपथ ली। समापन कार्यक्रम में अव्वल प्रतिभागियों को एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। जिसमें भ्रष्टाचार उन्मूलन को लेकर निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर निदेशक एम्स ने भाषण व पोस्टर प्रतियोगिताओं में अव्वल रहे प्रतिभागियों को संस्थान की ओर से सम्मानित किया। विजिलेंस वीक कार्यक्रम के तहत संस्थान के विधि अधिकारी प्रदीप चंद्र पांडेय ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 व आरटीआई विषय, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पंकज सिंह राणा ने विजिलेंस गाइडलाइंस फॉर स्क्रेप डिस्पोजल, सुरपरिटेंडेंट इंजीनियर अनुराग सिंह जी ने विजिलेंस गाइडलाइंस फॉर टेंडर एंड प्रोक्यूरमेंट केसेस, वित्त सलाहकार कमांडेंट पीके मिश्रा व एकाउंट ऑफिसर राजीव गुप्ता ने जीएफआर रूल्स व एडमिन ऑफिसर संतोष जी ने विजिलेंस अवेयरनेस आदि विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह, डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा, वित्तीय सलाहकार पर्वत कुमार मिश्रा, डीन कॉलेज ऑफ नर्सिंग प्रो. सुरेश के. शर्मा, विधि अधिकारी प्रदीप पाण्डे, लेखा अधिकारी राजीव गुप्ता आदि मौजूद थे।

एम्स में रोबोटिक सजरी अब किडनी, मूत्राशय और किडनी के कैंसर में भी संभव

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की ओर से मूत्राशय, प्रजनन अंगों और किडनी के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। संस्थान के यूरोलाॅजी विभाग में इस बीमारी के निदान के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा के साथ ही उच्चस्तरीय तकनीक आधारित उपचार उपलब्ध है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार इस तकनीक से की जाने वाली सर्जरी के दौरान जहां जोखिम का खतरा निहायत कम हो जाता है, साथ ही रोगी को अस्पताल से जल्दी छुट्टी दे दी जाती है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि ऋषिकेश एम्स राज्य का एकमात्र ऐसा स्वास्थ्य संस्थान है, जिसमें किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

संस्थान के यूरोलाॅजी विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि मूत्र संबंधी विकृतियों में सबसे आम समस्या प्रोस्टेट कार्सिनोमा से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट ग्रन्थि पुरुषों में पाई जाती है। इस छोटी सी ग्रंथि का वजन लगभग 20 ग्राम होता है। यूरोलाॅजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार प्रोस्टेट ग्रन्थि शुक्राणु परिवहन करने वाले वीर्य का उत्पादन करती है। बढ़ती उम्र के साथ ही अधिकांश पुरुषों की इस ग्रन्थि में रोग पैदा होने लगते हैं। खासतौर से बुजुर्ग अवस्था में मूत्र रोग से उत्पन्न यह समस्या कैंसर का रूप ले लेती है। भारत में एक लाख की जनसंख्या में से 8 से 9 प्रतिशत लोग गुर्दे के कैंसर से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत के यह आंकड़े एशिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे अधिक हैं।

प्रोस्टेट कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब करते समय परेशानी होना, पेशाब में रक्त आना, वीर्य में रक्त आना, पेल्विक क्षेत्र में असुविधा और रीढ़ की हड्डी में दर्द होना शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर का पता स्क्रीनिंग, डिजिटल रेक्टल जांच और रक्त परीक्षण (यानी सीरम पीएसए) के माध्यम से लगाया जाता है।

मूत्राशय के कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब में रक्त आना, पेशाब करते समय दर्द होना, पेल्विक( पेड़ू ) में दर्द और बार-बार पेशाब आना इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में शामिल है।

किडनी के कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब में खून आना, भूख में कमी होना, वजन में गिरावट, थकान होना, बुखार और पेट में गांठ बन जाना।

एम्स ऋषिकेश में स्त्री वरदानः चुप्पी तोड़ो, नारीत्व से नाता जोड़ो अभियान की नींव रखी


