देहरादून।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को बाबा केदारनाथ के दर्शन किये। आज प्रातः 8.50 बजे कपाट खुलने के करीब 15 मिनट बाद सबसे पहले दर्शन करने पंहुचे। प्रधानमंत्री मोदी ने गर्भगृह में भगवान शिव का रुद्राभिषेक भी किया। इसके पश्चात केदारनाथ मन्दिर समिति द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर उनके साथ राज्यपाल डॉ. कृष्ण कान्त पाल तथा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी मौजूद रहे। मोदी देश के ऐेसे तीसरे प्रधानमंत्री हैं जो इस पद पर रहते हुए केदारनाथ पंहुचे हैं। उनसे पहले स्व. इन्दिरा गांधी एवं वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री के तौर पर केदारनाथ दर्शन के लिए आ चुके हैं। मोदी आज प्रातः 8 बजकर 10 मिनट पर जौलीग्राण्ट एयरपोर्ट पंहुचे।
Category: धार्मिक स्थान
चारधाम को एडवांस बसों का आंकड़ा हजार के पार
ऋषिकेश।
उत्तराखंड के तीर्थों में प्रमुख रूप से शामिल चारधाम यात्रा में देश ही नहीं विदेशों के श्रद्धालु पहुंचते हैं। 27 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के लिए परिवहन कंपनियों में भारी उत्साह दिख रहा है। चारधाम यात्रा संचालित कर रही संयुक्त रोटेशन यातायात व्यवस्था समिति के पास इस वर्ष के शुरुआती चरण में हजार बसों की एडवांस बुकिंग आ चुकी है।
हालांकि समिति ने चारधाम यात्रा पर जाने वाली 1204 बसों की लॉटरी निकाली है। वर्षों से परंपरा रही है कि चारधाम यात्रा में जाने के लिए बसों की लॉटरी निकाली जाती है जिसमें से हजार बसों की एडवांस बुकिंग रोटेशन के पास आ चुकी है। चारधाम यात्रा के शुरुआती चरण में बंपर एडवांस बुकिंग आने से परिवहन व्यवसायियों के चेहरे खिले हुए हैं। देश के विभिन्न प्रदेशों से यात्रा के लिए ट्रैवेल एजेंट रोटेशन समिति से लगातार संपर्क कर रहे हैं। शुरुआती रुझानों को लेकर चारधाम यात्रा के मई में चरम पर होने का अंदाजा लगाया जा रहा है।
संयुक्त रोटेशन यातायात व्यवस्था समिति के अध्यक्ष सुधीर राय ने बताया कि पूर्व की परंपरा के अनुसार चारधाम यात्रा पर जाने वाली 1204 बसों की लॉटरी निकाली गई। यात्रा के शुरुआती चरण में रविवार तक के आंकड़ों के अनुसार हजार बसों की एंडवास बुकिंग समिति के पास आ चुकी है। शुरुआती रुझानों को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि मई माह में चारधाम यात्रा अपने चरम पर होगी। बसों की संख्या कम पड़ने पर कुमाऊं से भी बसें मंगवाई जाएंगी। परिवहन कंपनियों में यात्रा को लेकर भारी उत्साह है।
गुरु की जन्मस्थली पाकिस्तान को रवाना हुए श्रद्धालु
ऋषिकेश।
सोमवार को देहरादून रोड स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा से ऋषिकेश के सिख श्रद्धालु ननकाना साहिब पाकिस्तान के लिए रवाना हुए। 31 श्रद्धालुओं का दल ऋषिकेश, हरिद्वार, अमृतसर होते हुए 12 अप्रैल को बाघा बॉर्डर पहुंचेगा। वहां से पाकिस्तान के लाहौर प्रांत के तलवंडी जिसे अब ननकाना साहिब कहा जाता है के लिए रवाना होगा। 22 अप्रैल को दल वापस लौटेगा।
सरदार गोबिन्द सिंह, कृपाल सिंह, अतर सिंह ने बताया कि पूर्व में चार बार ननकाना साहिब की यात्रा कर चुके हैं। पांचवीं बार यात्रा करने जा रहे हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि गुरु की जन्मस्थली के दर्शन करने का बार-बार मन करता है। दल में सत्येन्दर कौर, पुष्पिन्दर सिंह, जसविन्दर सिंह, राजविन्दर सिंह, मोहनी देवी, आतमा सिंह, आशा गुल्हाटी, मंजीत सिंह, कृपाल सिंह, मंजीत कौर, तेजेन्दर सिंह, सुरेन्द्र कौर, बनवारी लाल, हरपाल सिंह, वंदना, बलजीत कौर, पाल कौर, अतीचंदर सिंह आदि शामिल हैं।
