देश की सबसे लंबी सुरंग कहलायेगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन

ऋषिकेश एशिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क भारतीय रेलवे के खाते में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के साथ ही एक उपलब्धि और जुड़ जाएगी। प्रस्तावित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर देश में अब तक की सबसे लंबी सुरंग बनने जा रही है। जिसकी लंबाई 15 किलोमीटर होगी। अभी तक भारतीय रेलवे जम्मू-कश्मीर में ही सबसे लंबी रेल सुरंग बना पाया है, जो सवा ग्यारह किलोमीटर लंबी है।
भारतीय रेलवे की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अपने आप में कई मायनों में अनूठी है। 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर कुल 16 सुरंगें और 16 पुल बनने हैं। बड़ी बात यह कि इस रेल लाइन पर देश में अब तक की सबसे लंबी सुरंग बनने जा रही है। जिसकी लंबाई 15.100 किलोमीटर होगी। देश में अब तक सबसे लंबी रेल सुरंग उत्तर रेलवे ने जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2013 में तैयार की थी। जबकि, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की बात करें तो यहां प्रस्तावित 16 सुरंगों में से पांच सुरंग नौ किलोमीटर से भी लंबी हैं। इसके अलावा छह सुरंगें छह से नौ किलोमीटर तक लंबाई की हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर इसी वर्ष नंवबर-दिसंबर में काम शुरू होने की उम्मीद है।

छह किमी से लंबी सुरंग में बनेगी निकासी सुरंग
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की एक और खासियत यह है कि इस पर रेल सिर्फ 20 किलोमीटर का सफर ही खुले आसमान के नीचे तय करेगी। बाकी रेल लाइन का 105 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इस रेल लाइन पर छह किलोमीटर व इससे अधिक लंबाई की प्रत्येक सुरंग पर एक निकासी सुरंग भी बनाई जाएगी। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच प्रस्तावित 18 सुरंगों में से 11 सुरंगों की लंबाई छह किलोमीटर से अधिक है। इन सभी के साथ निकासी सुरंगें बनाई जानी हैं, जो आपात स्थिति में काम आएंगी।

रेल यात्रियों को महसूस नहीं होगी घुटन
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर जब यात्री 105 किलोमीटर का सफर 18 सुरंगों से तय करेंगे तो यहां उन्हें किसी भी तरह की घुटन महसूस नहीं होगी। रेल विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश मालगुड़ी ने बताया कि इन सुरंगों में वेंटीलेशन की पर्याप्त व्यवस्था होगी। वेंटीलेशन सिस्टम पूरी तरह से आधुनिक व तकनीकी से लैस होगा। प्रत्येक सुरंग का डायमीटर आठ से दस फीट का होगा।

देश की सबसे लंबी पांच रेल सुरंग
टनल का नाम-जगह-लंबाई
पिर पंजल-जम्मू कश्मीर-11.215 किमी
करबड़े-महाराष्ट्र-6.506 किमी
नाथूवाड़ी-महाराष्ट्र-4.389 किमी
टाइक-महाराष्ट्र-4.077 किमी
बर्डेवाड़ी-महाराष्ट्र-4.000 किमी

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर प्रस्तावित सुरंग
ढालवाला से शिवपुरी-10.850 किमी
शिवपुरी से गूलर-6.470 किमी
गूलर से व्यासी-6.720 किमी
व्यासी से कौड़ियाला-2.200 किमी
कौड़ियाला से बागेश्वर-9.760 किमी
राजचौरा से पौड़ी नाला-220 मीटर
पौड़ी नाला से सौड़ (देवप्रयाग)-1.230 किमी
सौड़ से जनासू-15.100 किमी
लछमोली से मलेथा-2.800 किमी
मलेथा से नैथाणा (श्रीनगर)-4.120 किमी
श्रीनगर से परासू (धारी)-9.000 किमी
परासू से नरकोट-7.080 किमी
नरकोट से तिलनी-9.420 किमी
तिलनी से घोलतीर-6.460 किमी
घोलतीर से गोचर-7.160 किमी
रानो से सिवई-6.400 किमी

