सीएस बोले, सभी विभाग बेस्ट प्रैक्टिसेज का प्रेजेंटेशन तैयार करें

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में सचिव स्तर की बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने बैठक में सभी अधिकारियों को उनके बेहतर विभागीय कार्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज (सफलता की कहानियां) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेस्ट प्रैक्टिसेज में ऐसा यूनिक इनिशिएटिव हो जो किसी भी राज्य द्वारा नहीं किया गया हो अथवा जो अन्य से अलग हो। बेस्ट प्रैक्टिसेज संस्थागत अथवा व्यक्तिगत जिस स्तर का भी हो उसका प्रेजेंटेशन तैयार करें।
उन्होंने सभी सचिवों से उनके विभागों में हो रहे बेहतरीन कार्यों की जानकारी लेते हुए उनका बेस्ट प्रैक्टिसेज के रूप में संकलन तैयार करने के निर्देश दिए। जिससे लोगों को बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि आईटी, कृषि, उद्यान, बाल विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, सहकारिता, पशुपालन, वन विभाग, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, हायर एजुकेशन, आयुष इत्यादि विभागों में बेस्ट प्रैक्टिसेज की अधिक संभावना है।

मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को निर्देशित किया कि विभिन्न विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का बेहतर तरीके से इंप्लीमेंटेशन करें ताकि जनमानस को उसका अधिक-से- अधिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने सभी विभागों को अपनी विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक -से-अधिक ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने पर जोर देने के निर्देश दिए। जिससे एक खुली, पारदर्शी, सहज और व्यवस्थित कार्यप्रणाली और व्यवस्था डेवलप हो सके।

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण – पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 का गंभीरता से अनुपालन कराएं

मुख्य सचिव ने संबंधित सचिवों को निर्देशित किया कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण – पोषण और कल्याण अधिनियम – 2007 का गंभीरता से अनुपालन कराएं ताकि ज्ञान और अनुभव की पूंजी हमारे वरिष्ठ नागरिक अपनी वृद्धावस्था को सम्मानपूर्वक जी सके। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से इस एक्ट का कड़ाई से अनुपालन करवाने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल एल फैनई व प्रदीप पंत, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, नीतेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. श्रीधर बाबू आद्यंकी, चंद्रेश यादव, डॉ आर राजेश कुमार, दीपेंद्र कुमार चौधरी, विनोद कुमार सुमन, रणवीर सिंह चौहान, धीराज सिंह गर्ब्याल उपस्थित थे।

सीएस करेंगे निर्माणाधीन विद्युत जेनरेशन प्लांट व विद्युत सब स्टेशन की क्षेत्रीय विजिट

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में पिटकुल (पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने पिटकुल को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान पारेषण तंत्र के सुचारू रूप से संचालन के लिए एसओपी का पूर्णतः पालन करें तथा लाइन ब्रेकडाउन की स्थिति में ब्रेकडाउन एनालिसिस करते हुए विद्युत आपूर्ति को निर्बाध रूप से संचालित करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि इस बात को सुनिश्चित किया जाए कि सभी तरह के प्रोजेक्ट निर्धारित समय अवधि में ही पूरे हों तथा इसकी लागत भी किसी भी दशा में बढ़नी नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो भी मास्टर प्लान बनता है उसकी पहले एक बार सीईए (सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ) से जरूर समीक्षा करा ली जाए।

मुख्य सचिव ने लाइन विस्तारीकरण और सब स्टेशन की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित नए मानक के अनुरूप सरकार को प्रस्ताव प्रेषित करने को कहा।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी निर्माणाधीन विद्युत जेनरेशन प्लांट व विद्युत सब स्टेशन की क्षेत्रीय विजिट करेंगे।