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की ऐतिहासिक पहल पर महिलाओं की गुप्त रोगों से जुड़ी जटिल समस्याओं को लेकर सम्मेलन हुआ। संस्थान के रिकंस्ट्रक्टिव एंड कॉस्मेटिक गाइनोकॉलोजी विभाग द्वारा स्त्री वरदान चुप्पी तोड़ो नारीत्व से नाता जोड़ो कार्यक्रम की नीव रखी। सम्मेलन में उत्तराखंड के लगभग सभी जिलों से 50 से अधिक स्वयं सेविका महिलाओं ने प्रतिभाग किया। उन्होंने मुहिम को गांव-गांव-घर घर तक पहुंचाने व राज्य की प्रत्येक महिलाओं को उनकी समस्याओं को लेकर जागरुक करने व ग्रसित महिलाओं को उपचार के लिए प्रेरित करने की शपथ भी दिलाई।

एम्स निदेशक व सीईओ प्रो. रविकांत ने अपने संदेश में बताया कि यह सम्मेलन महिलाओं के गुप्त रोगों से जुड़ी समस्याओं के निदान की दिशा में पहला कदम है, जिसका उद्देश्य भारत की हर महिला को ऐसी समस्याओं को लेकर जागरुक करना हो व उन महिलाओं तक पहुंचकर एम्स ऋषिकेश की सुपरस्पेशलिटी सेवाओं से उन्हें स्वास्थ्य लाभ दिलवाना है। कार्यक्रम में रिकंस्ट्रक्टिव और कॉस्मेटिक गाइनोकॉलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत मग्गो ने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी यह अपनी तरह की पहली मुहिम है, जिसे निदेशक की पहल पर उनकी अगुवाई में शुरू किया जा रहा है।

महिलाओं से आह्वान किया कि हमें इस मुहिम में उन महिलाओं से बात करनी है, जो महिलाएं या तो वह संकोच के मारे बात नहीं कर पाती अथवा समाज उन महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को नजरअंदाज कर देता है।

इस दौरान डॉ. नवनीत ने प्रतिभागी सेविकाओं को महिलाओं के यूरिनरी इनकांटिनेस उनकी यौन समस्याएं और उनके यौन अंग या शरीर बाहर आने की समस्याओं पर विस्तृत जानकारियां दी व इस तरह की बीमारियों से शरीर को होने वाले दूसरे तरह के नुकसान को लेकर जागरुक किया। उन्होंने कहा कि हम सभा को मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि अगले 5 वर्ष के अंदर उत्तराखंड राज्य को यूरिनरी इनकांटीनेंस फ्री यानी यूरिनरी इनकांटीनेंस से मुक्त करना है। गौरतलब है कि एम्स का रिकंस्ट्रक्टिव और गाइनोकॉलोजी विभाग पूरे विश्व में अपनी तरह का पहला सुपरस्पेशलिटी विभाग है, जिसमें कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सकों को नियुक्त किया गया है।

कोविड से बचाव के लिए अनुशासित तरीके से पैदल मार्च निकालेंः त्रिवेंद्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कोविड-19 पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये कि त्योहरों के समय में और सजग रहने की आवश्यकता है। त्योहारों के समय भीड़ तेजी से बढ़ेगी। इसके लिए मास्क के उपयोग, सोशल डिस्टेंसिंग एवं विभिन्न माध्यमों से जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाए। स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन, पुलिस एवं अन्य विभागों के बेहतर तालमेल से कोविड पर नियंत्रण के प्रभाव दिख रहे हैं, लेकिन इस तरह की सतर्कता लगातार बरतनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहर से आने वाले पर्यटकों को मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग के लिए जागरूकता के साथ ही शालीनता से व्यवहार रखा जाय। मास्क का उपयोग न करने पर चालान करना मकसद नहीं होना चाहिए, जो लोग बिना मास्क के घर से बाहर निकल रहे हैं, उन्हें मास्क उपलब्ध कराये जाए एवं मास्क को सही तरीके से लगाने के लिए जागरूक भी किया जाए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कोविड से बचाव के लिए अनुशासित तरीके से पैदल मार्च कर जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसमें वर्दीधारी विभागों पुलिस, वन विभाग के अलावा मीडिया, समाजिक संगठनों, कर्मचारी संगठनों, छात्र संगठनों, महिला समूहों, किसान संगठनों एवं कोविड विनर्स के माध्यम से पैदल मार्च कर लोगों को जागरूक किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 02 नवम्बर से 10वीं एवं 12वीं की कक्षाएं स्कूलों में शुरू होंगी, प्रधानाचार्य, शिक्षक एवं कर्मचारी स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क की अनिवार्यता का अनुपालन कराना सुनिश्चित करेंगे। सार्वजनिक स्थानों, पर्यटक स्थलों एवं अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर जागरूकता के लिए वॉल पेंटिंग कराई जाय।

