सीडीएस परीक्षा में उत्तराखंड के विवेेक ने किया टॉप

उत्तराखंड कुमाऊ मंडल के पिथौरागढ़ जिले के एक युवा में देश की प्रतिष्ठित सीडीएस की परीक्षा में अव्वलता हासिल की है। पिथौरागढ़ के लेलू गांव निवासी विवेक थरकोटी की कंबाइंड डिफेंस सर्विस परीक्षा में सफलता हासिल करने पर गांव में खुशी का माहौल है। सभी अपने बच्चों को विवेक से प्रेरणा लेने को कह रहे है।

जिला मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर दूर लेलू गांव के रहने वाले विवेक थरकोटी ने इस वर्ष सीडीएस की परीक्षा में देश में अव्वलता हासिल की है। विवेक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वड्डा कस्बे के विश्व भारती पब्लिक स्कूल से हासिल की। बचपन से मेधावी विवेक ने एशियन एकेडमी स्कूल से आठवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद घोड़ाखाल सैनिक स्कूल में आगे की पढ़ाई की।

इंटरमीडिएट की पढ़ाई घोड़ाखाल से करने के बाद पिथौरागढ़ महाविद्यालय से बीएससी और एमए किया। इसके बाद विवेक थरकोटी ने सीडीएस परीक्षा में सफलता हासिल की। विवेक ने अपनी सफलता का श्रेय बैंक कर्मी पिता श्याम सिंह थरकोटी और शिक्षिका माता निर्मला थरकोटी सहित गुरूओं को दिया है। बता दें कि विवेक साहसिक खेलों में रूचि रखते है। स्कीइंग, रिवर राफ्टिंग, पर्वतारोहण जैसे साहसिक खेलों में रुचि रखने वाले विवेक ने नौवीं कक्षा के बाद ही सेना ज्वाइन करने का लक्ष्य तय कर लिया था और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में शानदार सफलता अर्जित की।

जनता की खुशहाली के लिये एकजुट होंगे भारत और नेपाल

भारत और नेपाल एक दूसरे के नागरिकों की खुशहाली और गरीबी दूर करने के लिये एकजुट होकर कार्य करेंगे। कृषि क्षेत्र में यह कार्य सार्थक सिद्ध होगा। यह बात नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पंतनगर विवि में कार्यक्रम के दौरान कही।

पंतनगर एयरपोट पर पहुंचने पर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का राज्यपाल केके पॉल व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुके देकर स्वागत किया। परंपरागत कुमाऊं के रीति रिवाज के तहत प्रधानमंत्री केपीएस ओली का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री के सम्मान में कलाकारों ने छोलिया नृत्य एयरपोर्ट पर प्रस्तुत किया। इसके उनका काफिला पंतनगर विवि के लिए रवाना हो गया।

ओली अपनी धर्मपत्नी राधिका शाक्य और नेपाल के 33 सदस्यीय दल के साथ उत्तराखंड दौरे पर आए हुए हैं। उनकी इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच कृषि तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ाना है। रविवार को गोविंद बल्लभ पंत कृषि विवि, पंतनगर के गांधी हॉल में राज्यपाल केके पाल ने उन्हें विज्ञान वारिधि की मानद उपाधि से सम्मानित किया।

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि हमारी धार्मिक आस्थाएं एक-दूसरे के साथ हैं। नेपाल की जनता भी भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहती है। पीएम ओली ने कहा कि नेपाल की दो तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, लेकिन आधुनिकीकरण एवं यांत्रिकीकरण में काफी पीछे हैं। हमारे दो कृषि विवि हैं, लेकिन वे अभी प्रारंभिक अवस्था में हैं। उन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए पंतनगर विवि का सहयोग लिया जाएगा।

जीबी पंत कृषि विवि के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यहां बहुत कुछ सीखने को है। बोले, विवि ने जो सम्मान उनको दिया, वह उनके लिए नई प्रेरणा का काम करेगा। उन्होंने कहा कि भारत ने जो पहल की है, नेपाल उसमें अपना पूरा योगदान देगा। इससे पहले ओली ने विवि के ब्रीडर सीड्स प्रोसेसिंग यूनिट और बीज अनुसंधान केंद्र का निरीक्षण किया।

राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने कहा कि नेपाल एवं उत्तराखंड इतिहास, संस्कृति, व्यापार के साथ-साथ अन्य बहुत सी समानताएं रखते हैं। चुनौतियां भी एक जैसी हैं तथा दोनों मिलकर अपने लोगों की बेहतरी, वातावरण सुरक्षा एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने नेपाल एवं उत्तराखंड की समान परिस्थितियों को देखते आपसी सहयोग के पांच बिंदुओं का उल्लेख किया।

बजट सत्र की तैयारियों को लेकर विस अध्यक्ष ने अधिकारियों की ली क्लास

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने भराड़ीसैण (गैरसैण) में 20 मार्च से शुरू होने जा रहे बजट सत्र हेतु व्यवस्थायें को लेकर उच्च अधिकारियों संग बैठक की। विधान सभा अध्यक्ष द्वारा सुरक्षा बैठक में विभिन्न विषयों पर गहनता से चर्चा की गयी।

इस वर्ष राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल का अभिभाषण भी भराड़ीसैंण में होना है, जिस कारण अभिभाषण हेतु राज्यपाल के आगमन व प्रस्थान के समय हैलिपैड से सम्बन्धित एवं सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गयी। राज्यपाल के आगमन के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा राज्यपाल का स्वागत किया जाना प्रस्तावित किया गया। इस बार ड्रोन कैमरे से सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जायेगी।

सुरक्षा बैठक के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने शान्ति व्यवस्था, अग्नि शमन दल एवं उससे सम्बन्धित व्यवस्था, बिजली की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ, वाटर सप्लाई के लिए सम्बन्धित अधिकारयों को निर्देश दिया कि व्यवस्थायें चौक-चौबन्ध होनी चाहिए। बैठक में सत्र के दौरान भराडीसैंण में उपस्थित सभी मंत्री, विधायक, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खाने की उचित व्यवस्था पर भी जोर दिया गया।

अग्रवाल ने बीएसएनएल के अधिकारयों को पिछले सत्र में नेटवर्क एवं इण्टरनेट की भारी समस्या को लेकर जमकर फटकार भी लगायी। विधानसभा अध्यक्ष ने बीएसएनएल के अधिकारयों को साफ शब्दों में कहा कि इस बार ऐसी कोई भी कमी न रहे, जिससे मीडिया एवं शासकीय कार्यवाही में कोई दिक्कत हो। अग्रवाल ने कहा कि यदि नेटवर्क एवं वाई-फाई की व्यवस्था अच्छी होगी तो सदन के कार्यो मे विभाग एवं शासन जिलों एवं सचिवालय से वीडियों कॉन्फ्रेसिंग के जरिये तुरन्त सम्पर्क साध कर सदन की कार्यवाही में तीव्रता ला सकते है।

विधान सभा अध्यक्ष ने बताया कि विधायकों एवं मंत्रियों के रहने के लिए विधानसभा भवन भराणीसैण में 60 कमरे एवं 14 ऑफिसर रूम पूर्ण रूप से तैयार है। अधिकारी, स्टाफ तथा मीडिया के लिए गैरसैण, कर्णप्रयाग, आदिबद्री, गौचर तथा कालेश्वर के गढ़वाल मण्डल विकास के गैस्ट हाउस एवं लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग के गैस्ट हाउस को जिलाधिकारी स्तर से रोक दिया गया है।

विधान सभा अध्यक्ष ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देते हुए कहा डाक्टर की विधिवत व्यवस्था, सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो को अलर्ट रखने पर जोर दिया गया। साथ ही इमरजेन्सी के लिए स्वास्थ्य मोबाइल बैन 108 की उचित व्यवस्था तथा हैलीकाप्टर सेवा की बात कही गयी। अस्थायी एवं मोबाइल टोयलेट की व्यवस्था को गम्भीरता से लिया गया।

विस अध्यक्ष ने कहा कि इस बार का सत्र चुनौती भरा है, क्योंकि इस बार राज्यपाल प्रथम बार भराडीसैंण आ रहे है और इस बार सत्र भी सबसे लम्बा चलने वाला है। अग्रवाल ने सभी अधिकारियों से सहयोग की बात कही तथा बैठक में जिन भी विषयों पर विर्मश किया गया। उन्हें जमीन स्तर पर सार्थक बनाने के लिए कहा।