होलिका पूजन कर खुशहाली का मांगा आशीर्वाद
ऋषिकेश।
रविवार को सुबह से लोगों में होली पूजन को लेकर उत्साह देख गया। नगर में सैकड़ों स्थानों पर होलिका दहन की तैयारी की गयी थी। कई मौहल्लें व स्थान तो ऐसे है जहां पीढ़ी दर पीढ़ी होलिका दहन की जाती है। ऐसे ही स्थानों में त्रिवेणीघाट, वह स्थान है जहां स्थानीय लोग बड़ी संख्या में होलिका पूजन के लिए एकत्रित होते है। त्रिवेणीघाट पर होलिका पूजन करने आये श्रद्धालुओं ने गोबर के उपले, कंडी, गुलगुल और मीठे पकवान भी चढ़ाये। उसके बाद होलिका की परिक्रमा कर बुराई पर अच्छाई की जीत और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को जिंदा जलाने के लिए बुआ होलिका की गोद में बिठाकर चिता तैयार की गई थी। होलिका को आशीर्वाद मिला था कि उसे आग नही जला सकती है। लेकिन बुरा कार्य करने के चलते भगवान ने उसका आशीर्वाद छीन लिया। जिसके फलस्वरूप प्रहलाद तो भगवान की कृपा से बच गया लेकिन बुआ जलकर राख हो गयी। तभी से हिन्दू परंपरा के अनुसार लोग श्रद्धाभाव से होलिका का पूजन कर अपनी बुराईयों का अंत करने और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगते है।
उत्तराखंड संस्कृत रत्न की उपाधि से विभूषित डॉ. चंडीप्रसाद घिल्डियाल के अनुसार, प्रदोष काल 6.20 से 8.35 तक होलिका दहन का शुभ मुहुर्त रहा। होलिका पूजन कर लोग काम, क्रोध, मोह, मद, लोभ, मदसर जैसी बुराईयों पर विजय प्राप्त करने की मनोकामना करते है। बदलते मौसम व वातावरण में अनेक प्रकार की बुराईयों व बीमारियों का दहन को ही होलिका दहन कहा जाता है। बताया कि होलिका पूजन से लाभ मिलता है। सभी को होलिका पूजन कर अपनी बुराईयों पर विजय प्राप्त करने की ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिये।
खर्च का ब्यौरा नही देने पर नही मिलेगा चारधाम का बजट
ऋषिकेश।
गढ़वाल आयुक्त के दिशा-निर्देशन में इस वर्ष होने वाली चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। सभी जिलों के जिला प्रशासन ने बजट के लिए आयुक्त के पास प्रस्ताव भेजे हैं लेकिन गढ़वाल आयुक्त की डायरी में कुछ नगर पंचायत और पालिका प्रशासन ने अभी तक पिछले वर्ष के यात्रा बजट का ब्योरा नहीं दिया है। लिहाजा आयुक्त ने ऐसी पालिका और पंचायत प्रशासन को पिछले बजट का ब्योरा देने की शर्त पर नया बजट आवंटित करने का निर्णय लिया है। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा की तैयारियों के लिए पालिका और पंचायतों को लगभग तीन करोड़ रुपए का बजट आवंटित हुआ था जिसमें सभी ने पहले चरण में आवंटित बजट का ब्योरा तो दिया लेकिन दूसरे चरण का विवरण अभी तक नहीं दे पाए। आयुक्त के आदेश के बाद उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, दून, पौड़ी गढ़वाल के ज्यादातर पालिका और पंचायत प्रशासन ने ब्योरा देना शुरू कर दिया है।
चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। आयुक्त के आदेश पर पंचायत और पालिका प्रशासन से पिछले चारधाम यात्रा के बजट का ब्योरा मांगा जा रहा है। ज्यादातर पालिका और पंचायत प्रशासन ब्योरा जमा करा चुके हैं।
एके श्रीवास्तव, वैयक्तिक सहायक, गढ़वाल आयुक्त।
सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहर अपार …
महापर्व छठ: परिवार के सुख-समृद्धि को उठे हजारों हाथ
व्रतियों से अटे तीर्थनगरी के गंगा घाट

ऋषिकेश।
