स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने परेड ग्राउंड में किया ध्वजारोहण

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुआ। इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया तथा फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 14 पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। जिसमें 7 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा के आधार पर एवं 6 को विशिष्ट कार्यों के आधार पर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रदर्शन करने वाले 13 खिलाड़ियों को भी मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों, वीर बलिदानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन किया। उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों, अर्धसैनिक बलों एवं पुलिस के बहादुर जवानों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले राज्य आंदोलनकारियों एवं शहीदों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक शीघ्र राहत पहुंचाना, घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना तथा जिन लोगों ने अपने घर एवं आजीविका खोई है, उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव सामग्री पहुंचाने के साथ क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, पेयजल एवं विद्युत लाइनों को शीघ्र दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक है। इस वर्ष देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तथा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इसी वर्ष संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती तथा सिक्ख पंथ के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष भी मनाया जा रहा है। उन्होंने विभाजन विभीषिका के दौरान अमानवीय यातनाएं झेलने, अपनों को खोने और विस्थापन का दर्द सहने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। देश विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, रक्षा उत्पादन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान, अनुसंधान, स्टार्टअप, खेल, योग एवं आयुर्वेद सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प देशवासियों के सामने रखा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ वीरभूमि भी है। राज्य सरकार अपने वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। बलिदानियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तथा परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई है। प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने के साथ सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री की माणा, आदि कैलाश, हर्षिल एवं मुखबा की यात्राओं तथा राष्ट्रीय खेलों में सहभागिता से उत्तराखंड को विकास, पर्यटन एवं खेल के क्षेत्र में नई दिशा मिली है। राज्य के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री ने आगामी 25 वर्षों के लिए उत्तराखंड के विकास का स्पष्ट विजन भी प्रदेशवासियों के सामने रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 में केदारनाथ की पावन धरती से प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा’ के मंत्र को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार ने वर्ष 2035 तक विकसित उत्तराखंड के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल एवं रोपवे कनेक्टिविटी के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे तथा विभिन्न रोपवे परियोजनाओं से राज्य की कनेक्टिविटी को नई गति मिली है। जमरानी, लखवाड़, किशाऊ एवं सौंग बांध परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना तीर्थ पुनर्विकास एवं शीतकालीन यात्रा जैसी पहलों से प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन एवं अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या 47 लाख के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुकी है, जबकि इस वर्ष कांवड़ मेले में 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र कांवड़ लेकर अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए। शीतकालीन यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ महापर्व में नया रिकॉर्ड बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अब धार्मिक पर्यटन के साथ वेलनेस, एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु एवं पर्यटक यहां से एक अनूठा अनुभव लेकर लौटे और राज्य का ब्रांड एंबेसेडर बने। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। इन्क्यूबेशन सेंटरों के साथ 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। होम-स्टे योजना एवं मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के माध्यम से भी युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में कक्षा 11वीं एवं 12वीं में अध्ययनरत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। प्रथम चरण में 10 हजार विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा तथा इसके लिए 7 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन से उत्तराखंड ने खेलों के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। स्पोर्ट्स लीगेसी प्लान के अंतर्गत 8 शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित की जाएंगी। महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के साथ खेल विश्वविद्यालय के निर्माण पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण, औद्यानिकी, विज्ञान एवं नवाचार तथा सुशासन के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत प्रदेश की 3 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को 3 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण, कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी तथा निःशुल्क नहर सिंचाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की गई है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है। साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर एवं स्टैम लैब्स जैसी पहलें राज्य में विज्ञान एवं तकनीक को बढ़ावा दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है तथा प्रतिव्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। पिछले पांच वर्षों में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं तथा स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1,750 हो गई है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों के इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन सूचकांक एवं इंडिया इनोवेशन इंडेक्स में हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी प्राप्त हुई है। उत्तराखंड को लगातार चार वर्षों से ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का गौरव भी प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता, सख्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून एवं नकल विरोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी मिली है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां विकास के साथ विरासत, रोजगार के साथ पलायन का समाधान, आधुनिकता के साथ संस्कृति और पहचान की मजबूती सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने की सात महत्वपूर्ण घोषणाएं

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण से जुड़ी सात महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं –

’’1.’’ चमोली, पौड़ी एवं अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।

’’2.’’ प्रदेश के प्रथम ‘युवा आयोग’ की स्थापना की जाएगी।

’’3.’’ सीमावर्ती ग्रामों के युवाओं, भूतपूर्व सैनिकों एवं अग्निवीरों को स्वरोजगार एवं उद्यम स्थापित करने के लिए अतिरिक्त सहायता एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा।

