रतूड़ा में 48.84 करोड़ रूपए से बनेगा भव्य राज्य अतिथि गृह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य की सरकारी परिसंपत्तियों को आधुनिक, उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप देने की दिशा में राज्य संपत्ति विभाग ने अपनी कार्ययोजनाओं को गति दी है। सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई दो महत्वपूर्ण बैठकों में जहां रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में प्रस्तावित भव्य राज्य अतिथि गृह की निर्माण कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई, वहीं देहरादून के रेसकोर्स स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में 48 नए श्रेणी-3 आवासों के निर्माण की योजना पर भी मंथन हुआ। दोनों परियोजनाओं में एक बात समान रूप से सामने आई, सरकारी भवन केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक सुविधाओं, बेहतर डिजाइन, पर्यावरणीय मानकों और दीर्घकालिक उपयोगिता के मॉडल बनें।

रुद्रप्रयाग के रतूड़ा में बनने वाले राज्य अतिथि गृह के लिए तैयार किए गए ₹4884.20 लाख यानी करीब ₹48.84 करोड़ के विस्तृत आगणन की सचिव राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा की। प्रस्तावित अतिथि गृह को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सचिव ने निर्देश दिए कि अतिथि गृह का कॉन्फ्रेंस हॉल आधुनिक सुविधाओं से लैस होना चाहिए। इसमें मजबूत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था, बड़े आकार के फ्लैट टीवी और अन्य आवश्यक तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि महत्वपूर्ण बैठकों और प्रशासनिक संवाद के लिए आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हों। इससे पर्वतीय क्षेत्र में स्थित राज्य अतिथि गृह को महज आवासीय सुविधा के बजाय प्रशासनिक एवं संवाद केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा भी मजबूत होगी।

निर्माण में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी नहीं
रतूड़ा परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। सचिव ने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों के अनुरूप निर्माण स्थल की नदी से न्यूनतम 200 मीटर दूरी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही नियमानुसार प्रमाण-पत्र को अभिलेखों में संलग्न करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी परियोजना की भव्यता के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य अतिथि गृह के प्रस्तावित स्वरूप के अनुरूप मुख्य प्रवेश द्वार और केंद्रीय भवन पर आकर्षक एवं बड़े आकार का लोगो स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि परिसर की पहचान और स्वरूप दोनों प्रभावी नजर आएं।

सरकारी आवासों में आधुनिकता के साथ हरित सोच
दूसरी ओर, देहरादून के रेसकोर्स स्थित ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी में पुराने जर्जर भवनों को हटाने के बाद रिक्त भूमि के उपयोग की योजना तैयार की गई है। यहां ₹2807.21 लाख यानी करीब ₹28.07 करोड़ की लागत से 48 नए श्रेणी-3 आवासीय भवन बनाए जाने प्रस्तावित हैं। परियोजना का उद्देश्य सरकारी कार्मिकों की आवासीय आवश्यकताओं को पूरा करना है। लेकिन इस योजना में भी सिर्फ भवन निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी गई है। सचिव ने निर्देश दिए कि भवनों के बाहरी हिस्से में ऐसी निर्माण सामग्री और फिनिशिंग का इस्तेमाल किया जाए, जिसकी अनुरक्षण लागत कम हो और बार-बार मरम्मत की आवश्यकता न पड़े। यानी निर्माण के साथ भविष्य के रखरखाव पर होने वाले सरकारी खर्च को भी ध्यान में रखा गया है।

ग्रीन बिल्डिंग और रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनेगी पहचान
रेसकोर्स आवासीय परियोजना में ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पूर्ण पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। जल संरक्षण के लिए अनिवार्य रूप से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। यह पहल सरकारी आवासीय परिसरों को पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने के साथ-साथ जल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। साथ ही प्रत्येक कॉलोनी के बाहर उसका नाम स्पष्ट और आकर्षक रूप में प्रदर्शित करने के लिए अलग-अलग डिजाइन और फॉर्मेट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

पहाड़ से मैदान तक एक जैसी प्राथमिकता
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के दिशा निर्देशों में राज्य संपत्ति विभाग सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों को केवल निर्माण परियोजना के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि उन्हें आधुनिक सुविधाओं, पर्यावरणीय संतुलन, कम रखरखाव लागत और बेहतर उपयोगिता के आधार पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एक ओर रतूड़ा में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह पर्वतीय क्षेत्र में आधुनिक प्रशासनिक सुविधाओं का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर देहरादून का रेसकोर्स सरकारी कार्मिकों के लिए व्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल आवासीय परिसर की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विकास की व्यापक सोच के अनुरूप इन परियोजनाओं में आधुनिकता और पर्यावरण का संतुलन दिखाई देता है। आने वाले समय में इन योजनाओं का धरातल पर आकार लेना राज्य की सरकारी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

