मुख्य सचिव ने प्रदेश में बनाई जा रही पार्किंग्स की प्रगति जानीं

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में प्रदेश में बनायी जा रही विभिन्न प्रकार की पार्किंग की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को पार्किंग निर्माण गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन प्रदेश होने के कारण और लगातार पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से पर्यटकों की संख्या में तेजी से उछाल आया है। इससे प्रदेश के पर्वतीय पर्यटक स्थ्लों में पार्किंग की समस्या भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों में आवश्यकता के अनुरूप छोटी-छोटी एवं ज्यादा संख्या में पार्किंग्स बनायी जानी चाहिए। कहा कि प्रदेश के हित में सबसे किफायती पार्किंग रोडसाईड पार्किंग हैं, जिन्हें रोड से 100-200 मीटर नई सड़क काटकर या सड़क को थोड़ा अधिक चौड़ा करके तैयार किया जा सकता है। यदि इसके लिए जगह उपलब्ध न हो तो अन्य प्रकार की पार्किंग्स पर फोकस किए जाने की आवश्यकता है। मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन को पार्किंग निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा पाक्षिक रूप से किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पार्किंग्स बनाते समय सुरक्षा के प्रबन्धों में किसी प्रकार की लापरवाही न की जाए। उन्होंने कहा कि पार्किंग स्थलों के एंट्री एवं एग्जिट पॉईंट पर डिजाईन में किसी प्रकार की खामियां न हों, जिससे पार्किंग शुरू होने के बाद वह स्थान जाम के लिए नया बोटलनेक न बने। मुख्य सचिव ने टनल पार्किंग की दिशा में भी तेजी से प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टनल पार्किंग पर्वतीय नगरों की जाम की समस्या से निजात दिला सकती है। उन्होंने कैम्पटी में बनायी जा रही प्रदेश की पहली टनल पार्किंग के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके निर्माण में तेजी लाने के लिए इसे स्टेट बजट से फंडिंग की जाएगी। उन्होंने टनल पार्किंग में सुरक्षा, पैदल चलने वालों की सुविधा और डिजाईन पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसकी सफलता के बाद प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों में इस प्रकार की पार्किंग का निर्माण किया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि कैटेगरी ‘ए‘ एवं ‘बी‘ में कुल 169 पार्किंग्स चिन्हित की गई है, जिसमें से 113 की डीपीआर शासन को प्राप्त हो गयी हैं।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु एवं सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सभी विभागों को सितम्बर माह तक 50 प्रतिशत पूंजीगत परिव्यय के लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश

अपर मुख्य सचिव आनंदवर्धन ने सभी विभागों को पूँजीगत परिव्यय में वृद्धि के निर्देश दिए हैं। एसीएस ने राज्य सरकार के सभी विभागों को सितम्बर माह तक 50 प्रतिशत व्यय के लक्ष्य को पूरा करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूँजीगत परिव्यय की नियमित समीक्षा की जाएगी। सचिवालय में पूँजीगत परिव्यय की समीक्षा बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव ने कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पशुपालन विभाग, राज्य सम्पति विभाग, आपदा प्रबन्धन विभाग, न्याय विभाग, मत्सय पालन विभाग, पंचायती राज विभाग, गन्ना विकास विभाग, राजस्व विभाग, कोषागार, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, वित्त विभाग तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा पुलिस एवं कारागार विभाग के पूंजी परिव्यय तथा पूँजीगत योजनाओं की समीक्षा की। इसके साथ ही एसीएस ने विभिन्न विभागों में केन्द्र पोषित योजनाओं (सीएसएस), ईएपी तथा नाबार्ड पोषित योजनाओं के पूंजीगत परिव्यय की भी समीक्षा की।
एसीएस ने सचिव वित्त को निर्देश दिए की जिन विभागों का अपने बजट प्रावधान के सापेक्ष शून्य प्रतिशत जारी राशि तथा परिव्यय रहा है उनकों शीघ्र कार्यवाही हेतु पत्र भेजे जाए। एसीएस ने सभी विभागों को अपने रिलीज बजट तथा परिव्यय का प्रतिमाह का लक्ष्य निर्धारित कर उसे पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
बैठक में सचिव वित्त दिलीप जावलकर, सचिव आपदा प्रबन्धन डा0 रंजीत कुमार सिन्हा, सचिव पशुपालन डा0 बी वी आर सी पुरूषोतम तथा अन्य सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