’’4.’’ वर्ग-3 एवं वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण की समय-सीमा का विस्तार कर भूमिधरी अधिकार दिए जाएंगे।

’’5.’’ प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत राज्यांश 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये किया जाएगा।

’’6.’’ 18 से 30 वर्ष के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन योजना शुरू की जाएगी। आईआईटी एवं आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से निःशुल्क उद्यमिता एवं कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण की 30 प्रतिशत राशि सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दी जाएगी।

’’7.’’ प्रदेश के बहादुर बच्चों को सम्मानित करने के लिए इस वर्ष से ‘बाल वीरता पुरस्कार’ प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों का विश्वास सरकार के लिए राजनीतिक समर्थन मात्र नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा, प्रतिबद्धता एवं समर्पण के साथ कार्य करती रहेगी।

योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगाः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज अल्पसंख्यक मोर्चा महानगर, देहरादून द्वारा आयोजित ‘लाभार्थी सम्मेलन’ में प्रतिभाग करते हुए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित लाभार्थियों ने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलावों, आर्थिक सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वरोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि सरकार की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास है तथा यही विश्वास जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की ऐसी कार्यसंस्कृति स्थापित हुई है जिसमें योजनाओं का लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंच रहा है। डबल इंजन सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराना और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों तक विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी निर्णय लेते हुए उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और प्रतिस्पर्धी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानती है और प्रत्येक बच्चे को बेहतर भविष्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड इस ऐतिहासिक कानून को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समान नागरिक संहिता सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और समान अवसर की भावना को मजबूत करती है तथा राज्य के सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित करने का कार्य करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय वृद्धि, गरीब परिवारों के उत्थान, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, आवास, पेयजल, सड़क, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में प्रभावी कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने लाभार्थियों से आह्वान किया कि वे सरकार की योजनाओं की जानकारी समाज के अन्य पात्र लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक परिवार इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता के सुझावों और अनुभवों के आधार पर योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास कर रही है।

कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा अन्य राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं से प्राप्त लाभ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। अनेक लाभार्थियों ने बताया कि सरकारी योजनाओं ने उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है तथा उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक विनोद चमोली, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं दायित्वधारी दिनेश अग्रवाल, देहरादून नगर निगम के महापौर सौरभ थपलियाल, अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारीगण, जनप्रतिनिधि, पार्टी के सम्मानित कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में लाभार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सीएम का देश-विदेश में बसे उत्तराखंडवासियों से विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में निरंतर सहयोग का किया आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुंबई में आयोजित प्रवासी उत्तराखंडवासियों के भव्य सम्मेलन में प्रदेश और देश-विदेश में बसे उत्तराखंड मूल के लोगों के साथ आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यसेवक के रूप में पिछले पाँच वर्षों की विकास यात्रा, जनसेवा के संकल्प तथा विकसित उत्तराखंड के विजन को साझा करते हुए प्रवासी समाज को राज्य के विकास का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक राजधानी मुंबई में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को जीवंत बनाए रखने वाले प्रवासी उत्तराखंडवासियों के बीच उपस्थित होकर उन्हें विशेष आत्मीयता और गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी चाहे कितनी भी हो, उत्तराखंड और उसके प्रवासी परिवारों के बीच भावनात्मक संबंध सदैव अटूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडवासी अपनी मेहनत, संस्कार, उपलब्धियों और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से देश-दुनिया में राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं तथा वे वास्तव में उत्तराखंड के सांस्कृतिक दूत और सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्रति प्रवासी समाज का स्नेह, समर्पण और जुड़ाव राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि से यह भावनात्मक संबंध नई पीढ़ी को भी उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़े रखने का कार्य कर रहा है। उन्होंने इस अवसर पर सभी प्रवासी संगठनों और उपस्थित उत्तराखंडवासियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रवासी उत्तराखंडवासियों की प्रतिभा, अनुभव और विशेषज्ञता को उत्तराखंड के विकास से जोड़ने के उद्देश्य से प्रवासी उत्तराखंड परिषद का गठन किया है। इसके माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले उत्तराखंडवासी राज्य की विकास योजनाओं, निवेश, नवाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रवासी समाज के सुझावों और अनुभवों को विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार मानती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के दौरान भी प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने सदैव आगे बढ़कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के आह्वान पर अब तक देश-विदेश में रह रहे 27 प्रवासियों ने उत्तराखंड के 29 गांवों को गोद लिया है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सकारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मुंबई में रहने वाली प्रख्यात अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी द्वारा अपने पैतृक गांव को गोद लेने के निर्णय की सराहना करते हुए इसे मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और देवभूमि के देवी-देवताओं के आशीर्वाद से उत्तराखंड आज विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण सहित सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि एक जनपद-दो उत्पाद, हाउस ऑफ हिमालयाज, स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, होम-स्टे योजना, वेड इन उत्तराखंड, लखपति दीदी, सौर स्वरोजगार योजना सहित अनेक पहलों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में श्अचीवर्सश् तथा स्टार्टअप रैंकिंग में श्लीडर्सश् श्रेणी में स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी आई है तथा जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों, शीतकालीन यात्रा और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे आयोजनों ने उत्तराखंड की वैश्विक पहचान को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से राज्य को 3.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था में निरंतर वृद्धि हुई है, प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है तथा उद्योगों और स्टार्टअप्स की संख्या में भी निरंतर विस्तार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन आधारित नीतियों के सकारात्मक परिणामस्वरूप प्रदेश में होटल और होम-स्टे की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा रिवर्स पलायन को भी नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी रोजगार के लिए गांव छोड़ने को विवश थे, वे अब नए अवसरों के साथ अपनी मातृभूमि लौट रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और जनसांख्यिकीय संतुलन के संरक्षण के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के माध्यम से सुशासन को और अधिक मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां पहाड़ का पानी और जवानी प्रदेश के विकास में ही योगदान दें तथा किसी भी युवा को मजबूरी में पलायन न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गांव, आधुनिक सुविधाएं, बेहतर शिक्षा, रोजगार और मजबूत आधारभूत संरचना के माध्यम से उत्तराखंड को देश का अग्रणी और विकसित राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने देश-विदेश में बसे सभी प्रवासी उत्तराखंडवासियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, अनुभव, निवेश, नवाचार और सामाजिक योगदान के माध्यम से उत्तराखंड के विकास में इसी प्रकार सक्रिय भागीदारी निभाते रहें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और प्रवासी समाज के साझा प्रयासों से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने का संकल्प अवश्य साकार होगा।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आत्मीय स्वागत करते हुए राज्य सरकार की विकास यात्रा, जनहितकारी निर्णयों तथा उत्तराखंड को नई पहचान दिलाने के प्रयासों पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी राज्य के विकास और जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंड संगठनों के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, उद्योग जगत से जुड़े प्रवासी उत्तराखंडवासी तथा बड़ी संख्या में मुंबई एवं आसपास के क्षेत्रों में निवासरत प्रवासी उत्तराखंडवासी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में अब विकसित भारत जी राम जी योजना हुई आरंभ

ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य में महात्मा गांधी नरेगा योजना के स्थान पर विकसित भारत – जी राम जी योजना दिनांक 1 जुलाई 2026 से प्रारम्भ कर दी गई है। योजनान्तर्गत अकुशल श्रमिकों को वित्तीय वर्ष में 125 दिन का श्रम रोजगार दिये जाने का प्राविधान है। योजनान्तर्गत 318 कार्य अनुमन्य कार्यों की सूची में सम्मिलित किये गये हैं जिसमें जल संरक्षण के 107, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना के 88, ग्रामीण आजीविका के 86 एवं आपदा न्यूनीकरण के 37 कार्य हैं। भारत सरकार द्वारा दिनांक 1 जुलाई 2026 से राज्य हेतु रु. 300/- प्रतिदिन मजदूरी दर निर्धारित की गई है।

इस संबंध में सचिव ग्राम्य विकास श्री धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्रदेश में 91.57 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों की ई0-के0वाई0सी0 की जा चुकी है। शेष सभी जॉब कार्ड धारक परिवारों/श्रमिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्बन्धित ग्राम पंचायत/विकासखण्ड कार्यालय में एक सप्ताह के भीतर उपस्थित होकर ई0-के0वाई0सी0 करवा लें ताकि योजनान्तर्गत आसानी से अकुशल श्रम रोजगार प्राप्त हो सके। महात्मा गांधी नरेगान्तर्गत जिन सक्रिय श्रमिकों की ई0-के0वाई0सी0 की जा चुकी है उनके जॉब कार्ड विकसित भारत – जी राम जी योजनान्तर्गत ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड बनने तक वैध रहेंगे।