महापर्व छठ में तीर्थनगरी के गंगा घाटों में भीड़ उमड़ी। रविवार को छठ पर्व में निर्जला व्रत रख रहे महिला-पुरुष व्रतियों ने गंगा तट में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। सूर्य भगवान से अपनी मनोकामना पूरी करने के साथ सुख-समृद्धि व निरोगता का आशीर्वाद मांगा। मौके पर महिलाओं ने छठ के मंगल गीत गाये। मंगल गीतों से गंगा घाट गुंजयमान रहे।
रविवार को तीर्थनगरी में गंगा घाटों का नजारा देखने लायक रहा। छठ अनुष्ठान के तीसरे दिन छठी मैय्या की टोकरी (डाला) को सजाकर नंगे पांव अपने सिर पर रखकर बड़े उत्साह के साथ श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों का रुख किया। घर परिवार के लोग व्रतियों के साथ सज-सवंरकर गंगा घाट पहुंचे। श्रद्धालुओं ने संतान प्राप्ति, तो कुछ ने मनोकामना को लेकर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए षठ का व्रत रखा। रविवार को सूर्य भगवान के दिवस के रुप में मनाया जाता है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ गंगातट पर उमड़ी। त्रिवेणी घाट, चन्द्रेश्वरनगर, शीशमझाड़ी, स्वर्गाश्रम-लक्ष्मणझूला, वीरभद्र आदि क्षेत्रों के गंगा तटों पर छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। 
गंगा तट पर कई पुरुष व महिलाएं पारंपरिक परिधानों में नजर आये। पुरुष पीले रंग की धोती और महिलाएं लाल जोड़े में अधिक नजर आये। जैसे ही संध्या काल का समय हुआ तो श्रद्धालुओं ने सूर्य को भगवान की उपासना करनी शुरु कर दी। गंगा के निर्मल जल में उतरकर उन्होंने डूबते सूर्य को गंगा जल और दूध का अघ्र्य दिय्या। इस दौरान मंगल गीत से गंगा घाट गुंजयमान रहे। श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर छठ के मंगल गीत गाये। व्रती महिलाओं में अनिता देवी, जनक बाला झा, अनिता देवी, आराधना यादव ने बताया कि पिछले कई वर्षो से छठ का पर्व मना रही है। उनका मानना है कि भगवान सूर्य की रोशनी से पूरा विश्व उदयमान हो रहा है। इसलिए भगवान सूर्य की उपासना से परिवार में खुशहाली आती है।
गौरतलब है कि छठ पर्व के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को संध्या अर्घ्य कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु दिन में प्रसाद बनाते है। प्रसाद के रुप में ठेकुआ, जिसे कई स्थानों में टिकरी भी कहा जाता है, के अलावा चावल के लड्डू (लडुवा) बनाते है। इसके अलावा चढावा के रुप में सांचा और फल भी छठ प्रसाद के प्रसाद में शामिल होते है।

रातभर गंगा घाटों पर जमे रहे श्रद्धालु
छठ पर्व पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालु गंगा घाट पर ही जमे रहे। व्रती श्रद्धालु रातभर गंगा के पानी में रहे। किसी ने मनोकामना मांगी तो किसी ने मनोकामना पूरी होने पर अपना संकल्प पूरा किया। इस दौरान कई श्रद्धालु तो बैंड बाजों के साथ त्रिवेणीघाट पहुंचे। तो कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर लेट-लेट कर गंगा घाट तक पहुंचे।

बाजार में चहल कदमी बढी
तीर्थनगरी में रविवार को षठ पर्व के चलते बाजार में चहल कदमी रही। लोगों ने घर व परिवार के सदस्यों के लिए कपडों की खरीददारी की। गंगा घाटों में श्रद्धालुओं ने आतिशबाजी भी की। इस दौरान त्रिवेणी घाट का नजारा देखने लायक रहा। त्रिवेणी घाट को रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया था।
एसडीआरएफ को केदारघाटी में सर्च अभियान चलाने के निर्देश