रोजगार की संभावना को देखते हुए मुख्य सचिव ने जड़ी बूटी उत्पादन पर दिया जोर

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने प्रदेश में जड़ी-बूटी के क्षेत्र में उत्पादन और रोजगार की असीम सम्भावनाओं को देखते हुए इसके विकास के लिए कार्ययोजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने सोमवार को सचिवालय में कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश में जड़ी-बूटी का उत्पादन और मांग को देखते हुए कार्ययोजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि कृषि, उद्यान एवं वन विभाग अपने अपने क्षेत्रों में ऐसी जड़ी-बूटियों को चिन्हित करें जिनकी बाजार में अत्यधिक मांग हैं और उनके उत्पादन और संग्रहण में किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि विभागों को इस के लिए अपनी अपनी भूमिका भी तय करनी होगी। उत्पादन, संग्रहण और बाजार उपलब्ध कराए जाने हेतु प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा। राज्य स्तर पर भी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन होगा। जो जनपद इस दिशा में अच्छा कार्य करेंगे, रैंकिंग कर सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

राजस्व प्राप्तियों के लिए प्रत्येक माह का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश

विभागों को राजस्व प्राप्तियों के लिए प्रत्येक माह का जो लक्ष्य मिला है, सभी विभाग उस लक्ष्य को हासिल करें, तभी राजस्व प्राप्ति का वार्षिक लक्ष्य हासिल कर पायेंगे। राजस्व लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभागों को ऑनलाईन सिस्टम पर और अधिक कार्य करने की जरूरत है। जीएसटी से राजस्व प्राप्तियां और बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए लोगों को बिल लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाए। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में राजस्व प्राप्ति के सम्बंध में बैठक लेते हुए अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किये जाएं। विभागों को इसके लिए आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजस्व वृद्धि के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। जिन क्षेत्रों में अपेक्षा के अनुरूप राजस्व की प्राप्ति नहीं हो पा रही है, इसके कारणों का गहनता से अध्ययन कर उसका उचित समाधान निकाला जाए। पूंजीगत व्यय पर विशेष ध्यान दिया जाए। विभागों को विभिन्न क्षेत्रों में जो पिछले सालों की रिकवरी करनी है, इस दिशा में ध्यान दिया जाए। खनन के क्षेत्र में राजस्व वसूली के लिए मजबूत ऑनलाईन सिस्टम बनाया जाए। वन क्षेत्रान्तर्गत के बरसाती नालों को चिन्हित कर चौनेलाइज करने की दिशा में ध्यान दिया जाए। वन सम्पदाओं के बेहतर उपयोग की दिशा में वन विभाग को और सुनियोजित तरीके से कार्य करने की जरूरत है। वन सम्पदा के बेहतर उपयोग के लिए क्या नवाचार हो सकते हैं, इस दिशा में कार्य किये जाएं। वन पंचायतों के माध्यम से मेडिसिनल प्लांट के क्षेत्र में कार्य किये जाएं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में यूपीसीएल एवं यूजेवीएनल को राजस्व बढ़ाने की जरूरत है। बिजली चोरी को पूर्णतया रोकने के लिए कारगर प्रयासों की जरूरत हैं। इसके लिए सूचना आधारित प्रणाली और विकसित करने पर ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति की समीक्षा हर माह की जायेगी।
बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, दिलीप जावलकर, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, एच.सी. सेमवाल, विनोद रतूड़ी एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

