उत्तराखंड में रेल की रफ्तार के साथ विकास की उड़ान, फ्रीज जोन समीक्षा से पहाड़ों में खुल सकती हैं नई संभावनाएं

उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था को बदलने वाली योजना नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों के आर्थिक और सामाजिक भविष्य को भी नई दिशा देने वाली परियोजना मानी जा रही है। अब जब इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का अधिकांश कार्य अंतिम चरणों में पहुंच चुका है, तो राज्य सरकार उन प्रतिबंधों की समीक्षा की ओर बढ़ रही है, जो निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा कारणों से लगाए गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने रेलवे फ्रिज जोन में लागू 400 मीटर प्रतिबंध की समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दिशा में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक और संबंधित निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है तथा वहां विकास गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से अनुमति दी जा सकती है। यह पहल केवल प्रशासनिक निर्णय भर नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की उम्मीदों से भी जुड़ी है, जो पिछले कई वर्षों से पर्यटन, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

विकास की राह में बना था सुरक्षा कवच
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने 9 जनवरी 2024 को रेलवे कॉरिडोर से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था। योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर जैसे क्षेत्रों में रेलवे परियोजना की परिसीमा से 400 मीटर तक के दायरे में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अनियंत्रित निर्माण कार्य रेलवे परियोजना की सुरक्षा, सुरंगों और अन्य तकनीकी ढांचों पर प्रतिकूल प्रभाव न डालें। इन प्रतिबंधों ने परियोजना को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ स्थानीय स्तर पर इसके प्रभाव भी सामने आने लगे। कई स्थानों पर होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक परियोजनाएं ठहराव का शिकार हो गईं।

पर्यटन और निवेश को मिल सकती है नई संजीवनी
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर आधारित है। विशेष रूप से गढ़वाल मंडल के वे क्षेत्र, जहां से रेल परियोजना गुजर रही है, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में फ्रीज जोन प्रतिबंधों की समीक्षा को स्थानीय विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार के पास विभिन्न जिलों से लगातार सुझाव पहुंच रहे थे कि रेलवे ट्रैक का अधिकांश कार्य पूरा होने के बाद वर्तमान व्यवस्था अब विकास गतिविधियों में बाधा बन रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवास विभाग ने जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन शुरू किया है। यदि तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रतिबंधों में आंशिक शिथिलता दी जाती है, तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास का रास्ता खुल सकता है। इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल संपर्क शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसे में पर्यटन आधारित बुनियादी ढांचे का विकास समय की आवश्यकता भी है। फ्रीज जोन समीक्षा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

जनहित और सुरक्षा के बीच संतुलन की कोशिश
राज्य सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी प्रकार की राहत रेलवे सुरक्षा से समझौता करके नहीं दी जाएगी। यही कारण है कि समीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देश पर जिलों से ऐसे क्षेत्रों की पहचान कराई जा रही है, जहां रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जहां विकास गतिविधियों को नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ ही रेलवे से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं, भूगर्भीय परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया जाएगा। सरकार की मंशा केवल प्रतिबंध हटाने की नहीं, बल्कि ऐसी संतुलित व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे रेलवे परियोजना के दीर्घकालिक हित सुरक्षित रहें और स्थानीय नागरिकों को भी विकास का लाभ मिल सके।

पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया आधार
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड की विकास यात्रा का गेम चेंजर माना जाता है। रेल संपर्क से जहां चारधाम यात्रा और पर्यटन को नई गति मिलेगी, वहीं इसके आसपास विकसित होने वाली आर्थिक गतिविधियां भी प्रदेश की तस्वीर बदल सकती हैं। फ्रीज जोन समीक्षा की यह पहल उसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें धामी सरकार विकास, निवेश और रोजगार को नई गति देने के साथ-साथ स्थानीय जरूरतों को भी प्राथमिकता दे रही है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो लंबे समय से ठहरी विकास योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी और रेलवे कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश का अनुकूल माहौल तैयार होगा।

बयान
*डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आवास *
“मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है। जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, वहां की स्थिति का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे।”

अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस अपनाएगा उत्तराखंड, परियोजनाओं की निगरानी और शिकायत निस्तारण होगा और मजबूत

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के विजन को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) में व्यापक सुधारों की तैयारी शुरू हो गई है। सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में रेरा की कार्यप्रणाली, परियोजनाओं की निगरानी, शिकायत निस्तारण, बिल्डरों के पंजीकरण तथा अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश दिए गए।

रेरा से संबंधित समीक्षा बैठक में कार्यों की प्रगति, उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने निर्देश दिए कि देश के विभिन्न राज्यों जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, असम और हिमाचल प्रदेश में लागू रेरा व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन कर उत्तराखंड के लिए सर्वाेत्तम व्यवस्थाएं अपनाई जाएं। इसके लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य में लागू किए जाने वाले सुधारों का खाका तैयार किया जाएगा।

सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा बैठक में रेरा के ऑनलाइन पोर्टल को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से एकीकृत करने का सुझाव भी दिया गया, जिससे परियोजना पंजीकरण और अनुमोदन प्रक्रियाएं अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो सकें।

सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा बैठक में यह भी प्रस्तावित किया गया कि रेरा पंजीकरण के बाद जारी प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया जाए कि स्वीकृत मानचित्र में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने से पहले संबंधित परियोजना के कम से कम दो-तिहाई आवंटियों की सहमति लेना अनिवार्य होगा। इससे फ्लैट और प्लॉट खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा राज्य में बिल्डर और प्रमोटर पंजीकरण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने पर भी चर्चा हुई। प्रमोटरों द्वारा पूर्व में विकसित की गई परियोजनाओं का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया, जिससे खरीदारों को डेवलपर के ट्रैक रिकॉर्ड की जानकारी मिल सके।

अवैध प्लॉटिंग पर रेरा की नजर, प्राधिकरणों के साथ साझा होगी कार्रवाई की सूचना

समीक्षा बैठक में राज्यभर में बढ़ रही अवैध प्लॉटिंग और बिना स्वीकृति के निर्माण गतिविधियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सचिव आवास ने कहा कि विभिन्न विकास प्राधिकरणों से ऐसे मामलों की सूचनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इस पर रेरा स्तर से किस प्रकार प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है, इसके लिए विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी तय किया गया कि जिन निर्माणों के विरुद्ध विकास प्राधिकरणों द्वारा सीलिंग, ध्वस्तीकरण या अन्य कार्रवाई की जाती है, उनकी सूचना रेरा को भी उपलब्ध कराई जाए। इससे खरीदारों को संभावित जोखिम वाली परियोजनाओं की जानकारी मिल सकेगी और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।

बैठक में परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए स्पष्ट टाइमलाइन तय करने पर भी जोर दिया गया ताकि निवेशकों और खरीदारों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।

रेरा के वर्तमान प्रभारी अध्यक्ष नरेश मठपाल ने बैठक में बताया कि 500 वर्ग मीटर से अधिक भूखंड क्षेत्रफल अथवा आठ से अधिक निर्मित इकाइयों वाली सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए विज्ञापन, बुकिंग, आवंटन तथा क्रय-विक्रय से पूर्व रेरा में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि परियोजना और एजेंट पंजीकरण के लिए प्राप्त आवेदनों के निस्तारण हेतु 30 कार्य दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

रेरा की उपलब्धियों पर जानकारी देते हुए वर्तमान प्रभारी अध्यक्ष नरेश मठपाल ने बताया गया कि वर्ष 2017 में गठन के बाद से अब तक राज्य में 689 रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हो चुकी हैं। हिमालयी राज्यों में परियोजना पंजीकरण के मामले में उत्तराखंड दूसरे स्थान पर है। वहीं 510 पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के साथ राज्य पहले स्थान पर है।

शिकायत निस्तारण के क्षेत्र में भी रेरा का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। प्राधिकरण को अब तक 1342 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 86 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है। सीएम हेल्पलाइन और सीपीग्राम्स के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण भी किया गया है।

