सीएम ने अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर किया नमन, जीवन पर डाला प्रकाश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में त्याग, सेवा और समर्पण की प्रतिमूर्ति अहिल्याबाई होल्कर को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने करुणा, सेवा और धर्मनिष्ठा से भारतीय इतिहास में अद्वितीय स्थान प्राप्त किया। उन्होंने शासन को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा, न्याय और धर्म की पुनर्स्थापना का साधन बनाया। उन्होंने काशी विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ, द्वारका से लेकर रामेश्वरम्, अयोध्या और मथुरा के साथ ही हमारी देवभूमि के बद्रीनाथ, केदारनाथ और हरिद्वार में मंदिरों और घाटों का जीर्णाेद्वार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई धर्मशालाओं और रास्तों के निर्माण के साथ ही जनसेवा के अनेक कार्य कराएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर ने भारत में धर्मस्थलों का पुनर्निर्माण कर भारत की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उन्होंने संपूर्ण भारत की सनातन संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। उन्होंने उस कालखंड में नारी सशक्तिकरण की ऐसी अनुपम मिसाल प्रस्तुत की, जिसकी कल्पना कर पाना भी उस समय कठिन था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। वर्षों तक उपेक्षित रहे हमारे गौरवशाली इतिहास, महान राष्ट्रनायकों के योगदान और सांस्कृतिक विरासत को आज न केवल पुनर्स्थापित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय चेतना का आधार भी बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारी सनातन संस्कृति की पताका संपूर्ण विश्व में गर्व से लहरा रही है। भारत पुनः विश्वगुरु बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, बद्रीनाथ के मास्टर प्लान और केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कार्य तेजी से हो रहे हैं। अहिल्याबाई होल्कर को आदर्श मानकर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी अनेक कार्य किए जा रहे हैं। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना लखपति दीदी जैसी योजनाओं द्वारा महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। केदारखंड और मानसखंड के मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के कार्य किये जा रहे हैं। हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ स्थल के पुनरुद्धार की दिशा में भी प्रयास किये जा रहे हैं। हरिद्वार ऋषिकेश कॉरिडोर के साथ ही शारदा कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने के साथ ही ‘मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना‘, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना, मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना और पोषण अभियान जैसी विभिन्न योजनाएं प्रारंभ की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एक सख्त भू-कानून भी लाया गया है, जिससे राज्य के मूल स्वरूप के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। प्रदेश में देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून भी लागू किया है, जिसके परिणाम स्वरुप उत्तराखंड में पिछले 3 वर्ष में लगभग 23 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां प्रदान की गई है।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट, महामंत्री संगठन अजेय कुमार, भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज, जनप्रतिनिधिगण और पार्टी पदाधिकारी उपस्थित थे।

आपदा मित्र योजना की तर्ज पर प्रारंभ होगी आपदा सखी योजनाः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित एक होटल में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्राधिकरण द्वारा आयोजित मानसून 2025 तैयारियां कार्यशाला में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान आपदा मित्र योजना की तर्ज पर “आपदा सखी योजना“ प्रारंभ किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा इस योजना के शुरू होने से महिला स्वयंसेवकों को आपदा से पूर्व चेतावनी, प्राथमिक चिकित्सा, राहत एवं बचाव कार्यों, मनोवैज्ञानिक सहायता आदि के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में सहायक सिद्ध होने के साथ आपदा प्रबंधन में समाज की सक्रिय सहभागिता को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा यह कार्यशाला आपदा प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाली चुनौतियों के बेहतर प्रबंधन के लिए सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि आपदा की दृष्टि से उत्तराखण्ड संवेदनशील राज्य है। हमें बीते वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं से सबक लेते हुए काम करना है। मुख्यमंत्री ने कहा प्राकृतिक आपदाओं को टाला नहीं जा सकता, लेकिन त्वरित प्रतिक्रिया, सतर्कता और समन्वित राहत एवं बचाव कार्यों से जन-धन की हानि को कम किया जा सकता है। जिसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय के साथ सजगता एवं संवेदनशीलता भी बेहद जरूरी है।