देहरादून।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केदारनाथ घाटी क्षेत्र में नरकंकालों व अवशेषों को खोजने के लिए एसडीआरएफ को लगातार सघन सर्च आपरेशन चलाने के निर्देश दिए हैं। इसमें यदि कोई कंकाल मिलते हैं तो उनका डीएनए कराते हुए पूरे विधिविधान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। मुख्यमंत्री रावत ने संबंधित अधिकारियों के साथ काम्बिंग अभियान का ब्लू प्रिन्ट तैयार किया। एसडीआरएफ विभिन्न चरणों में सघन काम्बिंग करेगी। पहले 25 अक्टूबर तक केदारनाथ के विभिन्न ट्रेक रूटों पर सर्च आपरेशन संचालित किया जाएगा। केदारघाटी में नरकंकालों की खोज, डीएनए सेम्पलिंग व विधिवत अंत्येष्टि के लिए उपसेनानायक एसडीआरएफ प्रकाश चंद्र आर्य के नेतृत्व में केदारघाटी के सात ट्रेकिंग रूट पर टीमें सर्च आपरेशन संचालित करेंगी। इन सात ट्रेकिंग रूटों में 40 किमी का गरूड़चट्टी-देवविष्णु-गोमकारा-गौ रीगांव, 35 किमी का चैमासी-खाम-रामबाड़ा-केदारनाथ, 4 किमी का केदारनाथ-चैराबाड़ी ग्लेशियर, 20 किमी का कालीशिला-चैमासी-लिनचैली, 18 किमी का केदारनाथ-वासुकीताल-खतलिंग, 35 किमी का केदारनाथ-मनसी-रासी व 30 किमी का तोसी-पावा-वासुकीताल-त्रिजुगीना रायण शामिल हैं।

स्थानीय भौगोलिक परिवेश की जानकारी व पर्वतीय क्षेत्र में ट्रेकिंग में निपुणता होने के कारण माटा से 26, 27 व 28 अक्टूबर को स्थानीय लोगों के सहयोग से इन रूटों पर काम्बिंग करने का अनुरोध किया जाएगा। इस दौरान एसडीआरएफ की राफ्टिंग टीम द्वारा नदी के किनारों पर सर्च आपरेशन संचालित किया जाएगा। दीपावली के बाद नवम्बर माह में एक बार फिर एसडीआरएफ द्वारा केदारघाटी के विभिन्न क्षेत्रों में सघन काम्बिंग की जाएगी। इसके बाद बर्फ पिघलने के बाद फिर से इस काम्बिंग अभियान को जारी रखा जाएगा। बैठक में सचिव गृह व आयुक्त गढ़वाल मंडल विनोद शर्मा, पुलिस महानिदेशक एम.ए. गणपति, आईजी संजय गुन्ज्याल व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
पर्व और पर्यावरण एक दूसरे के पूरक: स्वामी चिदानन्द सरस्वती
प्रियंका ओबेराय ने बच्चों संग की गंगा आरती
मॉरीशस के पूर्व लोकसभा अध्यक्ष भी परमार्थ पहुंचे
ऋषिकेश।
फिल्म स्टार विवेक ओबेराय की धर्मपत्नी प्रियंका ओबेराय और दोनों बच्चे विनान वीर व ओम्या ओबेराय ने बुधवार को चिदानंद मुनि से आर्शीवाद प्राप्त किया। प्रियंका ओबेराय ने कहा कि परमार्थ आकर उन्हें अपार शान्ति का अनुभव होता है। गंगा आरती की दिव्यता उन्हें तीर्थनगरी की ओर लाती है।
बुधवार को परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि पर्व और पर्यावरण दोनों एक दूसरे के पूरक होते है। इसलिए दोनों का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। इसके अतिरिक्त महामंडलेश्वर स्वामी उमाकान्तानन्द सरस्वती, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मॉरीशस अजस सी देवी, गीतांजलि और भारत में मॉरीशस के राजदूत जगदीश गोबर्धन के परिवार के सदस्यों ने भी चिदानंद मुनि से मुलाकात की।
उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण, पवित्र नदियों, पेयजल एवं स्कूली बच्चों की स्वच्छता एवं स्वास्थ्य आदि विषयों पर चर्चा की। उन्होने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण एवं ग्लोबल वार्मिग की समस्यायें किसी एक राष्ट्र की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की एक वैश्विक स्तर की समस्या है। हमें हमारे प्रत्येक पर्व और उत्सवों को हरित संर्वधन के साथ मनाने होंगे। हरितिमा संर्वधन के प्रतीक के रूप में स्वामी ने एक पौधा भेंट किया।
दो लाख से अधिक यात्रियों ने की हेमकुंट साहिब की यात्रा
यात्रा सुखद निपटने पर सरकार का आभार जताया
