म्यूकोर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) के निदान के लिए एम्स ऋषिकेश की नीतियां


अत्यधिक संक्रामक बीमारी म्यूकोर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) के निदान के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में अलग से एक विशेष वार्ड स्थापित किया गया है। जिसमें ब्लैक फंगस से ग्रसित रोगियों का उपचार विभिन्न विभागों के 15 विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में किया जाएगा।

निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि म्यूकोर माइकोसिस एक घातक एंजियोइनवेसिव फंगल संक्रमण है, जो मुख्यरूप से नाक के माध्यम से हमारी श्वास नली में प्रवेश करता है। मगर इससे घबराने की नहीं बल्कि सही समय पर इलाज शुरू कराने की आवश्यकता है। संस्थान के नोडल ऑफिसर कोविड डाॅ. पी.के. पण्डा ने बताया कि म्यूकोर माइकोसिस के उपचार के लिए गठित 15 सदस्यीय चिकित्सकीय दल इस बीमारी का इलाज, रोकथाम और आम लोगों को जागरुक करने का कार्य करेगी। टीम के हेड और ईएनटी के विशेषज्ञ सर्जन डा. अमित त्यागी जी ने बताया कि म्यूकोर माइकोसिस के रोगियों के इलाज के लिए अलग से एक म्यूकर वार्ड बनाया गया है। जिसमें सीसीयू बेड, एचडीयू बेड और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं।

म्यूकोर के प्रमुख लक्षण-

तेज बुखार, नाक बंद होना, सिर दर्द, आंखों में दर्द, दृष्टि क्षमता क्षीण होना, आंखों के पास लालिमा होना, नाक से खून आना, नाक के भीतर कालापन आना, दांतों का ढीला होना, जबड़े में दिक्कत होना, छाती में दर्द होना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह बीमारी उन लोगों में ज्यादा देखी जा रही है, जिन्हें डायबिटीज की समस्या है।

उच्च जोखिम के प्रमुख कारण-

1- कोविड-19 का वह मरीज जिसका पिछले 6 सप्ताह से उपचार चल रहा हो।
2- अनियंत्रित मधुमेह मेलिटस, क्रोनिक ग्रेनुलोमेटस रोग, एचआईवी, एड्स या प्राथमिक इम्युनोडेफिशिएंसी स्टेटस।
3. स्टेरॉयड द्वारा इम्यूनोसप्रेशन का उपयोग (किसी भी खुराक का उपयोग 3 सप्ताह या उच्च खुराक 1 सप्ताह के लिए ), अन्य इम्युनोमोड्यूलेटर या प्रत्यारोपण के साथ इस्तेमाल की जाने वाली चिकित्सा।
4. लंबे समय तक न्यूट्रोपेनिया।
5. ट्रॉमा, बर्न, ड्रग एब्यूजर्स।
6. लंबे समय तक आईसीयू में रहना।
7. घातक पोस्ट ट्रांसप्लांट ।
8. वोरिकोनाजोल थैरेपी, डेफेरोक्सामाइन या अन्य आयरन ओवरलोडिंग थैरेपी।
9. दूषित चिपकने वाली धूल, लकड़ी का बुरादा, भवन निर्माण और अस्पताल के लिनेन।
10. कम वजन वाले शिशुओं, बच्चों व वयस्कों में गुर्दे का काम नहीं करना और दस्त तथा कुपोषण।

बचाव एवं सावधानियां-

1- अपने आस-पास के पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए ब्रेड, फलों, सब्जियों, मिट्टी, खाद और मल जैसे सड़ने वाले कार्बनिक पदार्थों से दूर रहना।
2- हायपरग्लेमिया को नियं​त्रित रखना।
3- स्टेरॉयड थैरेपी की आवश्यकता वाले कोविड- 19 रोगियों में ग्लूकोज की निगरानी करना।
4- स्टेरॉयड के उपयोग के लिए सही समय, सही खुराक और सही अवधि का निर्धारण।
5- ऑक्सीजन थैरेपी के दौरान ह्यूमिडिफायर के लिए स्वच्छ व शुद्ध जल का उपयोग करें।
6- एंटीबायोटिक्स व एंटीफंगल का प्रयोग केवल तभी करें, जब चिकित्सक द्वारा परामर्श दिया गया हो।
7- बंद नाक वाले सभी मामलों को बैक्टीरियल साइनसिसिस के मामलों के रूप में नहीं मानें।
8- म्यूकोर के लक्षण महसूस होने पर मेडिसिन, ईएनटी और नेत्र विशेषज्ञों को दिखाना चाहिए।

