कोविड और उसके बचाव को माने एम्स के सुझाव, क्या करें, क्या न करें…

तेजी से फैल रही कोविड महामारी अब खतरनाक गति से बढ़ने लगी है। कारण है कि आम जनमानस कोविड नियमों का पालन करने में अभी भी लापरवाही बरत रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स, ऋषिकेश की ओर से इस मामले में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर लापरवाह लोगों को सचेत किया है कि समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति ने यदि नियमों के पालन में गंभीरता नहीं बरती तो स्थिति भयावह हो सकती है।

एम्स में कोविड के नोडल ऑफिसर डाॅक्टर पीके पण्डा ने कोविड से बचाव पर सुझाव दिया कि बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है। हम सभी को समझना होगा कि कोरोना महामारी का वायरस हमारे नाक और मुहं द्वारा शरीर में प्रवेश करने में सक्षम है और सबसे पहले हमारे फेफड़ों को संक्रमित करता है। इसलिए इस महामारी से बचाव का पहला मंत्र है कि घर से बाहर निकलने पर प्रत्येक व्यक्ति अनिवार्यरूप से दोहरा मास्क पहने, यह मास्क घर पर बनाया हुआ भी हो सकता है साथ ही नियमिततौर पर बार-बार अपने हाथों को सेनेटाइज करता रहे। यदि प्रत्येक व्यक्ति मास्क का सही ढंग से इस्तेमाल करेगा तो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वायरस के संक्रमण का खतरा स्वतः ही कम हो जाएगा।
इसके अलावा प्रत्येक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से आपस में न्यूनतम 2 मीटर की दूरी बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। डाॅ. पण्डा ने बताया कि इसके अलावा 45 वर्ष से अ​धिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह जल्द से जल्द कोविड वैक्सीन लगाए और स्वयं को और समाज को सुरक्षित रखने में सहयोग करे। इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति कोविड संक्रमित हो जाता है तो उसे निम्न बातों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

1- अगले 15 दिनों के लिए प्रतिदिन टेबलेट विटामिन-सी 500 मिलीग्राम दिन में दो बार लेना शुरू करें।

2- बुखार की शिकायत होने पर टेबलेट पैरासिटामोल-650 एमजी का दिन में 4 से 6 बार 2 से 3 दिनों तक सेवन करें।

3- कोल्ड संबंधी दिक्कत होने पर टेबलेट मॉन्टेलुकास्ट-लेवो-सिट्रीजिन का दैनिक उपयोग करें।

4- संक्रमित होने की स्थिति में पूरी तरह बेड रेस्ट आवश्यक है।

5- मानसिक तनाव और भय से पूरी तरह मुक्त रहें।

6- ज्यादा पानी पिएं और आसानी से पचने वाले तरल खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

डाॅक्टर पण्डा ने सलाह दी है कि प्रोन (पेट के बल लेटना) या अर्ध प्रोन उन्मुख स्थिति में पेट के बल प्रतिदिन 4 से 6 बार ( हरबार 30 से 60 मिनट ) सोएं। कोविड संक्रमण के दौरान वायरल फीवर प्रबंधन के शुरुआती चरण में सबसे महत्वपूर्ण है शरीर को आराम देना (यह शारीरिक आराम, मानसिक आराम, मन की शांति और वैराग्य पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि कोविड संक्रमण के दौरान एकबार प्रारंभिक चरण बीत जाने के बाद अगला इम्युनोलॉजिकल चरण आता है। जहां हमारे शरीर को बुखार, खांसी आदि के समान लक्षणों के साथ सांस की तकलीफ और ऑक्सीजन की आवश्यकता भी पड़ सकती है। इस चरण के दौरान सर्वोत्तम उपलब्ध उपचार प्राइमिंग वेंटिलेशन, ऑक्सीजन, डेक्सामेथासोन व स्टेरॉयड, हेपरिन व एंटीकोआग्यूलेशन, या वेंटिलेशन सहायक उपचार की जरुरत है।

आवश्यक निगरानी-

ए- लक्षण
बी- श्वसन दर
सी- नाड़ी दर
डी- रक्तचाप
ई- तापमान
एफ-ऑक्सीजन सेच्युरेशन
इनमें से कोई भी नॉर्मल से अलग होने पर मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि पहले चरण में उक्त उपचार कर लिए गए तो दूसरे चरण में गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है।

कोविड को देखते हुए एम्स ऋषिकेश ने आरक्षित किए 300 से अधिक बेड


कोविड-19 के तेजी से बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश ने सोमवार को ओपीडी सेवाओं को बंद करने का निर्णय लिया है। मरीजों की सुविधा के लिए संस्थान की ओर से टेलिमेडिसिन सेवाएं शुरू की गई हैं, लिहाजा अब सभी सामान्य रोगों से ग्रसित मरीज टेलिमेडिसिन ओपीडी के माध्यम से संबंधित चिकित्सकों से जरुरी परामर्श ले सकेंगे। इसके साथ ही कोविड संक्रमण से ग्रसित मरीजों के उपचार के लिए एम्स अस्पताल प्रशासन ने 300 से अधिक बेड आरक्षित किए हैं। बताया गया है कि आवश्कता पड़ने पर इनकी संख्या 500 तक की जाएगी।

