श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, मानसून अवधि के लिए सभी विभाग रहें पूरी तरह सतर्क: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय, प्रभावी संवाद और सुव्यवस्थित प्रबंधन से यात्रा को और अधिक सुरक्षित एवं सफल बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप दर्शन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक चारधाम यात्रा मार्गों पर वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रा मार्गों पर ट्रकों एवं अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात्रिकाल में ही अनुमति दी जाए तथा दिन के समय ऐसे वाहनों का संचालन प्रतिबंधित रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी धाम अथवा पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ होने की स्थिति में नीचे स्थित होल्डिंग एरिया एवं प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए। भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाते हुए यात्रियों को आगे भेजा जाए, जिससे धामों में अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भीड़ नियंत्रण के दौरान श्रद्धालुओं को केवल रोका न जाए, बल्कि उन्हें इसके कारण, संभावित प्रतीक्षा अवधि तथा आगे की व्यवस्थाओं की जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने पुलिस, प्रशासन एवं यात्रा प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशील, विनम्र एवं सहयोगात्मक व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली , एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चौनल एवं एफएम रेडियो के माध्यम से लगातार अद्यतन सूचनाएं प्रसारित की जाएं। मार्ग अवरोध, मौसम में बदलाव, यातायात जाम अथवा दर्शन में विलंब जैसी परिस्थितियों की जानकारी भी समय रहते यात्रियों तक पहुंचाई जाए, जिससे भ्रम एवं असंतोष की स्थिति उत्पन्न न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा का प्रथम चरण प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन एवं अन्य संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक संचालित हुआ है। अब यात्रा दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून एवं प्रतिकूल मौसम प्रमुख चुनौती होंगे। ऐसे में यात्रा प्रबंधन को और अधिक सतर्कता, नियंत्रण तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संचालित किया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को श्रद्धालुओं से प्राप्त फीडबैक, शिकायतों एवं सुझावों की दैनिक समीक्षा करने तथा आवश्यकतानुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस एवं राहत-बचाव उपकरणों की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि किसी भी आपात स्थिति अथवा मार्ग अवरोध की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। सभी अधिकारियों को फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने तथा श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने गढ़वाल आयुक्त एवं आईजी गढ़वाल को चारधाम यात्रा की सभी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने तथा श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलों के जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को यात्रा व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट एवं ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन सुनिश्चित करने तथा खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग कर गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने चारों धामों एवं पैदल यात्रा मार्गों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने पैदल मार्गों पर पर्याप्त संख्या में शौचालयों की व्यवस्था एवं उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गंभीर मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराने के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा हेतु राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जिलाधिकारी तत्काल समन्वय स्थापित कर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचा सकें। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में शेड स्थापित करने तथा वर्षा एवं धूप से बचाव की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, भरत चौधरी, विधायक अनिल नौटियाल, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिला, उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, रणवीर सिंह चौहान, विनोद कुमार सुमन, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर सचिव बंशीधर तिवारी तथा वर्चुअल माध्यम से विधायक सुरेश चौहान, आशा नौटियाल, बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप एवं संबंधित जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।

बाबा केदार के धाम पहुंचे राज्यपाल, स्वच्छता एवं सुगम यात्रा व्यवस्था पर दिया विशेष जोर

राज्यपाल उत्तराखंड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) श्री केदारनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा केदार के दिव्य दर्शन कर यात्रा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया एवं विश्व कल्याण, मानवता की समृद्धि तथा उत्तराखण्ड के सतत विकास की कामना की।

राज्यपाल ने अत्यंत अल्प समय में ही बाबा के दर्शन किए, जिससे श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई। उनके आगमन के दौरान एक पल के लिए भी श्रद्धालुओं को दर्शन हेतु नहीं रोका गया तथा पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रही। राज्यपाल ने इस व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों की सराहना की।