सुरंगों के लिए हो चुका भूगर्भीय सर्वेक्षण
रेल विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ओम प्रकाश मालगुड़ी ने बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर 18 सुरंगों के लिए भूगर्भीय सर्वेक्षण हो चुका है। सुरंग निर्माण के लिए टीबीएम (टनल बोङ्क्षरग मशीन) व एनएटीएम (न्यू आस्ट्रीयन टनलिंग मैथड) से काम किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में अब तक की सबसे बड़ी रेल सुरंग का निर्माण करने वाले इंजीनियर व विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है।

भाजपा की बढ़ी परेशानी, कैसे एडजस्ट होंगे भाजपा विधायक

राज्य सरकारों की ओर से संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रदेश भाजपा सरकार के साथ ही पार्टी विधायकों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं। इस निर्णय से सरकार के सामने अब विधायकों को सत्ता में एडजस्ट करने की चुनौती आ खड़ी हुई है तो सरकार में ओहदा पाने के अरमान पाले विधायकों को भी झटका लगा है।
प्रदेश में भाजपा भारी बहुमत से सत्ता में आई है। इस बहुमत के साथ ही भाजपा के सामने कई चुनौतियां भी आई हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती सभी पार्टी विधायकों को उचित सम्मान और सत्ता में हिस्सेदारी देने की भी है। प्रदेश में सरकार बनाने के बाद भाजपा ने क्षेत्रीय व जातीय संतुलन साधते हुए मंत्रिमंडल की संख्या अभी फिलहाल दस तक ही सीमित रखी है।
मंत्रिमंडल में अभी दो पद रिक्त चल रहे हैं। संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक उत्तराखंड में अधिकतम बारह सदस्यीय मंत्रिमंडल हो सकता है। मंत्रिमंडल के इन दो रिक्त पदों पर कई वरिष्ठ विधायकों को दावा है। इनमें लगभग आधा दर्जन विधायक ऐसे भी हैं जो पूर्व में मंत्री रह चुके हैं। गाहे-बगाहे ये विधायक अप्रत्यक्ष तौर पर वरिष्ठता के नाते रिक्त मंत्री पदों पर अपना दावा जताने से चूकते भी नहीं हैं।
विधायकों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण फिलहाल सरकार और मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल के दो पदों को भरने के मामले में चुप्पी ही साधे हुए हैं। हालांकि, निकट भविष्य में इन पदों का भरना तय है। माना जा रहा था कि मंत्रिमंडल के रिक्त पदों को भरने के बाद भाजपा बड़ी संख्या में वरिष्ठ विधायकों का मान सम्मान रखने के लिए उनकी संसदीय सचिवों के रूप में तैनाती कर सकती है।
दरअसल, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी इस परिपाटी के मुताबिक संसदीय सचिवों की तैनाती की थी। कांग्रेस ने सरकार में उठ रहे विरोधी स्वरों को शांत करने के लिए सात विधायकों को संसदीय सचिव का दायित्व दिया था। इन्हें कैबिनेट मंत्रियों जैसे अधिकार तो नहीं थे लेकिन इन्हें सभी सुविधाएं कैबिनेट मंत्रियों समान दी गई थी।
मौजूदा सरकार में भी माना जा रहा था कि आने वाले समय में भाजपा इसी परिपाटी को आगे बढ़ा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई व्यवस्था के बाद संसदीय सचिव बनाने की परंपरा भी समाप्त हो गई है। इससे सरकार के सामने विधायकों को एडजस्ट करने की चुनौती बढ़ गई है।

आधार लिंक नही कराने पर एक अगस्त ने राशन नही

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की नई व्यवस्था के तहत एक अगस्त से सिर्फ उन्हीं उपभोक्ताओं को खाद्यान्न आवंटित किया जाएगा, जिन्होंने अपना आधार कार्ड राशन कार्ड से लिंक करा लिया है। फिलहाल विभाग आधार न देने वाले उपभोक्ताओं का राशन अपने पास रखेगा और यदि उपभोक्ता जल्द आधार कार्ड जमा कराते हैं तो उन्हें राशन आवंटित कर दिया जाएगा।
आपूर्ति विभाग पिछले दो साल से राशन कार्ड को आधार से लिंक करने की तैयारी कर रहा है। अब शासन से निर्देश जारी होने के बाद विभाग ने इसे अनिवार्य रूप से लागू कर दिया है। उपभोक्ताओं को अपने आधार कार्ड जमा करने के लिए जुलाई तक का समय दिया गया है। देहरादून जिले में कुल चार लाख राशन कार्ड हैं। इनमें से 2.60 लाख कार्डधारक आधार कार्ड से लिंक हो चुके हैं। जबकि 1.40 लाख कार्ड ऐसे हैं जिसमें या तो सिर्फ मुखिया का ही कार्ड जमा हो पाया है या किसी ने भी जमा नहीं किया।