आपदा प्रबंधन सभी विभागों का सामूहिक दायित्व है
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन सभी विभागों का सामूहिक दायित्व है। जिसमें सभी विभागों के साथ आम जनता की सक्रिय सहभागिता भी आवश्यक है। उन्होंने कहा आपदा प्रबंधन में जनभागीदारी का होना बेहद आवश्यक है। जब तक समाज जागरूक, प्रशिक्षित और सतर्क नहीं होगा, तब तक किसी भी सरकारी प्रयास का प्रभाव सीमित ही रहेगा। आपदा के दौरान सबसे पहले स्थानीय नागरिक ही मौके पर होते हैं। इसलिए ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समितियों, महिला एवं युवा समूहों, स्वयंसेवी संगठनों तथा रेडक्रॉस जैसी संस्थाओं को प्रशिक्षित करना भी आवश्यक है।

आपदाओं के निपटारे के लिए प्रोएक्टिव और रिएक्टिव दोनों प्रकार की रणनीति अपनाना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदाओं के प्रभावी निपटारे के लिए हमें प्रोएक्टिव और रिएक्टिव दोनों प्रकार की रणनीतियों को अपनाना होगा। जैसे 2024 में गौरीकुंड में बादल फटने की घटना के दौरान प्रोएक्टिव अप्रोच अपनाकर हजारों लोगों की जान बचाने में सफलता प्राप्त की थी। वर्ष 2024 में ही टिहरी जनपद के तोली गांव में हुए भू-स्खलन से पूर्व ही प्रशासन की त्वरित कार्यवाही के कारण 200 से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकी थी। आपदा के समय प्रभावितों के साथ खड़े रहना हमारी प्राथमिकता है।

पूर्वानुमान पर गंभीरता से काम करने पर आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वानुमान पर गंभीरता से काम करने पर आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है। राज्य सरकार आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक उपायों को अपनाने पर जोर दे रही है। राज्य में रैपिड रिस्पॉन्स टीम गठित करने के साथ ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग और सैटेलाइट मॉनिटरिंग के माध्यम से आपदा के संभावित जोखिम क्षेत्रों की पहचान कर रही है। आपदा के नुकसान को कम करने के लिए राज्य में आपदा प्रबंधन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान के दौरान भी उन्होंने स्वयं टनल में फंसे मजदूरों से संवाद किया था, जिससे उनका हौसला बढ़ाया जा सका था।

मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य सैन्य बलों से अधिकारियों को निरंतर समन्वय और संवाद स्थापित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा भूस्खलन, बाढ़ और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर, जेसीबी, क्रेन एवं आवश्यक उपकरणों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही संवेदनशील और पुराने पुलों की तकनीकी जांच कर आवश्यकतानुसार बैली ब्रिज एवं वैकल्पिक व्यवस्था हेतु भंडारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों में जलस्तर की निरंतर मॉनिटरिंग के लिए तकनीकी यंत्रों और मानव संसाधन की तैनाती करने, खाद्यान्न, ईंधन, पेयजल एवं जीवन रक्षक औषधियों की पर्याप्त आपूर्ति सभी जिलों में अभी से सुनिश्चित करने के साथ सभी आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि यह कार्यशाला आगामी मानसून से पहले व्यवस्थाओं को सशक्त और प्रभावी बनाएगी। उत्तराखंड को कई प्रकार की आपदा का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष मौसम विभाग ने मानसून के जल्द आने और सामान्य से अधिक होने का अनुमान लगाया है। हमें मानसून से पूर्व पुख्ता इंतजाम करके आपदा के प्रभाव को कम करना है। आपदा के दौरान संसाधनों का बेहतर उपयोग और तकनीकी संसाधनों का प्रयोग आपदा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है, जिसका हमने और बेहतर इस्तेमाल करना है।

