साहस का परिचय दे रहे धामी ने दमदार फैसलों से अपने को औरों से अलग साबित किया

यूं तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने साढ़े चार महीने के कार्यकाल में 500 से अधिक फैसले ले चुके हैं पर देवस्थानम बोर्ड पर फैसला लेना उनके लिए आसान काम नहीं था। तमाम वजहों से यह मुद्दा धामी सरकार के लिए पेचीदा बना हुआ था। एक तो अपनी ही पार्टी की पूर्व सरकार के फैसले पर उन्हें पुनर्निर्णय करना था। दूसरा, यह निर्णय इतने सलीके से लिया जाना था जिससे पार्टी पर उसका नकारात्मक प्रभाव ना पड़े और नाराज वर्ग भी संतुष्ट हो जाए। धामी अपने व्यक्तित्व के अनुरूप सभी पक्षों से सहजता से मिले, सरलता से उनको सुना और फिर उन्होंने सूझबूझ के साथ कदम आगे बढ़ाए। अंततः युवा नेतृत्व ने जिस बुद्धिमत्ता के साथ निर्णय लिया उसकी चौतरफा न केवल चर्चा है बल्कि प्रशंसा भी हो रही है। यह फैसला उनकी सियासी परिपक्वता और दूरदर्शिता को भी दर्शाता है।
देवस्थानम बोर्ड का गठन जनवरी 2020 में तब के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था। बोर्ड के गठन के जरिए 51 मंदिरों का नियंत्रण राज्य सरकार के पास आ गया था, जिनमें केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री चार धामों मंदिर भी शामिल थे। तब से ही तीर्थ-पुरोहित, हक-हकूकधारी और मंदिरों से जुड़ा हर पक्ष इस फैसले को वापस लेने की मांग पर अड़ा था। जुलाई 2021 में मुख्यमंत्री पद से त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अचानक विदाई में देवस्थानम बोर्ड के गठन को भी एक कारण माना गया। उनके बाद तीरथ सिंह रावत को प्रदेश की कमान सौंपी गई तो उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में पुर्नर्विचार किया जाएगा। सियासी परिस्थितियां बदलीं और इसी साल जुलाई में पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने तीर्थ-पुरोहितों की मांग पर एक कमेटी का गठन किया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेने का टाइम बाउण्ड वादा किया। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी तो सीएम धामी ने फिर अपने सहयोगी मंत्रियों की एक कमेटी (पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अगुवाई में) गठित कर रिपोर्ट का अध्ययन करने और उस पर अपना सुझाव देने को कहा। बीते सोमवार को मंत्रियों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट संस्तुति समेत मुख्यमंत्री को सौंपी। धामी ने बिना कोई देर किए 30 नवंबर की सुबह देवस्थानम बोर्ड को भंग करने और इस एक्ट को वापस लेने का फैसला सुना दिया।
दरअसल, देवस्थानम बोर्ड छोटा मुद्दा नहीं था। सनातनी संस्कृति और परम्पराओं से जुड़े होने के कारण यह बेहद संवेदनशील बन गया था। खासतौर से भाजपा के लिए जो खुद को सनातन संस्कृति और परम्पराओं का संवाहक मानती है। मामले को इसलिए भी व्यापकता मिली क्योंकि उत्तराखण्ड में स्थित चारधामों से देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। देवस्थानम बोर्ड के गठित होते ही श्रृद्धा के केन्द्र बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे मंदिरों की देखभाल, रखरखाव और उनकी व्यवस्थाओं के प्रबंधन से जुड़ी सदियों पुरानी परम्पराओं को बदलने के औचित्य पर चर्चा शुरू हो गई थी। एक पक्ष देवस्थानम बोर्ड की वकालत तो दूसरा इसके विरोध में खड़ा हो गया। मामला सिर्फ सोशल मीडिया में बहस तक सीमित नहीं रहा बल्कि हाईकोर्ट से होते हुए देश की सर्वाेच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। यही एकमात्र ऐसा मुद्दा था जिसे सुलझाने में धामी को अपनी सियासी परिपक्वता साबित करनी थी। चूंकि देवथानम बोर्ड का गठन भाजपा सरकार ने किया था लिहाजा दलगत मजबूरी के चलते धामी इसे एक झटके में वापस नहीं ले सकते थे, वरना इसके दुष्प्रभाव सामने आ जाते। बहुत ही समझदारी के साथ धामी ने स्वच्छ छवि के भाजपा नेता मनोहर कांत ध्यानी के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई। कमेटी ने चारधाम के तीर्थ पुरोहितों, विद्वान पण्डितों, हक-हकूकधारियों और मंदिरों से जुड़े भी वर्गों से सिलसिलेवार बात की। एक नहीं कई दौर की बातचीत में सबकी राय ली गई। तसल्ली के साथ सभी पक्षों को सुना गया। कमेटी ने जब अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी तो उस पर संस्तुति देने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने फिर एक और कमेटी गठित की जिसमें उन्होंने अपने तीन सहयोगी मंत्रियों सतपाल महाराज, अरविन्द पाण्डेय और सुबोध उनियाल को शामिल किया। मंत्रियों की कमेटी की रिपोर्ट मिलने पहले धामी ने दिल्ली जाकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात कर उनसे इस पर निर्णय को लेकर सहमति ले ली। फिर मंगलवार की सुबह उन्होंने देवस्थानम बोर्ड पर वो फैसला सुनाया जिसका सभी को इंतजार था। अपने इस फैसले से पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव से ऐन पहले एक तीर से कई निशाने साध दिए हैं। उन्होंने एक ऐसा विषय जो चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता था उसे सुलझा लिया, साथ ही नाराज पंडा-पुरोहितों और हकदृहकूकधारियों को भी मना लिया। इस मुद्दे पर विपक्ष की हर रणनीति अब धरी की धरी रह गई है और पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर खुद को उत्तराखण्ड के भविष्य का नेता साबित कर दिया है।

