मुख्यमंत्री ने विद्या मंदिर, मांडूवाला में छात्रावास शिलान्यास कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मांडूवाला, देहरादून स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में छात्रावास के शिलान्यास कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने छात्रावास के शिलान्यास के अवसर पर सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह छात्रावास, छात्रों को आवासीय सुविधा प्रदान करने के साथ उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा भारत की स्वतंत्रता के बाद सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्रवाद की भावना को पुनर्स्थापित करने के लिए सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की गई। मुख्यमंत्री ने सरस्वती विद्या मंदिर मांडूवाला के विद्यार्थियों द्वारा हाल ही में संपन्न हुई 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने पर शुभकामनाएं दी।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में शिक्षा व्यवस्था में हुए व्यापक सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए गए हैं। प्रदेश सरकार ने देश में सर्वप्रथम नई शिक्षा नीति को लागू किया। प्रदेश में 141 पीएम श्री विद्यालय तथा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश के 13 जनपदों के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम की व्यवस्था भी की गई है। क्वालिटी एजुकेशन सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. पुस्तके अनिवार्य की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखण्ड के सरकारी और अशासकीय स्कूलों के छठवीं से 12वीं कक्षा तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को, मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जा रही है। राज्य में बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए प्रत्येक विकासखण्ड के 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजने की शुरुआत भी की गई है। राज्य में मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना भी प्रारंभ की गई है। स्कूली शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से राज्य में विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना भी की गई है।

प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों को भी विद्या समीक्षा केंद्र से जोड़ा जाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के विद्या समीक्षा केंद्र के गुजरात मॉडल को लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य के लगभग 16 हजार विद्यालय इस नवाचार से जोड़े जा चुका है। शीघ्र ही प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों को भी विद्या समीक्षा केंद्र से जोड़ा जाएगा। जिससे इन विद्यालयों से संबंधित शिक्षकों, छात्रों तथा समस्त शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी एक केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से सरकार के पास उपलब्ध रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा के साथ खेलों पर भी विशेष ध्यान दे रही है।

राष्ट्रीय स्तर में मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की ऐतिहासिक शुरुआत
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार ने प्रदेश में करोड़ों रूपए की लागत से स्टेडियम एवं खेल सुविधाओं का निर्माण करवाया गया है 8 वर्ष की उम्र से ही प्रतिभावान खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है। प्रदेश के आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेजों के खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, शिक्षा, आवास, भोजन व किट आदि भी प्रदान किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की किसी भी प्रतियोगिता में मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की ऐतिहासिक शुरुआत भी की है। उन्होंने कहा हाल ही में आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य एवं सफल आयोजन में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 100 से अधिक मेडल लाकर इतिहास रचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्या भारती द्वारा संपूर्ण भारत में 12 हजार से अधिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं जिनमें लगभग 35 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन विद्यालयों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति, संस्कारों और समाज के प्रति उत्तरदायित्व के बोध की भावना को विकसित करने का किया जाता है। विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों में चरित्र निर्माण और संस्कार सेवा भाव को महत्व दिया जाता है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य सुरेश सोनी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सहदेव पुंडीर, अखिल भारतीय संगठन मंत्री शिवकुमार, क्षेत्रीय संगठन मंत्री विद्या भारती (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) डोमेश्वर साहू, अध्यक्ष विद्यालय परिसर सुरेंद्र, डॉ. सुषमा अग्रवाल, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, नगर पालिका अध्यक्ष नीरू देवी, अध्यक्ष बाल आयोग गीता खन्ना एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम ने निकायों के कार्यालयों को डिजिटल करने, रजत जयंती पार्क बनाने, वेंडिंग जोन बनाने की घोषणा की

सीएम धामी ने राज्य के सभी नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों को नसीहत दी है कि वे अपनी भूमिका को केवल एक पद के रूप में न देखें, बल्कि इसे जनसेवा के एक मिशन के रूप में अपनाएं। सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी ट्रिपल इंजन सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और कार्यों का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। आप सभी अपने-अपने निकाय कार्यालय को केवल एक प्रशासकीय इकाई ही नहीं, बल्कि उसे एक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करें, जहाँ प्रत्येक नागरिक बिना झिझक के पूरे विश्वास के साथ आएं। आप सभी पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को अपनी कार्यशैली का मूल मंत्र बनाएं। आप लोग नियमित रूप से विशेषकर उन कार्यों की मॉनिटरिंग स्वयं करें, जिनमें भ्रष्टाचार की संभावना अधिक रहती है, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर आपकी सतर्कता ही सुशासन की सबसे बड़ी गारंटी बन सकती है। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएं और अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को ये स्पष्ट संदेश दें कि किसी भी स्तर पर भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मेरा मानना है कि हमारी जिम्मेदारी केवल सत्ता में बने रहने की ही नहीं है, बल्कि हमारी असल जिम्मेदारी जनता की सेवा करने की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्य सेवक सदन में शहरी विकास विभाग द्वारा आयोजित शहर से संवाद कार्यक्रम में राज्य के सभी नगर निगम एवं नगर पालिकाओं के जनप्रतिनिधियों से संवाद किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहरी विकास विभाग द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों की सहायता हेतु तैयार तीन वेब पोर्टल लॉन्च किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नगर निकायों के कार्यालयों को डिजिटल करने, रजत जयंती पार्क बनाने, नगर निकायों में वेंडिंग जोन बनाने, भारत सरकार से टाइड फंड को अनटाइड करने का अनुरोध करने की तथा राज्य की प्रत्येक नगर निगम में 10, नगर पालिका में 5 तथा नगर पंचायत में 3 ही-टेक हेयर सैलून/पार्लर स्थापित करने हेतु स्थानीय महिला एवं पुरुषों हेतु प्रशिक्षण का कार्यक्रम चलाने की घोषणा की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी नगर निगम के महापौर एवं नगर पालिकाओं के अध्यक्षों सहित विभिन्न स्थानीय जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को सुना तथा नोट किया।