कोविड लक्षण होने पर कंट्रोल रूम पर करें सूचित
मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि लोगों को जागरूक किया जाय कि कोविड के लक्षण पाये जाने पर शीघ्र कंट्रोल रूम एवं हेल्पलाईन नम्बर पर कॉल करें। लापरवाही बिल्कुल न बरती जाय। इसके लिए व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जाय।

चालान के साथ मास्क भी बांटे जा रहे
डीजी लॉ एण्ड आर्डर अशोक कुमार ने कहा कि त्योहारों के दृष्टिगत मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग के लिए पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। चालान के साथ ही मास्क भी वितरित किये जा रहे हैं।

मौके पर सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, सचिव डॉ. पंकज पाण्डेय, दिलीप जावलकर, एस.ए.मुरूगेशन, आईजी संजय गुंज्याल, अपर सचिव युगल किशोर पंत, डीजी स्वास्थ्य डॉ. अमिता उप्रेती, वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सभी जिलाधिकारी, एसएसपी एवं सीएमओ उपस्थित रहे।

अगर आप कोरोना होने के बाद ठीक हो गए हैं, तो ये खबर आपके लिए है…

अगर आप को कोरोना हुआ था और अब आप स्वस्थ्य हो गए हैं, तो आपके लिए यह खबर काम की है। एम्स ऋषिकेश प्रशासन के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने परामर्श दिया है कि कोविड पॉजिटिव पेशेंट को स्वस्थ होने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, मास्क का नियमित तौर पर उपयोग व जरुरी दवाओं का सेवन अनिवार्य रूप से करना ही होगा।

निदेशक प्रो. रविकांत ने सुझाव दिया है कि स्वस्थ हो चुके रोगियों को किसी भी सूरत में अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। कोरोना संक्रमण को लेकर आईसीएमआर द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करना सभी का कर्तव्य है, तभी हम कोविड-19 के संक्रमण से स्वयं और अपने परिवार को बचा सकते हैं। उन्होंने सलाह दी है कि मरीज नियमित व्यायाम करें व हमेशा गर्म पानी का ही सेवन करें। ऐसे मरीजों के लिए किसी भी प्रकार का नशा धूम्रपान, मद्यपान आदि घातक साबित हो सकता है। लिहाजा इससे दूरी बनाएं।

डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि मरीजों से भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने, किसी भी स्थान पर 15 मिनट से अधिक समय तक नहीं रहें। सांस लेने में तकलीफ वाले कोविड संक्रमित मरीजों को सलाह दी गई है कि वह छाती के बल लेटने की आदत डालें, ऐसा करने से उनकी स्वसन प्रणाली में सुचारू से कार्य करने में मदद मिलेगी।

महंत जी की याद में जरूरतमंद लोगों के लिए रक्तदान का आयोजन

दिवंगत महंत अशोक प्रपन्नाचार्य की स्मृति में श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल शर्मा और श्री भरत मंदिर सोसाइटी के वरूण शर्मा की प्रेरणा से आज श्री भरत मंदिर सभागार में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और दिवंगत महंत अशोक प्रपन्नाचार्य को उनके सामाजिक कार्यों के लिए याद कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