धामी के निर्णय से हिन्दु धर्मगुरु गदगद, सीएम आवास में जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उत्तराखण्ड देवस्थानम बोर्ड प्रबन्धन अधिनियम वापस लिये जाने की घोषणा के बाद चार धाम तीर्थ पुरोहितों, रावल समाज, पंडा समाज, हक हकूक धारियों के साथ ही अखाड़ा परिषद्, विश्व हिन्दु परिषद् आदि के सदस्यों ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया है।
मंगलवार को देर सांय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत रवीन्द्र पुरी, अखाड़ा परिषद् के महामंत्री मंहत हरिगिरी आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द महाराज आदि ने भेंट कर देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड अधिनियम वापस लिये जाने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने मुख्यमंत्री को सन्त समाज की ओर से भी धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री से चार धाम तीर्थ पुरोहित, हक हकूक धारी महापंचायत, रावल, पंडा समाज के साथ ही बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री मन्दिर से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री आवास स्थित कार्यालय सभागार में मुख्यमंत्री का परम्परागत ढ़ंग से स्वागत कर उनका हृदय से आभार व्यक्त किया। सभी ने मुख्यमंत्री द्वारा लिये गये इस निर्णय को एतिहासिक एवं तीर्थ स्थलों के हित में बताया।
इस अवसर पर चारधाम तीर्थ पुरोहित, हक हकूक धारी महापंचायत समिति के महामंत्री हरीश डिमरी, चार धाम तीर्थ पुरोहित मुख्य प्रवक्ता डॉ. ब्रजेश सती, श्री केदारनाथ पंडा समाज के विनोद शुक्ला, रावल गंगोत्री हरीश सेमवाल, रावल यमनोत्री अनिरूद्ध उनियाल, सुरेश सेमवाल, विश्व हिन्दु परिषद् के वीरेन्द्र कृतिपाल, विपिन जोशी सहित बड़ी संख्या में समिति के सदस्य एवं सन्त समाज के प्रतिनिधि आदि उपस्थित रहे।

