आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए 25 प्रतिशत बेड रखने होंगे आरक्षित

राज्य अटल आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश में पंजीकृत निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का उपचार निशुल्क किया जाएगा। गोल्डन कार्ड धारकों के उपचार का खर्च सरकार तय दरों के आधार पर ही करेगी। साथ ही पंजीकृत अस्पतालों को 25 प्रतिशत बेड आरक्षित भी रखने होंगे।

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डीके कोटिया ने बताया कि गोल्डन कार्ड पर पंजीकृत निजी अस्पतालों में कोरोना का मुफ्त इलाज किया जाएगा। सरकार ने अटल आयुष्मान योजना में प्रदेश के 23 लाख परिवारों को पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी है।

प्रदेश में लगभग 40 लाख से अधिक लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। जिन पात्र लाभार्थियों ने अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बनाया है, उन्हें भी मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। अस्पताल में आरोग्य मित्रों के माध्यम से ऐसे लाभार्थियों का तुरंत गोल्डन कार्ड बनाया जाएगा। 

मिलेगी जीतः देश में डबलिंग रेट के साथ रिकवरी रेट में भी सुधार

गुरुवार को कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हिन्दुस्तान को अच्छी खबरें मिली हैं। एक तरफ कोरोना के डबलिंग रेट में सुधार हो रहा है। वहीं, मरीजों की संख्या की तुलना में ठीक होने वालों का अनुपात भी सुधर रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश में डबलिंग रेट के साथ रिकवरी रेट में भी सुधार हुआ है।
आपको बता दें कि देश में कोरोना वायरस केसों का डबलिंग रेट अब बढ़कर 11 दिन हो गया है, जोकि लॉकडाउन से पहले महज 3.4 दिन था। कई राज्यों ने राष्ट्रीय स्तर से भी अच्छा प्रदर्शन किया है। चार राज्यों में तो केसों का डबलिंग रेट 40 दिन से भी अधिक है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश जम्मू-कश्मीर, ओडिसा, राजस्थान, तमिलनाडु और पंजाब में डबलिंग रेट 11 से 20 दिन का है तो कर्नाटक, लद्दाख, हरियाणा, उत्तराखंड और केरल में कोरोना संक्रमण के केस 20 से 40 दिन में दोगुने हो रहे हैं। असम, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश में कोरोना केस डबल होने में 40 दिन से अधिक का समय लग रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण केसों की संख्या बढ़कर 33050 हो गई है। 1074 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक 8325 लोग ठीक हो चुके हैं। 24 घंटे में 630 ठीक हुए हैं। इसके साथ ही देश में रिकवरी रेट सुधरकर 25.19 पर्सेंट हो चुका है, जोकि 14 दिन पहले 13.06 फीसदी था।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु दर 3.2 पर्सेंट हैं। मृतकों में 78 फीसदी ऐसे लोग हैं जो दूसरी बीमारियों से भी ग्रस्त थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में कोरोना मरीजों की मृत्य दर 3.20 पर्सेंट है। इनमें से 65 पर्सेंट पुरुष और 35 पर्सेंट महिलाएं हैं। उम्र के लिहाज से देखें तो मृतकों में 14 पर्सेंट 40 साल से कम के हैं। मृतकों में 34.8 पर्सेंट 40-60 उम्र के हैं तो 51.2 पर्सेंट की उम्र 60 साल से अधिक थी।

देश का पहला रिमोर्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम बनकर तैयार, एम्स निदेशक ने दी जानकारी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश और रक्षा क्षेत्र में भारत सरकार की नवरत्न कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बेल) बैंगलोर ने मिलकर देश का पहला रिमोट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया है, इसके जरिए सुदूरवर्ती संसाधन विहीन क्षेत्रों में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के वाइटल पैरामीटर्स का कहीं से भी बैठकर पता लगा सकेगा। यह जानकारी एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने दी।

उन्होंने बताया कि एम्स और बेल कंपनी के संयुक्त प्रयासों से एक ऐसी डिजिटल चिकित्सकीय प्रणाली तैयार की गई है, जिसके तहत एम्स ऋषिकेश में बैठकर चिकित्सक मरीज के घर पर रहते हुए उसके शरीर का तापमान, रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा एवं उसके स्वांस की गति की निगरानी (मॉनिटरिंग) कर सकते हैं। इससे मरीज अनावश्यक रूप से अस्पताल में भर्ती होने से बचेगा। बताया कि सॉफ्टवेयर में यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि मरीज की रिपोर्ट में चिकित्सक को लगता है कि वह कोविड-19 आशंकित है तो उसे संस्थान से इसके लिए मॉनिटरिंग किट उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वह स्वयं सरलता से घर पर बैठे ही इस किट का प्रयोग कर निरंतर इस प्रणाली से जुड़कर चिकित्सक से परामर्श ले सकते हैं। निदेशक प्रो. रवि कांत और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर एमबी गौतम ने इस उपलब्धि के लिए डॉक्टर मोहित तायल व वरिष्ठ वैज्ञानिक राजशेखर एमवी को शुभकामनाएं दी।