16 तारीख तक राशन अनिवार्य
जिला आपूर्ति विभाग ने खाद्यान्न आवंटन के लिए समय सीमा तय कर दी है। नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को हर हाल में माह की 16 तारीख तक पूरा खाद्यान्न आवंटित कर दिया जाएगा। यदि कोई डीलर तय समय में राशन नहीं बांटता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक माह की 23 तारीख से अगले माह 10 तारीख तक राशन डीलर गोदाम से गेहूं, चावल सहित पूरे खाद्यान्न का उठान करेगा।

मोबाइल नंबर पर करें शिकायत
आपूर्ति विभाग ने उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण करने के लिए शीघ्र नया टोल फ्री नंबर जारी करने की तैयारी कर ली है। तब तक विभाग ने कलक्ट्रेट का मोबाइल नंबर व ई-मेल अगले 10 दिन में सभी दुकानों पर दर्ज करने के निर्देश दिए। ताकि लोग अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें।

हाईकोर्ट के आदेश, सार्वजनिक स्थानों में नही ले जा सकेंगे हथियार

हर्ष फायरिंग मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए राज्य में शादी समारोह, धार्मिक आयोजन, सार्वजनिक सभाओं व शैक्षिक संस्थानों में हथियार ले जाने पर पाबंदी लगा दी है। इतना ही नहीं, अदालत ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने के संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए हैं। इनका अनुपालन कराने के लिए जिला पुलिस प्रमुखों को जवाबदेह बनाया गया है।
हर्ष फायरिंग में दो लोगों की मौत के मामले में निचली अदालत से हुई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दोषी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश दिए। बागेश्वर निवासी धर्म सिंह ने गांव के ही भगवान सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उसके शादी समारोह में हर्ष फायरिंग के दौरान चार लोगों को गोली लग गई थी। इनमें से दो की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
इस मामले में निचली अदालत ने 12 जुलाई, 2013 को भगवान सिंह को हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि शस्त्र अधिनियम में बरी कर दिया था। भगवान सिंह ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त की अपील को गुणदोष के आधार पर खारिज कर दिया, साथ ही हर्ष फायरिंग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए।
अदालत ने अपने आदेशों में कहा है कि 21 साल से कम आयु वालों को शस्त्र लाइसेंस जारी न किए जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति को हिंसा व अन्य मामलों में सजा हो चुकी हो, उसे पांच साल तक शस्त्र लाइसेंस देने पर विचार ही न किया जाए। अदालत ने शांति व्यवस्था के दौरान पुलिस की ओर से पाबंद किए गए व्यक्तियों को भी लाइसेंस जारी न करने को कहा है।

आयकर रिटर्न दाखिल करने में इन बातों का रखें ध्यान

फाइल करने में केवल 4 दिन बाकी हैं। जानें, इतने कम दिन बचने के बाद भी आखिर आप कैसे आसानी से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकते हैं। फाइल करने से पहले ध्यान रखें कि सभी जरूरी दस्तावोज आपके पास हों। किन-किन दस्तावेजों की आपको जरूरत पड़ने वाली है, ये आपकी आय पर निर्भर करेगा। आमतौर पर जो दस्तावेज चाहिए होते हैं उनमें आपके एंप्लॉयर द्वारा दिया गया फॉर्म 16, बचत खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिले इंटरेस्ट के स्टेटमेंट्स, टीडीएस सर्टिफिकेट, सभी कटौतियों के प्रूफ, होम लोन पर दिए गए इंटरेस्ट का स्टेटमेंट आदि।
यदि आपने पिछले फाइनैंशल इयर में नौकरी बदली है तो आपको दो फॉर्म 16 की जरूरत होगी। एक फॉर्म 16 आपको मौजूदा एंप्लॉयर से लेना होगा, इसके अलावा एक फॉर्म पिछले एंप्लॉयर से लेना होगा। ज्यादातर लोग दो फॉर्म 16 को लेकर परेशान रहते हैं। ऐसी स्थिति में आमतौर पर टैक्सपेयर्स की परेशानी यह रहती है कि वह टीडीएस को किस तरह से काउंट करें।