जानें, कोविड काल में गर्भवती महिलाओं को इन बातों का रखना होगा ध्यान


कोरोना की दूसरी लहर गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक है। कोरोना से संक्रमित होने पर ऐसी महिलाओं की श्वसन प्रणाली प्रभावित हो सकती है और उनका जीवन जोखिम में पड़ सकता है। एम्स ऋषिकेश ने इस मामले में उन्हें विशेष एतिहात बरतने की सलाह दी है।

गर्भवती महिलाओं को कोरोना संक्रमण से विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है। वायरस के संक्रमण से उनको और उनके गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है। इस बाबत निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कान्त जी ने बताया कि गर्भवती महिला को यदि पहले से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर अथवा हृदय संबंधी बीमारी है तो जोखिम बढ़ने से उन दोनों के जीवन को ज्यादा खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में कोरोना वायरस के कारण इन महिलाओं की श्वास नलियों में संक्रमण तेजी से फैलने लगता है। साथ ही उसे आईसीयू और वेन्टिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कान्त जी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को कोरोना संक्रमण से विशेष सचेत रहने की आवश्यकता है। जरा सी लापरवाही मां और शिशु दोनों के जीवन पर भारी पड़ सकती है।

स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जया चतुर्वेदी जी ने बताया कि यदि कोई गर्भवती महिला कोरोना ग्रसित हो जाए, तो उसे अति शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेकर कोविड उपचार शुरू करना चाहिए। उपचार लेने में देरी होने पर उनका जीवन जोखिम में पड़ सकता है। उन्होंने आगाह किया कि गर्भवती महिलाएं चिकित्सीय परामर्श के बिना दवाओं का सेवन बिल्कुल नहीं करें। गर्भवती महिलाओं की देखभाल और कोरोना संक्रमण से बचाव के बारे में उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए कोरोना संक्रमण इतना खतरनाक है कि समय पर उपचार शुरू नहीं किए जाने पर पेट में पल रहे शिशु की मृत्यु भी हो सकती है। इसके अलावा महिला की सर्जरी कर जन्म के तुरन्त बाद नवजात शिशु को एनआईसीयू में रखने की स्थिति भी आ सकती है। ऐसे हालातों में प्रसूता को वेन्टिलेटर सपोर्ट में रखने की संभावना दोगुनी बढ़ जाती है। डाॅ. जया चतुर्वेदी जी ने ऐसी महिलाओं के लिए निम्न बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई है।

उपाय और सावधानियां-

1. अधिक उम्र वाली गर्भवती महिलाओं को उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इस कारण उन्हें सांस लेन में परेशानी बढ़ जाती हैं। ऐसे में इन्हें ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती है।
2- सामाजिक दूरी बनाकर बार-बार हाथ धोना नहीं भूलें।
3- घर पर भी मास्क का अनिवार्य इस्तेमाल करें।
4- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।
5- श्वसन संबंधी किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करें।
6- अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें।
7- खांसी या छींक आने पर अपनी मुड़ी हुई कोहनी या टिश्यू पेपर से अपने मुंह और नाक को ढकें।
8- सुरक्षित रहें। लगातार खांसी और तेज बुखार होना कोरोना संक्रमण के संकेत हैं। इन लक्षणों वाले व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से बचें।
7- ताजा भोजन खाएं और खूब पानी पिएं।

गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव और जोखिम-

1- भ्रूण पर प्रभाव- प्रसव का समय से पहले होना, सर्जरी की आवश्यकता पड़ना और नवजात की देखभाल करने में जोखिम होना।
2- कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला गर्भावस्था या प्रसव के दौरान बच्चे को भी संक्रमित कर सकती है।

चिकित्सक की सलाह-

1- कोविड लक्षणों वाली गर्भवती महिलाओं को परीक्षण के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
2- लक्षण नजर आने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।
3- चिकित्सक के पास बार-बार जाने के बजाए संभव हो तो फोन द्वारा परामर्श लेें।
4- डिलीवरी का समय नजदीक है, तो तनाव में न रहें। ईमेल, संदेश या वीडियो चैट के माध्यम से अपने प्रियजनों और रिश्तेदारों के संपर्क में रहें। अत्यधिक काम न करें और अधिकाधिक आराम करें।
5- स्तनपान करवाते समय हर बार हाथ धोना नहीं भूलें।