ऋषिकेश।
हेमकुंट साहिब की यात्रा सुखद संपन्न होने पर गुरूद्वारा मैनेजमेंट ट्रस्ट ने सरकार का आभार प्रकट किया। ट्रस्ट से जुडे लोगों ने कहा कि सरकार ने यात्रियों के लिए यात्रा मार्ग पर सभी सुख सुविधाएं देने की व्यवस्था कराई। जिससे कि यात्रा निर्विघन संपन्न हुई।
हेमकुंट साहिब की यात्रा 15 अक्टूबर को कपाट बंद होने पर समाप्त हो गई। मंगलवार को गुरूद्वारा हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिन्द्रा ने कहा कि सरकार ने यात्राकाल के दौरान यात्रियों को सभी सुविधाएं मुहैया करवाई। जिसका ट्रस्ट सीएम हरीश रावत के प्रति आभार व्यक्त करता है। यात्रा में 2 लाख यात्री हेमकुंट साहिब में नतमस्तक हुए एवं सकुशल यात्राकर वापस लौटे। ट्रस्ट ने सभी यात्रियों के लिए रात्रि विश्राम, लंगर, स्वास्थ्य सेवा सुविधा आदि मुहैया करवाई। इसके अलावा उत्तराखण्ड सरकार एवं राज्य प्रशासन का भी यात्रा को सुखद एवं सुरक्षित बनाए रखने में अथक प्रयास रहा।

ट्रस्ट के प्रबंधक दर्शन सिंह ने बताया कि हेलीकॉप्टर सुविधा सेवा निरंतर यात्राकाल के दौरान चलती रही। जबकि गोबिंद घाट से गोबिंद धाम तक पैदल मार्ग पर सड़क बनने के कारण यात्रियों को करीब 4 किलोमीटर कम पैदल चलना पड़ा। जोकि सरकार का एक सराहनीय कदम रहा। उन्होंने बीआरओ, प्रशासनिक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारी, राज्य पुलिस आदि के प्रति भी यात्रा को निर्विघन संपन्न कराने में आभार व्यक्त किया है।
गंगा प्रदूषण के सचित्र तथ्य जुटाएगी एबीवीपी
एबीवीपी का स्वच्छता सर्वेक्षण एवं जनजागरण अभियान 19 से
गंगोत्री धाम से शुरू होगा अभियान, 27 अक्तूबर तक चलेगा
ऋषिकेश।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) गंगा स्वच्छता सर्वेक्षण एवं जनजागरण अभियान शुरू करने जा रही है। अभियान 19 अक्तूबर को गंगोत्री धाम से आरम्भ होगा, जिसमें एक टीम गंगा प्रदूषण के कारणों की पड़ताल करेगी। साथ ही इसके सचित्र तथ्य जुटाएगी।
अग्रवाल धर्मशाला में रविवार को आयोजित बैठक में गंगा स्वच्छता सर्वेक्षण एवं जनजागरण अभियान की रूपरेखा तैयार की गई। पदाधिकारियों ने बताया कि 19 से 27 अक्तूबर तक चलने वाले अभियान का श्रीगणेश गंगोत्री धाम में होगा। यात्रा मार्ग में जन-जन को गंगा की स्वच्छता के लिए प्रेरित और जागरूक किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य गंगा में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हो रहे प्रदूषण के सचित्र तथ्य जुटाना है।

एबीवीपी के गढ़वाल संभाग सप्रमुख रवि थपलियाल ने बताया कि अभियान यात्रा 24 अक्तूबर का परमार्थ निकेतन पहुंचेगी, जहां यात्रा में शामिल कार्यकर्ता गंगा आरती में हिस्सा होंगे। 25 अक्तूबर को सुबह परमार्थ निकेतन और आसपास के घाटों में स्वच्छता कार्यक्रम चलाया जाएगा। बैठक में एबीवीपी के प्रदेश सहमंत्री धीरेन्द्र कुमार सिंह, जिला सहसंयोजक अंकित पंवार, तहसील संयोजक विनोद चौहान, अभिषेक रावत, मोहत तिवारी, प्रभात उनियाल, शिवा बत्रा, नरेन्द्र गौतम, अमित गांधी, अमन सकलानी, शिखर मिश्रा, ऋषि जायसवाल, विकास चौहान, नेहा नेगी आदि उपस्थित थे।
अभियान पर तैयार होगी डॉक्यूमेंट्री
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से गंगा स्वच्छता सर्वेक्षण एवं जनजागरण अभियान के दौरान डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी तैयार की जाएगी। इसमें गंगा के महत्व, उसके असल सौंदर्य, उसमें प्रवाहित हो रही गंदगी और उसके कारण भी स्पष्ट दिखाए जाएंगे।