अपने भ्रमण के दौरान राज्यपाल ने मुख्य रूप से श्रद्धालुओं से संवाद स्थापित कर यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर उनका फीडबैक एवं सुझाव प्राप्त किए। उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं से मुलाकात कर उनके यात्रा अनुभव जाने तथा प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। श्रद्धालुओं ने यात्रा मार्ग, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता एवं दर्शन व्यवस्था को लेकर संतोष व्यक्त किया।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि बाबा केदार के दर्शन प्राप्त होना अत्यंत सौभाग्य एवं आध्यात्मिक अनुभूति का विषय है। उन्होंने कहा कि श्री केदारनाथ धाम में विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं से संवाद स्थापित कर उनके सुझावों एवं समस्याओं को सुनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को सुचारू, सुव्यवस्थित एवं भव्य बनाने हेतु पूरे वर्षभर सभी विभाग, स्थानीय लोग, प्रशासन, पुलिस, स्वयंसेवी संस्थाएं एवं सेवा से जुड़े लोग निरंतर मेहनत करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक उत्तराखंडी एवं यात्रा से जुड़े हर व्यक्ति का इस यात्रा के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान है। यह केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि सेवा, समर्पण एवं आस्था का अभियान है। उन्होंने कहा कि “यह चरण सेवा और समर्पण का है तथा हम सभी का दायित्व है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सहज एवं आध्यात्मिक यात्रा अनुभव प्राप्त हो।”

राज्यपाल ने श्रद्धालुओं एवं आमजन से अपील करते हुए कहा कि केदारनाथ धाम सहित समस्त चारधाम क्षेत्र की प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक सुंदरता को बनाए रखने हेतु स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधना एवं स्वच्छता दोनों के लिए धैर्य, अनुशासन एवं संवेदनशीलता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “बाबा केदार की यह पावन भूमि स्वच्छता, शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है, इसलिए हमारा भी कर्तव्य है कि इस धाम को स्वच्छ, सुंदर एवं पवित्र बनाए रखें।”

राज्यपाल ने श्री केदारनाथ धाम यात्रा के सफल संचालन हेतु किए जा रहे विकास कार्यों एवं व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सभी विभागों एवं संस्थाओं का एक ही उद्देश्य है कि यात्रा शुभ, सुव्यवस्थित, सुगम एवं सुरक्षित रूप से संचालित हो। उन्होंने कहा कि आज बाबा केदार से संपूर्ण मानवता, सनातन संस्कृति, प्रत्येक भारतीय एवं प्रत्येक उत्तराखंडी के जीवन में सुख, समृद्धि, सौहार्द एवं सफलता की प्रार्थना की गई है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित वस्तुओं को अवश्य खरीदें, जिससे स्थानीय लोगों एवं छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि संपूर्ण उत्तराखंड वर्षभर चारधाम यात्रा की प्रतीक्षा करता है और यह यात्रा यहां की आर्थिकी एवं सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है।

राज्यपाल ने सभी श्रद्धालुओं से श्री केदारनाथ धाम एवं चारधाम यात्रा में आकर यहां की दिव्यता, भव्यता एवं अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि “यहां की आध्यात्मिक अनुभूति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव केवल देवभूमि उत्तराखंड में ही संभव है।”

राज्यपाल ने सभी श्रद्धालुओं से केदारनाथ धाम एवं संपूर्ण यात्रा मार्ग में स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसकी पवित्रता एवं स्वच्छता बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि “स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित धाम न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इस पवित्र स्थल की गरिमा बनाए रखता है।”

इस दौरान राज्यपाल ने केदारनाथ धाम में संचालित पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने राज्यपाल को धाम में संचालित पुनर्निर्माण कार्यों तथा श्रद्धालुओं हेतु की गई व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धाम में सभी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु सभी विभाग निरंतर समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।

राज्यपाल ने मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहित समाज से भी भेंट की, जहां पारंपरिक मंत्रोच्चारण एवं विधि-विधान के साथ उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “केदारघाटी का प्रत्येक कण शिवमय है। यहां पहुंचते ही मन आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है और भगवान शिव की दिव्यता का अनुभव होता है।”

उन्होंने जिला प्रशासन, मंदिर समिति, पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं अन्य सहयोगी एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि सभी विभाग श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम एवं सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करने हेतु समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने यात्रा से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सेवा दलों से “अतिथि देवो भव” की भावना के साथ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं यात्रा को निरंतर सुचारू बनाए रखने का आग्रह किया।

इस अवसर पर श्री केदार सभा के महामंत्री राजेंद्र प्रसाद तिवारी, वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित उमेश चन्द्र पोस्ती, विनीत पोस्ती, ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ पंकज शुक्ला, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, उप जिलाधिकारी/यात्रा मजिस्ट्रेट कृष्णा त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

चार धाम यात्रा 2026ः अब तक चार लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

प्रदेश में चारधाम यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर सुरक्षित एवं सुगम रूप से दर्शन कर सकें।

चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए चारधाम यात्रा मार्गों सहित प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पार्किंग एवं यातायात व्यवस्थाओं को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित किया गया है।