रानीखेत में संयुक्त सिविल मिलिट्री कोविड केयर अस्पताल का वर्चुअल उद्धाटन सीएम ने किया

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने देहरादून कैंप कार्यालय से अल्मोड़ा जिले के रानीखेत स्थित संयुक्त सिविल मिलिट्री कोविड केयर अस्पताल का वर्चुअल उद्घाटन किया। महिला बाल विकास मंत्री रेखा आर्य, अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान, रानीखेत विधायक करण माहरा, सचिव अमित नेगी व जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

रानीखेत में 50 बेड क्षमता वाले संयुक्त अस्पताल में 10 बेड ऑक्सीजन युक्त बनाए गए हैं। यह अस्पताल कुमाऊँ रेजीमेंट सेंटर एवं जिला प्रशासन अल्मोड़ा के संयुक्त प्रयास से शुरू किया गया है। अस्पताल के वर्चुअल उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि सेना एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से शुरू किए गए इस अस्पताल का लाभ रानीखेत व आसपास के इलाकों के लोगों को मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन अल्मोड़ा को निर्देश दिए कि इस अस्पताल में ऑक्सीजन बैड की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएं। ’मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की प्रेरणा से लगातार कोरोना संक्रमण को रोकने के प्रयास किये जा रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीआरडीओ के सहयोग से अगले कुछ दिन में हल्द्वानी और ऋषिकेश में बनाए जा रहे अस्थाई कोविड अस्पताल भी तैयार हो जाएंगे जिससे प्रदेशवासियों को उपचार में लाभ मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय के लिए हमें अभी से तैयार होना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की शुरुआत से पहले ही हमें सीएचसी, पीएचसी स्तर के अस्पतालों को मजबूत करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को जागरूक करना बेहद जरूरी है। दवाई के साथ- साथ कड़ाई भी करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में टेस्टिंग को और बढ़ाया जाए और अधिक से अधिक लोगों को टेस्टिंग के लिए प्रेरित किया जाए। आशा, आंगनवाड़ी और ग्राम समिति के माध्यम से डोर टू डोर कोविड किट, होम आइसोलेशन में उपचार करवा रहे संक्रमितों तक समय से पहुंचा दी जाए।

महिला बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर विधायक निधि का इस्तेमाल जनप्रतिनिधि अपने विवेक अनुसार कोविड के लिए कर रहे हैं जिसका फायदा प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्र को मिल रहा है। इस दौरान सांसद अजय टम्टा ने कहा कि मुख्यमंत्री का प्रयास सराहनीय है मुख्यमंत्री द्वारा बेस अस्पताल अल्मोड़ा और मेडिकल कॉलेज को जोड़कर कोविड अस्पताल बनाने से बड़ा लाभ आम जनता को हो रहा है। विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान ने कहा कि सरकार का सार्थक प्रयास धरातल पर नजर आ रहा है। कार्यक्रम में रानीखेत विधायक श्री करण माहरा ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सहयोग के बिना यह अस्पताल संभव नहीं था। इस दौरान जिला अधिकारी अल्मोडा नितिन भदौरिया, कुमायूँ रेजिमेंट सेंटर के ब्रिगेडियर आइएस सौमयाल एव जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

सीएम तीरथ सिंह रावत ने एम्स की गरूड़ टेलीमेडिसिन सेवा का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने एम्स ऋषिकेश की ओर से शुरू की गई टेलीमेडिसिन सेवा “गरुड़” का उद्घाटन किया। इस टेलीमेडिसिन सेवा के जरिए प्रदेश के सभी 110 तहसीलों में देशभर के 898 ट्रेंड मेडिकल और पेरामेडिकल छात्रों द्वारा मेडिकल सम्बन्धी जानकारी और परामर्श दिया जाएगा। इस सेवा के जरिए प्रदेश की जनता को फोन के माध्यम से ही एक्सपर्ट डॉक्टरों के चिकित्सीय परामर्श मिल सकेगा।