नगर निकाय शहरों की आत्माः सीएम
नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शहरी सरकार नगर निगम और नगर पालिकाएं किसी भी शहर की आत्मा हैं। यह न केवल बुनियादी सुविधाएं जनता तक पहुँचाने का कार्य करती हैं, बल्कि किसी शहर की दिशा और दशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुख्यमंत्री ने याद दिलाई नगर निकायों की जिम्मेदारियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है, कई नगरों में जल निकासी की समस्या बनी हुई है। साथ ही शहरों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता है। ट्रैफिक जाम अब शहरों में एक आम चुनौती बन चुका है, जिसे नियंत्रित करने के लिए स्थानीय निकायों को भी को विशेष प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही हमें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्राथमिकता के साथ कार्य करना होगा।

शहरी सरकार से सीएम धामी के विशेष अनुरोध
सभी नगर निकायों से अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आप लोगों को सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए संकल्पित होकर प्रयास करने होंगे। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी सरकार नगर निकायों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के सिद्धांत पर चलते हुए भारत को विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से आज देश के लाखों शहरों, कस्बों और नगरों में साफ-सफाई की एक नई संस्कृति विकसित हुई है। अमृत योजना के द्वारा शहरी बुनियादी ढांचे जैसे जल आपूर्ति, सीवरेज और हरित स्थानों को सशक्त किया गया है। स्मार्ट सिटी मिशन द्वारा शहरी विकास को तकनीक और नागरिक सुविधा के साथ जोड़ते हुए एक आदर्श नगर विकास का मॉडल प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाखों गरीब परिवारों को अपने स्वयं के पक्के घर प्राप्त हुए हैं।

राज्य सरकार उत्तराखंड के विकास को एक नई दिशा देने के लिए प्रयासरत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग से हमारी राज्य सरकार भी उत्तराखंड के विकास को एक नई दिशा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हमारी सरकार ने राज्य में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने का काम किया है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रत्येक नगर में ठोस कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन जैसी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को देने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही “विकास भी, विरासत भी” के मूल मंत्र के साथ राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य की मातृ शक्ति द्वारा प्रदेशभर में उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है। उनके बनाए उत्पाद मल्टीनेशनल कंपनियों के उत्पादों से भी बेहतर है। मातृ शक्ति राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने में माताओ-बहनों की सबसे बड़ी भूमिका है।

ट्रिपल इंजन सरकार लिख रही विकास का नया अध्याय
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज हमारा राज्य नीति आयोग की ैक्ळ इंडेक्स रिपोर्ट में सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूरे देश में प्रथम स्थान पर पहुंचा है। साथ ही, युवाओं को रोजगार देने में भी हम अग्रणी राज्य बनकर उभरे हैं। हमने एक वर्ष में बेरोजगारी दर में रिकॉर्ड 4.4 प्रतिशत की कमी लाने में सफलता प्राप्त की है, जो राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है। हमारी सरकार विकास कार्यों के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने के प्रति भी पूर्ण रूप से संकल्पबद्ध है। साथ ही, प्रदेश में सख्त दंगा रोधी और धर्मांतरण विरोधी कानूनों को भी लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश में एक सख्त भू-कानून भी लागू कर दिया है, जिससे राज्य के मूल स्वरूप के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इतना ही नहीं हमने जहां एक ओर राज्य में समान नागरिक संहिता कानून लागू कर एक समरस समाज के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। सख्त नकल कानून द्वारा नकल माफिया की रीढ़ तोड़ने का काम किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज राज्य के 23 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है। हम भ्रष्टाचार रूपी दीमक को जड़ से समाप्त करने के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कार्य कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में हमने भ्रष्टाचार में लिप्त करीब 200 से अधिक लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया है।

इस अवसर पर मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, सहित सभी नगर निगमों के मेयर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, सचिव नितेश कुमार झा, नगर आयुक्त नमामि बंसल, शहरी विकास विभाग के अधिकारी तथा विभिन्न स्थानीय निकायों के 100 से अधिक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

सीएम ने वित्त आयोग से ‘‘इनवॉयरमेंटल फेडरललिज्म’’ की भावना के अनुरूप उपयुक्त क्षतिपूर्ति का अनुरोध किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया एवं अन्य सदस्यों के साथ बैठक में प्रदेश की वित्तीय परिस्थितियों, चुनौतियों एवं विकास आवश्यकताओं पर विस्तृत रूप से राज्य का पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड की ’’ईको सर्विस लागत’’ को देखते हुए ‘‘इनवॉयरमेंटल फेडरललिज्म’’ की भावना के अनुरूप उपयुक्त क्षतिपूर्ति का अनुरोध किया है। साथ ही ’’कर-हस्तांतरण’’ में वन आच्छादन हेतु निर्धारित भार को 20 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने का सुझाव दिया। राज्य में वनों के उचित प्रबंधन और संरक्षण के लिए विशेष अनुदान पर भी विचार किया जाना चाहिए।

सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और राज्यों के मध्य बेहतर वित्तीय समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित विशिष्ट बैठक में उपस्थित वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया, आयोग के सदस्यगणों ऐनी जॉर्ज मैथ्यू, डा. मनोज पाण्डा, डा. सौम्या कांति घोष, सचिव ऋत्विक पाण्डेय, संयुक्त सचिव के.के. मिश्रा का उत्तराखंड राज्य स्थापना के इस रजत जयंती वर्ष में देवभूमि उत्तराखंड पधारने पर स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में उत्तराखण्ड ने अन्य क्षेत्रों की भांति वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य स्थापना के पश्चात राज्य के आधारभूत इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए बाह्य ऋणों पर निर्भर रहना पड़ा। राज्य ने जहां एक ओर विकास के विभिन्न मानकों के आधार पर उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं, वहीं बजट का आकार एक लाख करोड़ रूपए को पार कर गया है। नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2023-24 की एसडीजी इंडेक्स रिपोर्ट में उत्तराखंड सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले राज्यों में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश की बेरोजगारी दर में रिकॉर्ड 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में 11.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 70 प्रतिशत से अधिक भाग वनों से आच्छादित होने के कारण प्रमुख रूप से दो चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। जहां एक ओर वनों के संरक्षण हेतु अधिक व्यय करना पड़ता है, वहीं वन क्षेत्र में किसी अन्य विकास गतिविधि के निषेध के कारण ’’ईको सर्विस लागत’’ का वहन भी करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने ’’इनवॉयरमेंटल फेडरललिज्म’’ की भावना के अनुरूप उपयुक्त क्षतिपूर्ति दिये जाने, ’’कर-हस्तांतरण’’ में वन आच्छादन हेतु निर्धारित भार को 20 प्रतिशत तक बढ़ाये जाने और राज्य में वनों के उचित प्रबंधन और संरक्षण के लिए विशेष अनुदान दिये जाने का अनुरोध किया।

वर्ष 2010 में ’’इंडस्ट्रियल कन्सेसनल पैकेज’’ के खत्म होने के पश्चात हम ’’लोकेशनल डिस्एडवान्टेज’’ की पूर्ति करने में कठिनाई आ रही है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी अत्यंत सीमित है। इस कारण इन क्षेत्रों के लिए विशेष बजट प्राविधान करने पड़ते हैं। स्मार्ट क्लास, क्लस्टर स्कूल एवं दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से कम लागत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही टेली मेडिसन, विशेष एंबुलेंस सेवा तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील राज्य है। इन आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने एवं राहत तथा पुनर्वास कार्यों के लिए राज्य को सतत आर्थिक सहयोग की आवश्यकता होती है। राज्य में जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने हेतु स्थापित सारा और आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु ’’भागीरथ एप’’ की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण के इन विशिष्ट प्रयासों के लिए विशेष अनुदान पर विचार किए जाने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने के फलस्वरूप लागू होने वाले नियमों के कारण उत्तराखंड में जल विद्युत उत्पादन की संभावनाएं सीमित हो गई हैं। जल विद्युत क्षेत्र, विभिन्न कारणों से आर्थिकी में अपेक्षित योगदान नहीं दे पा रहा है, जिससे राजस्व के साथ-साथ रोजगार के क्षेत्र में भी भारी क्षति हो रही है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परियोजनाओं की क्षतिपूर्ति की राशि और संबंधित मैकेनिज्म निर्धारित किये जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थ स्थलों में आने वाली ’’फ्लोटिंग पाप्यूलेशन’’ के कारण परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य, कचरा प्रबंधन एवं अन्य सेवाओं के लिए भी अतिरिक्त इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना पड़ता है। जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राज्य में इन्फ्रास्टक्चर के निर्माण में अधिक लागत को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता प्रदान की जाए।

मुख्यमंत्री ने ’’कर-हस्तांतरण’’ के अंतर्गत राज्यों के बीच हिस्सेदारी के मानदंडों में टैक्स प्रयास के साथ-साथ ’’राजकोषीय अनुशासन’’ को भी ’’डिवोल्यूशन’’ फॉर्मूले में एक घटक के रूप में सम्मिलित किया जाना चाहिए। ’’रेवेन्यू डेफिसिट ग्रान्ट’’ के स्थान पर ’’रेवन्यू नीड ग्रान्ट’’ को लागू करना युक्तिसंगत रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की भौगोलिक संरचना की त्रिविमीयता (थ्री डाइमेनसियेलीटी) के कारण पूंजीगत व्यय तथा अनुरक्षण लागत दोनों ही अधिक होते हैं। राज्य में क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात भी कम है।

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य हर क्षेत्र में तेजी विकास कर रहा है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है। बेरोजगारी को कम करने की दिशा में भी राज्य में अच्छा कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत जिन चुनौतियों का सामना उत्तराखण्ड समेत अन्य पर्वतीय राज्य कर रहे हैं, उनके समाधान के लिए व्यापक स्तर पर विचार विमर्श किया जायेगा। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग द्वारा 31 अक्टूबर 2025 तक अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अवसर पर सचिव वित्त दिलीप जावलकर ने राज्य की विभिन्न चुनौतियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनई, आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण और अपर सचिव गण उपस्थित थे।

सीएम ने किया 16वें वित्त आयोग अध्यक्ष के नेतृत्व में पहुंची टीम का अभिनंदन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड दौरे पर आए 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में आयोग के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत एवं अभिनन्दन किया।

16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व वाली इस टीम में आयोग सदस्य एनी जॉर्ज मैथ्यू, मनोज पांडा, सौम्या कांतिघोष आयोग के सचिव ऋत्विक पांडे, संयुक्त सचिव केके मिश्रा, संयुक्त निदेशक पी अमरूथावर्षिनी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में होने वाली बैठक में राज्य सरकार वित्त आयोग के समक्ष अपने प्रस्ताव रखेगी। इसके बाद वित्त आयोग नगर निकाय, पंचायत प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक करेगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव वित्त दिलीप जावलकर सहित वित्त विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

