जनसंवाद में सीएम बोले, प्रतिभागियों के सुझाव राज्य की नीतियों में होंगे शामिल, विकास यात्रा में जनता की सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने दो दिवसीय जनपद भ्रमण के प्रथम दिन गरुड़–बैजनाथ में आयोजित संवाद कार्यक्रम में प्रबुद्ध जनों, राज्य आंदोलनकारियों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं तथा विभिन्न एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से विस्तृत विचार-विमर्श किया।

मुख्यमंत्री ने प्रतिभागियों के सुझावों को राज्य के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए आश्वस्त किया कि इन्हें आगामी योजनाओं और नीतियों में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठन और एसोसिएशन समाज को नई दिशा देने वाले हैं और सरकार व जनता के बीच सशक्त सेतु का कार्य कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार निरंतर रोजगार सृजन पर कार्य कर रही है।

एसएचजी की पहल की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में लाखों बहनें ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और उनके उत्पादों की मांग देश-विदेश में बढ़ रही है। उन्होंने मातृशक्ति द्वारा विपरीत परिस्थितियों में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की।

मुख्यमंत्री ने एप्पल मिशन में सब्सिडी, होमस्टे योजना, कीवी एवं एप्पल मिशन की प्रगति को संतोषजनक बताते हुए कहा कि ये योजनाएँ रोजगार व स्वरोजगार सृजन में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जनपद के प्रमुख स्थान हेली सेवा से जोड़े जाएँ तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाया जाए।

उन्होंने इकोलॉजी–इकोनॉमी–टेक्नोलॉजी के समन्वय को राज्य के विकास की गति बढ़ाने का आधार बताया और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाला दशक उत्तराखंड का होगा, जिसमें मातृशक्ति की भूमिका निर्णायक रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उत्तराखंड की वेशभूषा और संस्कृति को निरंतर वैश्विक मंच पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। मानसखंड–केदारखंड सहित सभी धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार से राज्य में पर्यटन के नए आयाम स्थापित हुए हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने पर्यटक आवास गृह बैजनाथ में आयोजित मंथन एवं संवाद कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में प्रदेश विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में तीव्र गति से कार्य कर रहा है।

इस दौरान विधायक सुरेश गढ़िया एवं पार्वती दास, डीएम आकांक्षा कौंडे तथा समस्त जनप्रतिनिधि एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे |

उत्तराखंड के श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी मांग पूर्ण, टनकपुर से श्री नांदेड़ साहिब के लिए रेल सेवा शुरू

देवभूमि उत्तराखंड और सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। टनकपुर (उत्तराखंड) से तख्त श्री नांदेड़ साहिब (महाराष्ट्र) तक नई रेल सेवा की शुरुआत को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय से अब देश के प्रमुख पवित्र स्थलों में से एक नांदेड़ साहिब की यात्रा उत्तराखंड के हजारों श्रद्धालुओं के लिए और अधिक सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो सकेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वूपर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जी का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल उत्तराखंड के सिख समुदाय और श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है, बल्कि प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर से चलने वाली इस रेल सेवा से तराई क्षेत्र सहित पूरे उत्तराखंड के श्रद्धालुओं को सीधा लाभ मिलेगा। यह रेल संपर्क सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हुए उत्तराखंड को राष्ट्रव्यापी धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त रूप से स्थापित करेगा।

प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य के सर्वांगीण विकास हेतु सतत प्रयासरत है। नई रेल सुविधा उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करते हुए व्यापार, पर्यटन एवं सांस्कृतिक यात्राओं को भी प्रोत्साहित करेगी।

