सिलक्यारा टनल पर मनौवैज्ञानिक तरीका अपनाकर सीएम ने दिखाई कौशलता

उत्तरकाशी जिले के सिल्क्यारा टनल में फंसे लोगों के रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज भी उत्तरकाशी में ही डेरा डाले हुए है। इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री आवास में लोकपर्व ईगास पर होने वाले कार्यक्रम को भी स्थगित कर दिया था। वहीं, एक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर भी उन्होंने सभी को चौका दिया। पहली बार राज्य के इतिहास में सीएम का कैंप कार्यालय घटनास्थल वाले क्षेत्र के आसपास खोला गया है। मुख्यमंत्री के द्वारा लगातार दूसरे दिन भी उत्तरकाशी में डेरा डालने के कारण सरकारी कार्य प्रभावित ना हो, इसके लिए मुख्यमंत्री धामी ने अपना कैंप कार्यालय यही खोल दिया है।

राज्य का लोकपर्व, सांकेतिक रुप से मनाया
मुख्यमंत्री धामी द्वारा आज के दिन उत्तराखण्ड में धूमधाम से मनाये जाने वाले ईगास पर्व को भी न मनाने का निर्णय लिया गया। आज ईगास के मौक़े पर मुख्यमंत्री आवास पर लगभग एक हज़ार लोगों के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस पर्व में शरीक होना था, जिसे उन्होंने रद कर दिया। वहीं, पूर्व सूचना के कारण मुख्यमंत्री आवास पहुँचे लोगों ने बेहद सादगी से गौ पूजन करके पर्व मनाया। मौक़े पर लोगों ने टनल में फंसे श्रमिकों की जल्द से जल्द सकुशल बाहर निकलने की प्रार्थना भी ईश्वर से की। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि टनल में फंसे मजदूरों की निकासी उनकी पहली प्राथमिकता है। ऐसे में उनके लिए असल त्यौहार तभी होगा जब वह बाहर आयेंगे। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को देखते हुए कई जगह कार्यक्रम या तो स्थगित हुए या सांकेतिक रुप से ही मनाये गये। यह पहली बार देखा जा रहा है कि कोई मुख्यमंत्री हर तरीके से इस मामले में पीड़ित पक्ष के साथ हो। एक तरफ धामी सरकार लगातार रेस्क्यू अभियान चलाकर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास कर रही है। तो वही मुख्यमंत्री मजदूरों की हौसला अफजाई भी कर रहे है तो वही उनके परिवारों को यह संदेश देने में भी कामयाब रहे है कि उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता उनके साथ खड़ी है। राज्य की जनता का मुख्यमंत्री से ऐसा भावनात्मक रिश्ता है कि उनके संदेश को जनता ने समझ भी लिया। नही तो अपने लोकपर्व और त्यौहारों को कौन छोड़ता है?

संवेदनशील सीएम का बड़ा संदेश
एक तरफ सिल्क्यारा टनल ऑपरेशन विश्व के चौथे नंबर का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन बन गया है। मुख्यमंत्री पहले तो लगातार घटनास्थल का दौरा करते रहे और देहरादून से भी लगातार मौके पर जानकारी जुटाते रहे है। लेकिन बुधवार से तो मुख्यमंत्री धामी अंगद की तरह पैर जमाकर उत्तरकाशी डट गये है। ऐसे में प्रशासन के भी हौसले बुलंद हो गये है कि राज्य का मुखिया स्वयं मौके पर आ गया है। दिन-रात रेस्क्यू अभियान में लगे लोगों का उत्साहवर्धन होने से उम्मीदें जग रही है कि कभी भी खुशखबरी आ सकती है। वहीं, गुरुवार को मुख्यमंत्री ने देश दुनिया को भी बडा संदेश दे दिया है। पहली बार किसी सीएम ने घटनास्थल के पास ही अपना कैंप कार्यालय बनाया है। सीएम अब रोजमर्रा के कार्य बाधित ना हो, इसके लिए रेस्क्यू अभियान के सफल होने तक यही से कार्य संचालित करेंगे। यह ऐसा निर्णय है जो सभी का मनोबल हर विकट परिस्थिति में ऊंचा रखता है। कहा जाता है कि कठिन समय में पहले बुद्धि की परीक्षा होती है इस लिए मनोबल ऊंचा रखने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाना भी जरुरी होता है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने ऐसा निर्णय लेकर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