जन सुविधा से जुड़े सभी विभागों को एक अम्ब्रेला में लाया जाए-धामी

जन सेवाओं से जुड़े मामलों में ऑनलाईन प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर ध्यान दिया जाए। लोगों को एक ही प्लेटफॉर्म पर पर सभी सुविधाएं आसानी से मिले, इसके लिए जन सुविधा से जुड़े सभी विभागों को एक अम्ब्रेला में लाया जाए। सेवा के अधिकार में अधिक से अधिक सेवाएं जोड़ी जाएं। तकनीक का विकास जिस तेजी से हो रहा है, सेवाओं का लाभ आम जनमानस को तेजी से मिले, इसके लिए उनको जागरूक भी किया जाए। ऑनलाईन प्रक्रियाओं के तहत जो भी सेवाएं दी जा रही हैं, इन सेवाओं का व्यापक स्तर पर आम जन तक प्रसार भी किया जाए। राज्य में युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर मिले, रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में सभी विभागों को तेजी से कार्य करने होंगे। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए उच्च शिक्षा एवं तकनीकि शिक्षा विभाग को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उच्च शिक्षा के साथ-साथ युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। हमें युवाओं को रोजगार परक शिक्षा की दिशा में आगे ले जाने के लिए तेजी से कार्य करना है। मुख्यमंत्री ने ये निर्देश सचिवालय में सशक्त उत्तराखण्ड-25 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आईटीडीए एवं उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये।
आईटीडीए की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सेवा के अधिकार में और जन सेवाओं को जोड़ा जाए। लोगों को घर बैठे ही अधिकांश सेवाओं का लाभ आसानी से एक ही प्लेटफार्म से मिल जाए, इस दिशा में कार्य किया जाए। राज्य के जिन क्षेत्रों में मोबाईल कनेक्टिविटी की अभी भी समस्या है, उनका जल्द समाधान हो, इस दिशा में तेजी से कार्य किये जाएं। विभिन्न सरकारी योजनाओं का आम जन को पूरा लाभ मिले, इसके लिए ऐसा सिस्टम विकसित किया जाए कि लोगों को उनकी पात्रता के अनुसार एक क्लिक पर सारी जानकारी उपलब्ध हो सके। विभागों द्वारा भविष्य की आवश्यकताओं को देखकर दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जाएं।
उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि भारत सरकार द्वारा सहायतित योजनाओं में तेजी से कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के अनेक संभावनाएं हैं, युवाओं को कौशल विकास के साथ ही अधिक से अधिक रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने पर ध्यान दिया जाए। राज्य में अधिक से अधिक औद्योगिक गतिविधियां हों, बाहर से निवेशक आयें, इस दिशा में तेजी से प्रयास करना हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न विभागों के जो बड़े प्रोजक्ट तेजी से आगे नहीं बढ़ रहे हैं, उनकी जल्द समीक्षा की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी भूमि का सही तरीके से उपयोग हो, इसके लिए जो भी कार्य किये जाएं, वे मास्टर प्लान के तहत ही हों। उन्होंने कहा कि मसूरी एवं नैनीताल में पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। हमें ऐसी व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा कि पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को अधिक जाम की स्थिति से न गुजरना पड़े।
बैठक में जानकारी दी गई कि अपणि सरकार पोर्टल के माध्यम से 485 सेवाएं लोगों तक पहुचाई जा रही है। जिसमें से 265 सेवाएं सेवा के अधिकार में ली गई है। सेवा के अधिकार में और सेवाओं को जोड़ने के लिए कार्य किया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आय के संसाधन बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता एवं कौशल विकास की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। उद्योग विभाग द्वारा स्वरोजगार की योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। स्वरोजगार की ओर लोगों का रूझान तेजी से बढ़ रहा है। एमसएमई के तहत भी अनेक कार्य किये जा रहे हैं।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, अपर सचिव विजय कुमार जोगदण्डे, महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा, निदेशक आई.टी.डी.ए नितिका खण्डेलवाल, अपर सचिव नवनीत पाण्डे, मनोज पंत एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

क्लस्टर विद्यालयों में जरुरत के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के साथ क्लस्टर विद्यालय के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत संचालित क्लस्टर विद्यालय शिक्षण अधिगम को गुणवत्तापरक एवं रूचिकर बनाने के उद्देश्य से पठन-पाठन से सम्बन्धित मूलभूत सुविधायें विकसित कर उत्कृष्ट शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि इन क्लस्टर विद्यालयों में समुचित मात्रा में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्कूल के लिए आने वाले समय में अधिकतम छात्र संख्या के अनुरूप मास्टर प्लान तैयार किया जाए। क्लस्टर स्कूल में समुचित अध्यापक, कक्षाकक्ष, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब और अन्य प्रयोगशालाओं आदि की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों में छात्रों के लिए आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन कर उन्हें छात्रों को आवागमन का किराया किस रूप में देना है इसके लिए भी अधिकृत किया जाए। इस समिति में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक आदि सम्बन्धित सभी विभागों का प्रतिनिधित्व रखा जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसे स्कूल, जो अत्यधिक दूर हैं और बच्चे इतने दूर आना जाना नहीं कर सकते, के लिए आवासीय स्कूलों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि आवासीय स्कूलों को पर्वतीय जनपदों के छोटे शहरों में खोला जा सकता है। ऐसे में उन आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों को अपने परिवार के साथ रहने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में एक नहीं बल्कि 5 से 7 आवासीय विद्यालय होने चाहिए। वर्तमान में संचालित आवासीय विद्यालयों में हॉस्टल की सुविधा को और बढ़ाया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध हो इसके लिए अच्छे सुझावों को लगातार अपनाने की आवश्यकता है।
सचिव रविनाथ रमन ने बताया कि प्रदेशभर में माध्यमिक स्तर पर कुल 559 विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार प्राथमिक में 603 और पूर्व माध्यमिक में 76 विद्यालयों को चिन्हित किया गया है। सभी विद्यालयों के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है।
इस अवसर पर महानिदेशक माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा बंशीधर तिवारी, अपर सचिव शिक्षा योगेन्द्र यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