काठगोदाम में युवती ने किया दो महिला का यौन उत्पीड़न, सेक्स टॉय से बनाये संबंध

युवक ने युवतियों का यौन उत्पीड़न किया, यह आपने अक्सर सुना होगा। मगर, एक युवती पुरूष का वेष धर महिलाओं से शादी कर उनका यौन शोषण करे। यह शायद ही आपने सुना हो। ताजा मामला उत्तराखंड के काठगोदाम का है, जहां एक युवती ने पुरुष बनकर दो महिलाओं से शादी रचा ली। दोनों महिलाओं के साथ तीन साल तक मियां-बीवी की तरह रही। हैरानी की बात यह है कि इन दोनों महिलाओं को भनक तक नहीं लगी कि उनके साथ पति के रूप में कोई महिला रह रही है। आखिर सच सामने आ ही जाता है, पुरुष बनी महिला का भंडाफोड़ हो गया।

जानकारी के मुताबिक, यूपी के बिजनौर के धामपुर की रहने वाली स्वीटी ऊर्फ कृष्णा सेन ने साल 2013 में फेसबुक के जरिए एक लड़की से दोस्ती कर ली। कुछ दिनों बाद काठगोदाम की रहने वाली उस लड़की को प्रेम जाल में फांसकर उसने शादी कर ली। दोनों हल्द्वानी में किराये के एक मकान में रहने लगे, लेकिन शादी के बाद से ही दोनों के बीच झगड़ा होने लगा।

पहली शादी के करीब तीन साल बाद कृष्णा सेन ने एक दूसरी लड़की से शादी कर ली। दोनों बीवीओं को एक ही घर में साथ रखने लगा। इसके कुछ दिन बाद पहली पत्नी ने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाकर केस दर्ज करा दिया। पुलिस ने तलाशी के बाद आरोपी पति को हिरासत में लिया। जेल में पूछताछ के दौरान जो राज खुला, सभी भौंचक्के रह गए।

आरोप कृष्णा सेन ने पुलिस को बताया कि वह महिला है। ऐसे में वह किसी महिला से ही कैसे शादी कर सकता है। इसके बाद पुलिस ने उसकी मेडिकल जांच कराई, तो इस बात की पुष्टि हो गई कि वह महिला ही है, लेकिन पुलिस भी इस बात से हैरान थी कि तीन साल तक दो महिलाओं के साथ वह कैसे रही और किस तरह उनसे शारीरिक संबंध बनाए।

पुलिस पूछताछ में स्वीटी ऊर्फ कृष्णा सेन ने बताया कि उसने ऑनलाइन साइट से सेक्स टॉय मंगाए थे। रात को कमरे में अंधेरा करने के बाद सेक्स टॉयज के जरिए वह महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बनाती थी। वह कभी उनके सामने न तो कपड़े बदलती, न ही नहाने के बाद बिना कपड़े के बाहर आती थी। पुरुषों के सारे व्यवहार करती थी।

पुलिस ने बताया कि आरोपी स्वीटी ऊर्फ कृष्णा सेन के खिलाफ केस दर्ज करके जेल भेज दिया गया है। युवती ने जालसाली के साथ ही दोनों महिलाओं के साथ ठगी भी की है। उनका यौन उत्पीड़न किया है। यहां तक की उसने सारे दस्तावेज भी पुरुष के तौर पर फर्जी बनाए हुए हैं। इन दस्तावेजों को जब्त करके उसके खिलाफ जांच की जा रही है।