प्रदेश में ई-रूपी प्रणाली एवं चार नई कृषि नीतियों का हुआ शुभारंभ, सीएम रहे मौजूद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आधुनिक तकनीक पर आधारित “ई-रूपी” प्रणाली का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने राज्य की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए चार महत्वाकांक्षी कृषि नीतियों (कीवी नीति, ड्रैगन फ्रूट, सेब तुड़ाई उपरांत तुड़ाई योजना और मिलट मिशन) का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार जल्द ही प्रदेश में फ्लावर और हनी पॉलिसी भी तैयार करेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-रूपी प्रणाली राज्य के अन्नदाताओं के लिए एक नई पहल है। “ई-रूपी प्रणाली” किसानों के लिए पारदर्शी, तेज और बिचौलिया-मुक्त डिजिटल भुगतान का नया माध्यम बनेगी। इस प्रणाली के अंतर्गत पायलट परियोजनाओं में किसानों को मिलने वाली अनुदान राशि ई-वाउचर के माध्यम से सीधे उनके मोबाइल पर भेजी जाएगी, जिसे वे अधिकृत केंद्रों या विक्रेताओं से खाद, बीज, दवाएं आदि खरीदने में उपयोग कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने ई-रूपी प्रणाली के सफल क्रियान्वयन हेतु अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव-गांव में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को जागरूक किया जाए, ताकि वे इस तकनीक का समुचित लाभ उठा सकें। इन सभी पहलों का उद्देश्य राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में कृषि एवं रोजगार को सुदृढ़ करना है, जिससे पलायन जैसी समस्या पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके। ये योजनाएं उत्तराखंड को आत्मनिर्भर, सशक्त एवं अग्रणी कृषि राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।

मुख्यमंत्री ने चार नई कृषि नीतियों का शुभारंभ करते हुए कहा कि ये सभी योजनाएं राज्य की कृषि विविधता को बढ़ावा देंगी और कृषकों की आय में वृद्धि का आधार बनेंगी।

इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 2030-31 तक 5,000 हैक्टेयर में अति सघन बागवानी का लक्ष्य तय किया गया है। सेब भंडारण व ग्रेडिंग हेतु ₹144.55 करोड़ की योजना लॉन्च की गई है, जिसमें सी.ए. स्टोरेज व सोर्टिंग-ग्रेडिंग इकाइयों को 50-70ः तक राजसहायता दी जाएगी। कृषि मंत्री जोशी ने कहा कि मिलेट नीति के अंतर्गत 2030-31 तक 70,000 हेक्टेयर क्षेत्र आच्छादित करने के लिए ₹134.893 करोड़ का लॉन्च की गई है। इसमें किसानों को बीज बोआई और उपज खरीद पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। साथ ही ये नीतियाँ राज्य के कृषकों की आर्थिकी को सशक्त बनाएंगी और उत्तराखंड के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएंगी।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष चाय विकास सलाहकार परिषद महेश्वर सिंह मेहरा, उपाध्यक्ष उत्तराखंड जैविक कृषि भूपेश उपाध्याय, जड़ी बूटी सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष बलबीर धुनियाल, राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, जड़ी बूटी समिति के उपाध्यक्ष भुवन विक्रम डबराल, सचिव डॉ. एसएन पांडेय, महानिदेशक कृषि रणवीर सिंह चौहान, निदेशक आईटीडीए गौरव कुमार सहित विभिन्न जिलों के काश्तकार मौजूद रहे।

कीवी नीति की खास बातें
कुल लागत 894 करोड़ रुपये
6 वर्षों में 3500 हेक्टेयर भूमि पर कीवी उत्पादन का लक्ष्य
लगभग 14 हजार मीट्रिक टन वार्षिक कीवी उत्पादन का लक्ष्य
9 हजार किसानों को होगा प्रत्यक्ष लाभ

ड्रैगन फ्रूट नीति की खास बातें
कुल लागत 15 करोड़ रुपये
228 एकड़ भूमि पर ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन
350 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य
छोटे और मध्यम किसानों को लाभ

सेब तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना
144.55 करोड़ रुपये की लागत
5,000 हेक्टेयर क्षेत्र को अति सघन बागवानी से आच्छादित करना
22 सी ए स्टोरेज इकाइयों एवं सॉर्टिंग-ग्रेडिंग इकाइयों की स्थापना
व्यक्तिगत कृषकों को 50 प्रतिशत और कृषक समूहों को 70 प्रतिशत तक अनुदान।

मिलेट नीति
135 करोड़ रुपये की लागत
दो चरणों में 68 विकासखंडों में 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेट उत्पादन के अंतर्गत लाना निवेश पर 80 प्रतिशत तक अनुदान।
प्रति हेक्टेयर पंक्ति बुआई पर 4000 रुपये और अन्य विधियों पर 2000 रुपये प्रोत्साहन।
किसानों को खरीद पर 300 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त प्रोत्साहन।

सीएम के नेतृत्व में हल्द्वानी में निकली तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में आयोजित भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा सफलतापूर्वक चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक विजय को समर्पित रही तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा में प्रतिभाग किया।

तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा मिनी स्टेडियम, हल्द्वानी से शहीद पार्क तक आयोजित की गई। जिसमें हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिकों, पूर्व सैनिकों सहित युवाओं एवं मातृशक्ति ने तिरंगे के साथ पदयात्रा में भाग लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शहीद स्थल में पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि भी दी।

मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर में भाग लेने वाले वीर सैनिकों को नमन करते हुए कहा कि भारत ने फिर से यह सिद्ध किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने अपने वीर सपूतों की बहादुरी का प्रदर्शन किया। भारत ने आतंकवाद और उसके समर्थकों को यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि नया भारत अब हर आतंकी कार्रवाई का जवाब उसी की भाषा में देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड वीर भूमि है, जहाँ का लगभग हर परिवार देश सेवा से जुड़ा है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से आह्वान किया कि वे सेना और सुरक्षाबलों के अनुशासन, शौर्य और राष्ट्र सेवा की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत किसी भी आतंकी चुनौती का मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है और अब देश की सीमाओं की रक्षा अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक से की जा रही है। आज भारत की सेना गोली का जवाब गोलों से दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के वीर जवानों ने दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में, वो सभी वीर जवानों का अभिनंदन करते हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने पहले ही कहा था कि भारत के खिलाफ उठी दुश्मनों की आंख को हम मिट्टी में मिला देंगे। और यही हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकियों को ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया है कि कोई भी दुश्मन भारत की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत भी नहीं करेगा। प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति और मजबूत नेतृत्व के कारण आज आतंकवाद के खिलाफ हम निर्णायक वार करने में सफल रहे हैं। उन्होंने शौर्य सम्मान यात्रा को भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम को नमन करने, उनको प्रोत्साहित करने की यात्रा बताया। उन्होंने कहा तिरंगा यात्रा इस बात का प्रतीक है कि आज हमारा देश प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गोली का जवाब गोलों से देना जानता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अब सीधा एक्शन लेता है। भारत के सैनिकों की गोलियां अब आतंक, आतंकवाद और उनके आकाओं को नष्ट करने का कार्य करती है। हमारी सेनाएं किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए हरदम तैयार रहती हैं। उन्होंने कहा जिस तरह से भारत के नागरिक जन-गण-मन यात्रा में शामिल हो रहे हैं वह इस बात का प्रतीक है कि पूरा भारत एकता के साथ आतंकवाद को जवाब देने के लिए हर समय तैयार है। उन्होंने कहा 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद देश में जो गुस्सा आतंकियों को लेकर था उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महसूस किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सीधे आतंक की जड़ पर वार करने का फैसला लिया। जिसके लिए भारत की सेना को खुली छूट दी गई। भारतीय सेना ने बिना पाकिस्तान की सीमा में घुसे ही पाकिस्तान परस्त आतंकवाद को ऐसा सबक सिखाया जिसे देख पाकिस्तान भी सहम गया। भारत की सेना ने पाकिस्तान में पल रहे आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के साथ ही, आतंकियों को पालने-पोसने वाली पाकिस्तान सेना के सैन्य ठिकानों को भी भारत के ड्रोन और मिसाइलों ने सीधा निशाना बनाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश मजबूत हाथों में है। साल 2014 के बाद से भारतीय सेना को और मजबूत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने सेना की मजबूती के लिए जो मेड इन इंडिया हथियार बनाने पर जोर दिया है उसी का परिणाम आज दुनिया देख रही है। आतंकियों पर मेड इन इंडिया हथियारों ने जो कहर बरपाया है उससे दुनिया भारत की सैन्य ताकत को समझ चुकी है। भारत के सैन्य अभियान ने साबित कर दिया कि रक्षा के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में निर्मित नवीनतम तकनीकी से युक्त स्वदेशी हथियार और अन्य संसाधन अन्य किसी भी देश के हथियारों और संसाधनों से कई हजार गुना अधिक कारगर है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विश्व को यह बताया कि हम किसी से कम नहीं है। भारतीय सेना ने मात्र चार दिनों के अंदर ऐसा पराक्रम दिखाया कि पाकिस्तान को घुटनों के बल आकर संघर्ष विराम के लिए झुकना पड़ा। पाकिस्तान के डीजीएमओ को भारत से विनती करनी पड़ी।

तिरंगा सम्मान यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने देवभूमि के वीर शहीदों और सैनिकों को याद करते हुए कहा कि सीमाओं पर देश की रक्षा कर रहे जवानों में हर पांचवें जवान का संबंध वीर भूमि उत्तराखंड से है। हमारे वीर सैनिकों ने देश की आन-बान-शान के लिए खुद को न्यौछावर किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका संबंध भी सैन्य परिवार से है। उन्होंने कहा वो एक सैनिक पुत्र होने पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने कहा जब भी वो शहीदों के बारे में सोचते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं।

इस दौरान सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, दिवान सिंह बिष्ट, सरिता आर्या, राम सिंह कैड़ा, मोहन सिंह बिष्ट, मेयर गजराज बिष्ट, जिला पंचायत की प्रशासक बेला तोलिया, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, रुद्रपुर के मेयर विकास शर्मा, दर्जाधारी अनिल कपूर डब्बू, दीपक मेहरा, दिनेश आर्या, शंकर कोरंगा, रेनू अधिकारी, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी वंदना, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

शौर्य, सम्मान और संकल्प की एक साथ झलक, ऑपरेशन सिन्दूर के बाद तिरंगा शौर्य यात्रा में उमड़ा देशभक्ति का सैलाब

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चंपावत के टनकपुर में स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग कर जनपद के विकास हेतु 18 योजनाओं (लागत 11365.11 लाख) का लोकार्पण तथा शिलान्यास किया गया।

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद के विकास हेतु विधानसभा चंपावत के लिए मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, टनकपुर (चंपावत) में आयोजित कार्यक्रम में कुल लागत 11365.11 लाख की कुल 18 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिसमें 05 योजनाओं (लागत 6578.86 लाख) का शिलान्यास तथा 13 योजनाओं (लागत 4786.25 लाख) का लोकार्पण किया।