धामी ने सैन्यधाम के निर्माण में तेजी लाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सैन्यधाम के निर्माण कार्यों में और तेजी लाई जाए। सैन्य धाम का स्वरूप भव्य एवं दिव्य हो, इसके लिए अन्य राज्यों के सैन्य धामों (शौर्य स्थलों) की जो स्टडी की गई है, उनमें जो बेहतर कार्य किये गये हैं, उन कार्यों का समावेश सैन्य धाम में किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सैन्यधाम में उत्तराखण्ड की झलक दिखे। सैन्यधाम के आसपास केदारखण्ड एवं मानसखण्ड की थीम पर आधारित क्या गतिविधियां हो सकती हैं, इस पर भी ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सचिवालय में सैन्य धाम (शौर्य स्थल) की उच्च स्तरीय बैठक के दौरान ये निर्देश अधिकारियों को दिये।
बैठक में जानकारी दी गई कि सैन्यधाम के निर्माण की कार्य प्रगति 45 प्रतिशत तक हो चुकी है। जिसके अन्तर्गत ऑडिटोरियम, टैंक प्लेटफॉर्म, मुख्य द्वार, बाबा जसवंत सिंह एवं बाबा हरभजन सिंह मन्दिर, शौर्य स्तम्भ, बुकिंग काउंटर, चाहरदीवारी एवं म्यूजियम का कार्य प्रगति पर है।
बैठक में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधू, जी.ओ.सी उत्तराखण्ड सब-एरिया मेजर जनरल संजीव खत्री, मेजर जनरल सम्मी सभरवाल (से.नि) सचिव सैनिक कल्याण दीपेन्द्र चौधरी, एस.एन. पाण्डेय, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रदेश में हो रही लगातार बारिश के दृष्टिगत अधिकारियों को दिये सतर्क रहने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को देर सायं सचिवालय स्थित आपदा प्रबंधन केंद्र पहुंचे। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हो रही वर्षा से उत्पन्न स्थिति का अधिकारियों के साथ समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश देने के साथ ही सचिव आपदा प्रबंधन को सभी जिलाधिकारियों से समन्वय बनाने को कहा। जिलाधिकारियों को उनकी जरूरत के अधार पर सहायता उपलब्ध करायी जाय। जनपदों में सड़कों की आवश्यक मरम्मत में भी तेजी लायी जाय। चारधाम यात्रा के दृष्टिगत सभी व्यवस्थायें समय पर सुनिश्चित किये जाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिये आवश्यक व्यवस्थायें समय पर की जानी होगी। इस संबंध में उन्होंने स्वयं भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा भी पूरे सहयोग का आश्वासन दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वर्षा के कारण किसानों को हुए नुकसान के आकलन के निर्देश कृषि विभाग को दिये गये हैं। किसानों की जो भी मदद जरूरी होगी वह की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जोशीमठ सहित अन्य क्षेत्रों की वर्षा के दृष्टिगत निरंतर समीक्षा कर अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। उन्होंने अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश देते हुए कहा कि भूकम्प के अलावा ज्यादातर आपदाएं बरसात के मौसम में ही घटित होती रही हैं, परन्तु पिछले कुछ वर्षों में आपदाएं हर मौसम में आ रही हैं। इसको देखते हुये राज्य को आपदाओं का सामना करने के लिये विशेष तैयारी की आवश्यकता है। जागरूकता और पूर्व चेतावनी से आपदाओं से होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी चारधाम में गत वर्ष की अपेक्षा अधिक लोगों के आने के दृष्टिगत सभी व्यवस्थायें दिसम्बर-जनवरी से आरंभ कर दी गई थी। स्वयं उन्होंने चार बैठकें कर समीक्षा की है। यात्रा सुगमता व सुरक्षित हो इसके लिये सभी आवश्यक व्यवस्थायें की जा रही हैं।
सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा ने मुख्यमंत्री को प्रदेश में वर्षा से उत्पन्न स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्षा के कारण कोई जनहानि नहीं हुई है। सड़क दुर्घटनाओं में टिहरी में दो लोगों की मृत्यु हुई है जबकि मसूरी में पार्किंग की दीवार गिरने से 4 वाहन क्षत्रिग्रस्त हुए हैं तथा नैनीताल के रामनगर में बस के नदी के बहाव में आने से सवारियों को सुरक्षित बचा लिया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी में आकाशीय बिजली गिरने से भेड़ बकरियों के नुकसान का मुआवजा वितरित कर दिया गया है।
इस अवसर पर अपर सचिव आपदा प्रबंधन सविन बंसल, रिद्विम अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मसूरी के सौंदर्यीकरण कार्य को पर्यटन सीजन से पहले पूरा करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में मसूरी पेयजल एवं सीवर लाइन सहित मसूरी के सौंदर्यीकरण एवं विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले मसूरी के सौंदर्यीकरण कार्यों को पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि विद्युत लाइनों एवं अन्य केबलों को अंडरग्राउंड करने के साथ ही मॉल रोड के पक्कीकरण का कार्य 20 अप्रैल तक पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि टॉयलेट्स आदि का निर्माण भी समय से पूरा कर लिया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि मसूरी पेयजल लाइन की टेस्टिंग का कार्य मार्च अंत तक पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल लाइन निर्माण कार्य समय से पूर्ण करने हेतु 2 शिफ्टों में कराया जाए। गर्मियों में पानी की समस्या को देखते हुए इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सीवर लाइन के निर्माण में भी तेजी लाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी एवं अपर सचिव पेयजल उदयराज सिंह सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

