उत्तराखंड के 75 वीर सपूतों ने कारगिल युद्ध में दिया सर्वाेच्च बलिदान, देवभूमि को वीरभूमि बनाने में सैनिकों का महत्वपूर्ण योगदानः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय कारगिल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में आयोजित सैनिक सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, शहीदों के परिजनों तथा सैन्य विभूतियों का सम्मान किया। कार्यक्रम में देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजय कारगिल दिवस भारतीय सेना के अद्वितीय पराक्रम, अटूट संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति और अदम्य साहस का वह गौरवशाली अध्याय है, जो भारत के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जमा देने वाली ठंड, दुर्गम पहाड़ियों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और अद्भुत शौर्य का परिचय देते हुए देश की विजय सुनिश्चित की। कारगिल विजय हमारे वीर सैनिकों के सर्वाेच्च बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण की अमर गाथा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी वीरता और बलिदान की चर्चा होती है, देवभूमि उत्तराखंड का नाम गर्व के साथ लिया जाता है। प्रदेश के लगभग हर दूसरे घर का कोई न कोई सदस्य भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। इसी कारण उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया। इन अमर सपूतों का बलिदान प्रदेश और देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों का सम्मान और राष्ट्र की सुरक्षा राजनीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारतीय सेना का आत्मविश्वास, सामर्थ्य और आधुनिक क्षमता पूरी दुनिया देख रही है। भारत अब आतंकवादी हमलों के बाद केवल निंदा तक सीमित रहने वाला देश नहीं है, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से दुश्मन को निर्णायक जवाब देने वाला राष्ट्र है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों, पुलों और अन्य रणनीतिक आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। वन रैंक-वन पेंशन की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान और न्याय दिया गया है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण, रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि तथा सैनिकों के कल्याण से जुड़े अनेक निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा और सैनिकों का सम्मान केंद्र सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि बलिदानी सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की समय-सीमा को भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। शहीद परिवारों के लिए नौकरी-पूर्व प्रशिक्षण और पुत्री विवाह सहायता जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये किया गया है। देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के पांचवें धाम के रूप में निर्माणाधीन सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। यह सैन्य धाम देश के अमर बलिदानियों की वीरता और उत्तराखंड की सैन्य परंपरा की जीवंत गाथा बनेगा। इसके साथ ही खटीमा और टनकपुर के बीच भव्य सैन्य स्मारकन स्थापित करने का संकल्प भी लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सेवामुक्त अग्निवीरों की रोजगार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए देश के पहले अग्निवीर रोजगार सेल की स्थापना का निर्णय लिया गया है। पुलिस, वन विभाग तथा अन्य सरकारी सेवाओं में होने वाली भर्तियों में सेवामुक्त अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। स्वरोजगार के इच्छुक अग्निवीरों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों और सेवामुक्त अग्निवीरों को पर्वतीय क्षेत्रों में होमस्टे स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। सीमावर्ती गांवों में स्थानीय निवासियों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु विशेष सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस से संबंधित लंबे समय से चली आ रही मांग पर राज्य सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही जिला अदालतों में सैन्य परिवारों से संबंधित भूमि धोखाधड़ी के लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए भी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और बलिदानियों के आश्रितों के हितों की रक्षा के लिए अपने श्विकल्प रहित संकल्पश् के साथ निरंतर कार्य करती रहेगी।

कार्यक्रम में आयोजित कवि सम्मेलन के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य और कविता राष्ट्रप्रेम की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकरश् की ओजस्वी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, वीर सैनिक, पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, शहीदों के परिजन, सैन्य अधिकारी, सम्मानित कविगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रदेशवासी उपस्थित रहे।

प्रोजेक्ट या प्रोजेक्ट के किसी भाग में लागत में अप्रत्याशित बढ़त के मामलों को गंभीरता से लेंः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान समिति द्वारा विभिन्न विभागों के प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई।