केंद्र सरकार की योजना, राज्य की बड़ी झीलों पर लैंडिग हो सीप्लेन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भेंट कर चारधाम ऑल वैदर रोड की प्रगति पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने रामनगर-कर्णप्रयाग राज्य राजमार्ग सहित प्रदेश के कुछ राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग में परिवर्तित करने का अनुरोध भी किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि ऑल वैदर रोड के निर्माण कार्य प्रगति पर है। केन्द्र सरकार से संसाधनों के विकास के लिये धनराशि आदि के लिये पूर्ण सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने गडकरी से उत्तराखण्ड में भी सीप्लेन योजना संचालित करने पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य में केन्द्र के सहयोग से टिहरी, नैनीताल की झीलों तथा प्रमुख नदियों में सीप्लेन योजना की शुरूआत की जा सकती है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण में किसानों को मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज पर भी सकारात्मक चर्चाएं हुई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र की केन्द्रीय मंत्री जो कि जल संसाधन, नदी विकास मंत्री भी हैं, से राज्य में संचालित नमामि गंगे योजना के साथ लखवाडब्यासी सहित अन्य जल विद्युत परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि लखवाड़ब्यासी परियोजना, किसाऊ बांध परियोजना के लिए भी केन्द्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री से वार्ता के दौरान उत्तराखण्ड की 33 जल विद्युत परियोजनाओं पर व्यापक चर्चा की गई। इस सम्बंध में ऊर्जा, जल संसाधन एवं वन मंत्रालय तीनों विभागों द्वारा मिलकर राज्य हित में सकारात्मक परिणाम देने का केन्द्रीय मंत्री द्वारा आश्वासन दिया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने अनुरोध किया कि आर्थिक मामलो की कैबिनेट कमेटी से लखवाड़ बहुउदेश्यीय परियोजना को शीघ्र सहमति प्रदान की जाय। उन्होंने कहा कि अलकनन्दा तथा भागीरथी नदियों पर 70 में से 33 जल विद्युत परियोजनाएं, जिनकी कुल क्षमता 4060 मेगावाट तथा लागत 41,000 करोड़ रूपये है, एन.जी.आर.बी.ए., ईकोसेंसटिव जोन तथा मा.उच्चतम न्यायालय के निर्देशो के क्रम में बन्द पड़ी है।
चमोली की 300 मेगावाट की बावला नन्दप्रयाग जल विद्युत परियोजना के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को बताया कि इस परियोजना से संबंधित डीपीआर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के समक्ष अनुमोदन हेतु लम्बित है, क्योंकि जल संसाधन मंत्रालय द्वारा इन्वार्यमेन्टल फ्लों का अभी अध्ययन नहीं किया गया है। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की अपेक्षा की। केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने मुख्यमंत्री को राज्य की लम्बित परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की योजना है कि उत्तराखण्ड समेत हिमालय क्षेत्र में जो बड़ी झीले हैं, वहां सीप्लेन की लैंडिंग की जाय। उन्होंने कहा है कि सीप्लेन एक फीट पानी तथा सड़क में भी उतर सकता है। आने वाले समय में यह बहुत सस्ता ट्रांसपोर्ट का माध्यम बनने जा रहा है। अमेरिका, कनाडा, जापान की तर्ज पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहयोग से इसके लिए नियम बनाये जा रहे है।