सदस्य, राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण राजेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग ने आगामी मानसून में उत्तराखंड के लिए सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वनुमान लगाया है। ऐसे में उत्तराखंड के लिए 15 जून से सितंबर तक आपदा की नजर से महत्वपूर्ण समय है। उत्तराखंड राज्य बाढ़, बादल फटने, भूस्खलन, भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। इनसे बचने के लिए बेहतर पूर्वानुमान, बुनियादी ढांचों, जन जागरूकता, बेहद जरूरी है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इस वर्ष चार धाम यात्रा बेहद सुचारू रूप से चल रही है। चार धाम यात्रा का प्रबंधन बेहद अच्छा है। उन्होंने भूस्खलन के बचाव के लिए उत्तराखंड को एन.डी.एम.ए ने 140 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। एन.डी.एम.ए द्वारा 190 संवेदनशील झीलों के लिए उत्तराखंड को 40 करोड़ का आवंटन हो चुका है। उन्होंने कहा फॉरेस्ट फायर को लेकर उत्तराखंड की तैयारियां इस वर्ष बेहद अच्छी हैं। उत्तराखंड को फॉरेस्ट फायर के लिए करीब 16 करोड़ की स्कीम को स्वीकृति प्रदान की है। भूकंप के लिए भी उत्तराखंड को आवश्कता अनुसार धनराशि दी जाएगी। एन.डी.एम.ए ने पूरे देश में आने वाली आपदाओं के लिए गाइडलाइन बनाई हैं, जिसे जिले स्तर तक पहुंचाना है।

उपाध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन सलाहकार समिति विनय रोहेला ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से आपदा के दौरान होने वाले नुकसान को कम से कम किया गया है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सिल्क्यारा रेस्क्यू अभियान में हमने सफलता हासिल की है। रूद्रपुर में आई बाढ़ के दौरान भी मुख्यमंत्री जी ग्राउंड जीरो पर थे। उन्होंने बताया घनसाली में आई आपदा के दौरान भी मुख्यमंत्री धामी सीधे आपदा प्रभावितों के बीच में पहुंचे थे, जिससे प्रभावितों का मनोबल बढ़ा था। मुख्यमंत्री ने कुशल आपदा प्रबंधन ने राज्य को विकसित प्रदेश बनाने की ओर आगे बढ़ाया है।

सचिव, आपदा विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह कार्यशाला मानसून से पूर्व की तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए की जा रही है। उन्होंने बताया कार्यशाला में मौसम पूर्वानुमान, बाढ़ पूर्वानुमान, ईडब्ल्यूएस की निगरानी और प्रसार , भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणाली, भूस्कालन जोखिम न्यूनीकरण के लिए भू-जांच की आवश्यकता, संसाधन और परिचालन संबंधी तैयारी, ग्लेशियर निगरानी, मानसून में होने वाली बीमारियों से बचाव, मार्गों पर भूस्खलन एवं बेस्ट प्रैक्टिसेज जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। जिसका लाभ आने वाले समय में हमारे राज्य को मिलेगा।

इस दौरान प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, प्रमुख वन संरक्षक धनंजय मोहन एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और विशेषज्ञ मौजूद थे।

सभी प्रतिभाशाली विद्यार्थी राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींवः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में मेधावी छात्र सम्मान समारोह में उत्तराखण्ड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 75 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। अमर उजाला समाचार पत्र द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मान समारोह के माध्यम से अमर उजाला प्रतिवर्ष हमारे राज्य के प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मानित हो रहे सभी प्रतिभाशाली विद्यार्थी राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। अपने माता-पिता, शिक्षकों और विद्यालय के साथ ही इन विद्यार्थियों ने उत्तराखंड का मान भी बढ़ाया है। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार निरतंर प्रयासरत है। सरकार द्वारा क्वालिटी एजुकेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्य पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी छात्रों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रदेश में 226 विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है। 500 विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं तथा 840 नए विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में स्मार्ट क्लासरूम भी स्थापित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के सरकारी और अशासकीय स्कूलों के 6 से 12वीं कक्षा तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से प्रत्येक माह छात्रवृत्ति दी जा रही है। बच्चों के व्यक्तित्व विकास के उद्देश्य से प्रत्येक विकासखण्ड के 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजने की शुरुआत की गई है। माध्यमिक विद्यालयों में 8 ट्रेड्स में व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ की गई है, जिससे 42 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। सरकार द्वारा स्थानीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी भाषाओं में पुस्तकें तैयार की गई हैं। ’हमारी विरासत’ पुस्तक के माध्यम से कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भारत की संस्कृति, लोक परंपरा और महान विभूतियों से परिचित कराने का कार्य भी किया जा रहा है। बच्चों में कौशल, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान परंपरा को विकसित करने के लिए ’कौशलम कार्यक्रम’ भी प्रारंभ किया गया है।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, सलाहकार संपादक अमर उजाला उदय कुमार, अमर उजाला के देहरादून संपादक अनूप वाजपेयी, यूनिट हेड पंकज शर्मा उपस्थित थे।

लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिये एक देश एक चुनाव जरूरीः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी रोड स्थित एक होटल में “एक देश, एक चुनाव” विषय पर संयुक्त संसदीय समिति के साथ संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी एवं समिति के सभी सदस्यगणों का स्वागत और अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक देश एक चुनाव’ हमारे लोकतंत्र को और अधिक सशक्त, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि हमारी चुनाव प्रणाली विविधताओं के बावजूद प्रभावी और मजबूत रही है, लेकिन अलग-अलग समय में चुनाव होने से बार-बार आचार संहिता लगती है, इसके चलते राज्यो के सारे काम ठप पड़ जाते हैं। जब भी चुनाव आता है, तो बड़ी संख्या में कार्मिकों को मूल कार्य से हटाकर चुनाव ड्यूटी में लगाना पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन सालों में राज्य में विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों की आचार संहिता के कारण 175 दिन तक राज्य की प्रशासनिक मशीनरी नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया से वंचित रही। छोटे और सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए ये 175 दिन शासन व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा निर्वाचन का पूर्ण व्यय भार राज्य सरकार वहन करती है और लोकसभा निर्वाचन का व्यय भार केंद्र सरकार द्वारा उठाया जाता है। दोनों चुनाव एक साथ कराए जाएं तो राज्य और केंद्र सरकार पर व्यय भार समान रूप से आधा-आधा हो जाएगा। दोनों चुनाव एक साथ कराने से कुल व्यय में लगभग 30 से 35 प्रतिशत तक की बचत होगी। इसका उपयोग राज्य के स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, जल, कृषि एवं महिला सशक्तिकरण जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में जून से सितंबर का समय चारधाम यात्रा के साथ-साथ, बारिश का भी होता है, ऐसे में चुनावी कार्यक्रम होने से बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा जनवरी से मार्च तक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही के समय भी चुनावी प्रक्रिया निर्धारित नहीं की जानी चाहिए। फरवरी-मार्च के माह में हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं होने से प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों में “एक देश एक चुनाव” महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के दुर्गम क्षेत्रों में मतदान केंद्रों तक पहुंचना कठिन होता है, जिसके कारण चुनाव की प्रक्रिया में अधिक समय और संसाधन लगते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में मतदाताओं के लिए चुनाव में भाग लेना भी चुनौतीपूर्ण होता है, बार -बार चुनाव होने से लोगों में मतदान के प्रति रुझान कम होता है और मतदान प्रतिशत भी घटता है।

सीएम हेल्पलाइन की सक्रियता जांचने के क्रम में सीएम ने शिकायतकर्ताओं से की बातचीत

सीएम हेल्पलाइन 1905 पर दर्ज होने वाली शिकायतों के निस्तारण के लिए दिए जाने वाले निर्देशों पर विभाग कितनी तत्परता से काम कर रहे हैं, यह जांचने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई आवेदकों से बातचीत कर फीडबैक लिया। इस दौरान सभी शिकायतकर्ताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री के पिछले दिशा-निर्देश के बाद अब उनकी शिकायतों का निस्तारण हो चुका है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गत दिनों सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा की थी। इसमें कुछ प्रकरण ऐसे थे, जिनमें मुख्यमंत्री ने विभागों को तय समय सीमा के भीतर निस्तारण के निर्देश दिए थे। इन्हीं प्रकरणों में विभागों के स्तर से क्या कार्रवाई की गई, यह जानने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान कई शिकायतकर्ताओं से बातचीत की। पहले मामले में उत्तरकाशी निवासी लक्ष्मी देवी ने शिक्षा विभाग से पारिवारिक पेंशन नहीं लग पाने की शिकायत की थी। सीएम से बातचीत में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के पिछले दिशा-निर्देश के बाद विभाग ने उनकी पारिवारिक पेंशन स्वीकृत कर दी है। इसी तरह रुद्रप्रयाग निवासी जगदम्बा प्रसाद नौटियाल ने शिक्षा विभाग से मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं हो पाने की शिकायत की थी। बुधवार को उन्होंने भी सीएम पुष्कर सिंह धामी को बताया कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद लंबित बिलों का भुगतान हो गया है। इसी तरह उद्यान विभाग से रिटायर्ड नैनीताल निवासी बहादुर सिंह बिष्ट ने भी सीएम पुष्कर सिंह धामी को बताया कि सीएम के गत दिशा-निर्देशों के क्रम में विभाग ने उनका जीपीएफ का भुगतान कर लिया है। सभी शिकायतकर्ताओं ने इसके लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।