मुख्य सचिव ने पंपिंग पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव को सतत् और किफायती बनाए रखने के लिए सॉलर पावर से संचालित किए जाने की संभावना तलाशते हुए प्रस्ताव में शामिल किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी पंपिंग पेयजल परियोजनाओं के निर्माण में सोलराइजेशन की संभावनाओं को अनिवार्य रूप से तलाश जाए। उन्होंने नियोजन विभाग को इस सम्बन्ध में शासनादेश जारी किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने विभागों द्वारा अभी भी कंसल्टेंट्स को दी जाने वाली फीस, प्रोजेक्ट कॉस्ट के प्रतिशत के रूप में दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कंसल्टेंट्स को फीस लमसम में दिए जाने हेतु पूर्व में दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इस सम्बन्ध में किया गया शासनादेश पुनः विभागों को प्रेषित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रोजेक्ट या प्रोजेक्ट के किसी भाग में लागत में अप्रत्याशित बढ़त के मामलों को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिस एजेंसी द्वारा ग़लत आंकलन किए जाने के कारण लागत में बढ़ोतरी हुयी है, उस एजेंसी पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने नियोजन विभाग को, लोक निर्माण विभाग के मार्गदर्शन में कॉस्ट वेरिएशन के लिए गाइडलाइन तैयार किए जाने के निर्देश दिए। इससे परियोजनाओं की लागत में अनावश्यक बढ़ोत्तरी को रोक जा सकेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में आयुष की दृष्टि से काफी संभावना है, इस दिशा में अच्छे प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाएं, प्रोजेक्ट की लोकेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने गरुड़ (बागेश्वर) में आईटीआई के प्रस्ताव पर आसपास हॉस्टल की व्यवस्था भी सुनिश्चित किए जाने की बात कही। कहा कि इससे आईटीआई में एडमिशन लेने वाले छात्रों को काफ़ी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी एवं सी. रविशंकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शौर्य स्थल, चीड़बाग, गढ़ीकैंट, देहरादून में आयोजित ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्र की रक्षा के लिए उनके सर्वाेच्च बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम, शौर्य और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। वर्ष 1999 में भारतीय वीर जवानों ने विषम परिस्थितियों में अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा की और विश्व के समक्ष भारतीय सेना के अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि देश सदैव अपने वीर सैनिकों और शहीदों के बलिदान का ऋणी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को वीरों की भूमि के रूप में जाना जाता है। प्रदेश के अनेक वीर सैनिकों ने कारगिल युद्ध सहित विभिन्न सैन्य अभियानों में अपने अद्वितीय साहस और सर्वाेच्च बलिदान से देश का गौरव बढ़ाया है। राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा उनके सम्मान और हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें तथा देश की एकता, अखण्डता और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, युवा, मातृशक्ति और अनेक गणमान्य मौजूद थे।

संत रविदास का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का अनुपम संदेशः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज त्यागी रोड, देहरादून स्थित स्थानीय होटल में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘समरसता संकल्प अभियान’ की प्रदेश कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने संत रविदास महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके विचारों और आदर्शों को समाज के लिए सदैव प्रासंगिक बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास का जीवन भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसने समाज को समानता, मानवता, सामाजिक न्याय और समरसता का मार्ग दिखाया। उन्होंने अपने विचारों और जीवन आचरण के माध्यम से समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों के विरुद्ध जनजागरण का कार्य किया। संत रविदास जी का स्पष्ट संदेश था कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके कर्म, चरित्र और विचारों से होती है।

उन्होंने कहा कि संत रविदास ने आडंबरों से मुक्त, सहज भक्ति और शुद्ध अंतःकरण को जीवन का आधार माना। ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का उनका संदेश आज भी मानव जीवन को भीतर से शुद्ध और समाज को बाहर से समरस बनाने की प्रेरणा देता है। संत रविदास जी ने ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान मिले, कोई भेदभाव न हो और कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। उनका ‘बेगमपुरा’ का विचार एक ऐसे दुखरहित, समतामूलक और खुशहाल समाज की कल्पना है, जो आज भी समाज को दिशा प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश संत रविदास जी के समरसता और अंत्योदय के विचारों को व्यवहार में उतारते हुए आगे बढ़ रहा है। सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ समाज के प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में अंत्योदय को अपनी प्राथमिकता मानकर कार्य कर रही है। सरकार का लक्ष्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, युवाओं के लिए पारदर्शी रोजगार व्यवस्था तथा वंचित और जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समानता और समान अधिकार की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है। इससे प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून की व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि समाज में किसी भी प्रकार के भेदभाव के स्थान पर समानता, न्याय और सामाजिक सद्भाव की भावना मजबूत हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास के विचारों को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि ‘समरसता संकल्प अभियान’ को जन-जन का अभियान बनाने के लिए गांव-गांव, मोहल्ले-मोहल्ले और घर-घर तक पहुंचें। चौपालों, संवाद कार्यक्रमों और जनजागरण गतिविधियों के माध्यम से संत रविदास जी के समानता, प्रेम, भाईचारे और सामाजिक बंधुत्व के संदेश को व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए।

उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली मानसिकता और भेदभाव की प्रवृत्तियों का मुकाबला सामाजिक एकता और राष्ट्र प्रथम की भावना से किया जाना चाहिए। जब समाज जाति-पाति और भेदभाव की सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ेगा, तभी संत रविदास जी के समरस और खुशहाल समाज का सपना साकार होगा।

मुख्यमंत्री ने सभी से संत रविदास के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने, समाज में समरसता और सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत करने तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूर्ण किया जा सकता है।

इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

टिहरी मेडिकल कॉलेज का निर्माण ऐसे स्थान पर होगा, जहां से अधिक जनसंख्या को इसका लाभ मिलेः सुबोध

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सचिवालय में उच्च अधिकारियों के साथ प्रस्तावित टिहरी मेडिकल कॉलेज के निर्माण से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि चयन, निर्माण की रूपरेखा पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री उनियाल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण ऐसे स्थान पर होगा, जिससे अधिकाधिक जनसंख्या को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना से क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा तथा लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी तथा स्वास्थ्य ढांचे का सुदृढ़ीकरण होगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना टिहरी जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण से दूर-दराज के क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एवं मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य से संबंधित भूमि चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है तथा यह दोहराया कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगी और प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी।

बैठक में सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पांडे ने जिलाधिकारी टिहरी को निर्देशित किया कि चयनित भूमि से संबंधित प्रस्ताव शीघ्र शासन को उपलब्ध कराया जाए, ताकि परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

इस अवसर पर अपर सचिव रोहित मीणा भी मौजूद रहे।

सीएम की अध्यक्षता में हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड और राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक सम्पन्न

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य वन्यजीव बोर्ड और राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक लेते हुए, प्रदेश में मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने के साथ ही वन्य जीव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 23वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, वन्यजीव गलियारों के संरक्षण तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सभी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी आधुनिक तकनीक के साथ जनसहभागिता को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए वन्य जीव आधारित पयर्टन को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मानव वन्य जीव संघर्ष के दौरान दूसरे को बचाने के लिए साहसिक प्रदर्शन करने वाले आम लोगों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीवों के हमले में मृत एवं घायल व्यक्ति और उसके परिवार को मानकों के अनुसार तय समय पर मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं में वन्यजीव संरक्षण संबंधी शर्तों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में राज्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में की गई प्रगति की समीक्षा की गई। बताया गया कि वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान तथा विभिन्न प्रस्तावों पर नियमानुसार स्वीकृतियां प्रदान की जा रही हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (फत्ज्) गठित करते हुए, कैमरा ट्रैप, ड्रोन, सर्प बचाव किट, सोलर लाइट जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत, निगरानी व्यवस्था तथा वन कर्मियों को आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

बैठक में संरक्षित क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों पर विचार करते हुए राजाजी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में गैस पाइपलाइन और अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में सड़क, आईटीबीपी अवसंरचना तथा ऑप्टिकल फाइबर केबल जैसी जनहित की परियोजनाओं को आवश्यक शर्तों के अधीन राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति को अग्रसारित करने की अनुमति प्रदान की गई। इसके बाद आयोजित राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने

कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता एवं वन्यजीव संपदा की दृष्टि से देश का अग्रणी राज्य है। राज्य में बाघ संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सहभागिता, आधुनिक तकनीक का उपयोग तथा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन्यजीव संरक्षण और विकास कार्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वन्यजीव कॉरिडोरों का संरक्षण, कैमरा ट्रैप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी तथा वैज्ञानिक प्रबंधन को और मजबूत किया जाए। उन्होंने वन्यजीवों के प्राकृतिक जल स्रोतों एवं चारागाहों के विकास, वनाग्नि प्रबंधन तथा संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को विस्तार देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ के दौरान मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने के लिए क्यूआरटी टीम की तैनाती की जाए।

बैठक में कॉर्बेट एवं राजाजी टाइगर रिजर्व के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन, पर्यावरण अनुकूल सफारी वाहनों को बढ़ावा देने, संरक्षित क्षेत्रों में कार्यरत फील्ड स्टाफ के लिए विशेष प्रोत्साहन तथा वन्यजीव अपराधों की प्रभावी जांच के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई।

बैठक में वन मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक दीवान सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद गीताराम गौड़, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक हॉफ कपिल लाल, एडीजी ए.पी. अंशुमन, सचिव सी रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक नीना ग्रेवाल एवं वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सीएम धामी ने जन समस्याओं के त्वरित एवं समयबद्ध समाधान को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरता से सुना। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जन समस्या का संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनहित एवं सुशासन के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही तभी सार्थक होगी, जब आम नागरिकों की समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा शिकायतकर्ता को समाधान की प्रगति से भी अवगत कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना सरकार का दायित्व है। प्रत्येक अधिकारी जनसेवा की भावना के साथ कार्य करते हुए जनता की समस्याओं के समाधान में पूर्ण संवेदनशीलता एवं उत्तरदायित्व का परिचय दें। उन्होंने कहा कि जन शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप एवं आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप को प्राप्त जन समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों का समाधान जिला अथवा विभागीय स्तर पर संभव है, उनका तत्काल निस्तारण किया जाए तथा जिन प्रकरणों में उच्च स्तर पर निर्णय अपेक्षित है, उन्हें शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को प्रेषित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जाए, जिससे प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समय पर न्याय एवं राहत मिल सके।

नकल माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई, यूटीयू परीक्षा का पेपर आउट करने वाला सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार

उत्तराखंड में भर्ती एवं शैक्षणिक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए चल रहे अभियान के तहत दून पुलिस ने नकल माफियाओं के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है।

कोतवाली प्रेमनगर में परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की तहरीर पर दर्ज मुकदमे के अनुसार 8 जुलाई को आयोजित यूटीयू की सम-सेमेस्टर परीक्षा से पहले आरोपी सहायक प्रोफेसर ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न छात्रों के साथ साझा किए थे। परीक्षा संपन्न होने के बाद प्रश्नपत्र का मिलान करने पर साझा किए गए प्रश्नों में काफी समानता पाई गई। विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति ने भी अपनी जांच में पाया कि परीक्षा से पूर्व छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप एवं अन्य माध्यमों पर समान प्रश्न साझा किए गए थे।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साक्ष्य संकलित किए और आरोपी सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया। मामले में बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है तथा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि चाहे भर्ती परीक्षाएं हों या विश्वविद्यालय की परीक्षाएं, किसी भी प्रकार की नकल, प्रश्नपत्र लीक या परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लागू सख्त नकलरोधी कानून और लगातार की जा रही कार्रवाई के परिणामस्वरूप विभिन्न मामलों में अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं एवं उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है और इस दिशा में अभियान आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा।