बैठक में बैंक अकाउंट डायरेक्शन-2025 के क्रियान्वयन की जानकारी भी दी गई। इसके तहत प्रत्येक रियल एस्टेट परियोजना के लिए तीन अलग-अलग बैंक खाते खोले जाने का प्रावधान किया गया है, जिससे परियोजना निधियों की निगरानी और वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया जा सके। बैठक में संयुक्त सचिव आवास धीरेंद्र कुमार सिंह, अनु सचिव नरेंद्र सिंह रावत, अनुभाग अधिकारी राहुल सुन्दरियाल सहित सदस्य पंकज कुलश्रेष्ठ, सहायक अभियंता आनंद शंकर और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

राज्य सरकार रियल एस्टेट क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध- डॉ. आर. राजेश कुमार

सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में राज्य सरकार रियल एस्टेट क्षेत्र में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। समीक्षा बैठक में हमने अन्य राज्यों की सफल व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उत्तराखंड में सर्वाेत्तम प्रथाओं को लागू करने पर चर्चा की है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक परियोजना नियमानुसार संचालित हो और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं भरोसेमंद निवेश का वातावरण मिले। अवैध प्लॉटिंग, अनधिकृत निर्माण और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। साथ ही रेरा की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, डिजिटल और समयबद्ध बनाया जाएगा ताकि निवेशकों, गृह खरीदारों और डेवलपर्स को पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिल सके। राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर को सुव्यवस्थित, जवाबदेह और जनहितकारी बनाने के लिए आवश्यक सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

उत्तराखंड में आवास विभाग के अधीन विभिन्न पार्किंग प्रोजेक्ट पर तेजी से हो रहा है काम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आवास विभाग प्रदेश के बड़े शहरों, तीर्थ स्थलों और पयर्टन केंद्रों पर जाम की समस्या दूर करने के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के 11 स्थानों पर जल्द पार्किंग सुविधा उपलब्ध हो जाएगी, जिसमें 1082 वाहन पार्क हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यभार ग्रहण करते ही, आवास विभाग को, विकास प्राधिकरणों के जरिए बड़े शहरों, तीथार्टन और पयर्टन केंद्रों में युद्धस्तर पर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, इसके बाद विभिन्न विकास प्राधिकरणों के जरिए 195 स्थानों पर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव प्राप्त हुए, इसमें सरफेंस पार्किंग से लेकर मल्टी लेबल पार्किंग और टनल पार्किंग के तक के विकल्प शामिल थे। इसी आधार पर आवास विभाग 114 जगह पार्किंग की डीपीआर को मंजूरी प्रदान कर चुका है, जिसके लिए बजट भी जारी हो चुका है। जिसमें से प्रथम चरण में 54 स्थानों पर कुल 3244 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है, यानि इन स्थानों पर पार्किंग सेवा शुरु हो चुकी है। अब दूसरे चरण में 11 अन्य स्थानों पर पार्किंग निर्माण करीब 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है, आवास विभाग इसी वित्तीय वर्ष में यहां निर्माण पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इससे 1082 वाहनों के लिए पार्किंग सेवा उपलब्ध हो सकेगी। इसके अलावा विकास प्राधिकरणों द्वारा अपने संसाधनों से 11 अन्य स्थानों पर भी पार्किंग निर्माण की जा रही है, जिससे 359 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
*सचिव आवास ने निर्देश*
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार ने सभी विकास प्राधिकरणों को पार्किंग निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आगामी यात्रा सीजन से पहले सभी चिन्हित स्थानों पर पार्किंग सुविधा बहाल की जाए, साथ ही पार्किंग स्थलों पर शौचालय, लाइट और साफ सफाई की भी उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का पालन करने के भी निर्देश दिए हैं।

*उत्तराखंड में प्रतिवर्ष करोड़ों लोग तीर्थाटन, पयर्टन के लिए पहुंच रहे हैं। सड़कों का नेटवर्क अच्छा होने से अब बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों से आते हैं, इस कारण यातायात जाम की समस्या होने की स्वाभाविक है। इसी समस्या को देखते हुए, बीते चार सालों में विभिन्न स्थानों पर करीब छह वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। जिसमें से कुछ पर काम पूरा भी हो चुका है। इससे यातायात जाम की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड*