स्थानीय वास्तुशैली के साथ विकास को नई दिशा रू डॉ. आर. राजेश कुमार
सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्रदेश में आवासीय एवं राज्य संपत्ति से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक परियोजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित हो। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों में स्थानीय वास्तुशैली को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जनता को योजनाओं का शीघ्र लाभ मिल सके।

धामी सरकार की बागेश्वर को बड़ी सौगात, पहाड़ की पहचान से सजेगा राज्य अतिथि गृह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के विकास और निर्माण कार्यों को गुणवत्ता एवं उपयोगिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह के निर्माण कार्य की समीक्षा की। सचिव की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य अतिथि गृह निर्माण कार्य योजना के ₹1930.11 लाख के संस्तुत विस्तृत आगणन पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली में बनेगा भवन
बैठक में कार्यदायी संस्था प्रान्तीय खंड, लोक निर्माण विभाग, बागेश्वर की ओर से प्रस्तावित कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन आकर्षक स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली पर आधारित होना चाहिए, ताकि भवन अपनी उपयोगिता के साथ बागेश्वर की स्थानीय पहचान और वास्तुकला को भी प्रदर्शित करे। सचिव ने भवन के प्रवेश द्वार और मुख्य भवन पर राज्य अतिथि गृह का लोगो एवं साइनेज आकर्षक, स्पष्ट और प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सरकारी भवनों के निर्माण में आधुनिक सुविधाओं के साथ स्थानीय परिवेश और वास्तुशैली का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

डोरमेट्री में 20 लोगों की क्षमता
बैठक में अतिथि गृह में प्रस्तावित डोरमेट्री कक्ष की क्षमता को लेकर भी निर्देश दिए गए। सचिव ने डोरमेट्री कक्ष को 20 व्यक्तियों के अनुरूप विकसित करने को कहा। साथ ही उपलब्ध अतिरिक्त क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग करते हुए उसमें एक स्टोर कक्ष प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए। इससे भवन की उपयोगिता और व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकेगा। सचिव ने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि बैठक में दिए गए सभी सुझावों और आवश्यक संशोधनों को कार्ययोजना में शामिल किया जाए। संशोधित प्रस्ताव तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि निर्माण कार्य को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रुहेला, संयुक्त सचिव राज्य संपत्ति विभाग सुरेंद्र सिंह रावत, नियोजन विभाग के प्रतिनिधि अयाज अहमद तथा कार्यदायी संस्था की ओर से अधिशासी अभियंता ऋषिराज वर्मा उपस्थित रहे। अधिकारियों ने प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं उपयोगिता पक्षों पर चर्चा की।

डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जा रही है। बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन केवल एक सरकारी आवासीय सुविधा तक सीमित न रहे, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय पहचान और पहाड़ी वास्तुशैली को भी प्रदर्शित करे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन में आने वाले अतिथियों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ उपलब्ध भूमि और क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। डोरमेट्री की क्षमता 20 व्यक्तियों के अनुरूप रखने और अतिरिक्त क्षेत्र में स्टोर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में दिए गए सभी सुझावों को कार्ययोजना में शामिल कर संशोधित रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिए गए हैं।

रुद्रपुर में खेल सुविधाओं को मिलेगा नया विस्तार, युवाओं को फुटबॉल बैडमिंटन समेत कई खेलों के लिए मिलेगा बेहतर प्लेटफॉर्म

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में जनहित से जुड़ी विकास योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने की कवायद जारी है। इसी क्रम में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आज राज्य सचिवालय में दो महत्वपूर्ण बैठकें संपन्न हुईं। बैठकों में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें रुद्रपुर के मोदी मैदान में अत्याधुनिक इंडोर एवं आउटडोर स्टेडियम के निर्माण तथा हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों के सुधार से जुड़े फैसले प्रमुख हैं। मोदी मैदान स्टेडियम के लिए 23.32 करोड़ रुपये की लागत को औचित्यपूर्ण पाया गया है, जबकि हल्द्वानी-काठगोदाम की सड़कों के लिए 15 करोड़ रुपये की धनराशि अवस्थापना विकास निधि से प्रस्तावित है।

मोदी मैदान में बनेगा अत्याधुनिक स्टेडियम

मुख्यमंत्री घोषणा के तहत रुद्रपुर के मोदी मैदान में इंडोर एवं आउटडोर स्टेडियम का निर्माण किया जाना है। घोषणा के क्रियान्वयन के लिए पूर्व में खेल विभाग को आवंटित स्थान को आवास विभाग के नाम स्थानांतरित किया गया है। परियोजना के लिए उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।