राज्य के दोनों मंडलों पर सरकार खोलेगी सैन्य प्रशिक्षण केंद्र

राज्य के युवाओं को सैन्य बलों की भर्ती परीक्षाओं हेतु प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये राज्य सरकार कुमाऊं और गढ़वाल में दो प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करेगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और सेना के बैंगलोर सिलेक्शन सेंटर के कमाण्डेंट मे.ज. वी.पी.एस. भाकुनी की मुलाकात के दौरान लिया गया।
मे.ज. भाकुनी ने मुख्यमंत्री के समक्ष एक प्रस्तुतिकरण दिया जिसमें बताया गया कि वर्तमान में एनडीए और सीडीएस परीक्षाओं की सफलता दर आईएएस परीक्षा से भी कम है। सिविल सेवाओं के मुकाबले लगभग डेढ़ गुना अधिक अभ्यर्थी एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं में आवेदन करते हैं, लेकिन सेना में भर्ती हेतु समग्र व्यक्तित्व परीक्षण के कड़े मानको के कारण उनकी सफलता दर कम होती है। सेना और अर्द्वसैनिक बलों में राज्य के युवाओं का अधिकारी पद पर चयन प्रतिशत बढ़ाने के लिये उनको पहले से तैयार किया जाना जरूरी है। इसके लिये युवाओं का स्तरीय मानको के अनुरूप पर्सनालिटी डेवलपमेंट कार्यक्रम तथा साक्षात्कार प्रशिक्षण आयोजित किया जाना लाभप्रद होगा। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि वीरभूमि उत्तराखण्ड एक सैनिक बाहुल्य राज्य है और यहां के युवाओं में सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान कर एनडीए और सीडीएस परीक्षाओं में उनकी सफलता का प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही इस प्रकार की व्यक्तित्व विकास की कार्यशालाएं सिर्फ सैन्य सेवाएं ही नहीं वरन अन्य सरकारी सेवाओं और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भी युवाओं के लिये लाभप्रद होगी। बैठक में तय हुआ कि प्रथम चरण में कुमाऊं और गढ़वाल में प्रशिक्षण कार्याशालाएं (ट्रेनिंग वर्कशॉप) ऐसे स्कूल व कॉलेज के भवनों में संचालित होगी, जहां पर्याप्त अवस्थापना सुविधाएं हो। ये कार्यशालाएं 02 से 03 सप्ताह की होगी जहां युवाओं को एनडीए और सीडीएस की चयन प्रक्रिया के अनुरूप व्यक्तित्व विकास, साक्षात्कार एवं अन्य शारीरिक परीक्षणों के लिये प्रशिक्षण दिया जायेगा। सैनिक कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग से समन्वय कर प्रशिक्षण कार्यशालाओं हेतु स्थायी केन्द्र के रूप में स्कूल या कॉलेज के भवन चयनित करेंगे। जहां नियमित पठनपाठन के साथ-साथ कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा सके। मे.ज.भाकुनी के अनुसार पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने पर प्रति वर्ष दस हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया जा सकता है। द्वितीय चरण में 11वीं व 12वीं के छात्र-छात्राओं के लिये राज्य सरकार द्वारा स्थायी सैनिक स्कूल खोलने पर भी विचार किया जा सकता है।

सीएम ने आईपीएस की कविता “ख्वाबों के खत“ का किया विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में तृप्ति भट्ट द्वारा रचित “ख्वाबों के खत“ नामक कविता संकलन का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रख्यात कवि डॉ.हरिओम पंवार, प्रख्यात अदाकारा और कलाकार शबाना आजमी, कवि असीम शुक्ल और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी भी उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि तृप्ति भट्ट एक आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में चमोली जनपद की पुलिस अधीक्षक भी हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तृप्ति भट्ट की सराहना की कि एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने व्यस्त दिनचर्या के बीच भी वे लेखन और कला के लिए समय निकालती हैं। उन्होंने कहा कि लेखन सदैव ही मानवीय संवेदनाओं को स्पर्श करता है और एक पुलिस अधिकारी के रूप में लेखन करना यह दर्शाता है कि अधिकारी एक संवेदनशील अधिकारी है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई द्वारा पुस्तक विमोचन के कुछ संस्मरणों को भी सुनाया। डॉ.हरिओम पंवार ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारी एक कवि है तो उसके हाथों कभी अन्याय नहीं हो सकता और ऐसा अधिकारी कभी किसी दुर्बल को नहीं सताएगा। शबाना आजमी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भट्ट के कविता लेखन की सराहना की और जिस प्रकार से कविता संकलन में विभिन्न विषयों को स्पर्श किया गया है उसकी प्रशंसा भी की। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र की एकरसता से बचाने और अपनी आत्मा पर से धूल झाड़ने के लिए कला से बेहतर कोई मौका नहीं मिलता। उन्होंने एसपी तृप्ति भट्ट की प्रशंसा की थी। उन्होंने अपने कैरियर के बहुत प्रारंभिक चरण में ही अपने कार्य के साथसाथ लेखन के क्षेत्र को भी चुना है।

जाने, गूगल किसकी जयंती मना रहा है?

