दून विवि में सीएम धामी ने युवाओं से किया संवाद, कहा बदलती तकनीक के अनुरूप फ्यूचर के लिये रेडी हो युवा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं से संवाद किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने पलायन रोकने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने, उत्तराखंड को उच्च शिक्षा का हब बनाने, विज्ञान, तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में रोजगार की नई संभावनाओं तथा देहरादून में यातायात जाम की समस्या के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल पूछे।

पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने से संबंधित सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब रिवर्स माइग्रेशन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं सौर स्वरोजगार योजना सहित पर्यटन, उद्योग और फिल्म नीति के माध्यम से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने और उनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उच्च शिक्षा को मजबूत करने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध होंगे तथा युवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

विज्ञान, तकनीक एवं एआई के दौर में रोजगार की संभावनाओं से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी बदलावों के साथ रोजगार के स्वरूप में परिवर्तन हो रहा है और नई संभावनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें बदलती तकनीक के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करते हुए ‘फ्यूचर रेडी’ बनना होगा। सरकार भी युवाओं को आधुनिक कौशल एवं नई तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

देहरादून में यातायात जाम की समस्या के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसके स्थायी समाधान की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। बिंदाल और रिस्पना नदी के ऊपर एलिवेटेड रोड के निर्माण की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से देहरादून शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और जाम की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी।

सीएम धामी ने दून विवि के बॉयोलॉजिकल साइंस प्रयोगशाला भवन और केंद्रीय पुस्तकालय भवन का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में दीक्षारम्भ सत्र 2026-27 एवं युवा संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन केवल कक्षा और परीक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण, नई सोच विकसित करने और जीवन की दिशा निर्धारित करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर दून विश्वविद्यालय में 11 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित बॉयोलॉजिकल साइंस प्रयोगशाला भवन तथा 17 करोड़ 39 लाख रुपये की लागत से निर्मित केंद्रीय पुस्तकालय भवन का लोकार्पण किया। साथ ही, दून यूनिवर्सिटी कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 88.4 एफएम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ये संस्थागत सुविधाएं विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को नई गति देने के साथ ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि दून विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम से जाना जायेगा। दून यूनिवर्सिटी कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 88.4 एफएम के सफल संचालन के लिये कार्यक्रम समन्वयक एवं तकनीकी सहायक के 02 पद सृजित किये जायेंगे। दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए 02 इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था की जायेगी। दून विश्वविद्यालय में विदेशी भाषा विभागों को सुदृढ़ किया जायेगा। ताकि वे राज्य के अन्य शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करने और राज्य के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हो सके। विदेशी भाषाओं स्पेनिश, जर्मन, फ्रेंच, चाईनीज एवं जापानी भाषा विभागों के लिये यथोचित पदों का सृजन किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति होती है। जिस देश का युवा सपने देखने का साहस, उन्हें पूरा करने का संकल्प और कठिन परिश्रम करने की क्षमता रखता है, उस देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। भारत की विशाल युवा आबादी विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया जैसी महत्वपूर्ण पहलें संचालित की जा रही हैं। आज युवा नौकरी तलाशने के साथ-साथ उद्यमिता और रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युग नवाचार का है। राज्य सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में एआई, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे आधुनिक विषयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश में साइंस सिटी और एस्ट्रो पार्क जैसी परियोजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही शिक्षा और शोध की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है। प्रदेश में नए महाविद्यालयों और मॉडल कॉलेजों की स्थापना, महिला छात्रावास, आईटी लैब एवं परीक्षा भवन जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए नई भर्तियों के माध्यम से भी प्रयास किए जा रहे हैं । मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना के माध्यम से प्राध्यापकों को 18 लाख रुपये तक का शोध अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है तथा उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी सरकार द्वारा आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। यूपीएससी, एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले युवाओं को साक्षात्कार की तैयारी के लिए 50 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें युवाओं की मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो। राज्य में देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानूनों में से एक लागू कर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि इसी पारदर्शी व्यवस्था के परिणामस्वरूप पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का युवा विकास संबंधी विजन केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। होम-स्टे, ऑर्गेनिक फार्मिंग, पर्यटन और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, ताकि रोजगार की तलाश में युवाओं को अपनी मिट्टी और घर-परिवार से दूर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड की जवानी और पानी दोनों उत्तराखंड के काम आएं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालय में उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं, अपनी क्षमताओं को पहचानें, नई सोच के साथ आगे बढ़ें और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के संदेश का उल्लेख करते हुए युवाओं से लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर प्रयास करते रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन के पहले सत्र में जल, जमीन, जंगल पर अहम चर्चा