एम्स ऋषिकेश में गरुड़ टेली मेडीसिन सेवा के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि मेडिकल और पैरामेडिकल के नौजवानों द्वारा एम्स ऋषिकेश की पहल पर यह सराहनीय प्रयास है। कहा कि सरकार लगातार प्रयासरत है कि ज्यादा से ज््यादा चिकित्सकों की तैनाती की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में सीमांत क्षेत्रों तक कनेक्टिविटि के साथ हेल्थ सिस्टम मजबूत करना सबसे बड़ी चुनौती है। कहा कि पिछले कुछ दिनों से यह देखने में आया है कि शहरी इलाकों में कोविड की स्थिति स्थिर बनी हुई है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राफ बढ़ रहा है, जिसको लेकर सभी अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि हर ब्लॉक स्तर तक कंट्रोल रूम बनाए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पूर्व जिला स्तर तक कंट्रोल रूम बनाए जा रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार टेस्टिंग के आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से सामने रख रही है। टेस्टिंग नेशनल एवरेज से अधिक है, इससे साफ है कि उत्तराखंड में ज्यादा टेस्टिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि तीसरी लहर के आने से पहले ही जरूरी तैयारी पूरी कर ली जाए, जिसको लेकर पहाड़ के छोटे-छोटे सेंटर पर भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है।

एम्स के निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि एम्स ऋषिकेश द्वारा प्रोजेक्ट गरुड़ के लिए देशभर से मेडिकल और पैरामेडिकल के छात्रों के आवेदन माँगे गए थे, इस प्रोजेक्ट में कुल 1621 छात्रों ने पंजीकरण किया। जिसमें से 898 मेडिकल और पैरामेडिकल के छात्रों को इस प्रोजेक्ट हेतु चयनित किया गया। प्रो. रविकांत ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में एमबीबीएस और बीडीएस के 621 डॉक्टर जबकि पैरामेडिकल कोर्सेज से संबंधित 277 छात्रों को शामिल किया गया है।

इस दौरान स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल, विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश, कुसुम कंडवाल, एम्स ऋषिकेश के वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।

एम्स में प्लाज्मा थैरेपी से 146 कोविड पाॅजिटिव मरीजों को किया जा चुका है स्वस्थ

यदि आप कोविड पाॅजिटिव हैं तो घबराएं नहीं। इसके लक्षण पता लगने पर पहले सप्ताह के दौरान यदि प्लाज्मा थैरेपी से उपचार किया जाए, तो कोविड संक्रमण में उपचार की यह तकनीक विशेष लाभकारी होती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में प्लाज्मा थैरेपी पद्धति से अब तक 146 कोविड संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा चुका है।

एम्स निदेशक प्रो. रवि कान्त ने इस बाबत बताया कि कॉनवेल्सेंट प्लाज्मा एंटीबॉडी प्रदान करने का काम करता है। इसके उपयोग से संक्रमित व्यक्तियों में वायरस बेअसर हो जाता है। उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति किसी सूक्ष्म जीव से संक्रमित हो जाता है, तो उसके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इसके खिलाफ लड़ने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करने का काम करती है। यह एंटीबॉडीज रक्त के प्लाज्मा में मौजूद होती है और बीमारी से उबरने की दिशा में अपनी संख्याओं में वृद्धि करती है। इससे वायरस जल्दी समाप्त होने लगते हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया से रिकवरी तेज होने पर पेशेंट जल्दी स्वस्थ हो जाता है। बताया कि संस्थान में प्लाज्मा थैरेपी की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। लिहाजा कोरोना से स्वस्थ हो चुके लोगों को दूसरों का जीवन बचाने के लिए प्लाज्मा अवश्य डोनेट करना चाहिए।

ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एंड ब्लड बैंक (एम्स) की विभागाध्यक्ष डा. गीता नेगी जी ने बताया कि एम्स में अब तक 146 कोविड मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति पूरी तरह ठीक होने के बाद प्लाज्मा दान कर सकता है। डोनर के शरीर से एफेरेसिस तकनीक से ब्लड निकालने के बाद प्लाज्मा एकत्रित किया जाता है। ऐफेरेसिस की सुविधा नहीं होने पर सामान्य रक्तदान से भी प्लाज्मा लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्लाज्मा थैरेपी एक ऑफ लेवल थैरेपी है। यदि कोरोना के लक्षण आने के 7 दिनों के दौरान ही इस थैरेपी का उपयोग किया जाए, तो इलाज उपयोगी होता है। उन्होेंने बताया कि स्वस्थ्य व्यक्ति के रक्त में 55 प्रतिशत प्लाज्मा मौजूद रहता है। एम्स ऋषिकेश में प्लाज्मा थैरेपी के लिए सभी संसाधन, उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध है।