राजस्व प्राप्ति की समीक्षा में सीएम ने अधिकारियों को दिये निर्देश

विभागों द्वारा लक्ष्य के सापेक्ष अधिक से अधिक राजस्व प्राप्ति के प्रयास किये जाएं। विभिन्न विभागों एवं राजस्व बढ़ाने के लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस का भी गहनता से अध्ययन किया जाए। जिन विभागों का लक्ष्य के हिसाब से राजस्व प्राप्ति कम है, इसके कारणों का गहनता से अध्ययन किया जाए, जहां पॉलिसी में सुधार की आवश्यकता है, वो करवाई जाए। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए अप्रैल में राजस्व लक्ष्य प्राप्ति के सबंध में बैठक की जायेगी। जिसमें सभी विभाग लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपनी पूरी योजना बतायेंगे। जिन विभागों का अभी लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति कम है, मुख्यमंत्री ने उन विभागों के सचिवों को निर्देश दिये कि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक इसको अधिक से अधिक बढ़ाने के प्रयास किये जाएं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि ऊर्जा, खनन एवं वन विभाग में राजस्व प्राप्ति बढ़ाने के लिए विभागों को विशेष प्रयासों की जरूरत है। विभागीय सचिव राजस्व बढ़ाने के लिए इसकी नियमित समीक्षा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्राप्ति को बढ़ाने के लिए विभागों को ऑनलाईन सिस्टम पर अधिक ध्यान देना होगा। ऑनलाईन व्यवस्थाओं से जहां सबको कार्य करने में सुविधा होती है, वहीं सिस्टम पारदर्शी भी होता है। आधुनिक तकनीक के प्रयोग पर अधिक ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति में कठिनाई आ रही है, इन समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय सचिवों को ही रास्ता निकालना है। किसी भी समस्या के समाधान के लिए जब पूरा विश्लेषण होता है तो उसका समाधान अवश्य निकलता है।
बैठक में जानकारी दी गई कि राजस्व प्राप्ति के मुख्य स्रोत में एसजीएसटी, नोन-जीएसटी, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन फीस,परिवहन, स्टेट एक्साइज ड्यूटी में लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति की स्थिति अच्छी है। ऊर्जा, वन एवं खनन में लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति में और प्रयासों की जरूरत है।
बैठक में वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, दिलीप जावलकर, अरविन्द सिंह ह्यांकी, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, एच.सी. सेमवाल, बृजेश कुमार संत, प्रमुख वन संरक्षक विनोद कुमार सिंघल, अपर सचिव गण एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।