रतूड़ा में 48.84 करोड़ रूपए से बनेगा भव्य राज्य अतिथि गृह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य की सरकारी परिसंपत्तियों को आधुनिक, उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप देने की दिशा में राज्य संपत्ति विभाग ने अपनी कार्ययोजनाओं को गति दी है। सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई दो महत्वपूर्ण बैठकों में जहां रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में प्रस्तावित भव्य राज्य अतिथि गृह की निर्माण कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई, वहीं देहरादून के रेसकोर्स स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में 48 नए श्रेणी-3 आवासों के निर्माण की योजना पर भी मंथन हुआ। दोनों परियोजनाओं में एक बात समान रूप से सामने आई, सरकारी भवन केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक सुविधाओं, बेहतर डिजाइन, पर्यावरणीय मानकों और दीर्घकालिक उपयोगिता के मॉडल बनें।

रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में बनने वाले राज्य अतिथि गृह के लिए तैयार किए गए ₹4884.20 लाख यानी करीब ₹48.84 करोड़ के विस्तृत आगणन की सचिव राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा की। प्रस्तावित अतिथि गृह को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सचिव ने निर्देश दिए कि अतिथि गृह का कॉन्फ्रेंस हॉल आधुनिक सुविधाओं से लैस होना चाहिए। इसमें मजबूत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था, बड़े आकार के फ्लैट टीवी और अन्य आवश्यक तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि महत्वपूर्ण बैठकों और प्रशासनिक संवाद के लिए आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हों। इससे पर्वतीय क्षेत्र में स्थित राज्य अतिथि गृह को महज आवासीय सुविधा के बजाय प्रशासनिक एवं संवाद केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा भी मजबूत होगी।

निर्माण में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी नहीं
रतूड़ा परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। सचिव ने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों के अनुरूप निर्माण स्थल की नदी से न्यूनतम 200 मीटर दूरी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही नियमानुसार प्रमाण-पत्र को अभिलेखों में संलग्न करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी परियोजना की भव्यता के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य अतिथि गृह के प्रस्तावित स्वरूप के अनुरूप मुख्य प्रवेश द्वार और केंद्रीय भवन पर आकर्षक एवं बड़े आकार का लोगो स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि परिसर की पहचान और स्वरूप दोनों प्रभावी नजर आएं।

सरकारी आवासों में आधुनिकता के साथ हरित सोच
दूसरी ओर, देहरादून के रेसकोर्स स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में पुराने जर्जर भवनों को हटाने के बाद रिक्त भूमि के उपयोग की योजना तैयार की गई है। यहां ₹2807.21 लाख यानी करीब ₹28.07 करोड़ की लागत से 48 नए श्रेणी-3 आवासीय भवन बनाए जाने प्रस्तावित हैं। परियोजना का उद्देश्य सरकारी कार्मिकों की आवासीय आवश्यकताओं को पूरा करना है। लेकिन इस योजना में भी सिर्फ भवन निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी गई है। सचिव ने निर्देश दिए कि भवनों के बाहरी हिस्से में ऐसी निर्माण सामग्री और फिनिशिंग का इस्तेमाल किया जाए, जिसकी अनुरक्षण लागत कम हो और बार-बार मरम्मत की आवश्यकता न पड़े। यानी निर्माण के साथ भविष्य के रखरखाव पर होने वाले सरकारी खर्च को भी ध्यान में रखा गया है।

ग्रीन बिल्डिंग और रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनेगी पहचान
रेसकोर्स आवासीय परियोजना में ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पूर्ण पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। जल संरक्षण के लिए अनिवार्य रूप से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। यह पहल सरकारी आवासीय परिसरों को पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने के साथ-साथ जल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। साथ ही प्रत्येक कॉलोनी के बाहर उसका नाम स्पष्ट और आकर्षक रूप में प्रदर्शित करने के लिए अलग-अलग डिजाइन और फॉर्मेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

पहाड़ से मैदान तक एक जैसी प्राथमिकता
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के दिशा निर्देशों में राज्य संपत्ति विभाग सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों को केवल निर्माण परियोजना के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि उन्हें आधुनिक सुविधाओं, पर्यावरणीय संतुलन, कम रखरखाव लागत और बेहतर उपयोगिता के आधार पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एक ओर रतूड़ा में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह पर्वतीय क्षेत्र में आधुनिक प्रशासनिक सुविधाओं का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर देहरादून का रेसकोर्स सरकारी कार्मिकों के लिए व्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल आवासीय परिसर की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विकास की व्यापक सोच के अनुरूप इन परियोजनाओं में आधुनिकता और पर्यावरण का संतुलन दिखाई देता है। आने वाले समय में इन योजनाओं का धरातल पर आकार लेना राज्य की सरकारी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

