हरियाणा में बीजेपी-जेजेपी सरकार ने संभाली सत्ता की चाबी

रविवार को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए जेपी नड्डा सुबह चंडीगढ़ पहुंचे। शपथ ग्रहण समारोह में दुष्यंत चौटाला के पिता डॉ. अजय चौटाला भी पहुंचे। दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला, छोटे भाई दिग्विजय चौटाला, अनूप धानक, दविंदर बबली, रणजीत चौटाला, संदीप सिंह, अमरजीत जुलाना आदि भी पहुंचे।

दूसरे कार्यकाल के रूप में ली मनोहरलाल ने शपथ
बता दें हरियाणा में मुख्यमंत्री के अलावा 13 मंत्री बनाए जा सकते हैैं। आठ मंत्री पद भाजपा व डिप्टी सीएम समेत पांच मंत्री पद जजपा के खाते में जा सकते हैैं। जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल से शपथ ग्रहण से पहले उनके आवास पर चर्चा की। राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य दोपहर बाद सवा दो बजे मुख्यमंत्री मनोहरलाल और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को शपथ दिलाई। इस तरह मनोहरलाल ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल शुरुआत की।

मनोहर लाल ने राज्यपाल के समक्ष 57 विधायकों का समर्थन होने का दावा करते हुए सरकार बनाने का निमंत्रण देने की पेशकश की। भाजपा की ओर से मनोहर लाल, जजपा की ओर से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सरदार निशान सिंह और निर्दलीय विधायकों की ओर से उनके लिखित समर्थन पत्र को भाजपा प्रभारी डा. अनिल जैन ने राज्यपाल को सौंपा।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने मौजूदा कार्यकाल को खत्म मानते हुए इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा। राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए शपथ ग्रहण तक कार्यकारी प्रभार संभालने का अनुरोध किया। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सरकार बनाने का न्यौता दिया। 57 साल बाद लगातार दूसरी बार गैर कांग्रेसी दल की सरकार भाजपा व जजपा बनाने जा रहे हैं।

इस तरह हरियाणा सरकार को मिला समर्थन
कुल विधायकों की संख्या-90
भाजपा के विधायकों की संख्या-40
जजपा के विधायकों की संख्या -10
निर्दलीय विधायकों की संख्या-7
कुल योग-57

रेप आरोपी अगर पकड़ा न जाता, तो चुनाव लड़ने का था इरादा

रेप का आरोपी गुरमीत राम रहीम सिंह अब 20 साल तक जेल में ही रहेगा। डेरा प्रमुख के तौर पर पिछले कई सालों में राम रहीम ने अपना रसूख इतना बड़ा कर लिया था कि हर राजनीतिक दल उसके आगे अपना सिर झुकाता नजर आता था, लेकिन फिर भी राम रहीम का इतना बड़ा कद उसे सजा दिलवाने से नहीं रोक सका।
सूत्रों के अनुसार, राम रहीम जब यह देखता था कि हर पार्टी चुनाव में जीत के लिए उसके पास ही आती है। यह देखकर वह भी अपने राजनीतिक पार्टी शुरू करने की सोच रहा था। राम रहीम ने अपने डेरे में एक राजनीतिक विंग भी बना रखी थी। जो कि सभी राजनीतिक गतिविधियों पर खबर रखती थी।
राम रहीम हर चुनाव में किसी ना किसी पार्टी को समर्थन का ऐलान करता था। उसके सभी अनुयायी उस पार्टी को वोट देते थे। जिसका फर्क सीधे तौर पर चुनावी नतीजों पर पड़ता था। राम रहीम को यह उम्मीद रहती थी कि अगर सरकार में उसका समर्थन रहेगा। तो उसपर चल रहे सभी केसों में थोड़ी ढील बरती जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था। शायद इसलिये वह अब खुद की पार्टी उतारने की तैयारी में था।

जानिए, किसने प्रशासन से कहा कि मैं बाबा के साथ जेल में रहना चाहती हॅू

हर वक्त साथ रहने वाली डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की गोद ली हुई बेटी हनीप्रीत उर्फ प्रियंका बाबा के साथ जेल में रहना चाहती थी। इसके लिए हनीप्रीत और डेरा मुखी के वकीलों ने बहुत कोशिश की, लेकिन जेल प्रशासन और रोहतक के जिला प्रशासन ने हनीप्रीत को डेरा मुखी के साथ जेल में रहने की अनुमति नहीं दी।
हनीप्रीत डेरा प्रमुख की दत्तक बेटी है, लेकिन करीब छह साल पहले 2011 में हनीप्रीत के पति विश्वास गुप्ता ने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अपनी पत्नी के बाबा के साथ अवैध संबंधों का आरोप लगाया था। विश्वास पंचकूला का रहने वाला है और हनीप्रीत फतेहाबाद की रहने वाली है। दोनों के बीच अब तलाक हो चुका है।
हनीप्रीत का नाम डेरे के उत्तराधिकारियों की सूची में भी टॉप पर है। डेरा प्रमुख की कई फिल्मों में उसके रोल भी बताए जाते हैं। डेरा प्रमख जब सीबीआइ कोर्ट पंचकूला में पेशी के लिए आया, तब हनीप्रीत उसके साथ ही थी। बाबा के वकीलों ने हनीप्रीत को बाबा की सहायक के रूप में कोर्ट में मौजूद रहने की अनुमति दिलाई थी। तब वकील ने यह भी कहा था कि हनीप्रीत भी जेल में साथ जाना चाहती है। सीबीआई के जज ने कहा कि यह सरकार अथवा जेल या जिला प्रशासन के स्तर का मामला है। तब तक हनीप्रीत चॉपर में बाबा के साथ चंडी मंदिर से सुनारिया तक उड़ान भर चुकी थी, लेकिन जब बाबा के साथ जेल में जाने की बारी आई तो जिला प्रशासन व जेल अधिकारियों ने रोक दिया। हरियाणा के डीजीपी बीएस संधू ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सहायक के तौर पर हनीप्रीत को कोर्ट में रहने की अनुमति सीबीआइ कोर्ट से मिली थी, लेकिन इससे आगे की प्रक्रिया को जिला प्रशासन को पूर्ण करना था। संबंधित लड़की को जेल में रहने की अनुमति प्रशासन ने नहीं दी।