बैठक में प्रबंध निदेशक पिटकुल पी सी ध्यानी ने अवगत कराया कि पिटकुल की रेटिंग 2024 – 25 में ए से ए$$ हुई है। इससे पिटकुल को मिलने वाले लोन में 0.50 प्रतिशत की छूट प्राप्त होगी जिसका प्रदेश के उपभोक्ताओं को भी रियायती ऊर्जा दरों के रूप में लाभ प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि बाह्य सहायतित परियोजनाओं के अंतर्गत एडीबी पोषित 6 गतिमान प्रोजेक्ट 220 केवी सेलाकुई, 132 केवी खटीमा, 132 केवी लोहाघाट चंपावत, 132 केवी धौलाखेड़ा नैनीताल, 132 केवी आराघर और 220 केवी मंगलौर ये सभी प्रोजेक्ट 2026 तक कंप्लीट हो जाएंगे। इससे लो वोल्टेज और बार-बार ट्रिप की समस्या से निजात मिलेगी तथा उद्योग और उपभोक्ताओं को बड़े पैमाने पर इसका लाभ मिलेगा।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, मुख्य अभियंता, अनुपम सिंह, इला पंत व कमलकांत, महाप्रबंधक वित्त मनोज कुमार आदि बैठक में उपस्थित थे।

सीएस की अध्यक्षता में यूपीसीएल के ऊर्जा भवन में निदेशक मंडल की 124वीं बैठक आयोजित

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में देहरादून स्थित यूपीसीएल के ऊर्जा भवन में निदेशक मंडल की 124वीं बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण से संबंधित प्रोजेक्ट के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई तथा ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों और समस्याओं के समाधान पर भी मंथन किया गया।

मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग को निर्देशित किया कि विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण से संबंधित जितनी भी परियोजनाएं गतिमान हैं उनको समय से पूरा करें और उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और किफायती बिजली उपलब्ध कराने के लिए सभी कार्यों का बेहतर तरीके से इंप्लीमेंट करें।

उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रोजेक्ट से संबंधित तकनीकी बिंदुओं के बेहतर क्लेरिफिकेशन और स्टडी के लिए निदेशक मंडल में एक तकनीकी मेंबर की नियुक्ति की जाए। उन्होंने निदेशक मंडल की बैठक में यूईआरसी (उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग) द्वारा पारित टैरिफ ऑर्डर को भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कंपनियों के बढ़े हुए ऑथराइजेशन कैपिटल की सूचना सरकार से भी साझा करने को कहा। साथ ही सितंबर 2025 तक ईआरपी (उद्यम संसाधन योजना) को पूरी तरीके से स्थिर करने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि सीमांत जनपदों के ऐसे सीमांत गांव जो अभी तक सोलर विद्युत से आच्छादित हैं उनको ग्रिड आधारित विद्युत आपूर्ति से भी आच्छादित करें।

ट्रांसफार्मर में कैपेसिटर बैंक लगाने का निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन

वोल्टेज की गुणवत्ता में सुधार के लिए पूरे प्रदेश में ट्रांसफार्मर में 76 हजार से अधिक कैपेसिटर बैंक लगाए जाने हैं जिसका निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन किया गया।

बीईएसएस (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) लगाने की सहमति

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन 100 मेगावाट की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने जा रहा है जिसका निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन किया गया। यह परियोजना उत्तराखंड के नवीनीकरण ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट से संबंधित धनराशि सस्ती ब्याज दरों पर उपलब्ध हो सके इसके लिए विभिन्न वित्तीय संस्थानों से प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों का आकलन करने के पश्चात ही निर्णय लिया जाए।

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने अपनी उपलब्धियां को साझा करते हुए कहा कि विगत 3 वर्षों से निगम के राजस्व संग्रह में लगातार वृद्धि हुई है। विद्युत उपभोक्ता रैंकिंग में सुधार हुआ है तथा एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल लॉसेज में विगत 3 वर्षों में कमी आई है।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, स्वतंत्र निदेशक मंडल से बीपी पांडेय व पराग गुप्ता, प्रबंध निदेशक यूपीसीएल अनिल कुमार, पिटकुल पीसी ध्यानी व यूजेवीएनएल संदीप सिंहल उपस्थित थे।