फॉर्म 26 से करें सर्टिफिकेट्स का मिलान
ज्यादातर सैलरीड एंप्लॉयीज को एंप्लॉयर्स से सैलरी टैक्स कटौती के बाद ही मिलती है। यह सुनिश्चित करने के लिए आपके टीडीएस की हर किस्त एंप्लॉयर की ओर से सरकारी खाते में जमा हुई है या नहीं। आपको टीडीएस सर्टिफिकेट में दिए गए अमाउंट को देखना होगा और फॉर्म 26 चेक करना होगा। फॉर्म 26 के तहत सालाना टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट होता है, जिसके तहत आपके नाम पर जमा हुए सारे टैक्स का ब्योरा दर्ज होता है।

फाइल करने से पहले चुकाएं सारे ड्यूज
आईटीआर फाइल करने से पहले अपनी ओर चुकाए जाने वाले सारे टैक्स का ब्योरा जान लें। एक बार जब आप अपनी ओर से चुकाए जाने वाले टैक्स का पूरा ब्योरा जान लेंगे तो फिर आप इसमें से टीडीएस को घटाकर बाकी बचे बैलेंस का भुगतान कर सकेंगे। बचे हुए टैक्स को आप नेट बैंकिंग के जरिए या फिर बैंक की शाखा में जाकर चालान के जरिए चुका सकेंगे। अपने ड्यूज चुकाने के बाद एक बार फॉर्म 26 भी चेक करें कि उसमें यह दिख रहा है या नहीं। हालांकि आमतौर पर टैक्स पेमेंट के कई दिनों बाद ही यह फॉर्म 26 में दिखता है।

आईटीआर फाइल करने से पहले यह जरूर चेक कर लें कि आपके लिए कौन सा फॉर्म जरूर है। ऐसा न करने पर यह डिफेक्टिव रिटर्न माना जाएगा। यदि आप अपने लिए जरूरी फॉर्म के अलावा किसी और फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं तो इनकम टैक्स ऐक्ट की धारा 139 (9) के तहत आपको नोटिस भी मिल सकता है। डिपार्टमेंट से मिले नोटिस में आपको तय समय में दोबारा आईटीआर भरने के लिए भी कहा जा सकता है। यदि आप तय समय में रिवाइज्ड आईटीआर नहीं भर पाते हैं तो माना जाएगा कि आपने कभी आईटीआर फाइल ही नहीं किया।

एकता बिष्ट को राज्य सरकार से बधाई के सिवाय कुछ नही मिला

उत्तराखंड मूल के महेंद्र सिंह धौनी हों या फिर उन्मुक्त चंद…दोनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाम मिलने पर उत्तराखंड में भी पूरा सम्मान मिला है। मगर महिला विश्व कप में इतिहास रचने वाली भारतीय टीम में शामिल अल्मोड़ा की एकता बिष्ट अभी भी उपेक्षित ही हैं। न तो खेल विभाग और न ही राज्य सरकार ने उत्तराखंड की बेटी के लिए सम्मान की घोषणा की है और न ही पुरस्कार की। शनिवार को बीसीसीआई ने वर्ल्ड कप में खेल रही सभी महिला खिलाड़ियों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। इसमें एकता बिष्ट भी शामिल हैं। लेकिन उत्तराखंड सरकार ने एकता को सिर्फ बधाई के कुछ नहीं दिया।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने आईसीसी महिला वन-डे विश्व कप में पिछली बार की चौंपियन ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त देकर फाइनल में दूसरी बार जगह बना ली है। विश्व कप में अल्मोड़ा की एकता बिष्ट ने भी अहम भूमिका निभाई है। लीग राउंड के 6 मैचों में एकता ने 9 विकेट चटकाकर टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचने में योगदान दिया। इसमें पाकिस्तान के खिलाफ 18 रन देकर 5 विकेट भी लिए। तब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और खेल मंत्री अरविंद पांडे ने एकता बिष्ट को बधाई तो दी, लेकिन उत्तराखंड की बेटी के लिए कोई घोषणा नहीं की। जबकि खेल विभाग ने क्रिकेट स्टेडियम का नाम उत्तराखंड के क्रिकेटर के नाम पर रखे जाने का प्रावधान बनाया हुआ है। वहीं नगद धनराशि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाडिघ्यों को प्रदेश में दी जाती है। बावजूद इसके अभी तक कोई घोषणा नहीं हो सकी है।