सैनिक कभी भी ‘भूतपूर्व’ नहीं होता, वह जीवनपर्यंत सैनिक ही रहता हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल कैंप मुख्यालय हल्द्वानी में आयोजित पूर्व अर्धसैनिक बलों के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि अर्धसैनिक बलों के वीर जवानों ने कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल तक हर मोर्चे पर अदम्य साहस, शौर्य और समर्पण के साथ देश की सेवा की है। तिरंगे की शान को बढ़ाने में इन वीर सपूतों का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने अर्द्धसैनिक बल के जवानों को वीरता, साहस और देश भक्ति का प्रतीक बताते हुए उन्हें राष्ट्र की शान बताया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अर्द्धसैनिक बलों के कल्याण के लिए घोषणा की कि भविष्य में प्रेजिडेन्ट पुलिस मेडल-गैलेन्ट्री वीरता पदक से अलंकृत होने वाले अर्द्धसैनिक को एकमुश्त 05 लाख रूपये की अनुदान राशि दी जायेगी, पूर्व अर्द्धसैनिक एवं अर्द्धसैनिक की वीर नारी, जिसके पास स्वयं की कोई अचल सम्पत्ति नहीं है, को उत्तराखण्ड राज्य में जीवनकाल में एक बार अचल सम्पत्ति क्रय किये जाने में स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी, उत्तराखण्ड राज्य अर्द्धसैनिक बल कल्याण परिषद् को क्रियाशील किया जायेगा और परिषद् के लिए पुलिस मुख्यालय में एक कार्यालय कक्ष आवंटित किया जायेगा, सैनिक कल्याण निदेशालय में उपनिदेशक (अर्द्धसैनिक) एवं बड़े जिलों के जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों में सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी (अर्द्धसैनिक) के एक-एक पद स्वीकृत किये जायेंगे, जिसमें पूर्व अर्द्धसैनिक संविदा में नियुक्त किये जायेंगे, जो अर्द्ध सैनिक बलों के बच्चे हैं, उनको शादी हेतु हमारे सैनिकों के भांति धनराशि प्रदान की जाएगी तथा मुख्यमंत्री ने सीजीएचएस भवन निर्माण हेतु तत्काल प्राथमिकता देते हुए भूमि चयन करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक कभी भी ‘भूतपूर्व’ नहीं होता, वह जीवनपर्यंत सैनिक ही रहता है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं एक सैनिक परिवार से आते हैं और सैनिकों व उनके परिवारों की चुनौतियों को नजदीक से समझते हैं। शहीदों की शहादत की कोई कीमत नहीं हो सकती और राज्य सरकार का दायित्व है कि उनके परिवारों को किसी प्रकार की कठिनाई न होने पाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अर्द्धसैनिक बलों और शहीदों के परिजनों के सम्मान हेतु अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया है। अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र से अलंकृत वीरों की पुरस्कार राशि एवं वार्षिक अनुदान में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। शहीदों की स्मृति में स्मारक एवं शहीद द्वार निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस वर्ष 10 वीर बलिदानियों की स्मृति में नए स्मारकों की स्वीकृति दी गई है। साथ ही शहीदों के परिजनों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने की व्यवस्था भी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सेना का आधुनिकरण तेजी से हुआ है। भारत आज रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनते हुए कई देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत के स्वदेशी हथियारों की क्षमता को विश्व स्तर पर सिद्ध किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध बसावट और अन्य गलत गतिविधियों के खिलाफ सरकार कड़े कदम उठा रही है। 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि कब्जामुक्त कराई गई है तथा 550 से अधिक अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। राज्य में समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-रोधी कानून और भू-कानून लागू कर सामाजिक समरसता एवं आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया गया है।

उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वीरभूमि भी है, और यहां की धरोहर, संस्कृति तथा परंपरा की रक्षा करना सभी का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु निरंतर दृढ़ता से कार्य कर रही है।

इस अवसर पर मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, विधायक राम सिंह कैड़ा, दायित्व धारी डॉ. अनिल डब्बू, शंकर कोरंगा, रेनू अधिकारी, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के डीआईजी शंकर दत्त पांडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ मंजूनाथ टीसी, पूर्व अर्धसैनिक संगठन उत्तराखंड के अध्यक्ष एस.एस. कोटियाल, सेवानिवृत्त आईजी एम.एल. वर्मा, एच.आर. सिंह, भानु प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