एम्स ऋषिकेश में उत्तरकाशी की महिला ने दिया चार बच्चों को जन्म

ऋषिकेश के गाइनी डिपार्टमेंट में भर्ती उत्तरकाशी निवासी महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया है। महिला को उत्तरकाशी जिला अस्पताल से दून अस्पताल रेफर किया गया था, हाई रिस्क केस होने की वजह से महिला को बीते रविवार को दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश में रेफर किया गया था।

गाइनी विभाग की डा. अनुपमा बहादुर के अनुसार महिला का हिमोग्लोबिन काफी कम था, टीएसएच 13 था, लिहाजा ऐसी स्थिति में डिलीवरी में नवजात शिशु आईसीयू नीकु की आवश्यकता पड़ सकती थी, लिहाजा दून में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे एम्स भेजा गया था। जहां अल्ट्रासाउंड के जरिए पता चला कि महिला के पेट में चार बच्चे हैं। लिहाजा महिला को तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। साथ ही बच्चों के फेफड़ों की मैच्योरटी के लिए महिला को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद ऑपरेशन से शनिवार को दोपहर में महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया। जिनमें दो लड़के व दो लड़कियां हैं। चिकित्सकों के अनुसार सभी बच्चे स्वस्थ हैं। जिनका वजन क्रमशरू 1.6 किग्रा, 1.5 किग्रा., 1.35 किग्रा. तथा 1.1 किलोग्राम है।

खासबात यह है कि उन्हें वेंटीलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ी। हाईरिस्क केस होने की वजह से चिकित्सकों के दल में नवजात शिशु विभाग की विभागाध्यक्ष डा. श्रीपर्णा बासू व डा. पूनम व गाइनी विभाग की प्रमुख डा. जया चतुर्वेदी, डा. अनुपमा बहादुर व डा. राजलक्ष्मी मुंदरा शामिल थे। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने बताया कि एम्स ऋघ्षिकेश उत्तराखंड में नवजात शिशु मृत्युदर कम करने को लेकर गंभीर है, लिहाजा हम हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को प्राथमिकता देते हैं। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि इसके लिए संस्थान में सभी विश्वस्तरीय वार्ड, संसाधन, उपकरण एवं विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं।

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति सीएम का विशेष ध्यानः गणेश जोशी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता दर्शन हॉल में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना की प्रथम वर्षगांठ समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। मुख्यमंत्री ने अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के तहत सराहनीय कार्य करने वाले सरकारी एवं निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इनमें एम्स ऋषिकेश, दून मेडिकल कॉलेज, सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज, स्वामीराम हिमालयन अस्पताल, महन्त इन्दिरेश अस्पताल, मेट्रो हॉस्पिटल एवं हार्ट इंस्ट्टीयूट हरिद्वार, उजाला हैल्थ केयर ऊधमसिंह नगर के प्रतिनिधि शामिल थे। इस योजना के तहत अच्छा कार्य करने वाले आरोग्य मित्रों एवं आशा कोर्डिनेटर को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इस योजना से लाभान्वित लोगों से बातचीत भी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 23 सितम्बर 2018 को देश को विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत योजना’ दी। इस योजना से 10 करोड़ बी.पी.एल परिवार लाभान्वित हुए हैं। इससे प्रेरित होकर 25 दिसम्बर 2018 को प्रदेश में ‘अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना’ का शुभारम्भ किया गया। इस योजना से राज्य के सभी परिवारों को आच्छादित किया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश में 01 करोड़ 10 लाख लोगों के गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो, इसके लिए प्रत्येक जनपद में आईसीयू की शुरूआत की गई है। अभी तक आठ जनपदों में आईसीयू बन चुके हैं, शेष में एक वर्ष के अन्दर बनकर तैयार हो जायेंगे। पर्वतीय क्षेत्रों को दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक प्रकार की जांच की सुविधा हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को विशेष प्रयास करने होंगे।