जिसमें पर्यटन विभाग चंपावत की चंपावत के अंतर्गत पर्यटक आवास गृह टनकपुर परिसर में मल्टी स्टोरी पार्किंग का निर्माण (498.25 लाख), मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत सिप्टी वॉटरफॉल का सौंदर्यीकरण एवं गूल का निर्माण कार्य किया जाएगा (लागत 78.20 लाख),
माननीय मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत 13 जिला 13 डेस्टिनेशन योजना के अंतर्गत चंपावत नगर में हिमाद्री एंपोरियम केंद्र का निर्माण किया जाएगा (लागत 130.56 लाख),
उत्तराखंड होमस्टे क्लस्टर योजना के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र चंपावत के बनकटिया (श्यामलाताल) में हार्ट मार्केट क्राफ्ट केंद्र की स्थापना (लागत 90.28 लाख),
उत्तराखंड जल संस्थान चंपावत की बागडोराखास पंपिंग पेयजल योजना (लागत 43.08 लाख) नायाल पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण कार्य (लागत 114.00 लाख),
प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग की राज्य योजना के अंतर्गत जनपद चंपावत के विधानसभा क्षेत्र चंपावत के बनबसा क्षेत्र ग्राम फागपुर अंतर्गत शहीद द्वार के समीप से कैनाल तक मार्ग का इंटरलॉकिंग टाइल्स द्वारा चौड़ीकरण एवं सुधारीकरण का कार्य (लागत 113.35 लाख), राज्य योजना अंतर्गत जनपद चंपावत की विधानसभा क्षेत्र चंपावत के टनकपुर अंतर्गत ग्राम सभा बस्तियां के आंतरिक संपर्क मार्ग में इंटरलॉकिंग टाइल्स द्वारा सुधारीकरण का कार्य (लागत 57.77 लाख),

मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत चंपावत के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में सुखीढांग- डांडा- मीनार मोटर मार्ग का पुनः निर्माण एवं सुधारीकरण कार्य (लागत 307.04 लाख),
माननीय मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत जनपद चंपावत के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में सूखीढ़ांग – डांडा – मीनार मोटर मार्ग के किलोमीटर 06 से किलोमीटर 29.85 का पुनः निर्माण एवं डामरीकरण का कार्य लागत (1783.33 लाख),
मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत जनपद चंपावत के विधानसभा क्षेत्र चंपावत के टनकपुर एवं बनबसा क्षेत्र के विभिन्न आंतरिक मार्गों का हॉट मिक्स बी.एम/एस.डी.बी.सी द्वारा सुधारीकरण का कार्य (लागत 326.19 लाख ),
राज्य योजना अंतर्गत मानसखंड कॉरिडोर एवं पर्वतमाला योजना जनपद चंपावत के विधानसभा क्षेत्र चंपावत के टनकपुर क्षेत्र में मां पूर्णागिरी मंदिर हेतु पहुंच मोटर मार्ग एवं पैदल मार्ग का उदारीकरण एवं डामरीकरण का कार्य (लागत 605.68 लाख),
मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत जनपद चंपावत की विधानसभा क्षेत्र चंपावत के अंतर्गत राज्य मार्ग संख्या- 109 सूखीढांग- धूरा- रीठासाहिब के बृजनगर- तालियांबाज प्रभाग तथा राज्य मार्ग संख्या- 110 सुखीढांग- श्यामलाताल मोटर मार्ग में हॉट मिक्स द्वारा सुधारीकरण का कार्य (लागत 638.52 लाख) का लोकार्पण किया गया।

इसके अतिरिक्त ब्रिडकुल चंपावत की चंपावत की विधानसभा क्षेत्र चंपावत अंतर्गत कारागार में आवासीय एवं अनावासीय भवन का निर्माण (लागत 5567.77लाख),

प्रांतीय लोक निर्माण विभाग चंपावत की मा0 मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत जनपद चंपावत की विधानसभा क्षेत्र चंपावत के बनबसा क्षेत्र के अंतर्गत बनबसा कैनाल गेट से देवीपुरा- धनुष पुल तक मोटर मार्ग का सुधारीकरण कार्य (लागत 180.51 लाख) तथा मा0 मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत जनपद चंपावत विधानसभा क्षेत्र चंपावत अंतर्गत टनकपुर के आंतरिक मार्ग का हॉट मिक्स (डी.बी.एम/ बी.सी) द्वारा सुधारीकरण कार्य किया जाएगा (लागत 597.5 लाख),