उत्तराखंड के नैन सिंह को गूगल ने श्रद्धांजलि दी है। गूगल ने डूडल के जरिये उनके कार्य को सराह रहा है। रायल ज्योग्रेफिकल सोसायटी एवं सर्वे ऑफ इंडिया के लिए पं. नैन सिंह रावत भीष्म पितामह के रूप में माने जाते हैं। कहते हैं नैन सिंह रावत ही दुनिया के पहले शख्स थे जिन्होंने लहासा की समुद्र तल से ऊंचाई कितनी है, बताई। उन्होंने अक्षांश और देशांतर क्या हैं, बताया। इस दौरान करीब 800 किमी तक पैदल यात्रा की और दुनिया को ये भी बताया कि ब्रह्मपुत्र और स्वांग एक ही नदी है।

भारत चीन सीमा पर स्थित मुनस्यारी तहसील के अंतिम गांव मिलम निवासी पं. नैन सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1830 को अमर सिंह मिलव्वाल के घर हुआ था। यह परिवार सामान्य परिवार था। अलबत्ता नैन सिंह के दादा धाम सिंह रावत को कुमाऊं के राजा दीप चंद ने 1735 में गोलमा और कोटल गांव जागीर में बख्शे थे। पं. नैन सिंह रावत की शिक्षा प्राथमिक स्तर तक ही हुई थी। बाद में इसी विद्यालय में वह शिक्षक हो गए थे। शिक्षक बनने पर उन्हें लोगों ने पंडित की उपाधि दे दी। उन्हें इसी नाम से जाना जाता है। इनके चचेरे भाई स्व. किशन सिंह रावत भी शिक्षक थे। दोनों भाइयों को पंडित की उपाधि मिली थी।
पं. नैन सिंह रावत ने अपने जीवन में उपलब्धि वर्ष 1955-56 से प्रारंभ की। लाघ -इट-वाइट बंधुओं के साथ दुभाषिए तथा सर्वेक्षक के रूप में तुर्किस्तान की यात्रा कर चुके थे। तिब्बती भाषा का ज्ञान और इनकी कार्यकुशलता से प्रभावित जर्मन बंधु इन्हें अपने साथ यूरोप ले जाना चाहते थे। नैन सिंह रावत रावलपिंडी तक तो पहुंचे परंतु अपनी माटी की याद आते ही वापस लौट आए। वर्ष 1863 में उन्हें देहरादून बुलाया, जहां पर सुपरिडेंटेंट कर्नल जेटी वाकर द्वारा ग्रेट ट्रिग्नोमेट्रिक सर्वे में एक अन्वेषक के रूप में की गई और उन्हें भारतीय सीमा के बाहरी क्षेत्रों में कार्य करने के लिए टापोग्राफिकल आवजर्वेशन का प्रशिक्षण दिया गया।
भ्रमण करने का था शौक
बिट्रिश भारत के दौरान अंग्रेजों ने गुप्त रूप से तिब्बत और रूस के दक्षिणी भाग का सर्वेक्षण की योजना बनाई। इस कार्य के लिए अंग्रेजों को पं. नैन सिंह रावत का नाम सुझाया। अंग्रेजों ने उन्हें नाप जोख का कार्य सौंपा। उन्हें ब्रह्मपुत्र घाटी से लेकर यारकंद इलाके तक की नाप जोख करनी थी। इस कार्य के लिए उनके भाई किशन सिंह रावत और पांच लोग शामिल किए गए। यह कार्य गुप्त होने से नाप जोख खुले आम नहीं कर सकते थे।