मोबिलिटी प्लान के तहत सुधारीकरण के लिए चिन्हित 10 स्थानों में सुधार प्रक्रिया में तेजी लाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में देहरादून शहर के मोबिलिटी प्लान से सम्बन्धित एकीकृत महानगर परिवहन प्राधिकरण की बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने देहरादून शहर के लिए यातायात संकुलन योजना की प्रगति की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मोबिलिटी प्लान के तहत सुधारीकरण के लिए चिन्हित 10 स्थानों में सुधार प्रक्रिया में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन सुधारीकरण कार्यों की डीपीआर तैयार हो चुकी है अगले एक माह में कार्य शुरू कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाकी कार्यों की डीपीआर भी 31 जुलाई तक तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को लगातार इसकी मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए हैं ताकि कार्यों को समय से पूर्ण किया जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिन सड़कों का अभी चौड़ीकरण किया गया है, उन सड़कों में नो पार्किंग जोन होते हुए वाहनों के खड़े होने से पूर्व जैसी ही स्थिति बनी हुयी है। उन्होंने कहा कि नो पार्किंग जोन में वाहन खड़े न हों इसके लिए प्रभावी प्रवर्तन कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस समस्या के लिए लगातार नए पार्किंग स्थलों के तलाशे जाने की प्रक्रिया लगातार जारी रखी जाए। उन्होंने कहा कि कमर्शियल भवनों की पार्किंग को 100 प्रतिशत प्रयोग किए जाने हेतु लगातार कार्य कराए जाएं। उन्होंने सचिवालय, पवैलियन ग्राउण्ड और परेड ग्राउण्ड के नीचे अंडरग्राउण्ड पार्किंग की सम्भावनाओं को तलाशे जाने के भी निर्देश दिए हैं। सीएमपी में चिन्हित सम्भावित पार्किंग स्थलों को एक्सप्लोर किया जाए।

मुख्य सचिव ने आढ़त बाजार शिफ्टिंग प्रक्रिया में तेजी लायी जाए। उन्होंने भूमि आबंटन की प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आढ़त बाजार शिफ्टिंग के कार्य में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के लिए टाईमलाइन निर्धारित की जाए एवं मुख्य सचिव कार्यलय को शीघ्र अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग भी मोबिलिटी प्लान के अनुरूप एसपीवी के गठन की कार्यवाही में तेजी लाते हुए अगले 15 दिनों के प्रस्ताव कैबिनेट में लाए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने देहरादून के लिए अगले 25-30 सालों की यातायात संकुलन की समस्या को देखते हुए योजना तैयार किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए शीघ्र ही बैठक आयोजित की जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, अपर सचिव विजय कुमार जोगदंडे, रीना जोशी, पूजा गर्ब्याल एवं उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन से बृजेश कुमार मिश्रा सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

क्षतिग्रस्त बिजली खम्बों, लटकी तारों सहित टूटी पेयजल पाईपलाईनों की मरम्मत करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करते हुए दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को आमजन की समस्याओं को सुनने एवं उनके निराकरण पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग, पेयजल विभाग एवं अन्य ऐसे विभाग जो नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, अपने कार्यक्षेत्रों का दौरा अवश्य करें। उन्होंने विभागों को निर्देश दिए हैं कि टेढ़े हो चुके बिजली के खम्बों, लटकी तारों सहित टूटी पेयजल पाईपलाईनों की मरम्मत का कार्य तत्काल कराए जाएं। उन्होंने कहा कि जब तक अधिकारी फील्ड पर नहीं उतरेंगे, आमजन की समस्याओं से अवगत नहीं होंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों को फील्ड का दौरा नियमित रूप से किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) रजिस्ट्रेशन की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आमजन अधिक से अधिक संख्या में अपने विवाह का पंजीकरण कराएं इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। उन्होंने कहा कि पंजीकरण के लम्बित मामलों को तेजी से निस्तारित किया जाए। उन्होंने मैदानी जनपदों में पंजीकरण के लिए विशेष अभियान संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रायः देखा जा रहा है कि ऐसे विवाह पंजीकरण, जिनमें विवाह के समय पति-पत्नी दोनों या दोनों में से कोई एक नाबालिग रहा हो, परन्तु वर्तमान में पंजीकरण के समय दोनों बालिग हो चुके हैं, को अस्वीकार किया जा रहा है, जो कि गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे विवाह के मामलों का भी पंजीकरण किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम- एबीएचआईएम) की जिलावार समीक्षा करते हुए प्रत्येक जनपद से प्रत्येक केन्द्र की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने ब्लॉक स्तर पर ‘ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों‘ की स्थापना के कार्य में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। कहा कि जिन इकाइयों में निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है, उन इकाइयों में उपकरणों की व्यवस्था शीघ्र सुनिश्चित करते हुए ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों को सक्रिय किया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, चंद्रेश कुमार यादव, विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव रंजना राजगुरू, विजय कुमार जोगदंडे, मनुज गोयल, अपर सचिव गृह निवेदिता कुकरेती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश के भीतर सभी राष्ट्रीय राजमार्गों की समीक्षा कर मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय स्थित अपने सभागार में प्रदेश के भीतर सभी राष्ट्रीय राजमार्गों की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश के अंतर्गत एनएच पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की सड़कों की स्थिति और प्रगति की विस्तार से जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने एनएच पीडब्ल्यूडी की सड़कों की बॉटल नेक की जानकारी लेते हुए उन्हें दुरुस्त किए जाने के लिए शीघ्र योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने वन एवं वन्यजीव संस्तुतियों के लिए लगातार केन्द्र एवं राज्य स्तरीय सम्बन्धित विभागों से अनुवर्तन करते रहने की बात भी कही। कहा कि एनएच पीडब्ल्यूडी द्वारा लम्बित मामलों में सम्बन्धित जिलाधिकारियों और फारेस्ट के साथ लगातार बैठकें आयोजित करते हुए लम्बित प्रकरणों का निस्तारण किया जाए।