स्थानीय वास्तुशैली के साथ विकास को नई दिशा रू डॉ. आर. राजेश कुमार
सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्रदेश में आवासीय एवं राज्य संपत्ति से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक परियोजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित हो। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों में स्थानीय वास्तुशैली को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जनता को योजनाओं का शीघ्र लाभ मिल सके।

धामी सरकार की बागेश्वर को बड़ी सौगात, पहाड़ की पहचान से सजेगा राज्य अतिथि गृह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के विकास और निर्माण कार्यों को गुणवत्ता एवं उपयोगिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह के निर्माण कार्य की समीक्षा की। सचिव की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य अतिथि गृह निर्माण कार्य योजना के ₹1930.11 लाख के संस्तुत विस्तृत आगणन पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली में बनेगा भवन
बैठक में कार्यदायी संस्था प्रान्तीय खंड, लोक निर्माण विभाग, बागेश्वर की ओर से प्रस्तावित कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन आकर्षक स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली पर आधारित होना चाहिए, ताकि भवन अपनी उपयोगिता के साथ बागेश्वर की स्थानीय पहचान और वास्तुकला को भी प्रदर्शित करे। सचिव ने भवन के प्रवेश द्वार और मुख्य भवन पर राज्य अतिथि गृह का लोगो एवं साइनेज आकर्षक, स्पष्ट और प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सरकारी भवनों के निर्माण में आधुनिक सुविधाओं के साथ स्थानीय परिवेश और वास्तुशैली का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

डोरमेट्री में 20 लोगों की क्षमता
बैठक में अतिथि गृह में प्रस्तावित डोरमेट्री कक्ष की क्षमता को लेकर भी निर्देश दिए गए। सचिव ने डोरमेट्री कक्ष को 20 व्यक्तियों के अनुरूप विकसित करने को कहा। साथ ही उपलब्ध अतिरिक्त क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग करते हुए उसमें एक स्टोर कक्ष प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए। इससे भवन की उपयोगिता और व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकेगा। सचिव ने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि बैठक में दिए गए सभी सुझावों और आवश्यक संशोधनों को कार्ययोजना में शामिल किया जाए। संशोधित प्रस्ताव तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि निर्माण कार्य को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रुहेला, संयुक्त सचिव राज्य संपत्ति विभाग सुरेंद्र सिंह रावत, नियोजन विभाग के प्रतिनिधि अयाज अहमद तथा कार्यदायी संस्था की ओर से अधिशासी अभियंता ऋषिराज वर्मा उपस्थित रहे। अधिकारियों ने प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं उपयोगिता पक्षों पर चर्चा की।

डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जा रही है। बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन केवल एक सरकारी आवासीय सुविधा तक सीमित न रहे, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय पहचान और पहाड़ी वास्तुशैली को भी प्रदर्शित करे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन में आने वाले अतिथियों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ उपलब्ध भूमि और क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। डोरमेट्री की क्षमता 20 व्यक्तियों के अनुरूप रखने और अतिरिक्त क्षेत्र में स्टोर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में दिए गए सभी सुझावों को कार्ययोजना में शामिल कर संशोधित रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिए गए हैं।

रुद्रपुर में खेल सुविधाओं को मिलेगा नया विस्तार, युवाओं को फुटबॉल बैडमिंटन समेत कई खेलों के लिए मिलेगा बेहतर प्लेटफॉर्म

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में जनहित से जुड़ी विकास योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने की कवायद जारी है। इसी क्रम में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आज राज्य सचिवालय में दो महत्वपूर्ण बैठकें संपन्न हुईं। बैठकों में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें रुद्रपुर के मोदी मैदान में अत्याधुनिक इंडोर एवं आउटडोर स्टेडियम के निर्माण तथा हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों के सुधार से जुड़े फैसले प्रमुख हैं। मोदी मैदान स्टेडियम के लिए 23.32 करोड़ रुपये की लागत को औचित्यपूर्ण पाया गया है, जबकि हल्द्वानी-काठगोदाम की सड़कों के लिए 15 करोड़ रुपये की धनराशि अवस्थापना विकास निधि से प्रस्तावित है।

मोदी मैदान में बनेगा अत्याधुनिक स्टेडियम

मुख्यमंत्री घोषणा के तहत रुद्रपुर के मोदी मैदान में इंडोर एवं आउटडोर स्टेडियम का निर्माण किया जाना है। घोषणा के क्रियान्वयन के लिए पूर्व में खेल विभाग को आवंटित स्थान को आवास विभाग के नाम स्थानांतरित किया गया है। परियोजना के लिए उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।