कौन कर सकता है प्लाज्मा दान

कोई भी 18 से 65 आयु वर्ग का कोरोना संक्रमित व्यक्ति संक्रमण के 28 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। इस प्रक्रिया में एंटीबॉडी टेस्ट कर एंटीबॉडी का लेवल देखा जाता है। ’ए बी’ ब्ल्ड ग्रुप वाला डोनर किसी को भी प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। जबकि ’ओ’ ग्रुप वाला रोगी अन्य किसी भी ग्रुप वाले डोनर का प्लाज्मा ले सकता है। इस थैरेपी को इस्तेमाल करने से पहले डोनर का एंटीबाॅडी टेस्ट किया जाता है। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एंड ब्लड बैंक विभाग एम्स के डाॅ. आशीष जैन और डाॅ. दलजीत कौर ने बताया कि डोनर के रक्त में एंटीबाॅडी का पर्याप्त मात्रा में होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में लगभग 2 घंटे लगते हैं और यह तकनीक पूरी तरह से सुरक्षित है। इससे प्लाज्मा डोनेट करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है।

कोरोना मरीजों को कैशलेश उपचार न देने पर राज्य सरकार ने शुरू किया शिकंजा कसना

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई), अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना (एएयूवाई) और स्टेट गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (एसजीएचएस) के अन्तर्गत सूचीबद्ध होने के बावजूद कोरोना मरीजों को निशुल्क (कैशलेस) उपचार न देने वाले अस्पतालों के खिलाफ राज्य सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ऐसे ही एक निजी अस्पताल को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में कोरोना मरीजों को निशुल्क (कैशलेस) उपचार न देने पर अस्पताल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है।

अरिहन्त एडवांस सर्जरी एण्ड फर्टिलिटी सेंटर शास्त्रीनगर देहरादून के चिकित्सक डा. अभिषेक जैन को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक (हास्पिटल मैंनेजमेंट) डॉ. ए.के. गोयल की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि कई लोगों की ओर से शिकायत मिली है कि अरिहन्त एडवांस सर्जरी एण्ड फर्टिलिटी सेंटर सरकार की विभिन्न योजनाओं पीएमजेएवाई, एएयूवाई और एसजीएचएस में सूचीबद्ध् होने के बावजूद कोरोना के मरीजों को निशुल्क कैशलेस उपचार मुहैया नहीं करवा रहा है जबकि राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश हैं कि इन योजनाओं के सूचीबद्ध अस्पतालों में कोरोना मरीजों का उपचार निशुल्क किया जाना है।

इतना ही नहीं राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारी जब इस सम्बंध में अस्पताल प्रबंधन से मोबाइल फोन पर सम्पर्क करते हैं तो कोई प्रतिउत्तर नहीं दिया जाता। पत्र में कहा गया है कि यदि अस्पताल ने आगे पीएमजेएवाई, एएयूवाई और एसजीएचएस योजनाओं के तहत कोरोना मरीजों को उपचार निशुल्क नहीं किया तो अस्पताल की सूचीबद्धता समाप्त करने के साथ ही अस्पताल के खिलाफ क्लीनिकल इस्टेबलिश्मेंट एक्ट के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होगी।

डीआरडीओ द्वारा बनाए जा रहे कोविड अस्पताल का सीएम तीरथ सिंह रावत ने किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने आज आईडीपीएल में डीआरडीओ की ओर से तैयार किए जा रहे 500 बेड के कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया। मौके पर डीआरडीओ के अधिकारियों से निर्माण कार्यों की जानकारी हासिल की। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बताया कि 17 मई तक हॉस्पिटल तैयार कर लिया जाएगा। इसमें 120 आईसीयू बेड के अलावा ऑक्सीजन प्लांट भी होगा। योजना के अंतर्गत हल्द्वानी और ऋषिकेश में 500-500 बेड के अस्पताल का निर्माण हो रहा है।