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश बाईपास में बायपास को ऋषिकेश से शिवपुरी तक बढ़ाए जाने हेतु कार्यवाही शुरू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र के स्तर से प्राप्त होने वाली स्वीकृतियों के लिए लगातार प्रयास किए जाएँ। उन्होंने कलियासौड़ रिअलाइनमेंट और जोशीमठ बाईपास रिअलाइनमेंट कार्य पूर्ण किए जाने के लिए टाईमलाइन निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कार्यों को निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत पूर्ण किए जाने के लिए लगातार उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कार्यों को समय से पूरा किए जाने के लिए जिन कार्यों को समानांतर शुरू किया जा सकता है, उन्हें शुरू कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने एनएचएआई के अंतर्गत बन रही सड़कों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने एनएचएआई के बल्लुपुर पोंवटा साहिब पैकेज 1 और 2, झाझरा-आशारोड़ी 4 लेन, हरिद्वार बायपास सहित विभिन्न स्तरों पर चल रहे प्रोजेक्टों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कार्यों को निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत पूर्ण किए जाएं।

सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई 3589.99 किमी है, जो एनएच पीडब्ल्यूडी के पास 2028.19 किमी, बीआरओ के पास 986.8 किमी, एनएचआईडीसीएल के पास 130 किमी और एनएचएआई के पास 445 किमी है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग के कुल 53 कार्य होने हैं, जिनमें से 47 को स्वीकृति प्राप्त है। 42 कार्य अवार्ड किए जा चुके हैं, जिनमें से 30 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 12 कार्यों पर कार्य गतिमान है। 5 कार्य अवार्ड होने बाकी हैं और 6 कार्य स्वीकृत होने बाकी हैं।

इस अवसर पर अपर सचिव विनीत कुमार एवं रीजनल ऑफिसर एनएचएआई विशाल गुप्ता एवं पीडी एनएचएआई पंकज भी उपस्थित थे।