प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेेलन का पहला सत्र जल, जंगल, जमीन के संरक्षण की परम आवश्यकता पर केंद्रित रहा। इस मौके पर जोर देते हुए कहा गया कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी खूबसूरती जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है। जोर देते हुए कहा गया कि जीडीपी तय करते हुए एक पैमाना यह भी होना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र की पारिस्थितिकी प्रगति किस तरह की रही है।

दून विश्वविद्यालय में आयोजित इस सम्मेलन के पहले सत्र में हेस्को संस्था के संस्थापक पदम भूषण डा. अनिल जोशी ने कहा कि देश का कोई कोना हो या विश्व की कोई अन्य जगह, पारिस्थितिकी और विकास के बीच संतुलन की चर्चा केंद्र में है। हिमालयी प्रदेश होने के कारण हमारे यहां तो यह चर्चा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच संतुलन अति आवश्यक है, क्योंकि आज पारिस्थितिकी संकट गहराने लगा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जीडीपी तय करते वक्त औद्योगिक विकास, रोजगार समेत अन्य पैमानों पर ध्यान दिया जाता है, उसमें पारिस्थितिकी प्रगति का भी मूल्यांकन जरूरी है।

यूएनडीपी के स्टेड हेड प्रदीप मेहता ने कहा कि यह जरूरी है कि हम परंपरागत कृषि करें, लेकिन परिस्थिति और सुविधाओं के अनुरूप उसमें बदलाव किया जाना भी आवश्यक है। वन विभाग के पूर्व पीसीसीएफ और आईआईटी रूड़की की फैकल्टी डा. कपिल जोशी ने कहा कि निसंदेह हिमालयी क्षेत्रों में विकास हुआ है, लेकिन यह समीक्षा होनी भी जरूरी है कि उससे पारिस्थितिकी तंत्र पर कितना असर पड़ा है। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में आंकडे़ भी प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि चाहे तापमान हो, बारिश हो या पारिस्थितिकी से जुड़ी अन्य कोई बात, आंकडे़ बता रहे हैं कि उनमें बहुत ज्यादा चरम स्थिति दिख रही है, जो कि ठीक नहीं है।

वन विभाग की पीसीसीएफ और यूकेएफडीसी की एमडी नीना ग्रेवाल ने कहा कि प्राकृतिक संपदा का उतना ही इस्तेमाल जरूरी है, जितने की आवश्यकता है। उन्होंने अपने संबोधन में वनों पर आधारित रोजगार, ईको-टूरिज्म की आवश्यकता पर जोर दिया। एटरो रीसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ नितिन गुप्ता ने कहा कि ई-वेस्ट कोे रिसाइकल करके हम इस समस्या को अवसर में बदल सकते हैं।

इस सत्र के कोऑर्डिनेटर वन विभाग के पीसीसीएफ डा. एसपी सुबुद्धि ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने प्रवासी उत्तराखंडियों की ओर से उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। प्रवासी उत्तराखंडियों में डा. मायाराम उनियाल, रामप्रकाश पैन्यूली, सतीश पांडेय और राजेंद्र सिंह ने सुझाव दिए।