दिव्यांगजन दिव्यांग नहीं, समाज के दिव्य अंग हैंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर समाज कल्याण विभाग द्वारा हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार वितरण समारोह में दिव्यांगजन प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं मानपत्र प्रदान किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देहरादून में ₹905.13 लाख की लागत से बनने वाले आयुक्त दिव्यांगजन उत्तराखण्ड, उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड तथा समाज कल्याण आईटी सेल के बहुउद्देशीय कार्यालय भवन का शिलान्यास तथा प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र, नैनीताल (एलिम्को) का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने सभी दिव्यांगजनों को विश्व दिव्यांग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन असाधारण व्यक्तियों को सम्मान देने का अवसर है जिन्होंने चुनौतियों को अवसर और संघर्षों को प्रेरणा में बदलकर समाज को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि “दिव्यांगता शरीर में हो सकती है, लेकिन सपनों में नहीं”, और आज हमारे दिव्यांग भाई-बहन प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन दिव्यांग नही समाज के दिव्य अंग है।

उन्होंने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर, इंग्लिश चौनल पार करने वाले सत्येंद्र सिंह लोहिया तथा बिना हाथों के विश्व पैरा तीरंदाजी चौंपियन बनीं शीतल देवी जैसे प्रेरक उदाहरण साझा किए। मुख्यमंत्री ने हाल ही में भारत की दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम द्वारा कोलंबो में टी-20 ब्लाइंड वूमेन वर्ल्ड कप-2025 जीतने पर भी गर्व व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज केन्द्र और राज्य सरकार दोनों दिव्यांगजनों को समान अवसर और गरिमामय जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नए भवनों, अस्पतालों व बस अड्डों के निर्माण में दिव्यांगजन-अनुकूल व्यवस्थाएँ अनिवार्य की गई हैं। कई पुराने भवनों में भी सुगम्यता हेतु आवश्यक परिवर्तन किए गए हैं। साथ ही “कॉमन साइन लैंग्वेज” के प्रसार और दिव्यांगजन हितैषी स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन भी सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को ₹1500 मासिक पेंशन, दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को ₹700 मासिक भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली विशेष दिव्यांग पेंशन योजना व बौना पेंशन योजना के तहत ₹1200 मासिक पेंशन के साथ ही सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजनों के लिए क्षैतिज आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किये जाने, दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति तथा कृत्रिम अंगों हेतु ₹7000 अनुदान, दिव्यांग से विवाह करने पर ₹50,000 प्रोत्साहन राशि, दिव्यांग छात्रों के लिए सिविल सेवा परीक्षा की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराते हुए जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्रों के माध्यम से उन्हें सभी योजनाओं का एकीकृत लाभ प्रदान किया जा रहा है।

इसके साथ ही देहरादून स्थित आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था तथा ऊधमसिंह नगर में मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए पुनर्वास गृह का निर्माण किया गया है। देहरादून में राज्य का पहला “प्रधानमंत्री दिव्यांशा केंद्र” भी प्रारंभ किया गया है। राज्य गठन के बाद पहली बार दिव्यांग सर्वेक्षण भी प्रारंभ किया गया है, जिससे दिव्यांगजनों की वास्तविक संख्या व आवश्यकताओं का सही आकलन हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने राज्य के “यंग इनोवेटिव माइंड्स” से अपील की कि वे अपने आविष्कारों में दिव्यांगजनों की जरूरतों को विशेष स्थान दें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक विकसित कर दिव्यांगजनों के जीवन को और सुगम बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे युवाओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश भी दिए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा 41 प्रतिभाशाली दिव्यांगजनों को ₹8000 की पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं मानपत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने सभी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका मनोबल भी बढ़ाया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर गजराज बिष्ट, विधायक बंशीधर भगत, सरिता आर्या, राम सिंह कैड़ा, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अदांगी, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन उपस्थित रहे।