23.32 करोड़ का आगणन हुआ औचित्यपूर्ण

उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, ऊधमसिंहनगर की ओर से स्टेडियम के निर्माण के लिए 2374.56 लाख रुपये का आगणन तैयार किया गया था। नियोजन विभाग के टीओसी परीक्षण के बाद 2332.05 लाख रुपये यानी करीब 23.32 करोड़ रुपये की धनराशि को औचित्यपूर्ण पाया गया है। इससे परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

8.594 हेक्टेयर में विकसित होगा परिसर

प्रस्तावित स्टेडियम मोदी मैदान के विस्तृत क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। कुल 9.1915 हेक्टेयर भूमि में से करीब 8.594 हेक्टेयर क्षेत्र में स्टेडियम परियोजना प्रस्तावित है। मैदान के दो ओर सड़कें होने से यहां आवागमन की सुविधा भी बेहतर रहेगी। स्टेडियम को खेल गतिविधियों के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य बड़े आयोजनों के लिए भी उपयोगी बनाया जा सकेगा।

खिलाड़ियों को मिलेगा बेहतर प्लेटफॉर्म

इंडोर और आउटडोर सुविधाओं से स्थानीय युवाओं को फुटबॉल, वालीबॉल, बैडमिंटन समेत विभिन्न खेलों में अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर मंच मिलेगा। रुद्रपुर की पहचान अब औद्योगिक नगरी के साथ खेल प्रतिभाओं के केंद्र के रूप में भी विकसित करने की दिशा में यह परियोजना अहम मानी जा रही है।

हल्द्वानी-काठगोदाम में 15 करोड़ से सुधरेंगी सड़कें

दूसरे महत्वपूर्ण फैसले में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत हल्द्वानी- काठगोदाम नगर निगम क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये की धनराशि अवस्थापना विकास निधि से स्वीकृत किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय के 8 अगस्त 2025 के पत्र के माध्यम से घोषणा के क्रियान्वयन की कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए गए थे। लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित करने का निर्णय लिया गया है। इससे सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

शहरवासियों को मिलेगी राहत

हल्द्वानी-काठगोदाम कुमाऊं का प्रमुख शहरी और व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण और सुधार से स्थानीय नागरिकों, वाहन चालकों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। 15 करोड़ रुपये की प्रस्तावित राशि से सड़क अधोसंरचना को बेहतर बनाने के कार्यों को गति मिलेगी।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में आवास और अवस्थापना विकास से जुड़ी घोषणाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। रुद्रपुर के मोदी मैदान में प्रस्तावित इंडोर एवं आउटडोर स्टेडियम युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है। वहीं हल्द्वानी-काठगोदाम क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री घोषणा के क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। हमारा प्रयास है कि शासन स्तर से लिए गए निर्णयों का समयबद्ध और प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित हो। दोनों परियोजनाएं संबंधित क्षेत्रों के विकास, जनसुविधाओं और बेहतर अवस्थापना के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

धामी सरकार में राज्य संपत्तियों के विकास को रफ्तार, टिहरी हाउस में 28 आवास, नवी मुंबई के वाशी और हल्द्वानी की योजनाओं की समीक्षा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सरकारी धन के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार के दिशा-निर्देशों में राज्य संपत्ति विभाग से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की गई। देहरादून के राजपुर रोड स्थित टिहरी हाउस परिसर में प्रस्तावित 28 बहुमंजिला आवासों के निर्माण से लेकर नवी मुंबई के वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह और हल्द्वानी सर्किट हाउस के विस्तारीकरण की योजनाओं पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। बैठकों में योजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और लागत नियंत्रण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन देहरादून के राजपुर रोड स्थित टिहरी हाउस परिसर में श्रेणी-5 के 28 आवासों के बहुमंजिला निर्माण की योजना को लेकर विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई। सचिव, राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में योजना के विस्तृत आगणन और प्रस्तावित निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। योजना की अनुशंसित लागत 4391.14 लाख रुपये निर्धारित की गई है। बैठक में कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग, देहरादून की ओर से कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव ने निर्माण लागत को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत को न्यूनतम संभव स्तर पर रखा जाए, ताकि सरकारी धन का बेहतर उपयोग हो सके। इसके साथ ही लागत नियंत्रण के साथ निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने को कहा गया।

उत्कृष्ट सामग्री के इस्तेमाल पर जोर

सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित आवासों के निर्माण में केवल उत्कृष्ट श्रेणी की निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जाए। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के स्पेसिफिकेशन स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाएं। ठेकेदार के चयन के बाद सामग्री की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया। उन्होंने कार्ययोजना में आवश्यक डिजाइन संशोधन के भी निर्देश दिए। इसके तहत कैंप कार्यालय के क्षेत्रफल को कम करने और कैंप अटेंडेंट एरिया का क्षेत्रफल बढ़ाने को कहा गया। सचिव ने कहा कि सभी सुझावों और संशोधनों को शामिल करते हुए संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर जल्द शासन के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह की भी हुई समीक्षा

राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन नवी मुंबई के वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह की अद्यतन स्थिति को लेकर भी बुधवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सचिव राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में अतिथि गृह से संबंधित वर्तमान स्थिति और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रूहेला, संयुक्त सचिव सुरेंद्र सिंह रावत तथा लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार त्रिपाठी मौजूद रहे। अधिकारियों से राज्य अतिथि गृह की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी ली गई और आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। राज्य के बाहर स्थित सरकारी संपत्तियों के बेहतर रखरखाव और उनके प्रभावी उपयोग को लेकर विभाग की ओर से लगातार समीक्षा की जा रही है।

हल्द्वानी सर्किट हाउस में बढ़ेंगी सुविधाएं

जनपद नैनीताल के हल्द्वानी स्थित सर्किट हाउस के गेस्ट हाउस एवं गोदाम के विस्तारीकरण के तहत प्रथम तल पर अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की योजना पर भी बैठक में चर्चा की गई। सचिव राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव ने अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी को संबंधित व्यवस्थाधिकारी के साथ संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने के बाद आवश्यकताओं के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पूरे प्रकरण पर समयबद्ध तरीके से अग्रेतर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए, जिससे हल्द्वानी सर्किट हाउस में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार का कार्य जल्द आगे बढ़ सके।

गुणवत्ता और लागत नियंत्रण पर सरकार का फोकस

तीनों योजनाओं की समीक्षा में सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट नजर आई। एक ओर जहां सरकारी आवासों और अतिथि गृहों में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर जोर है, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों में लागत नियंत्रण और गुणवत्ता को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और सरकारी धन का अधिकतम उपयोग जनहित में किया जाए। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रूहेला, संयुक्त सचिव सुरेंद्र सिंह रावत तथा लोक निर्माण विभाग हल्द्वानी के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार उपस्थित रहे।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य संपत्ति विभाग के अंतर्गत आने वाली सभी परिसंपत्तियों और निर्माण योजनाओं में गुणवत्ता, लागत नियंत्रण और समयबद्धता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। टिहरी हाउस परिसर में प्रस्तावित आवासों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता की सामग्री के प्रयोग और प्रति वर्ग मीटर लागत को न्यूनतम रखने के निर्देश दिए गए हैं। डिजाइन में आवश्यक संशोधन कर संशोधित डीपीआर जल्द प्रस्तुत करने को कहा गया है। वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह और हल्द्वानी सर्किट हाउस की योजनाओं को भी आवश्यक निरीक्षण एवं कार्रवाई के साथ समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

सचिव आवास की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, निर्माण एजेंसियों को गुणवत्ता और समय से कार्य पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा के लिए बुधवार को सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। इसमें विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं, विकासकों, आवास विभाग तथा संबंधित अधिकारियों ने योजनाओं की वर्तमान स्थिति, निर्माण की प्रगति और लंबित कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत संचालित सभी परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। सचिव आवास ने कहा कि यह योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का माध्यम है। इसलिए प्रत्येक परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी कार्यदायी संस्थाओं और विकासकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 30 सितंबर 2026 तक सभी लंबित आवासीय परियोजनाओं का निर्माण हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी, लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी एजेंसियां निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करें और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा तकनीकी मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें।

6,464 आवासों का निर्माण पूरा

समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में अब तक 6,464 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इन आवासों के कब्जा हस्तांतरण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द अपने पक्के घरों की सौगात मिल सके। विभाग का लक्ष्य है कि सभी पूर्ण हो चुके आवासों का आवंटन और हस्तांतरण निर्धारित समय के भीतर संपन्न कराया जाए।

नियमित होगी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग

बैठक में लंबित परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष चर्चा की गई। सचिव आवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है, वहां निर्माण में तेजी लाई जाए और नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी तथा जहां भी किसी प्रकार की बाधा सामने आएगी, उसका तत्काल समाधान किया जाएगा ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि लाभार्थियों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्माण की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाए। सरकार का उद्देश्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, ष्हमारा लक्ष्य केवल निर्धारित संख्या में आवासों का निर्माण करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र परिवार को समय पर गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। सभी कार्यदायी संस्थाओं एवं विकासकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 30 सितंबर तक लंबित परियोजनाओं को हर हाल में पूरा करें। विभाग प्रत्येक परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग करेगा और किसी भी प्रकार की देरी या गुणवत्ता में कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि पात्र लाभार्थियों को शीघ्र उनके सपनों का अपना घर मिले और केंद्र एवं राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।ष्

