उत्तराखंड के 75 वीर सपूतों ने कारगिल युद्ध में दिया सर्वाेच्च बलिदान, देवभूमि को वीरभूमि बनाने में सैनिकों का महत्वपूर्ण योगदानः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय कारगिल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में आयोजित सैनिक सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, शहीदों के परिजनों तथा सैन्य विभूतियों का सम्मान किया। कार्यक्रम में देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजय कारगिल दिवस भारतीय सेना के अद्वितीय पराक्रम, अटूट संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति और अदम्य साहस का वह गौरवशाली अध्याय है, जो भारत के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जमा देने वाली ठंड, दुर्गम पहाड़ियों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और अद्भुत शौर्य का परिचय देते हुए देश की विजय सुनिश्चित की। कारगिल विजय हमारे वीर सैनिकों के सर्वाेच्च बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण की अमर गाथा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी वीरता और बलिदान की चर्चा होती है, देवभूमि उत्तराखंड का नाम गर्व के साथ लिया जाता है। प्रदेश के लगभग हर दूसरे घर का कोई न कोई सदस्य भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। इसी कारण उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया। इन अमर सपूतों का बलिदान प्रदेश और देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों का सम्मान और राष्ट्र की सुरक्षा राजनीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारतीय सेना का आत्मविश्वास, सामर्थ्य और आधुनिक क्षमता पूरी दुनिया देख रही है। भारत अब आतंकवादी हमलों के बाद केवल निंदा तक सीमित रहने वाला देश नहीं है, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से दुश्मन को निर्णायक जवाब देने वाला राष्ट्र है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों, पुलों और अन्य रणनीतिक आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। वन रैंक-वन पेंशन की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान और न्याय दिया गया है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण, रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि तथा सैनिकों के कल्याण से जुड़े अनेक निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा और सैनिकों का सम्मान केंद्र सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि बलिदानी सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की समय-सीमा को भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। शहीद परिवारों के लिए नौकरी-पूर्व प्रशिक्षण और पुत्री विवाह सहायता जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये किया गया है। देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के पांचवें धाम के रूप में निर्माणाधीन सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। यह सैन्य धाम देश के अमर बलिदानियों की वीरता और उत्तराखंड की सैन्य परंपरा की जीवंत गाथा बनेगा। इसके साथ ही खटीमा और टनकपुर के बीच भव्य सैन्य स्मारकन स्थापित करने का संकल्प भी लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सेवामुक्त अग्निवीरों की रोजगार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए देश के पहले अग्निवीर रोजगार सेल की स्थापना का निर्णय लिया गया है। पुलिस, वन विभाग तथा अन्य सरकारी सेवाओं में होने वाली भर्तियों में सेवामुक्त अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। स्वरोजगार के इच्छुक अग्निवीरों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों और सेवामुक्त अग्निवीरों को पर्वतीय क्षेत्रों में होमस्टे स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। सीमावर्ती गांवों में स्थानीय निवासियों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु विशेष सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस से संबंधित लंबे समय से चली आ रही मांग पर राज्य सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही जिला अदालतों में सैन्य परिवारों से संबंधित भूमि धोखाधड़ी के लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए भी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और बलिदानियों के आश्रितों के हितों की रक्षा के लिए अपने श्विकल्प रहित संकल्पश् के साथ निरंतर कार्य करती रहेगी।

कार्यक्रम में आयोजित कवि सम्मेलन के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य और कविता राष्ट्रप्रेम की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकरश् की ओजस्वी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, वीर सैनिक, पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, शहीदों के परिजन, सैन्य अधिकारी, सम्मानित कविगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रदेशवासी उपस्थित रहे।