कुंभ मेला तैयारियों पर श्रद्धालुओं की भीड़ के अनुरूप ही घाटों की संख्या भी बढ़ाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कुंभ मेले की तैयारियों के संबंध में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि 2027 में आयोजित होने वाले कुम्भ मेले के दृष्टिगत सभी प्रकार के स्थायी एवं अस्थायी प्रकृति के कार्य 31 अक्टूबर, 2026 तक पूर्ण कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि कार्य समाप्ति की अंतिम तिथि को गंभीरता से लेते हुए सभी कार्यों को समय से पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों के नोडल अधिकारी शीघ्र नामित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या का आंकलन कर उसके अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की भीड़ के अनुरूप ही घाटों की संख्या भी बढ़ाई जाए। उन्होंने मेलाधिकारी को सभी हितधारकों से लगातार संवाद करते हुए सभी प्रकार की व्यवस्थाएं किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टेक्निकल ऑडिट कमिटी और थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेले के लिए सभी प्रकार के कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करते हुए ए, बी, सी श्रेणियों में बांटे जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों को प्रत्येक स्थिति में कराया ही कराया जाना है, ऐसे कार्यों के लिए तत्काल कार्यवाही शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि दीर्घावधि के कार्यों को भी प्राथमिकता पर लिया जाए, ताकि वे समय से पूर्ण हो सकें। उन्होंने अस्थायी प्रकृति के कार्यों को समयावधि के अनुरूप कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिन-जिन विभागों एवं संस्थाओं को कुम्भ मेला क्षेत्र में स्थान आवंटित किया जाता है, उन स्थानों पर यदि अतिक्रमण हो रखा है तो, अतिक्रमण हटाते हुए विभागों को आवंटित किया जाए। उन्होंने कुम्भ मेला क्षेत्र में सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने एसपी हरिद्वार को कुम्भ मेले के दौरान यातायात एवं पार्किंग प्लान 20 अगस्त, 2025 तक मेलाधिकारी को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग, पेयजल एवं विद्युत विभाग सहित अन्य सभी ऐसे विभागों, जो कुम्भ मेले के दौरान सेवाएं देते हैं, को अपनी कार्ययोजना भी 20 अगस्त, 2025 तक उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश द्वारा मरम्मत के लिए नहर बंदी के समय जो कुम्भ मेले से सम्बन्धित कार्य उत्तराखण्ड द्वारा कराए जाने हैं, उसके लिए पूर्व से ही सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए, ताकि नहरबंदी के दौरान तत्काल कार्य कराया जा सके।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला क्षेत्र को बढ़ाए जाने की सम्भावनाएं तलाशे जाने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रकार की सड़कों की मरम्मत और निर्माण कार्यों को समय से पूर्ण कराए जाने हेतु उच्चाधिकारियों को क्षेत्रीय भ्रमण कर समय से कार्य पूर्ण कराए जाएं। मुख्य सचिव ने रानीपुर मोड़, रेलवे पुल से ज्वालापुर तक जल भराव की समस्या का भी हल निकाले जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं और आमजन की सुरक्षा के दृष्टिगत कुम्भ मेला क्षेत्र में अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ ही विभिन्न जगहों पर फायर हाइड्रेंट भी स्थापित किए जाएं।

इस अवसर पर मेलाधिकारी सोनिका ने कुम्भ मेले के सम्बन्ध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

इस अवसर पर डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश कुमार झा, बृजेश कुमार संत, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, धीराज सिंह गर्ब्याल, युगल किशोर पंत एवं डॉ . रणवीर सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम जिलाधिकारी हरिद्वार, देहरादून, टिहरी और पौड़ी भी उपस्थित थे।

ई-डीपीआर मॉड्यूल से की जाए सभी डीपीआर तैयारः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सचिव समिति की बैठक आयोजित हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य एवं जनहित से जुड़ी योजनाओं सहित राज्य सरकार के कर्मियों की समस्याओं एवं मुद्दों पर चर्चा करते हुए विभिन्न दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को अपने विभागों के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों के लिए ई-डीपीआर मॉड्यूल को लागू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-डीपीआर के माध्यम से डीपीआर तैयार किए जाने से लेकर सरकार तक पहुंचने तक की गतिविधि ई-डीपीआर के माध्यम से की जाए। उन्होंने कहा कि ई-डीपीआर का क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग को शत-प्रतिशत रूप से ऑनलाइन किया जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि यूकेपीएफएमएस के माध्यम से सभी कर्मियों की सर्विस बुक डाटा को अपडेट किया जाए। उन्होंने कहा कि आईएफएमएस डेटा का डिजिटाइजेशन शीघ्र किया जाए। इसके लिए आईएफएमएस मैकेनिज्म को मजबूत किए जाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं वाहन चालकों के जीपीएफ सम्बन्धी डेटा को भी लगातार अपडेट किए जाने के निर्देश दिए हैं।

ई-ऑफिस और बायोमेट्रिक को विभागों एवं जनपदों में किया जाए 100 प्रतिशत लागू
मुख्य सचिव ने सभी सचिवगणों को अपने-अपने विभागों के अंतर्गत 100 प्रतिशत ई-ऑफिस शीघ्र लागू किए जाने के निर्देश दोहराए। उन्होंने जनपद स्तरीय कार्यालयों को भी शीघ्र ई-ऑफिस पर शिफ्ट किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, विभागों में 100 प्रतिशत बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिर्फ शुक्रवार सायं
मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न विभागों द्वारा जिलाधिकारियों को अलग-अलग दिन अलग-अलग समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित कर के अनावश्यक रूप से व्यस्त रखा जाता है। इस समस्या के निस्तारण एवं जिलाधिकारियों को अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए मुक्त रखे जाने हेतु शुक्रवार सायंकाल का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों के अतिरिक्त जिन भी विभागों को जिलाधिकारियों के साथ बैठक करनी हैं, वे प्रत्येक शुक्रवार सायंकाल जिलाधिकारियों के साथ आयोजित होने वाली बैठक में अपनी बात रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी बैठकों के एजेण्डा पॉइन्ट्स पूर्व में ही जिलाधिकारियों को साझा किए जाएं।