उन्होंने बताया कि राज्य में महात्मा गांधी नरेगान्तर्गत वर्तमान में गतिमान कार्यों को विकसित भारत – जी राम जी योजना में अनुमन्य कार्यों के आधार पर समाहित किया जायेगा। इसके लिये समस्त ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास हेतु जनपद स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा।

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत सर्वेक्षण सूची को दिया जा रहा अन्तिम रूप सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल ने जानकारी दी है कि राज्य में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में समस्त ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत पीएमएवाई-जी 2.0 सर्वेक्षण सूची का अन्तिमीकरण किए जाने हेतु ग्राम सभा की खुली बैठकें आयोजित करायी जा रही है, जिसकी अन्तिम तिथि 10 जुलाई, 2026 ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित की गयी है। उक्त बैठकों में सर्वेक्षण में चिन्हित लाभार्थियों की पात्रता का निर्धारण सम्बन्धित ग्राम सभा द्वारा किया जा रहा है। साथ ही यदि ग्राम सभा की खुली बैठक में किसी पात्र व्यक्ति/परिवार के सर्वे से वंचित/छूटने का प्रकरण संज्ञान में आने पर विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों द्वारा वंचित/छूटे परिवारों की सूची जनपद को प्रेषित की जाएगी। जनपदों द्वारा उक्त सूची दिनांक 06 जुलाई, 2026 तक शासन को प्रेषित की जानी है, ताकि उक्त सूची ससमय आवश्यक कार्यवाही हेतु भारत सरकार को प्रेषित की जा सकें।

आस्था पर प्रहार नहीं सहेंगे: चारधाम यात्रा पर अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा

पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की चार धाम यात्रा सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा यात्री सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, ट्रैफिक प्रबंधन, आपदा सुरक्षा एवं डिजिटल मॉनीटरिंग को सुदृढ़ करते हुए प्रत्येक श्रद्धालु को सुगम एवं व्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चार धाम यात्रा के संबंध में भ्रामक, अपुष्ट एवं तथ्यहीन वीडियो/सामग्री प्रसारित कर आम जनमानस को भ्रमित करने तथा राज्य की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। जनपद रुद्रप्रयाग में सोशल मीडिया मॉनीटरिंग के दौरान एक ऐसा वीडियो संज्ञान में आया, जिसमें केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित किए जाने संबंधी गलत जानकारी प्रसारित की जा रही थी।

उक्त प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए थाना सोनप्रयाग में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। मामले की जांच प्रचलित है। साथ ही, ऐसे अन्य 4–5 संदिग्ध वीडियो भी चिन्हित किए गए हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है और उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

चार धाम यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाएं पूर्णतः सुचारू हैं और श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन कराए जा रहे हैं।

किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, अफवाह या दुष्प्रचार को शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) के तहत लिया जाएगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की 24×7 निगरानी की जा रही है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तराखंड की आस्था, श्रद्धा एवं चार धाम यात्रा की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेशवासियों, श्रद्धालुओं एवं सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की जाती है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करें तथा किसी भी अपुष्ट, भ्रामक या संदिग्ध सामग्री को साझा करने से बचें।

पीएम मोदी ने दी संत रविदास को सच्ची श्रद्धांजलि, आदमपुर हवाई अड्डे का नाम अब संत रविदास के नाम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आदमपुर हवाई अड्डे का नाम संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के नाम पर समर्पित किया जाना, उनके महान विचारों, सामाजिक चेतना और मानवता के प्रति समर्पण को सच्ची श्रद्धांजलि है। संत रविदास की जयंती के पावन अवसर पर लिया गया यह निर्णय न केवल अत्यंत सराहनीय है, बल्कि सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से समानता, करुणा, सेवा और मानव मात्र के सम्मान का जो संदेश दिया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने भेदभाव, ऊँच-नीच और असमानता के विरुद्ध आवाज़ उठाकर एक समतामूलक समाज की परिकल्पना प्रस्तुत की, जो आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है।

सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महापुरुषों और संतों के विचारों को सम्मान देने की परंपरा निरंतर सशक्त हो रही है। आदमपुर हवाई अड्डे को संत गुरु रविदास महाराज जी के नाम से जोड़ना, उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि संत रविदास जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज समरसता, सद्भाव और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को बधाई देने नई दिल्ली पहुंचे सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भेंट कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की हुई समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में ऋषिकेश बाईपास, अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग, ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग और अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग के निर्माण से संबंधित प्रस्तावों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित राज्य के अनेक महत्वपूर्ण मामलों को प्रमुखता से उठाते हुए राज्य के प्रस्तावों को स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया।

