उत्तराखंड दिवस सम्मेलन में प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों से हो सार्थक संवादः सुधांशु

प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में सचिवालय में प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन-2026 की तैयारियों के संबंध में गठित समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सम्मेलन के सफल आयोजन, व्यापक प्रचार-प्रसार तथा प्रवासी उत्तराखण्डियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।

प्रमुख सचिव ने इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप, युवा-केंद्रित एवं नवाचारपूर्ण स्वरूप में आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि यह आयोजन अपनी विशिष्ट पहचान बना सके। उन्होंने देश के विभिन्न प्रांतों एवं शहरों में रहकर अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे प्रवासी उत्तराखण्डियों को चिह्नित कर सम्मेलन में आमंत्रित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से प्रवासी उत्तराखण्डियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करने तथा राज्य के विकास में उनके अनुभवों, सुझावों एवं योगदान का लाभ लेने के प्रयास किये जाएं।

बैठक में अवगत कराया गया कि तृतीय प्रवासी उत्तराखण्डी दिवस के लिए पंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। सम्मेलन का आयोजन देहरादून स्थित दून विश्वविद्यालय के नित्यानंद ऑडिटोरियम में किया जाएगा। प्रमुख सचिव ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सम्मेलन की विस्तृत रूपरेखा अंतिम रूप से तैयार करने तथा तैयारियों की प्रगति के संबंध में तीन-चार दिन में अपडेट देने के निर्देश दिए।

प्रमुख सचिव ने सम्मेलन के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया, विज्ञापन, होर्डिंग्स एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभावी अभियान चलाने को कहा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर आमंत्रित अतिथियों को चिह्नित करने के साथ ही उनके आवागमन, परिवहन, वाहनों, ठहरने एवं भोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने उद्घाटन सत्र से लेकर विभिन्न सत्रों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि के आयोजन की व्यवस्थाओं को भी समयबद्ध रूप से पूरा करने को कहा।

उन्होंने आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पहुंच मार्गों को व्यवस्थित रखने तथा परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाने के निर्देश दिए। सम्मेलन के दौरान राज्य सरकार के विकास कार्यों, विभिन्न योजनाओं एवं नीतियों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रसारण भी किया जाएगा, जिससे प्रवासी उत्तराखण्डियों को राज्य में हो रहे विकास कार्यों एवं विभिन्न क्षेत्रों में संचालित पहलों की जानकारी मिल सके। प्रमुख सचिव ने इन सभी व्यवस्थाओं के लिए संबंधित विभागों को पत्र प्रेषित कर आपसी समन्वय के साथ सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूर्ण करने के भी निर्देश दिए।

मानव वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण के हर सम्भव प्रयास जारी: प्रमुख वन सचिव

जनपद में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उच्चाधिकारियों को क्षेत्र भ्रमण तथा आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिये गये हैं। इन्हीं निर्देशों के क्रम में प्रमुख वन सचिव आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक तथा आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडेय ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तहसील पौड़ी के गजल्ड गांव का दौरा किया और गुलदार के हमले में मृत राजेन्द्र नौटियाल के परिजनों से भेंट कर शोक संवेदना व्यक्त की। प्रमुख वन सचिव ने प्रभावित परिवार को सांत्वना दी और मुआवजे की अग्रिम राशि का चेक भेंट किया।

प्रमुख सचिव वन ने गजल्ड घटना को लेकर जिला प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा की गई त्वरित कार्यवाही और ग्रामीणों के सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान सरकारी तंत्र और जनसहभागिता के संयुक्त तंत्र और आपसी सहयोग में निहित है।

उन्होंने घटना स्थल का निरीक्षण कर आदमखोर गुलदार के निस्तारण के लिए की जा रही व्यवस्थाओं का जायज़ा लेने के उपरांत सत्यखाल गांव में स्थानीय निवासियों से मुलाकात कर उनकी वन्यजीव संबंधी शिकायतें सुनीं और उन्हें शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।

दौरे के बाद प्रभावित क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने विकास भवन में प्रमुख वन सचिव से भेंट कर मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी न्यूनीकरण हेतु अपने सुझाव प्रस्तुत किये। इनमें क्षेत्र से परिचित स्थानीय निवासियों को निस्तारण दल में शामिल करने, तेंदुए को न्यूट्रलाइज करने हेतु दो निजी शूटरों की अनुमति देने तथा प्री-रिकॉर्डेड ऑडियो संदेशों के माध्यम से जनजागरुकता प्रसारित करने की मांगें शामिल थीं। प्रमुख वन सचिव ने इन बिंदुओं पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये और मौके पर ही सभी महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान सुनिश्चित किया।

इसके उपरांत उन्होंने विकास भवन सभागार में मानव वन्यजीव संघर्ष पर सभी प्रमुख विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में प्रमुख सचिव वन ने निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण हेतु प्रत्येक रेंज स्तर पर नियमित रूप से प्रभागीय दिवस आयोजित किया जायेगा। उन्होंने विभाग को निर्देशित किया कि ‘क्या करें-क्या न करें’ आधारित जनजागरुकता सामग्री तैयार कर शीघ्र वितरित की जाय तथा रेंज एवं वन पंचायत स्तर पर व्हाट्सएप समूहों के साथ-साथ प्रभागीय स्तर पर विभागीय सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग वन्यजीव गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं के प्रसार के लिए किया जाये। उन्होंने प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने के निर्देश भी दिये।

जनपद क्षेत्र में झाड़ी कटान अभियान को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए प्रमुख वन सचिव ने लोक निर्माण विभाग, जिला पंचायत और नगर पालिका को संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिये। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि इस कार्य हेतु अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होगी, तो उसे शासन स्तर से उपलब्ध कराया जायेगा।

आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष एक संवेदनशील विषय है, जिसमें त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ समुदाय का सतत सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय जनसमुदाय मिलकर कार्य करें तो इस चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हमारी प्राथमिकता यही है कि जनजीवन सुरक्षित रहे और हर परिवार को समय पर आवश्यक सहायता एवं संरक्षण मिले।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने स्पष्ट किया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए नियमित चारा व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु पशुपालन विभाग को भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं। साथ ही प्रभावित तथा संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के दृष्टिगत विद्यालय तथा आंगनबाडियों में समय परिवर्तन किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग के साथ मिलकर जागरुकता प्रसार, झाड़ी कटान तथा गुलदार संकट हेतु अन्य न्यूनीकरण उपाय लिए जा रहे हैं।

बैठक एवं क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) रंजन कुमार मिश्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य वन संरक्षक धीरज पांडे, वन संरक्षक आकाश वर्मा, डीएफओ गढ़वाल अभिमन्यु सिंह, डीएफओ लैंसडौन जीवन मोहन दगाड़े, डीएफओ कालागढ़ तरुण एस, अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।