शिविर में युवा पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट अपने साथियों के साथ पहुंचे। शिविर में रिकाॅड रक्तदान हुआ इसमें 160 रक्तदाता शामिल हुए। श्री भरत मंदिर स्कूल सोसाइटी के प्रबंधक हर्षवर्धन शर्मा ने कहा कि कोरोना काल में भी ऋषिकेश की जनता के अंदर दूसरों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान के प्रति अपार उत्साह देखने को मिला जो ऋषिकेश की तीर्थ नगरी के लोगों की विशेषता को प्रदर्शित करता है।

महंत वत्सल प्रपन्न शर्मा ने कहा कि इस समय कोरोना महामारी के कारण अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश और स्वामी राम हिमालयन अस्पताल देहरादून दोनों ही चिकित्सा संस्थानों में रक्त की कमी चल रही थी जिसको देखते हुए उनके मन में कई बार रक्तदान शिविर लगाने का विचार आया और उन्होंने यह निर्णय लिया कि अपने पिताजी स्वर्गीय महंत अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज जी की स्मृति में लोगों को खून की कमी न हो। इसके लिए एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया और इसमें लक्ष्य के अनुरूप अधिकतम रक्तदान भी हुआ रक्त दाताओं ने बढ़ चढ़कर रक्तदान करने में भागीदारी की।

कार्यक्रम में यह भी रहे मौजूद…
इस मौके पर मेयर अनिता ममगाईं, प्रधानाचार्य मेजर गोविंद सिंह रावत, सुधीर कुकरेती, जयेंद्र रमोला, कृष्णा रमोला, महंत विनय सारस्वत, पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, विनय उनियाल, प्रधानाचार्य धीरेंद्र जोशी, युवा नेता निखिल बड़थ्वाल, हिजामं के महानगर अध्यक्ष संजय प्रेम सिंह बिष्ट, पंडित रवि शास्त्री, जिपंस संजीव चैहान, अनुराग पायल, दीपक भारद्वाज, पार्षद शिव कुमार गौतम, विकास तेवतिया, सुमित पंवार, रीना शर्मा, विजयलक्ष्मी, डा. सुनील दत्त थपलियाल, जितेंद्र बिष्ट, लखविंदर सिंह, संजीव कुमार, प्रवीन रावत, विवेक शर्मा, डीपी रतूड़ी, कविता शाह, रंजन अंथवाल आदि उपस्थित थे।

इतना रक्त हुआ एकत्र…
एम्स से डॉक्टर पनदीप कौर और एपीआरओ दिनेश सेमवाल के नेतृत्व में 70 यूनिट रक्त एकत्र किया गया और जौलीग्रांट से डॉक्टर मनीष रतूड़ी के नेतृत्व में टीम के द्वारा 90 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।

आयुष एवं वेलनेस के लिए देवभूमि उत्तराखंड में अनेक संभावनाएंः त्रिवेंद्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रिंग रोड, देहरादून में आयुष हाॅस्पिटल एवं वेलनेस सेंटर का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आज वेलनेस का महत्व तेजी से बढ़ा है। शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थता के लिए वेलनेस एक सम्पूर्ण परिकल्पना है। नियमित अभ्यास और प्राकृतिक रूप से हम वेलनेस की ओर आगे बढ़ सकते हैं। आयुष एवं वेलनेस के लिए देवभूमि उत्तराखण्ड में अनेक संभावनाएं हैं। हिमालयी पादप औषधी के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं, जो उत्तराखण्ड के पास एक धरोहर है। अपनी इन प्राकृतिक सम्पदाओं का हमें लाभ उठाना होगा। प्राकृतिक औषधियों और आयुष की संभावनाओं को लेकर लोगों का रूझान उत्तराखण्ड की ओर बढ़ा है।

इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, आयुष हाॅस्पिटल एवं वेलनेस सेंटर की प्रबंध निदेशक विमला नौटियाल, जे.एन नौटियाल, निदेशक आयुर्वेद डा. वाई.एस रावत, निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल प्रो. राधा बल्लभ सती आदि उपस्थित थे।