कोरोना वायरस से ग्रसित मरीजों की लगातार में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है, जिसके चलते निदेशक प्रो. रवि कांत की देखरेख में एम्स अस्पताल प्रशासन ने कुछ व्यवस्थाओं में बदलाव किया है। जिनके तहत अस्पताल में जनरल ओपीडी को बंद कर, अब टेलिमेडिसिन ओपीडी के माध्यम से मरीजों को परामर्श दिया जाना शामिल है। इस बाबत एम्स के डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि तेजी से फैल रहे कोविड संक्रमण को देखते हुए संस्थान में जनरल ओपीडी सेवाएं स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
ऐसे में सामान्य रोगों से ग्रस्त सभी मरीज अब टेलिमेडिसिन ओपीडी के माध्यम से देखे जाएंगे। जबकि अस्पताल की इमरजेंसी सेवा पूर्व की भांति 24 घंटे जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि लोगों को अनावश्यक परेशानी से बचने के लिए एम्स द्वारा संचालित की जा रही टेलिमेडिसिन ओपीडी सेवाओं का लाभ लेना चाहिए। इससे मरीजों को संबंधित बीमारी के लिए घर बैठे चिकित्सकीय परामर्श भी मिल सकेगा और वह अनावश्यकरूप से घर से बाहर निकलकर कोविड संक्रमण से भी सुरक्षित रह सकेंगे।

कोविड के तीब्र गति से बढ़ते संक्रमण के प्रति आगाह करते हुए कम्युनिटी और फेमिली मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. योगेश बहुरूपी ने बताया कि कोविड की दूसरी लहर पहली लहर से कईगुना अधिक घातक है लिहाजा प्रत्येक व्यक्ति को इसकी गंभीरता को समझना होगा और भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा जारी कोविड गाइडलाइन का शब्दशरू पालन करना होगा।

इसके अलावा हम सभी को अधिकांश समय खासकर सार्वजनिक स्थानों पर हरहाल में मास्क के साथ रहने की आदत भी डालनी होगी। उनके अनुसार कोविड से बचाव का पहला उपाय मास्क का इस्तेमाल ही है। उन्होंने बताया कि आपस में दो गज की दूरी बनाए रखने और वैक्सीन लगवाने से कोविड संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही सुझाव दिया कि शरीर में किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण नजर आने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।

टेलीमेडिसिन ओपीडी में चित्र में उल्लेखित विभिन्न विभागों द्वारा सेवाएं दी जाएंगी। टेलीमेडिसिन हेल्पलाइन नंबर 1800 180 4278, 7454989545, 9621539863 जारी किए गए हैं।

एम्स निदेशक ने किया कुंभ के तहत बनाए गए सैक्टर चिकित्सालय में व्यवस्थाओं का निरीक्षण

महाकुंभ 2021 मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की टीमें चैबीस घन्टे उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा मुख्य स्नान पर्वों पर किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्स ऋषिकेश में डिजास्टर वार्ड और आईसीयू बेड आरक्षित किए गए हैं। संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं का एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बृहस्पतिवार को हरिद्वार के सैक्टर चिकित्सालय पहुंचकर जायजा लिया और इस बाबत उन्होंने चिकित्सकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

कुम्भ स्नान के लिए हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को एम्स ऋषिकेश द्वारा चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके लिए हरिद्वार स्थित बैरागी कैम्प में बने सैक्टर चिकित्सालय में एम्स के चिकित्सकों की टीमें तैनात की गई हैं। व्यवस्थाओं को परखने और तैयारियों के मद्देनजर एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बृहस्पतिवार को बैरागी कैम्प में बने सैक्टर चिकित्सालय का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में बनाए गए कोविड टेस्टिंग एरिया, ओपीडी, आईपीडी, रजिस्ट्रेशन काउंटर, डिस्पेंसरी, एमआई रूम आदि क्षेत्रों को सघन जायजा लिया और इस बाबत अधीनस्थों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

गौरतलब है कि कुम्भ के लिए विशेष तौर से तैयार किए गए 50 बेड वाले सैक्टर अस्पताल का संचालन एम्स ऋषिकेश द्वारा किया जा रहा है। इस बाबत जानकारी देते हुए निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि कुम्भ में किसी भी तरह की आपात स्थिति अथवा गंभीर किस्म के मरीजों के उपचार के लिए एम्स द्वारा एडवासं लाइफ सपोर्ट एएलएस और बेसिक लाइफ सपोर्ट बीएलएस सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी। उन्होंने बताया कि सैक्टर चिकित्सालय में एम्स द्वारा प्राथमिक चिकित्सा की सभी सुविधाएं संचालित की जा रही हैं। जरूरत पड़ने पर गंभीर किस्म के रोगियों को एम्स ऋषिकेश पहुंचाकर तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यहां श्रद्धालुओं को हरसंभव स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए 24 घन्टे चिकित्सकों की टीमें लगाई गई गई हैं। निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य है कि महाकुम्भ में देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को मेडिकल सुविधा की कोई कमी नहीं हो।
मौके पर मौजूद एम्स के नोडल ऑफिसर सैक्टर चिकित्सालय डा. मधुर उनियाल ने बताया कि मुख्य स्नान पर्वों पर किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्स में आईसीयू बेड और ऑपरेशन थिएटर रिजर्व रखे जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि एम्स में एहतियातन एक डिजास्टर वार्ड भी तैयार रखा गया है। इस अवसर पर संस्थान के डीन ऐकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता और डीन अस्पताल प्रशासन प्रोफेसर यूबी मिश्रा भी मौजूद थे।