बैठक में रहे उपस्थित

बैठक में संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह, उप सचिव आवास रजनीश जैन, अधिशासी अभियंता विनोद कुमार चौहान, सहायक अभियंता आकाश चौहान, आवास विशेषज्ञ रोहित रंजन, विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं एवं विकासकों के प्रतिनिधि तथा एचआरडीए और डीएलडीए के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी अधिकारियों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों पर आवास विभाग ने तेज की कार्रवाई, पार्किंग परियोजनाओं को मिली सैद्धान्तिक सहमति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात और पार्किंग की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जनपद चमोली के गैरसैंण और जनपद बागेश्वर के काण्डा में मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण परियोजनाओं को लेकर आवास विभाग ने विभागीय व्यय समिति की बैठकों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ आ राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठकों में दोनों परियोजनाओं के विस्तृत आगणनों पर चर्चा करते हुए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए अग्रेतर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बैठकों में आवास विभाग, वित्त विभाग, नियोजन विभाग, संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों तथा कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभाग का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से पर्वतीय नगरों में बढ़ते वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के साथ स्थानीय व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

गैरसैंण में 91 वाहनों की आधुनिक पार्किंग का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में गैरसैंण में मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण हेतु पेयजल निगम द्वारा ₹1504.35 लाख लागत का विस्तृत आगणन प्रस्तुत किया गया। प्रस्ताव के अनुसार भू-तल पर 36 कार पार्किंग, 7 दुकानें और 2 कार लिफ्ट का प्रावधान किया गया है, जबकि टेरेस पर 55 कार पार्किंग और 1 अतिरिक्त कार लिफ्ट प्रस्तावित है। इस प्रकार कुल 91 वाहनों की पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी। प्रस्ताव में बीआरसी/सीआरसी फैकल्टी हॉल और तीन क्लास रूम का भी प्रावधान रखा गया था। इस पर सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर राजेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आवास विभाग की जिम्मेदारी केवल पार्किंग निर्माण तक सीमित है और अन्य अतिरिक्त निर्माण प्रस्तावों को हटाकर मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप संशोधित प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना को व्यवहारिक और जनहितकारी स्वरूप में तेजी से आगे बढ़ाया जाए।

काण्डा में 53 वाहनों की पार्किंग सुविधा
बागेश्वर जनपद के काण्डा में प्रस्तावित मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना के संशोधित आगणन पर भी विभागीय व्यय समिति ने विस्तार से विचार किया। ₹540.85 लाख लागत की इस परियोजना में भूतल पर 7 दुकानें और 26 कार पार्किंग तथा प्रथम तल पर 27 कार पार्किंग प्रस्तावित की गई हैं। इसके अलावा शौचालय सुविधा का भी प्रावधान रखा गया है। इस प्रकार कुल 53 वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। बैठक में सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने निर्देश दिए कि पार्किंग का संचालन जिला विकास प्राधिकरण, बागेश्वर द्वारा किया जाए और दुकानों का आवंटन जिला स्तरीय समिति के माध्यम से पूर्ण पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए। विभागीय व्यय समिति ने परियोजना की अनुमोदित लागत पर सैद्धान्तिक सहमति प्रदान करते हुए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

पर्वतीय शहरों को मिलेगी राहत – डॉ आ राजेश कुमार
सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ आ राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मल्टीलेवल पार्किंग परियोजनाएं केवल वाहन खड़े करने की व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि यह स्थानीय बाजारों को व्यवस्थित करने, यातायात दबाव कम करने और पर्यटन गतिविधियों को गति देने का माध्यम भी बनेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।

आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्र में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार खत्म, एक हफ्ते में प्रस्ताव मांगे

राज्य में निर्माण गतिविधियों को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में सचिवालय में अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में तय किया गया कि राज्य के नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं के मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को उत्तराखण्ड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) की निर्माणाधीन वेबसाइट से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मानचित्र स्वीकृति प्राधिकारियों को पोर्टल में शामिल किया जाएगा, जिससे स्वीकृति प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। बैठक में रेरा सदस्य नरेश मठपाल, पंकज कुलश्रेष्ठ, एमडीडीए सचिव मोहन सिंह वर्निया, अपर जिलाधिकारी उत्तरकाशी मुक्ता मिश्रा, संयुक्त निदेशक पंचायती राज एमएस राणा, वरिष्ठ नगर एवं ग्राम नियोजक शशि मोहन श्रीवास्तव समेत विभिन्न प्राधिकरणों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। बैठक में रेरा से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और निर्माण स्वीकृति से संबंधित जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर पुनर्विचार के संकेत
बैठक में 1 अगस्त 2025 के शासनादेश के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बढ़ोतरी के मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई। वर्तमान प्रावधान के अनुसार, आवासीय या पर्यटन उपयोग में परिवर्तन पर सर्किल रेट के बराबर शुल्क तथा व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन पर 1.5 गुना शुल्क लिया जा रहा है अधिकारियों ने बताया कि बढ़े हुए शुल्क के कारण आम लोगों को मानचित्र स्वीकृति में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर आवास सचिव ने सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में इस विषय पर विचार कर एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि जनहित में राहत देने पर निर्णय लिया जा सके।

आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्र में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार समाप्त
बैठक में एक बड़ा निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया गया कि अब पंचायती राज संस्थाओं को अधिसूचित क्षेत्रों में नक्शा पास करने का अधिकार नहीं रहेगा। दरअसल, 2025 के संशोधित अधिनियम की धारा-59 के तहत पंचायती राज अधिनियम की धारा-106 को निरस्त कर दिया गया है। इसके चलते अब केवल विकास प्राधिकरण ही अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इस निर्णय के बाद आवास विभाग ने पंचायती राज विभाग को निर्देशित किया कि वे तत्काल प्रभाव से एक सर्कुलर जारी कर सभी जिला पंचायतों को इस नई व्यवस्था की जानकारी दें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

रेरा के जरिए कॉलोनियों पर कड़ी निगरानी
बैठक में यह भी तय किया गया कि विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित क्षेत्रों से बाहर भी यदि कहीं भूखंडों का उपविभाजन या कॉलोनी विकसित की जा रही है, तो वहां रेरा के माध्यम से सख्त निगरानी और विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्राधिकरणों और रेरा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अवैध कॉलोनियों और अनियोजित विकास पर रोक लगाई जा सके।

अवैध निर्माण रोकने के लिए बनेगा कॉमन ड्राफ्ट
राज्य में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर भी बैठक में चिंता जताई गई। स्थगित क्षेत्रों में कार्रवाई के दौरान आ रही दिक्कतों को देखते हुए आवास सचिव ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि अवैध निर्माण रोकने के लिए एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार किया जाए। यह ड्राफ्ट सभी प्राधिकरणों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करेगा, जिससे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सकेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इस ड्राफ्ट को जल्द से जल्द शासन को उपलब्ध कराया जाए।

ऑनलाइन सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता
बैठक के अंत में आवास सचिव ने कहा कि रेरा पोर्टल के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने और तय समयसीमा के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस बैठक के फैसलों से साफ है कि राज्य सरकार निर्माण क्षेत्र में सख्ती के साथ-साथ व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में इसका सीधा असर आम लोगों और रियल एस्टेट सेक्टर दोनों पर देखने को मिलेगा।

मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को रेरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा- डॉ. आर. राजेश कुमार
राज्य में निर्माण और विकास गतिविधियों को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। आज की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को रेरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी बन सके। इससे आम नागरिकों को अनावश्यक जटिलताओं से राहत मिलेगी और समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित होगी। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को लेकर प्राप्त फीडबैक के आधार पर सभी विकास प्राधिकरणों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि जनमानस को राहत देने के विकल्पों पर विचार किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति का अधिकार केवल प्राधिकरणों के पास होगा, जिससे एकरूपता बनी रहे। अवैध निर्माण और अनियमित कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रेरा और प्राधिकरणों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि विकास योजनाएं नियमों के अनुरूप हों और आम जनता को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था का लाभ मिल सके।

धामी सरकार की पहल, सर्किट हाउस एनेक्सी का होगा कायाकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व मुख्य सचिव के दिशा-निर्देशों में राज्य की अतिथि सुविधाओं को आधुनिक और आकर्षक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसी क्रम में गुरुवार को राज्य अतिथि गृह सर्किट हाउस एनेक्सी, देहरादून में नवीनीकरण कार्य को लेकर स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण की अध्यक्षता आवास व राज्य संपत्ति सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने की। इस दौरान उन्होंने नवीनीकरण की प्रस्तावित योजना का गहन अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

*लोकसंस्कृति के साथ विकसित होगा आधुनिक गेस्ट हाउस*
निरीक्षण के दौरान यह तय किया गया कि सर्किट हाउस एनेक्सी को केवल मरम्मत तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय के रूप में विकसित किया जाएगा। विशेष रूप से मीटिंग हॉल के संपूर्ण नवीनीकरण के साथ उसकी दीवारों पर राज्य की लोक संस्कृति को दर्शाने वाली पेंटिंग्स लगाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यहां आने वाले अतिथियों को प्रदेश की समृद्ध परंपरा की झलक मिल सके।