देश, काल और परिस्थिति को देखकर लिया निर्णय-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सांय मुख्यमंत्री आवास में मीडिया प्रतिनिधियों से वार्ता करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड अधिनियम को वापस लिये जाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 4 जुलाई को प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात् देवस्थानम बोर्ड के सम्बन्ध में चारधाम से जुडे तीर्थ पुरोहित, रावल, पंडा समाज, हक हकूधारियों एवं जनप्रतिनिधियों के स्तर पर अलग अलग प्रकार की प्रतिक्रिया सामने आयी। इस सम्बन्ध में सभी तथ्यों पर विचार करने के पश्चात् राज्य सरकार द्वारा पूर्व सांसद मनोहर कान्त ध्यानी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया, समिति द्वारा तीन माह में अपनी अन्तरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को उपलब्ध कराने के साथ ही अन्तिम प्रत्यावेदन भी राज्य सरकार को उपलब्ध कराया गया। राज्य सरकार द्वारा मंत्रिमण्डलीय उपसमिति का भी इसके लिये गठन किया गया। उच्च स्तरीय समिति एवं मंत्रिमण्डलीय उप समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात् राज्य सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में सम्यक विचारोपरान्त देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड अधिनियम को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चार धामो सहित अन्य स्थानों में सभी सम्बन्धित लोगों से परामर्श कर इन स्थानों पर बेहतर व्यवस्था सम्पादित हो सके इसके प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि के साथ ही देश की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाये इसके लिये राज्य सरकार सन्त समाज का भी सहयोग लेगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य की आर्थिकी का भी ध्यान रखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के वीजन के अनुरूप उत्तराखण्ड को 2025 तक देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना हमारा उद्देश्य है। उन्होंने अधिनियम वापस लिये जाने की घोषणा के साथ चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के साथ ही अन्य सम्बन्धित लोगों से अपना आन्दोलन वापस लेने का भी अनुरोध किया। उन्होंने सभी से चार धाम सहित अन्य तीर्थ स्थलों पर बेहतर व्यवस्थायें सुनिश्चित किये जाने के लिये सहयोग की भी अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देशकाल परिस्थिति के अनुसार सभी सम्बन्धित विषयों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग से इन स्थानों पर बेहतर व्यवस्थायें बनाने का हमारा प्रयास रहेगा।