23.32 करोड़ का आगणन हुआ औचित्यपूर्ण

उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, ऊधमसिंहनगर की ओर से स्टेडियम के निर्माण के लिए 2374.56 लाख रुपये का आगणन तैयार किया गया था। नियोजन विभाग के टीओसी परीक्षण के बाद 2332.05 लाख रुपये यानी करीब 23.32 करोड़ रुपये की धनराशि को औचित्यपूर्ण पाया गया है। इससे परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

8.594 हेक्टेयर में विकसित होगा परिसर

प्रस्तावित स्टेडियम मोदी मैदान के विस्तृत क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। कुल 9.1915 हेक्टेयर भूमि में से करीब 8.594 हेक्टेयर क्षेत्र में स्टेडियम परियोजना प्रस्तावित है। मैदान के दो ओर सड़कें होने से यहां आवागमन की सुविधा भी बेहतर रहेगी। स्टेडियम को खेल गतिविधियों के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य बड़े आयोजनों के लिए भी उपयोगी बनाया जा सकेगा।

खिलाड़ियों को मिलेगा बेहतर प्लेटफॉर्म

इंडोर और आउटडोर सुविधाओं से स्थानीय युवाओं को फुटबॉल, वालीबॉल, बैडमिंटन समेत विभिन्न खेलों में अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर मंच मिलेगा। रुद्रपुर की पहचान अब औद्योगिक नगरी के साथ खेल प्रतिभाओं के केंद्र के रूप में भी विकसित करने की दिशा में यह परियोजना अहम मानी जा रही है।

हल्द्वानी-काठगोदाम में 15 करोड़ से सुधरेंगी सड़कें

दूसरे महत्वपूर्ण फैसले में मुख्यमंत्री घोषणा के तहत हल्द्वानी- काठगोदाम नगर निगम क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये की धनराशि अवस्थापना विकास निधि से स्वीकृत किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय के 8 अगस्त 2025 के पत्र के माध्यम से घोषणा के क्रियान्वयन की कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए गए थे। लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित करने का निर्णय लिया गया है। इससे सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

शहरवासियों को मिलेगी राहत

हल्द्वानी-काठगोदाम कुमाऊं का प्रमुख शहरी और व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण और सुधार से स्थानीय नागरिकों, वाहन चालकों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। 15 करोड़ रुपये की प्रस्तावित राशि से सड़क अधोसंरचना को बेहतर बनाने के कार्यों को गति मिलेगी।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में आवास और अवस्थापना विकास से जुड़ी घोषणाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। रुद्रपुर के मोदी मैदान में प्रस्तावित इंडोर एवं आउटडोर स्टेडियम युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है। वहीं हल्द्वानी-काठगोदाम क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण के लिए 15 करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री घोषणा के क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। हमारा प्रयास है कि शासन स्तर से लिए गए निर्णयों का समयबद्ध और प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित हो। दोनों परियोजनाएं संबंधित क्षेत्रों के विकास, जनसुविधाओं और बेहतर अवस्थापना के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

धामी सरकार की पहल, सर्किट हाउस एनेक्सी का होगा कायाकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व मुख्य सचिव के दिशा-निर्देशों में राज्य की अतिथि सुविधाओं को आधुनिक और आकर्षक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसी क्रम में गुरुवार को राज्य अतिथि गृह सर्किट हाउस एनेक्सी, देहरादून में नवीनीकरण कार्य को लेकर स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण की अध्यक्षता आवास व राज्य संपत्ति सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने की। इस दौरान उन्होंने नवीनीकरण की प्रस्तावित योजना का गहन अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

*लोकसंस्कृति के साथ विकसित होगा आधुनिक गेस्ट हाउस*
निरीक्षण के दौरान यह तय किया गया कि सर्किट हाउस एनेक्सी को केवल मरम्मत तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय के रूप में विकसित किया जाएगा। विशेष रूप से मीटिंग हॉल के संपूर्ण नवीनीकरण के साथ उसकी दीवारों पर राज्य की लोक संस्कृति को दर्शाने वाली पेंटिंग्स लगाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यहां आने वाले अतिथियों को प्रदेश की समृद्ध परंपरा की झलक मिल सके।

*पहले चरण में कमरों और डोरमैट्री का होगा कायाकल्प*
नवीनीकरण कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। प्रथम चरण में मुख्य भवन के कक्ष संख्या 1 से 12 तक (भूतल के 1 से 6 और प्रथम तल के 7 से 12) का कायाकल्प किया जाएगा। इसके साथ ही डोरमैट्री के भूतल पर स्थित कक्ष संख्या 19 से 22 तक के चार कमरों का भी नवीनीकरण किया जाएगा। इन कमरों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के साथ उनकी आंतरिक साज-सज्जा को भी बेहतर बनाया जाएगा।