*पहले चरण में कमरों और डोरमैट्री का होगा कायाकल्प*
नवीनीकरण कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। प्रथम चरण में मुख्य भवन के कक्ष संख्या 1 से 12 तक (भूतल के 1 से 6 और प्रथम तल के 7 से 12) का कायाकल्प किया जाएगा। इसके साथ ही डोरमैट्री के भूतल पर स्थित कक्ष संख्या 19 से 22 तक के चार कमरों का भी नवीनीकरण किया जाएगा। इन कमरों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के साथ उनकी आंतरिक साज-सज्जा को भी बेहतर बनाया जाएगा।

*कोरिडोर लाइटिंग और लॉन क्षेत्र में खुलापन बढ़ाने के निर्देश*
आवास व राज्य संपत्ति सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कोरिडोर में बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि आवागमन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही डोरमैट्री के कक्षों से सटे लॉन क्षेत्र में खुलापन बढ़ाने के लिए बाउंड्री हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

*दूसरे चरण में विस्तार और नई सुविधाओं पर फोकस*
द्वितीय चरण में गेस्ट हाउस परिसर में उपलब्ध स्थान का उपयोग करते हुए इसके विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, गेस्ट हाउस में ठहरने वाले अतिथियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नए गद्दों की खरीद और प्रत्येक कक्ष में डीटीएच कनेक्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर अपर सचिव लक्ष्मण सिंह, मुख्य व्यवस्थाधिकारी आलोक सिंह चौहान, वरिष्ठ व्यवस्थाधिकारी पी.एल. शाह तथा पेयजल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश चंद्र तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आवास व राज्य संपत्ति सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य के अतिथि गृहों को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में कार्य तेजी से किया जा रहा है। सर्किट हाउस एनेक्सी का नवीनीकरण केवल संरचनात्मक सुधार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से सभी कक्षों का कायाकल्प किया जाएगा और अतिथियों को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, भविष्य में गेस्ट हाउस के विस्तार की भी योजना है, जिससे बढ़ती आवश्यकता को पूरा किया जा सके।

ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति, पीएम आवास योजना, लैण्ड पूलिंग स्कीम और डिकंजेशन पॉलिसी पर व्यापक समीक्षा: सचिव आवास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में सुनियोजित शहरी विकास, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीक आधारित सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में आवास विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में सचिव, आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने आज उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण तथा उत्तराखण्ड आवास एवं विकास परिषद के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।

सचिव आवास ने डिस्पेन्सरी रोड स्थित राजीव गांधी बहुउद्देशीय कॉम्प्लेक्स में संचालित उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, उत्तराखण्ड आवास एवं विकास परिषद, नगर नियोजन विभाग तथा रेरा कार्यालयों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालयों की कार्यप्रणाली, जनसुविधाओं, लंबित प्रकरणों और सेवा वितरण प्रणाली का गहन अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

*समीक्षा बैठक में समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर*
उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव आवास/मुख्य प्रशासक एवं आयुक्त के रूप में डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री के विज़न के अनुरूप योजनाओं का प्रभाव धरातल पर दिखाई देना चाहिए। विकास कार्यों में गति और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित की जानी चाहिए।

*‘ईज एप’ को और अधिक सरल व एकीकृत बनाने के निर्देश*
सचिव आवास ने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली ‘ईज एप’ का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि इस एप को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के साथ एकीकृत किया जाए ताकि पूरे राज्य में एक समान डिजिटल व्यवस्था लागू हो सके। उन्होंने नागरिकों की सुविधा के लिए चैटबॉट विकसित करने तथा एक सप्ताह के भीतर एप को और सरल एवं उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के सुझावों सहित विस्तृत प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

*लैण्ड पूलिंग एवं टाउन प्लानिंग स्कीम को प्राथमिकता*
डॉ. आर. राजेश कुमार ने लैण्ड पूलिंग स्कीम एवं टाउन प्लानिंग स्कीम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ऐसे क्षेत्रों का चिन्हीकरण करने के निर्देश दिए जहां इन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुनियोजित शहरी विस्तार के लिए इन योजनाओं का प्रभावी संचालन अत्यंत आवश्यक है।

*प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा*
प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए सचिव आवास ने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूर्ण की जाएं। उन्होंने अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। लाभार्थियों को ऋण प्राप्त करने में आ रही कठिनाइयों के समाधान हेतु बैंकर्स के साथ शीघ्र बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना से वंचित न रहे।

*पार्किंग परियोजनाओं और डिकंजेशन पॉलिसी पर सख्ती*
सचिव आवास ने पार्किंग परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए तथा पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं के संचालन की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने डिकंजेशन एंड रिडेवलपमेंट पॉलिसी को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत करने को कहा, ताकि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते यातायात दबाव और अव्यवस्थित निर्माण की समस्या का समाधान किया जा सके।