उत्तराखंड आवास विभाग के प्रयास हुए सफल, केंद्र से 264 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शहरी विकास और आवास विभाग के स्तर से लागू किए गए विभिन्न सुधारों के लिए केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को 264.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है।
केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने राज्यों को शहरी विकास और आवास विभाग से संबंधित विभिन्न नीतिगत सुधारों को लागू करने को कहा था। इन सुधारों को लागू करने के क्रम में मंत्रालय ने उत्तराखंड को स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इनवेस्टमेंट 2025-26 के क्रम में कुल 264.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। इसमें शहरी विकास विभाग को जीआईएस आधारित यूटिलिटी मैपिंग (सीवर, पेयजल, ड्रैनेज कार्य) के लिए 03 करोड़, सरकारी जमीनों और भवनों की मैपिंग के लिए 6.5 करोड और निकायों के स्तर पर आय के स्रोत बढ़ाने के लिए 10 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि जारी की गई है।
*आवास विभाग के प्रयास सफल*
मंत्रालय ने सबसे अधिक प्रोत्साहन राशि आवास विभाग के अधीन लागू किए गए सुधारों के लिए स्वीकृत की है। अरबन लैंड एंड प्लानिंग रिफार्म के तहत उत्तराखंड आवास विभाग ने टाउन प्लानिंग स्कीम और लैंड पूलिंग स्कीम के नियम लागू किये थे, जिसके लिए मंत्रालय ने 100 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की है। इसी तरह पुराने शहरी क्षेत्रों के पुनरुद्धार कार्यक्रम के लिए 140 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही बिल्डिंग बायलॉज में ग्रीन बिल्डिंग के मानक लागू करने के लिए 05 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि आवास विभाग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में, उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को किफायती आवास उपलबध कराने के साथ ही उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों मे शामिल करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।

*उत्तराखंड सरकार केंद्र सरकार के सभी दिशा निर्देशों को पूरी निष्ठा के साथ अमल में लाने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में आवास और शहरी विकास विभाग में किए गए रिफार्म पर 264.5 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत हुई है, इससे पहले खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों के लिए भी केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है। उत्तराखंड गुड गर्वनेंस का एक आदर्श मॉडल बनकर सामने आया है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

आधुनिक कार्यालय भवन निर्माण को मिली रफ्तार, औचक निरीक्षण में आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने दिए सख्त निर्देश

आवास विभाग, राज्य सम्पत्ति विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार विभागीय कार्यों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को ज़मीन पर उतारने और सरकारी कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से डॉ. राजेश कुमार ने आज सचिवालय परिसर स्थित निर्माणाधीन आधुनिक कार्यालय भवन के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उनके साथ एसएस रावत संयुक्त सचिव, राज्य संपत्ति, नीरज कुमार त्रिपाठी, अधिशाषी अभियंता लोकनिर्माण विभाग, संदीप वर्मा, अपर सहायक अभिंयता सिविल, गाविंद सिंह, सहायक अभियंता विधुत सहित ठेकेदार शिव कुमार अग्रवाल मौजूद रहे।

राज्य सम्पत्ति विभाग एवं निर्माण से जुड़े संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। सचिव ने निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तार से जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य पूर्ण गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

*निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा*
राज्य सम्पत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन सचिवालय परिसर, देहरादून में विश्वकर्मा भवन के समीप 6 मंजिला (जी5 एवं एक बेसमेंट सहित) आधुनिक कार्यालय भवन का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह भवन राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए आधुनिक, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक कार्यालय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। इस परियोजना को शासनादेश दिनांक 26 मार्च 2025 के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान की गई है। भवन निर्माण की कुल लागत ₹5934.71 लाख है, जिसमें सिविल कार्य एवं विद्युतीकरण कार्य शामिल हैं। अब तक इस परियोजना पर लगभग ₹1400 लाख की धनराशि का आंवटन किया जा चुका है।