पर्यटन विभाग की आदर्श चंपावत अंतर्गत पर्यटक आवास गृह टनकपुर की अवशेष कक्ष एवं हाल का उच्चीकरण का कार्य (लागत 86.18लाख),
तथा नगर पालिका परिषद टनकपुर की मुख्यमंत्री घोषणा अंतर्गत पंचमुखी गौशाला निर्माण का कार्य (लागत 146.86 लाख) का शिलान्यास किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठजन एवं जनमानस से भेंटवार्ता कर उनसे संवाद किया। फिर कम्प्यूटर ऑन व्हील में बच्चों से बात की।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों से मुलाकात कर लोगों की समस्याएं सुनी एवं समस्याओें के त्वरित समाधान हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह बात सुनिश्चित कर लें कि आमजन को अपनी समस्याओं को लेकर बेवजह भटकना न पड़े। जनता की सेवा ही हम सभी का प्रथम कर्तव्य है। सरलीकरण, समाधान निस्तारण राज्य सरकार का मूल मंत्र है, जिसका आभास जन-जन को होना चाहिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सामाजिक संरचना को मजबूत आधार देने के लिए वरिष्ठजनों के अनुभवों का उपयोग किया जाना आवश्यक है। आदर्श जनपद की परिकल्पना भी तभी साकार होगी जब वरिष्ठजनों के अनुभव इसमें सांझा होंगे। वरिष्ठजन, अपने जीवन में अनुभवों का खजाना संजोए रखते हैं। जो जीवन के हर पहलू को देख चुके होते हैं, हर परिस्थिति का सामना कर चुके होते हैं। उनके पास समस्याओं का समाधान खोजने की एक अनोखी क्षमता होती है, जो युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा वरिष्ठ जनों के अनुभव इसलिए भी जानने-सुनने जरूरी हैं, ताकि हम अपनी जड़ों से जुड़े रह सकें। यह युवाओं के लिए जरूरत भी है और समाज के लिए बड़ी अहमियत भी। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास कार्य और हर वर्ग और गांव के अंतिम छोर तक योजनाओं का लाभ देना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार द्वारा उत्तराखंड एवं चंपावत को आदर्श जिला बनाने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों की कल्याणकारी नीतियों व योजनाओं को ऑनलाइन मोड पर अपडेट कर दिया है। इस कारण अब लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं। अब लोगों को सरकारी योजनाओं व कार्यक्रमों का घर बैठे सीधा लाभ मिल रहा है। हमारा उद्देश्य है कि राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने कहा शासन एवं प्रशासन आमजन की समस्याओं को पूर्ण गंभीरता से लेती है। जनहित से जुड़े कार्यों में किसी तरह की भी लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारियों एवं विभागों की जवाबदेही तय की जा रही है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर उत्तराखंड को आगे ले जाने के लिए कार्य कर रही है।

इस दौरान माननीय मुख्यमंत्री धामी ने ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी में भारतीय सेना के आभार प्रकट करने तथा आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता को जाहिर करने के उद्देश्य से तिरंगा शौर्य यात्रा में प्रतिभाग किया। तिरंगा शौर्य यात्रा कैंप कार्यालय टनकपुर से पीलीभीत चुंगी तक निकाली गई। जिसमें लोगों ने बड़ी संख्या में बढ़ चढ़कर भाग लिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा में हजारों की संख्या में देशभक्त उमड़े है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने हर देशवासी का सर गर्व से ऊंचा कर दिया है। धर्म पूछकर आतंकवादियों ने लोगों की हत्या की। इसके बाद पूरा देश निर्णायक कार्रवाई की मांग को लेकर खड़ा हो गया। धामी ने कहा कि उत्तराखंड में ज्यादातर हर परिवार से एक सदस्य सेना में जरूर होता है। पाकिस्तान को संदेश दे दिया गया है कि अब आतंक सहा नहीं जाएगा।

इस दौरान दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, भाजपा जिला अध्यक्ष गोविंद सामंत, विधायक प्रतिनिधि चंपावत प्रकाश तिवारी, टनकपुर दीपक रजवार, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष निर्मल महरा, भाजपा नेत्री हेमा जोशी, नगर पालिका अध्यक्ष टनकपुर विपिन कुमार, वैभव अग्रवाल, दीप पाठक, जिलाधिकारी नवनीत पांडे, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, नोडल अधिकारी मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय केदार सिंह बृजवाल, समस्त अधिकारीगण सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, वृद्धजन/प्रबुद्धजन, गणमान्य नागरिक आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

मंगल दलों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 05 हजार रुपये की जायेगीः सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक संवाद के तहत प्रदेशभर से आए युवक एवं महिला मंगल दलों के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में संवाद किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मंगल दलों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 04 हजार रूपये से बढ़ाकर 05 हजार रूपये की जायेगी। मंगल दलों को आत्मनिर्भर बनाने और ऋण सुविधा प्रदान करने के लिए नीति बनाई जायेगी। मंगल दलों को डिजिटल मिशन के अन्तर्गत प्रशिक्षण दिया जायेगा। राज्य स्तर पर एक पोर्टल बनाया जायेगा, जिससे प्रत्येक युवा और महिला मंगल दल को एक दूसरे से जोड़ा जायेगा।

मुख्यमंत्री ने मंगल दलों द्वारा सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मंगल दल उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। युवक एवं महिला मंगल दल प्रदेश की सामाजिक चेतना को मजबूत करने, लोक परंपराओं को संजोने और गांव-गांव में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपदाओं के समय मंगल दल ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाते हैं और जनजागरूकता अभियानों में भी आगे रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मंगल दलों को सशक्त बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि मंगल दलों को स्वरोजगार के लिए 50 हजार रुपये से 3.5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा मंगल दल स्वावलंबन योजना के अन्तर्गत 5 करोड रूपये, मुख्यमंत्री ग्रामीण खेलकूद एवं स्वास्थ्य संवर्धन योजना के अन्तर्गत 2 करोड़ रूपये से अधिक, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत 60 करोड़ रूपये का प्राविधान किया गया है। मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के अन्तर्गत 10 करोड़ रूपये की धनराशि की व्यवस्था की गई है। युवाओं को तकनीकि और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए पं० दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना 21 करोड़ रूपये से अधिक का प्राविधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोक संस्कृति के संवर्धन के लिए भी निरंतर प्रयासरत है और स्थानीय मेलों व पर्वों के आयोजन के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

मंगल दलों के सुझाव
उत्तरकाशी के आजाद डिमरी ने कहा कि मंगल दलों को मिलने वाली राशि 04 हजार रूपये से बढ़नी चाहिए। बागेश्वर की खृष्टि कोरंगा ने कहा कि लोगों को सरकारी योजनाओं का पूरा फायदा मिल सके इसके लिए ब्लॉक एवं जनपद स्तर पर होने वाली विभिन्न बैठकों में मंगल दलों को भी शामिल किया जाना चाहिए। चम्पावत की मोनिका ने कहा कि जनहित में महत्वपूर्ण जानकारियों एवं सूचनाओं के लिए पोर्टल बनाया जाना चाहिए। चमोली के सुरजीत सिंह बिष्ट ने कहा कि ग्राम स्तर पर मंगल दलों को डिजिटल प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। हरिद्वार के मनोज चौहान ने कहा कि योग और फिटनेस पर राज्य में अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