दून विवि में इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के वार्षिक अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में सामाजिक कल्याण, अर्थशास्त्र, रोजगार, उद्योग, कृषि, तकनीकी, पर्यावरण और नगरीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देश-विदेश के प्रख्यात विद्वानों द्वारा सार्थक विचार-विमर्श किया जाएगा। इस चिंतन-मंथन से सामाजिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जन-जन के कल्याण के लिए ठोस एवं व्यवहारिक उपायों का संकलन भी हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। उनके प्रधान सेवक बनने के बाद पिछले 11 वर्षों में अनेक नीतियों एवं योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक वर्ग के कल्याण की दिशा में संकल्पपूर्वक प्रयास किए गए हैं। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए प्रारंभ की गई जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना जैसी अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देश के करोड़ों नागरिकों को प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे अभियान और प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान जैसी योजनाएं पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राज्य सरकार भी प्रदेश में सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने के साथ सतत विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने के साथ ही पति-पत्नी दोनों को पेंशन देने तथा सभी पेंशन योजनाओं में त्रैमासिक के स्थान पर मासिक भुगतान की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार ने प्रत्येक निर्णय में प्रदेश में सामाजिक न्याय स्थापित करने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2030 तक सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ संकल्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखते हुए सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ एक सुरक्षित व न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य सरकार ने इकोनॉमी और इकोलॉजी के संतुलन को सुनिश्चित करने के लिए त्रि-स्तंभीय एवं नौ-सूत्रीय नीति की शुरुआत की है, जो सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, पेयजल एवं स्वच्छता, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी विकास, वित्तीय समावेशन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। सरकार मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, सौर ऊर्जा क्रांति अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन और मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर आया है। राज्य में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, सतत कृषि और जल संसाधन प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सामाजिक विकास के क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों को सशक्त बनाने के लिए टाटा ट्रस्ट, नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के साथ तीन अत्यंत महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टाटा ट्रस्ट के सहयोग से राज्य में जल प्रबंधन, पोषण, टेलीमेडिसिन, ग्रामीण आजीविका और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समग्र और सतत विकास को सशक्त किया जा रहा है, वहीं नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, पायथन, जनरेटिव एआई, कौशल विकास एवं स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में युवाओं को आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी नवाचारों के माध्यम से उत्तराखंड को सस्टेनेबल डेवलपमेंट के एक मॉडल स्टेट के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, आईएएसएसआई के अध्यक्ष एवं नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, प्रो. आर.पी. ममगांई, प्रो. आई.सी. अवस्थी, प्रो. अलख शर्मा एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

दून विश्वविद्यालय के समस्त स्टाफ ने एक दिन का वेतन सीएम राहत कोष में आपदा प्रभावितों को लिये दिया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में आज दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने शिष्टाचार भेंट की और इस अवसर पर मुख्यमंत्री को दून विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान स्वरूप भेंट किया, ताकि आपदा प्रभावित लोगों की मदद की जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सामूहिक सहयोग भावना की सराहना करते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में दून विश्वविद्यालय का यह योगदान न केवल एक प्रेरक कदम है, बल्कि यह राज्य के शैक्षणिक संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कुलपति और विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए यह विश्वास जताया कि राज्य के अन्य शैक्षणिक, सामाजिक और निजी संस्थान भी इसी प्रकार आगे आकर आपदा राहत कार्यों में अपना सहयोग प्रदान करेंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित कर रही है और जन सहयोग से यह कार्य और अधिक प्रभावी रूप से संपन्न हो सकेगा।