सीएम ने दिखाई संवेदनशीलता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी न सिर्फ सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज होने वाली शिकायतों की समीक्षा कर रहे हैं, बल्कि वह बैठकों के बाद होने वाली कार्रवाई पर भी संवेदनशीलता के साथ नजर बनाए हुए हैं। इसी क्रम में सीएम अब पुनः शिकायतकर्ताओं से वास्तविक फीडबैक ले रहे हैं। इससे विभागों पर भी शिकायतों के निस्तारण में तत्परता दिखाने का दबाव बन रहा है।

इस अवसर प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी.अंशुमन, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न निर्माण कार्यों के लिये की धनराशि स्वीकृत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद पिथौरागढ़ के विधानसभा क्षेत्र धारचूला में तवाघाट-थानीधार मोटर मार्ग में डामरीकरण हेतु 3.44 करोड़, जनपद बागेश्वर के विधानसभा क्षेत्र कपकोट में सौंग-खलीचार हल्का वाहन मार्ग में सीमेंट कंक्रीट द्वारा सुधारीकरण के कार्य के लिए 4.15 करोड़ की धनराशि का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद नैनीताल के विधान सभा क्षेत्र भीमताल में भीड़ापानी खुजेटी मोटर मार्ग के कि०मी० 1 से 5 तक मार्ग का सुधारीकरण कार्य के लिए 3.27 करोड़, जनपद नैनीताल के विधान सभा क्षेत्र में पंगोट से देचौरी मोटर मार्ग का नवनिर्माण के लिए 8.19 करोड़ की धनराशि के साथ ही जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र में सूखीढांग-श्यामलाताल मोटर मार्ग का सिंगल लेन से टू लेन में परिवर्तन कार्य हेतु 4.01 लाख की धनराशि स्वीकृत करने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा देहरादून के विधानसभा क्षेत्र धर्मपुर में दीपनगर एवं केदारपुरम को जोड़ने वाले हरे पुल के स्थान पर सेतु के निर्माण के लिए 3.56 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

बड़ी खबरः उत्तराखंड में तीन महिलाओं को हज कमेटी में मिला प्रतिनिधित्व

उत्तराखंड सरकार ने नामित हज कमेटी में मुस्लिम महिलाओं को जगह दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर राज्य की तीन महिलाओं को पहली बार हज समिति में प्रतिनिधित्व दिया गया है।

शासन की ओर से जारी की गई कमेटी सूची में कोटद्वार निगम पार्षद की रिजवाना परवीन, हल्द्वानी की तरन्नुम खान और अल्मोड़ा की शाहिदा सिराज को स्थान दिया गया है।

समिति में विधायक लक्सर के विधायक शहजाद को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसके अलावा जिशान अहमद, हसीब अहमद, इस्लामुद्दीन अंसारी, समीर जाफरी, खतीब अहमद, मन्नान राजा, हाजी अबरार हुसैन, हाजी फईम खान को भी समिति में नामित किया गया है।

महिला सशक्तिकरण है मुख्य उद्देश्य
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि मुस्लिम महिलाएं भी हज करने जाती हैं। उनकी हज कमेटी में मजबूत पैरवी हो, हज संबंधी फैसलों में वे भी अपने सुझाव दे सकें, इसको देखते हुए उनकी सरकार ने राज्य बनने के बाद पहली बार उन्हें हज कमेटी में प्रतिनिधित्व दिया है। मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य से पूर्व में भी महिला आयोग के उपाध्यक्ष पद पर सायरा बानो को नियुक्ति दी गई है।

राजभवन में आयोजित सर्वधर्म गोष्ठी में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी

वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए राजभवन में सर्वधर्म गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग कर देश की एकता एवं अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन राष्ट्र के प्रति हमारे साझा उत्तरदायित्व की अभिव्यक्ति है।