इसके बाद मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ऋषिकेश एम्स पहुँचकर यहां निदेशक प्रोफेसर रविकांत एवं उनकी टीम के साथ तैयारियों को लेकर बैठक की। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर आदि के बारे में जानकारी ली। कहा कि अस्पतालों को निर्देशित किया गया है कि वे 24 घंटे पहले अपनी ऑक्सीजन जरूरतों के लिए प्रशासन को अवगत कराएं ताकि अफरा तफरी की स्थिति न बने। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कोविड महामारी से जंग में जुटे सभी डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ का आभार भी जताया। मुख्यमंत्री को एम्स निदेशक ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल में कम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट हैं जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। एम्स निदेशक ने कहा कि अस्पताल में 40 हजार लीटर के ऑक्सीजन प्लांट की आवश्यकता है जिस पर मुख्यमंत्री ने इस मामले में सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, जिलाधिकारी डा. आशीष श्रीवास्तव, एसडीएम वरुण चैधरी, तहसीलदार अमृता शर्मा, नगर आयुक्त नरेन्द्र सिंह क्वीरियाल, हॉस्पिटल डिजाइनर ले कर्नल रमन त्यागी, सूबेदार मेजर सुभाष, निगम के जेई उपेन्द्र गोयल आदि मौजूद थे।

स्वास्थ्य समाचारः वायरल फीवर के लक्षण समझ हल्के में न लें लोग, अधिक पढ़ें…

यदि आपको बुखार और गले में खराश की शिकायत है तो, सतर्क रहें। इस तरह के लक्षणों को वायरल फीवर समझकर इसे हल्के में लेना आपके लिए घातक हो सकता है। वजह यह है कि यह कोरोना संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में शामिल है। ऐसे में आपको तत्काल बिना विलंब किए कोविड जांच कराने की आवश्यकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश ने 20 से 50 वर्ष आयुवर्ग के लोगों को खासतौर से यह सुझाव दिया है कि इन हालातों में वह ’वर्क फ्राॅम होम’ नीति को अपनाएं और सुरक्षित रहें।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में कुछ लक्षण विशेषरूप से उभर कर आ रहे हैं। एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि मरीज को स्वाद और गन्ध का पता नहीं चलने के अलावा बुखार, गले में खराश व दर्द होना भी कोविड के प्रमुख लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि इस बार युवा वर्ग पर कोरोना का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। लिहाजा इससे बचने के लिए 20 से 50 वर्ष की उम्र के लोगों को खासतौर से सतर्क रहने की आवश्यकता है। सामुदायिक स्तर पर संक्रमण की दर कम करने के लिए जरूरी है कि लोग अपने घरों में ही रहें और बिना किसी ठोस वजह के घर से बाहर हरगिज नहीं निकलें।
एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि संक्रमण से बचाव के लिए कोविड वैक्सीन विशेष लाभकारी है। ​ऐसे में 45 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोग जल्द से जल्द व अनिवार्यरूप से कोविड वैक्सीन लगवाएं। उनका सुझाव है कि समय रहते वैक्सीन लग जाने से शरीर में वायरस का असर कम होगा और लोग सुरक्षित रहेंगे।

एम्स में कोविड स्क्रीनिंग ओपीडी के प्रभारी और सीएफएम विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. योगेश बहुरूपी का कहना है कि कोविड परीक्षण हेतु एम्स, ऋषिकेश पहुंचने वाले लोगों में बुखार और गले में खराश की शिकायत के मामले प्रमुखता से आ रहे हैं। इसके अलावा लोग यह भी शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें स्वाद और गन्ध का पता नहीं चल रहा है। उन्होंने बताया कि मौसम बदलने के कारण कुछ लोग बुखार-खांसी को सामान्यरूप से ले रहे हैं। लेकिन कोविडकाल में ऐसा करना बिल्कुल सही नहीं है। लिहाजा ऐसे में इस तरह के मामलों को सामान्य रोग के लक्षण मानकर कोविड जांच न कराना घातक हो सकता है।
उन्होंने बताया कि इस प्रकार के कोई भी लक्षण होने पर मरीज को तत्काल कोविड जांच करानी चाहिए। उनके अनुसार अप्रैल महीने में एम्स की कोविड स्क्रीनिंग ओपीडी में 5,287 लोगों ने जांच हेतु कोविड सैंपल दिए थे। जिनमें अधिकांश लोग 20 से 50 आयुवर्ग के ही थे।

उन्होंने बताया कि कोविड के लक्षणों में इनके अलावा सांस लेने में तकलीफ, बुखार और खांसी के लक्षण वाले रोगी भी बड़ी संख्या में एम्स पहुंच रहे हैं। डा. योगेश बहुरूपी ने बताया कि 20 से 50 वर्ष की उम्र के ज्यादातर लोग नौकरी पेशा वाले हैं। जिन्हें आजीविका और रोजगार के लिए दैनिकरूप से घर से बाहर निकलना पड़ता है। उन्होंने सलाह दी है कि ऐसी स्थिति में बहुत जरूरी नहीं हो तो घर से बाहर नहीं निकला जाए।