राज्य सरकार ने यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रसारित करने वालों तथा गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा की पवित्रता एवं व्यवस्थाएं बनी रहें।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार चारधाम कपाट खुलने से 28 अप्रैल, 2026 की सांय 7रू00 बजे तक मात्र दस दिनों में कुल 04 लाख 08 हजार 401 श्रद्धालु चारधाम में दर्शन हेतु पहुंचे हैं।

धामवार विवरण इस प्रकार हैकृ

श्री बद्रीनाथ धामः कपाट उद्घाटन के छह दिनों में 84,942 श्रद्धालु पहुंचे।

श्री केदारनाथ धामः सात दिनों में 2,07,452 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

यमुनोत्री धामः दस दिनों में 57,794 श्रद्धालु पहुंचे।

गंगोत्री धामः दस दिनों में 57,863 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

इसके अतिरिक्त गौमुख में अब तक 440 यात्री पहुंचे हैं।

वर्तमान यात्रा सीजन में अब तक कुल 64,115 वाहन यात्रियों को लेकर चारधाम पहुंचे हैं।

राज्य सरकार द्वारा सभी संबंधित विभागों के समन्वय से यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

बद्रीनाथ में सीएम ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कार्यों की प्रगति का लिया विस्तृत जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज चमोली स्थित बीआरओ गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की। इस अवसर पर आयोजित बैठक में पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से धाम में चल रहे निर्माण कार्यों, उनकी वर्तमान प्रगति, तकनीकी पहलुओं तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई।

बैठक के दौरान अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी (पीआईयू) योगेश मनराल ने विभिन्न परियोजनाओं की स्थिति, अब तक की उपलब्धियों तथा निर्धारित समयसीमा के सापेक्ष प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान के अंतर्गत अनेक महत्वपूर्ण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं, जिनमें आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण, यात्री सुविधाओं का विस्तार, आवागमन व्यवस्था में सुधार तथा आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है। मुख्यमंत्री ने प्रस्तुतीकरण को देखते हुए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के अनुरूप संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य बद्रीनाथ धाम को एक भव्य, दिव्य, सुरक्षित और अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त तीर्थस्थल के रूप में विकसित करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और उन्हें एक सुव्यवस्थित एवं सुखद अनुभव प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं तथा प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और निर्माण कार्यों में उच्च मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखते हुए तकनीकी दक्षता का पूर्ण उपयोग किया जाए, ताकि कार्यों में तेजी और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित हो सकें।

उन्होंने आगे निर्देश दिए कि बद्रीनाथ धाम में विकसित की जा रही सभी सुविधाओं में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सुगमता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। यात्री आवागमन, आवास, स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए और उसका समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धाम के विकास कार्यों के दौरान पारंपरिक स्वरूप, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि विकास और विरासत के बीच संतुलन बना रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि मास्टर प्लान के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी प्रकार की बाधा या विलंब की स्थिति में त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हो सकें और बद्रीनाथ धाम का समग्र विकास तेजी से आगे बढ़ सके।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों, अधिकारियों की प्रतिबद्धता और केंद्र सरकार के सहयोग से बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत सभी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होंगे और यह धाम भविष्य में एक आदर्श, भव्य और विश्वस्तरीय तीर्थस्थल के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।

सीएम ने बद्रीनाथ मास्टर प्लान की समीक्षा कर विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर पूर्ण करने के दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बद्रीनाथ धाम पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर उतरते हुए मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों का व्यापक एवं गहन स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, समयबद्धता तथा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ विभिन्न स्थलों का भ्रमण करते हुए मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कार्यों की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त करने के साथ-साथ उन्हें और अधिक प्रभावी एवं तीव्र गति से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि बद्रीनाथ धाम से जुड़े सभी विकास कार्य जिलाधिकारी की प्रत्यक्ष निगरानी में तय समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा कार्यों की प्रगति की समीक्षा समय-समय पर की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को तुरंत दूर किया जा सके।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीआरओ बाईपास रोड, लूप रोड, लेक, आईएसबीटी, सिविक एमिनिटी भवन, टीआईसीसी एवं अराइवल प्लाजा जैसे पूर्ण हो चुके महत्वपूर्ण कार्यों का भी जायजा लिया। उन्होंने इन परियोजनाओं के शीघ्र हस्तांतरण हेतु अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इन सुविधाओं का लाभ तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से इन सभी परियोजनाओं के संचालन एवं रखरखाव की ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा, जिससे दीर्घकालिक रूप से इन परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और उपयोगिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में किए जा रहे विकास कार्यों का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त तीर्थ अनुभव प्रदान करना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह भी जोर दिया कि सभी कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी का संरक्षण प्राथमिकता में रखा जाए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्य करते समय स्वच्छता, हरित मानकों और सतत विकास के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बद्रीनाथ धाम की पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य को अक्षुण्ण रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों और सतत निगरानी से बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित कार्य समय पर पूर्ण होंगे और आने वाले समय में यह धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक आदर्श, भव्य और सुविधासंपन्न तीर्थस्थल के रूप में स्थापित होगा।

शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडलः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचकर क्षेत्र का भ्रमण किया तथा वहां आए श्रद्धालुओं एवं स्थानीय जनता से आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुखद एवं प्लास्टिक मुक्त हरित यात्रा बनाने की अपील करते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर एवं स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय स्वागत के लिए ग्रामीण महिलाओं का आभार व्यक्त किया और उनकी परंपराओं एवं संस्कृति की सराहना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने गांव की शत-प्रतिशत “लखपति दीदियों” से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को गुणवत्तापूर्ण बताते हुए कहा कि ये उत्पाद न केवल स्थानीय आजीविका को सशक्त कर रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों की खरीद कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास को नई दिशा मिली है और जो गांव पहले “अंतिम गांव” कहे जाते थे, उन्हें अब “प्रथम गांव” की संज्ञा देकर उनके समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत उत्तराखंड के सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार, पर्यटन और आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। माणा गांव सहित अन्य सीमांत क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्य प्रदेश के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से सीमांत गांव विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।

ग्राम पंचायत माणा, विकासखण्ड ज्योतिर्मठ, जनपद चमोली, आज स्वयं सहायता समूहों और “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। यहां कुल 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ग्राम में एक ग्राम संगठन “घुंघटी महिला ग्राम संगठन” तथा एक क्लस्टर स्तरीय संगठन “योगबंदी क्लस्टर स्तरीय संगठन” कार्यरत है और विशेष बात यह है कि यहां सभी 82 महिलाएं “लखपति दीदी” के रूप में स्थापित हो चुकी हैं, जिससे माणा उत्तराखंड का प्रथम शत-प्रतिशत लखपति दीदी गांव बन गया है।

ग्राम की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पारंपरिक एवं गैर-कृषि कार्यों को बढ़ावा देते हुए आजीविका संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, फर्नीचर, टोकरी निर्माण, दाल, कालीन, पापड़, मसाले तथा भोजनालय संचालन जैसे विविध कार्यों में संलग्न हैं और इन उत्पादों का विपणन कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। इसके अतिरिक्त कृषि, पशुपालन, डेयरी, होमस्टे, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से भी महिलाएं स्वरोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं। स्थानीय उत्पादों को सरस मॉल एवं विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में सहायता मिल रही है और वे “लखपति दीदी” योजना से लाभान्वित हो रही हैं।

माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सीमांत क्षेत्र के समग्र विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है, जहां सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय महिलाओं के परिश्रम ने विकास की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है।

बाबा के जीवन पर बनी फिल्म श्रद्धा भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयासः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में श्री बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म के प्रोमो और पोस्टर का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि बाबा नीब करौरी महाराज जी का दिव्य जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शिक्षाएँ सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर आधारित प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक एवं निर्माता दल को इस सराहनीय एवं आध्यात्मिक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव एवं स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, फिल्म निर्देशक शरद सिंह ठाकुर एवं अन्य कलाकार मौजूद थे।