एम्स ऋषिकेश में हुआ बच्चे के दिल का सफल जटिल ऑपरेशन

हरिद्वार निवासी एक सात वर्षीय बच्चे की दिल की तीन जटिल बीमारियों की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग द्वारा सफलतापूर्वक सर्जरी को अंजाम दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार ऐसे केस आमतौर पर दुर्लभ होते हैं। अत्यधिक जटिल ऑपरेशन को सफलता से करने पर एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने कॉर्डियक सर्जन डा. अनीश गुप्ता व उनकी टीम की सराहना की व उन्हें प्रोत्साहित किया। बताया कि यह टैट्रालोजी ऑफ फैलोट, सिंगल कोरोनरी, पल्मोनरी एम्बोलिजम नामक दुर्लभ बीमारी थी,जिसमें जटिल ऑपरेशन किया गया जो कि सफल रहा।
गौरतलब है कि हरिद्वार के रुड़की लंढौंरा निवासी एक सात वर्षीय बच्चे को बचपन से ही दिल की गंभीर तकलीफ थी, जिसे पिछले कुछ वर्षों से सांस फूलनी भी शुरू हो गई थी। जिस वजह से गत वर्ष 2020 में बच्चे के परिजनों ने बच्चे का एम्स ऋषिकेश में स्वास्थ्य परीक्षण कराया।

जांच के दौरान इको व एंजियोग्राफी से पता चला कि उसके दिल में छेद है एवं उसके पल्मोनरी वाल्व में रुकावट (टैट्रालोजी ऑफ फैलो) है। साथ ही हृदय को रक्त पहुंचाने वाली सिंगल कोरोनरी आरटरी (एक ही धमनी) है, जबकि इन धमनियों की संख्या आमतौर पर दो होती है। लिहाजा सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों ने बच्चे की जटिल सर्जरी का परामर्श दिया। मगर बीते साल लॉकडाउन की वजह से बच्चे का ऑपरेशन टल गया।
इसी बीच बच्चे को लगातार बुखार आना शुरू हो गया था। लिहाजा उसकी दोबारा जांच कराई गई,जिसमें पता चला कि उसके फेफड़े की नलियों में पल्मोनरी इंबोलिजम (खून के थक्के) बन गए हैं। लिहाजा बच्चे को इस जानलेवा बीमारी के लिए अत्यंत जटिल ऑपरेशन की जरुरत थी। एम्स के सीटीवीएस विभाग के पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जन डा. अनीश गुप्ता ने इस मेजर सर्जरी को सफलतापूर्वक बखूबी अंजाम दिया।

पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जन डा. अनीश ने बच्चे के दिल के छेद को बंद कर उसके फेफड़ों से जमा खून के थक्के निकाले, साथ ही बड़ी सावधानी से उसके पल्मोनरी वाल्व को भी सुरक्षित बचा लिया। अन्यथा इस बच्चे को निकट भविष्य में इस समस्या से निजात पाने के लिए कई अन्य ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती। अत्यधिक जटिल सर्जरी के सफल होने के बाद बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है,जिसे एम्स अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि संस्थान में हृदय की जन्मजात बीमारियां जैसे एएसडी, वीएसडी, पीडीए, टीओएफ, पीएपीवीसी, सिंगल वेंट्रियल आदि का उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन बीमारियों का इलाज भारत सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना और राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम आरबीएसके स्कीम के अंतर्गत मुफ्त भी उपलब्ध है।

स्वच्छता के प्रति जागरूकता अभियान में मरीजों और तीमारदारों को मिली जानकारी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में बीती एक अप्रैल से मनाए जा रहे स्वच्छता पखवाड़े के तहत नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से आईपीडी में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों को स्वच्छता के प्रति जागरुक किया गया। बताया गया कि अपने आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखकर ही हम स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं।

स्वच्छता पखवाडे के तहत संस्थान में आयोजित दैनिक जन-जागरुकता कार्यक्रमों के तहत अस्पताल में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों को स्वच्छता के प्रति जागरुक किया गया। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत की देखरेख में नर्सिंग विभाग की ओर से गायनोकोलॉजी वार्ड में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों को स्वच्छता से संबंधित विभिन्न जानकारियां दी गई।
नर्सिंग विभाग की टीम ने इस दौरान ’एक कदम स्वच्छता की ओर’ विषय पर नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन कर मरीजों और उनके तीमारदारों को साफ-सफाई से होने वाले लाभ को लेकर जागरुक किया। बताया गया कि गंदगी से ही कई बीमारियों का जन्म होता है। लिहाजा हम अपने और अपने आस-पास के वातावरण को जितना स्वच्छ रखेंगे उतना ही हम और हमारा समाज स्वस्थ रहेगा। इस दौरान टीम ने मरीजों को यह भी समझाया कि कोविड19 से बचाव के लिए हमें बार-बार हाथ धोने और सेनिटाइजर का उपयोग करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही एक दूसरे से दो गज की दूरी बनाए रखने और मास्क का सही ढंग से इस्तेमाल को लेकर भी उन्हें जागरुक किया गया।