एसोसिएशन नहीं, फिर भी पहुंची भारतीय टीम में
हुक्का क्लब में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलकर शुरुआत करने वाली एकता बिष्ट ने क्रिकेट कोच लियाकत अली से खेल की शिक्षा ली। उत्तराखंड में एसोसिएशन न होने के बावजूद अपनी गेंदबाजी के दम पर उत्तर प्रदेश की टीम में जगह बनाई। साल 2011 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकता ने वन-डे टीम में जगह बनाई। इसके बाद से अब तक एकता 6 साल में 46 वनडे मैच खेल चुकी हैं और 71 विकेट उनके नाम हैं। टी-20 वर्ल्ड कप क्वालीफायर में हैट्रिक लेने वाली एकता भारत की पहली गेंदबाज भी हैं।

एकता को मिलना चाहिये सम्मान
उत्तराखंड में राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनकर तैयार हुए हैं। एकता बिष्ट बीते 6 साल से भारतीय महिला टीम का अहम हिस्सा हैं और दो वनडे और दो टी-20 वर्ल्ड कप खेल चुकी हैं। महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए एकता के नाम पर दोनों क्रिकेट स्टेडियम में स्टैंड का नाम किया जा सकता है। यह एकता बिष्ट के लिए एक सम्मान भी होगा और युवाओं को प्रेरणा भी मिलेगी।भारतीय टीम का कप्तान बनने पर उत्तराखंड के क्रिकेट स्टेडियम में एक स्टैंड का नाम उन खिलाड़ी के नाम पर रखने का प्रस्ताव था। मगर ऐसा कोई क्रिकेटर अभी तक नहीं है। एकता बिष्ट ने उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। राज्य में दो नए क्रिकेट स्टेडियम बने हैं, इसमें एकता के नाम पर पवेलियन का नाम हो सकता है, इस प्रस्ताव को खेल मंत्री के सामने रखेंगे।

पूर्णागिरि मेले के संचालन को विकास प्राधिकरण की स्थापना होगी

जनपद चम्पावत के एक दिवसीय भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टनकपुर में जन संवाद कार्यक्रम के दौरान आम जनता को संबोधित किया। सीएम ने लोहाघाट एवं चम्पावत विधानसभा की सड़कों के रख-रखाव व निर्माण के लिए 10 करोड़ रूपये देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चम्पावत विधानसभा क्षेत्र हेतु टनकपुर रोडवेज वर्कशाप को केन्द्रीय वर्कशाप का दर्जा देने, नरियालगांव में नस्ल सुधार हेतु योजना को अपग्रेड किये जाने, पूर्णागिरि टनकपुर सड़क के दोनों ओर जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु सुरक्षा कार्य तथा पूर्णागिरी में पेयजल, रास्ता एवं शौचालय आदि अवस्थापना निमार्ण कार्य की व्यवस्था, चम्पावत में चाय बागान विकास, स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत टनकपुर व चम्पावत का सौन्दर्यीकरण, जिले में छोटी-छोटी झीलों का निर्माण, पूर्णागिरि मेला क्षेत्र में अवस्थापना विकास तथा रोपवे का निर्माण पूर्ण कराने की घोषणा की।
पूर्णागिरि मेले के संचालन हेतु विकास प्राधिकरण की स्थापना, विधानसभा क्षेत्र टनकपुर व चम्पावत में पार्किंग, हाईटेक शौचालय एवं चम्पावत में बस अड्डे का निर्माण, गौड़ी नदी का संरक्षण एवं संवर्द्धन, टैªकिंग रूटों का निर्माण, चम्पावत नगर हेतु मास्टर प्लान व सीवर लाइन का निर्माण, चम्पावत में इकोपार्क का निर्माण, चम्पावत क्वैराला पंपिंग योजना में गति लाने, कठवापाती में सिडकुल की स्थापना के साथ गैडाखाली में हनुमान मंदिर के पास पुल का निर्माण करने की घोषणा की। उन्होंने जनपद में नजूल भूमि फ्री होल्ड करने हेतु समय सीमा बढ़ाने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने लोगों से प्रत्येक परिवार द्वारा ‘एक व्यक्ति एक पेड़’ लगाकर प्रदेश को हराभरा करने हेतु संकल्प लेने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फैशन डिजाईन, प्लास्टिक इंजिनियरिंग संस्थान, हॉस्पिटैलिटी संस्थान इसी वित्तीय वर्ष से स्थापित किये जा रहे है, जिसमें शत-प्रतिशत रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि पंचेश्वर बांध के निर्माण से एनएचपीसी द्वारा पूरे देश में पैदा की जा रही बिजली से अधिक बिजली पैदा होगी साथ ही विकास के नये आयाम स्थापित होंगे, पर्यटन गतिविधियों में इजाफा होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि बांध के निर्माण से कुछ परेशानियां होंगी लेकिन उन्हें दूर किया जायेगा।