*जीआईएस आधारित महायोजनाओं पर जोर*
महायोजनाओं के निर्माण में अनिवार्य रूप से जीआईएस प्रणाली लागू करने तथा यूसेक के माध्यम से उसके सत्यापन के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से ही सुनियोजित और दीर्घकालिक विकास संभव है।

*लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश*
डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए और जनहित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने पारदर्शी, उत्तरदायी और समयबद्ध कार्यसंस्कृति अपनाने पर विशेष बल दिया।

*आलयम आवासीय योजना का स्थलीय निरीक्षण*
समीक्षा बैठक के उपरांत सचिव आवास ने सहस्त्रधारा रोड स्थित मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की आलयम आवासीय योजना का निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने तथा निर्माण गुणवत्ता एवं आधारभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर वित्त नियंत्रक परवीन कौर, संयुक्त सचिव गौरव कुमार चटवाल, वरिष्ठ नगर नियोजक शालू थिन्ड, अधीक्षण अभियन्ता राजन सिंह, अधिशासी अभियन्ता सुनील कुमार, प्रभारी अधिशासी अभियन्ता विनोद कुमार चौहान, कार्यक्रम प्रबंधक कैलाश चन्द्र पाण्डेय एवं पीएमयू के विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सचिव, आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड को सुनियोजित, सुव्यवस्थित और नागरिक-अनुकूल शहरी विकास का आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में विभाग पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की अवधारणा केवल आधारभूत संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शी प्रशासन, तकनीक आधारित सेवाएं और जनसुविधाओं का सुदृढ़ विस्तार भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। सभी विकास प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेही के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल सिस्टम, जीआईएस आधारित महायोजनाएं, ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति और आवासीय योजनाओं के माध्यम से आम नागरिकों को सरल एवं त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। विभाग का लक्ष्य है कि शहरीकरण संतुलित, पर्यावरण-संवेदनशील और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो।

सीएम के दिशा-निर्देशों में दून पीआरटी और मसूरी–नैनीताल रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी पर मंथन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना तथा मसूरी एवं नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन को लेकर मंगलवार को सचिवालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव, आवास, उत्तराखण्ड शासन डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। बैठक में उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूएमआरसी) सहित संबंधित विभागों एवं परामर्शदात्री संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत में प्रबंध निदेशक, उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी एवं नैनीताल शहर में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान परियोजनाओं के तकनीकी, सामाजिक, पर्यावरणीय एवं वित्तीय पहलुओं की जानकारी दी गई।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना को ईबीआरटीएस के फीडर सिस्टम के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के अंतर्गत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें क्लेमेंटाउन से बल्लूपुर चौक, पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तथा गांधी पार्क से आईटी पार्क तक के मार्ग शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना शहर में यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगी। बैठक में निगम द्वारा तैयार की गई डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर विस्तार से चर्चा की गई। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परियोजना की उपयोगिता को और अधिक स्पष्ट करने पर बल देते हुए निर्देश दिए कि डीपीआर में परियोजना की आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (ईआईए), सामाजिक प्रभाव तथा वित्तीय व्यवहार्यता को ठोस रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने आगामी समीक्षा बैठक में संशोधित डीपीआर के साथ पुनः प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश दिए।

आवास सचिव ने देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी कॉरिडोर के संरेखण का स्थलीय निरीक्षण किए जाने की भी इच्छा जताई, ताकि जमीनी स्तर पर परियोजना की व्यवहारिकता का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। इसके अतिरिक्त बैठक में मसूरी एवं नैनीताल शहरों में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक द्वारा अवगत कराया गया कि रोपवे परियोजनाएं पर्वतीय शहरों में यातायात जाम, पार्किंग समस्या एवं प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस पर आवास सचिव ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में रोपवे परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली समस्त भूमि का विस्तृत विवरण, स्वामित्व की स्थिति सहित तैयार करने तथा संबंधित विभागों से पत्राचार कर शीघ्र अग्रतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी पहलुओं का समयबद्ध समाधान परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है। बैठक में संयुक्त सचिव आवास धीरेंद्र कुमार सिंह, निदेशक (वित्त) संजीव मेहता, महाप्रबंधक (सिविल) संजय पाठक सहित उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अभियंता, मै. मैकेन्जी एवं मै. सिस्ट्रा के सलाहकार अधिकारी उपस्थित रहे।

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार शहरी परिवहन व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित कर रही है। देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी और नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इन परियोजनाओं से यातायात दबाव कम होगा, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं को पारदर्शी, व्यावहारिक और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।