राज्यपाल ने कहा कि आज हम सब यहां धर्म, जाति और मत की सीमाओं से दूर एक साथ खड़े है और सीमाओं पर खड़ी हमारी सेना व भारत की आत्मा की तरह जीवंत दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक पूर्व सैनिक होने के नाते मैं जानता हूं कि एक सैनिक की सबसे बड़ी ताकत उसका परिवार, उसका देश और उसका मनोबल होता है और आज की यह हमारी गोष्ठी सैनिकों के मनोबल को सशक्त करने का प्रतीक है।

राज्यपाल ने कहा कि सभी धर्मों का मूल संदेश एक ही है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म सर्वे भवंतु सुखिनः की शिक्षा देता है वहीं सिख धर्म एकम की भावना से सभी को देखता है। बुद्ध कहते हैं कि अपने दीपक खुद बनो, वहीं जैन धर्म का सिद्धांत है कि अहिंसा ही परम धर्म है। उन्होंने कहा इस्लाम हमें सिखाता है कि विभाजन मत करो वहीं ईसाई धर्म में कहा गया है कि शांति फैलाने वाले ईश्वर की संतान होते हैं, इस प्रकार सभी शिक्षाओं में हमें एकता, करुणा और शांति का ही संदेश देता है।

राज्यपाल ने कहा कि हमारी सेना ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंकवाद और आतंकवाद फैलाने वालों पर कड़ा प्रहार कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियां कर्नल सोफिया कुरेशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के माध्यम से ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी लगातार हम तक पहुंचा रही हैं और वे दोनों सशक्त भारत की सशक्त मातृशक्ति का प्रदर्शन भी कर रही हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जब भी हमारे राष्ट्र को युद्ध जैसे हालातों का सामना करना पड़ा, ऐसे समय में समाज के सभी मत, पंथ, समुदायों और संप्रदायों के लोगों ने मिलकर राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और शांति का संदेश देना है। जब-जब देश पर संकट आया है, भारतवासियों ने धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर देशहित में एकजुट होकर उसका सामना किया है। हमारे वेदों में भी कहा है “संगच्छ ध्वं संवदद ध्वं सं वो मनांसि जानताम्।” अर्थात, ‘हम सभी साथ चलें, एक मन से विचार करें, और एक लक्ष्य की ओर अग्रसर हो।’ धर्म का मूल उद्देश्य समाज में सत्य, प्रेम, करुणा और समरसता की स्थापना करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रेता में भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की। द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अधर्म के विरुद्ध अर्जुन को धर्म युद्ध के लिए प्रेरित किया। गुरु गोविंद सिंह ने धर्म और देश की रक्षा हेतु अपने पूरे परिवार का बलिदान दिया। ईसा मसीह ने प्रेम और क्षमा का संदेश दिया और पैगम्बर मोहम्मद साहब ने समरसता का मार्ग दिखाया। हमारे सभी धर्मों द्वारा सदैव यही शिक्षाएं दी गई कि जब अधर्म सिर उठाए, तो चुप रहना भी अधर्म को बढ़ावा देना होता है। हमारा राष्ट्र सदैव ही धर्म, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़ा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की वीर भूमि ने सदैव राष्ट्रभक्ति, बलिदान और त्याग का उदाहरण प्रस्तुत किया है। हमारे वीर सैनिकों ने प्रत्येक संघर्ष में राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है आज हमें भी उनके साथ मजबूती से खड़ा होना है।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि हम सब की पूजा पद्धति भले ही अलग हो परंतु हमारी भक्ति सिर्फ राष्ट्र भक्ति है। वहीं उत्तराखण्ड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि पूरी दुनिया में भारत से सुंदर मुल्क कोई नहीं है और हम सब भारत माता की संतान है।

इस अवसर पर बौद्ध धर्मावली सोनम चोग्याल, ब्रदर जोसेफ एम. जोसेफ एवं सरदार गुरबक्श सिंह राजन ने भी अपने विचार रखते हुए भारत की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता को बनाए रखने की कामना की। इस अवसर पर सचिव राज्यपाल रविनाथ रमन, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित विभिन्न पंथों के अनुयायी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