जसपुर में 16 करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को जनपद उधम सिंह नगर के जसपुर स्थित मंडी परिसर पहुँचकर 1650.66 लाख रूपये की योजनाओं का लोकार्पण एंव शिलान्यास किया। जिसमें 61.43 लाख रुपए लागत की 3 योजनाओं का लोकार्पण व 1589.23 लाख रुपये लागत की 9 योजनाओं का शिलान्यास किया।
मुख्यमंत्री ने जिन योजनाओं का लोकार्पण किया उनमें नगर पंचायत महुआडाबरा में 19.85 लाख रुपये की लागत के मानसरोवर झील निर्माण कार्य, 35 लाख रुपये की लागत के वार्ड नम्बर 2 व 5 के निर्माण कार्य, 6.58 लाख रुपये लागत से शहीद स्थल पुनर्निर्माण कार्य शामिल है। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही 169.82 लाख रुपए लागत की गणेशपुर-केशपुरी ग्राम समूह पेयजल योजना, 199.40 लाख रुपये लागत की तलाबपुर ग्राम समूह पेयजल योजना, 444.67 लाख रूपये लागत की राजपुर ग्राम समूह पेयजल योजना, 445.18 लाख रूपये लागत की नारायणपुर ग्राम समूह पेयजल योजना, 49.20 लाख की लागत से विकास खण्ड जसपुर की ग्राम पंचायत गढ़ीहुसैन में हाईवे से टयुबवैल व नहर की पुलिया से होते हुए टांडा प्रभावपुर लिंक मार्ग की ओर सी.सी.मार्ग का निर्माण, 49.20 लाख की लागत के ग्राम पंचायत कलियावाला में ग्राम कल्याणपुर से नहर होते हुए कलियावाला तक सी.सी.मार्ग का निर्माण, 30 लाख की लागत से नगर क्षेत्र जसपुर के नत्था सिंह मोहल्ला (अनुसूचित जाति) में बारात घर का निर्माण, 30 लाख की लागत से विकास खण्ड जसपुर के ग्राम श्यामनगर में बारातघर का निर्माण कार्य, 175.76 लाख की लागत से नेहरू रा.इ.का. महुआडाबरा में 1 पुस्तकालय कक्ष, 1 कम्प्यूटर कक्ष, 4 ए.सी.आर. कक्ष, एंव 3 प्रयोगशाला (जीव विज्ञान प्रयोगशाला,रसायन विज्ञान प्रयोगशाला एवं भौतिक विज्ञान प्रयोशाला ) निर्माण कार्य का शिलान्यास किया।
उन्होंने स्टेडियम बनाने एवं गढ़ीनेगी क्षेत्र को नगर पंचायत का दर्जा दिये जाने की घोषणा करते हुए कहा कि भोगुपुर क्षेत्र को राजस्व ग्राम बनाने की जो भी प्रक्रिया होगी, उसको मंत्रीमण्डल में लाकर उस प्रकिया को पूरा करेंगें। उन्होंने कहा कि राजनीति से हटकर काम किया है, राजनीति के नजरिये से विकास को नही देखते है। सतत् विकास चलते रहना चाहिए। नेपा की 1000 एकड भूमि पर सिडकुल स्थापना का सरकार प्रयास करेगी जिससे राजस्व, रोजगार के साथ ही व्यापार की प्राप्ति हो सके।
उन्होंने जसपुर की एतिहासिक भूमि को नमन करते हुए कहा कि जसपुर किसान बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र भी है, आस-पास की रोजगार की बहुत सारी चीजे़ यहॉ से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सितारंगज की चीनी मिल को चलाने का संकल्प लिया था, 29 नवम्बर को सितारगंज चीनी मिल शुरू की है जोकि एतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कारण मजदूरो, उद्योग-धन्धों के साथ ही सरकार भी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भी एक-एक कर, सभी समस्याओं पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की सहयोगी के रूप में काम कर रही है। गन्ने के मूल्य निर्धारण हेतु यूपी का अध्ययन करते हुए गन्ने की अगेती प्रजाति के लिए 355 तथा सामान्य प्रजाति के लिए 345 रूपये निर्धारित किया है, जोकि 29.50 रूपये प्रति कुन्तल की वृद्धि की है। भाड़ा 11 से घटा कर 9.50 रूपये किया है। किसाना भाईयों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, उसके लिए लगातार काम करेंगे। प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि किसान भाईयों का जीवन स्तर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि में 9.50 लाख से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का प्रदेश से विशेष लगाव है। सड़कों के क्षेत्र मे तेजी से काम हो रहा है। जसपुर, जाने वाली विभिन्न सड़कों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि अफजलगढ़ से नजीबाबाद को सीधे सड़क निकलने वाली है, सड़क स्वीकृत है, शीघ्र ही प्रधानमंत्री जी शिलांयास करने वाले हैं। एम्स की दूसरी शाखा उधम सिंह नगर में खुलने जा रही है।
उन्होंने कहा कि 3.50 लाख से ज्यादा लोगो ने आयुष्मान भारत योजना का लाभ अभी तक उठाया है। यह विश्व की सबसे बड़ी स्कीम है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिये कि जिन चिन्ह्ति अस्पतालों में योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है या किसी भी प्रकार की शिकायत आने पर सम्बन्धित अस्पताल के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। योजना के क्रियान्वयन में कोताही नहीं होनी चाहिए, जो भी उत्तरदायी होगा, उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कहा कि समाज के हर क्षेत्र में कार्य करने वालों के साथ सहयोगी एवं साझेदार के रूप में कार्य कर रहे हैं। खेल नीति लाये हैं, जिनके अन्दर प्रतिभा, योग्यता, रूचि है उन्हें किसी की ओर हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा, नीति में सरकार ने सभी व्यवस्थाऐं की है। एक-एक पल, एक-एक क्षण प्रदेश की जनता के लिए लगाया जा रहा है। आज देव स्थानम बोर्ड को वापस लेने का निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार आम जन की सुविधाओं के लिए कार्य कर रही है। सरलीकरण, समाधान, निस्तारण के मंत्र पर कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, क्षेत्रीय विधायक आदेश सिंह चौहान, हरभजन सिंह चीमा, अध्यक्ष एससी आयोग मुकेश कुमार, उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग सायरा बानो, मेयर ऊषा चौधरी, पूर्व विधायक डॉ. शैलेन्द्र मोहन सिंघल आदि उपस्थित रहे।