20 से 50 आयुवर्ग के लोगों को नौकरी पेशे के लिए हररोज घर से बाहर निकलना पड़ता है। लिहाजा इस उम्र के लोगों में संक्रमण की ज्यादा शिकायत मिल रही है। इस मामले में एम्स ने सुझाव दिया है कि संक्रमण से बचाव के लिए इस उम्र के लोगों को ’वर्क फ्राॅम होम’ की नीति पर काम करने की आवश्यकता है। सीएफएम विभाग के डाॅ. योगेश बहुरूपी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर का यह समय बेहद जोखिम वाला समय है। युवा वर्ग को उनकी सलाह दी कि बिना किसी ठोस वजह से घर से बाहर नहीं निकलें। जीवन को सुरक्षित रखने के लिए बहुत जरूरी है कि सब लोग घर में रहें और सुरक्षित रहें।

निशुल्क एंबुलेंस सेवा का लाभ 20 किलोमीटर तक देगा भाजयुमो

कोरोना महामारी में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने एक सराहनीय और अहम कदम उठाया है। जहां एंबुलेंस संचालक इस महामारी के दौर में मुनाफा कमाने की होड़ में लगे हैं। वहीं, भाजयुमो ने 20 किलोमीटर के दायरे में निशुल्क एंबुलेंस सेवा देने का ऐलान किया है।

जिला पंचायत सदस्य संजीव चैहान ने आज निशुल्क एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ किया गया। शुरू की गई निशुल्क एंबुलेंस सेवा के अंतर्गत 20 किलोमीटर के दायरे में फ्री सेवा दी जाएगी। जबकि 20 किलोमीटर से अतिरिक्त दूरी हो उसके लिए सेवा लेने वाला लाभार्थी को मात्र पेट्रोल का किराया निर्वहन करना होगा।

भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यालय प्रभारी एवं जिला पंचायत सदस्य संजीव चैहान ने बताया कि उन्होंने अपने खर्चे से निशुल्क एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की है। सेवा के अंतर्गत 20 किलोमीटर के दायरे में पूरी तरह से निशुल्क एंबुलेंस का लाभ उठा सकते हैं एवं 20 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के लिए सेवा के अंतर्गत लाभार्थी को मात्र पेट्रोल का खर्चा निर्वहन करना होगा। बाकी एंबुलेंस की पूरी सेवा निशुल्क दी जाएगी। उन्होंने सेवा का लाभ उठाने वाले लाभार्थियों के लिए अपना संपर्क सूत्र 9997303122 भी जारी किया है।

ऋषिकेशः राजकीय चिकित्सालय के औचक निरीक्षण को पहुंचे स्पीकर

कोरोना संक्रमण का प्रभाव दिनों दिन बढ़ रहा है। इस निमित्त स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने पं. शांति प्रपन्न शर्मा राजकीय चिकित्सालय, ऋषिकेश का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने तमाम कोविड की व्यवस्थाओं को देखकर संतोष व्यक्त किया।

स्पीकर ने कहा कि ऋषिकेश राजकीय चिकित्सालय में 20 बेड कोविड-19 संक्रमित रोगियों के लिए निर्धारित किए गए हैं वर्तमान में अभी सभी बेड भरे हैं स रोगियों का विधिवत चिकित्सकों की निगरानी में उपचार चल रहा है। यहां आरटीपीसीआर एवं एंटीजन टेस्ट निरंतर चल रहे हैं। ओपीडी सामान्य रूप से चल रही है।

कहा कि तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त है आवश्यकता सिर्फ इस बात की है कि हम स्वयं की सुरक्षा के साथ-साथ अपने परिजन एवं आसपास की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

निरीक्षण के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कोविड-19 के वार्ड, ओपीडी एवं जिन स्थानों पर कोविड-19 से संबंधित टेस्ट हो रहे है। उन सभी जगह का निरीक्षण किया एवं रोगियों से उनकी कुशलक्षेम पूछी।

स्पीकर ने रोगियों का ढांढस बांधते हुए कहा कि सावधानी अवश्य रखें सब कुछ सामान्य हो जाएगा। कहा कि सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अवश्य पालन करना है।

कहा कि किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर सरकार द्वारा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन पर अपने स्वास्थ्य संबंधित जानकारी टोल फ्री नंबर से प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक विजय भारद्वाज आदि उपस्थित थे।