सीएम ने समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाले राजस्थान को बताया वीरों की भूमि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड और वीरभूमि राजस्थान सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। उत्तराखंड ने आध्यात्मिक क्षेत्र में जहां दुनिया को एक नई राह दिखाने का कार्य किया है, वहीं राजस्थान की महान धरती की प्राचीनकाल से ही अपनी अद्धितीय सांस्कृतिक विरासत रही है। राजस्थान प्राचीन काल से ही वीर भूमि रही है। यहां के वीरों तथा वीरांगनाओं ने अपना सर कटा दिया पर शत्रुओं के सामने कभी सर नहीं झुकाया। उन्होंने कहा कि उनका भी राजस्थान की इस महान धरती से गहरा सम्बन्ध है, क्योंकि उनके पूर्वज भी राजस्थान से ही उत्तराखंड में आये थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सूरतगढ, श्री गंगानगऱ राजस्थान में सैनिक सम्मान समारोह कार्यक्रम में वीर सैनिकों के परिजनों को सम्मानित करते हुये कहा कि राजस्थान और उत्तराखंड, वीरों एवं बलिदानियों की भूमि है, ये बात हमारे सैनिकों ने अब तक हुए सभी युद्धों में सिद्ध की है। हमने हमेशा माना है कि देशभक्ति सभी प्रकार की भक्तियों में सर्वश्रेष्ठ है। वे स्वयं एक सैनिक पुत्र हैं, इसलिए जब भी वे इस प्रकार के कार्यक्रमों में सम्मिलित होते हैं तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। अपने पिता जी से सुनी सैन्य वीरों की गाथाओं ने उन्हें बचपन से ही बहुत प्रभावित किया और उनके अंदर राष्ट्र के प्रति संपूर्ण समर्पण की भावना को जागृत किया। उन्होंने कहा कि वीर सैनिकों एवं उनके परिजनों को सम्मानित कर वे स्वयं को सम्मानित अनुभव कर रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सैनिक की वीरता तथा उनके परिजनों का संघर्ष भी देखा है। एक सैनिक जीवन में संघर्ष के बावजूद दृढ़ता पूर्वक अपने देश के स्वाभिमान को बचाने के लिए हमेशा तत्पर रहता है। सैनिकों के प्रति हमारी सरकार का समर्पण किसी से छिपा हुआ नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश मजबूत हाथों में है। प्रधानमंत्री के प्रयासों से सेना ना केवल पहले से कहीं अधिक सक्षम और सशक्त हुई है बल्कि उसकी यश और कीर्ति पताका चारों ओर फहरा रही है। हमने दुश्मन को मात तो पहले भी दी है लेकिन अब हमारे सैनिक दुश्मन को उसके घर में घुस कर धूल चटाते हैं। चाहे पुलवामा हमले का बदला हो, बालाकोट एयर स्ट्राइक हो या गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के दांत खट्टे करना हो, हमारे सैनिकों ने दुश्मन को ये बता दिया कि मोदी जी जैसा राजनीतिक नेतृत्व हो तो वो किसी भी दुश्मन को उसकी माद में जाकर मात दे सकती है। सशस्त्र सेनाएं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तभी कर सकती हैं जब उनके पास अच्छे हथियार हों और उन्हें उम्दा प्रशिक्षण मिला हो। इससे सैनिकों का मनोबल तो बढ़ता ही है, वे चुनौतियों का सामना करके विजयी भी होते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आज भारत एक शक्तिशाली और सुरक्षित राष्ट्र बन चुका है। आज सम्पूर्ण विश्व भारत की शक्ति एवं सामर्थ्य से परिचित हुआ है, जिसका परिणाम है कि आज कोई भी दुश्मन हमें आंख दिखाने की हिम्मत नहीं कर सकता। आज देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों को दुश्मन की गोली का जवाब देने के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के पहले यूपीए सरकार की पॉलिसी पैरालिसिस ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया। आलम ये था कि 10 साल तक रक्षा समझौते तक ताक पर रख दिए गए थे। पूर्व की सरकारों में, सेना के आधुनिकीकरण की बात दूर, सेना के इस्तेमाल के लिए साजो-सामान की खरीददारी भी भारी पड़ती नजर आती थी। परन्तु जब से प्रधानमंत्री ने सेना को आधुनिक बनाने का मोर्चा संभाला है, फर्क साफ दिखता है। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से भी देखा जाए तो हमारी केंद्र सरकार के पिछले 9 वर्ष बेमिसाल रहे हैं। सेना के पास अब भारत में बने टैंक, मिसाइल और हैंड ग्रेनेड के साथ- साथ बड़े हथियार हैं जो आत्म निर्भर भारत के नारे को सफल बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने साठ साल से लंबित ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को पूरा कर पूर्व सैनिकों को राहत देने का कार्य किया। इसके साथ ही देश के लिए बलिदान देने वाले हमारे रण बांकुरो की याद में राजधानी दिल्ली में सबसे महत्वपूर्ण स्थान पर सैन्य धाम बना कर सम्मान दिया। ऐसा ही एक सैन्य धाम हम देहरादून में बना रहे है। हमारे यहां चार धाम है और ये सैन्य धाम हमारा पांचवा धाम कहलाएगा।इस सैन्य धाम में देश के लिए बलिदान देने वाले उत्तराखंड के करीब 1750 योद्धाओं के घर आंगन की मिट्टी लाकर उनके बलिदान का गौरवशाली इतिहास लिखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारी महान जनता के वोट की ताकत है जो आज प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में भारत शक्तिशाली देश बनकर उभर रहा है। आज भारत को जी-20 की अध्यक्षता मिलना भारतवासियों के लिए गर्व की बात है। दिल्ली में तीन दिवसीय जी-20 के सम्मेलन में भारत ने अपनी शक्ति और सामर्थ्य का परिचय संपूर्ण विश्व को कराया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में वह दिन अब दूर नहीं जब भारत पुनः विश्व गुरु के पद पर आरूढ़ होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हमारे वीर सैनिक मां भारती की आन, बान और शान को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए निरंतर इसी प्रकार देश की सेवा करते रहेंगे।