खटीमा में आयोजित शहीद सम्मान यात्रा में सीएम हुए शामिल

शहीदों के सम्मान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को खटीमा में शहीद सम्मान यात्रा में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के 13 जनपदों के शहीदों के ऑगन की मिट्टी से उत्तराखण्ड का पांचवा धाम सैन्य धाम देहरादून में बनाया जायेगा। सैनिक पुत्र होने के नाते मुझे इस सम्मान यात्रा में सम्मिलत होने पर गर्व महसूस हो रहा है।
वीर सैंनिकों की धरती को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस धरती के वीरों ने युद्धों में अपना कौशल दिखाकर दुश्मनों को नेस्तनाबूद किया है। हमारी सेना के जवान हमेशा भारत माता पर सर्वस्व अर्पित करने को तैयार रहते हैं। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड के सैनिकों ने हमेशा शौर्य व वीरता का प्रदर्शन किया है। इनके आंगन की पवित्र मिट्टी से सैन्य धाम इनके संघर्षाे की प्रेरणा देगा। इन शहीदों के परिवारों का सम्मान करना हम सभी देशवासियों का कर्तव्य है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश मजबूत हाथों मे है, उन्होने हमारी सेना को निर्णय लेने की छूट दी है। प्रधानमंत्री हमेशा अपना जन्म दिन, होली, दिवाली सैनिकों के साथ ही मनाते हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत उसी दिशा मे बढ रहा है जिस भारत की हम कल्पना करते थे, उन्होने वन रैंक वन पेंशन लागू की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक उत्तराखण्ड शहीदों के सपनां का उत्तराखण्ड नही बन जाता हम चौन से नही बैठेंगे। वर्ष 2025 तक उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है इसके लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है। उन्होने कहा कि हमारी सरकार ने भारतीय सेना के शहीदों के आश्रितों को राज्याधीन सेवाओं में सेवायोजन, सैनिक विधवाओं को मिलने वाली अनुदान राशि को 8 हजार से बढाकर 10 हजार किया, भूवपूर्व सैनिकों को नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत क्षेत्रों में भवन कर में छूट दी गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीदों के आश्रितों को शॉल उढाकर व ताम्र पत्र भेंटकर सम्मानित किया।
शहीदों का सम्मान, राष्ट्र का सम्मान का नारा लगाते हुए सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इन शहीदों की माताओं को मैं नमन करता हूं जिनके पुत्रों ने देश पर अपने आप को न्यौछावर कर दिया, अंग्रजों की धरती पर जनरल डायर को मारने वाले इस जनपद के शहीद उधमसिंह को मैं नमन करता हूं। उन्होने कहा कि देश का हर पांचवां सैनिक उत्तराखण्ड की धरती का है, प्रदेश की कमान भी सैनिक पुत्र के हाथों मे है। उन्होने कहा कि शहीदों का सम्मान करना हर देशवासी का कर्तव्य है। उन्होने बताया 1734 शहीदों के आंगन की मिट्टी से देहरादून में सैन्य धाम बनाया जा रहा है जिसमें अमर ज्योति तथा शहीदो के चित्र रखे जायेंगे। उन्होने कहा प्रदेश सरकार लगातार सैनिकों के कल्याण के लिये कार्य कर रही है।
जनपद के प्रभारी मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द महाराज ने बताया कि खटीमा के पवित्र प्रांगण में आज प्रदेश के शहीदो को सम्मान मिल रहा है, शहीदो का मान सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शहीदों के सम्मान को बढाया है। उन्होने कहा हमारी सेना की बदौलत आज हम चौन की नींद सोते हैं।
इस अवसर पर विधायक सौरभ बहुगुणा, डा. प्रेम सिंह राणा, आयुक्त कुमायूं सुशील कुमार, जिलाधिकारी रंजना राजगुरू, एसएसपी दलीप सिंह कुॅवर, अपर जिलाधिकारी ललित नारायण मिश्र, एसडीएम निर्मला बिष्ट, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी रंजीत सिंह, सूबेदार खडक सिंह कार्की, कैप्टन गम्भीर सिंह धामी आदि उपथित रहे।