स्मार्ट सिटी बनेगा देहरादून, केन्द्र ने दी मंजूरी


नई दिल्ली।
स्मार्ट सिटी की सूची में देवभूमि देहरादून का नाम भी शामिल हो गया है। लंबे समय से चल रही कवायद को अंततः मंजिल मिल ही गयी है। दून के स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने से प्रदेश की राजधानी को विकास की नई दिशा मिलेगी। जिससे प्रदेश में पर्यटन और रोजगार के अवसर श्रृजित होंगे। बता दें कि दून को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से चल रही है। स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने से प्रदेश को लोगों में खुशी की लहर हैं।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकास के लिए जिन 30 शहरों की नई सूची जारी की गई है उनमें केरल का तिरूवनंपुरम, छत्तीसगढ़ का नया रायपुर और गुजरात का राजकोट शहर शामिल है। इस नई घोषणा के साथ केंद्र की स्मार्ट सिटी योजना के तहत चयनित शहरों की संख्या 90 हो गई है। नई सूची के ऐलान से जुड़े के कार्यक्रम में शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए सूची में 40 शहरों के लिए स्थान खाली थे, लेकिन व्यवहारिकता और कार्य करने योग्य योजना सुनिश्चित करने के लिए 30 शहरों का चयन किया गया। स्मार्ट सिटी योजनाओं के तहत 57,393 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत केंद्र हर शहर को पांच साल की अवधि में 500 करोड़ रुपए प्रदान करता है ताकि विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जा सके।
 
आखिर जून माह में क्यों जुटते है कामाख्या मंदिर में देश विदेश के साधक!
नए शहरों की सूची

आंध्र प्रदेश का अमरावती
बिहार के पटना और मुजफ्फरपुर
यूपी से इलाहाबाद, अलीगढ़ और झांसी
तेलंगाना का करीमनगर
केरल के त्रिवेंद्रम,
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और नया रायपुर
गुजरात के दाहोद, गांधीनगर और राजकोट
पुडुचेरी का पुडुचेरी
जम्मू कश्मीर के जम्मू और श्रीनगर
मध्य प्रदेश के सतना और सागर
हरियाणा के करनाल
कर्नाटक के बेंगलुरू
हिमाचल प्रदेश के शिमला
उत्तराखंड के देहरादून
तमिलनाडु के तिरुनवेली
तिरुचिरापल्ली, त्रिपुरा और तूतुकुडी
महाराष्ट्र के पिंरी चिंचवड
अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट
मिजोरम के आइजोल
सिक्किम के गंगटोक शहर