मुख्य सचिव ने शीघ्र ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों द्वारा प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय नियुक्ति के कार्यक्षेत्र (विकासखण्ड, तहसील और जिला मुख्यालय) को गोद लेने की प्रक्रिया में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने विभागों के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं की लगातार समीक्षा किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, राधिका झा, सचिन कुर्वे, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. नीरज खैरवाल, विनय शंकर पाण्डेय, दीपेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, रणवीर सिंह चौहान एवं धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कांवड़ यात्रा मार्ग पर ढाबों और होटलों में सुरक्षा मानकों का अनुपालन हो, रेट लिस्ट भी लगेः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में आगामी कांवड़ मेले को सरल, सुखद व सुरक्षित संपन्न कराने हेतु इंटरस्टेट समन्वय समिति की बैठक सीसीआर सभागार हरिद्वार में संपन्न हुई। जिसमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान के उच्चाधिकारियों द्वारा ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभाग किया गया।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि कांवड़ मेला आस्था एवं श्रद्धा का बहुत बड़ा उत्सव है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा सकुशल एवम् सफलता पूर्वक सम्पन्न कराने हेतु जिला प्रशासन, पुलिस एवं अन्य सम्बन्धित विभाग चाक चौबंद व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने सभी राज्यों से रियल टाइम कॉर्डिनेशन व रियल टाइम डाटा साझा किए जाने की बात भी कही। सुरक्षात्मक दृष्टि से सभी आवश्यक इनपुट्स साझा किए जाएं।

मुख्य सचिव ने कांवड़ मेले की व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आगामी कुंभ मेले को दृष्टिगत रखते हुए सभी तैयारियों को अंजाम दिया जाए ताकि मेले के अनुभव कुंभ में भी काम आएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि कांवड़ मेले के दौरान कानून व्यवस्था एवं यातायात व्यवस्था के लिए चाक चौबंद व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर भेल पार्किंग का भी उपयोग किए जाने के निर्देश भी जिला प्रशासन को दिए। यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों और होटलों में सुरक्षा मानकों का अनुपालन हो, साथ ही रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से चस्पा की जाए।

डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि हर आयोजन नई चुनौतियां प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि आस्था एवं श्रद्धा के इस मेले को सुरक्षात्मक रूप से संपन्न कराने हेतु रियल टाइम सूचनाएं साझा की जाए, किसी भी प्रकार की अफवाह का यूनिफाइड खंडन किया जाए। अपने कार्यों में दक्षता रखने वाले कर्मी ही एक-दूसरे स्टेट भेजे जाएं। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं के लिए क्या करें और क्या नहीं करें की जानकारी यात्रा मार्गों पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। इंटर स्टेट कॉर्डिनेशन की अपेक्षाएं पूर्ण हों तथा मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो।

बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली ने कहा कि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, यातायात व्यवस्था सरल सुगम व सुरक्षित हो तथा श्रद्धालुओं की सहूलियतों को ध्यान में रखते हुए सभी तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित तथा एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने कांवड़ यात्रा अवधि, विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रतिशत, ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सहित कांवड़ यात्रा हेतु की जा रही तैयारियों का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी। उत्तर प्रदेश की ओर से डीआईजी अभिषेक ने यात्रा प्लान सहित चल रही तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी।

बैठक में निर्णय लिया गया कि सुरक्षात्मक दृष्टि से सभी आवश्यक सूचनाएं तथा इनपुट्स रियल टाइम साझा किए जाएं, सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग की जाए और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्यवाही के लिंक भी साझा किया जाए। कांवड़ 10 फीट से अधिक ऊंचाई के न हों। शराब तथा मीट से संबंधित एसओपी का सख्ती से अनुपालन हो, सभी चिन्हित डीजे संचालकों को नियमानुसार नोटिस देते हुए बाउण्ड ऑफ किया जाए। उत्तराखंड द्वारा समय-समय पर हरिद्वार में पार्किंग की स्थिति से उत्तर प्रदेश को अवगत कराया जाए।