सीएम धामी ने किया उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कई योजनाओं का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए अनेक नई कल्याणकारी योजनाओं का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने श्रमिक और श्रमिक परिवारों के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ योजना के अन्तर्गत 02 मेडिकल मोबाइल वैन का भी फ्लैग ऑफ किया।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार श्रमिक कल्याण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में आज शुरु की जा रही कल्याणकारी योजनाएं भी श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री पोषण योजना” के माध्यम से जहां श्रमिक परिवारों को पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री शिक्षा सामग्री योजना के माध्यम से श्रमिक भाई -बहनों के बच्चों को शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान से प्रेरणा लेकर शुरु की जा रही मुख्यमंत्री स्वच्छता सामग्री वितरण कार्यक्रम के जरिए श्रमिक परिवारों में हाईजिन किट का वितरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को कौशल प्रदान करने के लिए शुरु की जा रही, मुख्यमंत्री योग एवं वेलनेस आरोग्य योजना, के अंतर्गत पात्र छात्र-छात्राओं को योग एवं वेलनेस के क्षेत्र में निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। योजना के तहत हर साल 210 बच्चों को आवासीय सुविधायुक्त प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 70 युवाओं को भी प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद रोजगार से जोड़ने की भी व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड पारदर्शी तरीके से कार्य कर रहा है, इसका लाभ वास्तविक श्रमिकों तक पहुंच रहा है। इसी क्रम में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के अंतर्गत शुरु मोबाइल मेडिकल वैंस के जरिए विशेष स्वास्थ्य दल दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचकर श्रमिक भाई-बहनों को उनके कार्य एवं आवास स्थल पर ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराएंगे। इस मोबाइल मेडिकल वैन में एक्स-रे, ईसीजी सहित 44 प्रकार की जाँचें पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएँगी। साथ ही इस वैन में टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह भी मिलेगी तथा जाँच के बाद तीन महीने तक उनके स्वास्थ्य की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। इसकी शुरुआत पौड़ी गढ़वाल और चम्पावत जनपद से हो रही है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में श्रमिकों के मान सम्मान को बढ़ाने के लिए’’श्रमेव जयते’’ का मंत्र दिया था। इसी क्रम में राज्य सरकार भी ’’सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’’ के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों को केवल श्रमशक्ति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विकासशक्ति मानती है।

सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि जो हाथ प्रदेश के विकास का निर्माण करते हैं, उनका और उनके परिवार का जीवन भी सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध होना चाहिए। इसी सोच के तहत एक ओर राज्य सरकार श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। वहीं महिला श्रमिकों एवं श्रमिक परिवारों को मातृत्व के दौरान बेहतर देखभाल और पोषण के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा श्रमिक परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए भी आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

बोर्ड में पंजीकरण नवीनीकरण कराते रहें श्रमिक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रमिकों को उनके कार्य के लिए आवश्यक औजार, साइकिल और सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर उन्हें आजीविका की दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास भी कर रही है। इसके अलावा, पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को अपना घर बनाने या घर खरीदने के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, वृद्ध निर्माण श्रमिकों को मासिक पेंशन उपलब्ध कराकर उनके जीवन को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान देने का कार्य भी हमारी सरकार द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आग्रह करते हुए कहा कि सभी पात्र श्रमिक उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में अपना पंजीकरण समय-समय पर नवीनीकृत कराते रहें, जिससे सरकार द्वारा संचालित सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंच सके। इससे पहले बोर्ड के सचिव पीसी दुम्का ने बोर्ड की विभिन्न गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करने के साथ ही नई योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

इस मौके पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, राज्य सलाहकार संविदा बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश पंत, सतर्कता समिति की अध्यक्ष गीता रावत, उपाध्यक्ष मोहनी पोखरिया, अध्यक्ष मीडिया सलाहकार समिति प्रो. गोविन्द सिंह, सचिव श्रीधर बाबू अद्यांकी, श्रमायुक्त पी. सी. दुम्का उपस्थित हुए।

नजरियाः उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव

उत्तराखण्ड सरकार, राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी कर रही है। आयोग के गठन को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों तथा संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक व्यक्ति और संस्थान 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर देश में नई पहल की थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत के संरक्षण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी के बाद 15 जुलाई 2026 को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

प्रस्तावित आयोग संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास और रोजगार, प्रशासन तथा तकनीकी क्षेत्रों में संस्कृत के उपयोग के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल माध्यमों में संस्कृत की संभावनाओं पर भी कार्य करेगा। आयोग संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दीर्घकालिक नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से है, जिसमें संस्कृत का विशेष स्थान है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। राज्य सरकार इसे जन-जन तक पहुंचाने और समय के अनुरूप नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री