नर्सिंग स्टाफ ने नुक्कड़ नाटक द्वारा हाथों को सही ढंग से धोने की विधि भी बताई, बताया गया कि खुले मे शौच करने से बीमारियों को बढ़ावा मिलता है, इसलिए सभी लोगों को शौच के लिए अनिवार्यरूप से शौचालयों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस दौरान टीम ने स्वास्थ्य चर्चा के माध्यम से भी रोगियों को स्वच्छता के प्रति विभिन्न लाभप्रद जानकारियां भी दीं।

कार्यक्रम में नर्सिंग सुपरिटेंडेंट मनीष शर्मा, असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट वंदना, जीनो जैकब, अज्जो उन्नीकृष्णन, प्रियंका आदि मौजूद थे।

अत्याधुनिक हीमोडायलिसिस यूनिट का केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने एम्स में किया लोकार्पण

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में बृहस्पतिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चैबे ने नवनिर्मित अत्याधुनिक हीमोडायलिसिस यूनिट व एडवांस यूरोलॉजी सेंटर का ​लोकार्पण किया। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश एम्स गंगा तट पर स्थित होने के कारण आम मरीजों के लिए पर्यावरण व स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायक है व संस्थान बेहतर कार्य कर रहा है। इस दौरान उन्होंने एम्स अस्पताल प्रशासन की ओर से आयोजित स्वच्छता पखवाड़े का पौधरोपण कर ​विधिवत शुभारभ किया।
बृहस्पतिवार को एम्स ऋषिकेश पहुंचने पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चैबे का निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने संस्थान के अधिकारियों व फैकल्टी मेंबर्स के साथ स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कोविड19 का खतरा अभी टला नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड महामारी से बचाव के लिए दिए गए मूलमंत्रों को दोहराया और कहा कि देश में जो कोविड महामारी की दूसरी लहर तेजी से आगे बढ़ रही है, उससे बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतनी होगी। केंद्रीय राज्यमंत्री चैबे ने एम्स के 87 प्रतिशत हैल्थ केयर वर्करों का कोविड वैक्सीनेशन का कार्य पूर्ण होने पर प्रसन्न जताई।

केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चैबे ने यूरोलॉजी विभाग में एडवांस सेंटर व नैफ्रोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक हीमोडायसिस कक्ष का लोकार्पण कहा कि एडवांस यूरोलॉजी सेंटर में लेटेस्ट तकनीकों की मशीनें आम मरीजों के उपचार में सुविधाजनक व लाभकारी सिद्ध होगी। जबकि हीमोडायसिस यूनिट किडनी के मरीजों के उपचार में कारगर सिद्ध होगा।

प्रो. रवि कांत ने बताया कि हीमोडायलिसिस सेंटर व एडवांस यूरोलॉजी सेंटर स्थापित होने से उत्तराखंड सहित वि​​ भिन्न प्रांतों के गरीब से गरीब व्यक्ति को भी उच्च तकनीक पर आधारित उपचार सुलभ कराया जाएगा। यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि संस्थान में स्थापित एडवांस यूरोलॉजी सेंटर स्थापित होने से मरीजों को आधुनिक तकनीक बिना सर्जरी के पथरी के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इस केंद्र में कारपोरल शॉक वेब लीथोट्रिप्सी सुविधा भी मिल सकेगी। इस सुविधा द्वारा किडनी की अधिकतम डेढ़ सेमी आकार की पथरी को बिना ऑपरेशन के तोड़ा जा सकता है।

सेंटर में मूत्र पथ की बीमारियों की जांच के लिए यूरो डायनेमिक्स परीक्षण की सुविधा के अलावा एडवांस वीडियो और एंबुलैट्री यूरोडायमिक्स सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही लैब में इमेजिंग उपकरण ट्रांसरैक्टल अल्ट्रासाउंड, मिक्यूरेटिंग सिस्टोयूरेथोग्राम मशीन तथा सीआर्म फ्लोरोस्कोपी मशीनें भी स्थापित की गई हैं।
उधर, नैफ्रोलॉजी विभाग के डा. गौरव शेखर शर्मा ने बताया कि डायलिसिस प्रक्रिया में शरीर के अंदर इकट्ठा हुए जहर को मशीन द्वारा बाहर निकाला जाता है। जरूरत के अनुसार मरीज को डायलिसिस के विभिन्न सत्रों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। हीमोडायलिसिस प्रक्रिया का एक सत्र साधारणतरू 2-4 घंटे का होता है।