मुख्य कोषाधिकारी, एकाउन्टेन्ट कोषागार, नैनीताल को एक लाख 20 हजार रूपये रिश्वत लेते गिरफ्तार

धामी सरकार का भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार जारी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार की शिकायत पर सघन जांच के साथ त्वरित कठोर कार्यवाही के निर्देशों का ही परिणाम है कि भ्रष्टाचार में लिप्त कार्मिकों को विजिलेंस द्वारा गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को जनपद नैनीताल में विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य कोषाधिकारी, नैनीताल एवं एकाउन्टेन्ट कोषागार, नैनीताल को एक लाख 20 हजार रूपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की नीति को व्यवहार में लाते हुए बीते तीन वर्षों में ऐतिहासिक निर्णय और ठोस कार्रवाई की है। राज्य में भ्रष्टाचार और नकल माफिया के विरुद्ध जारी अभियान के अंतर्गत अब तक 150 से अधिक आरोपी अधिकारियों, कर्मचारियों और माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में पूर्व प्थ्ै अधिकारी आर.बी.एस. रावत और प्।ै अधिकारी रामविलास यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। यह राज्य प्रशासन में पारदर्शिता और निष्पक्षता की बड़ी मिसाल है।

नकल विरोधी कानून के अंतर्गत बड़ी कार्रवाई उत्तराखंड में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने हेतु बनाए गए नकल विरोधी कानून के तहत कई संगठित गिरोहों और दलालों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। 80 से अधिक नकल माफियाओ पर सख्त कार्रवाई की गई। इसी का परिणाम है कि पिछले तीन साल में 23 हजार के करीब युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद एक भी नकल की शिकायत नहीं आई।

प्रमुख केस जिनमें त्वरित कार्रवाई की गई

मुख्य कोषाधिकारी एवं एकाउंटेंट (नैनीताल)रू ₹1.20 लाख रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार।

लोक निर्माण विभाग के ।म् (नैनीताल)रू ₹10,000 रिश्वत लेते पकड़ा गया।

बिजली विभाग का श्रम् (हरबर्टपुर)रू ₹15,000 रिश्वत लेते पकड़ा गया।

एलआईयू कर्मी (रामनगर)रू उप निरीक्षक एवं मुख्य आरक्षी गिरफ्तार।

आरटीओ कर्मचारी (कोटद्वार)रू ₹3,000 रिश्वत लेते पकड़ा गया।

रोडवेज ।ळड (काशीपुर)रू ₹90,000 रिश्वत मांगने पर गिरफ्तार।

खंड शिक्षा अधिकारी (खानपुर)रू ₹10,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।

जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर (देहरादून)रू ₹75,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।

जिला आबकारी अधिकारी (रुद्रपुर)रू ₹1 लाख रिश्वत मांगने पर गिरफ्तार।

कानूनगो (पौड़ी)रू भूमि सीमांकन के नाम पर ₹15,000 रिश्वत लेते पकड़ा गया।

सीएम हेल्पलाइन कर्मचारी (हरिद्वार) शिकायत निपटाने के एवज में रिश्वत मांगने पर गिरफ्तार।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के फलस्वरूप राज्य में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है और आम जनता का विश्वास शासन तंत्र में और मजबूत हुआ है। सरकार द्वारा भ्रष्टाचार और नकल के विरुद्ध यह निर्णायक अभियान आगे भी जारी रहेगा।

भारत की आतंकवाद पर की जा रही कार्रवाई पर सीएम धामी ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में भारत द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध की जा रही सख्त कार्रवाई के दृष्टिगत राज्य के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को प्रत्येक परिस्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार रहने एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के साथ ही वहां तैनात प्रशासनिक इकाइयों को चौकस रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश के सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक दवाइयां, सर्जिकल उपकरण और अन्य आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को राज्य में आवश्यक खाद्य सामग्री, राशन और पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा राहत और बचाव दलों को भी तैयार रखा गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

मुख्यमंत्री ने अफवाहों से बचने और जनता को सही समय पर जानकारी देने के लिए सूचना विभाग को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के लिए देवतुल्य जनता की सुरक्षा सर्वाेपरि है और सरकार किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

इस दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्धन, डीजीपी दीपम सेठ, सचिव गृह शैलेश बगौली, एडीजी ए.पी अंशुमान उपस्थित थे।