चंपावत दौरे के दौरान सीएस ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर सैनिकों को नमन, खिलाड़ियों को किया सम्मानित

अपने चम्पावत दौरे के दौरान उत्तराखण्ड शासन के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जिला सभागार परिसर में भूतपूर्व सैनिकों से भेंट कर सशस्त्र सेना झंडा दिवस के प्रति सम्मान प्रकट किया। मुख्य सचिव ने वीर सैनिकों के योगदान को नमन करते हुए फ्लैग लगाया।

इस अवसर पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल उमेद सिंह ने मुख्य सचिव को फ्लैग लगाकर उसकी महत्ता एवं इसके उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।

सशस्त्र सेना झंडा दिवस का उद्देश्य भारतीय सेना के सेवारत जवानों, शहीद सैनिकों, युद्ध अथवा ड्यूटी के दौरान घायल हुए सैनिकों तथा उनके आश्रित परिवारों के कल्याण, पुनर्वास और आर्थिक सहायता हेतु सहयोग जुटाना है। इस फंड के लिए धन संग्रह हेतु 07 दिसम्बर 1949 का दिन निर्धारित किया गया था, जिसके बाद से यह दिवस पूरे देश में समर्पण, कृतज्ञता और गौरव के साथ मनाया जाता है।

मुख्य सचिव ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे उन सैनिकों और उनके परिवारों का सहयोग करें जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए देशभक्ति और सामाजिक दायित्व निभाने का अवसर है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव ने कराटे खिलाड़ियों अनामिका विष्ट, अभिषेक कुवर, भावना अधिकारी, आरूष, अभीजित, प्रज्ञान साह, प्राची ओली, सांची मुरारी, जतीन जोशी सहित कोच दीपक सिंह को उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।

इस अवसर पर भूतपूर्व सैनिकों के साथ कुमाऊं मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव बर्द्धन का चम्पावत दौरा, विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा, प्रगति में तेजी के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के तहत एन०एच०पी०सी० बनबसा हेलीपैड पहुँचे, जहाँ कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।

एन०एच०पी०सी० सभागार बनबसा में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने चम्पावत जिले में संचालित महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की प्रगति का व्यापक आकलन किया।

बैठक में शारदा कॉरिडोर, इनलैण्ड पोर्ट अथॉरिटी, टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन, बाढ़ प्रबंधन कार्य, टनकपुर/बनबसा वाटर सप्लाई स्कीम, आई०एस०बी०टी टनकपुर निर्माण, तथा ब्रिडकुल द्वारा बनाए जा रहे पुलों सहित विभिन्न आधारभूत परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने शारदा रिवर फ्रंट एवं एडजॉइनिंग प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को और सुदृढ़ बनाने, पूर्णागिरि रोपवे को शारदा कॉरिडोर के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित समयसीमा में पूरा करने तथा रोपवे निर्माण कंपनी को प्रत्येक सप्ताह प्रगति रिपोर्ट जिलाधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने टनकपुर-बागेश्वर रेलवे लाइन के संदर्भ में चम्पावत और लोहाघाट के साथ-साथ अल्मोड़ा को जोड़ने हेतु विस्तृत एलाइमेंट तैयार करने के भी निर्देश दिए।

बाढ़ सुरक्षा कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को पारंपरिक तरीकों से हटकर कम लागत में प्रभावी प्रोटेक्शन मॉडल अपनाने के निर्देश दिए। साथ ही 5 करोड़ से कम लागत वाले कार्यों को मुख्यमंत्री घोषणा के माध्यम से अनुमोदित करवाकर त्वरित गति से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने डिप्टेश्वर और कुर्मू झील परियोजनाओं की प्रगति के साथ साथ टनकपुर और बनबसा वाटर सप्लाई योजनाओं, आईएसबीटी टनकपुर तथा ब्रिडकुल के पुलों की प्रगति में और तेजी लाने को भी कहा।