*कोरिडोर लाइटिंग और लॉन क्षेत्र में खुलापन बढ़ाने के निर्देश*
आवास व राज्य संपत्ति सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कोरिडोर में बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि आवागमन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही डोरमैट्री के कक्षों से सटे लॉन क्षेत्र में खुलापन बढ़ाने के लिए बाउंड्री हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

*दूसरे चरण में विस्तार और नई सुविधाओं पर फोकस*
द्वितीय चरण में गेस्ट हाउस परिसर में उपलब्ध स्थान का उपयोग करते हुए इसके विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, गेस्ट हाउस में ठहरने वाले अतिथियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नए गद्दों की खरीद और प्रत्येक कक्ष में डीटीएच कनेक्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर अपर सचिव लक्ष्मण सिंह, मुख्य व्यवस्थाधिकारी आलोक सिंह चौहान, वरिष्ठ व्यवस्थाधिकारी पी.एल. शाह तथा पेयजल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश चंद्र तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आवास व राज्य संपत्ति सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य के अतिथि गृहों को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में कार्य तेजी से किया जा रहा है। सर्किट हाउस एनेक्सी का नवीनीकरण केवल संरचनात्मक सुधार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से सभी कक्षों का कायाकल्प किया जाएगा और अतिथियों को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, भविष्य में गेस्ट हाउस के विस्तार की भी योजना है, जिससे बढ़ती आवश्यकता को पूरा किया जा सके।

गौचर-कर्णप्रयाग-चमोली में पार्किंग परियोजनाओं का सचिव आवास ने किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर चारधाम यात्रा मार्ग पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में आवास विभाग के सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने जनपद चमोली के गौचर, कर्णप्रयाग और चमोली में निर्माणाधीन तथा प्रस्तावित पार्किंग परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की और सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्राथमिकता के अनुरूप चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

*गौचर में पार्किंग निर्माण पूरा, संचालन जल्द*
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सचिव डॉ आर राजेश कुमार को बताया कि गौचर में पार्किंग का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इस पार्किंग की वाहन क्षमता 27 वाहनों की है और इसका निर्माण उत्तराखंड पेयजल एवं निर्माण निगम द्वारा कराया गया है। सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस पार्किंग को जल्द से जल्द संचालन के लिए तैयार किया जाए ताकि स्थानीय लोगों और यात्रियों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान ऐसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण पार्किंग स्थल यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

*नंदा राजजात यात्रा से पहले कर्णप्रयाग पार्किंग पूरी करने के निर्देश*
इसके बाद सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कर्णप्रयाग में निर्माणाधीन पार्किंग परियोजना का निरीक्षण किया। इस पार्किंग का निर्माण जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, चमोली द्वारा कराया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने निर्माण कार्यों की गति तेज करने के निर्देश देते हुए कहा कि आगामी नंदा राजजात यात्रा से पहले इस पार्किंग का निर्माण हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और उस समय यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था बेहद जरूरी है।

*चमोली में दो नई पार्किंग से मिलेगी राहत*
इसी क्रम में सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने चमोली में टैक्सी स्टैंड के समीप स्थित पार्किंग और खड्ड साइड स्थित पार्किंग स्थल का भी निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि टैक्सी स्टैंड के पास बनने वाली पार्किंग की क्षमता 21 वाहनों की है, जबकि खड्ड साइड स्थित पार्किंग की क्षमता 82 वाहनों की होगी। इन दोनों पार्किंग स्थलों का निर्माण ग्रामीण निर्माण विभाग द्वारा कराया जा रहा है। सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए ताकि आगामी चारधाम यात्रा से पहले इन पार्किंग स्थलों को श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के लिए संचालित किया जा सके।

निरीक्षण के दौरान सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने चारधाम यात्रा मार्ग पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग पर ऐसे स्थानों को चिन्हित किया जाए जहां अक्सर जाम की समस्या उत्पन्न होती है। उन स्थानों के समीप उपयुक्त भूमि का चयन कर नई पार्किंग विकसित की जाए ताकि भविष्य में चारधाम यात्रा मार्ग पर लगने वाले जाम की समस्या का प्रभावी समाधान किया जा सके।

*आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार का बयान*
आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में चारधाम यात्रा मार्ग पर यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं, ऐसे में पार्किंग और ट्रैफिक प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है। डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि गौचर, कर्णप्रयाग और चमोली में विकसित की जा रही पार्किंग परियोजनाएं स्थानीय यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आगामी चारधाम यात्रा और नंदा राजजात जैसे बड़े आयोजनों के दौरान यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम मार्ग पर ऐसे स्थानों की पहचान की जाए जहां जाम की समस्या अधिक रहती है और वहां नई पार्किंग विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए। इससे भविष्य में यातायात प्रबंधन को और अधिक सुगम बनाया जा सकेगा।