वाराही धाम के नव-निर्मित कार्यों का शुभारम्भ होना हम सभी के लिए सौभाग्य का क्षण: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास से श्री वाराही धाम देवीधुरा, चम्पावत में आयोजित मंदिर के नव निर्माण कार्य के शिलान्यास कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री वाराही धाम के नव-निर्मित कार्यों का शुभारम्भ होना हम सभी के लिए सौभाग्य का क्षण है। उन्होंने कहा माँ वाराही का प्राचीन धाम सदियों से श्रद्धा, आस्था और शक्ति का केंद्र रहा है। वाराही धाम में आयोजित होने वाला बग्वाल मेला हमारी वीरता, परंपरा और सामूहिक आस्था का अद्भुत संगम है। राज्य सरकार ने इसे राजकीय मेला घोषित भी किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मां वाराही मंदिर का नव-निर्माण मंदिर को और अधिक भव्य एवं आकर्षक स्वरूप प्रदान करेगा। यह धाम आस्था के साथ विकास और समृद्धि का भी प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा प्रदेश में स्थित चारधाम, शक्तिपीठ, सिद्धपीठ और अन्य मंदिर, हमारी सनातन परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण एवं पुनरुत्थान का कार्य भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को भव्य रूप प्रदान करने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह देवभूमि है, यहां देवताओं का वास है, राज्य सरकार देवभूमि की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को दिव्य,भव्य और सुरक्षित बनाने का अपना काम इसी प्रकार जारी रखेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का कार्य कर रही है। केदारखंड के साथ ही मानसखंड के पौराणिक मंदिरों के सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा चंपावत के बालेश्वर मंदिर, पाताल रुद्रेश्वर मंदिर और माँ रणकोची मंदिर, मां पूर्णागिरी मंदिर का भी पुनर्विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा चंपावत क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शारदा कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। 179 करोड़ रुपये की लागत से शारदा घाट के पुनर्विकास कार्य का शिलान्यास किया गया है। लगभग 430 करोड़ रुपये की लागत से गोल्ज्यू कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोहाघाट के छमनिया में लगभग ₹ 10 करोड़ से अधिक की लागत से आधुनिक एथलेटिक सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण, लगभग 257 करोड़ रुपये की लागत से महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से भवन और छात्रावास का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए रीठा साहिब क्षेत्र में लगभग 24 करोड़ रुपये की लागत से सड़क नवीनीकरण और सुधार कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा शहीद शिरोमणी चिल्कोटी मोटर मार्ग के सुधार कार्य भी तेजी से किए जा रहे हैं। लोहाघाट में फायर स्टेशन के प्रशासनिक भवन का निर्माण भी किया जा रहा है। देवीधुरा में पुलिस चौकी का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का प्रयास है कि विकास समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मज़बूत नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार में दिल्ली और देहरादून से भेजा गया एक – एक पैसा, पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक डीबीटी के माध्यम से पहुँच रहा है।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष गोविंद सामंत, वाराही शक्ति पीठ ट्रस्ट संरक्षक/संस्थापक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष हीरा बल्लभ जोशी, निर्मल माहरा, श्याम नारायण पाण्डे, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम धामी ने चम्पावत को दी ₹74.54 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व प्रसिद्ध माँ पूर्णागिरि मेला-2026 का भव्य शुभारंभ के अवसर पर जनपद चम्पावत के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए कुल 7454.74 लाख (74.54 करोड़ रुपये) की विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर जनता को समर्पित किया।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, जनजातीय कल्याण और पर्यटन को मजबूती देने वाली पाँच प्रमुख योजनाओं का लोकार्पण किया जिसमें चलथी नदी पर दो लेन सेतु टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग पर चलथी नदी के ऊपर ₹5014.00 लाख की लागत से निर्मित 690 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड मोटर सेतु का लोकार्पण, ग्रामीण निर्माण विभाग द्वारा पीएम जनमन योजना के अंतर्गत बुक्सा एवं राजी जनजाति के उत्थान हेतु ग्राम खिरद्वारी में ₹60 लाख की लागत से निर्मित बहुउद्देशीय भवन, ₹659 लाख की लागत से राजकीय पशु प्रजनन फार्म, नरियाल गाँव (चम्पावत) के विकास कार्यों के प्रथम चरण तथा गुरु गोरखधाम में ₹271.39 लाख से विकसित पर्यटक अवस्थापना सुविधाएं तथा श्यामलाताल क्षेत्र को ईको-टूरिज्म हब बनाने हेतु ₹490.94 लाख के लेक फ्रंट डेवलपमेंट कार्यों का लोकार्पण सामिल है।

*₹9.59 करोड़ की 4 योजनाओं का हुआ शिलान्यास*

मुख्यमंत्री द्वारा 959.49 लाख की 04 नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी गई जिसमें चम्पावत विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधायक निधि से स्वीकृत ₹498.50 लाख के विभिन्न जनोपयोगी निर्माण कार्य के साथ ग्रामीण निर्माण विभाग द्वारा तहसील बाराकोट के अनावासीय भवन का निर्माण कार्य (लागत ₹302.50 लाख), मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत ब्रिडकुल (न्दपज पिथौरागढ़) द्वारा एड़ी मेला स्थल, कालूखान का सौंदर्यकरण कार्य (लागत ₹81.50 लाख), नगर पंचायत बनबसा में मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज परिसर में ₹76.90 लाख की लागत से बनने वाले पार्क का शिलान्यास सामिल है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ चम्पावत को एक आदर्श जनपद बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। आज लोकार्पित और शिलान्यास की गई ये योजनाएं स्थानीय स्तर पर रोजगार, पर्यटन और आवागमन की सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगी। माँ पूर्णागिरि का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे और हम उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ें।