देहरादूनः सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज में हिंदू सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर शिक्षण और शोध-कार्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानव सेवा उत्थान समिति द्वारा हरिद्वार में बैसाखी महापर्व के अवसर पर आयोजित सद्भावना सम्मेलन एवं राष्ट्रीय एकता शिविर में प्रतिभाग किया।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मानव कल्याण के उद्देश्य से आयोजित ये विशाल सम्मेलन न केवल समाज में एकता औऱ सद्भावना का संदेश देगा बल्कि मानव सेवा के लिए भी जन-जन को प्रेरित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन सनातन हिंदू संस्कृति हमें “वसुधैव कुटुम्बकम’’ अर्थात संपूर्ण पृथ्वी को अपना परिवार मानने की प्रेरणा देती है। हमारे ऋषियों-मुनियों ने समाज में अध्यात्म और ज्ञान द्वारा लोगों को सद्भावना का मार्ग दिखाया है। उसी मार्ग पर चलते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज हमारा देश वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पर आधारित ष्एक पृथ्वी – एक परिवार – एक भविष्यष् की अवधारणा को वैश्विक मंचों पर साकार कर रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कोरोना काल में विश्व के लगभग 100 देशों को कोविड की वैक्सीन देना हो, योग एवं आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जाना हो या अनेकों छोटे देशों को आर्थिक सहायता देनी हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव पूरी पृथ्वी को मानवता के एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया है। आज विश्व में कहीं भी कोई आपदा आती है तो भारत तत्काल पीड़ित देश को राहत सामग्री पहुँचाने का कार्य करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हाल ही में जब म्यांमार में विनाशकारी भूकंप आया था तो भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के अंतर्गत वहां 625 टन राहत सामग्री भेजने के साथ ही डॉक्टरों की टीम को भी भेजा, जिसने वहां पर सैकड़ों लोगों का उपचार किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता किसी भी देश की शक्ति और स्थिरता का आधार होती है। यदि देश के नागरिकों में आपसी सद्भावना होगी, तो वे मिलकर देश की उन्नति के लिए कार्य करेंगे। इसी को ध्यान में रखकर आज देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नागरिकों में एकता की भावना को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से हमारी राज्य सरकार भी प्रदेश में एकता, समानता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हाल ही में, हमनें प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने जैसा ऐतिहासिक कार्य किया है। इसके माध्यम से जाति, धर्म और लिंग आदि के आधार पर कानूनी मामलों में होने वाले भेदभाव को पूर्ण रूप से खत्म कर प्रदेश के सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का प्रयास किया गया है।
इसके साथ ही, हमारी सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आज एक ओर जहां, केदारनाथ धाम एवं बद्रीनाथ धाम में वृहद स्तर पर पुनर्निमार्ण के कार्य किए जा हैं वहीं, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरीडोर के निर्माण की दिशा में भी हम कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की पढ़ाई प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। इस सेंटर में हिंदू सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर शिक्षण और शोध-कार्य किए जाएंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया की रही है। इस विचार के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है।
इस अवसर पर विधायक आदेश चौहान, जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, विनय रोहिल्ला, जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह,एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोभाल सहित सभी जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

हमारे प्राचीन गुरुकुलों में भी संवाद और चर्चा को शिक्षा का आधार माना गयाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित गंग धारा-विचारों का अविरल प्रवाह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने पहाड़ी उत्पादों पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम हेतु आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और परंपराओं को पोषित करने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। जिस प्रकार गंगा का प्रवाह अविरल है, उसी प्रकार हमारे विचारों का प्रवाह भी गतिमान रहता है। विचारों का प्रवाह हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा विचारों का आदान-प्रदान सदैव हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है। हमारे प्राचीन गुरुकुलों में भी संवाद और चर्चा को शिक्षा का आधार माना गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति पर हमें श्रद्धेय स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इस दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के दौरान पलायन, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण जैसे विषयों के साथ हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सभी विषय हमारे राज्य के साथ समस्त हिमालयी क्षेत्र के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कार्य कर रहा है। लोकल फॉर वोकल, मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार, राज्य में सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने, एवं समग्र विकास के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। राज्य सरकार दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना करने जा रही है। जहाँ हिंदू सभ्यता, दर्शन, इतिहास और सिद्धांतों पर गहन अध्ययन और शोध कार्य किया जाएगा। इकॉनमी और इकोलॉजी के समन्वय के साथ राज्य के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जहां जीडीपी के साथ जीईपी को भी मापने का प्रयास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर रहा। राज्य सरकार स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड सरकार ने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता पर कार्य किया। जिसे जनवरी 2025 तक लागू कर दिया जाएगा। समान नागरिक संहिता के कई प्रावधानों का सरलीकरण किया जा रहा है। इसे समझने हेतु एप्लीकेशन भी तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही तेज की है। सख्त धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी कानून एवं नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार ने जो भी कार्रवाई की है, वो किसी धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के उद्देश्य से की है।

इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक विनोद चमोली, कुलपति दून विश्वविधालय डॉ. सुरेखा डंगवाल, एंव अन्य लोग मौजूद रहे।