इस दौरान कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, एन०एच०पी०सी० पावर स्टेशन प्रमुख ऋषि रंजन आर्य, शारदा कॉरिडोर से सत्यजीत राय एवं राजीव रंजन, एनएचएआई के पीडी जोगेंद्र शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष टनकपुर विपिन कुमार, बनबसा अध्यक्ष रेखा देवी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

नैनीताल में ग्राम सौड़ से आए ग्रामीणों ने पंगोट देचौड़ी सड़क स्वीकृति देने पर किया मुख्यमंत्री का आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने नैनीताल प्रवास के दौरान प्रशासनिक अकादमी नैनीताल में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आई जनता से मुलाकात की व उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों को समस्याओं के निस्तारण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान ग्राम सौड़ से आए ग्रामीणों द्वारा पंगोट देचौड़ी सड़क स्वीकृति पर मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि काफी लंबे समय से उनकी सड़क निर्माण की जो मांग थी आज उनके द्वारा पूरी कर ली गई है, इससे क्षेत्र वासियों को सड़क सुविधा का लाभ प्राप्त होगा।

इस दौरान ग्रामीणों ने राजकीय इंटर कॉलेज सौड़ में अध्यापकों की तैनाती एवं भवन निर्माण की मांग भी मुख्यमंत्री के सम्मुख रखी। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए।

इस अवसर पर विधायक नैनीताल सरिता आर्या, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, आयुक्त कुमाऊं मंडल दीपक रावत, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊँ रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी सहित अनेक अधिकारी व जनप्रतिनिधि,जनता उपस्थित रही।

सीएम धामी फिर निकले मॉर्निंग वॉक पर, नैनीताल की सड़कों पर जो मिला, उससे की बात और लिया फीडबैक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नैनीताल में मॉर्निंग वॉक के दौरान आम नागरिकों, पर्यटकों एवं स्कूली बच्चों से मुलाकात की और सबके साथ आत्मीय वार्ता की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय चाय विक्रेता भरत की दुकान पर चाय का स्वाद भी लिया।

मुख्यमंत्री ने मानस खंड मिशन के अंतर्गत नैना देवी मंदिर परिसर में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों का निरीक्षण किया। बताया कि मंदिर को और अधिक भव्य व आकर्षक स्वरूप देने हेतु ₹11 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मिशन के अन्य विकास कार्योंकृडीएसए मैदान के सुधार, वलिया नाला, एवं ठंडी सड़क पर भूस्खलन सुरक्षा कार्योंकृकी भी जानकारी अधिकारियों से ली और संबंधित विभागों को इन सभी कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए।

इस दौरान जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट एवं जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टी.सी. और अन्य मौजूद रहे।

हल्द्वानी में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के आयोजन पर सीएम ने 17 करोड़ से अधिक की सहायता बांटी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज एम0बी0 इंटर कॉलेज, हल्द्वानी (जनपद नैनीताल) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के उपलक्ष्य में भव्य सहकारिता मेले में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पशुपालन एवं सब्जी उत्पादन में कार्यरत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मध्यकालीन दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता कल्याण योजना के तहत 16.97 करोड़ रुपये तथा एनआरएलएम स्वयं सहायता समूहों के अंतर्गत 75.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय ने गर्मजोशी से मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