पंडित नैन सिंह द्वारा वर्ष 1865 से 1885 के मध्य लिखे गए यात्रा वर्णन में हिमालय तिब्बत तथा मध्य एशिया की तत्कालीन भाषा के साथ अनेक एशिसाई समाजों की दुलर्भ झलक मिलती है। इस दौरान उन्होंने 1865-66 में काठमांडू-ल्हासा-मानसरोवर, 1967 सतलज सिंधु उद्गम व थेक जालुंग, 1870 डगलस फोरसिथ का पहला यारकंद-काशगर मिशन, 1873 डगलस फोरसिथ का दूसरा यारकंद-काशगर मिशन, 1874-75 लेह-ल्हासा, तवांग थी।
पं. नैन सिंह रावत द्वारा तीन पुस्तकें ठोक-ज्यालुंग की यात्रा, यारकंद यात्रा और अक्षांस दर्पण पुस्तकें 1871 से 73 के मध्य प्रकाशित हुई थी। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी जीवनी भी लिखी थी, लेकिन वह खो गई। तिब्बत की राजधानी ल्हासा का इसमें सुंदर वर्णन था। वर्ष 1890 में उनका देहांत हो गया।
कम्पेनियन इंडियन इम्पायर अवार्ड से हुए थे सम्मानित
1200 मील पैदल चल कर सर्वे करने वाले पं. नैन सिंह रावत को अंग्रेजी हुकूमत ने कोलकाता में सीआईएस (काम्पेनियन इंडियर अवार्ड) से सम्मानित किया था। तब एक भारतीय को अंग्रेजों द्वारा इतने बड़े सम्मान से सम्मानित किए जाने पर कोलकाता में जश्न मना था। भारतीयों ने इसका स्वागत अपने घरों में घी के दीये जलाकर किया था।
आज गूगल नैन सिंह की जयंती मना रहा है
सर्च इंजन गूगल ने नैन सिंह रावत का डूडल बनाया है, जिन्हें बिना किसी आधुनिक उपकरण के पूरे तिब्बत का नक्शा तैयार करने का श्रेय जाता है। कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत के लोग भी उनका नाम पूरे सम्मान के साथ लेते थे। उस समय तिबब्त में किसी विदेशी शख्स के जाने पर सख्त मनाही थी। अगर कोई चोरी छिपे तिब्बत पहुंच भी जाए तो पकड़े जाने पर उसे मौत तक की सजा दी सकती थी। ऐसे में स्थानीय निवासी नैन सिंह रावत अपने भाई के साथ रस्सी, थर्मामीटर और कंपस लेकर पूरा तिब्बत नाप आए। दरअसल 19वीं शताब्दी में अंग्रेज भारत का नक्शा तैयार कर रहे थे लेकिन तिब्बत का नक्शा बनाने में उन्हें परेशानी आ रही थी। तब उन्होंने किसी भारतीय नागरिक को ही वहां भेजने की योजना बनाई। जिसपर साल 1863 में अंग्रेज सरकार को दो ऐसे लोग मिल गए जो तिब्बत जान के लिए तैयार हो गए।

त्रिवेन्द्र बोले पीएम का लक्ष्य किसानों की आय दुगना करना

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पंतनगर विश्वविद्यालय के गांधी हाल में 102वें अखिल भारतीय किसान मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि वैज्ञानिकों को राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की ओर भी ध्यान देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसानों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने वैज्ञानिकों से खेती की नई और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने को कहा। उन्होंने ऐरोमैटिक प्लांट्स की खेती की विश्व स्तर पर बढ़ती मांग को देखते हुए कहा कि इन पौधों की खेती की उन्नत तकनीकें किसानों को सुलभ कराने पर बल दिया जाए। छोटे स्तर पर पॉलिहाऊस में बेमौसमी खेती की भी उन्होंने आवश्यकता जतायी। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के किसानों की आय को बढ़ाने हेतु उपाय किये जाने एवं पर्वतीय क्षेत्रों से युवाओं के पलायन को रोकने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार पर ध्यान देने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषको को 01 लाख तक का ऋण 02 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तराई बीज निगम की साख को पहले की तरह लाने के लिए बुद्धिजीवियो व वैज्ञानिको के सुझाव लिये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने मेले में लगाई गई उद्यान प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खेती में अभिनव प्रयोग करने और उल्लेखनीय सफलता के लिए राज्य के विभिन्न जनपदों से चुने गये 09 प्रगतिशील कृषकों को प्रतीक चिन्ह् व प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले किसानों में प्रदीप रस्तोगी, ग्राम भोगपुर, जिला उधमसिंह नगर, सुनील कुमार, ग्राम थिथकी कवादपुर, जिला हरिद्वार, नरेन्द्र गोबाड़ी, ग्राम भटेरी, जिला पिथौरागढ़, खुशाल सिंह, ग्राम मुंदोली, जिला चमोली, नरेन्द्र सिंह मेहरा, ग्राम देवली मल्ला, जिला नैनीताल, परवीन कुमार, ग्राम शाहपुरकल्यानपुर, जिला देहरादून, महेश चन्द्र काण्डपाल, ग्राम कोटयूडा, जिला अल्मोड़ा, पंकज तिवारी, ग्राम अथखण्डी, जिला चम्पावत एवं रंजना रावत, ग्राम भीरी (ऊखीमठ), जिला रूद्रप्रयाग सम्मिलित थे। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.ए.के.मिश्रा ने कहा कि कृषि लागत में कमी एवं कृषि उत्पादकता में वृद्वि के द्वारा किसानों की आय दोगुना करने के लिए विश्वविद्यालय प्रयासरत है। उन्होंने बताया की वर्ष में दो बार आयोजित होने वाले विश्वविद्यालय के किसान मेले में हजारों की संख्या में किसान भाग लेते हैं, जो उत्तराखण्ड के अतिरिक्त विभिन्न प्रदेशों व नेपाल से भी आते हैं। उन्होंने किसानों को फलों एवं सब्जियों, जिनको अधिक समय तक भण्डारित नहीं किया जा सकता, के मूल्यवर्धित उत्पाद बनाये जाने की सलाह दी, जिससे उनकी आय में वृद्वि हो सके। साथ ही कृषि अधारित व्यवसाय, जैसे मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, मुर्गी पालन, पशुपालन, मछली पालन, इत्यादि को अपनाये जाने को कहा।