राज्य में निवेश को बढ़ावा देने को 30 नई नीतियां बनाई गईं हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में कौशल विकास एवं रोजगार कॉन्क्लेव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर जनरेशन इंडिया और उत्तराखण्ड सरकार के बीच एमओयू भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉन्क्लेव हमारे युवाओं के कौशल विकास के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। यह कॉन्क्लेव युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रेरित भी करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को दुगना करने के लक्ष्य को लेकर सरकार कार्य कर रही है। दो साल में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 1.3 गुना वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किये गये हैं। राज्य में विभिन्न क्षेत्रों के लिए 30 नई नीतियां बनाई हैं। उत्तराखण्ड राज्य के युवाओं को रोजगार देने में भी अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में एक साल में बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी तेजी से बढ़ी है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की रैकिंग में राज्य को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांच वर्षों में हम राज्य की जीएसडीपी को दोगुना करने के साथ-साथ कौशल विकास और रोजगार सृजन में भी उल्लेखनीय कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है, जहां 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यदि इस ऊर्जा को सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान किया जाए, तो हमारा देश न केवल एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरेगा, बल्कि एक सशक्त और समृद्ध समाज की नींव भी रख सकेगा। यही कारण है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में ही स्किल इंडिया अभियान की शुरुआत की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हमारे युवाओं को उनकी रुचि और क्षमताओं के अनुसार उत्कृष्ट और व्यावसायिक रूप से उपयोगी प्रशिक्षण प्रदान करना था। यह अभियान न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ा रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और सहयोग से हमारी सरकार भी राज्य में युवा शक्ति को प्राथमिकता देते हुए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ इस संबंध में निरंतर कार्य कर रही है। कौशल विकास को राज्य के प्रमुख एजेंडे में शामिल करते हुए कई योजनाओं और नीतियों को लागू किया गया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत हजारों युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का रोजगार परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है, तकनीकी नवाचार और वैश्विक परिवर्तन के कारण रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। इसके लिए हमें अपने युवाओं को “फ्यूचर-रेडी“ बनाना होगा। इस दिशा में युवाओं को “डिमांड बेस्ड स्किल ट्रेनिंग“ देने के लिए विभिन्न उद्योगों और कॉरपोरेट संस्थानों के साथ समझौते किए गये हैं। राज्य के 13 आई.टी.आई. संस्थानों में दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ 20 अल्पकालिक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्रदान किये जा रहे हैं। साथ ही, आई.टी.आई. काशीपुर में इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में एक “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस“ स्थापित किया गया है। फिलिप्स के सहयोग से आई.टी.आई. हरिद्वार में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए एक “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस“ स्थापित किया गया है। अशोक लेलैंड कंपनी के साथ भी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अशोक लेलैंड प्रत्येक वर्ष हमारे एक हजार युवाओं को अपने प्लांट में इंटर्नशिप और रोजगार प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा विदेशी प्लेसमेंट नीति के तहत राज्य के युवाओं को विदेशी भाषाओं सहित विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि हमारे युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें। इसके पहले चरण में 23 युवाओं को जापान भेजा है। 25 युवाओं को जर्मनी और ब्रिटेन में नर्सिंग क्षेत्र हेतु भेजने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कॉन्क्लेव में विभिन्न सत्रों के माध्यम से राज्य के प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर्स, जैसे आयुष, वेलनेस, पर्यटन, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण, वन आधारित आजीविका, डिजिटल मार्केटिंग, ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, अक्षय ऊर्जा आदि पर चर्चा से जो विचार और सुझाव प्राप्त होंगे। वे राज्य में युवाओं के कौशल विकास के लिए तैयार की जाने वाली नीतियों के लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होंगे।

कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं के कौशल विकास की दिशा में निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। औद्योगिक संस्थानों की मांग के अनुसार युवाओं के कौशल विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। इन प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास के लिए लघु अवधि के कोर्स भी नियमित कराये जा रहे हैं।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष अवस्थापना परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, उपाध्यक्ष सेतु आयोग राजशेखर जोशी, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, नीति आयोग में राज्य से नोडल अधिकारी सोनिया पंत, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, अपर सचिव विजय जोगदण्डे, एसीईओ सीपीपीजीजी डॉ. मनोज पंत, अपर सचिव मनमोहन मैनाली उपस्थित थे।