कर्मचारियों की मांगें मानने के लिए धरनास्थल पर पहुंचे महाराज

प्रदेश के लोक निर्माण, मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन एवं उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर की लम्बित विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर एक बैठक की गयी।
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने सोमवार को यमुना कॉलोनी स्थित प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग कार्यालय में बैठक कर उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन तथा उत्तराखंड डिप्लोमा इंजिनियर्स संघ की वर्षों से लंबित समस्याओं का संज्ञान लेते हुए सचिव लोक निर्माण आर.के. सुधांशु को निर्देश दिये कि 15 से 20 दिनों के बीच सभी समस्याओं का समाधान करें। उन्होने यह भी आदेश दिये कि तकनीकी मामलों में शीघ्र ही परीक्षण कराकर उसका निदान करें।
उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन, उत्तराखंड डिप्लोमा इंजिनियर्स संघ के प्रतिनिधियों और लोनिवि अधिकारियों के साथ बैठक कर लोक निर्माण मंत्री ने सतपाल महाराज ने कहा कि निर्माण खंड टिहरी को पुनर्स्थापित कर दिया जाएगा। इसके अलावा विभागीय जूनियर इंजीनियर के स्थायीकरण के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित किये जाने के लिए भी आदेश दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों के सापेक्ष अधिशासी अभियंता प्रभारी सहायक अभियंता बनाए जाएंगे। उन्होंने बैठक में जानकारी देते हुए बताया कि विभागीय पुनर्गठन का प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो चुका है जिस पर कार्यवाही की जा रही है। डोबरा-चांठी पीआईयू को निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग सीधी में परिवर्तित किए जाने पर भी सहमति बनी है।
कार्यस्थल पर दुर्घटनाग्रस्त, गंभीर रूप से घायल, दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार एवं अनुरोध के आधार पर अभियंताओं को सुगम स्थानों पर स्थानांतरित करने के भी लोनिवि मंत्री ने विभागीय सचिव को निर्देश दिए। कनिष्ठ अभियंता से सहायक अभियंता के पद पर प्रोन्नति के पश्चात उनकी नियुक्ति दुर्गम से दुर्गम में की गई है जबकि कुछ अभियंताओं की नियुक्तियां सुगम से सुगम में की गई इस बात का संज्ञान लेते हुए लोनिवि मंत्री ने इसके परीक्षण के आदेश दिए हैं।
बैठक के पश्चात लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठे उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर संघ के धरना स्थल पर भी पहुंचे। वहां उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उन्होने कहा कि वह कुछ समय उन्हें दें ताकि उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा सके। महाराज ने धरना स्थल पर बैठे कर्मचारियों को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन एवं उत्तराखंड डिप्लोमा इंजिनियर्स संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक काफी सकारात्मक रही है। हमने पूरे मनोयोग से उनकी समस्याएं सुनी और उन पर सरकार निर्णय लेकर समस्याओं के समाधान का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री को महाराज ने सौंपी उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट

उत्तराखंड के धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस मुलाकात में देवस्थानम बोर्ड को लेकर विस्तार से बातचीत हुई। इसके साथ ही उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड पर पुनर्विचार हेतु मंत्री गणों की उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट परीक्षण एवं अध्ययन के पश्चात सतपाल महाराज ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी।
उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के परिपेक्ष में चारों धामों के हितधारकों पंडा, पुरोहितों और पुजारियों द्वारा समय-समय पर विरोध, आंदोलन के मध्येनजर वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत समाधान हेतु समिति की रिपोर्ट के सम्यक परीक्षणोंपरांत और सतपाल महाराज की अध्यक्षता में गठित मंत्री गणों की उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया।

डीजीपी के निर्देश, सभी पुलिसकर्मियों का होगा कोविड एंटीजन टेस्ट

ऋषिकेश में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की वीआईपी ड्यूटी में लगे सात पुलिसकर्मियों के कोरोना संक्रमित मिलने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। डीजीपी अशोक कुमार ने सोमवार को प्रदेश के सभी पुलिसकर्मियों के कोविड एंटीजन टेस्ट कराने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड में एक बार फिर से कोरोना के मामले सामने आने लगे हैं। राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी और 12 अन्य विभागों के कार्मिक पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद डीजीपी अशोक कुमार का कहना है कि प्रदेश के सभी पुलिस कर्मियों के कोरोना टेस्ट कराए जाएंगे। डीजीपी अशोक कुमार का कहना है कि कोरोना को देखते हुए सभी लोगों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। राज्य सरकार जो भी गाइड लाइन जारी करेगी उसे फॉलो किया जाएगा।
आपको बता दें डीजीपी अशोक कुमार ने कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु सभी जनपद प्रभारियों एवं शाखा/इकाई प्रभारियों को उनके अधिनस्थ नियुक्त समस्त पुलिस कार्मिकों का रैपिड एन्टीजन टेस्ट कराये जाने के निर्देश दिए। जिससे पॉजिटिव पाए जाने वाले कार्मिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा सके। साथ ही अन्य कार्मिकों/परिजनों में संक्रमण को फैलने से रोका जा सके और कोरोना संक्रमित क्षेत्रों का भी पता लगाया जा सके।