*निर्माण एजेंसी और समय-सीमा*
भवन के सिविल निर्माण कार्य का अनुबंध मैसर्स शिव कुमार अग्रवाल को दिया गया है। निर्माण कार्य को डेढ़ वर्ष की अवधि में पूर्ण किया जाना है, जिसकी अंतिम तिथि 24 जनवरी 2027 निर्धारित की गई है।

*भवन की प्रमुख विशेषताएं*
यह भवन 34×74 मीटर के प्लॉट पर निर्मित किया जा रहा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 2516 वर्ग मीटर है। सभी मंजिलों को मिलाकर भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 1,04,480 वर्ग फीट होगा। भवन के बेसमेंट में 25 कार पार्किंग और 100 दोपहिया वाहन पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे सचिवालय परिसर में पार्किंग की समस्या से राहत मिलेगी। ग्राउंड फ्लोर पर एसबीआई बैंक, पोस्ट ऑफिस, प्रवेश लॉबी और वेटिंग एरिया का प्रावधान किया गया है। ऊपरी मंजिलों पर सचिव, अपर सचिव, उप सचिव, संयुक्त सचिव, अनुसचिव, स्तर के कार्यालय व उनके स्टाफ कक्ष, वेटिंग लॉबी और मीटिंग हॉल बनाए जा रहे हैं।

*निर्माण की वर्तमान स्थिति*
निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति के अनुसार भवन का फाउंडेशन कार्य पूर्ण हो चुका है। बेसमेंट का सिविल कार्य पूरा कर लिया गया है तथा ग्राउंड फ्लोर का कार्य प्रगति पर है, जिसे 10 फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग 15 प्रतिशत है। राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यह भवन सचिवालय की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाएगा।

*गुणवत्ता से समझौता नहीं- डॉ आर राजेश कुमार*
सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा सचिवालय परिसर में निर्माणाधीन यह आधुनिक कार्यालय भवन राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप हम सभी निर्माण कार्यों को समयबद्ध, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमित निरीक्षण और सतत निगरानी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार आगे बढ़े। यह भवन भविष्य में बेहतर कार्यसंस्कृति और सुगम प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

2017-18 की लंबित परियोजनाएं धामी सरकार ने सुचारु की

शहरी विकास एवं आवास मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 16 प्रोजेक्टों को लेकर विभागीय अधिकारी के साथ समीक्षा की। इस दौरान वर्ष 2017-18 से लंबित परियोजनाओं को वर्तमान सरकार द्वारा सुचारू करने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
विभाग के मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना वर्ष 2016 में लागू हुई। जिसमें शहरी विकास विभाग द्वारा बीएलसी घटक में जबकि आवास विभाग द्वारा एएचपी घटक में काम प्रारंभ किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में परियोजनाओं हेतु निजी विकास को एवं प्राधिकरण से प्रस्ताव तैयार करवा कर भारत सरकार को भेजे गए थे। मगर परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी थी।
विभागीय मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान मुख्यमंत्री की सरकार में उनके निर्देशन पर परियोजना में गंभीरता से कार्य किया गया तथा आवास विभाग द्वारा परियोजना प्रारंभ करने में आ रही दिक्कतों को युद्ध स्तर पर दूर करते हुए कार्य प्रारंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि उनके निर्देशन पर आवास विभाग परिषद की 16 परियोजनाओं जिनमें 14200 आवास बन रहे हैं इनमें कार्य प्रारंभ हो सका है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त एमडीडीए द्वारा एक परियोजना जिनमें 240 आवास, हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा एक परियोजना जिनमें 528 आवास तथा उधम सिंह नगर जिला विकास प्राधिकरण में एक परियोजना जिनमें 1872 आवास हैं।
विभागीय मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने आवास विभाग की समीक्षा करते हुए इन परियोजनाओं को सितंबर 2024 पूर्ण करते हुए इनका कब्जा लाभार्थियों को देने के निर्देश दिए। डॉ अग्रवाल ने जिन परियोजनाओं का अभी तक आवंटन नहीं हुआ है उन पर भी शीघ्रता से आवंटन करने के निर्देश दिए।
इस मौके पर अपर आयुक्त आवास पीसी दुम्का उपस्थित रहे।