मेले के शुभारंभ पर संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष और राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित यह मेला प्रदेश में सहकारिता आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि ‘सहकारिता से पर्यटन विकास’ थीम पर आधारित इस सात दिवसीय मेले में प्रदेश की सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और किसानों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को मंच मिलेगा। साथ ही ईको-आतिथ्य, ईको-पर्यटन, होमस्टे प्रबंधन, स्थानीय व्यंजन, कृषि एवं फल उत्पाद संवर्धन जैसे विषयों पर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और सहकारिता की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता मानव समाज का प्राचीन सिद्धांत है, जो सामूहिक प्रगति, सहयोग और एकता को बढ़ावा देता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 को “अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष” घोषित किया जाना सहकारिता की वैश्विक महत्ता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि देश में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया है, जो केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में अभूतपूर्व कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में सहकारिता को सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण की शुरुआत पूरे देश में पहली बार उत्तराखंड से हुई और आज सभी 671 समितियाँ पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से कार्यरत हैं। 24 समितियाँ जन औषधि केंद्रों के रूप में कार्य कर रही हैं तथा 640 समितियाँ कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित की गई हैं, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा, पेंशन, आधार तथा अन्य डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 5511 समितियों में से 3838 समितियों का डेटा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पर अपलोड किया जा चुका है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ी हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने फरवरी 2023 से अब तक 800 नई च्।ब्ै, 248 नई डेयरी समितियाँ और 116 मत्स्य समितियाँ गठित की हैं। मिलेट मिशन के अंतर्गत किसानों से मंडुवा की खरीद दर भी बढ़ाई गई है, जो इस वर्ष 48.86 रुपये प्रति किलो निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि “दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना” के तहत किसानों व स्वयं सहायता समूहों को पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, मत्स्य पालन एवं फ्लोरीकल्चर जैसे कार्यों हेतु 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण, तथा सहकारी समितियों के माध्यम से 1 लाख रुपये का ब्याज-मुक्त फसली ऋण प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की जमापूंजी होना जनता के भरोसे का प्रमाण है।

कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की स्वयं सहायता समूहों की बहनें आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं और यह गर्व का विषय है कि प्रदेश की 1 लाख 68 हजार से अधिक महिलाएँ आज “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता और पर्यटन आधारित आजीविका की दिशा में मेले में की जा रही पहलें स्थानीय समुदायों को नए अवसर प्रदान करेंगी।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने हल्द्वानी क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी में योग एवं आयुष अस्पताल, अंबेडकर पार्क, ओपन जिम जैसे अनेक जनकल्याणकारी कार्य किए गए हैं। हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में राजकीय कैंसर संस्थान का निर्माण तेज़ी से चल रहा है। उन्होंने कहा कि 792 करोड़ रुपये की रिंग रोड, हल्द्वानीदृलालकुआं बाईपास, नगर की सड़कों का सुधारीकरण, मल्टीस्टोरी पार्किंग निर्माण, वेस्ट मैनेजमेंट, लीगेसी वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट, पोलिनेटर पार्क और एस्ट्रो पार्क जैसे कार्य क्षेत्रीय विकास को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। इसके अतिरिक्त हल्द्वानी से विभिन्न जिलों तथा मुंबई के लिए रेल एवं हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान और डेमोग्राफी की सुरक्षा के प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रदेश में कठोर धर्मांतरण विरोधी एवं दंगा विरोधी कानून बनाए गए हैं। लैंड जिहाद, लव जिहाद जैसी अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि मुक्त कराई गई है, 250 अवैध मदरसों को सील किया गया है तथा मदरसा बोर्ड को समाप्त किया गया है। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन कालनेमि” के माध्यम से सनातन संस्कृति के विरुद्ध पाखंड फैलाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जा रही है। राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने से पिछले साढ़े चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाते हुए 200 से अधिक भ्रष्टाचारी जेल भेजे गए हैं।

मुख्यमंत्री ने अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वदेशी उत्पादों के उपयोग के लिए किए गए आह्वान का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग को जन आंदोलन का रूप देने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक दीवान सिंह बिष्ट, राम सिंह कैड़ा, दर्जाधारी मंत्री सुरेश भट्ट, बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएँ एवं स्थानीय उत्पादक उपस्थित रहे।

भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती पर नानकमत्ता कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम धामी, की सात घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नानकमत्ता में भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित जनजाति गौरव दिवस समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने 9.68 करोड़ की लागत के महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय नानकमत्ता का शिलान्यास व नगर निकाय श्री नानकमत्ता के 1 करोड़ की लागत से निर्मित भवन का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान 7 घोषणाएं की। जिसमें साधु नगर स्थित कैलाश नदी पर पुल, राय सिख भवन के लिए धनराशि अवमुक्त करने, नानकमत्ता बाँध को टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने, सनातन धर्म उत्थान समिति भवन एवं मन्दिर निर्माण के लिए धनराशि प्रदान करने, ज्ञानपुर से बरकीडण्डी-औदली से डोहरी- एस्था बी से देवीपुरा-गिधौर परसैनि-बैलपड़ाव को जोडने वाले सड़क मार्ग का डामरीकरण, पर्वतीय उत्त्थान समिति के अतिरिक्त कक्ष के लिए धनराशि उपलब्ध कराने व खटीमा के नवनिर्मित बस स्टैंड का नाम महाराणा प्रताप रखने की घोषणा शामिल हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान बिरसा मुण्डा की 150 वीं जयंती पर उन्हें नमन करते हुए सभी को जनजाति गौरव दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज का यह ऐतिहासिक दिन हमारे जनजाति समाज की गौरवशाली परम्परा, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र निर्माण के लिए उनके द्वारा दिए गए अद्वितीय योगदान को स्मरण करने का दिवस है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा जी जनजाति समाज के गौरव, साहस और स्वाभिमान के अमर प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा ने अल्प आयु में स्वतंत्रता, स्वाधिकार, आत्मसम्मान की ऐसी चेतना समाज में जागृत की जिसने पूरे जनजाति समाज को एकजुट कर नई दिशा प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुण्डा की जन्म जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने लगभग 200 करोड़ की लागत से देश भर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्राहलय बनवायें है, जिससे देश भर में आदिवासी संस्कृति और योगदान को सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि आज संथाल आदिवासी जनजाति की बेटी द्रोपदी मुर्मू हमारे देश की प्रथम नागरिक है। मोदी ने आदिवासी जनजाति समाज के विकास के लिए दिए जाने वाले बजट को भी तीन गुना बढ़ाकर आदिवासी समाज को सशक्त बनाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज को एकलव्य मॉडल स्कूल, प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान, वन-धन योजना, प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन, विभिन्न पशुपालन व कृषि संबंधित योजनाओं के माध्यम से समाज व विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का कार्य देश में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार भी आदिवासी जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए व उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड में 128 जनजाति गाँवों का चयन किया गया है। जिसके माध्यम से चयनित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास, आर्थिक सशक्तिकरण, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में 4 आवासीय एकलव्य विद्यालय, कालसी मेहरवाना बाजपुर व खटीमा में संचालित हो रहे है। जिससे जनजाति समुदाय के छात्रों को निशुल्क शिक्षा एवं हॉस्टल की सुविधा प्रदान की जा रही है। देहरादून के चकराता में और उधम सिंह नगर के बाजपुर में नये आवासीय विद्यालयों का निर्माण तेजी से चल रहा है। जनजाति समाज के बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के लिए उन्हें प्राइमरी स्तर से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक की छात्रवृत्ति भी प्रदान कर रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शैक्षिक उत्थान एवं विकास के लिए वर्तमान में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही जनजाति समाज के शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को तकनीकी शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रदेश में 3 आईटीआई कॉलेजों का संचालन किया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग व स्कॉलरशिप दी जा रही है। जनजाति समाज के बेटियों के विवाह के लिए 50 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जा रही है। जनजाति शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ का कोरप्रेस फंड भी बनाया गया है। जनजाति संस्कृति के संरक्षण हेतु प्रतिवर्ष राज्य जनजाति महोत्सव और खेल महोत्सव आयोजित किये जा रहे है।

इस अवसर पर विधायक गोपाल सिंह राणा, पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम सिंह टूरना, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा उपस्थित थे।