बैठक में उत्तर प्रदेश से एडीजे भानु भास्कर, सचिव गृह मोहित गुप्ता, कमिश्नर मेरठ डिवीजन ऋषिकेश भास्कर यशोद, कमिश्नर बरेली सौम्य अग्रवाल, कमिश्नर सहारनपुर एके राय, डीआईजी सहारनपुर अभिषेक सिंह, आईजी आरपीएफ पंकज गंगवार, उत्तराखंड से आईजी निलेश आनंद भरणे, एनएस नपलच्याल, डीआईजी धीरेन्द्र गुंज्याल, एसएसपी देहरादून अजय सिंह, मेलाधिकारी सोनिका, सहित पांचों राज्यों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने जताई पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिन्ता

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में राष्ट्रीय नार्काे समन्वय पोर्टल (एन्कॉर्ड) की बैठक ली। मुख्य सचिव ने प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने युवाओं पर नशे के बढ़ते प्रकोप पर काबू करने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए डीएम एसएसपी को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

मुख्य सचिव ने नशे की बिक्री को रोकने के लिए प्रवर्तन को बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे को रोकने के लिए पुलिस विभाग को कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह को नशे के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने हेतु पूरी छूट देते हुए सिंगल पॉइन्ट नोडल अधिकारी नामित किया। उन्होंने कहा कि नशे की जड़ों को काटने के लिए उन्हें जो भी आवश्यकता है, उपलब्ध करायी जाएगी। उन्होंने कहा कि नशे के लिए बने इस ईको सिस्टम को तोड़ने के लिए पूरे प्रदेश में एक साथ अभियान चलाया जाए, जिसमें प्रत्येक सम्बन्धित विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को ड्रग इंस्पेक्टर को भी इस अभियान में शामिल किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि डिमांड और सप्लाइ की चौन को तोड़ने में प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी। सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक अपने जनपदों में शिक्षण संस्थानों और हॉस्टल आदि के प्रमुखों से वार्ता कर उन्हें अपने संस्थानों में मेडिकल टेस्ट करने हेतु राजी करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए उपकरण एवं टेस्ट मैटीरियल की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को भी इसमें सहयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का मेडिकल टेस्ट कराए जाने हेतु लगातार अभियान चलाए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने वृहद स्तर पर राज्य एवं जनपदों में जागरूकता अभियान संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए गृह विभाग, सूचना विभाग, उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग को एक दिन निर्धारित करते हुए वृहद स्तर पर जागरूकता अभियान संचालित किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जागरूकता गतिविधियों में सोशल मीडिया एवं सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को भी शामिल किया जाए। प्रदेश भर में लगातार इस प्रकार के जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण एवं जिला स्तरीय समन्वय समिति की प्रत्येक माह बैठकें आयोजित करायी जाएं। उन्होंने प्रदेश में संचालित हो रहे सरकारी नशा मुक्ति केन्द्रों एवं मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों की क्षमता बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपयोग में नहीं आ रहे सरकारी भवनों को भी नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों के रूप में संचालित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रायवाला में ओल्ड एज होम के लिए बनाए गए भवन सहित अन्य तैयार हो चुके भवनों में अगले एक माह में नशा मुक्ति केन्द्र शुरू किए जाएं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में खाली पड़े सरकारी भवनों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को उपलब्ध कराए जाने के भी निर्देश दिए, ताकि इन भवनों में आवश्यकता के अनुसार अन्य जनहित के कार्य शुरू किए जा सकें।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में संचालित हो रहे प्राईवेट नशामुक्ति केन्द्रों का भौतिक निरीक्षण किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो प्राईवेट संस्थान मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, उन पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़े जाने की आवश्यकता है, ताकि वे जल्दी से जल्दी अपनी नशे की लत को छोड़ सकें।

मुख्य सचिव ने कहा कि एनसीसी, एनएसएस और महिला मंगल दलों को भी नशे के खिलाफ लड़ाई में शामिल किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में वार्षिक हेल्थ चौकअप को बढ़ावा दिया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, डॉ. आर. राजेश कुमार, डॉ. रंजीत सिन्हा, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. वी. मुरूगेशन, आईजी लॉ नीलेश