दून विश्वविद्यालय में प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने की घोषणा, बोले प्रवासियों के परिषद का करेंगे गठन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में “प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन“ में सभी प्रवासी उत्तराखंड़ियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले अल्मोड़ा जनपद में बस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की माटी से जुड़े हुए प्रवासियों ने शिक्षा, अनुसंधान, ब्यूरोक्रेसी, फिल्म निर्माण, उद्योग, व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान उत्तराखंड से हैं। भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस विपिन रावत भी इसी भूमि से थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति अपने आप में विशिष्ट है। हमारे प्रवासी देश के विभिन्न राज्यों में अपनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन सालों में उन्हें देश के अनेक राज्यों में पर्वतीय समाज के लोगों से मिलने का अवसर मिला और उन्होंने महसूस किया कि हमारे प्रवासियों के भीतर बसा उत्तराखंड सदैव उनके साथ रहता है। उन्होंने उत्तराखंड की भाषा, संस्कृति और संस्कारों को कभी नहीं छोड़ा। यह प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन सभी को उत्तराखंड की मिट्टी से पुनः जोड़ने का एक प्रयास है। यह ऐसा समागम है जहां सभी प्रवासी भाई बहन न सिर्फ राज्य के अधिकारियों के साथ संवाद कर सकेंगे बल्कि उन्हें विभिन्न राज्यों में निवासरत अन्य उत्तराखंडी प्रवासियों से भी मिलने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यहां से निकलने वाला संदेश लाखों उत्तराखंडी प्रवासियों तक पहुँचेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूर्ण करने में उत्तराखंड भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, पेयजल सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से मजबूत हो रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का कार्य भी तेजी से चल रहा है। एयर कनेक्टिविटी को मजबूत बनाया जा रहा है। 30 से अधिक नई नीतियां लाकर उत्तराखंड को निवेश और रोजगार सृजन के लिए अनुकूल बनाया है। प्रदेश में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी प्राथमिकता के साथ कार्य हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश हित में कई कठोर एवं ऐतिहासिक निर्णय लिये गये हैं। यूसीसी का कानून राज्य में जल्द लागू होगा। देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण रोधी कानून और दंगा रोधी कानून लागू किया गया है। लैंड जिहाद के खिलाफ भी मुहिम चलाकर प्रदेश भर में 5000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करवाया है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत् विकास के लक्ष्यों के इंडेक्स में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। राज्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी में है। एक वर्ष में बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत कम हुई है। राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नई फिल्म नीति को भी मंजूरी दी है जिसमें राज्य में फिल्मों की शूटिंग करने पर कई प्रकार की सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंड़ियों को प्रदेश की विभिन्न जानकारियां उपलब्ध कराने और उनकी समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से एक डेडीकेटेड वेबसाइट भी तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रवासियों से अपील की कि कम से कम वर्ष में एक बार अपने गांव और पैतृक घर पर जरूर आएं और अपनी-अपनी विशेषज्ञता के हिसाब से अपने क्षेत्र के विकास में योगदान दें। आपके सुझावों एवं कार्यों के आधार पर विशिष्ट नीतियां बनाकर उन पर कार्य किया जायेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आज होने वाले मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह अवश्य ही उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि यह गौरवशाली क्षण है, आज प्रवासी उत्तराखंड़ियों ने अपने संघर्ष और परिश्रम के बल पर देश के कोने-कोने में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। राज्य में कार्य करने के लिए अनेक क्षेत्रों में संभावनाएं हैं।

विधायक विनोद चमोली ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना बड़े संघर्षों के बाद हुई। राज्य में कार्य करने के लिए बहुत अच्छा वातावरण है। हम सबको राज्य के विकास के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

प्रवासी उत्तराखंडी और मेयर लखनऊ सुषमा खरकवाल ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें प्रवासी सम्मेलन में आने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मेरे लिए मातृभूमि उत्तराखंड है। यह देवभूमि प्रतिभाओं की धनी है।