इस अवसर पर विधायक सुरेश गड़िया, पीएमजीएसवाई राज्य स्तरीय अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव एस.एन.पाण्डेय, निदेशक युवा कल्याण प्रशांत आर्य उपस्थित थे।

देश का प्रथम गांव माणा में शुरू हुआ पुष्कर कुंभ, दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

चमोली के सीमांत गांव माणा में स्थित केशव प्रयाग में 12 वर्षों बाद विधि विधान के साथ पुष्कर कुंभ का आयोजन शुरु हो गया है। जिसे लेकर बदरीनाथ धाम के साथ ही माणा गाँव में बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की आवाजाही बढ़ गई है। पुष्कर कुंभ के आयोजन को लेकर जिला प्रशासन के साथ पुलिस प्रशासन की ओर से यहां तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि माणा गांव के केशव प्रयाग में आयोजित पुष्कर कुंभ को लेकर पैदल मार्ग का सुधारीकरण किया गया है। यहां पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न भाषाओं में साइन बोर्ड लगाए गए हैं। इसके साथ ही कुंभ के सुचारू संचालन के लिए जहां पैदल मार्ग पर पुलिस की तैनाती की गई है। वहीं संगम तट पर एसडीआरएफ के जवानों की तैनाती भी की गई है। उन्होंने बताया कि तहसील प्रशासन को पुष्कर कुंभ के आयोजन को लेकर व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।

बता दें कि, चमोली जिले के सीमांत गांव माणा में 12 वर्षों के बाद पुष्कर कुंभ का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक परंपरा के अनुसार जब 12 वर्षों में बृहस्पति ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करता है, तो माणा गांव स्थित अलकनंदा और सरस्वती नदियों संगम पर स्थित केशव प्रयाग में पुष्कर कुंभ का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में मुख्य रूप से दक्षिण भारत के वैष्णव मतावलम्बी प्रतिभाग करते हैं।

क्या है पुष्कर कुंभ का धार्मिक महत्व

हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माणा गांव के पास स्थित केशव प्रयाग में महर्षि वेदव्यास ने तपस्या करते हुए हिन्दू धर्म के पौराणिक ग्रंथ महाभारत की रचना की थी। यह भी कहा जाता है कि दक्षिण भारत के महान आचार्य रामानुजाचार्य और माध्वाचार्य ने इसी स्थान पर माँ सरस्वती से ज्ञान प्राप्त किया था। जिसके चलते अपनी पौराणिक परंपराओं के संरक्षण के लिए बद्रीनाथ धाम के समीप स्थित माणा गांव पहुंच कर केशव प्रयाग में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं।

तीर्थ स्थल न केवल हमारी धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि ये देश की एकता और सांस्कृतिक एकजुटता के भी प्रतीक हैं। विभिन्न स्थानों से आने वाले श्रद्धालु इन स्थलों पर एकत्र होकर एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को साकार करते हैं। इसी क्रम में माणा गांव में आयोजित पुष्कर कुंभ, उत्तर को दक्षिण से जोड़ रहा है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

उत्तराखंडः ग्रीन चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल

चारधाम यात्रा को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए, प्रदेश सरकार ने इस यात्रा सीजन से 25 स्थानों पर ई व्हीकल चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध करा दी है। इससे यात्रा में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बार चारधाम यात्रा को ग्रीन यात्रा की थीम पर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में परिवहन विभाग (28) और टीएचडीसी (10) के सहयोग से चारधाम यात्रा मार्ग पर 38 ई व्हीकल चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। इसमें से यात्रा शुरू होने तक 25 स्टेशन शुरू किए जा चुके हैं, जहां यात्री आसानी से अपने ई व्हीकल को चार्ज करवा रहे हैं। ज्यादातर चार्जिंग स्टेशन जीएमवीएन की प्रापर्टी में स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक स्टेशन पर 60 किलोवाट क्षमता के यूनिवर्सल चार्जर लगाए गए हैं, जिनमें 30-30 किलोवाट की दो चार्जिंग गन शामिल हैं। जीएमवीएन के एमडी विशाल मिश्रा ने बताया कि ग्रीन चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने के लिए मुख्य पड़ावों पर ई-चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की गई है, ताकि यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित हो सकें। अकेले जनपद रुद्रप्रयाग में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित चार जीएमवीएन गेस्ट हाउसों पर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप इस वर्ष चारधाम यात्रा को हरित यात्रा के रूप में आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में यात्रा मार्ग पर ईवी चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा को सुविधाजनक बनाएगी, बल्कि उत्तराखंड को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में भी एक सार्थक कदम साबित होगी। सरकार का उद्देश्य है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण, रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म और हरित पर्यटन को नई दिशा दी जा सके।
– पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री उत्तराखंड
———————
यहां हैं ई चार्जिंग स्टेशन
उत्तरकाशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, मंगलौर, रुड़की, बड़कोट, स्यानाचट्टी, फूलचट्टी, जानकीचट्टी, कौडियाला, श्रीनगर, श्रीकोट, गौचर, कर्णप्रयाग, गैरसैंण, कालेश्वर, नंदप्रयाग, पीपलकोटी, औली, पांडुकेश्वर बद्रीनाथ, स्यालसौड़, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग, घनसाली आदि।