अंग्रेजों के जमाने की कंडी रोड होगी पहली ग्रीन रोडः हरक

कबीना मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने भाजपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों को आपस में जोड़ने वाली कंडी रोड को अब सरकार ग्रीन रोड के रूप में विकसित करने जा रही है। इसका जिम्मा इको टूरिज्म कारपोरेशन को सौंप दिया गया है।
डा. रावत ने यह दावा किया है कि ग्रीन रोड कांसेप्ट की देश की यह पहली सड़क होगी। हालांकि पिछले साल नवंबर में हरियाणा के पटौदी में ग्रीन रोड का शिलान्यास हो चुका है।
डॉ. रावत ने कहा कि राजाजी और कार्बेट नेशनल पार्क से गुजरने वाले इस वन मार्ग (कंडी रोड) को केंद्र सरकार के ग्रीन रोड कांसेप्ट में शामिल किया गया है। जल्द ही इस प्रस्ताव को स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड से पास कराने के बाद नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड में ले जाया जाएगा। उम्मीद जताई कि जल्द ही इस प्रक्रिया को पूरा करा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले माह से इस सड़क का सर्वे प्रारंभ हो जाएगा। इसके लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर दी गई है।
बता दें कि वन विभाग के अधीन कंडी रोड को आम यातायात के लिए खोलने की मांग पिछले तीन दशक से अधिक समय से चली आ रही है। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही कंडी रोड रामनगर से कालागढ़, कोटद्वार व लालढांग (हरिद्वार) को सीधे जोड़ती है।
इस सड़क के बन जाने पर यह राज्य के दोनों मंडलों गढ़वाल व कुमाऊं को राज्य के भीतर ही सीधे जोड़ेगी। वर्तमान में ऐसा कोई मार्ग न होने के कारण उप्र के बिजनौर क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में समय के साथ ही टैक्स के रूप में धन की हानि भी उठानी पड़ती है।
हालांकि, कंडी रोड को खोलने के लिए कसरत लंबे समय से चल रही है, लेकिन वन एवं वन्यजीवों से संबंधित कानून इसके आड़े आते रहे हैं। पूर्ववर्ती खंडूड़ी सरकार के कार्यकाल में भी इस मार्ग के लिए बाकायदा धन भी स्वीकृत हुआ, लेकिन वन कानूनों की अड़चन दीवार बनकर खड़ी हो गई। नतीजतन, मामला लटक गया। अब फिर से राज्य में भाजपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी इस सड़क को अपनी पहली प्राथमिकता बताया।
ग्रीन रोड में सड़क निर्माण की इस तकनीक में सड़क बनाते समय इसमें तारकोल समेत दूसरे प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों का प्रयोग नहीं किया जाता। सीमेंट अथवा लकड़ी के बीम जमीन में बिछाकर बाकी हिस्से को मिट्टी और रेत से तैयार किया जाता है।