बताया कि संस्थान में यह इकाई पी.पी.पी मॉडल पर विकसित की गई है। जिसमें सभी अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इस इकाई के प्रारंभ होने से मरीजों को हीमोडायलिसिस प्रदान करने की क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी। यह सुविधा 24 ’ 7 उपलब्ध रहेगी।उन्होंने बताया कि यह सुविधा आयुष्मान योजना के अंतर्गत आती है।

इस दौरान डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता, एमएस बीके बस्तिया, प्रो. बीना रवि, यूरोलॉजी विभाग के प्रो. एके मंडल, डा. विकास पंवार, प्रो. वर्तिका सक्सेना, प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह, डा. बलरामजी ओमर, डा. अनुभा अग्रवाल आदि मौजूद थे।

कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट साथ होने पर ही मिलेगी उत्तराखंड में एंट्री

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अधिकारियों को निर्देश दिए की कोविड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आरटी पीसीआर टेस्ट एवं वैक्सीनेशन में तेजी लाई जाए। हरिद्वार कुंभ स्नानों के दृष्टिगत हरिद्वार में वैक्सीनेशन और आरटी पीसीआर टेस्ट के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि राज्य में जिन स्थानों पर कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उन स्थानों पर कंटेनमेंट एवं माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जाएं एवं टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जाय।

जिन राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, ऐसे राज्यों के जिन स्थानों पर अधिक मामले मिल रहे हैं, जो भी लोग उत्तराखंड आ रहे हैं, उनको कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट लाने पर ही प्रवेश दिया जाए। इसके लिए शीघ्र गाइडलाइन जारी की जाए।

बैठक में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मुख्य सचिव ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव अमित नेगी, शैलेश बगोली, एसए मुरुगेशन आदि उपस्थित थे।

एसपीएस चिकित्सालय ऋषिकेश में खराब व्यवस्थाओं की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री तीरथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए की व्यवस्थाओं को जल्द सुधारा जाए एवं कार्य के प्रति लापरवाही दिखाने वालों पर सख्त कारवाई की जाय। हरिद्वार कुंभ एवं आगामी चारधाम यात्रा के दृष्टिगत स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाय। कुंभ स्नान के दृष्टिगत पुलिस की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाय।

शिक्षक कोविड 19 से बच्चों की सुरक्षा में निभा सकते हैं अहम भूमिका

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की ओर से कोरोनाकाल में जनजागरुकता के उद्देश्य से निदेशक प्रो. रविकांत के निर्देशन में गठित कोविड19 कम्यूनिटी टास्क फोर्स सततरूप से कोरोना से प्रभावित एवं इसका दंश झेल चुके लोगों के लिए एक सहारा बना हुआ है। कोविड19 कम्यूनिटी टास्क फोर्स ने विभिन्न विद्यालयों का भ्रमण कर विद्यार्थियों से इस महामारी पर चर्चा की। इस दौरान बातचीत के दौरान पता चला है कि छात्र-छात्राएं अभी भी कोरोना के सदमे से उभर नहीं पाए हैं। बातचीत में यह भी सामने आया है कि इन दिनों बढ़ते हुए कोरानो के केस विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।

निदेशक प्रो. रवि कांत ने कहा कि इस महामारी से लड़ने के लिए कोविड 19 वैक्सीन कारगर साबित हो रही है, लिहाजा इसके संक्रमण से अब घबराने की आवश्यता नहीं है बल्कि सुरक्षा के लिहाज से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, मास्क पहनने व कम से कम 40 सेकंड तक साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोने आदि से दिनचार्य को सामान्य बनाया जा सकता है। उनका मानना है कि अभी खतरा टला नहीं है, मगर ऐसी स्थिति में घबराने की बजाए सूझबूझ से काम लेने की जरुरत है।
अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि देश में विद्यार्थी तीन स्तर पर हैं स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालय लेवल। इन तीनों ही स्तर के विद्यार्थियों पर कोविड19 की वजह से मानसिक, शारीरिक व आर्थिक स्तर पर दुष्प्रभाव पड़ा है। इसमें मानसिकरूप से प्रभावित होने वाले बच्चे चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन आदि से ग्रसित हैं व सामाजिक दूरी बढ़ने से उन्हें अकेले रहने की आदत हो गई है,जिसका दुष्प्रभाव उनके एकेडमिक लेवल पर पड़ रहा है। साथ ही कोविड के दौर में मोबाईल के माध्यम से अधिक कार्य करने से आंखों में ज्यादा जोर पड़ना, आंखों की दूसरी तकलीफें व थकावट आदि की समस्याएं भी बढ़ृी हैं। ऐसी स्थिति में इस सबसे घबराने की बजाए सूझबूझ से काम लेने की जरुरत है। अभिभावकों से आग्रह है ​कि बच्चों को हरसमय मोबाईल नहीं दें व उन्हें खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित करें।
इस बाबत एम्स ऋषिकेश कम्यूनिटी टास्क फोर्स के नोडल ऑफिसर डा. संतोष कुमार ने कहा कि शिक्षकों को कोविड19 के खौफ के मद्देनजर छात्र छात्राओं में हो रहे मनोविकार एवं उनमें किसी भी प्रकार के शारीरिक व मानसिक बदलाव लक्षणों को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। यथासंभव उनके प्रति आत्मियता व सहानुभूति के साथ साथ कुशल व्यवहार रखना चाहिए।
मुहिम के दौरान विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों व छात्रों से बातचीत में यह तथ्य भी सामने आए हैं कि कुछ बच्चों में कोविड महामारी के बाद से कुछ लक्षण उभरकर सामने आए हैं, जिनमें डर लगना, चिड़चिड़ापन, नींद नहीं आना आदि प्रमुखरूप से शामिल हैं, उन्होंने बताया कि इस तरह के लक्षणों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि ऐसे समय में अभिभावकों व शिक्षकों को समानरूप से बच्चों के प्रति सद्व्यहार अपनाना चाहिए।