विधायक मसूरी गणेश जोशी ने कहा कि ‘अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना’ प्रदेशवासियों के लिए वरदान साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले साल प्रदेशवासियों के लिए एक बड़ा तोहफा दिया। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति मुख्यमंत्री का विशेष ध्यान है।

अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के चेयरमेन डीके कोटिया ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है, जहां प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 05 लाख रूपये तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलबध कराई जा रही है। अटल आयुष्मान योजना स्वास्थ्य के क्षेत्र में पर्वतीय क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हुई है। अभी तक इस योजना के तहत 34 लाख 70 हजार गोल्डन कार्ड बनाये जा चुके हैं। सबसे अधिक गोल्डन कार्ड बनाने में उत्तराखण्ड का केरल के बाद दूसरा स्थान है। इस योजना के तहत 175 अस्पताल सूचिबद्ध किये गये हैं। योजना के तहत उपचार कर रहे लाभार्थियों पर हुए खर्च का भुगतान एक सप्ताह के अन्दर किया जा रहा है। अगले छः माह में शत प्रतिशत गोल्डन कार्ड बन जायेंगे। इस योजना के तहत एक साल में 01 लाख 10 हजार से अधिक लोग निःशुल्क उपचार करा चुके हैं, जिसमें 105 करोड़ रूपये का खर्च हुआ है।

सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने कहा कि उत्तराखण्ड में ‘अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना’ से 14.50 लाख परिवार आच्छादित हैं। यह योजना 12 हजार से अधिक लाभार्थियों के लिए जीवन दायनी साबित हुई है। प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। हरिद्वार में 100 बैड के अस्पताल के लिए स्वीकृति मिली है।

रोबोटिक सर्जरी से ऑपरेशन की जटिलताओं में आती है कमीः एम्स निदेशक

एम्स ऋषिकेश में पहली मर्तबा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने यूरो ओंकोलॉजी एवं यूरोगाइनीकोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जटिल सर्जरियों पर विस्तृत चर्चा की और अपने अनुभवों को साझा किया।
इस अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि संस्थान के यूरोलॉजी विभाग की ओर से पहली अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक यूरोलॉजी कांफ्रेंस आयोजित की गई। जिसमें देश के ही नहीं अपितु अन्य देशों के भी प्रसिद्ध रोबोटिक शल्य चिकित्सकों द्वारा अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश हमेशा बेहतर उपचार परिणामों के साथ रोगियों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पित है, इस श्रंखला में यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित कांफ्रेंस में शनिवार का दिन गुर्दे के कैंसर के इलाज एवं महिला पैल्विक रोगों के उपचार व विचार विमर्श के लिए समर्पित रहा। निदेशक प्रो. रवि कांत बताया कि रोबोटिक सर्जरी से पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बेहतर परिणाम मिलते हैं,इससे .शरीर से रक्त का बहाव कम होता है और छोटे छोटे चीरे लगने से कम निशान पड़ते हैं एवं घाव आसानी से भर जाते हैं। साथ ही बताया कि रोबोटिक सर्जरी से बेहतर सूचरिंग के कारण सर्जरी में आसानी होती है और ऑपरेशन से संबंधित जटिलताओं में कमी आती है। उन्होंने बताया कि कांफ्रेंस में खासतौर से आस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक सर्जन डा. डेविड गिल्लाट ने प्रतिभागियों को रोबोटिक सर्जरी की बारिकियों से अवगत कराया। निदेशक प्रो. रवि कांत ने उम्मीद जताई कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा किए गए मंथन से आने वाले समय में मरीजों को लाभ मिलेगा।


एम्स के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष व आयोजन सचिव डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल काफ्रेंस के दूसरे दिन शनिवार को डा. रवि मोहन ने एक मरीज के गुर्दे को बचाते हुए गुर्दे की गांठ की सर्जरी का प्रदर्शन किया। कांफ्रेंस के दौरान यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अंकुर मित्तल ने वेसिको वेजाइनल फिस्टुला रिपेयर ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद दोनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इस अवसर पर उन्होंने एम्स संस्थान की ओर से प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। यूरोलॉजी विभाग के डा. सुनिल कुमार ने प्रतिभागियों को रोबोट पर सिमुलेशन के द्वारा प्रशिक्षण दिया।
सम्मेलन के आयोजन में डा. किम जैकब मैमन, डा. सुनील कुमार, डा. विकास कुमार पंवार, डा. शिव चरण नावरिया, डा. तुषार नारायण आदित्य,डा. निशित के अलावा यूरोलॉजी व गाइनेकोलॉजी टीम ने सहयोग किया।