21 जून से उत्तराखंड में मानसून आने की संभावना


देहरादून।
उत्तराखंड में मौसम ने फिर करवट बदली है और बादलों की आवक ने इसके संकेत भी दे दिए हैं। मौसम विभाग की मानें तो रविवार से वर्षा का क्रम तेज का सकता है। 19 और 20 जून को देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों और बाकी जगह कहीं-कहीं भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। मौसम के इस रुख के मद्देनजर चारधाम यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है। संभावना जताई जा रही कि 21 जून तक राज्य में मानसून भी दस्तक दे सकता है।
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार पंजाब से बंगाल की खाड़ी तक निचले स्तर पर बनी द्रोणी (ट्रफ) और दक्षिणी पूर्वी हवा के मेल के चलते राज्य में वर्षा की संभावना बनी है। उन्होंने बताया कि रविवार को आमतौर पर बादल रहेंगे और अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। 18 जून की मध्य रात्रि से यह सिलसिला ज्यादा तेज होगा और 19 व 20 जून को कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है। 22 जून से वर्षा में कमी आएगी।
इस बीच शनिवार को पर्वतीय जिलों में कहीं हल्की तो कहीं झमाझम बारिश हुई। चमोली में दोपहर बाद जोरदार वर्षा ने ठंडक का अहसास कराया। वहीं पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, चंपावत जिलों में भी मौसम का यही रंग रहा। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में कहीं आंशिक तो कहीं आमतौर पर बादल रहे। अलबत्ता, अधिकतम तापमान सामान्य के करीब बना हुआ है।

मुख्यमंत्री ने दिए नदी, नालों से सिल्ट हटाने के निर्देश


नैनीताल।
नैनी झील राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है। नैनी झील के संरक्षण व संवर्द्धन के लिये कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जायेगी। राज्य सरकार इसके लिये पूरी सहायता करेगी। झील के संरक्षण संवर्द्धन के लिये राज्य सरकार द्वारा तीन करोड़ रूपये की धनराशि अवमुक्त कर दी गयी हैं। झील के संवर्द्धन के लिये जरूरत पड़ने पर केन्द्र सरकार से भी सहयोग लिया जायेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने यह बात वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों व बुद्धिजीवियों के साथ बोट हाउस क्लब में नैनी झील बचाने हेतु आयोजित बैठक में कही। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि वैज्ञानिकों की राय के अनुसार ही झील के संरक्षण की डीपीआर बनाई जाये। उन्होंने कहा नैनीताल शहर से लगे हुये पुराने जल श्रोतों को रिचार्ज करने हेतु भी योजना बनायी जाये। उन्होंने कहा कि झील के जलागम क्षेत्र व प्राकृतिक सौन्दर्य को बचाने के लिये झील के आस-पास कतई भी छेड़-छाड़ ना की जाय। उन्होंने झील संरक्षण के लिये आईआईटी रूड़की, वैज्ञानिकों व वन विभाग से भी सहयोग लिया जाय। उन्होंने कहा कि नैनीताल झील में जो भी नाले गिरते हैं, उनमें कैचपिट अनिवार्य रूप से बनाये जायें ताकि झील में मलुवा व कूड़ा आने से रोका जा सके। उन्होंने कहा नैनी झील के जलागम क्षेत्र सूखाताल सहित पहाड़ी क्षेत्रों में जहां से सिल्ट हटानी है, उन्हें तत्काल हटाया जाय ताकि बरसात में झील अधिक से अधिक रिचार्ज हो सकें।
मुख्यमंत्री रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन नदी नालों में सिल्ट जमा होने के कारण पानी का बहाव नहीं हो पा रहा है, उन्हें तत्काल चैनालाइज किया जाय ताकि पानी आसानी से बह सकें। उन्होेंने कहा कि पहाड़ों से पलायन को रोकने के लिये यहां की खेती को लाभकारी बनाने हेतु कमेटी बनाई जायेगी, कमेटी के सुझावों के आधार पर यहां के किसानों की आमदानी बढ़ाई जायेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं व सुझाव जानने के लिये प्रत्येक माह वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों से सीधी वार्ता की जायेगी। मुख्यमंत्री रावत द्वारा झील का निरीक्षण कर मौके पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किये गए। मौके पर पुलिस महानिरीक्षक जय रौतेला, जिलाधिकारी दीपेन्द्र कुमार चौधरी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मजेय खण्डूरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।