नींद पूरी होने पर न्यूरोलाॅजिकल बीमारियों का खतरा होने की संभावना कमः प्रो. रविकांत

नींद का हमारे शरीर के संतुलित व्यवहार और देखरेख के लिए अत्यधिक महत्व है। हालांकि यह एक रहस्य ही है कि नींद क्यों, कैसे और कहां से संचालित होती है और किस प्रकार उपरोक्त कार्य को निष्पादित करती है, मगर काफी हद तक इसमें मस्तिष्क के कुछ अहम हिस्सों जैसे हाइपोथालामस, पीनियल ग्रंथि और रेटिकूलर एक्टिवेटिंग सिस्टम और उनसे निकलने वाले न्यूरो केमिकल मैसेंजेर का जटिल सूचना तंत्र संलग्न है, लिहाजा जाहिर सी बात है कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से नींद का गहरा संबंध है, जो कि दोतरफा है यानि कि एक तरफ जहां न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में नींद प्रभावित होती है वहीं दूसरी ओर नींद की गड़बड़ी कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को या तो जन्म देती है या उनकी गंभीरता को कई गुना बढ़ा देती है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में निदेशक प्रो. रविकांत ने न्यूरोलॉजी विभाग एवं निद्रा रोग प्रभाग द्वारा इस दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उम्मीद जताई कि निद्रा रोग प्रभाग आने वाले वर्षों में उत्तराखंड एवं आसपास के राज्यों के निद्रा रोग से ग्रसित मरीजों के लिए एक वरदान साबित होगा।

आइए कुछ महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल रोगों से नींद के संबध को बिंदुवार एक-एक कर समझते हैं। एम्स ऋषिकेश के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं निद्रा रोग प्रभाग के सदस्य डा. नीरज कुमार के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत स्ट्रोक के मरीज नींद की समस्या से ग्रसित होते हैं. इतनी बड़ी संख्या क्यों? मोटापा, खून में वसा की मात्रा, निष्क्रिय दिनचर्या, धुम्रपान यह सब जिस प्रकार से धमनियों की बीमारियों को बढ़ाते हैं, वैसे ही ओब्सट्रकटिव स्लीप एपनिया की संभावना को भी बढ़ा देते हैं। करीब 20 फीसदी स्ट्रोक के मरीजों को शिकायत होती है कि उन्हें नींद का नहीं आने, नींद के जल्दी टूट जाने या दिन में भी सुस्ती आने आदि समस्याएं हैं। यानि कुल मिलाकर नींद की संपूर्ण प्रणाली का ही त्रुटिपूर्ण हो जाना। इसकी मूल वजह में स्ट्रोक के बाद होने वाले अवसाद या दवाइयों के साइड इफेक्ट हो सकते हैं। थैलामस और ब्रेन स्टेम में होने वाले स्ट्रोक भी नींद के नियंत्रण केंद्र को क्षति पहुंचाकर नींद के क्रम को बिगाड़ सकते हैं।
उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के मरीजों में नींद की समस्या आम रहती है, मगर निदान या उपचार गिने चुने लोगों का ही हो पाता है, इसका कारण चाहे स्ट्रोक से ग्रसित मरीज के बोलने की शक्ति का कम होना हो या अपाहिज होकर बिस्तर पर पड़े रहने के चलते उनकी नींद से जुड़ी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं जाना हो, मरीज का उपचार करने वाले चिकित्सक भी कई बार उसकी नींद से संबंधित समस्या से अन​भिज्ञ होते हैं या कभी- कभी उसे नजरअंदाज कर देते हैं, मगर ध्यान रहे कि नींद की गड़बड़ी दोबारा स्ट्रोक अटैक की आशंका को करीब 25 फीसदी तक बढ़ा देती है। विशेषज्ञ चिकित्सक डा. नीरज कुमार जी का कहना है कि मिर्गी या मूर्छा का भी नींद से सीधा- सीधा संबंध है। सुप्तावस्था में इलेक्ट्रो इनसेफलोग्राम में दौरों को दर्शाने वाले विद्युत तरंग ज्यादा दृष्टिगोचर होते हैं, करीब 50 फीसदी जेनेरलाइज्ड एपिलेप्सी के अटैक रात के समय ही ज्यादा आते हैं। इसकी वजह से भी मरीज पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं ले पाता। किशोरावस्था से शुरू होने वाली मयोक्लोनिक एपिलेप्सी के अटैक बढ़ जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ मिर्गी के मरीजों की नींद अक्सर प्रभावित हो जाती है, अब चाहे वह दवाइयों की वजह से हो या बीमारी से उपन्न होने वाले अवसाद, घबराहट या डर के कारण से अथवा फिर मिर्गी की बीमारी के मूल कारण इसकी प्रमुख वजह हो। कईबार तो निद्रा विकार जिनमें स्वप्न विकार भी शामिल हैं, इन विकारों व मिर्गी के दौरों से अंतर करना बहुत मुश्किल काम होता है, नतीजतन अक्सर मरीज जल्द स्वास्थ्य लाभ के लिए उपचार कराने की बजाए वर्षों तक झाड़-फूंक का सहारा लेते रहते हैं।