धनोल्टी विधानसभा में 1 अरब 41 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा धनोल्टी के अंतर्गत विकासखण्ड मुख्यालय कंडीसौड पहुंचकर नागराजा मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके उपरांत उन्होंने विकासखण्ड कार्यालय प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में 1 अरब 41 करोड़ 37 लाख लागत की कुल 21 योजनाओं का शिलान्यास किया। जिसमे पेयजल निगम की 6, जल संस्थान की 10, पीएमजीएसवाई द्वितीय तथा लोनिवि की 2-2 योजनाएं व ग्रामीण निर्माण विभाग की 1 योजना शामिल है।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जब से मुख्य सेवक के रूप में जनता की सेवा करने का मौका मिला तब से हमारी सरकार विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य कर रही है। उन्होंने कहा युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न विभागों में रिक्त चल रहे 24000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है साथ ही युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रत्येक जिले में कैंप लगाए जा रहे हैं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत तमाम युवाओं को ऋण वितरित किए जा रहे हैं.। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की वजह से अनेक लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा , पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए 200 करोड़ का राह पैकेज दिया। उन्होंने कहा सरकार ने निर्णय लिया कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में आवेदकों को अधिकतम आयु सीमा में एक वर्ष की छूट दी जायेगी। साथ ही मार्च 2022 तक विभिन्न भर्तियों का आवेदन शुल्क माफ किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजीविका मिशन, स्वयं सहायता समूहों, कलस्टरों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाली प्रदेश की बहनों को 5 लाख रूपये तक का ऋण बिना ब्याज दिया जा रहा है। साथ ही ग्राम प्रधानों का मानदेय 1500 रूपये से बढ़ाकर 3500 रूपये किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के हर वर्गों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में अनेक जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज हिन्दुस्तान विकास की नई ऊंचाईयों को छू रहा है। साथ ही भारत का दुनिया में मान-सम्मान बढ़ा रहा है, उन्होंने कहा भारत को सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री कार्य कर रहे हैं। उन्हीं के पद्चिन्हों पर चलकर राज्य में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए मांग पत्र पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राप्त मांग पत्रों का परीक्षण किया जाएगा।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार, पूर्व कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह राणा, पूर्व विधायक महावीर सिंह रांगड़, जिलाधिकारी इवा आशीष श्रीवास्तव, एसएसपी तृप्ति भट्ट, प्रमुख थौलधार प्रभा बिष्ट, डीसीबी के अध्यक्ष सुभाष रमोला, जिलाध्यक्ष बीजेपी विनोद रतूड़ी, गोविंद सिंह रावत, राजेन्द्र जुयाल, रामचंद्र खंडूरी, मीरा सकलानी के अलावा जिला स्तरीय अधिकारी व स्थानीय जनता उपस्थित रहीं।