सीएम बीरों देवल रुद्रप्रयाग में आयोजित मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में हुए शामिल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड अगस्त्यमुनि के ग्राम बीरों देवल में आयोजित मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में सम्मिलित हुए। उन्होंने मां चंडिका मंदिर पहुंचकर महायज्ञ में भाग लिया तथा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूर्ण विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां चंडिका का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेश की खुशहाली की भी कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मां चंडिका मंदिर प्रांगण एवं मंदिर समूह का पुरातत्व विभाग के माध्यम से पुनर्निर्माण कराये जाने तथा तहसील बसुकेदार में नवीन तहसील भवन निर्माण की घोषणा की

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल को धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगम का प्रतीक बताते हुए कहा कि 20 वर्षों के बाद आयोजित यह महायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि किसी भी देवस्थान पर जाना मात्र संयोग नहीं होता, बल्कि इसे ईश्वरीय आह्वान और आशीर्वाद के रूप में देखना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आयोजन में जनसहभागिता को अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन ही उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं। ये आयोजन न केवल समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और मूल जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सनातन संस्कृति की रक्षा और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने वर्तमान समय को सांस्कृतिक, सामाजिक और सहयोग की दृष्टि से स्वर्णिम काल बताते हुए कहा कि भारत को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति को विशेष सम्मान प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ मंदिर में हुए व्यापक पुनर्निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज ‘दिव्य एवं भव्य केदार’ का स्वरूप सभी के सामने है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार धार्मिक आयोजनों की सफलता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को समृद्ध राज्य बनाने हेतु सरकार निरंतर प्रयासरत है और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूर्णतः संकल्पित है। देवभूमि के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-निरोधक प्रावधानों सहित विभिन्न सख्त कानूनी उपाय लागू किए गए हैं। राज्यभर में 12 हजार से अधिक भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है, जिसे उन्होंने देवभूमि की पवित्रता की रक्षा का अभियान बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड समूचे राष्ट्र में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनकर उभरा है और राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास तथा सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा विकास योजनाओं से संबंधित स्टॉल स्थापित कर आमजन को राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।

इस अवसर पर आशा नौटियाल, विधायक केदारनाथ, द्वारा क्षेत्र की विभिन्न मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री को मांग पत्र भी सौंपा गया। मुख्यमंत्री ने उक्त मांगों पर परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन प्रदान किया।

कार्यक्रम में विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, उपाध्यक्ष रितु नेगी, ब्लॉक प्रमुख अगस्त्यमुनि भुवनेश्वरी देवी, बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण, महिला आयोग उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, महायज्ञ समिति अध्यक्ष डॉ. आशुतोष भंडारी, महासचिव मदन मोहन डिमरी, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर, उप वन संरक्षक रजत सुमन, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

*20 वर्षों बाद आयोजित हो रही है दिवारा यात्रा*

मां चंडिका की दिवारा यात्रा 21 नवम्बर 2025 से प्रारंभ होकर लगभग 26 गांवों के भ्रमण पर रही। यह यात्रा 20 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित की जा रही है। यात्रा के दौरान वीरों देवल, संगूड़, नैणी पौण्डार, क्यार्क बरसूड़ी, पाली, बष्टी, डुंगर, बड़ेथ, पाटियू, भटवाड़ी, जोला, उच्छोला, मथ्यागांव, बक्सीर, भुनालगांव, डांगी, खोड, स्यूर, डडोली, खाटली किमाणा, दानकोट, कौशलपुर, अरखण्ड, डालसिंगी, हाट, नैली कुंड, रयांसू सहित विभिन्न गांवों का भ्रमण किया गया।

यात्रा के अंतर्गत बीरों देवल में 15 फरवरी से 9 दिवसीय महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। 22 फरवरी 2026 को विशाल जलयात्रा आयोजित होगी तथा 24 फरवरी 2026 को पूर्णाहुति के साथ यह महावन्याथ यात्रा सम्पन्न होगी और मां अपने दिव्य स्थल पर विराजमान होंगी।