सर दर्द –
सर दर्द खासकर माइग्रेन का नींद से गहरा सम्बन्ध है। तेज सर दर्द के वक्त नींद नहीं आती और अक्सर नींद पूरी नहीं होने पर सर दर्द कईगुना अधिक बढ़ जाता है। कईदफा दवाइयों से भी ठीक नहीं होने वाले सर दर्द सिर्फ नींद के इलाज से ही ठीक हो जाते हैं। वैज्ञानिकों ने यह खोज निकाला है कि माइग्रेन और नींद के नियंत्रण केंद्र आसपास ही होते हैं। इस कारण से भी दोनों का परस्पर संबंध होता है। .
मल्टीपल स्क्लेरोसिस –
मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस जैसे इम्युनिटी सिस्टम( प्रतिरक्षा तंत्र) के रोगों में रेस्टलेस लेग सिंड्रोम, सेंट्रल स्लीप एपनिया, दिनभर की थकान-सुस्ती, दिन में भी नींद की अधिकता और नींद के क्रम के टूटने जैसी बीमारियां आम हैं, कभी कभी नींद में चलने ,बोलने या चलते-चलते नींद के आगोश में चले जाना जिसे नार्कोलेपसी भी कहते हैं, इन लक्षणों से मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस की पहचान होती है। आश्चर्यजनक बात यह है कि अबुझ पहेली से लगने वाले यह लक्षण सही समय पर इलाज लेने से पूरी तरह ठीक भी हो जाते हैं।
पार्किन्सन व डेमेंटिया – पार्किन्सन और डेमेंटिया जैसे रोग जिनमें मस्तिष्क धीरे- धीरे सूखने लगता है या समय से पहले वृद्ध होने लगता है, इनमे नींद की समस्या काफी अधिक मिलती हैं। इसका कारण कभी दवाइयों का दुष्प्रभाव होता है तो कभी अवसाद के कारण से ऐसी समस्या उत्पन्न होती है। मगर अक्सर यह बीमारियां खुद ही नींद की समस्या को साथ लाती हैं। रेस्टलेस लेग सिंड्रोम या नींद में बोलने लगना – हाथ पैर चलाना यह ऐसे लक्षण हैं जो, कई बार पार्किन्सन रोग के मुख्य लक्षण आने से वषों पहले से ही व्यक्ति में दिखने लगते हैं, ऐसे में सजग न्यूरोलॉजिस्ट इस तरह के रोगों की सटिक पहचान करके बीमारी को शुरुआती दौर में ही पहचान लेते हैं।
नसों और मांसपेशियों के मरीजों में फेफड़ों की शक्ति भी क्षीण हो जाती है। अक्सर यह मरीज नींद के दौरान जबकि श्वसन की सहायक मांसपेशियां शिथिल हो जाती है, ऐसे में वह अपने शरीर में ऑक्सीजन की सही मात्रा बनाए रखने में विफल होते हैं. कईबार इस अवस्था में मरीजों की मौत भी हो जाती है, पर अगर समय से इनकी पहचान हो जाए और सी-पैप जैसी साधारण मशीन जो कि सांस अंदर खींचने में मदद करती है, का प्रयोग किया जाए तो ऐसी अप्रिय घटनाओं को टाला जा सकता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि नींद न सिर्फ खूबसूरत सपनों के लिए आवश्यक हैं बल्कि शरीर को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए भी उतनी ही जरुरी क्रिया है। न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए तो न सिर्फ रोग की गंभीरता को रोकने के लिए बल्कि नए रोगों को उत्पन्न होने से रोकने व उनसे बचने के लिए साफ सुथरी, स्वस्थ निद्रा की और भी अधिक आवश्यक है।

एम्स में आयोजित स्त्री वरदान कार्यक्रम में पहुंची राज्यपाल, पहल की सराहना की

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी विभाग के तत्वावधान में स्त्री वरदान कार्यक्रम आयोजित हुआ। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने एम्स ऋषिकेश की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपने निजी स्वास्थ्य के प्रति गांव देहात की महिलाएं अभी भी जागरुक नहीं हैं। लिहाजा ऐसी महिलाओं को स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए अपने निजी स्वास्थ्य के प्रति चुप्पी तोड़कर जागरुक होना होगा। इस दौरान एम्स ऋषिकेश की पहल पर आयोजित स्त्री वरदान चुप्पी तोड़ो, स्त्रीत्व से नाता जोड़ो अभियान में सहभागिता के लिए उपस्थित जनसमुदाय ने इस मुहिम को आगे बढ़ाने का सामुहिक संकल्प लिया।

राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं के स्वस्थ होने से ही स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है, लिहाजा अब समय आ गया है कि महिलाओं को अपने निजी स्वास्थ्य के प्रति चुप्पी तोड़ने के लिए आगे आना होगा। राज्यपाल ने एम्स की ओर से स्त्रियों के स्वास्थ्य को लेकर शुरू किए गए स्त्री वरदान चुप्पी तोड़ो स्त्रीत्व से नाता जोड़ो अभियान को राज्य व देश की महिलाओं के स्वास्थ्य की दृष्टि से नई पहल बताई और एम्स की इस पहल की सराहना की।

निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि महिलाओं में होने वाली बीमारियां 15 फीसदी समस्याएं पुरुष जनित हैं। बताया कि महिलाओं की निजी स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों को लेकर एम्स में रिकंस्ट्रेक्टिव एवं कॉस्मेटिक गाइनेकोलॉजी विभाग की स्थापना की गई है। जहां महिलाओं की निजी समस्याओं का विश्वस्तरीय उपचार सुलभ कराया गया है। जो कि भारत ही नहीं बल्कि विश्व में अपनी तरह का ऐसा पहला विभाग है। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने देश में कुपोषण की वजह से महिलाओं के स्वास्थ्य पर चिंता जताई। ऐसी स्थिति में उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर की गई इस पहल की सराहना की और उम्मीद जताई कि एम्स ऋषिकेश की यह शुरुआत महिलाओं के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगी।

यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी ने कहा कि महिलाओं को निजी समस्याओं से निजात पाने के लिए संकोच मिटाकर आगे आना होगा, तभी महिलाएं स्वस्थ रह सकती हैं। हंस फाउंडेशन की प्रमुख माता मंगला ने एम्स ऋषिकेश की इस पहल को काविलेगौर बताया, कहा कि घर की नारी के स्वस्थ रहने पर ही परिवार स्वस्थ रह सकता है। लिहाजा महिलाओं को एम्स की इस शुरुआत व शुरू की गई मुहिम से जुड़ना होगा। आई.बी.सी.सी. की प्रमुख वरिष्ठ शल्य चिकित्सक सीनियर प्रोफेसर बीना रवि ने कहा कि शिक्षित महिलाओं व युवतियों को ब्रेस्ट कैंसर तथा अन्य तरह की निजी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों को लेकर खुलकर चर्चा करनी चाहिए और अन्य महिलाओं को भी जागरुक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम महिलाएं एम्स द्वारा शुरू किए गए इस अभियान से जुड़कर संपूर्ण समाज का भला कर सकती हैं।

संस्थान के रिकंस्ट्रेक्टिव एवं कॉस्मेटिक्स गाइनोकोलाजी विभाग के अध्यक्ष एवं स्त्री वरदान कार्यक्रम के निदेशक डा. नवनीत मग्गो ने एम्स के इस अभियान की विस्तृत जानकारी दी। डा. विनोद व डा. मानवी के संयुक्त संचालन में आयोजित कार्यक्रम को जूना अखाड़े के महासचिव स्वामी देवानंद सरस्वती महाराज, मानस कथावक्ता स्वामी विजय कौशल महाराज, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक आशीष गौतम ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय ने स्त्री वरदान कार्यक्रम को हर घर की महिला तक पहुंचाने का डॉक्टर नवनीत मग्गो के आवाहन में सामुहिक संकल्प लिया गया। समारोह में प्रो. रवि कांत ने महामहिम राज्यपाल बेबी रानी मौर्य सहित सभी अतिथियों को संस्थान की ओर से स्मृति चिह्न व अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। जबकि एम्स की इस विश्वव्यापी पहल के लिए राज्यपाल बेबीरानी मौर्य व जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज की ओर से निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत व स्त्री वरदान कार्यक्रम के संयोजक डा. नवनीत मग्गो को स्मृति चिह्न व अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

राज्यपाल ने, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर पूज्यपाद अवधेशानंद गिरी महाराज ने, हंस फाउंडेशन की मंगला माता ने, विजय कौशल महाराज ने, स्वामी देवानंद सरस्वती महाराज ने, रितु खंडूरी और आशीष गैतम ने स्त्री वरदान कार्यक्रम के संस्थापक डॉक्टर नवनीत मग्गो की इस सोच की बहुत सराहना की।

स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि आज वह दिन आ गया है जब डॉक्टर नवनीत मग्गो द्वारा देखा गया यह स्वप्न सच होने जा रहा है और मंच पर उपस्थित लोगो को और खचाखच भरे स्त्री वरदान कार्यकर्ताओं के विशाल जनसमुदाओ को देखकर ऐसा लगता है कि हर कोई इससे जुड़ना चाहता है।

कार्यक्रम में समाजसेवी प्रदीप मौर्य, डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डा. जया चतुर्वेदी, प्रो. शालिनी राव, प्रो. प्रशांत पाटिल, प्रो. वीके बस्तिया, प्रो. सत्यावती राना, डा. गौरव चिकारा, डा. पूर्वी कुलश्रेष्ठा, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल आदि मौजूद थे।