साहस का परिचय दे रहे धामी ने दमदार फैसलों से अपने को औरों से अलग साबित किया

यूं तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने साढ़े चार महीने के कार्यकाल में 500 से अधिक फैसले ले चुके हैं पर देवस्थानम बोर्ड पर फैसला लेना उनके लिए आसान काम नहीं था। तमाम वजहों से यह मुद्दा धामी सरकार के लिए पेचीदा बना हुआ था। एक तो अपनी ही पार्टी की पूर्व सरकार के फैसले पर उन्हें पुनर्निर्णय करना था। दूसरा, यह निर्णय इतने सलीके से लिया जाना था जिससे पार्टी पर उसका नकारात्मक प्रभाव ना पड़े और नाराज वर्ग भी संतुष्ट हो जाए। धामी अपने व्यक्तित्व के अनुरूप सभी पक्षों से सहजता से मिले, सरलता से उनको सुना और फिर उन्होंने सूझबूझ के साथ कदम आगे बढ़ाए। अंततः युवा नेतृत्व ने जिस बुद्धिमत्ता के साथ निर्णय लिया उसकी चौतरफा न केवल चर्चा है बल्कि प्रशंसा भी हो रही है। यह फैसला उनकी सियासी परिपक्वता और दूरदर्शिता को भी दर्शाता है।
देवस्थानम बोर्ड का गठन जनवरी 2020 में तब के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था। बोर्ड के गठन के जरिए 51 मंदिरों का नियंत्रण राज्य सरकार के पास आ गया था, जिनमें केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री चार धामों मंदिर भी शामिल थे। तब से ही तीर्थ-पुरोहित, हक-हकूकधारी और मंदिरों से जुड़ा हर पक्ष इस फैसले को वापस लेने की मांग पर अड़ा था। जुलाई 2021 में मुख्यमंत्री पद से त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अचानक विदाई में देवस्थानम बोर्ड के गठन को भी एक कारण माना गया। उनके बाद तीरथ सिंह रावत को प्रदेश की कमान सौंपी गई तो उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में पुर्नर्विचार किया जाएगा। सियासी परिस्थितियां बदलीं और इसी साल जुलाई में पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने तीर्थ-पुरोहितों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने का टाइम बाउण्ड वादा किया। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी तो सीएम धामी ने फिर अपने सहयोगी मंत्रियों की एक कमेटी (पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अगुवाई में) गठित कर रिपोर्ट का अध्ययन करने और उस पर अपना सुझाव देने को कहा। बीते सोमवार को मंत्रियों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट संस्तुति समेत मुख्यमंत्री को सौंपी। धामी ने बिना कोई देर किए 30 नवंबर की सुबह देवस्थानम बोर्ड को भंग करने और इस एक्ट को वापस लेने का फैसला सुना दिया।
दरअसल, देवस्थानम बोर्ड छोटा मुद्दा नहीं था। सनातनी संस्कृति और परम्पराओं से जुड़े होने के कारण यह बेहद संवेदनशील बन गया था। खासतौर से भाजपा के लिए जो खुद को सनातन संस्कृति और परम्पराओं का संवाहक मानती है। मामले को इसलिए भी व्यापकता मिली क्योंकि उत्तराखण्ड में स्थित चारधामों से देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। देवस्थानम बोर्ड के गठित होते ही श्रृद्धा के केन्द्र बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे मंदिरों की देखभाल, रखरखाव और उनकी व्यवस्थाओं के प्रबंधन से जुड़ी सदियों पुरानी परम्पराओं को बदलने के औचित्य पर चर्चा शुरू हो गई थी। एक पक्ष देवस्थानम बोर्ड की वकालत तो दूसरा इसके विरोध में खड़ा हो गया। मामला सिर्फ सोशल मीडिया में बहस तक सीमित नहीं रहा बल्कि हाईकोर्ट से होते हुए देश की सर्वाेच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। यही एकमात्र ऐसा मुद्दा था जिसे सुलझाने में धामी को अपनी सियासी परिपक्वता साबित करनी थी। चूंकि देवथानम बोर्ड का गठन भाजपा सरकार ने किया था लिहाजा दलगत मजबूरी के चलते धामी इसे एक झटके में वापस नहीं ले सकते थे, वरना इसके दुष्प्रभाव सामने आ जाते। बहुत ही समझदारी के साथ धामी ने स्वच्छ छवि के भाजपा नेता मनोहर कांत ध्यानी के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई। कमेटी ने चारधाम के तीर्थ पुरोहितों, विद्वान पण्डितों, हक-हकूकधारियों और मंदिरों से जुड़े भी वर्गों से सिलसिलेवार बात की। एक नहीं कई दौर की बातचीत में सबकी राय ली गई। तसल्ली के साथ सभी पक्षों को सुना गया। कमेटी ने जब अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी तो उस पर संस्तुति देने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने फिर एक और कमेटी गठित की जिसमें उन्होंने अपने तीन सहयोगी मंत्रियों सतपाल महाराज, अरविन्द पाण्डेय और सुबोध उनियाल को शामिल किया। मंत्रियों की कमेटी की रिपोर्ट मिलने पहले धामी ने दिल्ली जाकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात कर उनसे इस पर निर्णय को लेकर सहमति ले ली। फिर मंगलवार की सुबह उन्होंने देवस्थानम बोर्ड पर वो फैसला सुनाया जिसका सभी को इंतजार था। अपने इस फैसले से पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव से ऐन पहले एक तीर से कई निशाने साध दिए हैं। उन्होंने एक ऐसा विषय जो चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता था उसे सुलझा लिया, साथ ही नाराज पंडा-पुरोहितों और हकदृहकूकधारियों को भी मना लिया। इस मुद्दे पर विपक्ष की हर रणनीति अब धरी की धरी रह गई है और पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर खुद को उत्तराखण्ड के भविष्य का नेता साबित कर दिया है।