प्रवासी उत्तराखंडी और अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने कहा कि राज्य में क्षेत्रीय फिल्मों को बढ़ावा मिलना चाहिए। उत्तराखंड की लोक कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के आयोजन सेतु के रूप में कार्य करेंगे।

प्रवासी उत्तराखंडी और भारत सरकार में सचिव वाणिज्य सुनील बर्थवाल ने कहा कि प्रवासियों को अपने गांव को गोद लेने वाला विचार बहुत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए वे हर संभव सहयोग देंगे और अपनी मातृभूमि के विकास के लिए भागीदार बनेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जैविक उत्पाद के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं। इनकी मांग राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ी है। सामुहिक खेती से उत्त्राखंड में जैविक उत्पादों को बढ़ाया जा सकता है।

प्रवासी उत्तराखंडी और राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंड़ियों को अपने माटी से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सराहनीय पहल की गई है। राज्य में पर्यटन, ऊर्जा, वन संपदाओं, उद्योग के क्षेत्र में कार्य के अनेक संभावनाएं हैं। हर क्षेत्र में राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि के लिए कार्य करने के लिए उन्हें जो भी अवसर मिलेगा, वे हमेशा उपस्थित रहेंगे।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत, किशोर उपाध्याय, सविता कपूर, विधायक एवं प्रवासी उत्तराखंडी सुरेन्द्र मैठाणी, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अनेक संख्या में आये प्रवासी उत्तराखंडी और शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सहकार से समृद्धि के स्वप्र को साकार करने को पीएम ने सहकारिता मंत्रालय का किया गठनः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में सहकार भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक महोत्सव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने सहकार भारती के संस्थापक स्व. लक्ष्मणराव इनामदार का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने मूकसाधक की भांति राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन जिया और देश में सहकारिता आंदोलन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी स्थापना से ही सहकार भारती ने सहकारिता आंदोलन को राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में प्रशंसनीय कार्य किया है और हमेशा अपने कार्यों से यह प्रयास किया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा जाए। उन्होंने कहा कि सहकारिता में स्पर्धा की बजाए सहयोग की भावना रहनी चाहिए क्योंकि सहकारिता किसी पर उपकार नहीं बल्कि एक दूसरे को स्वावलंबी बनाने का कार्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी के लिए सहकारिता का बहुत महत्व है, क्योंकि आज की पीढ़ी जल्द स्वावलंबी बनना चाहती है। इसीलिए सहकार से समृद्धि के स्वप्न को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सहकारिता मंत्रालय का गठन किया। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में यह मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को और अधिक मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा प्रदान कर रहा है। मंत्रालय सहकारी समितियों के लिए कारोबार में सुगमता के लिए प्रक्रियाओं को कारगर बनाने और बहु-राज्य सहकारी समितियों के विकास को सक्षम बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सहकारिता विभाग व उससे सम्बन्धित समस्त संस्थाओं का उद्देश्य न केवल कृषकों को सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान कराना है, बल्कि ग्रामीण एवं शहरी निर्बल और निर्धन वर्ग को सशक्त बनाते हुये उनके जीवन स्तर को उन्नत करना भी है। सहकार भारती सहकारिता और सहकारी समितियों का एकमात्र अखिल भारतीय संगठन है। अपने मिशन के अनुसरण में सहकार भारती आत्मनिर्भर सहकारी संस्थानों के निर्माण के लिए जनता को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अपने अनुशांगिक प्रकोष्ठ ‘गंगा सहकार ग्राम’ के तहत प्राकृतिक खेती, औषधि एवं पौधारोपण आदि कार्यों को बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के तहत पशुपालकों को साइलेज उपलब्ध कराया जा रहा है। देशभर में बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण कार्य की शुरुआत उत्तराखंड से हुई है। राज्य की सभी 670 समितियों का कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है। सहकारी समितियों के साथ 95 जन औषधि केंद्र एवं जन सुविधा केंद्रों की शुरूआत भी सबसे पहले उत्तराखंड ने की है। सहकारिता की भावना से प्रारंभ किए गए जन औषधि केंद्रों से लोगों को सस्ती दवाएं मिल रही हैं।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत, सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर, मिलेनियम इंडिया एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक डॉ. उदय काकरू, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल उपस्थित थे।