बैठक में राज्य की प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं पर हुई चर्चा में बताया गया कि ऋषिकेश बाईपास परियोजना-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 के अंतर्गत तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किमी लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है। जिसकी अनुमानित लागत 1161.27 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के अंतर्गत 4.876 किमी लंबाई में तीन हाथी कॉरिडोर हेतु एलिवेटेड मार्ग, चन्द्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा सेतु तथा रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपये की लागत से 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित किया गया है। जिससे नेपाली फार्म से ऋषिकेश नटराज चौक तक यातायात निर्बाध हो सकेगा। अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309बी के 76 किमी लंबाई वाले हिस्से में 988 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो लेन चौड़ीकरण का प्रस्ताव किया गया है।
ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-109 के अंतर्गत 235 किमी लंबाई में दो लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्ताव है।
अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309ए के अंतर्गत पैकेज 1, 2 और 5 में कुल 84.04 किमी लंबाई में 1001.99 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं। काण्डा से बागेश्वर खंड (पैकेज-02) के लिए वनभूमि हस्तांतरण प्रस्ताव पर भारत सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सड़क अवसंरचना को विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। उत्तराखण्ड की सड़कें केवल तीर्थाटन और पर्यटन को ही नहीं, बल्कि उद्योग, सीमावर्ती सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही हैं। यह परिवर्तन केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेतृत्व और स्पष्ट विज़न का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सतत प्रयासों से उत्तराखण्ड सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य उन्मुख सड़क नेटवर्क के साथ विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

चारधाम यात्रा को सुगम, सुलभ एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 12,769 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है। उत्तराखण्ड में कुल 3,723 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क राज्य को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ रहा है। इनमें से लगभग 597 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई द्वारा डिज़ाइन एवं क्रियान्वित किए गए हैं, जिनमें से 336 किलोमीटर से अधिक परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। लगभग 193 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसकी अनुमानित लागत 15,890 रुपये करोड़ से अधिक है। इन परियोजनाओं के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और काठगोदाम जैसे धार्मिक, शहरी और औद्योगिक केंद्रों को चौड़ी, सुरक्षित एवं सुगम सड़कों से जोड़ा गया है। काशीपुर-सितारगंज (77 किमी), रुद्रपुर-काठगोदाम (50 किमी) तथा हरिद्वार-नगीना (67 किमी) जैसे चार-लेन कॉरिडोर से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर-देहरादून खंड में लगभग 30 किमी लंबा छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किमी लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास (12 किमी, 716 करोड़ रुपये) और हरिद्वार बाईपास (15 किमी, 1,603 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव में कमी लाने में प्रभावी सिद्ध होंगे। भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को 4 किमी लंबाई और 366 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं रुद्रपुर-काशीपुर बाईपास तथा हरिद्वार से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ रहे हैं।

सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में ब्लैक स्पॉट सुधार, क्रिटिकल जंक्शनों पर एक्सेस कंट्रोल, प्रभावी साइनेज और आधुनिक रोड सेफ्टी उपाय लागू किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ऑपरेशन और मेंटेनेंस परियोजनाओं के माध्यम से सड़कों को वर्षभर सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मसूरी-देहरादून कनेक्टिविटी (40 किमी, 4,000 करोड़ रुपये), हरिद्वार-हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर (197 किमी, 10,000 करोड़ रुपये), ऋषिकेश बाईपास (13 किमी, 1,200 करोड़ रुपये), देहरादून रिंग रोड तथा लालकुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास जैसी परियोजनाएं तैयारी एवं डीपीआर चरण में हैं। इनसे गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की आपसी कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी। पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में एलिवेटेड रोड, वाइल्डलाइफ अंडरपास और न्यूनतम भूमि उपयोग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सिविल कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस प्रतिशत सिविल कार्य में सुरंग के बीचों-बीच दीवार निर्माण का काम पांच-छह माह में पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल कार्य शुरू किया जाएगा। मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर समुचित कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में गतिमान परियोजनाओं को गुणवत्ता बनाए रखते हुए तेज गति से निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण किया जाए।

बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आयुष्मान योजना के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 17 लाख से अधिक मरीजों का 3300 करोड़ रुपये से अधिक का हुआ कैशलेस उपचार: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 142 असिस्टेंट प्रोफेसर्स को नियुक्ति पत्र वितरित किए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नव नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये अवसर चिकित्सा के क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने सभी से आग्रह करते हुए कहा कि सभी अपने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ उनके भीतर संवेदनशीलता, सहानुभूति और सेवा की भावना भी विकसित करें। जिससे वे कुशल और दक्ष चिकित्सक बनने के साथ समाज के प्रति अपने कर्तव्यों और मानवता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को भी पूरी ईमानदारी से निभाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार, प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर निरंतर कार्य कर रही है। राज्य के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय सुविधाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक करीब 61 लाख आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए हैं। जिसके माध्यम से प्रदेश के लगभग 17 लाख से अधिक मरीजों का 3300 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित कर रही है। जिससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों को उनके जिले में ही आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इनमें से पाँच मेडिकल कॉलेज पहले से ही संचालित किए जा चुके हैं, जबकि दो और मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग भी स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा हल्द्वानी में राज्य के प्रथम आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। साथ ही हेली एंबुलेंस, आपातकालीन परिस्थितियों में सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है। राज्य में मरीजों को पैथोलॉजिकल जांचों की भी निःशुल्क सुविधा प्रदान की जा रही है। टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दूरदराज के गाँवों में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा परामर्श सुविधा भी प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की कमी को दूर किया जा रहा है। 142 असिस्टेंट प्रोफेसरों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर रहे हैं, साथ ही 356 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी गतिमान है। 1248 नर्सिंग अधिकारियों और 170 टैक्नीशियनों को भी नियुक्तियां प्रदान की गई है और करीब 600 नर्सिंग अधिकारियों की चयन प्रक्रिया भी गतिमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहले भर्तियों में भारी पक्षपात, धांधली और भ्रष्टाचार हुआ करता था। हमने, राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। आज सभी चयन प्रक्रियाएँ मेरिट के आधार पर सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों को उनके कौशल और परिश्रम का पूरा लाभ मिल रहा है। अब तक प्रदेश के लगभग 27 हजार युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा जहां भी पद रिक्त हैं, उन्हें जल्द से जल्द आयोग के माध्यम से भरा जायेगा।

कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि आज मेडिकल कॉलेज में 62 प्रतिशत परमानेंट फैकल्टी हैं। भविष्य में ये संख्या और बढ़ने वाली है। उन्होंने कहा पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज का काम 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। अगले सत्र से दोनों मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएंगे। राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 625 बच्चे एमबीबीएस और 256 बच्चे पीजी कर रहे हैं। राज्य में करीब 100 कॉलेज हैं, जिसमें से 14 हजार बच्चे हर साल नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा हाल ही में नियुक्त हुए 3000 नर्सिंग स्टाफ में 100 प्रतिशत लोग उत्तराखंड राज्य के हैं। उन्होंने कहा राज्य में 32 लाख लोगों की निःशुल्क जांच, 350 लोगों को एयर एम्बुलेंस से हाइय सेंटर रेफर किया गया है।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, विधायक खजान दास, सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अजय आर्य एवं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य मौजूद थे।

सीएम धामी ने जीएसटी बचत उत्सव के तहत विभिन्न दुकानों का किया भ्रमण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में जीएसटी बचत उत्सव के तहत विभिन्न दुकानों का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने व्यवसायियों से बातचीत भी की। मुख्यमंत्री ने जीएसटी की नई दरों के लागू होने पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया तथा इस ऐतिहासिक निर्णय को जनता के हित में बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी स्लैब में व्यापक सुधार किए गए हैं। नई दरों की वजह से प्रदेश के लाखों परिवारों और छोटे व्यापारियों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने व्यापारियों व दुकानदारों से मिलकर फीडबैक प्राप्त किया और सभी से घटे हुए जीएसटी का लाभ आमजन तक पहुंचाने के लिए आग्रह किया। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत अभियान में भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी जागरूकता के लिए प्रदेश में यह अभियान 29 सितम्बर तक चलाया जाएगा, जिसमें मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों की सहभागिता रहेगी। उन्होंने कहा अधिक से अधिक लोग नए जीएसटी स्लैब के फायदे समझें और इसका लाभ उठा सकें, इसके लिए स्थान-स्थान पर जानकारी साझा की जाएगी।

राजपुर रोड में भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहार सीजन से पहले जीएसटी की नई दरें लागू होने से लोगों की बचत बढ़ेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय देशवासियों के हित के लिए ऐतिहासिक व क्रांतिकारी सिद्ध होगा।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, राज्य मंत्री विनय रुहेला, भाजपा के महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल मौजूद थे।