जनरल बीसी जोशी कोविड अस्पताल में संक्रमित की मौत
कु़माऊं के जनरल बीसी जोशी कोविड अस्पताल में भर्ती नैनीताल निवासी 70 वर्षीय एक कोविड संक्रमित मरीज की मौत हो गई। मरीज 15 नवंबर को अस्पताल में भर्ती हुआ था। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ अरुण जोशी के अनुसार, मरीज की भर्ती के समय से ही स्थिति गंभीर बनी हुई थी। निमोनिया, सांस व अन्य दिक्कतें भी थीं। अस्पताल में करीब तीन महीने बाद किसी की कोविड संक्रमित की मौत हुई है।

एफआरआई के सभी अधिकारी पूरी तरह स्वस्थ
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में प्रशिक्षण लेने आए बिहार, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात जैसे राज्यों के कोरोना संक्रमित आईएफएस अधिकारियों को मंगलवार को उनके मूल कैडर वाले राज्यों को भेज दिया जाएगा। जिलाधिकारी डॉक्टर आर राजेश कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अगुवाई में टीम ने रविवार को अकादमी में जाकर कोरोना संक्रमित आईएफएस अधिकारियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। एकेडमी के एडिशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी ने बताया कि फिलहाल सभी अधिकारी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं है। लिहाजा उनके बेहतर स्वास्थ्य को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी अधिकारियों को 12 मंगलवार तक उनके मूल कैडर वाले राज्यों में भेजने की इजाजत दे दी है। एडीशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी के मुताबिक सभी आईएफएस अधिकारियों को मंगलवार को उनके मूल कैडर वाले राज्यों को भेज दिया जाएगा।
बता दें कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में देश के सभी राज्यों के 48 आईएफएस अधिकारी मिड टर्म प्रशिक्षण के लिए आए थे। इन अधिकारियों को आईआईएम लखनऊ और नईदिल्ली में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। लेकिन जब नईदिल्ली में अधिकारियों का कोरोना टेस्ट कराया गया तो 11 अधिकारी कोरोना संक्रमित पाए गए थे। जिसमें से तीन कोरोना संक्रमित अधिकारी तो नईदिल्ली से ही अपनी मूल कैडर वाले वाले राज्यों में भेज दिए गए थे। जबकि आठ अधिकारियों को देहरादून भेजकर अकादमी में क्वारेंटीन कर दिया गया था।

ठेकेदार महासंघ ऋषिकेश ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला

ई-टेंडर के विरोध में ठेकेदार महासंघ ऋषिकेश ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एकजुट हुए ठेकेदारों ने त्रिवेणीघाट पर स्थित सिंचाई विभाग के कार्यालय में तालाबंदी करते हुए धरना-प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ई-टेंडर लागू कर छोटे ठेकेदारों को बेरोजगार बना दिया है।
सोमवार को ठेकेदार महासंघ ऋषिकेश के अध्यक्ष संजय पोखरियाल के नेतृत्व में तीर्थनगरी ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्र के ठेकेदार लोनिवि तिराहा पर एकत्रित हुए। यहां से ई-टेंडर के विरोध में नारेबाजी करते हुए त्रिवेणीघाट परिसर स्थित सिंचाई विभाग के कार्यालय पहुंचे। यहां उग्र प्रदर्शन करते हुए कार्यालय से कर्मियों को बाहर किया और एसडीओ के कक्ष में ताला जड़ दिया। कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार छोटे ठेकेदारों का आर्थिक उत्पीड़न कर रही है। ई-टेंडर के लागू होने से छोटे ठेकेदार बेरोजगार हो गए हैं। बताया कि ई-टेंडर में 2 करोड़ से नीचे का काम नहीं है, ऐसे में डी श्रेणी के ठेकेदारों को विभागों में काम नहीं मिल रहा, इससे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कोरोना संकट में डी श्रेणी के ठेकेदार पहले ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। अब इस ई-टेंडर ने सब कुछ चौपट कर दिया है। एक स्वर में कहा कि ई-टेंडर प्रक्रिया को जल्द वापस नहीं लिया तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान राज्यपाल को ज्ञापन भी प्रेषित किया। धरना प्रदर्शन में महासंघ सचिव भगवती सेमवाल, घृपाल सिंह बगियाल, महेश चौहान, नरेश बिष्ट, रमेश रांगड़, हर्षपति सेमवाल, कमलेश डंगवाल, विक्की पंवार, प्रताप सिंह पोखरियाल, खुशीराम रतूड़ी, सुखदेव शर्मा, बालेश्वर, देव सिंह दुमोगा, सर्वेश रावत आदि मौजूद रहे।

उद्योगों को आसानी से भूमि उपलब्ध कराने के लिए लैंड बैंक तैयारने करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने सोमवार को सचिवालय में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को पर्यटकों की सुविधा के लिए एक गाइडेंस ऐप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐप को यूजर फ्रेंडली होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्टेट में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि उद्योगों को आसानी से भूमि उपलब्ध हो इसके लिए लैंड बैंक तैयार किया जाना चाहिए। पर्यटन विभाग को लैंड बैंक तैयार करने के लिए एक सेपरेट सेल बनाए जाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इस सेल का कार्य प्रदेश भर में लैंड बैंक चिन्हित करना हो। इससे पर्यटन से जुड़े उद्योगों को स्थापित करने में भी काफी आसानी होगी। मुख्य सचिव ने एडवेंचर टूरिज्म के अंतर्गत बंजी जंपिंग, ट्रैकिंग, पैराग्लाइडिंग आदि पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों को करने के लिए टाइम लाइन सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बंजी जंपिंग एवं पैराग्लाइडिंग के लिए उपयुक्त स्थानों की तलाश किए जाने के लिए स्टडी कराई जाए, ताकि इनके लिए नई जगहों को चिन्हित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही। इसके साथ ही, हेल्पलाइन नंबर का अधिक से अधिक प्रचार किया जाए। एक ऐसा सिस्टम भी तैयार किया जाए कि उत्तराखंड में प्रवेश करते ही “वेलकम टू उत्तराखण्ड“ का संदेश राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों को मिले और इसमें साथ साथ टूरिज्म संबंधित जानकारियों वाला ऐप डाउनलोड करने का लिंक भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिसमें उत्तराखण्ड में पर्यटन से सम्बन्धित सभी जानकारियां उपलब्ध हों।
मुख्य सचिव ने माउंटेनियरिंग के लिए ट्रैकिंग डिवाइस को अनिवार्य किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे लापता माउंटेनियर आदि को ढूंढने के आसानी होगी। साथ ही माउंटेनियरिंग और ट्रैकिंग आदि के लिए ली जाने वाले शुल्क को भी कम किया जाए ताकि अधिक से अधिक माउंटेनियरिंग और ट्रैकिंग दलों को प्रोत्साहित किया जा सके। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
मुख्य सचिव ने सुलभ सुविधाओं की मॉनिटरिंग के लिए भी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने कैपेसिटी बिल्डिंग पर भी फोकस किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ट्रेनिंग उपलब्ध कराया जाना जरुरी है। इसके लिए होटल रेस्टोरेंट से जुड़े कर्मियों को 2 से 3 मिनट की वीडियो क्लिप्स के माध्यम से अलग अलग प्रकार की ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जाए। यह सभी वीडियो पर्यटन विभाग की वेबसाइट और सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफार्म पर निशुल्क भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ताकि जिसको भी हॉस्पिटैलिटी आदि के बारे में जानकारी चाहिए, वेबसाइट आदि के माध्यम से मिल सके।
मुख्य सचिव ने नागरिक उड्डयन विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि राज्य में हवाई सेवाओं को किफायती कीमत पर प्रदेश वासियों और पर्यटकों को उपलब्ध कराए जाने हेतु प्रयास किए जाएं। इसके लिए अधिक से अधिक गंतव्यों को चिन्हित कर विकसित किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाए जाने के लिए अधिक से अधिक हेलीपैड भी विकसित किए जाएं। हेलीपैड विकसित किए जाते समय ट्रांसपोर्टेशन, डिजास्टर मैनेजमेंट और मेडिकल इमरजेंसी जैसे पहलुओं पर ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों को भी चिन्हित किया जाए जो भले ही पर्यटन की दृष्टि से उपयोगी न हों परन्तु आपदा एवं मेडिकल इमरजेंसी की दृष्टि से उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि हेलीपैड समय से तैयार हो सकें इसके लिए साप्ताहिक समीक्षा की जाए। प्रत्येक प्रोजेक्ट को ससमय पूर्ण करने के लिए प्रत्येक स्टेज एवं कार्य के पूर्ण होने की समय सीमा निर्धारित की जाएं।
इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव युगल किशोर पंत सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।